Author: NewseDay

  • प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़

    प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़

    जयपुर
     राज्य सरकार प्रदेश में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं समान रूप से सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में मंगलवार को यूनिसेफ़  इंडिया के उप प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने मंगलवार को शासन सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति एवं आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।

    बैठक में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष रूप से संवेदनशील एवं वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ के बीच जारी साझेदारी को और मजबूत करते हुए नई स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान, नवाचार तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    जेस्पर मोलर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद इक्विटी गैप्स पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के पास व्यापक स्तर पर सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता है, जबकि यूनिसेफ़ नवाचार, साक्ष्य आधारित समाधान एवं प्रभावी मॉडल उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। बैठक में इन समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में लाइफ-साइकिल अप्रोच को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस और समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों से लेकर माताओं एवं नवजातों तक स्वास्थ्य सेवाओं को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना है।

    यूनिसेफ़ के उप प्रतिनिधि ने प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और यूनिसेफ़ से इस संबंध में विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

    मोलर ने प्रमुख शासन सचिव को राजस्थान दौरे के दौरान किशनगढ़ स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के अपने दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यहां चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कमजोर एवं गंभीर नवजातों की जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों को देखा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता एवं सेवाभाव की सराहना की।

    बैठक में यूनिसेफ़ के आगामी कंट्री प्रोग्राम 2028–2032 को लेकर प्रारंभिक चर्चाओं और राजस्थान की प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। नई एवं उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के साथ वर्तमान उपलब्धियों को बनाए रखने तथा जिन क्षेत्रों में अभी गैप हैं, उन्हें भरने के लिए यूनिसेफ़ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

    बैठक के अंत में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य प्रणालियों को और सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विशेष रूप से माताओं, नवजातों, बच्चों एवं किशोरों जैसे संवेदनशील वर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

  • पथ निर्माण विभाग की योजना के तहत राज्य के 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर चरणबद्ध तरीके से वसूला जाएगा टोल

    पथ निर्माण विभाग की योजना के तहत राज्य के 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर चरणबद्ध तरीके से वसूला जाएगा टोल

    पटना
    बिहार में स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स की वसूली की शुरुआत दो प्रमुख रोड से होने वाली है। इनमें बिहटा (पटना) से सरमेरा (नालंदा) के बीच स्टेट हाईवे नंबर 78 और उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) से भटगामा के बीच एसएच 58 पर टोल नाके लगाए जाएंगे। इसके लिए बिहार सरकार ने टेंडर जारी कर दिया है। सबसे पहले इन्हीं दोनों स्टेट हाईवे से टोल वसूलने की तैयारी की जा रही है। हाईवे पर चलने वाले सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से टोल लिया जाएगा, निजी वाहनों से किसी तरह की राशि नहीं वसूली जाएगी।

    इन दोनों स्टेट हाईवे पर टोल प्लाजा बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पथ निर्माण विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य के लगभग भी स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन पुलों पर चरणवार तरीके से टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था लागू की जाएगी। सभी हाईवे और पुलों पर एक साथ टोल नाके नहीं लगाए जाएंगे। बल्कि, धीरे-धीरे करके यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

    आरा-छपरा पुल पर भी टोल नाका लगाने की तैयारी
    बिहार राज्य पथ विकास निगम की ओर से स्टेट हाईवे और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से पुलों पर टोल टैक्स वसूले जाने की कार्रवाई चल रही है। पुल निगम के द्वारा प्राथमिकता के तौर पर आरा-छपरा ब्रिज समेत अन्य कुछ बड़े पुलों पर सबसे पहले टोल लिए जाने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है।

    बताया जा रहा है कि इन पुलों पर भी टोल वसूलने को लेकर एजेंसी के चयन के लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा। आरा-छपरा पुल के लिए पूर्व में भी निविदा जारी की गई थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से उसे वापस ले लिया गया था। अब नए सिरे से टेंडर निकाला जाएगा।

    3 महीने में शुरू हो सकती है टोल वसूली
    पदाधिकारी बताते हैं कि अगले दो से तीन महीने के भीतर कुछ स्टेट हाईवे पर टोल वसूली का काम शुरू हो जाएगा। विदित हो कि बिहार के 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर टोल वसूले जाने की राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।

  • बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र का लड़का है नाबालिग

    बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र का लड़का है नाबालिग

    प्रयागराज
    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नाबालिगों की शादी का रजिस्ट्रेशन होने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने राज्य के सभी विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले दूल्हा और दुल्हन की उम्र की जांच की जाए। यह निर्देश गाजियाबाद में नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन होने के मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने कहा कि नाबालिगों की शादी के रजिस्ट्रेशन के मामले सिर्फ कभी-कभार सामने नहीं आ रहे हैं, बल्कि ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं।

    हाई कोर्ट ने साफ किया कि शादी के दिन अगर दूल्हा या दुल्हन में से कोई भी कानून के मुताबिक नाबालिग है, तो उस शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिकारियों को दोनों की उम्र की जांच भरोसेमंद दस्तावेजों और तय प्रक्रिया के तहत करनी होगी। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र का लड़का नाबालिग माना जाता है।

    हाई कोर्ट का सख्त निर्देश
    अदालत ने कहा कि अगर दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों में से कोई तय उम्र से कम है, तो आवेदन को सामान्य रजिस्ट्रेशन की तरह नहीं लिया जाए। ऐसे मामले की जानकारी तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी और संबंधित जिले के सक्षम अधिकारी को दी जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। मामला उस समय सामने आया जब एक व्यक्ति ने पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामले में हाई कोर्ट का रुख किया। आरोपी के वकील ने दावा किया कि लड़की बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की थी। शादी के बाद उसका रजिस्ट्रेशन भी हुआ और प्रमाणपत्र जारी किया गया।

    राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट लड़की को नाबालिग मान चुका है। सरकार ने यह भी कहा कि उम्र छिपाकर हासिल किए गए शादी के प्रमाणपत्र से लड़की के बालिग होने की पुष्टि नहीं होती। हाई कोर्ट ने संबंधित विवाह पंजीकरण अधिकारी को तलब कर पूछा कि नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ। अधिकारी ने कहा कि उसने पिछले प्रभारी अधिकारी से कार्यभार संभाला था और उसे इस रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने इस जवाब को गंभीर चिंता का विषय बताया। अदालत ने कहा कि विभागीय निर्देशों में पहले से ही दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि की जांच जरूरी है।

  • रोहतक से लुधियाना, जालंधर और डेरा ब्यास तक के लिए तय किया गया अलग-अलग किराया

    रोहतक से लुधियाना, जालंधर और डेरा ब्यास तक के लिए तय किया गया अलग-अलग किराया

     रोहतक
     हरियाणा रोडवेज से पंजाब का सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। रोहतक से डेरा ब्यास के लिए सीधी बस सर्विस का नया टाइम टेबल सामने आया है।

    सोनीपत डिपो के गोहाना उपकेंद्र की बस रोहतक से सुबह आठ बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। यह बस गोहाना, पानीपत सहित सात शहरों से होकर गुजरेगी।

    कहां-कहां से होकर जाएगी बसें
    हरियाणा रोडवेज के अनुसार, बस रोहतक से सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना, पानीपत, करनाल, अंबाला, राजपुरा, लुधियाना बाईपास, जालंधर और करतारपुर से होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे डेरा ब्यास तक पहुंचेगी।

    किस शहर से कितने बजे मिलेगी बस
    रोहतक से बस 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना से सुबह 9 बजे प्रस्थान करेगी। पानीपत से सुबह 10 बजे और करनाल से सुबह 11 बजे यह बस रवाना होगी।

    अंबाला से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। जालंधर में शाम चार बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे बस डेरा ब्यास पहुंचेगी।

    कितना होगा किराया?
        रोहतक से लुधियाना का किराया 410 रुपये।
        रोहतक से जालंधर का किराया 510 रुपये
        रोहतक से डेरा ब्यास का किराया 565 रुपये।
        गोहाना से डेरा ब्यास का किराया 535 रुपये ।
        पानीपत से डेरा ब्यास का किरााय 480 रुपये।

    वापसी का समय
    बस डेरा ब्यास से रात दो बजे रवाना होगी। इसके बाद जालंधर से तीन बजे बस रवाना होगी और अंबाला से सुबह छह बजे बस रोहतक के लिए रवाना होगी

     

  • बार और बेंच के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को आधुनिक कार्य सुविधाएं देना सरकार का संकल्प

    बार और बेंच के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को आधुनिक कार्य सुविधाएं देना सरकार का संकल्प

    लखनऊ
     यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायिक व्यवस्था और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया। नए भवन की चाभी सौंपे जाने के अवसर पर डिप्टी सीएम ने अधिवक्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास पूरे देश की न्यायिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्रयागराज एक ओर आस्था का संगम है, तो दूसरी ओर न्याय की समृद्ध परंपरा का प्रतीक। राजनीतिक संदर्भ जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि हर पांच वर्ष में जनता की अदालत में जाते हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं से कहा, ‘आप सबका मुकदमा लड़ते हैं, हम 2027 का मुकदमा आपकी अदालत में छोड़कर जा रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सरकार के अच्छे कार्यों को आपका समर्थन, न्याय और आशीर्वाद मिलेगा।’

    प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए केशव मौर्य ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों पर था और जमीन पर गुंडाराज चलता था। प्रयागराज इसका प्रमुख केंद्र बना हुआ था। आज योगी सरकार की नीति स्पष्ट है, निर्दोष को छेड़ा नहीं जाएगा और दोषी को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कानून बनाती है, लेकिन उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ता एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं।

    डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि न्याय व्यवस्था में प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि कानून सबके लिए समान हो, चाहे कोई गरीब हो या प्रभावशाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के साथ-साथ डिजिटल व्यवस्था और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को बढ़ावा मिल रहा है। पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर नए न्याय-केंद्रित आपराधिक कानून लागू करना देश की न्याय प्रणाली में युगांतरकारी बदलाव है। ​उपमुख्यमंत्री ने बार और बेंच के समन्वय की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को सम्मान, सुरक्षा और आधुनिक कार्य सुविधाएं देना सरकार का संकल्प है, ताकि आम नागरिक को समयबद्ध और सुलभ न्याय मिल सके।

    चुनौतियों का सामना कर कानून व्यवस्था में किया बदलाव
    वहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उपस्थित अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम ने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के पूर्व की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद किस तरह से इन चुनौतियों का सामना कर कानून और न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया।

  • डीजल महंगा होते ही सड़कों पर उतरे लोग, सीरिया में 40% कीमत बढ़ने से बवाल

    डीजल महंगा होते ही सड़कों पर उतरे लोग, सीरिया में 40% कीमत बढ़ने से बवाल

    दमिश्क

    कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग का असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ने लगा है। अभी भारत में फिलहाल राहत है, लेकिन सीरिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर लोगों का गुस्सा भड़क गया। वहां लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और कई प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया। इनमें राजधानी दमिश्क को औद्योगिक शहर अलेप्पो से जोड़ने वाला हाईवे भी शामिल है।

    एक झटके में 40% बढ़ा दिया डीजल का दाम
    रॉयटर्स के मुताबिक सीरिया की सरकार ने शनिवार को डीजल की कीमत 40% बढ़ाकर 175 सीरियाई पाउंड प्रति लीटर कर दी। यह करीब 1.32 डॉलर यानी लगभग ₹127 प्रति लीटर बैठता है। कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब सीरिया की करीब 90% आबादी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है। सीरियाई गृहयुद्ध शुरू होने से पहले 2011 में यह आंकड़ा करीब एक-तिहाई था।

    पेट्रोल और गैस भी महंगी
    सरकार ने डीजल के अलावा कई अन्य ईंधनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। घरेलू और औद्योगिक गैस की कीमत करीब 9% बढ़ाई गई है। वहीं, 95 ऑक्टेन पेट्रोल 28% बढ़कर 195 पाउंड और 90 ऑक्टेन पेट्रोल 26% बढ़कर 185 पाउंड प्रति लीटर हो गया है।

    दुनिया के कई देशों में किमतें आसमान पर, लेकिन भारत में राहत
    युद्ध के बाद से भारत में अभी तक पेट्रोल-डीजल के रेट में करीब 8 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई है। वहीं, पेट्रोल-डीजल महंगा करने वाले टॉप 5 देशों की बात करें तो नाइजीरिया पेट्रोल के मामले में टॉप पर है। यहां पेट्रोल 60.7 प्रतिशत महंगा हुआ है। जबकि, डीजल 92.3 प्रतिशत।

    यूएई में पेट्रोल 58.4 प्रतिशत महंगा हुआ है तो डीजल के दाम 70.6 प्रतिशत बढ़े हैं। म्यांमार में पेट्रोल 55.4 और डीजल 71.9 प्रतिशत महंगा हुआ है। मलेशिया में पेट्रोल करीब डेढ़ गुना महंगा हो गया तो डीजल के दाम 56 प्रतिशत से अधिक उछल गए हैं।

    अगर केवल डीजल की बात करें इंडेनेशिया दूसरा सबसे अधिक महंगाई की मार झेल रहा है। यह डीजल करीब 87 प्रतिशत महंगा हो चुका है। इसके बाद लेबनान है जहां डीजल 80 प्रतिशत महंगा हुआ है।

    रूस से तेल सप्लाई पर भी दबाव
    सीरिया के ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुलहमीद सलात के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ईंधन खरीद की लागत बढ़ने और आयात पर सीरिया की भारी निर्भरता के कारण यह फैसला लिया गया है। परिस्थितियां बदलने पर कीमतें फिर घटाई या बढ़ाई जा सकती हैं।

    सीरिया इस साल रूस से करीब 60,000 बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन आयात कर रहा है। हालांकि दमिश्क ने अमेरिका से कहा है कि वह रूसी तेल की खरीद में भारी कटौती करने को तैयार है।

    यूक्रेन के रूसी रिफाइनरियों पर हमलों से रूस में ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बाद मॉस्को ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर भी पाबंदियां लगाई हैं। इससे सीरिया की तेल क सप्लाई पर दबाव और बढ़ गया है।

    सबसे बड़ी बनियास रिफाइनरी बंद: इसके अलावा सीरिया की सबसे बड़ी बनियास रिफाइनरी करीब तीन महीने से बंद है। यहां पहली बार बड़े स्तर पर रखरखाव का काम चल रहा है, जिससे ईंधन की कमी और गहरा गई है।

    फरवरी से पेट्रोल 86% और डीजल दोगुने से ज्यादा महंगा
    नई बढ़ोतरी के बाद सीरिया में 95 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत फरवरी के मुकाबले करीब 86% बढ़ चुकी है, जबकि डीजल की कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 44% बढ़कर 72 डॉलर से 107 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है।

  • प्राधिकरण और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए जल्द एनबीएफसी और एलडीएम के साथ होगी बैठक

    प्राधिकरण और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए जल्द एनबीएफसी और एलडीएम के साथ होगी बैठक

    गोरखपुर
    अब सिर्फ भू-प्रयोग सही होने के आधार पर घर बनाने के लिए के लिए होम लोन पास नहीं किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भवन का मानचित्र स्वीकृत होने या मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किए जाने के बाद ही होम लोन की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इससे बिना मानचित्र स्वीकृति के भवन निर्माण के लिए लोन मिलने की संभावना पर रोक लगेगी। अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

    गोरखपुर के एनेक्सी भवन में सोमवार को प्राधिकरण और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों की बैठक में गृह ऋण प्रक्रिया को लेकर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने की। उन्होंने बैंकों और प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय के साथ ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जिससे ऋण प्रक्रिया सरल भी हो और भवन निर्माण के नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो। प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि प्राधिकरण की ओर से अपने एलटीपी (लाइसेंस्ड टाउन प्लानर) का पूरा डेटा संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया कि जनसामान्य की सुविधा और जागरूकता के लिए इस डेटा के साथ संबंधित मोबाइल नंबर अपनी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इससे भवन मानचित्र से जुड़ी जानकारी लेने वाले आवेदकों को सही संपर्क उपलब्ध हो सकेगा। प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम कम होगा।

    इस बैठक में यह भी तय हुआ कि बैंक गृह ऋण से संबंधित प्राप्त आवेदनों का आवश्यक डेटा नियमित रूप से प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगे। इससे प्राधिकरण अवगत हो सकेगा कि किन क्षेत्रों और भवनों के लिए गृह ऋण के आवेदन मिल रहे हैं। इसके आधार पर मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में भी बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

    एनबीएफसी और लीड बैंक मैनेजर संग बैठक जल्द
    बैंक अधिकारियों ने बताया कि गृह ऋण केवल पारंपरिक बैंकों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एनबीएफसी के जरिये भी मिलता है। एसबीआइ और पीएनबी के शाखा प्रबंधकों ने प्रक्रिया में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को भी शामिल करने का सुझाव दिया। जीडीए उपाध्यक्ष ने सहमति जताते हुए एनबीएफसी और एलडीएम के साथ शीघ्र अलग बैठक करने का आश्वासन दिया।

    एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी जीडीए की सुविधाएं
    गोरखपुर विकास प्राधिकरण अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तेज बनाने की तैयारी में है। इसके लिए प्राधिकरण में इंटीग्रेटेड ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) एवं सिटीजन सर्विसेज प्लेटफॉर्म लागू करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण के विभिन्न अनुभागों की कार्यप्रणाली को एकीकृत करने के साथ नागरिक सेवाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। प्रस्तावित सिटीजन सर्विसेज पोर्टल पर ही नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन, भुगतान, शिकायत निवारण, नीलामी और आवेदन की स्थिति की ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

    डिजिटल होगी फाइलों की आवाजाही
    ईआरपी में वर्कफ्लो ऑटोमेशन की व्यवस्था होगी। इसके तहत डिजिटल अनुमोदन, फाइल ट्रैकिंग और अधिकारियों-कर्मचारियों को सूचनाएं भेजने की सुविधा रहेगी। प्रत्येक प्रक्रिया का ऑडिट ट्रेल उपलब्ध होने से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि फाइल किस स्तर पर और कितने समय से लंबित है। ई-ऑफिस की कार्यक्षमता को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

    रियल टाइम डैशबोर्ड से होगी निगरानी
    प्राधिकरण रियल टाइम एमआईएस और डैशबोर्ड विकसित करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण की परियोजनाओं, वित्तीय स्थिति, नागरिक सेवाओं की डिलीवरी और संगठनात्मक प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी। प्रस्तावित प्रणाली में पेमेंट गेटवे, ओबीपीएएस-फास्टपास, आधार सत्यापन और डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) के एकीकरण की व्यवस्था होगी। भूमिका आधारित एक्सेस कंट्रोल से अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार सिस्टम तक पहुंच दी जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे आंतरिक कार्यप्रणाली मजबूत होने के साथ फास्टर पब्लिक डिलीवरी और कार्यों में तेजी आएगी।

    बोर्ड की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू
    प्राधिकरण की ओर से इस प्रस्ताव का उद्देश्य अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, आंतरिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी में तेजी लाना है। बोर्ड से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

  • Emmy Awards 2026: जीन स्मार्ट ने पांचवीं बार जीता ‘Hacks’ अवॉर्ड, टॉम हॉलैंड-जैंडाया ने लूटी महफिल

    Emmy Awards 2026: जीन स्मार्ट ने पांचवीं बार जीता ‘Hacks’ अवॉर्ड, टॉम हॉलैंड-जैंडाया ने लूटी महफिल

     लंदन 
    78वें प्राइमटा
    इम एमी अवार्ड्स समारोह में टेलीविजन जगत के दिग्गज सितारे 14 सितंबर को लॉस एंजिल्स के पीकॉक थिएटर में एक साथ जुटे. समारोह की मेजबानी 'लॉ एंड ऑर्डर: स्पेशल विक्टिम्स यूनिट' की स्टार मारिस्का हार्गिटे ने की. भारत में इसका प्रसारण 15 सितंबर की सुबह हुआ. एचबीओ मैक्स के मेडिकल ड्रामा 'द पिट' को 25 नॉमिनेशन मिले और यह सबसे बड़ा दावेदार बनकर उभरा. इसके बाद 'हैक्स' को 24 नॉमिनेशन मिले. 'विडोज बे', 'प्लुरिबस', 'बीफ सीजन 2' और 'डीटीएफ सेंट लुइस' अन्य प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। 

    जीन स्मार्ट ने 'हैक्स' के लिए बेस्ट कॉमेडी सीरीज का पुरस्कार जीतकर एमी अवॉर्ड्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया. यह इस श्रेणी में उनकी लगातार पांचवीं जीत थी और इसके साथ ही वह किसी शो के हर सीजन के लिए एमी अवॉर्ड जीतने वाली पहली कलाकार बन गईं. इस जीत के साथ ही उनके कुल एमी अवॉर्ड्स की संख्या आठ हो गई और वह जूलिया लुईस-ड्रेफस, क्लोरिस लीचमैन और एलिसन जैनी के साथ रिकॉर्ड बुक में शामिल हो गईं। 

    मैथ्यू राइस के लिए भी वह रात यादगार रही. उन्होंने 'द बीस्ट इन मी' के लिए लिमिटेड या एंथोलॉजी सीरीज या मूवी में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार जीता. इस जीत ने उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, क्योंकि वे तीनों श्रेणी में मुख्य अभिनय के लिए एमी पुरस्कार जीतने वाले पहले कलाकार बन गए. उन्होंने एक ही साल में दो कैटेगरी में बेस्ट एक्टर पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया, क्योंकि उन्हें एप्पल की 'विडोज बे' के लिए भी नॉमिनेट किया गया था। 

    नोआ वाइल ने 'द पिट' के लिए ड्रामा सीरीज में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता, जिससे उन्हें इस श्रेणी में लगातार दूसरी बार एमी पुरस्कार मिला. रिया सीहॉर्न ने 'प्लुरिबस' के लिए ड्रामा सीरीज में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अपना पहला एमी पुरस्कार जीता, जबकि एलिसन जैनी ने 'द डिप्लोमैट' के लिए सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। 

    एमी अवार्ड्स 2026 फुल विनर्स लिस्ट

    ड्रामा सीरीज

    बेस्टर एक्टर (ड्रामा सीरीज )

        नोआ वाइल – द पिट

    बेस्ट एक्ट्रेस (ड्रामा सीरीज)

    रिया सीहॉर्न – प्लुरिबस

    सपोर्टिंग एक्टर (ड्रामा सीरीज)

        टॉम पेल्फ्रे – कार्य

    सपोर्टिंग एक्ट्रेस (ड्रामा सीरीज)

        एलिसन जैनी – द डिप्लोमैट

    ड्रामा सीरीज (निर्देशन)

    साउल मेट्ज़स्टीन – धीमे घोड़े

    कॉमेडी सीरीज

    बेस्ट एक्टर (कॉमेडी सीरीज)

        मैथ्यू राइस – विडो बे

    बेस्ट एक्ट्रेस (कॉमेडी सीरीज)

        जीन स्मार्ट – हैक्स

    सपोर्टिंग एक्टर (कॉमेडी सीरीज)

        स्टीफन रूट – विडो'ज बे

    सपोर्टिंग एक्ट्रेस (कॉमेडी सीरीज)

        केट ओ'फ्लिन – विडो'ज बे

    बेस्ट लेखक (कॉमेडी सीरीज)

        केटी डिपोल्ड – विडोज़ बे (एपिसोड: वेलकम टू विडोज़ बे!)

    लिमिटेड सीरीज या एंथोलॉजी या मूवी

    बेस्ट एक्टर

        मैथ्यू राइस – द बीस्ट इन मी 

    बेस्ट एक्ट्रेस

        सैली फील्ड – रिमार्कब्ली ब्राइट क्रिएचर्स

    सपोर्टिंग एक्टर

        डेविड हार्बर – डीटीएफ सेंट लुइस

    सपोर्टिंग एक्ट्रेस

        लिंडा कार्डेलिनी – डीटीएफ सेंट लुइस

    बेस्ट डायरेक्टर

        स्टीवन कॉनराड – डीटीएफ सेंट लुइस

    बेस्ट राइटिंग

        डीटीएफ सेंट लुइस

    अन्य प्रमुख कैटेगरी

    रियलिटी कंपीटिशन सीरीज

    द ट्रैटर्स

    वैरायटी सीरीज

        द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट

    वैरायटी सीरीज लेखन

        द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट

    टेलीविजन फिल्म

        रिमार्कब्ली ब्राइट क्रिएचर्स

    वैरायटी स्पेशल (पूर्व-रिकॉर्डेड)

        द मपेट शो

    आउटस्टैंडिंग एनिमेटेड कार्यक्रम

        साउथ पार्क

    गेस्ट एक्टिंग कैटेगरी

    ड्रामा सीरीज में गेस्ट एक्ट्रेस

        शैलेन वुडली – पैराडाइज

    गेस्ट एक्टर

        अर्नेस्ट हार्डन जूनियर – द पिट

    कॉमेडी सीरीज में गेस्ट एक्ट्रेस

        बेट्टी गिलपिन – विडो'ज बे

    कॉमेडी सीरीज में गेस्ट एक्टर

        रॉब रेनर – द बेयर

    क्रिएटिव आर्ट्स एमी अवार्ड्स के तहत मुख्य समारोह से पहले कई एमी कैटेगरी के पुरस्कारों की घोषणा की गई. इन पुरस्कारों ने इस साल के कई सबसे बड़े शो और कलाकारों के कुल पुरस्कारों में इजाफा किया। 

    पुरस्कार समारोह में 'द पिट' और 'हैक्स' प्रमुख दावेदारों में बने रहे, जबकि 'विडोज बे', 'प्लुरिबस' और 'डीटीएफ सेंट लुइस' ने भी अहम पुरस्कार जीते. मुख्य समारोह में कई चर्चित जीतें दर्ज हुईं, जिनमें जीन स्मार्ट की ऐतिहासिक पांचवीं 'हैक्स' जीत और नोआ वाइल की 'द पिट' के लिए लगातार दूसरी बार मुख्य अभिनेता का एमी पुरस्कार शामिल है। 

    2026 के एमी पुरस्कारों में 'द ट्रेटर्स' ने रियलिटी कॉम्पिटिशन सीरीज का पुरस्कार जीता, जबकि 'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट' ने वैरायटी सीरीज और वैरायटी सीरीज के लिए लेखन का पुरस्कार अपने नाम किया। 

    टॉम हॉलैंड का डेब्यू
    टॉम हॉलैंड के लिए यह पहला एमी इवेंट था. वह पत्नी जैंडाया को सपोर्ट करने गए थे, जो 2026 की दो बड़ी हिट फिल्मों – 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' और 'द ओडिसी' में उनकी को-स्टार थीं. जैंडाया का नाम तब लिया गया, जब 'सैटरडे नाइट लाइव' के स्टार मार्सेलो हर्नांडेज ने कॉमेडी सीरीज के लिए 'आउटस्टैंडिंग डायरेक्टिंग' का अवॉर्ड दिया. इसके बाद कैमरा जैंडाया पर जूम हुआ और हॉलैंड उनके पीछे मुस्कुराते हुए दिखे। 

    एमी अवार्ड्स 2026 का आयोजन कहां हुआ ?
    78वां प्राइमटाइम एमी अवार्ड्स समारोह लॉस एंजिल्स के डाउनटाउन में स्थित LA LIVE के पीकॉक थिएटर में आयोजित किया गया. समारोह की मेजबानी मारिस्का हार्गिटे ने की, जिसका अमेरिका में एनबीसी पर सीधा प्रसारण किया गया और पीकॉक पर इसे स्ट्रीम किया गया। 

    भारत में दर्शकों के लिए, 2026 एमी अवार्ड्स का सीधा प्रसारण जियो हॉटस्टार पर किया गया. मुख्य समारोह 15 सितंबर को सुबह 5:30 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू हुआ, जबकि रेड कार्पेट और प्री-शो सुबह 4:30 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू हुए. लाइव प्रसारण के बाद समारोह को ऑन डिमांड भी देखा जा सकता है। 

  • पीएम-जुगा के तहत जशपुर को बड़ी मंजूरी, जनजातीय पर्यटन के लिए बनेगा क्लस्टर होमस्टे

    पीएम-जुगा के तहत जशपुर को बड़ी मंजूरी, जनजातीय पर्यटन के लिए बनेगा क्लस्टर होमस्टे

    जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, पीएम-जुगा के तहत क्लस्टर होमस्टे परियोजना को मिली मंजूरी

    बगीचा-मयाली-जशपुर क्षेत्र के 6 जनजातीय गांवों में विकसित होंगे 30 होमस्टे, स्थानीय परिवारों को पर्यटन से मिलेगा सीधा रोजगार और आय के नए अवसर

    जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से जनजातीय अंचल के गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। इसमें होमस्टे निर्माण के साथ गांव स्तर पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान किया गया है।

    पर्यटक जशपुर को सिर्फ देखेंगे नहीं, यहां के जीवन को भी अनुभव करेंगे

    यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड को प्रोत्साहित करेगी। होमस्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ गांवों में सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित होंगी।

    प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों से जुड़ेगा होमस्टे क्लस्टर

    क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ-साथ कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़, लोरोघाट सहित अनेक प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के निकट स्थित हैं। होमस्टे सुविधा विकसित होने से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों में ठहरने के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे जशपुर में पर्यटकों की ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है और पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय स्तर पर व्यापक रूप से पहुंच सकेगा।

    गाइडिंग से लेकर स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प तक बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    होमस्टे क्लस्टर का प्रभाव केवल आवास सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, पर्यटक गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प तथा अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं विकसित होंगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प की मांग में भी वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार पर्यटन गतिविधियां गांवों में रोजगार और आय के अनेक सहायक अवसरों को जन्म देंगी।

    जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है और सरकार का प्रयास है कि इस विरासत को संरक्षित करते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।

    उन्होंने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट लोक परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत स्वीकृत यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को इसके आर्थिक लाभ से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक जब जशपुर आएं तो वे यहां की प्रकृति के साथ-साथ जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करें।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को पर्यटन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में अवसर मिलने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकसित पर्यटन मॉडल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि जशपुर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    पर्यटन का लाभ गांव और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे-सौमिल रंजन चौबे

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों अथवा होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जशपुर का यह होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बनेगा। इससे पर्यटकों को प्रामाणिक छत्तीसगढ़ी अनुभव मिलेगा और जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए अवसर विकसित होंगे।

    जशपुर को जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कदम

    क्लस्टर होमस्टे परियोजना के माध्यम से जशपुर में पर्यटन का विस्तार प्रमुख पर्यटन स्थलों से आगे आसपास के गांवों तक होने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का अनुभव मिलेगा और ग्रामीण समुदाय पर्यटन मूल्य-श्रृंखला का सक्रिय हिस्सा बनेगा।

    प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • शिवपाल के हाथों से लिया लोहिया ट्रस्ट, सियासत तेज; ओपी राजभर बोले- अखिलेश को चाचा पर भरोसा नहीं

    शिवपाल के हाथों से लिया लोहिया ट्रस्ट, सियासत तेज; ओपी राजभर बोले- अखिलेश को चाचा पर भरोसा नहीं

    अखिलेश ने शिवपाल से छीनी लोहिया ट्रस्ट की कमान, राजभर बोले- भरोसा नहीं; मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी उठाए सवाल

    पार्टी के बाद शिवपाल से छिना लोहिया ट्रस्ट, अखिलेश यादव पर राजभर-कश्यप ने साधा निशाना

    शिवपाल के हाथों से लिया लोहिया ट्रस्ट, सियासत तेज; ओपी राजभर बोले- अखिलेश को चाचा पर भरोसा नहीं

    लखनऊ
     सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हाथों अब लोहिया ट्रस्ट की कमान होगी। अब तक इसकी कमान पूर्व कैबिनेट मंत्री और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के हाथों थी। शिवपाल सिंह यादव से कमान लिए जाने को लेकर भाजपा ने सपा पर निशाना साधा है।

    योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर और नरेंद्र कश्यप ने इसे लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है, इसलिए उनसे ट्रस्ट की कमान ले ली गई।

    ओपी राजभर ने साधा निशाना, भरोसे पर उठाया सवाल
    योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने इस बदलाव को लेकर अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है।

    राजभर ने शिवपाल के पुराने राजनीतिक रुख का जिक्र करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव जी पर भरोसा नहीं है। इससे पहले शिवपाल यादव अखिलेश यादव को छोड़कर चले गए थे। उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बना ली थी। उस दौरान उन्होंने सपा को क्या-क्या नहीं कहा। चोर-उचक्कों की पार्टी बताया, शराब-माफियाओं की पार्टी, जमीन हड़पने वाली पार्टी तक बताया था। ऐसे में अखिलेश यादव शिवपाल यादव पर कैसे ट्रस्ट करेंगे? इसीलिए उन्होंने शिवपाल यादव से लोहिया ट्रस्ट की कमान ले ली है।

    मंत्री नरेंद्र कश्यप बोले- सपा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं
    योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव से अखिलेश यादव के पास जाना अपने आप में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, क्योंकि कमान अब भी परिवार के ही हाथों में है।

    नरेंद्र कश्यप ने कहा कि किसी संस्था की जिम्मेदारी परिवार के सदस्यों के बीच ही केंद्रित रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है अखिलेश यादव को आशंका रही हो कि आगे चलकर शिवपाल यादव अपनी शर्तों या अपने तरीके से ट्रस्ट चलाएं, इसलिए उन्होंने खुद इसकी जिम्मेदारी संभाल ली।

    बता दें कि शिवपाल और अखिलेश के बीच राजनीतिक रिश्तों में उतार-चढ़ाव का लंबा इतिहास रहा है। शिवपाल सिंह यादव अलग होकर अपनी पार्टी बना चुके हैं और बाद में दोबारा समाजवादी पार्टी के साथ आए। ऐसे में ट्रस्ट का जिम्मा उनके हाथों से निकलकर अखिलेश के पास जाना सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि परिवार और पार्टी की मौजूदा शक्ति-संरचना के बीच भरोसे को लेकर भी देखा जा रहा है।

    अखिलेश के पास अब पार्टी, लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की कमान
    शिवपाल यादव से लोहिया ट्रस्ट लिए जाने और उसकी कमान खुद के हाथों में लेने के बाद अब अखिलेश के पास सपा के साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की भी कमान आ गई है। बता दें कि लोहिया ट्रस्ट का गठन सपा के गठन से पहले हुआ था। इसका उद्देश्य समाजवादी विचारधारा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का प्रचार-प्रसार करना रहा है।