Author: NewseDay

  • MP-UP के लिए नई लाइफलाइन बनेगा जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे, सतना से प्रयागराज तक आसान होगा सफर

    MP-UP के लिए नई लाइफलाइन बनेगा जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे, सतना से प्रयागराज तक आसान होगा सफर

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे महाकौशल से विंध्य और उत्तर प्रदेश तक तेज कनेक्टिविटी देने वाला अहम प्रोजेक्ट होगा। इसके बनने के बाद जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर कटनी, मैहर, सतना, रीवा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ेगा।

    5 घंटे में पूरा होगा जबलपुर-वाराणसी का सफर
    फिलहाल जबलपुर से वाराणसी की दूरी करीब 460 से 480 किलोमीटर है। मौजूदा 2 लेन मार्ग से सफर करने में लगभग 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 4 लेन हाई-स्पीड रास्ता उपलब्ध होगा। वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की उम्मीद है।

    इससे यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की कमी आ सकती है। यानी जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी।

    ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट
    जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा।

    MP-UP की नई लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर
    जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए महाकौशल, विंध्य और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सीधे प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा।

    करीब 30 हजार करोड़ की लागत
    जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है। यह आधुनिक, ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे नेटवर्क का हिस्सा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

    DPR और सर्वे का काम अंतिम दौर में
    इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी दल ने एलाइनमेंट को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।

    प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम चुनौती है, क्योंकि एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

  • नंदीग्राम बनी शुभेंदु अधिकारी के लिए अहम सीट, जानें क्यों बढ़ी सियासी हलचल

    नंदीग्राम बनी शुभेंदु अधिकारी के लिए अहम सीट, जानें क्यों बढ़ी सियासी हलचल

    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम सीट का उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली परीक्षा भी है। इस सीट पर उपचुनाव से पहले नाटकीय घटनाक्रम देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाकर उतारा था। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता प्रधान ने बिना कोई वजह बताए ही अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही एक पुराने मामले में प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। राहुल गांधी ने अपने उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा और इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है।

    अधिकारी ने खेला इमोशनल दांव
    शुभेंदु अधिकारी ने भी नंदीग्राम सीट पर इमोशनल दांव खेलते हुए अपने पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। 6 मई को रथ की मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। सीबीआई इस हत्याकांड की जांच कर रही है।

    शुभेंदु अधिकारी के लिए क्यों अहम है नंदीग्राम
    नंदीग्राम की सीट शुभेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा से इसलिए जुड़ी है क्योंकि उन्होंने अपनी असल राजनीति की शुरूआत यहीं से की थी। उन्होंने नंदीग्राम में ही ममता बनर्जी के साथ किसानों के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी वजह से बंगाल से लेफ्ट की सरकार चली गई और ममता बनर्जी की अगुआई में टीएमसी की सरकार बन गई। ममता बनर्जी बंगाल में 15 साल मुख्यमंत्री रहीं लेकिन शुभेंदु अधिकारी के रास्ते ममता बनर्जी से अलग हो गए।

    शुभेंदु अधिकारी 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। वहीं 2021 में उन्होंने अपनी राजनीतिक गुरु ममता बनर्जी को ही नंदीग्राम से हरा दिया। यहीं से नंदीग्राम के समीकरण बदलने लगे। 2026 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दो जगहों से चुनाव लड़ा और नंदीग्राम सीट पर फिर से जीत हासिल की। हालांकि उन्होंने भवानीपुर सीट को चुना और इसलिए नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि शुभेंदु अधिकारी इस सीट को किसी कीमत पर हाथ से निकलने नहीं देना चाहते हैं।

    6 अक्टूबर पर नंदीग्राम के साथ ही रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। ये उपचुनाव बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की छवि पर बड़ा असर डालने वाले हैं। अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही कई बड़े फैसले लिए हैं और बड़े परिवर्तन का प्रयास किया है। अब इन दोनों सीटों की जनता इस बात पर भी मुहर लगाएगी कि उसे उनके फैसले पंसद आए हैं या नहीं। वहीं अधिकारी पर यह भी दवाब है कि बिहार की बांकीपुर सीट जैसा हाल यहां ना हो

  • UP International Trade Show में संस्कृति और कारोबार का संगम, दुनिया देखेगी यूपी की विरासत

    UP International Trade Show में संस्कृति और कारोबार का संगम, दुनिया देखेगी यूपी की विरासत

    ट्रेडीशन संग ट्रेडः ग्लोबल मेहमानों के सामने सजेगा यूपी की संस्कृति का 'महाकुंभ'

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखेगी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता

    25 से 29 सितंबर तक काशी के शास्त्रीय सुर से बुंदेलखंड के राई और अवध की सूफियाना शाम आदि की सजेगी महफिल
     
    योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का मिल रहा अवसर

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 25 से 29 सितंबर तक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को निवेश, व्यापार और पर्यटन के साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। ट्रेड शो में देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों, निवेशकों और आगंतुकों को प्रदेश की लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

    पांच दिनों में सजेगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की महफिल

    ट्रेड शो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 सितंबर को शंख वादन एवं वैदिक मंगलाचरण से होगी। वाराणसी के विशाल कुमार की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद नोएडा के पं. चेतन जोशी का वाद्य संगीत, लखनऊ की अलोकनिशा श्रीवास्तव का कथक नृत्य, प्रयागराज की पूर्णिमा का ढेढ़िया लोक नृत्य और वृंदावन की आरती खेतपाल की भजन प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित करेगी।

    26 सितंबर को पखावज युगल, भोजपुरी लोक गायन, कथक, मथुरा का लोक नृत्य और स्टार नाइट का आयोजन होगा। पखावज युगल में दिल्ली के पं. रविशंकर उपाध्याय एवं पं. ऋषि शंकर उपाध्याय प्रस्तुति देंगे। भोजपुरी लोक गायन में मिर्जापुर की कुसुम पांडेय, जौनपुर के अवनीश तिवारी और कथक में नोएडा की मर्यादा कुलश्रेष्ठ शामिल होंगी। मथुरा की सीमा मावल लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगी और सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा स्टार नाइट में प्रस्तुति देंगी।

    27 सितंबर को सैक्सोफोन वाद्य संगीत, भजन/लोक गायन, झांसी का राई लोक नृत्य, भरतनाट्यम और स्टार नाइट का आयोजन किया जाएगा। 28 सितंबर को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ का परकशन एन्सेंबल, महोबा के जितेंद्र चौरसिया का आल्हा गायन, कथक, पीलीभीत का थारू जनजातीय नृत्य और सुल्तानपुर की रूपाली जोग्गू की सूफी नाइट आयोजित होगी। 29 सितंबर को वाराणसी के पद्मपं. शिवनाथ मिश्रा का सितार वादन, लखनऊ के कमाल खान का गजल गायन, गाजियाबाद की मिताली सैनी का कथक, ‘कथक ऑफ इंडिया/यूपी’ की कोरियोग्राफ्ड प्रस्तुति और स्टार नाइट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन होगा।

    संस्कृति के माध्यम से वैश्विक पहचान

    योगी सरकार की पहल पर आयोजित ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं और शास्त्रीय परंपराओं को मंच मिलना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है। काशी, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और तराई अंचल के कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति से आगंतुकों को परिचित कराएंगी। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को कला, संस्कृति और उद्यमिता के संगम के रूप में प्रस्तुत करेंगी।

  • MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में इंजीनियरों के 357 खाली पद जल्द भरे जाएंगे। अगले महीने से इनकी सीधी भर्ती शुरू होगी। इस बार परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल नहीं कराएगा। यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कंपनी Ed-CIL को दी गई है।

    Ed-CIL क्यों चुनी गई
    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह फैसला लिया है। विभाग चाहता है कि भर्ती जल्दी और बिना विवाद के पूरी हो। इसके लिए 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी हुआ। भर्ती की निगरानी के लिए दो अलग कमेटियां भी बनाई गई हैं।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने भर्ती प्रक्रिया में कानूनी अड़चन से बचने और इसे तेजी से पूरा करने के लिए Ed-CIL को परीक्षा एजेंसी चुना है। विभाग ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर भर्ती संचालन और तकनीकी निगरानी के लिए दो कमेटियां भी गठित की हैं।

    नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस फैसले की वजह बताई। उनका कहना है कि विभाग के पास दो साल तक इंतजार करने का समय नहीं है। इसी वजह से केंद्रीय एजेंसी को चुना गया है।

    पुराना भर्ती विवाद क्या था
    चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा हुई लेकिन मेरिट लिस्ट अलग बनी।

    सहायक नगर निवेशक पद की मेरिट लिस्ट बिना डिग्री-डिप्लोमा सत्यापन के जारी हो गई। इससे कई अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी सूची में आ गए। 

    मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया रुक गई।
    मेरिट लिस्ट की वैधता सिर्फ एक साल थी। इससे समस्या और बड़ी हो गई। अब कोर्ट ने सभी 7 हजार 205 उम्मीदवारों के दस्तावेज दोबारा जांचने के निर्देश दिए हैं। इसी विवाद के बाद विभाग ने इस बार Ed-CIL को चुना।

    Ed-CIL का अनुभव कैसा है
    बता दें कि Ed-CIL शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मिनी रत्न कैटेगरी-1 कंपनी (CPSE – Central Public Sector Enterprise) है। यह कंपनी पहले भी मध्य प्रदेश में परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में इसने राज्य की छह बिजली कंपनियों के 453 पदों के लिए परीक्षा कराई थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इसका अनुभव है।

    ESB को क्यों किया बाहर? 4 साल पुराने विवाद के बाद बदली परीक्षा एजेंसी
    मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा और रिजल्ट जारी किया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट अलग-अलग बनाई गई।

    सहायक नगर निवेशक पद के लिए डिग्री-डिप्लोमा का सत्यापन किए बिना मेरिट लिस्ट जारी होने से उसमें अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो गए। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया अटक गई। मेरिट लिस्ट की वैधता एक साल होने से समस्या और बढ़ी।

    अब कोर्ट ने परीक्षा में शामिल सभी 7,205 उम्मीदवारों के डिग्री-डिप्लोमा के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इसी विवाद के बाद इस बार परीक्षा के लिए Ed-CIL को चुना है। हालांकि, अफसरों का इस फैसले के पीछे अलग ही तर्क है।

    कौन है Ed-CIL और क्या है उसका अनुभव?
    Ed-CIL (एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड) केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन 'मिनी रत्न कैटेगरी-1' की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (CPSE) है। मध्य प्रदेश में यह कंपनी पहले भी भर्ती परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में उसने राज्य की छह बिजली कंपनियों में 453 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना समेत कई राज्यों में सरकारी परीक्षाएं कराने का अनुभव भी उसके पास है।

    खाली पदों का गणित: 295 उपयंत्री और 62 सहायक यंत्री पदों पर भर्ती
    भर्ती 'मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015' और 'मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000' के तहत होगी। निकायों में उपयंत्री के 295 पद रिक्त हैं, जिनमें 228 पद सिविल के हैं।

    चयन प्रक्रिया क्या होगी?

    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया संभालेगी। चयन प्रक्रिया इस प्रकार होगी..

        ऑनलाइन परीक्षा (CBT): परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।
        उपयंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी होगी और उसी के आधार पर नियुक्ति होगी।
        सहायक यंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। इसके आधार पर प्रत्येक पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग विशेष इंटरव्यू बोर्ड बनाएगा, जो उम्मीदवारों की डिग्री और डिप्लोमा का सत्यापन करेगा।

    भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां

    भर्ती प्रक्रिया की निगरानी के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने 18 अगस्त को दो कमेटियां गठित की हैं..

    1. परीक्षा संचालन एवं समन्वय समिति: अपर आयुक्त मिशा सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं। समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और एजेंसी के साथ समन्वय का काम करेगी।

    2. तकनीकी समिति (IT विंग): सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी इस समिति में हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, SMS अलर्ट और तकनीकी सुरक्षा की निगरानी करेगी।

    कितने पद खाली हैं
    कुल 692 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 397 भरे जा चुके हैं। फिलहाल 295 पद खाली हैं। यह भर्ती उपयंत्री और सहायक यंत्री, दोनों पदों के लिए होगी।

    उपयंत्री के कुल 295 पद खाली हैं। इनमें 228 पद सिविल, 50 पद विद्युत और 17 पद मैकेनिकल विभाग के हैं। इसके अलावा सहायक यंत्री के 62 पद भी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। इनमें 51 पद सिविल, 7 पद इलेक्ट्रिकल और 4 पद मैकेनिकल के हैं।

    यह भर्ती मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015 और मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000 के तहत होगी।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी
    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तक की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।

    उपयंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद सीधे मेरिट लिस्ट जारी होगी। इसी सूची के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी।

    सहायक यंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। हर पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। एक विशेष इंटरव्यू बोर्ड डिग्री और डिप्लोमा की जांच करेगा।

    निगरानी के लिए दो कमेटियां
    बता दें कि 18 अगस्त को भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां बनाई गई।

    पहली कमेटी परीक्षा संचालन और समन्वय देखेगी। इसकी अध्यक्ष अपर आयुक्त मिशा सिंह हैं। इस समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं।

    यह समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के साथ तालमेल का काम करेगी।

    दूसरी तकनीकी कमेटी IT विंग की है। इस समिति में सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी शामिल हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट, SMS अलर्ट और परीक्षा से जुड़ी तकनीकी सुरक्षा पर नजर रखेगी।

  • दवा दुकानों पर CCTV अनिवार्य करने की तैयारी, जानें सरकार के प्रस्ताव पर क्यों हो रहा विरोध

    दवा दुकानों पर CCTV अनिवार्य करने की तैयारी, जानें सरकार के प्रस्ताव पर क्यों हो रहा विरोध

    नई दिल्ली

    अगर आप अपने घर के पास किसी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या कफ सिरप खरीदने जाते हैं, तो बहुत जल्द आपको एक CCTV कैमरे की नजर में खरीदारी करनी पड़ सकती है। भारत की शीर्ष दवा सलाहकार संस्था ने देश भर की हर केमिस्ट दुकान पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने की सिफारिश की है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम कसना है, लेकिन इस फैसले ने देश के छोटे दवा दुकानदारों की नींद उड़ा दी है।

    औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने 27 अगस्त को हुई अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। बोर्ड ने बिक्री केंद्र पर सीसीटीवी लगाने और सप्लाई चेन में नारकोटिक व साइकोट्रॉपिक (NDPS) दवाओं के पाई-पाई का हिसाब रखने की सिफारिश की है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मुहर और क्रियान्वयन के लिए भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है।

    क्यों पड़ी सीसीटीवी की जरूरत?
    केमिस्ट दुकानों पर कैमरों की निगरानी का विचार नया नहीं है। लंबे समय से दवा नियंत्रक अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि नशीली दर्द निवारक गोलियां और आदत डालने वाले कफ सिरप वैध सप्लाई चेन से चोरी-छिपे निकलकर अवैध बाजार तक पहुंच रहे हैं।

    बच्चों में नशीली दवाओं की लत रोकने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी सख्त निगरानी की मांग की थी। सरकार का मानना है कि सीसीटीवी की फुटेज से एक ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा, जिससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि कौन सा दुकानदार बिना डॉक्टर के पर्चे के नशीली दवाएं बेच रहा है।

    '50 हजार से 1 लाख का खर्च, कैसे चलाएं दुकान?'
    सरकार के इस प्रस्ताव के सामने आते ही देश भर के केमिस्टों का गुस्सा फूट पड़ा है। 15 लाख से ज्यादा सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के सबसे बड़े दवा संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने 17 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को एक आपातकालीन पत्र लिखा है।

    दवा दुकानदारों का कहना है कि 6 से 8 कैमरे, DVR/NVR सिस्टम, हार्ड डिस्क स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और मेंटेनेंस मिलाकर प्रति दुकान 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए तक का भारी-भरकम खर्च आएगा। मामूली मार्जिन पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यह रकम जुटाना बेहद मुश्किल है।

    उनका कहना है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लगातार बिजली कटौती होती है और इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति खराब है। ऐसे में 24 घंटे लगातार रिकॉर्डिंग करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है।

    बड़े कॉर्पोरेट फार्मेसी ब्रांड्स तो यह खर्च उठा लेंगे, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में 'हेल्थ फॉर ऑल' के दौर से सेवा दे रहे छोटे केमिस्ट भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।

    'कैमरे दवा की जांच नहीं कर सकते, फैक्ट्री से ही हो ट्रैकिंग'
    तमिलनाडु केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (TNCDA) के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्रन मन्नारगुडी और अन्य खुदरा दवा विक्रेताओं का तर्क है कि कैमरे यह जांच नहीं कर सकते कि पर्चा असली है या नकली, जिसकी जानकारी पहले से ही बिलिंग रजिस्टर में दर्ज होती है।

    दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि इस नियम को तुरंत वापस लिया जाए या फिर ग्रामीण दुकानदारों को सरकार खुद पूरी सब्सिडी दे। उनका सुझाव है कि रिटेल दुकानदारों पर नियम थोपने के बजाय सरकार को दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों से ही 'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम लागू करना चाहिए ताकि नशे के कारोबार पर असल नकेल कसी जा सके।

  • 20 सितंबर 2026 राशिफल: रविवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा खास, मिल सकता है आर्थिक लाभ

    20 सितंबर 2026 राशिफल: रविवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा खास, मिल सकता है आर्थिक लाभ

    मेष
    मन अशांत रहेगा। नकारात्मक विचारों से बचें। लेखनादि-बौद्धिक कार्यों से मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे।

    वृषभ
    मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय के साधन भी बन सकते हैं। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। खर्च की अधिकता रहेगी।

    मिथुन
    मन अशांत रहेगा। पिता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। कारोबार में कठिनाई आ सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। आय के साधन भी बनेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

    कर्क
    मन परेशान होगा। संयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी।

    सिंह
    आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु आत्मसंयत रहें। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी।

    कन्या
    मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। व्यर्थ के क्रोध से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम भी अधिक रहेगा। लाभ में भी वृद्धि होगी। कारोबार के लिए मित्र के साथ यात्रा पर जा सकते हैं।

    तुला
    मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी अधिक रहेगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी।

    वृश्चिक
    वाणी में सौम्यता रहेगी, परंतु मन परेशान हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। माता-पिता का साथ मिलेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग तो मिलेगा, परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है।

    धनु
    मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।

    मकर
    मन प्रसन्न रहेगा, परंतु नकारात्मक विचारों से बचें। किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। किसी दूसरे स्थान पर भी जा सकते हैं। परिवार का साथ रहेगा।

    कुंभ
    मन प्रसन्न तो रहेगा। फिर भी आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। बातचीत में भी संतुलन बनाए रखें। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी।

    मीन
    मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। व्यर्थ के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम भी अधिक रहेगा, परंतु आय में कमी हो सकती है। खर्चों में वृद्धि होगी।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर परिवार को पक्का घर’ के विजन से साकार हुआ अमृतलाल का सपना

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर परिवार को पक्का घर’ के विजन से साकार हुआ अमृतलाल का सपना

    रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रत्येक परिवार को सुरक्षित, मजबूत और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से देशभर में नई गति मिल रही है। इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने का रास्ता आसान किया है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत पंडरीपानी निवासी अमृतलाल का परिवार भी इस बदलाव का उदाहरण है। लंबे समय तक कच्चे मिट्टी के मकान में रहने के बाद अब उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित आवास में सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है।

    कच्चे मकान में बारिश के दिनों में होती थी परेशानी
    अमृतलाल बताते हैं कि पक्का मकान बनने से पहले उनका परिवार कच्चे मिट्टी के मकान में रहता था। बरसात के दिनों में घर की छत से पानी टपकने लगता था और दीवारों में सीलन आ जाती थी। बारिश के साथ मौसम की अन्य परिस्थितियों में भी परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कच्चे मकान में रहना न केवल असुविधाजनक था, बल्कि परिवार की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता था।

    प्रधानमंत्री आवास योजना ने पूरा किया पक्के घर का सपना
    ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अमृतलाल को पक्का आवास स्वीकृत हुआ। योजना से मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को साकार कर दिया। निर्माण पूरा होने के बाद अब उनका परिवार मजबूत और सुरक्षित आवास में रह रहा है। नया घर उनके लिए केवल ईंट और दीवारों से बना भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन का आधार बन गया है।

    नए घर ने बदली परिवार की दिनचर्या
    पक्का आवास मिलने के बाद अमृतलाल के परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में सीलन जैसी परेशानियों से राहत मिल गई है। परिवार के सभी सदस्य स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहे हैं। आवास की सुविधा ने परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक सहज और व्यवस्थित बनाया है।

    बच्चों को मिला पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल
    नए पक्के मकान का सकारात्मक प्रभाव परिवार के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। अब उन्हें पढ़ने के लिए सुरक्षित और शांत वातावरण मिल रहा है। अमृतलाल बताते हैं कि पक्के घर ने परिवार की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बेहतर माहौल उपलब्ध कराया है। घर में खुशहाली का वातावरण है और परिवार अपने भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करता है।

    पक्का घर बना सम्मान और सुरक्षा का आधार
    प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिला पक्का मकान अमृतलाल के परिवार के लिए सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। कच्चे मकान की कठिन परिस्थितियों से निकलकर पक्के आवास में पहुंचना उनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब परिवार को मौसम की चुनौतियों के बीच अपने घर की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती।

    अमृतलाल बोले- प्रधानमंत्री आवास योजना ने दी नई पहचान
    अपने अनुभव साझा करते हुए अमृतलाल ने कहा कि पक्का मकान उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी और राहत लेकर आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के माध्यम से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।

    हर परिवार के पक्के घर के संकल्प को मिल रही मजबूती
    अमृतलाल का परिवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन का उदाहरण है, जिसमें हर जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे परिवारों को पक्की छत मिल रही है, जिनके लिए कभी मजबूत और सुरक्षित घर का सपना दूर की बात थी। आज अमृतलाल का परिवार अपने पक्के घर में निश्चिंत होकर जीवन व्यतीत कर रहा है। उनके लिए यह आवास सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर और हरित भारत के विजन को साकार कर रहा सौर ऊर्जा का संकल्प

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर और हरित भारत के विजन को साकार कर रहा सौर ऊर्जा का संकल्प

    रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ देशभर में आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ रही है। योजना के माध्यम से घरों की छतों को बिजली उत्पादन का माध्यम बनाकर परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ बिजली खर्च में भी राहत पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी इस योजना का लाभ नागरिकों तक पहुंच रहा है।

    गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत भदौरा निवासी शुभम राठौर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के विजन से प्रेरित होकर अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कराया है। सौर ऊर्जा को अपनाने से उनके परिवार की घरेलू बिजली जरूरतें अब सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं और बिजली खर्च में भी राहत मिली है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और देश के परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ की शुरुआत की है। योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित कर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और बिजली के खर्च को कम करने में सहायता प्रदान करना है। शुभम राठौर ने योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर सोलर प्लांट स्थापित कर इस संकल्प को अपने जीवन में अपनाया है। उनके परिवार के लिए अब घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है।

    केंद्र और राज्य की सब्सिडी से आसान हुआ सौर ऊर्जा का सफर
    राठौर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। वहीं राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त सहायता ने सोलर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को उनके लिए आसान बनाया।

    बिजली बिल में राहत, परिवार को मिली आर्थिक सुविधा
    सोलर प्लांट लगाने से पहले राठौर को हर महीने लगभग 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद बिजली खर्च में उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली है। राठौर बताते हैं कि अब बिजली बिल को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से तैयार हो रही है।

    अतिरिक्त बिजली का भी हो रहा उपयोग
    सोलर प्लांट से आवश्यकता से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त विद्युत ग्रिड में पहुंचती है और उसका समायोजन बिजली बिल में किया जाता है। इससे सौर ऊर्जा से होने वाले लाभ का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। राठौर का परिवार अपनी जरूरत की बिजली सौर ऊर्जा से पूरी करने के साथ ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहा है।

    स्वच्छ ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
    शुभम राठौर का परिवार सौर ऊर्जा को अपनाकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। इस तरह योजना का लाभ परिवार की आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ रहा है।

    शुभम राठौर बोले- अपनी छत से बन रही हमारी बिजली
    शुभम राठौर बताते हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके परिवार को बिजली खर्च में राहत मिली है। अब घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना से मिली सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना आसान हुआ और अब स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करते हुए परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

    भदौरा से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिल रही मजबूती
    ग्राम भदौरा के शुभम राठौर की कहानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वच्छ ऊर्जा के विजन को स्थानीय स्तर पर साकार होते दिखाती है। एक परिवार द्वारा अपनी छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना न केवल बिजली की जरूरत पूरी करने का माध्यम बना है, बल्कि ऊर्जा बचत, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सार्थक कदम है।

    ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के माध्यम से घर-घर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऐसे परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राठौर का परिवार इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां सूरज की रोशनी से बिजली भी बन रही है और आत्मनिर्भर भविष्य की राह भी रोशन हो रही है।

  • जल जीवन मिशन से बदली ग्राम बारीउमराव की तस्वीर, हर घर पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल

    जल जीवन मिशन से बदली ग्राम बारीउमराव की तस्वीर, हर घर पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल

    रायपुर। जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बारीउमराव में भी इस योजना का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। योजना के तहत गांव के शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन पहुंचने से अब ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। नल खोलते ही घर के आंगन तक पानी पहुंचने से ग्रामीण परिवारों के दैनिक जीवन में सुविधा, समय की बचत और राहत का नया अध्याय जुड़ा है।

    पहले पानी के लिए करना पड़ता था लंबा इंतजार
    जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से पहले ग्राम बारीउमराव के ग्रामीणों को पेयजल और घरेलू जरूरतों के लिए दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं। कई बार हैंडपंप खराब होने की स्थिति में ग्रामीणों को दूसरे स्थानों से पानी लाना पड़ता था। पानी भरने और उसे घर तक पहुंचाने में ग्रामीणों का काफी समय और श्रम खर्च होता था। महिलाओं और बच्चों को भी पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता था।

    घर तक नल पहुंचा तो आसान हुई जिंदगी
    जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन मिलने से अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूर जाने और कतार में खड़े होने की परेशानी से राहत मिली है। घर में ही नल से पानी उपलब्ध होने के कारण रोजमर्रा के काम पहले की अपेक्षा आसानी से पूरे हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की सुविधा घर तक पहुंचने से उनके समय और श्रम की बचत हो रही है तथा वे बचा हुआ समय खेती-किसानी, रोजगार और अन्य घरेलू कार्यों में लगा पा रहे हैं।

    श्री करम दास बोले- अब पानी के लिए न दूर जाना पड़ता है, न लाइन में लगना
    ग्राम बारीउमराव के निवासी श्री करम दास बताते हैं कि पहले पीने और रोजमर्रा के कामों के लिए पानी लेने घर से दूर स्थित हैंडपंप पर जाना पड़ता था। गर्मी के दिनों में हैंडपंप पर लंबी कतार लगने के कारण काफी समय इंतजार करना पड़ता था। कई बार हैंडपंप खराब होने पर दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी।

    उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन लगने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। अब घर पर ही नल से नियमित पानी मिल रहा है। पानी के लिए न तो दूर जाना पड़ता है और न ही लंबी कतार में लगना पड़ता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है और परिवार के सदस्य अन्य जरूरी कार्यों पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।

    स्वच्छ पेयजल से बेहतर हो रहा ग्रामीण जीवन
    घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए स्थानीय जलस्रोतों और दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भरता कम हुई है। नियमित रूप से घर तक पानी उपलब्ध होने से परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधा मिल रही है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

    जल जीवन मिशन ने गांव में पहुंचाई सुविधा की नई रोशनी
    ग्राम बारीउमराव में जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन पहुंचना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घर की चौखट तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों के जीवन में सुविधा और सुकून बढ़ा है। कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाले परिवार अब अपने घर में ही नल खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीणों के लिए केवल पेयजल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके समय, श्रम और जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।

  • ओडीओसी में शामिल गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों के ग्रेटर नोएडा में लगेंगे स्टाल

    ओडीओसी में शामिल गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों के ग्रेटर नोएडा में लगेंगे स्टाल

    गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मंडल की माटी की सोंधी सुगंध और यहां के देसी पारंपरिक लजीज पकवान अब सिर्फ गलियों और चौराहों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ग्लोबल पहचान हासिल करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओसी (एक जनपद एक व्यंजन) के प्रोत्साहन से ये पकवान अंतरराष्ट्रीय पटल पर दुनिया भर के खरीदारों और पर्यटकों की जुबान पर छाने के लिए तैयार हैं। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ (यूपीआईटीएस) में इस बार गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों का भी जलवा देखने को मिलेगा। यूपीआईटीएस में, ओडीओसी के अंतर्गत चयनित गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के विशिष्ट व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे।

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में देश-विदेश से आने वाले लाखों आगंतुक और कारोबारी अब पूर्वांचल के पारंपरिक भोजन और मिठाइयों का स्वाद चख सकेंगे। उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त गौरव मिश्रा के अनुसार ट्रेड शो के फूड कोर्ट में गोरखपुर मंडल के चुनिंदा व्यंजनों के लिए अलग से विशेष क्लस्टर और स्टाल तैयार किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय खानपान संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना, पारंपरिक कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराना और प्रदेश में 'फूड टूरिज्म' को गति देना है। यूपीआईटीएस के लिए गोरखपुर से लिट्टी चोखा व लहसुन वाले छोले समोसे, महराजगंज से रामकटोरी, कुशीनगर से लाल पेड़ा,छेना का खुरमा व केले के चिप्स और देवरिया से लिट्टी चोखा व मालपुआ का चयन किया गया है। इन व्यंजनों के स्टाल लगाने को कुल छह कारोबारियों का चयन किया गया है। 

    चयनित व्यंजनों की विशेषता की बात करें तो लिट्टी चोखा यहां के लोगों की खास पसंद है। सत्तू, अजवाइन, मंगरैल और शुद्ध सरसों के तेल में सने मसालों के साथ कंडे की आंच पर पकी और देसी घी में चुपड़ी लिट्टी और बैंगन-टमाटर व आलू का भुना चोखा पूर्वांचल की विशिष्ट पहचान है। इसे अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में पारंपरिक अंदाज में परोसा जाएगा। गोरखपुर का एक अन्य व्यंजन लहसुन वाला छोला समोसा, छोले में साबुत लहसुन के प्रचुर मात्रा से लगातार प्रसिद्धि बटोर रहा है। इसका विशिष्ट जायका देश-विदेश के मेहमानों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसी तरह कुशीनगर जिले के व्यंजन पेड़ा और छेना से बनने वाला खुरमा तथा महराजगंज जिले के मिठौरा बाजार की रामकटोरी की मिठास भी ट्रेड शो में छाप छोड़ने को तैयार है। 

    यूपी आईटीएस में लिट्टी चोखा का स्टाल लगाने के लिए चयनित गोरखपुर के गंगाधर दूबे का कहना है कि सरकार की इस पहल से केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की खानपान संस्कृति को भी नई प्रतिष्ठा मिलेगी। ​यूपीआईटीएस का मंच साबित करेगा कि पूर्वांचल का स्वाद केवल घरेलू रसोई या ढाबों तक सीमित नहीं, बल्कि यह दुनिया भर के फूड लवर्स के दिलों को जीतने का दम रखता है। जबकि लहसुन वाले छोला समोसा का स्टाल लगाने के लिए चयनित चौरीचौरा के चंद्रकेश प्रजापति का मानना है कि यूपीआईटीएस में स्थान मिलने के बाद खानपान के कारोबार में लगे ग्रामीण और कस्बाई हुनरमंदों की आर्थिकी भी सुधरेगी। 

    गोरखपुर मंडल से यूपीआईटीएस के लिए चयनित कारोबारी व उनके व्यंजन
    1.चंद्रकेश प्रजापति- मेसर्स चंद्रकेश हलवाई चौरीचौरा गोरखपुर, लहसुन वाले छोले समोसे।
    2.गंगाधर दूबे- मेसर्स बाटी चोखा गोरखपुर, लिट्टी चोखा।
    3.सुदीस कुमार- मेसर्स महेंद्र जी रामकटोरी वाले मिठौरा बाजार महराजगंज, रामकटोरी (खोवा आधारित मिठाई)।
    4.वेद प्रकाश राय- मेसर्स बाटी चोखा रेस्टोरेंट कसया रोड देवरिया, बाटी चोखा, मालपुआ।
    5.सन्नी मद्देशिया- मेसर्स कृष्णा स्वीट हाउस हाटा कुशीनगर, लाल पेड़ा, छेना खुरमा।
    6.अनुराग तिवारी- मेसर्स शांडिल्य एग्रो प्रोसेसिंग खड्डा कुशीनगर, केले के चिप्स।