Author: NewseDay

  • बुनकरों के हुनर को मिलेगा सरकारी बाजार, अस्पतालों में गूंजेगी हथकरघे की पहचान

    बुनकरों के हुनर को मिलेगा सरकारी बाजार, अस्पतालों में गूंजेगी हथकरघे की पहचान

    लखनऊ
     प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और बुनकरों को उनके उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। अब सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले हथकरघा निर्मित उत्पादों की खरीद के जरिए प्रदेश के बुनकरों को बड़ा और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे सरकारी संस्थानों की जरूरतें पूरी होने के साथ बुनकर परिवारों को नियमित रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलने का रास्ता तैयार होगा।

    मंगलवार को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, तिलक मार्ग, डालीबाग स्थित सभाकक्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग में प्रयुक्त होने वाले हथकरघा उत्पादों की खरीद एवं आपूर्ति व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हथकरघा निर्मित बेडशीट और गॉज बैंडेज की खरीद एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    सरकारी खरीद से बुनकरों को मिलेगा बड़ा बाजार
    मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपूर्ति व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद को केवल सामान की खरीद तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से बुनकर परिवारों को निरंतर रोजगार, स्थायी बाजार और आर्थिक मजबूती देना है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीद बढ़ने से बुनकरी क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर और गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के बुनकरों और बुनकर सहकारी समितियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा।

    गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति पर जोर
    मंत्री ने निर्देश दिए कि चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध कराए जाने वाले उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले होने चाहिए। इसके साथ ही प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप देने और आवश्यक दिशा-निर्देश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पीसी ठाकुर सहित चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • हांगझू 2023 एशियाई खेलों में कुराश खेल चुकीं सुचिका तारियाल हुड्डा भी टीम का हिस्सा

    हांगझू 2023 एशियाई खेलों में कुराश खेल चुकीं सुचिका तारियाल हुड्डा भी टीम का हिस्सा

    नई दिल्ली
    एशियाई खेलों में पहली बार शामिल किए जा रहे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में भारत की उम्मीदें वरुण सान्याल पर टिकी हैं। जनवरी 2026 में चीन में हुई एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके वरुण 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियाई खेलों में पुरुषों के पारंपरिक 77 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    भारत की दो सदस्यीय एमएमए टीम में उनके साथ हांगझू 2023 एशियाई खेलों में कुराश में हिस्सा ले चुकीं सुचिका तारियाल हुड्डा भी हैं, जो महिलाओं के 60 किग्रा वर्ग में उतरेंगी। अब पेशेवर एमएमए खिलाड़ी बन चुके वरुण ने क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से बिजनेस मैनेजमेंट आनर्स की पढ़ाई की है।

    सिंगापुर में पले-बढ़े वरुण का खेलों से रिश्ता काफी विविध रहा। उन्होंने क्रिकेट, फुटबॉल, एथलेटिक्स, स्क्वाश और पावरलिफ्टिंग में हाथ आजमाया। इसके बाद कुश्ती, जिउ-जित्सु और मुए थाई से होते हुए उनका सफर एमएमए तक पहुंचा।

    डब्ल्यूडब्ल्यूई से शुरू हुआ आकर्षण
    कांबैट स्पोर्ट्स में उनकी शुरुआती दिलचस्पी डब्ल्यूडब्ल्यूईए और टीएनए से बनी। राकी बाल्बोआ के प्रशंसक वरुण का मार्शल आर्ट्स के प्रति आकर्षण तब और गहरा हुआ जब उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में भारतीय पहलवान सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त को सफलता हासिल करते देखा। वरुण के मुताबिक एमएमए केवल खेल नहीं बल्कि जीवन कौशल भी है। दबाव में शांत रहना, शारीरिक खतरे के बीच फैसले लेना और खुद का बचाव करना उनके लिए इस खेल की सबसे बड़ी सीख रही है।

    खेलों से भरा परिवार, पिता का मिला साथ
    वह अर्थशास्त्री, लेखक और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल और स्मिता बरुआ के बेटे हैं। वरुण ने बताया कि उनके पिता ने बचपन से उन्हें खेलों के लिए प्रोत्साहित किया। एमएमए को लेकर भी शुरुआत में उन्हें मनाने में थोड़ा समय लगा, लेकिन बाद में वह लगातार वरुण का समर्थन करते रहे और खेल को समझने की कोशिश करते हैं।

    एशियाई खेलों की तैयारी में मिला कम समय
    एमएमए में वरुण का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने 2025 में एमएमए एसएफआइ नेशनल्स जीते, जिसके आधार पर जनवरी 2026 में चीन में एशियाई चैंपियनशिप खेलने का मौका मिला और वहां कांस्य पदक हासिल किया। इससे वह एशियाई सिस्टम में आधिकारिक रैंकिंग में आ गए।

    हालांकि उस समय एशियाई खेलों के लिए क्वालीफिकेशन प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं थी। इंतजार करने के बजाय वरुण ने अपने पेशेवर करियर पर ध्यान दिया। उन्हें एशियाई खेलों में जाने की अंतिम पुष्टि खेल शुरू होने से केवल दो सप्ताह पहले मिली। इतने कम समय में मानसिक और शारीरिक रूप से इतनी बड़ी प्रतियोगिता के लिए तैयार होना उनके लिए बड़ी चुनौती रहा।

  • भोपाल त्विशा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर फैसला टला, CBI ने किया विरोध

    भोपाल त्विशा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर फैसला टला, CBI ने किया विरोध

    भोपाल 

    भोपाल के बहुचर्चित त्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है।  मंगलवार को उनकी जमानत याचिका पर जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध किया।

    सीबीआई की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए लिखित जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सीबीआई को लिखित आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी। अब मामले की अगली सुनवाई सीबीआई के जवाब के बाद होगी। 

    गौरतलब है कि बहू की आत्महत्या के मामले में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ भोपाल के कटारा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। मामले में पूर्व में भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ दिया था। इसके बाद मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। अब गिरिबाला सिंह की ओर से जमानत के लिए दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया गया है।

    मंगलवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि लिखित आपत्ति पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय मिलने के कारण हाईकोर्ट ने फिलहाल जमानत याचिका पर कोई अंतिम राहत नहीं दी है। मामले में अगली सुनवाई सीबीआई के जवाब के बाद होगी।

     

  • UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    पटना
    नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन सरकार बनाने का न्योता मिला है। राजद के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर नीतीश पहले ही स्टैंड ले चुके हैं। जदयू और राजद समाजवादी दल हैं, इनकी राजनीति एक ही है। इसलिए भाजपा का साथ छोड़कर जदयू को राजद के साथ आना चाहिए और बिहार में नई सरकार बनानी चाहिए।

    भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि एनडीए सरकार 'नागपुर' से चल रही है। उन्होंने कहा, "यह बिहार है। यहां नागपुर का नहीं चलेगा। बिहार में यूसीसी लागू नहीं करने देंगे। नीतीश कुमार भी स्टैंड ले चुके हैं। उनसे कहेंगे कि वैसे लोगों (भाजपा) को छोड़िए, इधर आइए और हम मिलकर सरकार बनाएं। भाजपा को लात मारकर आएं।

    बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे- वीरेंद्र
    यूसीसी का विरोध करते हुए राजद विधायक ने कहा कि यूसीसी को बिल्कुल भी लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। सभी धर्मों को मानने का अधिकार मिला हुआ है। संविधान में भी इसका उल्लेख है।

    समाजवाद का हवाला
    भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ कुछ ऐसे लोग लगे हैं, जिन्होंने उन्हें बर्बाद कर दी दिया और आगे और बर्बाद कर देंगे। उन्होंने नीतीश से कहा, “हम सामाजिक न्याय के लोग हैं, जिस राजनीति में आप हैं, उसमें हम भी हैं। आप हमारे साथ आइए और भाजपा को लात मारिए।”

    जदयू ने ठुकराया राजद का ऑफर
    दूसरी ओर, जदयू ने राजद का ऑफर ठुकरा दिया है। बिहार के डिप्टी सीएम और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने राजद विधायक भाई वीरेंद्र के प्रस्ताव पर पलटवार भी किया है। उन्होंने कहा कि हम लोग राजद के सुझावों पर नहीं चलते हैं। राजद क्या चाहती है, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि जदयू को सिर्फ हमारी सोच और हमारे गठबंधन के दलों की सोच से मतलब है।

    दो बार राजद के साथ बिहार में सरकार बना चुकी है जदयू
    जदयू और राजद के बीच पहले भी दो बार गठबंधन हो चुका है। पहली बार 2015 से 2017 के बीच राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन वाली सरकार रही थी। इसके बाद, फिर से अगस्त 2022 से जनवरी 2024 के बीच दोनों दलों के गठबंधन की सरकार बिहार में रही। महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम रहे थे। इसके बाद जदयू ने महागठबंधन का साथ छोड़ एनडीए में वापसी कर ली थी।

    यूसीसी पर जदयू का सस्पेंस
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी कानून लागू करने के ऐलान के बाद एनडीए में घमासान तेज है। नीतीश की पार्टी ने फिलहाल इस पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है और ना ही विरोध किया है। जदयू ने सस्पेंस बनाते हुए ड्राफ्ट आने के बाद

    जदयू के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने एक दिन पहले बिहार में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कह दी थी। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि यूसीसी का ड्राफ्ट में प्रावधानों को देखने के बाद ही जदयू इस पर विचार-विमर्श करेगी।

    बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति-
    एनडीए के पास कुल 201 विधायक
        भाजपा- 88
        जदयू- 85
        लोजपा आर- 19
        हम- 5
        रालोमो- 4

    महागठबंधन में कुल 35 विधायक
        राजद- 25
        कांग्रेस- 6
        सीपीआई माले- 2
        सीपीआई- 1
        आईआईपी- 1

    अन्य 7 विधायक
        AIMIM- 5
        बसपा- 1
        जन सुराज-1

  • नेपाल में बिजली संकट गहराया, बाढ़ से पावर सिस्टम बेहाल; भारत 18 घंटे रोज देगा बिजली

    नेपाल में बिजली संकट गहराया, बाढ़ से पावर सिस्टम बेहाल; भारत 18 घंटे रोज देगा बिजली

    काठमांडू 
    प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए भारत ने एक बार फिर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां बिजली का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस संकट से उबारने के लिए भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक नेपाल को रोजाना 18 घंटे 654 मेगावाट (MW) तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दे दी है।

    नेपाल के 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के मुताबिक, इस तबाही में अब तक 1,385 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,130 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत सीमा के पास बीते 26 अगस्त को हुए बर्फ की चट्टान खिसकने (Avalanche) के बाद आई इस तबाही ने दर्जनों गांवों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।

    क्यों ठप पड़ गया नेपाल का पावर सेक्टर?
    नेपाल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से नदियों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है। लेकिन इस भौगोलिक निर्भरता का एक नुकसान यह भी है कि जब भी बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदा आती है, तो नेपाल का पावर ग्रिड रातों-रात धराशायी हो जाता है।

    12 से ज्यादा पावर प्लांट तबाह: इस विनाशकारी बाढ़ में 12 से ज्यादा हाइड्रोपावर प्लांट या तो बह गए या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।

    कर्मचारी भी लापता: पावर सेक्टर में काम करने वाले लगभग 900 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मरम्मत का काम भी ठप पड़ा है।

    उलट गए हालात: जो नेपाल हाल के सालों में अपनी अतिरिक्त बिजली भारत को बेच रहा था, इस आपदा ने पासा पलट दिया। अब नेपाल को अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए भारत से बिजली मांगनी पड़ रही है।

    654 MW बिजली सप्लाई का क्या है प्लान?
    भारतीय विद्युत मंत्रालय ने 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए इस सप्लाई को हरी झंडी दे दी है। यह बिजली नेपाल को आधी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक यानी दिन के 18 घंटे उपलब्ध कराई जाएगी।

    कुल 654 मेगावाट में से 600 मेगावाट बिजली मुजफ्फरपुर-ढालकेबार 400 kV डबल-सर्किट लाइन के जरिए भेजी जाएगी। बाकी 54 मेगावाट बिजली तनकपुर-महेंद्रनगर 132 kV लाइन से सप्लाई होगी।

    दिन का समय क्यों चुना गया?
    दिन के समय भारत के पास अपनी सौर ऊर्जा की अच्छी-खासी उपलब्धता रहती है। ऐसे में अपनी सरप्लस ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल कर भारत पड़ोसी देश की मदद आसानी से कर पा रहा है।

    भारत ने साफ किया है कि यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक के लिए है। जनवरी 2027 से नेपाल को कितनी बिजली दी जाएगी, इसका रिव्यू दिसंबर के आखिरी हफ्ते में किया जाएगा।

    मुश्किल वक्त में काम आई भारत-नेपाल की दोस्ती
    नेपाल के पास नदियां और पनबिजली की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन भारत के पास वह मजबूत ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और बैकअप है जो किसी भी आपात स्थिति में नेपाल की लाइफलाइन बन सकता है।

    भारत के विद्युत मंत्रालय का कहना है कि इस फैसले से नेपाल को संकट से उबरने में मदद मिलेगी और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा संबंधों को और मजबूती मिलेगी। भारत के लिए यह कदम केवल एक मदद नहीं, बल्कि अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) कूटनीति की एक ठोस और व्यावहारिक मिसाल है।

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    जयपुर
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने जा रही हैं। इस दिशा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 6 राज्यों के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। किशाऊ परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी के जल की दृष्टि से अभावग्रस्त रहे क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किये।

    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा तथा इससे राजस्थान सहित उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।

    परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा।

    किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजनाओं की सूची में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।

    शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
    किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनंू और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि भी तैयार करेगी। पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी तथा लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, एक व्यापक जल दृष्टि
    प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के लिए इस उपलब्धि के तहत दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी राजस्थान लाने हेतु संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है।

    अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस पूरी जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जा सकेगा।

    राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान
    संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना के उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75ः25 के अनुपात में होगी।

    शेखावाटी में विकास का नया अध्याय
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी अब जल उपलब्धता के साथ ही कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाएं, तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे शेखावाटी के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

    32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल व सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।

    वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान को पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से का पानी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

  • महिला-बाल कल्याण योजनाओं को मिलेगी नई गति, मंत्री भूरिया ने शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य ई-पोर्टल किया लॉन्च

    महिला-बाल कल्याण योजनाओं को मिलेगी नई गति, मंत्री भूरिया ने शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य ई-पोर्टल किया लॉन्च

    मंत्री सुश्री भूरिया ने शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य अनुदान ई-पोर्टल का किया शुभारंभ

    डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पारदर्शिता
    रियल टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय होंगे आसान

    भोपाल 

    महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय में मिशन शक्ति के शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य की अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं के लिए अनुदान ई-पोर्टल का शुभारंभ किया। सरकार ने प्रदेश में इन संस्थाओं को अनुदान देने की अब तक चली आ रही मैनुअल प्रक्रिया को डिजिटल व्यवस्था में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आवेदन, दस्तावेज अपलोड, प्रस्ताव परीक्षण, स्वीकृति, भुगतान और प्रगति की निगरानी सहित पूरी प्रक्रिया एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होगी।

    फाइलों की जगह डिजिटल ट्रैकिंग, हर स्तर पर जवाबदेही

    ऑनलाइन पोर्टल से अनुदान प्रस्तावों की प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकेगा। संस्थाओं को बार-बार दस्तावेज और प्रस्ताव लेकर विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी। प्रस्तावों के परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी तथा भुगतान में लगने वाले समय को न्यूनतम करने में मदद मिलेगी। रियल टाइम मॉनिटरिंग से यह भी पता रहेगा कि किस संस्था का प्रस्ताव किस स्तर पर है।

    अनुदान व्यवस्था में आएगी गति, पारदर्शिता और जवाबदेही

    पोर्टल के लागू होने से अनुदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा कागजी कार्यवाही कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण दस्तावेजों के संधारण और प्रस्तावों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। उपलब्ध डेटा के आधार पर विभाग को योजनाओं की प्रगति का आंकलन करने और आवश्यक निर्णय लेने में भी सुविधा होगी।

    13 जिलों में 14 शक्ति सदन, 2,386 महिलाओं को मिला लाभ

    मिशन शक्ति में प्रदेश के 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं। भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर, बालाघाट, खंडवा, ग्वालियर, बैतूल, मंडला, मुरैना, राजगढ़, पांढुर्णा और छतरपुर में संचालित इन शक्ति सदनों में कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाली, निराश्रित, जेल से रिहा महिला कैदी, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित तथा हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आश्रय और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं।

    शक्ति सदनों में महिलाओं को आश्रय, पोषण, वस्त्र, स्वास्थ्य सुविधा, कानूनी सलाह एवं सहायता सहित आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। विगत वर्ष 2,386 महिलाओं को इन सेवाओं का लाभ मिला।

    130 बाल देखरेख संस्थाओं में 2,377 बच्चे

    मिशन वात्सल्य में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं। इनमें 62 बाल गृह, 12 खुला आश्रय गृह, 35 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण, 18 सम्प्रेक्षण गृह और 3 विशेष गृह शामिल हैं। इन संस्थाओं में वर्तमान में 2,377 बच्चे निवासरत हैं।

    इन संस्थाओं के माध्यम से देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ उनके पारिवारिक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मिशन वात्सल्य के तहत वर्तमान में 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को अनुदान दिया जा रहा है, जिनमें 44 बाल गृह, 9 खुला आश्रय गृह और 26 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण शामिल हैं।

    16 सितम्बर को संस्थाओं के प्रबंधक-लेखापालों का प्रशिक्षण

    पोर्टल के संचालन और रिपोर्टिंग के लिए 16 सितम्बर 2026 को होटल मैनेजमेंट एवं इंस्टीट्यूट, भोपाल में तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसमें शक्ति सदन और बाल देखरेख संस्थाओं से प्रबंधक एवं लेखापाल सहित दो-दो प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रशिक्षण में पोर्टल के संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई जाएगी

     

  • ICC टी20 रैंकिंग के टॉप-5 में स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा को बड़ा फायदा; श्री चरणी ने रचा इतिहास

    ICC टी20 रैंकिंग के टॉप-5 में स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा को बड़ा फायदा; श्री चरणी ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली

    इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने मंगलवार को महिला टी20 प्लेयर्स की ताजा रैंकिंग जारी की है। भारत की युवा स्पिनर श्री चरणी ने इतिहास रच डाला है। वह महिला T20I बॉलर्स की रैंकिंग में 800 रेटिंग अंक हासिल करने वाली पहली भारतीय गेंदबाज बन गई हैं। चरणी 804 अंकों के साथ शीर्ष पर कायम है। उनसे ज्यादा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की मेगन शुट्ट की रेटिंग (806) रही है। तीसरे नंबर पर इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन (802) हैं। इन तीनों के अलावा और कोई महिला गेंदबाज 800 अंकों तक नहीं पहुंची। 22 वर्षीय चरणी ने हाल ही में समाप्त महिला एशिया कप 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टूर्नामेंट में पांच मैचों में 12 विकेट चटकाए। चरणी ने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 20 रन देकर चार शिकार किए। भारत ने 72 रनों से फाइनल जीता और रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

    दीप्ति शर्मा ने लगाई छलांग
    स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला गेंदबाजों की लिस्ट में चार स्थान की छलांग लगाई है। वह दूसरे नंबर पर पहुंच गई हैं। दीप्ति और चरणी में 75 अंकों का अंतर है। दीप्ति के खाते में फिलहाल 729 अंक हैं। उन्होंने महिला एशिया कप में पांच मैचों में सर्वाधिक 14 विकेट झटके। उन्होंने खिताबी मुकाबले में 19 रन खर्च किए और तीन विकेट लिए। बांग्लादेश की कई गेंदबाजों को फायदा हुआ है। मारुफा अख्तर (तीन पायदान ऊपर 15वें पर), राबेया खान (तीन पायदान ऊपर 18वें पर), सुल्ताना खातून (पांच पायदान ऊपर 32वें पर) और फहीमा खातून (छह पायदान ऊपर 49वें पर) एशिया कप के बाद रैंकिंग में आगे बढ़ी हैं।

    टॉप 5 में स्मृति मंधाना मौजूद
    वहीं, T20I बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत की युवा ओपनर शेफाली वर्मा (741 अंक) को एक स्थान का लाभ मिला है। वह छठे नंबर पर आ गई हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में 47.20 की औसत से सबसे ज्यादा 236 रन बनाए। शेफाली इसके अलावा ऑलराउंडर्स की लिस्ट में पांच स्थान चढ़कर 15वें नंबर पर चली गई हैं। स्मृति मंधाना (745) बैटर्स की फेहरिस्त में पांचवें नंबर पर बरकरार हैं। वह टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली प्लेयर रहीं। स्टार सलामी बल्लेबाज मंधाना ने 213 के औसत से 213 रन जुटाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर (657) दसवें नंबर पर हैं।

    ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी का दबदबा
    बैटर्स की रैंकिंग में टॉप 2 में ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी बेथ मूनी और जॉर्जिया वोल का दबदबा बना हुआ है। मूनी 785 अंकों के साथ नंबर-1 बल्लेबाज हैं। वोल (779) दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, बांग्लादेश की निगार सुल्ताना (एक पायदान ऊपर 20वें पर), शर्मिन अख्तर सुप्ता (तीन पायदान ऊपर 40वें पर), श्रीलंका की इमेशा दुलानी (दो पायदान ऊपर 20वें पर) और पाकिस्तान की शवाल जुल्फिकार (चार पायदान ऊपर 45वें पर) की रैंकिंग में एशिया कप के बाद सुधार हुआ है।

  • यूपी की स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को बड़ा प्लेटफॉर्म, ONDC, Amazon-Flipkart समेत कई बाजारों से जुड़ेंगे उत्पाद

    यूपी की स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को बड़ा प्लेटफॉर्म, ONDC, Amazon-Flipkart समेत कई बाजारों से जुड़ेंगे उत्पाद

    अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां

    अब गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे तीन हजार से अधिक उत्पाद

    ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के जरिए मंगा सकेंगे स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद

    योगी सरकार में दीदियों को अब मिलेगी ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत

    543 प्रेरणा सरस स्टोर और स्थानीय उत्पादों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार

    लखनऊ
     प्रदेश की महिलाएं अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। वहीं 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत देने का रास्ता खुला है।

    अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे। जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर जहां स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बिक्री मंच दे रहे हैं, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी पहुंच गांव और जिले से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।

    छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा : अरुण कुमार

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंच उनकी उद्यमिता की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। योगी सरकार ने इस कड़ी को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया है। इससे समूहों को केवल उत्पाद तैयार करने के बजाय बाजार की मांग समझकर अपने छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है।

    स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा

    डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। खासकर किसी जिले या क्षेत्र विशेष की पहचान वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में यह व्यवस्था मददगार होगी।

    बाजार से जुड़ाव से बनेगी ब्रांड वैल्यू

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बनाने का अवसर भी है। प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपने उत्पादों की मांग समझने और उसी के अनुरूप उत्पादन व विपणन की दिशा तय करने का अवसर देता है। इससे समूहों की गतिविधियां केवल आजीविका तक सीमित न रहकर छोटे उद्यमों का रूप ले सकती हैं।

    लोकल हुनर की ग्लोबल उड़ान

    3,000 से अधिक उत्पादों के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन विपणन ग्रामीण महिला उद्यमिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करते हैं। गांव में तैयार उत्पाद अब गांव में ही बिकने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्टोर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की ग्रामीण ‘दीदियों’ के स्थानीय हुनर को बाजार, पहचान और ब्रांड वैल्यू देने के साथ उन्हें लोकल से ग्लोबल कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाने का नया रास्ता तैयार कर रही है।

  • एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

     रांची
    झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

    इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी को देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यहां दोबारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण शुरू कराया जा सके। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा।

    बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एचईसी प्रबंधन नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से एचटीआई की संबद्धता फिर से बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद संस्थान को नए स्वरूप में संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जायेगा। इससे लंबे समय से बंद पड़े एचटीआई में फिर से तकनीकी प्रशिक्षण की राह खुल सकती है।

    युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में
    एचटीआई के दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के युवाओं को मिलेगा। फिलहाल औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य के कई युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। एचटीआई में प्रशिक्षण शुरू होने पर उन्हें अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।

    प्रबंधन का मानना है कि संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर कुशल तकनीशियन तैयार किए जा सकते हैं। इससे युवाओं के लिए एचईसी समेत राज्य और देश की औद्योगिक कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी काम मिल सकता है।

    पांच ट्रेड में हर साल 200 युवाओं को मिलता था प्रशिक्षण
    एचटीआई में पहले आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट दो वर्षीय, जबकि कोपा और वेल्डर एक वर्षीय ट्रेड थे। दो शिफ्ट में संचालित प्रशिक्षण में पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था।

    यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में काम करने की भी जानकारी है। ऐसे में संस्थान के पुन: शुरू होने से राज्य में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    2022-23 से बंद है नया नामांकन
    एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में एचटीआई का संचालन प्रभावित हुआ। वर्ष 2022-23 से यहां नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की।

    बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह सभी पांच ट्रेड बंद हो गए। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात हैं।

    150 से अधिक मशीनें, चोरी से बढ़ी चिंता
    लंबे समय से बंद संस्थान में उपकरणों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान का ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरणों के साथ लेथ मशीनों के पुर्जे भी चोरी होने की बात सामने आई है।

    एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने संस्थान को दोबारा शुरू करने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी होगा। प्रस्तावित निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन शुरू होने पर संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना का उपयोग फिर से प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा।
    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ भुगतान व सेटलमेंट का मामला मंत्रालय पहुंचा

    एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मामला अब भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के सीपीएसई-एचईसी से संबंधित अनुभाग ने इस मामले में एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

    मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में एचईसी कर्मचारी व श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से भेजे गए छह सितंबर के ई-मेल का उल्लेख किया गया है। ई-मेल में वीपीएफ अंशदान की वापसी तथा कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए हैं।

    मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन को अग्रसारित करते हुए मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति एचईसी के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) को भी भेजी गई है। इससे कर्मचारियों के वीपीएफ से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न वित्तीय देनदारियों और सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मंत्रालय की ओर से पत्र भेजे जाने को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब एचईसी प्रबंधन द्वारा मामले की जांच कर वीपीएफ अंशदान की वापसी और संबंधित सेटलमेंट पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।