Category: बिज़नेस

  • एडवेंचर लवर्स के लिए खुशखबरी! Royal Enfield ला रही नई Himalayan 440, इस दिन होगी लॉन्च

    एडवेंचर लवर्स के लिए खुशखबरी! Royal Enfield ला रही नई Himalayan 440, इस दिन होगी लॉन्च

     नई दिल्ली
    एडवेंचर लवर्स के लिए रॉयल एनफील्ड ने एक बड़ा ऐलान किया है. कंपनी अपनी नई बाइक को लेकर आ रही है, जिसे आप मुश्किल रास्तों पर चला सकते हैं. हम बात कर रहे हैं रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 (Royal Enfield Himalayan 440) की, जो नए इंजन के साथ आने वाली है। 

    ये बाइक हिमालयन 411 ही होगी, जिसमें एलएस 440 इंजन मिलेगा. ये इंजन स्क्रैम 440 में आता है. यानी रॉयल एनफील्ड हिमालयन 450 से नीचे एक और एडवेंचर बाइक जोड़ेगी. मौजूदा हिमालयन में नया और ज्यादा कटिंग-एज वाला शेरपा 450 लिक्विड कूल्ड इंजन मिलता है। 

    कब लॉन्च होगी नई बाइक?
    रॉयल एनफील्ड ने हिमालयन 440 की तारीखों का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बाइक को टीज किया है. ये बाइक 4 सितंबर 2026 को लॉन्च होगी. इसमें लॉन्ग स्ट्रोक इंजन मिलेगा, जो हिमालयन पोर्टफोलियो में रिलैक्स राइडिंग कैरेक्टर को जोड़ेगा। 

    कंपनी ने हिमालयन 411 को रिप्लेस करके जब 450 को लॉन्च किया था, तब कंपनी ने इसमें इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और फीचर्स में अपडेट्स किए थे. ये कंपनी की पहली बाइक थी, जिसमें यूएसडी फोर्क्स (मतलब अपसाइड डाउन फोर्क्स), डीओएचसी 4वी हेड, लिक्विड कूलिंग, इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल, टीएफटी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, गूगल मैप्स मिररिंग जैसे फीचर्स दिए गए। 

    क्या होगा बाइक में खास? 
    रॉयल एनफील्ड के जारी टीजर में बाइक की शैडो दिख रही है, जो बता रही है कि ये एक एडवेंचर बाइक होगी. इसका डिजाइन स्क्रैम 440 से काफी प्रेरित नजर आएगा. अपकमिंग बाइक में हमें हिमायलन 411 वाला ही फ्यूल टैंक, विंडशिल्ड, अपराइट हैंडलबार और इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर देखने को मिल सकता है। 

    इसके अलावा अपकमिंग बाइक में हमें 21 इंच के फ्रंट वील मिलेंगे. डुअल चैनल एबीएस के साथ फ्रंट और रियर दोनों ही डिस्क ब्रेक होंगे. इसमें हिमालयन 450 वाला ही टीएफटी डिस्प्ले मिलेगा, जो गूगल मैप मिररिंग के साथ आता है. बाइक में 443 सीसी का सिंगल सिलेंडर इंजन मिलेगा, जो 25.4 बीएचपी की पावर और 35 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करेगा। 

  • नई BMW X1 LWB की बुकिंग शुरू, 21 अगस्त को भारत में होगी लॉन्च; बढ़ेगा स्पेस और कंफर्ट

    नई BMW X1 LWB की बुकिंग शुरू, 21 अगस्त को भारत में होगी लॉन्च; बढ़ेगा स्पेस और कंफर्ट

    मुंबई 

    जर्मन कार कंपनी BMW भारतीय बाजार में अपनी नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस (LWB) को लॉन्च करने वाली है, लेकिन इससे पहले कंपनी ने इसकी बुकिंग शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार कंपनी इस कार को इस महीने के आखिर में 21 अगस्त को उतारने वाली है. कार कंपनी की इस एंट्री-लेवल SUV का अब एक एक्सटेंडेड व्हीलबेस वर्जन भी लोगों के लिए उपलब्ध होगा. बता दें कि कंपनी ने इससे पहले ऑनलाइन इस SUV की झलक दिखाई थी। 

    BMW X1 LWB में क्या है खास
    नई BMW X1 लॉन्ग व्हीलबेस, कंपनी की इलेक्ट्रिक SUV 'BMW iX1 LWB' का पेट्रोल वर्जन होने वाला है. कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि BMW X1 LWB को चेन्नई में BMW ग्रुप प्लांट में ही बनाया जाएगा. इसके अलावा, लॉन्च होने पर यह SUV देश में बिकने वाली BMW की सबसे सस्ती लॉन्ग-व्हीलबेस SUV होगी। 

    संभावना जताई जा रही है कि BMW X1 LWB का साइज़ BMW iX1 LWB जैसा ही होगा. बता दें कि BMW iX1 LWB की लंबाई 4,616 mm, चौड़ाई 1,845 mm और ऊंचाई 1,627 mm है, जबकि इसका व्हीलबेस 2,800 mm है। 

    इस SUV में 18-इंच के अलॉय व्हील और 500 लीटर से ज़्यादा का बूट स्पेस दिया जा सकता है. इसके बाहरी हिस्से में किडनी ग्रिल, एडेप्टिव LED हेडलैंप, LED डे-टाइम रनिंग लैंप, फ्लश डोर हैंडल, पैनोरमिक ग्लास रूफ, LED टेल लैंप, रियर स्पॉइलर और शार्क-फिन एंटीना जैसे फ़ीचर्स दिए जा सकते हैं। 

    कंपनी का कहना है कि नई BMW X1 LWB में BMW की ड्राइविंग खूबियों को बनाए रखते हुए ज़्यादा जगह, कम्फर्ट और टेक्नोलॉजी पर ज़ोर दिया गया है. इसके बड़े साइज़ की वजह से, इस मॉडल में पिछली सीट पर ज़्यादा स्पेस और ज़्यादा बड़ा केबिन मिलता है। 

    BMW X1 LWB का अनुमानित इंजन
    BMW की इस एंट्री-लेवल SUV में 2.0-लीटर का चार-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जा सकता है, जो लगभग 204 hp की पावर और 350 Nm का टॉर्क प्रदान करता है. इस इंजन को सात-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा जाएगा. हालांकि कंपनी बाद में इसमें डीज़ल इंजन का ऑप्शन भी दे सकती है, लेकिन फिलहाल इसमें पेट्रोल पावरट्रेन होने की उम्मीद है। 

    BMW X1 LWB के फीचर्स
    नई BMW X1 LWB के संभावित फ़ीचर्स की बात करें तो इसमें 10.25-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले और BMW ऑपरेटिंग सिस्टम 9 पर चलने वाला 10.7-इंच का कर्व्ड टचस्क्रीन शामिल है. इसके अलावा, इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto कनेक्टिविटी, इंटीग्रेटेड नेविगेशन, वॉइस असिस्टेंट फ़ंक्शनैलिटी, कनेक्टेड ड्राइव सर्विसेज़ और OTA सॉफ़्टवेयर अपडेट्स जैसी सुविधाएं भी होंगी। 

  • YouTube का बड़ा फैसला: Monetization के लिए बढ़ी शर्तें, 1,000 सब्सक्राइबर के साथ ये टारगेट करना होगा पूरा

    YouTube का बड़ा फैसला: Monetization के लिए बढ़ी शर्तें, 1,000 सब्सक्राइबर के साथ ये टारगेट करना होगा पूरा

    मुंबई 
    YouTube ने अपने YouTube Partner Program यानी YPP के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी के मुताबिक 2018 के बाद इतना बड़ा बदलाव किया जा रहा है. नए नियमों के तहत YouTube Partner Program में शामिल होने के लिए नए क्रिएटर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा वॉच टाइम या Shorts व्यूज हासिल करने होंगे. नए नियम 1 फरवरी 2027 से लागू होंगे। 

    2027 से YPP में शामिल होना होगा मुश्किल
    YouTube ने बताया कि 1 फरवरी 2027 से YouTube Partner Program में आवेदन करने वाले नए क्रिएटर्स को पिछले एक साल में कम से कम 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स हासिल करने होंगे. इसके अलावा Shorts के जरिए YPP में शामिल होने वाले क्रिएटर्स के लिए पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज की शर्त रखी गई है। 

    ये मौजूदा नियमों की तुलना में बड़ा बदलाव है. फिलहाल YPP में शामिल होने के लिए क्रिएटर के पास 1,000 सब्सक्राइबर और पिछले 365 दिनों में 4,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स होने चाहिए. Shorts के मामले में 1,000 सब्सक्राइबर के साथ पिछले 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज की जरूरत होती है. हालांकि, YouTube ने साफ किया है कि फैन फंडिंग और शॉपिंग प्रोडक्ट्स के लिए एंट्री थ्रेशोल्ड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

    Shorts से कमाई के लिए भी बदले नियम
    YouTube ने Shorts से होने वाली कमाई के नियमों में भी बदलाव किया है. नए नियमों के तहत Shorts से विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू शेयरिंग पाने के लिए क्रिएटर्स को पिछले 90 दिनों में कम से कम 1 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज हासिल करने होंगे. ये नियम भी 1 फरवरी 2027 से लागू होगा. हालांकि, अगर किसी क्रिएटर के Shorts व्यूज इस लाइन तक नहीं पहुंचते हैं, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह YouTube Partner Program से बाहर हो जाएगा. ऐसे क्रिएटर्स YPP का हिस्सा बने रह सकते हैं और लंबे वीडियो यानी लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट से मिलने वाले रेवन्यू के लिए एलिजिबल रहेंगे। 

    YouTube ने क्यों बदले नियम?
    कंपनी का कहना है कि ये बदलाव YouTube के तेजी से बढ़ते प्लेटफॉर्म को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं. YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर अब हर दिन 200 अरब से ज्यादा Shorts व्यूज आते हैं. इसके अलावा टीवी स्क्रीन पर हर दिन 100 करोड़ घंटे से ज्यादा YouTube कंटेंट देखा जाता है। 

    कंपनी का मानना है कि प्लेटफॉर्म के बढ़ते स्तर और क्रिएटर इकॉनमी में बदलाव के साथ Partner Program की शर्तों को भी अपडेट करना जरूरी है. YouTube ने ये भी कहा है कि 2027 में वह क्रिएटर्स को 2026 की तुलना में और ज्यादा पेमेंट करने की उम्मीद कर रहा है। 

    YouTube Partner Program की मौजूदा शर्तें-

        1,000 सब्सक्राइबर
        पिछले 365 दिनों में 4,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स

    या

        1,000 सब्सक्राइबर
        पिछले 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज

    1 फरवरी 2027 से नई शर्तों के तहत-

    पिछले एक साल में 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स

    या

    पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज
    हालांकि, ये साफ नहीं किया गया है कि नई शर्तों के साथ 1,000 सब्सक्राइबर की मौजूदा शर्त भी उसी रूप में जारी रहेगी या उसमें कोई अलग बदलाव होगा। 

    Premium Lite प्लान भी हुआ उपलब्ध
    YouTube ने Partner Program के नियमों में बदलाव के साथ Premium Lite प्लान को भी ज्यादा क्षेत्रों में उपलब्ध कराने की घोषणा की है. कंपनी के मुताबिक Premium Lite अब "सभी देशों" में उपलब्ध है. इस प्लान में यूजर्स को ज्यादातर कंटेंट पर कम विज्ञापन देखने को मिलेंगे. इसके अलावा यूजर्स वीडियो डाउनलोड करके ऑफलाइन देख सकेंगे और बैकग्राउंड प्लेबैक की सुविधा भी मिलेगी। 

    2026 में YPP के 20 साल पूरे
    YouTube ने 2006 में Partner Program शुरू किया था. इस हिसाब से 2026 में YouTube Partner Program को शुरू हुए 20 साल पूरे हो रहे हैं. इन वर्षों में कंपनी ने क्रिएटर्स के साथ रेवेन्यू शेयरिंग के नियमों में कई बदलाव किए हैं. अब 2018 के बाद पहली बार YPP की शर्तों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है. नए नियम खास तौर पर उन क्रिएटर्स को प्रभावित करेंगे जो YouTube से विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन के जरिए कमाई शुरू करना चाहते हैं. Shorts पर निर्भर नए क्रिएटर्स के लिए 2 करोड़ व्यूज का नया टारगेट पहले की तुलना में काफी ज्यादा है। 

  • Gold Price Today: सोने के दाम में जबरदस्त उछाल, ₹1.54 लाख के पार पहुंची कीमत

    Gold Price Today: सोने के दाम में जबरदस्त उछाल, ₹1.54 लाख के पार पहुंची कीमत

    मुंबई 
    आज 13  अगस्त को सोने के भाव में तेजी रही। सर्राफा बाजार में सोना 96 रुपये महंगा हुआ है। सोने का भाव 1,54,850 रुपये पर है। ये 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड का रेट है। कल मंगलवार को सोने का दाम 85 रुपये महंगा होकर 1.53 लाख रुपये पर बंद हआ था। बुलियन मार्केट में 22 कैरेट गोल्ड का रेट 1,41,840 रुपये पर है। अगर आप आज गोल्ड ज्वैलरी खरीदने या निवेश करने का प्लान कर रहे हैं तो आज 12 अगस्त का गोल्ड रेट जान लें।

    दिल्ली में आज का सोने का रेट
    देश की राजधानी दिल्ली में सोने का भाव 1,54,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,840 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बिहार में आज का गोल्ड रेट
    बिहार की राजधानी पटना में 24 कैरेट गोल्ड 1,54,930 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। यहां दाम 104 रुपये चढ़ा है। पटना में 22 कैरेट सोने का भाव आज 1,41,910 रुपये रहा।

    मुंबई में आज का गोल्ड रेट
    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। यहां सोना 111 रुपये महंगा हुआ है। 22 कैरेट सोने का भाव मुंबई में 1,42,120 रुपये पर है।

    यूपी में आज का गोल्ड रेट
    यूपी के लखनऊ में सोने का भाव 1,54,930 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। यहां सोने का दाम 104 रुपये बढ़ा है। 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,910 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    सोने की कीमतों में क्यों आई तेजी?
    सोने की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना पिछले 20 महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है। इससे बाजार में सोने की मांग मजबूत वैश्विक अनिश्चितता है। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया की आर्थिक स्थिति को लेकर निवेशकों की चिंता के कारण लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। जब भी वैश्विक जोखिम बढ़ता है, सोने की मांग बढ़ जाती है और इसकी कीमतों में तेजी आती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है। निवेशक फेड के अगले फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा, कीमतों में हल्की गिरावट आने पर बड़े संस्थागत निवेशकों ने भी सोने में खरीदारी बढ़ाई है, जिससे सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

  • Apple Pay भारत में लॉन्च होने को तैयार, सितंबर-अक्टूबर में आ सकती है सर्विस; UPI सपोर्ट पर सस्पेंस

    Apple Pay भारत में लॉन्च होने को तैयार, सितंबर-अक्टूबर में आ सकती है सर्विस; UPI सपोर्ट पर सस्पेंस

    मुंबई 
    एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, टेक दिग्गज Apple इस साल के आखिर में अपनी Apple Pay सर्विस को भारत में लॉन्च कर सकती है. जानकारी के अनुसार, Apple देश के डिजिटल पेमेंट मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर रहा है और इसी के तहत यह सर्विस तैयार की जा रही है। 

    बताया जा रहा है कि लॉन्च की तैयारियों के हिस्से के तौर पर कंपनी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ बातचीत कर रही है. हालांकि Apple ने अभी तक इन योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. इसमें लॉन्च की संभावित टाइमलाइन या भारत में Apple Pay के आने पर मिलने वाले फीचर्स शामिल हैं। 

    भारत में Apple Pay के लॉन्च की संभावना
    बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, Apple सितंबर के आखिर या अक्टूबर में भारत में Apple Pay को भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. संभावना जताई जा रही है कि यह सर्विस शुरू में Visa और Mastercard जैसे नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड को सपोर्ट करेगी। 

    इस योजना की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने पब्लिकेशन को बताया कि Apple ट्रांज़ैक्शन से होने वाली कमाई को लेकर बड़े कार्ड जारी करने वाले बैंकों के साथ बातचीत भी कर रहा है. इस लॉन्च से भारत के प्रीमियम क्रेडिट कार्ड मार्केट में Apple Pay की मौजूदगी बन जाएगी। 

    यूज़र्स Apple Wallet में एलिजिबल कार्ड जोड़ सकेंगे और नियर-फ़ील्ड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, कम्पैटिबल पॉइंट-ऑफ़-सेल टर्मिनल पर iPhone या iPad से कॉन्टैक्टलेस पेमेंट कर सकेंगे. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लॉन्च के समय UPI की सुविधा मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस सर्विस को शुरू करने के लिए Apple को 'नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया' और एक स्पॉन्सर बैंक से मंज़ूरी की ज़रूरत होगी। 

    ऐसे में, संभावना जताई जा रही है कि यह सर्विस उस कार्ड-बेस्ड पेमेंट सिस्टम के साथ शुरू होगी, जिसका इस्तेमाल Apple दूसरे बाज़ारों में करता है. रिपोर्ट्स की माने तो, Apple हर ट्रांज़ैक्शन पर 15 से 20 बेसिस पॉइंट की फ़ीस चाहता है, जबकि कुछ बैंक 10 बेसिस पॉइंट की मांग कर रहे हैं. यह फ़ीस ग्राहकों या मर्चेंट से नहीं, बल्कि बैंकों के इंटरचेंज रेवेन्यू से ली जाएगी। 

    बता दें कि फरवरी 2026 में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट सामने आई थी कि जिसमें बताया गया था कि Apple भारत में पेमेंट सर्विस शुरू करने के लिए ICICI Bank Ltd., HDFC Bank Ltd. और Axis Bank Ltd के साथ बातचीत कर रही है. Apple इस प्लान के लिए ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क कंपनियों Mastercard Inc. और Visa Inc. से भी बात कर रही है। 

  • Tata Sons Chairman Update: चंद्रशेखरन ने छोड़ा पद? AGM से पहले बड़े बदलाव की चर्चा तेज

    Tata Sons Chairman Update: चंद्रशेखरन ने छोड़ा पद? AGM से पहले बड़े बदलाव की चर्चा तेज

    नई दिल्ली
    टाटा ग्रुप के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव हुआ है। दरअसल, एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। ईटी की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 63 साल के चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को अपने फैसले के बारे में बता दिया है। वे फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल आधिकारिक रूप से पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। इस खबर के बाद टाटा ग्रुप की कंपनी TCS समेत टाटा के दूसरे शेयरों में 4% तक की गिरावट आई।

    एजीएम से पहले फैसला
    चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त की एनुअल जनरल मीटिंग यानी एजीएम और टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के वोटिंग के तरीके को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, चंद्रशेखरन के बने रहने के खिलाफ माने जाते हैं।

    ग्रुप के दूसरे कारोबार पर भी पड़ेगा असर
    इसके साथ ही एन. चंद्रशेखरन का लगभग दस साल का कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। इस दौरान उन्होंने भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप को एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में फैले एक बड़े ग्रुप में बदल दिया।

    चंद्रशेखरन के जाने का असर पूरे ग्रुप पर भी पड़ेगा। वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं और 2017 में टाटा संस की कमान संभालने के बाद से ग्रुप के कारोबार में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

    विजय सिंह भी दे चुके ट्रस्ट से इस्तीफा
    बता दें कि बीते कुछ समय से टाटा ट्रस्ट में कई इस्तीफे हो चुके हैं। हाल ही में टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) के न्यासी (ट्रस्टी) पद से इस्तीफा दे दिया है। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के ट्रस्टी बने रहेंगे। विजय सिंह के इस्तीफ की भी खबर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों के बीच मतभेदों के बीच सामने आया है।

    इसके बोर्ड के गठन को नियंत्रित करने वाले नियमों के कथित उल्लंघन की जांच लंबित रहने तक महाराष्ट्र राज्य चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट को अपने बोर्ड की बैठक करने से रोक दिया है। एसआरटीटी ने प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए चैरिटी कमिश्नर से संपर्क किया है, जिसमें 18 अगस्त को टाटा संस की एजीएम में ट्रस्ट की भागीदारी पर इसके संभावित प्रभाव का हवाला दिया गया है। विजय सिंह और उनके साथी ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने सार्वजनिक रूप से टाटा संस को सूचीबद्ध करने का समर्थन किया है, जिसका टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने विरोध किया है।

  • Nifty 50 Rejig: Wipro हुआ बाहर, BSE की एंट्री; करीब 3 दशक बाद बदली इंडेक्स की तस्वीर

    Nifty 50 Rejig: Wipro हुआ बाहर, BSE की एंट्री; करीब 3 दशक बाद बदली इंडेक्स की तस्वीर

     नई दिल्ली
    शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल शेयरों में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. करीब तीन दशक तक Nifty-50 में शामिल रहने के बाद अब आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड इससे बाहर होने वाली है, जबकि उसकी जगह बीएसई लिमिटेड की एंट्री होगी. इस बदलाव का सीधा असर विप्रो और बीएसई के शेयरों (Wipro-BSE Shares) पर देखने को मिलेगा. हालांकि, मंगलवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही जहां विप्रा मामूली तेजी के साथ, तो बीएसई मामूली गिरावट लेकर खुला। 

    सितंबर से लागू होगा ये बड़ा चेंज 
    निफ्टी इंडेक्स में ये नया बदलाव अगले महीने सितंबर में देखने को मिलेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 सितंबर को शेयर मार्केट में कारोबार खत्म होने के बाद विप्रो का निफ्टी के साथ तीन दशक का सफर खत्म हो जाएगा यानी 30 सितंबर से Wipro इस इंडेक्स से बाहर कर दी जाएगी. NSE की ओर से बीते कारोबारी दिन सोमवार को छमाही समीक्षा के बाद ये बड़ा फैसला लिया गया है। 

    Wipro के बाहर होने की वजह क्या? 
    यहां ये समझ लेना जरूरी है कि आखिर क्यों लंबे समय से निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल दिग्गज आईटी कंपनी के विप्रो के शेयर इससे बाहर किए जा रहे हैं. तो बता दें कि विप्रो का छह महीने का फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटल काफी कम करीब 55,930 करोड़ रुपये रहा है, जबकि इसकी तुलना में BSE Ltd का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप इन अवधि में तेजी से बढ़ते हुए 1.4 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंचा. ये विप्रो के आउट और बीएसई की एंट्री के लिए सबसे बड़ा कारण है। 

    शेयर पर दिख सकता है असर
    Wipro और BSE को लेकर आई इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार में कारोबार के दौरान इन दोनों कंपनियों के शेयरों पर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है. मंगलवार को Share Market में कारोबार की शुरुआत होने पर विप्रो का शेयर करीब 186 रुपये पर ओपन हुआ. पिछले एक साल में इस आईटी शेयर में 23 फीसदी की गिरावट आई है, तो पांच साल में इसने निवेशकों को 40 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है। 

    वहीं बीएसई का शेयर मामूली गिरावट लेकर 3565 रुपये पर कारोबार करता हुआ नजर आया. इस शेयर ने बीते एक साल में करीब 50 फीसदी का रिटर्न निवेशकों को दिया है, जबकि पांच साल में ये 2700 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है और निवेशकों की दौलत में तगड़ा इजाफा हुआ है। 

  • Gold-Silver Price: सोने ने फिर बनाया नया रिकॉर्ड, भाव ₹1,52,200 के पार; चांदी में भी उछाल

    Gold-Silver Price: सोने ने फिर बनाया नया रिकॉर्ड, भाव ₹1,52,200 के पार; चांदी में भी उछाल

    मुंबई 

     सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार (10 अगस्त) को घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। खबर लिखे जाने के समय MCX पर सोने का भाव 426 रुपए की बढ़त के साथ 1,52,246 रुपए प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी की कीमत में 2365 रुपए का उछाल आया, एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,33,831 रुपए पर है। इंटरनेशन मार्केट में सोना लाल निशान और चांदी हरे निशान पर कारोबार कर रही है।

    सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमत 
    राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत 200 रुपए बढ़कर 1.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई। कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच विदेशी बाजारों में आई तेजी का घरेलू बाजार पर सकारात्क असर पड़ा। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 200 रुपए बढ़कर 1,54,000 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) हो गई। बृहस्पतिवार को यह 1,53,800 रुपए प्रति 10 ग्राम पर थी। हालांकि, स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, पिछले सत्र में तेज उछाल के बाद चांदी की कीमत 2,34,800 रुपए प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर स्थिर रही। 

  • बंगाल में कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने की तैयारी, 5% इंक्रीमेंट समेत कई प्रस्ताव

    बंगाल में कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने की तैयारी, 5% इंक्रीमेंट समेत कई प्रस्ताव

    नई दिल्ली
     पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन होने के बाद 7वें पे कमीशन का ऐलान हुआ था। पे कमीशन ने कई नियम और शर्तों को शामिल किया है। जिसकी वजह से कर्मचारियों को ज्यादा फायदा होगा। इसमें मुख्यतः सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने से लेकर, केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी देना है।

    5% सालाना इंक्रीमेंट (pay commission updates)
    सैलरी के मोर्चे पर सालाना 5 प्रतिशत के इंक्रीमेंट का फेमवर्क करने का सुझाव दिया गया है। मौजूदा समय में राज्य कर्मचारियों को 3 प्रतिशत एनुअल इंक्रीमेंट मिल रहा है। इसके अलावा फैमिली यूनिट को 5 करने की भी मांग हुई है। पहले के पे कमीशन में फैमिली यूनिट 3.5 थी। इन सबके अतिरिक्त 11 साल बाद रूपांतरित पेंशन की बहाली करना पश्चिम बंगाल के सातवें वेतन आयोग के नियमों और शर्तों में शामिल हैं। बता दें, आयोग को मौजूदा वेतन ढांचे, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट से जुड़े लाभों की समीक्षा कर उन्हें मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों तथा महंगाई के अनुरूप तर्कसंगत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

    केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर मिले वेतन
    सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रस्तावों का मकसद सर्विस शर्तों के सभी प्रमुख पहलुओं को इसमें शामिल करते हुए मौजूदा व्यवस्था की कमियों को दूर करना है। सातवें वेतन आयोग के कार्य-दायरे में राज्य सरकार के कर्मचारियों और केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के वेतन स्तर में समानता लाना, पूरे देश में एक जैसा स्तर हासिल करना और वेतन ढांचे में अंतर के कारण होने वाले कानूनी विवादों को कम करना शामिल है।

    DA पर भी होगा फैसला
    पे कमीशन मौजूदा मंहगाई भत्ते को राज्य में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स से जोड़ने की भी सलाह दे सकता है। साथ ही इस समय से भुगतान करने के लिए तय प्रक्रिया का सुझाव दे सकता है। इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले एचआरए और ट्रांसपोर्ट भत्ता को भी रिव्यू करेगा।

    प्रमोशन के पीरियड में भी बदलाव
    पैनल 5 साल, 8 साल, 12, 18 और 24 साल के नौकरी के दौरान प्रमोशन का सुझाव भी दिया है। मौजूदा समय में यह 8 साल, 15 और 24 साल का टाइम पीरियड तय किया गया है। नौकरी और रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारियों को कैशलेस सुविधा की भी मांग हुई है। जिसमें डॉक्टर की फीस भी शामिल है। बता दें, आयोग से कहा गया है कि वह एक जनवरी, 2026 से संशोधित वेतन ढांचे को केवल कागजी तौर पर नहीं, बल्कि असल में लागू करने पर विचार करे।

  • महंगा पड़ा कच्चा तेल, 18% कम आयात के बावजूद भारत का बिल बढ़ा

    महंगा पड़ा कच्चा तेल, 18% कम आयात के बावजूद भारत का बिल बढ़ा

    नई दिल्ली
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 26% बढ़ गया, जबकि इंपोर्ट वॉल्यूम में 18% की गिरावट आई। यानी कम तेल मंगाने के बावजूद भारत का क्रूड ऑयल बिल एक चौथाई बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट आई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। इस दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। हालांकि हाल में इसमें गिरावट आई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।

    वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस साल अप्रैल और जून के बीच कुल 59.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 73 मिलयन टन था। हालांकि इस दौरान आयात बिल अप्रैल-जून 2025 के 39 अरब डॉलर से बढ़कर 49 अरब डॉलर हो गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का 88% हिस्सा आयात से पूरा होता है।

    क्यों बढ़ा आयात का बिल?
    टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से कम थीं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट में रुकावट आने के बाद इनमें भारी उछाल आई। यहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है। भारत का लगभग 40% कच्चा तेल आयात इसी रास्ते से होता है। ईरान युद्ध के चरम पर ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। रुपये की कमजोरी ने भी आयात बिल को बढ़ाने में भूमिका निभाई।

    भारत हर साल 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी से उसके तेल आयात बिल में 2 अरब डॉलर तक का इजाफा हो सकता है। फ्रेट, इंश्योरेंस और वॉर-रिस्क प्रीमियम में अंतर के कारण अलग-अलग देशों से खरीदे गए कच्चे तेल की औसत लागत अलग-अलग थी। जून तिमाही के दौरान रूस से सप्लाई की औसत लागत 2,408 डॉलर प्रति टन रही जबकि UAE के कच्चे तेल की लागत 2,213 डॉलर प्रति टन थी।

    कौन है सबसे बड़ा सप्लायर?
    एक सरकारी रिफाइनिंग कंपनी के अधिकारी ने कहा, "उस समय हमारी प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहां से भी संभव हो, सप्लाई हासिल करना थी।" उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष से पहले मिलने वाली छूट खत्म हो गई थी और रिफाइनरों को भारी वॉर-रिस्क प्रीमियम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    पहली तिमाही में रूस एक बार फिर भारत का टॉप क्रूड सप्लायर बना रहा। कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक रही। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (14.6%), सऊदी अरब (9.9%), वेनेज़ुएला (5.2%) और ओमान (4.5%) प्रमुख सप्लायर थे।