Author: NewseDay

  • रणजी ट्रॉफी के बीच इंडिया-A का दौरा, BCCI के शेड्यूल पर गावस्कर-वेंगसरकर के सवाल

    रणजी ट्रॉफी के बीच इंडिया-A का दौरा, BCCI के शेड्यूल पर गावस्कर-वेंगसरकर के सवाल

    नई दिल्ली
    नए सीजन की शुरुआत के साथ यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है. एक तरफ राज्य टीमें मैदान पर उतरकर खिताब की दौड़ में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो दूसरी तरफ इंडिया-ए के कार्यक्रमों के कारण कई प्रमुख खिलाड़ी अपनी घरेलू टीमों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर ने भी घरेलू क्रिकेट की व्यवस्था और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं. संदेश साफ है- रणजी की अहमियत सिर्फ भाषणों और सलाह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसे बोर्ड के फैसलों में भी दिखना चाहिए.

    रणजी के बीच इंडिया-ए का दौरा क्यों?
    रणजी ट्रॉफी का नया सीजन 11 अक्टूबर से शुरू हुआ. इसी दिन इंडिया-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच तीन मैचों की अनऑफिशियल वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला भी खेला गया. इसके कारण रजत पाटीदार, देवदत्त पडिक्कल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं थे. पाटीदार मध्य प्रदेश, पडिक्कल कर्नाटक और गायकवाड़ महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

    अब इंडिया-ए की टीम 24 अक्टूबर से 7 नवंबर तक न्यूजीलैंड में तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी. यह दौरा भी रणजी ट्रॉफी के बीच हो रहा है. यानी घरेलू सीजन के दौरान एक बार फिर कई खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों से दूर रहेंगे. सवाल यह है कि जब रणजी का कार्यक्रम पहले से तय है, तो इंडिया-ए के दौरों की तारीखें इस तरह क्यों रखी जाती हैं कि दोनों प्रतियोगिताओं के बीच टकराव पैदा हो?

    इंडिया-ए के दौरे जरूरी हैं. इनसे खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों का अनुभव मिलता है और चयनकर्ताओं को भविष्य के विकल्प तैयार करने का मौका मिलता है. लेकिन क्या इन दौरों का कार्यक्रम रणजी ट्रॉफी से टकराए बिना नहीं बनाया जा सकता?

    पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने इसी मुद्दे पर आपत्ति जताई है. उनका मानना है कि रणजी के दौरान इंडिया-ए का दौरा आयोजित करने से घरेलू टूर्नामेंट की अहमियत कम होती है. उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि यदि मुख्य टीम को विदेशी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए जल्दी भेजना जरूरी है, तो उसे पहले रवाना किया जा सकता है. ऐसे खिलाड़ियों के लिए अलग दौरा आयोजित करने का क्या औचित्य है, जिनके टेस्ट सीरीज में खेलने की संभावना ही न हो?

    वेंगसरकर का सवाल घरेलू क्रिकेट की प्राथमिकताओं से जुड़ा है. राज्य टीमों को भी अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलना चाहिए. प्रमुख बल्लेबाजों और गेंदबाजों की गैरमौजूदगी से टीमों का संयोजन, तैयारी और मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है. खिलाड़ियों को इंडिया-ए के अवसर जरूर मिलने चाहिए, लेकिन बेहतर योजना बनाकर घरेलू क्रिकेट को कमजोर होने से बचाना भी बोर्ड की जिम्मेदारी है.

    खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से कैसे होगा सही मूल्यांकन?
    रणजी ट्रॉफी उन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच है, जो लंबे प्रारूप में अपनी काबिलियत साबित कर टीम इंडिया का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं. लेकिन जब प्रमुख खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं होते, तो मुकाबलों की परिस्थितियां भी बदल जाती हैं. मजबूत बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ गेंदबाजी करना और कमजोर बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ विकेट लेना एक जैसा अनुभव नहीं है. इसी तरह मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने रन बनाना किसी बल्लेबाज की तकनीक और धैर्य की अलग परीक्षा लेता है.

    वेंगसरकर की चिंता है कि यदि प्रमुख घरेलू खिलाड़ी इंडिया-ए के लिए खेलेंगे, तो रणजी में प्रदर्शन करने वाले दूसरे खिलाड़ियों के आकलन पर भी असर पड़ सकता है. यह सिर्फ खिलाड़ियों की उपलब्धता का मामला नहीं, बल्कि उनके प्रदर्शन की अहमियत और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है.

    बीसीसीआई को समझना होगा कि रणजी में बनाए गए रन और लिए गए विकेट खिलाड़ियों के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यहां प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें आगे बढ़ने की उम्मीद होती है. ऐसे में टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा मजबूत रखना और खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी है.

    रणजी के रन टीम इंडिया में सफलता की गारंटी क्यों नहीं?
    सुनील गावस्कर ने भी घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम में पहुंचने के बाद संघर्ष करते हैं. कुछ जल्द टीम से बाहर हो जाते हैं, जबकि कुछ को दोबारा मौका मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.

    यह सही है कि रणजी में अच्छा प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सफलता की गारंटी नहीं है. दोनों स्तरों की चुनौतियां अलग हैं. लेकिन सवाल यह भी है कि घरेलू प्रदर्शन का आकलन करते समय खिलाड़ियों को मिले अवसरों, विरोधियों के स्तर और परिस्थितियों को कितनी गंभीरता से देखा जाता है?

    रणजी ट्रॉफी सिर्फ रन और विकेट का हिसाब नहीं है. यह खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप की तकनीक, धैर्य, दबाव में बल्लेबाजी और लगातार कई दिन अच्छा क्रिकेट खेलने की आदत सिखाती है. टेस्ट क्रिकेट के लिए इन गुणों की खास अहमियत है. ऐसे में अगर इस टूर्नामेंट के कार्यक्रम में ही बार-बार टकराव पैदा होगा, तो मुकाबलों की गुणवत्ता और खिलाड़ियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है.

    ईरानी कप से रणजी तक, कैलेंडर पर सवाल
    यह समस्या मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं दिखती. 2025-26 रणजी ट्रॉफी चैम्पियन जम्मू-कश्मीर और रेस्ट ऑफ इंडिया के बीच ईरानी कप के दौरान भी इंडिया-ए के ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ बहुदिवसीय मुकाबलों के कारण प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे थे. अब रणजी के शुरुआती दौर का इंडिया-ए की वनडे सीरीज से टकराना और फिर न्यूजीलैंड दौरे का घरेलू सीजन के बीच पड़ना इसी समस्या को फिर सामने लाता है.

    बीसीसीआई के सामने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, खिलाड़ियों की तैयारी और घरेलू टूर्नामेंट के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती जरूर है. हर कार्यक्रम को पूरी तरह अलग रखना हमेशा संभव नहीं होता. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घरेलू क्रिकेट की जरूरतों को बार-बार पीछे कर दिया जाए. इंडिया-ए के दौरों की तारीखें तय करते समय रणजी के कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. जहां टकराव टालना संभव न हो, वहां उसके असर को कम करने के विकल्प तलाशे जाने चाहिए.

    रणजी को सम्मान चाहिए, सिर्फ सलाह नहीं
    गावस्कर ने घरेलू प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं, जबकि वेंगसरकर ने रणजी के दौरान इंडिया-ए के दौरे आयोजित करने पर आपत्ति जताई है. दोनों की चिंताएं एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती हैं- क्या भारतीय क्रिकेट का घरेलू ढांचा अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है?

    रणजी ट्रॉफी को मजबूत बनाने के लिए उसके कार्यक्रम को प्राथमिकता देना, प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और घरेलू प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. खिलाड़ियों को भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत और प्रदर्शन को सही महत्व मिलेगा.

    बीसीसीआई को तय करना होगा कि रणजी ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट की बुनियाद है या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के बीच फिट की जाने वाली एक औपचारिक प्रतियोगिता. आखिर रणजी में अच्छा प्रदर्शन करने की सलाह खिलाड़ियों को ही क्यों दी जाए? बोर्ड को भी अपने फैसलों से साबित करना होगा कि वह इस टूर्नामेंट को उतनी ही अहमियत देता है, जितनी टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए इसमें खेलने वाले खिलाड़ियों से अपेक्षा की जाती है.

  • जज के कथित अपमानजनक व्यवहार से नाराज वकील, इंदौर अभिभाषक संघ के नेतृत्व में किया प्रदर्शन

    जज के कथित अपमानजनक व्यवहार से नाराज वकील, इंदौर अभिभाषक संघ के नेतृत्व में किया प्रदर्शन

    इंदौर
     कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह से जुड़े मामले में अधिवक्ताओं में भारी रोष है। न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह के कथित अपमानजनक व्यवहार के विरोध में इंदौर अभिभाषक संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शनकारी अधिवक्ता जज के कोर्ट रूम में भी पहुँचे और वहाँ विरोध दर्ज कराया।

    अधिवक्ताओं का आरोप है कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार वकीलों के प्रति लगातार अच्छा नहीं रहा है। उनके अनुसार वकील कोर्ट में आते हैं तो उनसे "आप मुझे दिख नहीं रहे हो" जैसी बातें कही जाती हैं। आरोप यह भी है कि बहस के दौरान वकीलों को अपनी बात पूरी करने और जिरह (क्रॉस) करने नहीं दिया जाता, और उनके मुवक्किलों के सामने ही यह तक कह दिया जाता है कि "आपको वकालत करना नहीं आती, वकालत छोड़कर कोई और काम करें।"

    प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ता ने बताया कि वे चुनाव जीतकर आए हैं और जब से पदभार संभाला है, तब से इस अधिकारी की रोज शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने कहा, "इस आचरण से वकीलों में काफी रोष था। हम दो बार लिखित में उच्च न्यायालय को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज सुबह भी हम उच्च न्यायालय में शिकायत करके आए हैं।"

    अधिवक्ताओं ने इसके बाद संबंधित वरिष्ठ न्यायाधीश से भी मुलाकात की और उन्हें अपनी बात बताई। उनका कहना है कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आचरण में सुधार न हुआ तो वे उग्र आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन बाल न्यायालय पर भी हुआ, जहाँ संबंधित अधिकारी पीठासीन अधिकारी हैं।

    सामाजिक संस्था का समर्थन: इस आंदोलन को सामाजिक संस्था पौरुष, इंदौर ने भी समर्थन दिया। संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि वकीलों के साथ हो रहे कथित अन्याय के मुद्दे पर संस्था के सदस्यों ने कोर्ट के मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। दशोरा का आरोप है कि अब तक कोर्ट रूम में पुरुषों के साथ जजों द्वारा बदतमीज़ी और अपमान किया जाता रहा है और अब ऐसी घटनाएँ वकीलों के साथ भी हो रही हैं, जिसका संस्था पुरज़ोर विरोध करती है। संस्था के सदस्यों ने "अगर न्याय की बात है, हम एडवोकेट्स के साथ हैं", "अधिवक्ताओं का सम्मान करो" और "गर्व करो, अभिमान नहीं" जैसे नारों की तख्तियाँ लेकर विरोध जताया। आंदोलनकारी वकीलों ने भी हाथों में हाथ लेकर ये नारे लगाए। अभिभाषक संघ के पदाधिकारियों ने संस्था के समर्थन की सराहना की।

  • हरियाणा में सस्ती होगी सौर ऊर्जा, ₹5,000 में सोलर पैनल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी

    हरियाणा में सस्ती होगी सौर ऊर्जा, ₹5,000 में सोलर पैनल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी

     हिसार
    दीपावली पर्व पर अंत्योदय परिवार को खुशखबरी मिल सकती है। मात्र पांच हजार रुपये में घर की छत पर सोलर पैनल लगवा सकते हैं। बाकी खर्चा केंद्र व हरियाणा सरकार मिलकर उठाएंगे। खास बात यह है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग ने भी मुहर लगाकर फाइल को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को भेज दी है।

    आने वाले 20 दिन के अंदर अंत्योदय परिवार को खुशखबरी मिल सकती है। दूसरी खास बात है कि सोलर पैनल बिजली निगम की संबंधित शाखा लगाकर देगी, जिसमें वे खुद वेंडर्स से संपर्क कर अंत्योदय परिवार को योजना का लाभ दिलवाएंगे।

    अंत्योदय परिवार को सिर्फ अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करवाने होंगे। जिसके बाद संबंधित शाखा के अधिकारी उस आवेदन की मानिटरिंग कर कार्य को गति देंगे। ताकि पोर्टल पर आवेदन का पता रहे कि आवेदन किस चरण में पहुंचा है और कितने दिन में योजना का लाभ मिलेगा।

    नॉन रिफंडेबल होंगे पांच हजार रुपये
    उपरोक्त योजना के तहत जैसे ही अंत्योदय परिवार दस्तावेज प्रक्रिया पूरी कर लेता है। तो एसडीओ व एक्सईएन की जिम्मेदारी रहेगी कि वे अंत्योदय परिवार को पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल का लाभ पहुंचाए।

    इससे पहले अंत्योदय परिवार को मात्र पांच हजार रुपये का टोकन लेना होगा, जिसे दिखाकर बिजली निगम की विशेष टीम घर की छत पर सोलर पैनल लगाएगी। अंत्योदय परिवार को वेंडर्स से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    अभी तक हिसार सर्कल में साढ़े आठ हजार उपभोक्ताओं ने उठाया लाभ
    पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के हिसार जिले में 8150 उपभोक्ता संबंधित योजना का लाभ उठा चुके हैं। जबकि साढ़े तेरह हजार से अधिक आवेदन पहुंचे हैं। साढ़े पांच हजार से अधिक आवेदन लटके हैं। 13,200 उपभोक्ताओं ने वेंडरों को सेलेक्ट कर लिया है।

    हिसार प्रथम डिविजन में करीब 4400 व हिसार द्वितीय डिविजन में करीब 3100 उपभोक्ताओं ने उपरोक्त योजना का लाभ उठाया है।

    यह है पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
    भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसे 15 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। देश के एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल (रूफटाप सोलर) लगाकर उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है।

    लाभार्थी को एक किलोवाट क्षमता वाले सोलर पैनल पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट क्षमता पर 60 हजार रुपये व तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले सोलर पैनल पर 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है।

    अंत्योदय परिवार के लिए मानक
        – परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख से कम हो
        – जिस परिवार के पास जमीन न हो
        – विशेष रूप से पिछड़े जनजाति के लोग
        – विधवाएं, वृद्ध व्यक्ति और दिव्यांगजन, असंगठित क्षेत्र के दैनिक मजदूर (रिक्शा चालक, कुली, रेहड़ी-पटरी वाले) व पारंपरिक ग्रामीण कारीगर (कुम्हार, बढ़ई, बुनकर, लोहार) शामिल हैं।

        अंत्योदय परिवार को मात्र पांच हजार रुपये में पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिल सकेगा। सीएम ने मंजूरी दे दी है। आगामी कार्रवाई के लिए फाइल को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजी है। अगले 25 दिन से पहले योजना जमीन पर उतर जाएगी।

        – विक्रम सिंह, प्रबंध निदेशक, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम

     

  • शारदीय नवरात्रि में 100 साल बाद दुर्लभ योग? इन 3 राशियों की चमक सकती है किस्मत

    शारदीय नवरात्रि में 100 साल बाद दुर्लभ योग? इन 3 राशियों की चमक सकती है किस्मत

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से लेकर 19 अक्टूबर तक रहने वाले हैं. इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विधान बताया गया है. इस बार देवी का आगमन हाथी पर हुआ है जो कि एक शुभ संकेत माना जाता है. इसके अलावा ग्रहों की चाल भी कुछ दुर्लभ और शुभ योग बना रही है. ज्योतिष गणना के अनुसार, नवरात्र में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य, चंद्रमा-गुरु की केंद्रीय संबंध से गजकेसरी और बुध शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण राजयोग बन रहा है. ये दुर्लभ संयोग करीब 100 वर्ष के बाद बन रहा है. आइए जानते हैं कि यह दुर्लभ संयोग किन राशियों को लाभ देने वाला है.

    मेष राशि
    नौकरी करने वालों को तरक्की के नए मौके मिल सकते हैं. लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का अच्छा परिणाम मिलने की उम्मीद है. कारोबारियों के लिए भी लाभ के अवसर बन सकते हैं. अगर आपका पैसा कहीं अटका हुआ है तो उसके वापस मिलने की संभावना जताई जा रही है. कर्ज, उधार का बोझ भी कम होने वाला है. आर्थिक मामलों में राहत मिलने से आपकी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

    कर्क राशि
    नौकरी और कारोबार में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार का लाभ मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में बढ़ती जिम्मेदारियां आगे बढ़ने का अवसर दे सकती हैं. परिवार में खुशी का माहौल रहने की संभावना है. घर में कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है. इस दौरान कामकाज और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

    सिंह राशि
    करियर में बदलाव या किसी नई शुरुआत का मौका मिल सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों के लिए समय बेहद अनुकूल दिख रहा है. इस दौरान आपका मान-सम्मान बढ़ सकता है और आत्मविश्वास मजबूत हो सकता है. अपनी क्षमता पर भरोसा रखते हुए नए अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश करें. इस दौरान बच्चों की एकाग्रता भी बेहतर होगी. पढ़ाई-लिखाई या नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिलेंगे.

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए नवरात्रि धन और करियर से जुड़े मामलों में राहत दे सकती है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. कारोबारियों को भी लाभ के अवसर मिल सकते हैं. आर्थिक स्थिति बेहतर होने के संकेत हैं. इसके अलावा, परिवार और रिश्तों में सकारात्मकता बनी रह सकती है. कामकाज के साथ निजी जीवन में भी संतुलन बनाए रखने का मौका मिल सकता है.

  • मंईयां सम्मान योजना: कई जिलों में पैसा पहुंचा, गोड्डा-लोहरदगा में जल्द होगा भुगतान

    मंईयां सम्मान योजना: कई जिलों में पैसा पहुंचा, गोड्डा-लोहरदगा में जल्द होगा भुगतान

    रांची
     राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा को देखते हुए मुख्यमंत्री मंईयांसम्मान योजना की सितंबर माह की राशि लाभुकों के खाते में शीघ्र हस्तांतरित करने के निर्देश दिए थे। इस आलोक में अधिसंख्य जिलों में राशि लाभुकों के बैंक खाते में हस्तांतरित हो गई।

    प्रत्येक लाभुकों के खाते में ढाई हजार रुपये भेजे गए। जिन जिलों में राशि अभी तक हस्तांतरित नहीं हुई है, वहां एक-दो दिनों में यह काम पूरा होने की संभावना है। जिलों से मिली जानकारी के अनुसार, गुमला में 1.52 लाख महिला लाभुकों के खाते में राशि का भुगतान किया जा चुका है।

    चतरा में भी नौ अक्टूबर को राशि का भुगतान कर दिया गया। इसी तरह, जामताड़ा की 1,52,208, गिरिडीह की 4,56,048 तथा लातेहार की 1,29,281 महिलाओं के खाते में राशि हस्तांतरित की गई है। धनबाद में 3,46,365 लाभुकों के बीच 86.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

    गोड्डा, लोहरदगा में एक-दो दिनों में राशि जाएगी
    इसी तरह, पाकुड़, कोडरमा, पलामू, रामगढ़ में भी लाभुकों के खाते में राशि हस्तांतरित हो चुकी है। इधर, लोहरदगा की सामाजिक सुरक्षा शाखा की प्रभारी निदेशक जया शंखी मुर्मू ने बताया कि 23.13 करोड़ रुपये कोषागार से स्वीकृत होने के बाद योजना के 92,534 लाभुकों के खाते में मंगलवार तक राशि हस्तांतरित हो जाएगी। गोड्डा में भी मंइयां सम्मान योजना की राशि जारी नहीं हुई है।

    सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक ने बताया कि एक दो दिन में भुगतान खाते में जाएगा। इधर, दिवाली से पहले अक्टूबर माह की भी राशि लाभुकों के खाते में हस्तांतरित होने की संभावना है। सामाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा दुर्गा पूजा के बाद जिलों केा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया जाएगा।

  • Israel News: न्यूयॉर्क से आई फ्लाइट में बम की धमकी, बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    Israel News: न्यूयॉर्क से आई फ्लाइट में बम की धमकी, बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    न्यूयॉर्क 

    न्यूयॉर्क से इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पहुंची डेल्टा एयरलाइंस की फ्लाइट में बम होने की गुमनाम सूचना मिलने से हड़कंप मच गया. इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी को बम में विस्फोटक होने की गुमनाम सूचना मिली थी. फिलहाल विमान की तलाशी ली जा रही है। 

    सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. और विमान की तलाशी ली जा रही है। 

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही दुबई से इजरायल आ रहे विमान में ओमानी पायलट ने अपने ही को-पायलट पर हमला कर दिया था. 30 सितंबर को दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में यह घटना हुई थी। 

    फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट ने किया था हमला
    विमान में मौजूद ओमानी को-पायलट ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर कॉकपिट में हमला कर दिया था. ओमानी पायलट ने को पायलट पर इमरजेंसी कुल्हाड़ी से वार किया था और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की थी. इस दौरान विमान तेजी से नीचे गिरने लगा था. लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था जिसे कारण यात्रियों और विमान के क्रू ने अंदर आकर हमलावरों को काबू में किया। 

    विमान में मौजूद ऑफ ड्यूटी पायलट ने फ्लाइट को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कराया था. मामले की जांच अब भी की जा रही है. इस घटना के बाद भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की दुनिया भर में प्रशंसा हुई। 

  • यूपी में दलित वोटों पर सियासी नजर, पासी समाज को साधने के लिए भाजपा की तैयारी तेज

    यूपी में दलित वोटों पर सियासी नजर, पासी समाज को साधने के लिए भाजपा की तैयारी तेज

     लखनऊ
    विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने जातीय समीकरण की हर कड़ी मजबूत करने में जुटी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराजगी और पासी समाज की बेचैनी दूर करने के लिए भाजपा ने गियर बदला है।

    प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने मुख्यालय पर 14 अक्टूबर को पासी समाज के जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की बैठक बुलाया था, जिसे फिलहाल टाला गया है। बैठक अगले सप्ताह बुलाई जाएगी।

    अनुसूचित वर्ग में जाटव के बाद सबसे बड़ी आबादी पासी समाज की है। अवध, गोरखपुर, कानपुर एवं काशी क्षेत्र में इनकी बड़ी आबादी है। भाजपाइयों का कहना है कि यह समाज प्रदेश की 85 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है, जबकि डेढ़ सौ सीटों पर असर रखता है।

    पार्टी ने हाल में भले ही प्रियंका रावत को राज्य सभा भेजकर पासी समाज में पैठ बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन कौशल किशोर की नाराजगी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले दिनों भाजपा ने कृष्णा पासवान को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया।

    प्रदेश संगठन में अशोक रावत, उपेंद्र रावत एवं प्रियंका रावत को शामिल किया। भाजपा के पास जयप्रकाश रावत, अशोक रावत एवं कमलेश पासवान के रूप में तीन, जबकि सपा के पास आरके चौधरी, प्रिया सरोज, दारोगा प्रसाद सरोज, पुष्पेंद्र सरोज एवं अवधेश प्रसाद के रूप में पासी समाज के पांच सांसद हैं।

    फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के जरिए सपा बड़ा राजनीतिक संदेश दे रही है। सपा ने इंद्रजीत सरोज, आरके चौधरी, पुष्पेंद्र सरोज व प्रिया सरोज को सक्रिय कर दिया है।

    भाजपा ने 2014, 2027, 2019 एवं 2022 के चुनाव में गैर जाटव दलित राजनीति का सफल प्रयोग किया, लेकिन 2024 में सपा के पीडीए ने भाजपा के सामने खतरे की घंटी बजा दी। अब भाजपा एक बार फिर पासी समाज से अपने संबंधों के तार कसने में जुटी है।

     

  • किलर लुक और एडवांस फीचर्स के साथ आई Hyundai Bayon, जानें कीमत, बुकिंग और क्या है खास

    किलर लुक और एडवांस फीचर्स के साथ आई Hyundai Bayon, जानें कीमत, बुकिंग और क्या है खास

    नई दिल्ली

    त्योहारी सीजन है. बाजार में रौनक है, शोरूम में चमक है और घरों में नई गाड़ी लाने की प्लानिंग बन रही हैं. कोई बजट देख रहा है, कोई फीचर्स और कोई ऐसी SUV तलाश रहा है, जो पड़ोसियों की नजर भी खींचे और जेब पर बहुत भारी भी न पड़े. इसी मौके पर Hyundai ने अपनी ब्रांड न्यू एसयूवी Bayon से पर्दा उठाया है. डिजाइन से लेकर 12.3 इंच की दो स्क्रीन और Generative AI वॉयस असिस्टेंट तक, Bayon ने अपनी दावेदारी अभी से पेश कर दी है. Venue और Creta के बीच आने वाली ये एसयूवी सेगमेंट में एक साथ कई दिग्गज प्लेयर्स को टक्कर देने का मद्दा रखती है। 

    Hyundai Bayon की आधिकारिक बुकिंग शुरू कर दी गई है. इसे ग्राहक कंपनी के ऑफिशियल वेबसाइट और अधिकृत डीलरशिप के माध्यम से महज 11,000 रुपये में बुक कर सकते हैं. इस कार को आगामी 26 अक्टूबर को बिक्री के लिए लॉन्च किया जाएगा. उसी वक्त इस एसयूवी की कीमतों का ऐलान भी होगा. तो आइये देखें कैसी है नई BAYON .

    Hyundai Bayon का लुक और डिजाइन
    खास बात यह है कि नई Bayon साइज में क्रेटा से छोटी और वेन्यू से बड़ी होगी. इसका सीधा मुकाबला Maruti Victoris जैसी SUV से होगा. नए डिजाइन, प्रीमियम केबिन और दमदार फीचर्स के साथ आने वाली इस SUV का डिजाइन काफी यूनिक और स्मार्ट नज़र आ रहा है. इसमें कंपनी की लेटेस्ट 'Art of Steel' डिजाइन थीम देखने को मिलती है. इसका लुक काफी हद तक बड़ी Hyundai Tucson जैसा नजर आता है। 

    हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी लंबाई और दूसरे आकार से जुड़ी पूरी जानकारी साझा नहीं की है. उम्मीद है कि इसकी लंबाई 4 मीटर से थोड़ी ज्यादा होगी. इस तरह यह 4.3 मीटर लंबी Hyundai Creta से थोड़ी छोटी हो सकती है। 

    SUV के फ्रंट में स्प्लिट हेडलैंप सेटअप दिया गया है. बोनट के अगले हिस्से पर पतली ब्लैक स्ट्रिप में LED DRLs लगाए गए हैं, जिनका डिजाइन हुंडई के 'H' लैटर से इंस्पायर्ड है. जो आपको इससे पहले भी कंपनी की कई अलग-अलग एसयूवी में देखने को मिली है. एक चीज जो हुंडई ने अलग किया है वो है, इस एसयूवी में कनेक्टिंग और पूरी चौड़ाई वाली LED लाइट बार नहीं दी है. बंपर पर मेन हेडलैंप यूनिट के साथ ब्लैक और सिल्वर रंग की मोटी क्लैडिंग दी गई है, जो इसके फ्रंट लुक को स्ट्रांग प्रेजेंस देती है। 

    साइड से देखने पर Bayon का डिजाइन और भी अलग नजर आता है. इसमें बाहर निकले हुए व्हील आर्च, शार्प बॉडी लाइन्स और चारों पहियों के आसपास मोटी क्लैडिंग दी गई है. इसके पेटल डिजाइन वाले अलॉय व्हील भी SUV को स्टाइलिश लुक देते हैं. कंपनी ने दरवाजों पर रेगुलर पुल-टाइप हैंडल दिए हैं, जबकि विंडो के आसपास पियानो ब्लैक फिनिश दी गई है। 

    Bayon के पिछले हिस्से की बात करें तो पीछे की तरफ पतली ब्लैक स्ट्रिकप के साथ नए टेललैंप दिए गए हैं. टेलगेट के बीच में बड़े अक्षरों में Bayon लिखा हुआ है. इसके अलावा रूफ स्पॉयलर और ब्लैक-सिल्वर फिनिश वाला रियर बंपर भी मिलता है. कुल मिलाकर, Bayon का डिजाइन ट्रेडिशनल स्क्वॉयर SUV के बजाय एक स्टाइलिश क्रॉसओवर जैसा है. जो उम्मीद है कि ग्राहकों को पसंद आएगा। 

    हाईटेक केबिन
    Hyundai Bayon का इंटीरियर काफी शानदार है. केबिन की सबसे बड़ी खासियत 12.3-इंच की डुअल स्क्रीन है. इनमें एक स्क्रीन ड्राइवर के लिए इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर का काम करेगी, जबकि दूसरी का इस्तेमाल इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए होगा. इन स्क्रीन के नीचे एयर कंडीशनिंग और क्लाइमेट कंट्रोल से जुड़े बटन और डिस्प्ले दिए गए हैं. अच्छी बात यह है कि कंपनी ने हर काम के लिए टचस्क्रीन पर निर्भर रहने के बजाय कई फिजिकल बटन और नॉब भी दिए हैं। 

    टचस्क्रीन के नीचे शॉर्टकट बटन मिलते हैं, जबकि स्टीयरिंग व्हील पर भी कई कंट्रोल दिए गए हैं. सेंटर कंसोल पर टच-सेंसिटिव बटन भी मिलते हैं. इसका स्टीयरिंग व्हील Hyundai Venue जैसा है और इसमें ड्राइव मोड चुनने के लिए अलग कंट्रोल भी दिया गया है। 

    Generative AI वॉयस असिस्टेंट
    नई Bayon में फीचर्स की लंबी लिस्ट मिलेगी. इसका सबसे खास फीचर Generative AI बेस्ड वॉयस असिस्टेंट है. कंपनी के मुताबिक, भारतीय बाजार में Hyundai की किसी गाड़ी में पहली बार यह तकनीक दी जा रही है. इस सिस्टम की मदद से ड्राइवर गाड़ी से रेगुलर बातचीत की तरह बात कर सकेगा. यानी हर बार पहले से तय कमांड बोलने की जरूरत नहीं होगी. हुंडई का दावा है कि यह सिस्टम बातचीत के अंदाज में पूछे गए सवालों को समझकर उनसे जुड़ी जानकारी दे सकेगा। 

    इसके अलावा SUV में Bluelink कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी मिलेगी, जिसमें 70 से ज्यादा फीचर्स होंगे. इसमें OTA अपडेट, इनबिल्ट नेविगेशन, स्प्लिट-स्क्रीन और स्मार्टफोन जैसे क्विक कंट्रोल शामिल हैं. कंपनी इसमें कई भाषाओं का सपोर्ट भी देगी, जिसमें 10 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं और 2 अंतरराष्ट्रीय भाषाएं शामिल हैं। 

    इंजन और परफॉर्मेंस
    कंपनी का कहना है कि, Hyundai Bayon में 1.5-लीटर, चार-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन दिया जाएगा. यह वही इंजन है जो Creta में भी मिलता है. ये इंजन 115hp की पावर और 144Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. ट्रांसमिशन के लिए इसमें मैनुअल और CVT गियरबॉक्स का विकल्प मिलेगा. फिलहाल कंपनी ने इसके CNG वर्जन को पेश किए जाने की जानकारी नहीं दी है. लेकिन जानकारों का मानना है कि, इसे भविष्य में अंडरबॉडी CNG टैंक के साथ भी पेश किया जा सकता है। 

    क्या होगी कीमत
    लॉन्च से पहले Hyundai Bayon की कीमत के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. लेकिन ये हुंडई के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी. इसे ऐसे प्राइस के साथ बाजार में उतारना होगा जिससे वेन्यू और क्रेटा दोनों के ग्राहक इफेक्ट न हो. ऐसा माना जा रहा है कि, कंपनी इस एसयूवी को 8.5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच लॉन्च कर सकती है। 

  • सगाई तोड़ने के फैसले पर आकृति अग्रवाल ने मानी गलती, पृथ्वी शॉ के साथ फिर आईं करीब

    सगाई तोड़ने के फैसले पर आकृति अग्रवाल ने मानी गलती, पृथ्वी शॉ के साथ फिर आईं करीब

    नई दिल्ली
     भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और एक्ट्रेस-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल ने अपना रिश्ता फिर से जोड़ने का फैसला किया है। इसी साल मार्च में दोनों ने सगाई खी थी। हालांकि, सितंबर में आकृति ने बताया था कि दोनों ने अलग होने का फैसला किया है। उस समय उन्होंने फ्यूचर और परिस्थितियों में अंतर को इसकी वजह बताया था। अब दोनों ने अपना फैसला बदल लिया है। आकृति ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी। पृथ्वी शॉ ने भी इस पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया।

    आकृति अग्रवाल ने मानी अपनी गलती
    आकृति ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उन्होंने सगाई तोड़ने का फैसला किया था, तब उन्होंने अपने करीबियों की बातों को अपने रिश्ते पर हावी होने दिया। उन्होंने लिखा, 'जब मैंने हमारी सगाई तोड़ी थी तो मैंने अपने करीबियों की राय को खुद पर हावी होने दिया। जिन्हें लगता था कि वे हमारे रिश्ते को हमसे बेहतर समझते हैं। उसी वजह से मंगेतर और हमारे रिश्ते के प्रति मेरा नजरिया बदल गया। मुझे लगता है कि मुझे भड़काया गया था और मैंने वह फैसला बिना आपस में बात किए ले लिया जिसकी हमें जरूरत थी।'

    आकृति के मुताबिक दोनों ने अब खुलकर बात की है और एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझा है। उन्होंने लिखा- मैं उस फैसले और उससे पहुंची ठेस की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं। इसके बाद हमने आपस में खुलकर बात की है, एक-दूसरे को समझा है और फिर से एक साथ होने का फैसला किया है। एक साथ मिलकर हम एक-दूसरे के लिए काफी हैं और हमें किसी तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। इस बार मैं चाहती हूं कि हमारा भविष्य हमारी अपनी समझ, विश्वास और प्यार से चले। नई शुरुआत करते हुए हमारे इस फैसले का सम्मान करें।

    रणजी ट्रॉफी में खेल रहे पृथ्वी शॉ
    26 साल के पृथ्वी शॉ की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 विश्व कप 2018 का खिताब जीता था। उसी साल डेब्यू करते हुए उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक लगा दिया था। पृथ्वी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता था लेकिन चोट और खराब फॉर्म के कारण उनका करियर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। 2025-26 घरेलू सीजन से पहले पृथ्वी शॉ ने मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र का रुख किया था। अभी वह रणजी ट्रॉफी में खेल रहे हैं। रविवार को सर्विसेज के खिलाफ महाराष्ट्र की कप्तानी करते हुए पृथ्वी ने 73 गेंदों पर 70 रन बनाए।

  • मध्य प्रदेश में 12 आदिवासी परिवारों के मकान गिराने पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की होगी जांच

    मध्य प्रदेश में 12 आदिवासी परिवारों के मकान गिराने पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की होगी जांच

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के एक गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान गिराए जाने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। यह कदम केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रभावित परिवारों से मिलने और वन विभाग व स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने के एक दिन बाद उठाया गया है।

    शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने और उनकी फसल नष्ट किए जाने को सरासर 'अन्याय' करार दिया। उन्होंने रविवार को कहा कि यह कार्रवाई अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा की छवि खराब करने की साजिश प्रतीत होती है।

    पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि यहां जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद है। मैंने सालों पहले अधिकारियों से कहा था कि इन परिवारों को परेशान न किया जाए, क्योंकि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री को इनके आंसुओं, बर्बाद हुई फसलों और उजड़े भविष्य के बारे में बताऊंगा। कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के विदिशा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

    मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि मैंने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। हमारी सरकार संवेदनशील है और जांच के बाद सारी स्थिति साफ हो जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर इन परिवारों की परेशानी से उन्हें अवगत करा सकते हैं। वन विकास निगम के सूत्रों के मुताबिक, इन 12 परिवारों ने वन भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ था। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2021 में 186.9 हेक्टेयर जमीन पर पौधारोपण किया गया था, जिसमें से 38.84 हेक्टेयर पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर लिया गया था।

    क्या था मामला ?
    कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई थी। वह देर रात पीड़ित आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने कार्रवाई को लेकर कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए पक्के मकान बनवाए जाएंगे। स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने और खाने-पीने का खर्च उठाने की बात भी उन्होंने कही थी।

    अधिकारियों से चर्चा के बाद भी हुई कार्रवाई
    शिवराज सिंह चौहान ने बताया था कि कार्रवाई रोकने के लिए उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से चर्चा की थी। इसके बावजूद तोड़फोड़ की कार्रवाई होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और कार्रवाई में शामिल दोषी वन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

    प्रशासन ने बताई कार्रवाई की वजह
    प्रशासन के मुताबिक, सीहोर जिले के वन विकास निगम के वन कक्ष क्रमांक 426 में वर्ष 2021 में पौधरोपण किया गया था। प्रशासन का आरोप है कि सिंहपुर के 10 आदिवासी परिवारों ने इस क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर खेती शुरू कर दी थी और झोपड़ियां बना ली थीं। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित परिवारों के खिलाफ पहले से वन अपराध के मामले दर्ज थे और उन्हें बेदखली के नोटिस भी दिए गए थे। प्रशासन का कहना है कि इन्हीं प्रक्रियाओं के तहत झोपड़ियों को हटाया गया।

    OBC आरक्षण पर भी सरकार करा रही परीक्षण
    अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में जांच की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले का परीक्षण करा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आगे की कार्रवाई या निर्णय की समयसीमा को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

    पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज, कार्रवाई पर जताई नाराजगी
    यह पूरा मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव का है। यहां वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने की शिकायत सामने आई थी। रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं।

    मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से की बात
    मौके पर वरिष्ठ प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई। उन्होंने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी चिंता व्यक्त की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बातचीत कर प्रभावित परिवारों की स्थिति से अवगत कराया।

    शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी आवास की व्यवस्था होने तक अस्थायी रूप से रहने तथा भोजन-पानी की सुविधा सुनिश्चित करने की बात कही।

    घरों के साथ फसल और पानी का संकट भी
    कोसमी गांव की कार्रवाई को लेकर उठे सवाल केवल आवास तक सीमित नहीं हैं। प्रभावित परिवारों की मक्का और तुअर की फसलों को नुकसान पहुंचने तथा पानी के लिए उपयोग किए जाने वाले कुएं में मिट्टी भरने की बात भी सामने आई है। इससे ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका को लेकर मुश्किलें खड़ी होने की चिंता जताई जा रही है।

    अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर होने वाली जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में कार्रवाई की परिस्थितियों, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान जैसे पहलुओं की पड़ताल किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी परिवारों को राहत और आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।