Author: NewseDay

  • इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी तेज, वैकल्पिक जलस्रोतों को जोड़ने के लिए 15 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना

    इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी तेज, वैकल्पिक जलस्रोतों को जोड़ने के लिए 15 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना

    इंदौर 

     इंदौर शहर में इस बार औसत से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश होने से न सिर्फ भूजल स्तर में गिरावट आई है, बल्कि कई जलस्रोतों में बहुत कम पानी स्टोर हुआ है। अब वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नर्मदा जल पर निर्भरता कम हो और भूजल के दोहन में भी कमी आए। जिला प्रशासन ने चोरल, तिंछा, और शीतला माता फॉल को जलस्रोत के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। अभी प्रोजेक्ट का परीक्षण कराया जा रहा है।

    इंदौर को मिलने लगेगा पानी
    प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपर्ट का दावा है कि तिछा फाल में 120 से 150 मिलियन घन मीटर पानी स्टोरेज की क्षमता विकसित हो सकती है। महू के आसपास अन्य जलस्रोत तैयार करने की भी प्लानिंग है। ऐसा हुआ तो नर्मदा का महू में जाने वाला 50 एमएलडी पानी इंदौर को मिलने लगेगा। इस प्रोजेक्ट के साथ आसपास के कई तालाबों और जलस्रोतों को विकसित कर वहां आने वाला पानी असरावद या लिम्बोदी लाने की योजना है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो प्रोजेक्ट की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर निर्णय होगा।

    भूजल स्तर में होगा सुधार
    मालूम हो, नर्मदा का पानी शहर में पीने के अलावा रास्ते में सिंचाई के लिए भी दिया जाता है। फसल के बाद भी इस पानी की सप्लाई जारी रहती है। कई जगह मोटर लगाकर पानी खींचा जाता है। यह पानी असरावद या लिम्बोदी के आसपास के तालाबों से लिफ्ट कर लाया जा सकता है। ओवरफ्लो होने वाला पानी कनाड़ नदी में 12 महीने बहता है और यह तिछा में आता है। इस पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोका जा सकता है। यह पानी शहर के लिम्बोदी तालाब तक लाया जाए तो बायपास से लगी कई कॉलोनियों के भूजल स्तर में सुधार होगा।

    जल संचयन और संरक्षण जरूरी
    शहर के आसपास 40 से 50 किमी में कई वैकल्पिक स्रोत हैं, जिन पर काम करने से जल संचयन और संरक्षण होने से पानी की क्षमता बढ़ सकती है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने चोरल नदी में बारिश के दौरान आने वाले पानी को शहर में लाने की योजना बनाई थी। एक दशक में जलस्रोत बढ़ाने पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। अब जरूरत है कि नर्मदा और यशवंत सागर के अलावा पानी के अन्य स्रोतों की भी नगर निगम तलाश करे। अलग-अलग स्रोतों से आने वाले पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोकें और उसे शहर में नए तालाबों में लाया जाए। इससे एक्वेफर के जरिए वाटर रिचार्जिंग भी हो सकेगी।

    यह किया जा सकता है काम
    -तिंछा फाल में कानड़ नदी (दतोदा कैचमेंट) से बारिश के समय खूब पानी आता है, लेकिन यह बह जाता है। इस पानी को बांध बनाकर रोकना होगा। और आगे बड़े तालाब विकसित करने होंगे, ताकि वर्ष भर उपयोग किया जा सके। यह जलूद से पहले है, इसलिए इस पानी को इंदौर तक लाने की लागत भी कम रहेगी।

    -महू में ग्राम भाटखेड़ी के पास बड़े तालाब में जानापाव कैचमेंट एरिया से खूब पानी आता है। तालाब में कई महीनों तक पानी स्टोर रहता है। इस पानी के उपयोग की योजना बनाई जा सकती है।

    -तिंछाफाल में बड़ा जलाशय बनाया जाए तो उसका संभावित स्टोरेज 120 से 150 मिलियन क्यूबिक मीटर हो सकता है। इंदौर की पानी की मांग 700 से 900 एमएलडी है। तिंछाफाल से शहर की 35 से 50% पेयजल जरूरत पूरी हो सकती है।

    नर्मदा नदी के अलावा अन्य जलस्रोत विकसित करने की योजना पर काम किए जा रहे हैं। वैकल्पिक जलात में नया जलस्रोत बनाना नहीं है, बल्कि नेटवर्क स्थापित करना है। इसके लिए सभी बिंदुओं पर परीक्षण किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक स्थिति के आंकलन से स्पष्ट हुआ है कि शहर में पानी का समानांतर नया नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। इस नेटवर्क से पानी तो मिलेगा, भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। – सुरेश एमजी, जल प्रबंधन विशेषज्ञ

    समझें पानी का सिस्टम
    -कनाड़ नदी में पाताल पानी से पानी आता है। यह और आसपास से आया पानी तिंछा में जाता है। तिंछा के आगे इंटेक संरचना विकसित कर पम्पिंग स्टेशन से पानी असरावद
    -पाइप लाइन से यह पानी लिम्बोदी तालाब तक लाया जा सकता है। इस पूरे नेटवर्क में लगभग 15 किमी का पाइप लाइन का क्षेत्रफल विकसित करना होगा।

    ये हैं परियोजना के मुख्य बिंद

    प्रस्तावित क्षमता : 50 MLD (5 करोड़ लीटर प्रति दिन)
    कुल लंबाई:- 14-15 km
    टिया कनाड़ असत: 9.8 km असरावद लिम्बोदी: 4.4 km)
    संभावित पाइप व्यास: 800-900 mm
    पंपिंग हेड : स्थल सर्वे के बाद निधीरित
    (अनुमानित 20-80 मीटर)
    मध्यवर्ती जलाशय : 1-2 MCM

  • India Post का नया प्रयोग, हिमाचल के 110 रास्तों पर ड्रोन से होगी डाक डिलीवरी; समय की होगी बचत

    India Post का नया प्रयोग, हिमाचल के 110 रास्तों पर ड्रोन से होगी डाक डिलीवरी; समय की होगी बचत

    शिमला 
    हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में डाक पहुंचाना अब पहले से ज्यादा आसान हो सकता है. जिन गांवों तक पहुंचने के लिए कर्मचारियों को घुमावदार सड़कों और मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ता है, वहां अब ड्रोन की मदद से चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाए जाएंगे. इंडिया पोस्ट ने हिमाचल प्रदेश में 110 रास्तों पर ड्रोन से डाक पहुंचाने की योजना बनाई है. खास बात यह है कि इनमें से 36 रास्तों पर यह सर्विस पहले ही शुरू हो चुकी है। 

    अब घंटों का सफर मिनटों में होगा पूरा
    हिमाचल प्रदेश में कई गांव पहाड़ों के बीच बसे हैं. यहां डाक पहुंचाने में काफी समय लगता है. सड़क से जाने पर कर्मचारियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. लेकिन ड्रोन की मदद से इस परेशानी को कम किया जा सकता है. ड्रोन सीधे हवा में उड़कर डाक को एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस तक पहुंचा सकता है। 

    डाक विभाग के ऑफिशल्स के मुताबिक, इस सर्विस का मकसद दूर-दराज के गांवों तक डाक और पार्सल जल्दी पहुंचाना है. इससे समय की बचत होगी और डिलीवरी भी पहले के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद बन सकती है। 

    तिरंगे की डिलीवरी से हुई थी शुरुआत
    हिमाचल में ड्रोन से डाक पहुंचाने की शुरुआत 13 अगस्त 2026 को हुई थी. इस दौरान मंडी के मुख्य पोस्ट ऑफिस से रेहरधार शाखा पोस्ट ऑफिस तक राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा ड्रोन के जरिए पहुंचाया गया था. इसके बाद इस सर्विस को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई। 

    हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल संजय सिंह ने वर्ल्ड पोस्ट डे के मौके पर इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फिलहाल 36 रास्तों पर ड्रोन से डाक पहुंचाई जा रही है और इस सर्विस को 110 रास्तों तक बढ़ाने की तैयारी है। 

    गांवों तक डाक पहुंचाना होगा आसान
    ड्रोन डिलीवरी से सिर्फ चिट्ठियां ही नहीं, बल्कि पार्सल पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. खासकर उन इलाकों में इसका फायदा हो सकता है, जहां खराब सड़कें, पहाड़ी रास्ते और लंबी दूरी डिलीवरी में परेशानी पैदा करते हैं। 

    डाक विभाग का यह कदम दिखाता है कि अब पुरानी डाक व्यवस्था में भी नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है. अगर यह सर्विस इसी तरह सफल रहती है, तो पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को डाक और पार्सल के लिए पहले जितना इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इसका फायदा अलग-अलग इलाकों में मौसम, रास्तों और ड्रोन संचालन की स्थितियों पर भी निर्भर करेगा। 

  • UN मिशन में दिखेगा MP पुलिस के अफसरों का दम, रेणु मुराव और नीरज वर्मा को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

    UN मिशन में दिखेगा MP पुलिस के अफसरों का दम, रेणु मुराव और नीरज वर्मा को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवा देने का अवसर मिला है. मध्य प्रदेश पुलिस की डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा को एक वर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) पुलिस मिशन में तैनात किया गया है. इस दौरान दोनों अधिकारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सेवा के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और विभिन्न देशों के पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का अवसर प्राप्त करेंगे। 

    कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन
    मध्य प्रदेश पुलिस के दो अधिकारी संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक अपनी सेवा देंगे. DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है. यह तैनाती मध्य प्रदेश पुलिस के लिए गौरव की बात मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय पुलिस मिशन में शामिल होकर अधिकारी अपने अनुभव, कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही उन्हें विभिन्न देशों की पुलिस व्यवस्था, कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा। 

    मध्य प्रदेश की महिला अधिकारियों को भी मिला अवसर
    संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में मध्य प्रदेश से तीन महिला पुलिस अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनमें डीएसपी रेणु मुराव के अलावा पांढुर्णा की रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) अनिता और एएसपी निधि शिवहरे शामिल हैं. इन अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला है. महिला अधिकारियों की इस भागीदारी को पुलिस सेवा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनकी पेशेवर क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

    एक वर्ष तक निभाएंगे जिम्मेदारी
    डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक सेवाएं देंगे. जानकारी के अनुसार, टीआई नीरज वर्मा अपना एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद भारत लौटेंगे. वर्मा वर्तमान मे भोपाल के खजुरी थाना प्रभारी हैं। 

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सभी पुलिस अधिकारियो को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि, ''मप्र पुलिस के लिए ये सौभग्य की बात है की हमारे पुलिस अधिकारी अब विदेश में अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। 

    पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों समझेंगे

    संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनाती पुलिस अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पेशेवर अनुभव होता है. इस दौरान अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने और पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिलता है. मध्य प्रदेश पुलिस के इन अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश की पुलिस सेवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। 

  • ग्वालियर के पर्यटन स्थलों की बदलेगी तस्वीर, फूलबाग एक्सपीरियंस जोन में तेजी से चल रहे विकास कार्य

    ग्वालियर के पर्यटन स्थलों की बदलेगी तस्वीर, फूलबाग एक्सपीरियंस जोन में तेजी से चल रहे विकास कार्य

    ग्वालियर
     शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को नए आकर्षण के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत फूलबाग एक्सपीरियंस जोन में चल रहे कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। अभी तक जलविहार के सामने से ट्रैफिक डायवर्ट होने के कारण काम की गति तेज नहीं हो पा रही थी।

    अब बैजाताल में पाथवे का काम लगभग पूरा होने के साथ ही हेरिटेज ई-व्हीकल के संचालन की तैयारी भी आगे बढ़ी है। इसके लिए ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण शुरू करा दिया गया है। गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने का काम भी तेज किया गया है।

    इटालियन गार्डन में इंपोजिंग शो की तैयारी
        वहीं इटालियन गार्डन में प्रस्तावित इंपोजिंग शो को शुरू करने के लिए उपकरण जुटाने के साथ इसकी स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। योजना के तहत फूलबाग क्षेत्र के विभिन्न स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यहां आने वाले पर्यटकों को केवल ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों तक सीमित अनुभव देने के बजाय बेहतर सुविधाओं और नए आकर्षणों से जोड़ना है। बैजाताल की ओर पाथवे का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।

        दूसरी ओर, हेरिटेज ई-व्हीकल के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार होने से इनके संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधा विकसित होगी। फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल इटालियन गार्डन के इंपोजिंग शो की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। संबंधित कंपनी ने इसके लिए उपकरण मंगाने शुरू कर दिए हैं।

    शो की सैंपल स्क्रिप्ट तैयार कर पर्यटन विभाग के भोपाल स्थित मुख्यालय को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्क्रिप्ट को मंजूरी मिलने के बाद शो से संबंधित आगामी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे इटालियन गार्डन में पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण विकसित करने की योजना को गति मिलेगी।

    गोपाल मंदिर से जलविहार तक भी काम
    गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने से संबंधित काम पूरा हो चुका है। वहीं जलविहार के सामने मुख्य मार्ग पर पत्थर बदलने का काम भी तेज करने की तैयारी है। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की संरचनाओं और आसपास के हिस्सों को बेहतर स्वरूप देने पर ध्यान दिया जा रहा है। फूलबाग, गोपाल मंदिर, बैजाताल, जलविहार और इटालियन गार्डन जैसे स्थलों के आसपास चल रहे कार्यों से इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना आगे बढ़ेगी।

    एलिवेटेड रोड और बारिश से धीमी हुई थी गति
    फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के विकास कार्यों पर एलिवेटेड रोड परियोजना के कारण लागू ट्रैफिक डायवर्जन का असर पड़ा था। वर्षा के मौसम में भी निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हुई। अब अलग-अलग हिस्सों में काम आगे बढ़ने के साथ परियोजना को गति देने पर जोर है। पाथवे, ई-चार्जिंग स्टेशन और इंपोजिंग शो से संबंधित गतिविधियों में प्रगति से योजना के तहत विकसित की जा रही पर्यटन सुविधाओं को आकार मिलने लगेगा।

  • कान्हा से सतपुड़ा-बांधवगढ़ तक बारहसिंगों का कुनबा बढ़ा, MP में संरक्षण की कोशिशों को मिली बड़ी सफलता

    कान्हा से सतपुड़ा-बांधवगढ़ तक बारहसिंगों का कुनबा बढ़ा, MP में संरक्षण की कोशिशों को मिली बड़ी सफलता

    भोपाल 
     मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या अब 1,400 हो गई है। एक समय बारहसिंगा छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले तक पाए जाते थे।

    वर्ष 1964 में केवल 66 हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा ही कान्हा में बच गए थे। वर्ष 2010 के आसपास इनकी संख्या बढ़कर 250 हुई थी, अब यहां संख्या बढ़कर करीब 1000 हो गई है।

    पुनर्वास अभियान सफल
    विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने के लिए सतपुड़ा और बांधवगढ़ में पुनर्वास अभियान सफल रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा विलुप्त न हो जाएं इसलिए सतपुड़ा को इनके अनुकूल मानते हुए यहां बसाने का निर्णय लिया गया।

    इससे पहले वन विहार में कान्हा से बारहसिंगा लाकर बसाए गए। यहां मिली सफलता के बाद सतपुड़ा के बोरी में वर्ष 2015 में एन्क्लोजर बनाकर इसकी शिफ्टिंग की गई। वर्ष 2015 से 2023 तक 115 बारहसिंगा शिफ्ट किए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है।

    प्रदेश में दो प्रजातियां
    बारहसिंगा की दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजाति है। इनमें हार्ड ग्राउंड प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे सूखे घास के मैदानों और ठोस जमीनों पर रहती है। इसे भी दलदली भूमि पर रहना पसंद है इसलिए यह कुछ समय के लिए पानी में जाता है। वहीं वेटलैंड बारहसिंगा दलदली इलाकों में ही पाया जाता है।

        सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा मेगा पॉपुलेशन में 3 जगह पर है। इनकी जनसंख्या बढ़ाई जा सके इसके लिए सतपुड़ा में बारहसिंगा कॉरिडोर बना रहे हैं। 12 साल में अलग-अलग समय पर कान्हा से बारहसिंगा सतपुड़ा लाए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। इसी तरह कान्हा और बांधवगढ़ में भी बारहसिंगा की संख्या बढ़ी है।- राखी नंदा, क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

     

  • बैंकिंग और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ेंगे जरूरतमंद लोग, 31 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान

    बैंकिंग और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ेंगे जरूरतमंद लोग, 31 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान

    वित्तीय समावेशन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने 21 अक्टूबर से 31 दिसम्बर तक चलेगा विशेष अभियान

    ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित होंगे विशेष शिविर

    प्रधानमंत्री जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा, सुरक्षा बीमा एवं अटल पेंशन योजना से जुड़ेंगे पात्र हितग्राही

    प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में लगेंगे शिविर

    बैंक खातों की केवाईसी, आधार लिंकिंग एवं निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने की मिलेगी सुविधा

    वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए भी नागरिकों को किया जाएगा जागरूक

    रायपुर, 

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा वित्तीय समावेशन की प्रमुख योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत जिले की सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित नागरिकों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना तथा पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा एवं वित्तीय समावेशन योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।

    प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में आयोजित होगा शिविर

    अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में कम से कम एक शिविर आयोजित किया जाएगा, ताकि कोई भी क्षेत्र अभियान से वंचित न रहे। शिविरों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत नए बैंक खाते खोलने के साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना के अंतर्गत पात्र नागरिकों का नामांकन किया जाएगा। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को भी बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा।

    निष्क्रिय बैंक खाते होंगे सक्रिय, केवाईसी की मिलेगी सुविधा

       शिविरों में प्रधानमंत्री जनधन योजना अंतर्गत नए बैंक खाते खोलना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में आधार लिंकिंग की प्रक्रिया पूरी करना, प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत नए बैंक खाते खोलना, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों के प्रधानमंत्री जनधन खाते खोलना, निष्क्रिय प्रधानमंत्री जनधन खातों को पुनः सक्रिय करना, वर्तमान जनधन एवं अन्य बचत बैंक खातों की पुनः केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना, जिन बैंक खातों में केंद्रीय केवाईसी पहचान संख्या लंबित है, उनमें इसे तैयार करना, बचत बैंक खातों एवं लॉकर जैसी अन्य बैंकिंग सुविधाओं में लंबित नामांकन (नॉमिनी) संबंधी जानकारी अपडेट करने के कार्य किए जायेंगे। इससे नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं का सुचारू लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी।

    डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए नागरिकों को किया जाएगा जागरूक

    अभियान के दौरान नागरिकों को वित्तीय साक्षरता, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन एवं साइबर धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जागरूक किया जाएगा। शिविरों में विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही पात्र नागरिकों को योजनाओं से जुड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत नामांकन तथा बैंक खाते से बीमा प्रीमियम की राशि कटौती के लिए लाभार्थियों की स्पष्ट सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    जिला प्रशासन एवं बैंकों के समन्वय से होगा अभियान का संचालन

    अभियान का संचालन जिला कलेक्टर के समग्र मार्गदर्शन में किया जाएगा। अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा विभिन्न बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों एवं इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर शिविरों का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति द्वारा शिविरों की तिथियां एवं स्थान निर्धारित किए जाएंगे। अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्व-सहायता समूहों, बैंक मित्रों, ग्राहक सेवा केंद्रों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। इस विशेष अभियान से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के पात्र नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर एवं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

  • छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल तेज, भाजपा ने 170 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के पैनल बनाने की रणनीति बनाई

    छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल तेज, भाजपा ने 170 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के पैनल बनाने की रणनीति बनाई

    भिलाई
    नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में पार्षद टिकट को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भिलाई नगर निगम, भिलाई-चरोदा नगर निगम, रिसाली नगर निगम और जामुल नगर पालिका के कुल 170 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन के लिए पार्टी तीन-तीन दावेदारों का पैनल तैयार करेगी। इस पैनल में शामिल तीन नामों में से किसी एक पर पार्टी अंतिम मुहर लगाएगी। इस व्यवस्था ने टिकट के दावेदारों की सक्रियता बढ़ा दी है। वार्डों में अपनी दावेदारी मजबूत करने से लेकर संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है।

    पार्टी की रणनीति स्पष्ट है कि केवल दावेदारी जताने या संगठन में प्रभाव रखने से टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि प्रत्याशी की चुनाव जीतने की क्षमता भी अहम होगी। ऐसे में दावेदारों को अपने राजनीतिक संपर्कों के साथ वार्ड में जनाधार, सक्रियता और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता साबित करनी होगी।

    तीन नामों में जगह बनाने की पहली चुनौती
    भाजपा की टिकट चयन प्रक्रिया में फिलहाल दावेदारों के सामने पहली चुनौती तीन सदस्यीय पैनल में जगह बनाना है। प्रत्येक वार्ड से तीन संभावित प्रत्याशियों के नाम तैयार कर आगे भेजे जाएंगे। इसके बाद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन नामों पर विचार कर अंतिम प्रत्याशी तय करेगा। यानी टिकट की दौड़ में शामिल प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता को पहले स्थानीय स्तर पर अपनी दावेदारी मजबूत करनी होगी। इस प्रक्रिया के चलते वार्डों में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ उन नेताओं की भी नजर टिकट पर है, जो आगामी चुनाव को अपने राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

    बैठकों के बाद वार्ड स्तर पर शुरू होगी रायशुमारी
    प्रत्याशियों के चयन को लेकर भाजपा संगठन लगातार बैठकें कर रहा है। वार्ड स्तर पर संभावित नामों पर चर्चा और स्थानीय लोगों से राय लेने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है। इस दौरान दावेदारों की सक्रियता, संगठन के प्रति योगदान, स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ और चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखा जा सकता है। पार्टी के सामने चारों नगरीय निकायों में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है। इसलिए प्रत्याशी चयन में स्थानीय परिस्थितियों और वार्ड के समीकरणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस वार्ड में कई मजबूत दावेदार हैं, वहां पैनल तैयार करना संगठन के लिए आसान नहीं होगा।

    Bदावेदारों के सामने जनाधार साबित करने की चुनौती
    टिकट के लिए सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब अपनी दावेदारी के समर्थन में राजनीतिक ताकत दिखानी होगी। वार्ड में लोगों के बीच उनकी मौजूदगी, स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रियता और मतदाताओं से संपर्क जैसे पहलू अहम हो सकते हैं। पार्टी ऐसे प्रत्याशी उतारना चाहती है, जो केवल चुनाव लड़ने के इच्छुक न हों, बल्कि जीत हासिल करने की क्षमता भी रखते हों। हालांकि, तीन नामों के पैनल में शामिल होना टिकट की गारंटी नहीं होगा। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के हाथ में रहेगा।

        तीन लोगों के नाम का पैनल भेजेंगे
        प्रत्येक वार्ड से तीन लोगों के नाम का पैनल बनाकर भेजा जाएगा। इसके बाद पार्टी हाईकमान तय करेगा कि संबंधित वार्ड से किसे पार्षद प्रत्याशी बनाया जाना है। चारों नगरीय निकायों के 170 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन की यह प्रक्रिया भाजपा के चुनावी अभियान की दिशा तय करेगी।

        – पुरुषोत्तम देवांगन , भिलाई जिला अध्यक्ष,भाजपा

     

  • मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    श्योपुर 
     कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे।

    परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी।
    कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या

    उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है।

    सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर
    केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

     

    439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित क्षेत्र
    चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विशेष बाड़े यानी बोमा के साथ निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है। चीतों को नए वातावरण में ढलने तक वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। क्षेत्र में पहले से बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में चीतों की मौजूदगी के साथ पूरे क्षेत्र के वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। 

    प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा तीसरा चीता ठिकाना
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया जाता है। नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। अब इसी क्षेत्र में चीते आने से बुंदेलखंड का यह वन क्षेत्र देश के चीता संरक्षण अभियान के नक्शे पर भी प्रमुखता से आएगा। यानी कूनो तक सीमित रहा चीता संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश के दूसरे बड़े वन क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। 

    देश में 60 हुए चीते, 41 भारत में जन्मे
    चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 5 अक्टूबर को कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के प्रभास, पावक और धीरा के अलावा बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा मौजूद है।

    बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है चीता
    बुंदेलखंड लंबे समय से पानी, पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। चीतों के आने के बाद केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि उनके आसपास सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काम के नए अवसर बन सकते हैं। सरकार की योजना वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। आने वाले समय में गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

    कूनो से शुरू हुआ सफर अब तीन इलाकों तक
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। मध्यप्रदेश में अब कूनो के साथ गांधीसागर और वीरांगना दुर्गावती तीन प्रमुख चीता आवास बन रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर को होने वाली विमुक्ति सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की घटना नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के भौगोलिक विस्तार का अगला चरण भी होगी। 

    नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े
        कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही।

    बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट।

    फैक्ट फाइल

        कुल चीतों की संख्या 60 है।
        41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।
        28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।
        7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।
        54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।
        04 गांधीसागर में।
        2 नौरादेही में रह रहे।

    विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या
    भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

  • PM Kisan Yojana: किसानों को मिल सकते हैं ₹4,000 तक, जानें 24वीं किस्त की तारीख और बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करने का तरीका

    PM Kisan Yojana: किसानों को मिल सकते हैं ₹4,000 तक, जानें 24वीं किस्त की तारीख और बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करने का तरीका

    नई दिल्ली

    देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं. इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह रकम 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. अब किसानों की नजर 24वीं किस्त पर है. पिछली किस्त जून में जारी होने के बाद से ही अगली किस्त को लेकर चर्चाएं तेज हैं. कई रिपोर्ट्स में अक्टूबर में पैसा आने की संभावना जताई गई है, लेकिन अभी तक सरकार ने भुगतान की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। 

    ऐसे में किसानों के लिए सिर्फ किस्त आने का इंतजार करना काफी नहीं है. अगर बैंक खाते की जानकारी में गलती है या ई-केवाईसी अधूरी है, तो भुगतान रुक सकता है. इसलिए अगली किस्त का फायदा लेने के लिए किसानों को अभी से कुछ जरूरी काम पूरे कर लेने चाहिए. साथ ही, जिन किसानों की पिछली किस्त किसी वजह से नहीं मिली थी, वे भी अपना स्टेटस चेक करें. इससे पता चल सकेगा कि भुगतान क्यों रुका था और बकाया रकम मिलने की संभावना है या नहीं। 

    कब जारी हो सकती है पीएम किसान की 24वीं किस्त?
    पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त की तारीख को लेकर किसानों में उत्सुकता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अक्टूबर में किस्त जारी होने की संभावना जताई गई है. हालांकि, जब तक केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक किसी फिक्स्ड तारीख को पक्का नहीं माना जा सकता। 

    किसानों को सलाह है कि वे किस्त से जुड़ी जानकारी के लिए पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर नजर रखें. सोशल मीडिया पर चल रही तारीखों के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचने से बचें। 

    24वीं किस्त पाने के लिए पूरे कर लें ये जरूरी काम
    अगली किस्त का पैसा बिना परेशानी पाने के लिए किसानों को तीन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। 

    ई-केवाईसी पूरी करें- अगर ई-केवाईसी अधूरी है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

    बैंक खाते की जानकारी चेक करें- खाते की जानकारी और योजना में दर्ज विवरण सही होने चाहिए. गलत जानकारी होने पर भुगतान में देरी हो सकती है। 
    लाभार्थी स्टेटस देखें- पोर्टल पर अपना बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करें. इससे भुगतान की स्थिति और किसी संभावित समस्या का पता लगाने में मदद मिलेगी। 

    पीएम किसान में मोबाइल नंबर कैसे अपडेट करें?

    अगर योजना में आपका पुराना मोबाइल नंबर दर्ज है, तो जरूरी सूचनाएं मिलने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में सबसे पहले pmkisan.gov.in पर जाएं और उपलब्ध विकल्पों में मोबाइल नंबर अपडेट करने की सुविधा तलाशें. इसके बाद मांगी गई जानकारी भरें और स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करें। 

    अगर पोर्टल पर नंबर बदलने का विकल्प नहीं मिलता है, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या संबंधित कृषि कार्यालय से मदद लें. ध्यान रखें कि पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाएं और सत्यापन की प्रक्रिया बदल सकती हैं। 

    क्या अगली किस्त के साथ मिल सकते हैं 4,000 रुपये?
    कुछ किसानों के मन में सवाल है कि क्या इस बार 2,000 के बजाय 4,000 रुपये मिल सकते हैं. ऐसा उन मामलों में संभव है, जहां पिछली किस्त की राशि बकाया है और किसान की पात्रता की पुष्टि होने के बाद उस भुगतान को मंजूरी मिल जाती है. ऐसी स्थिति में पिछली किस्त के 2,000 रुपये और नई किस्त के 2,000 रुपये एक साथ मिल सकते हैं। 

    हालांकि, यह रकम सभी किसानों को नहीं मिलेगी. भुगतान पिछली किस्त की स्थिति, पात्रता और बकाया राशि की मंजूरी पर निर्भर करेगा. इसलिए किसान अपना स्टेटस जरूर चेक और किसी समस्या के समाधान के लिए आधिकारिक माध्यमों की मदद लें। 

  • कंजक पूजन में क्या दें और क्या नहीं? नुकीली, काले रंग की और चमड़े की वस्तुओं से जुड़ी मान्यताएं जानें

    कंजक पूजन में क्या दें और क्या नहीं? नुकीली, काले रंग की और चमड़े की वस्तुओं से जुड़ी मान्यताएं जानें

    Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का बाल स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन कराने के बाद दक्षिणा और उपहार देने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भेंट देने से पूजा का पुण्य मिलता है। हालांकि, उपहार चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं कन्या पूजन में देना उचित नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि कंजक पूजन के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए।

    नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या है महत्व?
    सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दिन भक्त कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं और सात्विक भोजन कराते हैं। इसके बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं का सम्मान करना और उन्हें श्रद्धा के साथ भोजन कराना मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान उपहार देते समय भी उनकी उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।

    कन्या पूजन में नुकीली चीजें देने से बचें
    कन्या पूजन के दौरान उपहार चुनते समय नुकीली वस्तुओं से बचने की सलाह दी जाती है। छोटी बच्चियों को चाकू, कैंची या ऐसी दूसरी चीजें देना उचित नहीं माना जाता, जिनसे उन्हें चोट लगने का खतरा हो। धार्मिक परंपराओं में भी इस तरह की वस्तुओं को शुभ उपहारों में शामिल नहीं किया जाता है। इसलिए कन्याओं के लिए ऐसा सामान चुनना बेहतर है, जो उनके काम आए और सुरक्षित भी हो। उनकी उम्र के अनुसार कॉपी, पेंसिल, किताब या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट की जा सकती हैं।

    काले रंग की वस्तुएं देना माना जाता है अशुभ
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में काले रंग की वस्तुएं उपहार में देने से बचना चाहिए। कई परंपराओं में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए पूजा के अवसर पर इस रंग की चीजें देना उचित नहीं माना जाता है। इसकी जगह लाल, गुलाबी या पीले रंग की वस्तुएं चुनी जा सकती हैं। कन्याओं को रंगीन कपड़े, रुमाल या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट करना एक विकल्प है। हालांकि, उपहार चुनते समय सबसे जरूरी बात बच्चियों के प्रति सम्मान और स्नेह का भाव रखना है।

    कन्या पूजन में चमड़े की चीजें क्यों ना दें?
    कन्या पूजन के दौरान चमड़े से बनी वस्तुएं देने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ में शुद्धता का विशेष महत्व माना गया है और कुछ परंपराओं में चमड़े की चीजों को शुभ नहीं समझा जाता है। इसलिए कंजक पूजन के लिए उपहार लेते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसकी जगह कपड़े से बनी उपयोगी वस्तुएं, पुस्तकें या अन्य उपयुक्त सामान दिया जा सकता है। उपहार ऐसा हो, जिसे बच्चियां आसानी से इस्तेमाल कर सकें और जिसे देते समय परिवार भी सहज महसूस करे।

    कन्या पूजन में कौन-से उपहार देना शुभ है?
    कन्या पूजन में उपहार की कीमत से ज्यादा उसके पीछे की श्रद्धा और सम्मान को महत्व दिया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को फल, मिठाई, वस्त्र, कॉपी-पेंसिल, किताबें, चूड़ियां या रुमाल दिए जा सकते हैं। कई लोग मां दुर्गा के प्रतीक के रूप में लाल चुनरी या श्रृंगार सामग्री भी भेंट करते हैं। उपहार चुनते समय बच्चियों की उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना अच्छा रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं को प्रेम और आदर के साथ भोजन कराना तथा उन्हें उपयोगी वस्तुएं देना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन के दौरान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और वर्जित वस्तुओं से बचकर उपहार देने से आपके घर में सुख, समृद्धि और मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।