Author: NewseDay

  • UP में बनेगी नई माहवारी स्वास्थ्य नीति, किशोरियों को मुफ्त नैपकिन के साथ जागरूकता पर जोर

    UP में बनेगी नई माहवारी स्वास्थ्य नीति, किशोरियों को मुफ्त नैपकिन के साथ जागरूकता पर जोर

     लखनऊ
     सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत कर राज्य स्तरीय नीति बनायी जाएगी, जिसमें स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।

    विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन तथा किशोरावस्था संबंधी जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से चलाया जाएगा। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले जरूरी जानकारी देने के साथ मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने के लिए डिजिटल, सामाजिक व अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।

    माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत कर राज्य नीति विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

    स्कूल से बाहर रहने वाली और वंचित समूहों की किशोरियों तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने और विद्यालयों में किशोरियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

     

  • AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार रोकने की बात अब सिर्फ बहस तक नहीं रही, मामला कोर्ट पहुंच गया है. अमेरिका में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है. आरोप है कि इन बड़ी AI कंपनियों ने मिलकर AI के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमति बनाई. अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो मामला अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों के तहत गंभीर हो सकता है.

    एआई को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही है कि इसे कितना तेज बनाया जाए. लेकिन अब सवाल उल्टा हो गया है. क्या AI को जानबूझकर स्लो करने की कोशिश भी कंपनियों के लिए कानूनी मुसीबत बन सकती है? अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI पर यही आरोप लगाया गया है.

    मामला अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की कोर्ट में पहुंचा है. मुकदमा उन लोगों की तरफ से दायर किया गया है, जो ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी AI सर्विस के पेड यूजर हैं.

    एक पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
    इस मामले की शुरुआत 12 सितंबर को एंथ्रोपिक के CEO Dario Amodei के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. अमोदेई ने एआई के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चिंता जताई और कहा कि कंपनियों को AI को ज्यादा सावधानी और सेफ्टी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए.

    उनकी बात का मतलब था कि AI की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि उसकी सेफ्टी को लेकर भी ज्यादा तैयारी जरूरी है. उन्होंने AI कंपनियों के बीच सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोलैबोरेशन की जरूरत की बात भी कही.

    इसके बाद OpenAI के CEO Sam Altman, SpaceXAI के Elon Musk और Google DeepMind के Demis Hassabis ने भी अमोदेई के प्रपोजल पर सार्वजनिक तौर पर रिएक्शन दिया. मुकदमा करने वालों का दावा है कि इन बयानों से पता चलता है कि बड़ी एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार कम करने के मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ तालमेल कर रही थीं.

    यूजर्स को क्या नुकसान होने का दावा?
    मुकदमे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे एआई कंपनियों के कॉम्पिटिटर्स ने नहीं, बल्कि उनके पेड यूजर्स ने दायर किया है.
    पिटीशनर्स का कहना है कि अगर ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी सर्विसेज को बेहतर बनाने की रफ्तार कंपनियां मिलकर कम करती हैं, तो इसका सीधा असर यूजर्स को मिलने वाली सर्विस पर पड़ सकता है.

    उनका तर्क है कि अगर कोई एक कंपनी खुद अपनी AI डेवलपमेंट की रफ्तार कम करती है तो उसे बाकी कंपनियों से पीछे रहने का खतरा होगा. लेकिन अगर सभी बड़ी कंपनियां मिलकर ऐसा करें, तो मार्केट में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है. हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. अभी ये सिर्फ मुकदमे में लगाए गए आरोप हैं. कोर्ट ने इन आरोपों को सही साबित नहीं किया है.

    खुद एंथ्रोपिक ने भी उठाई थी एंटीट्रस्ट की बात
    इस पूरे मामले का एक दिलचस्प पहलू यह है कि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने प्रपोजल में खुद भी एंटीट्रस्ट से जुड़ी चिंता का जिक्र किया था. उन्होंने सुझाव दिया था कि अमेरिकी सरकार एआई कंपनियों के बीच सेफ्टी से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने में मदद कर सकती है. इसके लिए कुछ खास तरह की सेफ्टी बातचीत को लेकर सीमित कानूनी छूट की जरूरत हो सकती है.

    Sam Altman ने भी ऐसे सरकारी फ्रेमवर्क का समर्थन किया था, जिसमें एआई सेफ्टी को लेकर कंपनियों के लिए एक जैसे नियम हों. हालांकि उनका कहना था कि AI सेफ्टी पर काम शुरू करने के लिए किसी नई एंटीट्रस्ट छूट या कानून का इंतजार जरूरी नहीं है.

    अब कोर्ट के सामने बड़ा सवाल
    अब इस केस में असली सवाल यही है कि एआई कंपनियों का सेफ्टी के लिए साथ काम करना कहां तक सही है. AI कंपनियां अगर अलग-अलग अपने मॉडल की सेफ्टी बढ़ाती हैं, तो यह एक बात है. लेकिन अगर कम्पेटिटर कंपनियां मिलकर एआई के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमत होती हैं, तो अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानून इसे किस नजर से देखता है, यही इस केस का अहम मुद्दा बन गया है.

    फिलहाल मामला शुरुआती स्टेज में है. एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल और स्पेसएक्स एआई के रेप्रेसेंटेटिव ने शनिवार तक इस मुकदमे पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया था. अब आगे कोर्ट में यह तय होना है कि कंपनियों का दावा किया गया सहयोग AI की सुरक्षा के लिए था या फिर इससे मार्केट में कम्पटीशन पर असर पड़ सकता है.

  • PU Senate Election 2026: 7 राज्यों में 271 बूथों पर मतदान, उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

    PU Senate Election 2026: 7 राज्यों में 271 बूथों पर मतदान, उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव के तहत रविवार को ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के साथ डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के लिए मतदान शुरू हो गया। ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी की 15 सीटों के लिए 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

    मतदान सात राज्यों में बनाए गए 271 पोलिंग बूथ पर हो रहा है। मतदान शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। चंडीगढ़ में भी विभिन्न स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान शुरू होने के शुरुआती समय में कई पोलिंग बूथ के बाहर सन्नाटा देखने को मिला। पोलिंग बूथ के बाहर लगाए गए प्रत्याशियों के स्टालों पर भी अभी तक बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मतदाता नहीं पहुंचे थे। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने की उम्मीद है।

    ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के चुनाव में 51 प्रत्याशी 15 सीटों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के मतदाता भी अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से प्रत्याशियों की ओर से जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा था। अब मतदान शुरू होने के बाद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजर अधिक से अधिक मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने पर है। शाम पांच बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया जाएगा।

  • झारखंड सरकार ने 25 लाख और एनआईए ने 5 लाख का इनाम बृजेश गंझू पर किया था घोषित

    झारखंड सरकार ने 25 लाख और एनआईए ने 5 लाख का इनाम बृजेश गंझू पर किया था घोषित

    लखनऊ/वाराणसी
    उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच यूपी एटीएस ने वाराणसी में बड़ी कार्रवाई अंजाम दी है। यहां एटीएस ने झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। बृजेश पर झारखंड सरकार और एनआईए ने 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    भोर में घेराबंदी, गिरफ्तारी के प्रयास पर फायरिंग
    20 सितंबर की भोर में बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ से रामनगर होते हुए मुगलसराय की ओर जा रहा था। सूचना मिलने पर यूपी एसटीएस की टीम ने उसे वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र स्थित लंका मैदान के पास रोकने की कोशिश की। गिरफ्तारी से बचने के लिए बृजेश मोटरसाइकिल से कूद गया और पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

    फायरिंग में यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी, हालांकि बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उनकी जान बच गई। वहीं क्रॉस फायरिंग में गोली लगने से बृजेश गंझू गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    30 लाख रुपये का था इनाम
    बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, झारखंड के चतरा जिले के लवलंग थाना क्षेत्र के लूटू का रहने वाला था। बृजेश प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी का कमांडर था, जिसकी तलाश लंबे समय से की जा रही थी। इस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

  • CM मोहन यादव पर जीतू पटवारी का तंज, ‘800 दिन बचे हैं, अब शिक्षा पर ध्यान दें’

    CM मोहन यादव पर जीतू पटवारी का तंज, ‘800 दिन बचे हैं, अब शिक्षा पर ध्यान दें’

    इंदौर.

    मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हालात को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जमकर निशाना साधा।

    पटवारी ने सीएम से सस्ती शिक्षा सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उनके पास अब सिर्फ 800 दिन बचे हैं, इसलिए वे जनता से जुड़े असली मुद्दों पर काम करें। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि पूरे प्रदेश में छात्रों और अभिभावकों के साथ मिलकर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    800 दिन बचे हैं, भाजपा नेता ही धक्का मारने में लगे हैं
    पटवारी ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि यादव जी, आपसे विनम्र प्रार्थना है कि सस्ती एजुकेशन आपकी जवाबदारी है। आपके पास केवल 800 दिन बचे हैं और इस बीच भाजपा वाले ही आपको धक्का मारने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बिना समय बर्बाद किए शिक्षा पर काम करना चाहिए, क्योंकि कुर्सी के ये दिन कब निकल जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा।

    हर जिले में बिना राजनीतिक बैनर के होगा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के हर जिले में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम कांग्रेस के बैनर तले नहीं होगा। इसमें अभिभावकों और छात्रों का सीधा सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अब डरे और छात्रों से जुड़े असली मुद्दों पर काम करना शुरू करें।

    किसी का अपमान करना उद्देश्य नहीं, मिमिक्री सिर्फ मनोरंजन के लिए
    हालिया आयोजनों में मिमिक्री को लेकर उठे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का अपमान करना या ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि मंच पर कोई मिमिक्री आर्टिस्ट आता है, तो वह केवल दर्शकों के मनोरंजन के लिए होता है, इसे किसी अन्य रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

  • रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    मॉस्को
    रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है. यूक्रेन ने मॉस्को पर एक हजार से अधिक ड्रोन दागे. मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है. हमले के बाद यहां आग लग गई. दूर से आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई दिया. धमाकों की आवाज भी सुनाई दी.

    मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने रविवार को टेलीग्राम पर बताया कि ड्रोन ने मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने भी मेयर के हवाले से रिफाइनरी में नुकसान की जानकारी दी है. इस हमले में दो लोगों की मौत की भी खबर है.

    वहीं न्यूज एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जगह की पुष्टि की है. इन वीडियो में दूर एक जगह आग जलती दिख रही है. आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है.

    इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि बीती रात मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेन की लंबी दूरी की कार्रवाई का रूस पर काफी असर हुआ. उन्होंने दावा किया कि रूस के एक अहम तेल उद्योग ठिकाने और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया.

    जेलेंस्की के मुताबिक, इन ठिकानों से रूस की युद्ध मशीन को अरबों डॉलर की मदद मिलती है. कार्रवाई में FP-1, RZ-100, MICH-2000, Palianytsia, Vendetta, Liutyi, Bars, Flamingo, Sichen और Pelican जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा, मानव रहित सिस्टम बल, विशेष अभियान बल, रक्षा खुफिया और विदेश खुफिया सेवा के जवानों को धन्यवाद दिया.

    उन्होंने कहा कि रूस के वोरोनिश क्षेत्र में एक ठिकाने पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. जेलेंस्की ने मॉस्को से युद्ध खत्म कर शांति का रास्ता चुनने को कहा. उन्होंने कहा कि तनाव कम करने के रास्ते ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है.

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग का आज आखिरी दिन है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया है.

    रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए वोटिंग तीन दिनों से चल रही है. रविवार को इसका तीसरा और आखिरी दिन है. सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी के चुनाव में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है.

    दरअसल, यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. क्रेमलिन इस चुनाव के नतीजों को अपनी नीतियों और यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन के तौर पर पेश कर सकता है.

    यूक्रेन पर ड्रोन हमले का आरोप
    मॉस्को में हुए ड्रोन हमले का आरोप रूस ने यूक्रेन पर लगाया है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी है. रूस पहले भी यूक्रेन पर ड्रोन हमलों के आरोप लगाता रहा है. इस बीच एक्स पर पोस्ट पर यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इन हमलों की पुष्टि कर दी है.

    रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को भी यूक्रेन पर चुनाव में दखल देने की कोशिश का आरोप लगाया था. उन्होंने रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया इलाके में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हमले का जिक्र किया था.

    रूस के मुताबिक इस हमले में चुनाव अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई. यूक्रेन ने रूस के चुनाव को पहले ही खारिज किया है. कीव ने इसे एक दिखावटी इलेक्शन बताया है. वहीं यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण वहां चुनाव स्थगित हैं.

    रूस के चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मॉस्को में ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमले की भी जानकारी दी थी. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन मतदान व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश हुई.

    इस बीच रूस में चुनाव को लेकर सुरक्षा भी कड़ी रखी गई है. रूसी सरकार का कहना है कि पश्चिम के साथ मौजूदा टकराव के दौरान राष्ट्रीय एकता जरूरी है. रूसी सरकार यूक्रेन में चल रही सैन्य कार्रवाई को पश्चिम के साथ बड़े संघर्ष का हिस्सा बताती रही है.

    युद्ध की थकान का भी दिख सकता है असर
    रूस में चुनाव का नतीजा काफी हद तक तय माना जा रहा है. यूनाइटेड रशिया के सत्ता में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और आर्थिक दबाव की वजह से लोगों में थकान का असर कुछ विपक्षी दलों को मिल सकता है.

    बर्लिन स्थित नेस्ट थिंक टैंक ने कहा है कि चुनाव के दौरान कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आ सकते हैं, जो क्रेमलिन के लिए असहज स्थिति पैदा करें. खासकर ऐसे समय में जब रूस आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है.

    इस चुनाव में ज्यादातर युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को मैदान में उतरने की इजाजत नहीं मिली. वहीं कुछ उदारवादी उम्मीदवारों ने युद्ध को लेकर अपनी चिंता जताई है. रूस में सेना को बदनाम करने या अधिकारियों के मुताबिक फर्जी खबर फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है.

    ऐसे माहौल में मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर हुआ ड्रोन हमला चुनाव के आखिरी दिन की बड़ी घटना बन गया है. फिलहाल हमले में नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है. साथ ही इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं हुई है. इस हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है.

  • छत्तीसगढ़ में गेस्ट टीचर्स के लिए खुशखबरी, 6 माह का मानदेय जारी

    छत्तीसगढ़ में गेस्ट टीचर्स के लिए खुशखबरी, 6 माह का मानदेय जारी

    रायपुर.

    प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने राशि जारी कर दी है।

    लोक शिक्षण संचालनालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25 जिलों में कार्यरत 1,535 अतिथि शिक्षकों के छह माह के मानदेय के लिए 18 करोड़ 42 लाख रुपये का आवंटन किया है। विभागीय आदेश 18 सितंबर को जारी किया गया है।

    हर शिक्षक को 20 हजार महीना
    आदेश के मुताबिक अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। छह महीने के हिसाब से प्रत्येक शिक्षक के लिए 1.20 लाख रुपये की राशि निर्धारित है। जिलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या के आधार पर संबंधित जिला स्तर पर भुगतान के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है।

    बस्तर संभाग के सात जिलों को भी मिला बजट
    आवंटन में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों को शामिल किया गया है। कोंडागांव में 141 अतिथि शिक्षकों के लिए एक करोड़ 69 लाख 20 हजार, बस्तर में 133 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 59 लाख 60 हजार और कांकेर में 126 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 51 लाख 20 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसी तरह दंतेवाड़ा के 31 शिक्षकों के लिए 37 लाख 20 हजार, सुकमा के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार, बीजापुर के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार और नारायणपुर के 36 अतिथि शिक्षकों के लिए 43 लाख 20 हजार रुपये का प्रविधान किया गया है।

    बलरामपुर में सबसे ज्यादा अतिथि शिक्षक
    जिलावार आंकड़ों में बलरामपुर में 220 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो सूची में सर्वाधिक हैं। इनके छह माह के मानदेय के लिए दो करोड़ 64 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इसके बाद सूरजपुर में 130 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 56 लाख और सरगुजा में 71 शिक्षकों के लिए 85 लाख 20 हजार रुपये का आवंटन किया गया है। शेष जिलों में भी शिक्षकों की संख्या के अनुसार बजट भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि केवल मानदेय भुगतान के लिए ही उपयोग की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल में बड़ा बदलाव, पहले B28 फिर 350 kmph वाली स्वदेशी B35 ट्रेनें

    मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल में बड़ा बदलाव, पहले B28 फिर 350 kmph वाली स्वदेशी B35 ट्रेनें

    नई दिल्ली
     भारत 2030 तक 350 किमी/घंटा (B35) की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी हाई-स्पीड या बुलेट ट्रेन बनाएगा। ये ट्रेनें जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की ट्रेनों जैसी होंगी, जिनका प्रोडक्शन भी उसी साल शुरू होना है। यह प्रस्ताव मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी देने के लिए था।

    रेलवे मंत्रालय के कैबिनेट ने प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी दे दी है और ये लागत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह 2015 में तैयार किए गए शुरुआती अनुमान से लगभग दोगुना है। बढ़ी हुई लागत में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च बजट से पूरा किया जाएगा।

    ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू
    कैबिनेट को बताया है कि उसने B35 ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब जापान ने दिसंबर 2024 में बताया कि मौजूदा E5 सीरीज की ट्रेनों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है।

    इसमें बताया गया है कि जापान ने संकेत दिया है कि E10 ट्रेनों का प्रोडक्शन 2030 में शुरू होगा और वे 2034 तक ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि E10 ट्रेनों के उपलब्ध होने पर उन्हें चलाने पर विचार किया जाएगा।

    भारत खुद डेवलप करेगा अपना सिस्टम
    मंत्रालय ने कहा है कि देश में बनी B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी गई है और भारत अपना खुद का भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) भी विकसित करेगा। यह कदम चीन के अपने CTCS सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसा ही है, जो पारंपरिक और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर स्पीड, ट्रेनों के बीच की दूरी और सुरक्षा को मैनेज करता है।

    लागत में बढ़ोतरी की वजह क्या है?
    मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट की लागत में पहले के 1.1 लाख करोड़ रुपये से जो भारी बढ़ोतरी हुई है, उसकी मुख्य वजहें-
        जमीन अधिग्रहण की लागत का तीन गुना से ज्यादा बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना।
        इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में लगभग 50% की बढ़ोतरी के साथ यह 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाना।
        2015 के अनुमान की तुलना में ट्रेनों और सिग्नलिंग सिस्टम पर होने वाले खर्च में लगभग 100% की बढ़ोतरी।

    शुरुआत में चलेंगी बी28 ट्रेनें
    भविष्य में आने वाली जापानी ट्रेनों को छोड़कर, प्रोजेक्ट की मौजूदा लागत लगभग 399 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है। शुरुआत में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर B28 ट्रेनें चलेंगी जिनकी डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि उनकी ज्यादा से ज्यादा ऑपरेटिंग स्पीड 249 kmph होगी।

    BEML को 32 B28 ट्रेनें बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। उम्मीद है कि 2027 की पहली तिमाही तक ट्रायल रन के लिए दो प्रोटोटाइप ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। BEML ने शुक्रवार को BSE को बताया कि उसे 15 और B28 ट्रेनें बनाने के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग कॉन्ट्रैक्ट मिला है। पूरे 508 किमी. लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर हुआ चयन, 173 महिलाएं भी बनीं यूपी पुलिस का हिस्सा

    पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर हुआ चयन, 173 महिलाएं भी बनीं यूपी पुलिस का हिस्सा

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो कर नहीं पाए, वे हमेशा बोलेंगे। जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता और अक्षमता से उत्तर प्रदेश को बीमारू बनाया, उनके निकम्मेपन और निठल्लेपन को यूपी और देश देख चुका है। ऐसे लोगों को आज यूपी पुलिस या प्रदेश की व्यवस्था पर बोलने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विपक्ष गिनता जाए, सरकार नियुक्तियां देती जाएगी। शनिवार को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, रविवार को 912 को दिए जा रहे हैं और अब 22 सितंबर को फिर नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने के साथ प्रदेश में हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट होगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री योगी ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को यूपी पुलिस का हिस्सा बनने पर बधाई दी।
     
    पारदर्शी चयन शासन के प्रति विश्वास का प्रतीक
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण और पारदर्शी परीक्षा के माध्यम से होता है तो यह केवल उसके परिवार के लिए उपलब्धि नहीं होती, बल्कि शासन के प्रति आम आदमी के विश्वास का भी प्रतीक बनता है। 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों के कारण नौजवानों में निराशा और हताशा थी। भाई-भतीजावाद ने पूरे सिस्टम को इस तरह जकड़ रखा था कि पारदर्शिता और शुचिता की कल्पना नहीं की जा सकती थी।
     
    उन्होंने कहा कि भर्ती का विज्ञापन आते ही युवाओं के मन में यह भाव आता था कि बिना सिफारिश और लेनदेन के चयन नहीं हो पाएगा। परीक्षा और चयन प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़े होते थे और पेपर लीक के मामले सामने आते थे। मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस में ऐसी भर्तियां भी हुईं, जिनमें परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र किसी दूसरे को मिलता था। जो अभ्यर्थी आवेदन तक नहीं करते थे, उन्हें नियुक्ति पत्र बांट दिए जाते थे और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था।
     
    नियुक्ति से तैनाती तक सिफारिश की जरूरत नहीं
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए गए। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और शिक्षा से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया। समूह ग और घ की भर्ती से साक्षात्कार समाप्त किया गया, ताकि योग्य अभ्यर्थी को किसी स्तर पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
     
    उन्होंने कहा कि अब विज्ञापन से लेकर परीक्षा, नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण और जिलों में तैनाती तक किसी अभ्यर्थी को सिफारिश कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। किसी के साथ भेदभाव भी नहीं होगा। हर व्यक्ति को उसकी योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर अवसर मिलेगा।
     
    साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को मिली नियुक्ति
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 के बाद भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों का परिणाम है कि साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में सेवा का अवसर मिला है। भर्ती की कई प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं।
     
    उन्होंने कहा कि यूपी बीमारू राज्य की स्थिति से उभरा है और आज देश के उन राज्यों में है, जो खुद को रेवेन्यू सरप्लस कह सकते हैं। नौ-साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है। अब यूपी के नौजवानों और नागरिकों के सामने पहचान का संकट नहीं है। नए निवेश आ रहे हैं और नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
     
    दंगा और कर्फ्यू वाले यूपी की बदली पहचान
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को प्रदेश से बाहर अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी। यूपी में अवसर नहीं थे। हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू रहता था। बरेली, अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत अलग-अलग हिस्सों में दंगों की स्थिति रहती थी।
     
    उन्होंने कहा कि उस समय माफिया सामान्य नागरिक और व्यापारी ही नहीं, बल्कि प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती बने हुए थे। माफिया का काफिला निकलता था तो दूसरे लोगों के वाहन रोक दिए जाते थे। आज कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुली जीप में उपद्रव करने का दुस्साहस नहीं कर सकता।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उपद्रवग्रस्त प्रदेश को उत्सवपूर्ण प्रदेश के रूप में बदला गया है। उत्तर प्रदेश की छवि कर्फ्यू मुक्त और माफिया मुक्त प्रदेश के रूप में बनी है। कुंभ और महाकुंभ से लेकर पर्व-त्योहार, वीवीआईपी दौरे और स्थानीय आयोजन सकुशल संपन्न हो रहे हैं। इस बदलाव में यूपी पुलिस की बड़ी भूमिका है।
     
    अब देश में होती है यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले मध्य और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों और कस्बों में जिन परिवारों के पास क्षमता थी, वे अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रदेश से बाहर रिश्तेदारों या हॉस्टल में रखते थे। जिनके पास साधन नहीं थे, वे बेटियों को घर बैठाने को मजबूर थे।
     
    उन्होंने कहा कि आज कोई राह चलती बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता। ऐसा करने वाले को मालूम है कि उसका अंजाम क्या होगा। यूपी के प्रति बदले नजरिए में यूपी पुलिस का बड़ा योगदान है। आज देश में यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा होती है और लोग पूछते हैं कि यूपी में दंगे और उपद्रव क्यों नहीं हो रहे हैं।
     
    पेपर लीक करने वालों के लिए बनाया कठोर कानून
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस के आधे से ज्यादा पद खाली थे। प्रदेश में चार लाख पुलिस बल की आवश्यकता थी, लेकिन दो लाख से भी कम पुलिसकर्मी थे। भर्तियां न्यायालयों में अटकी हुई थीं। सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार कर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया।
     
    उन्होंने कहा कि पेपर लीक कराने या भर्ती से जुड़े अवैध धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ ऐसा कानून बनाया गया, जिसमें आजीवन कारावास की सजा और पूरी संपत्ति जब्त करने तक का प्रावधान है। भर्ती की प्रक्रियाओं को दुरुस्त कर पुलिस में खाली पदों को भरने का काम आगे बढ़ाया गया।
     
    छह हजार से बढ़कर 60 हजार हुई प्रशिक्षण क्षमता
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले प्रदेश में छह हजार पुलिसकर्मियों को एक साथ प्रशिक्षण देने की भी क्षमता नहीं थी। आज यूपी पुलिस 60 हजार पुलिसकर्मियों को एक साथ प्रशिक्षण देने की क्षमता अर्जित कर चुकी है।
     
    उन्होंने कहा कि इतने बड़े प्रदेश में पहले 10 हजार महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थीं। अब यह संख्या 44 हजार से अधिक हो चुकी है। वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद इस वर्ष के अंत तक महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 50 हजार तक पहुंच जाएगी।
     
    फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट से साइबर थानों तक बढ़ी ताकत
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पुलिस बल की संख्या बढ़ाने के साथ उसकी स्किलिंग पर भी ध्यान दिया गया। उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। इसके लिए एयरपोर्ट के पास पुलिस की 110 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त कराया गया। हर रेंज में फॉरेंसिक लैब उपलब्ध है।
     
    उन्होंने कहा कि सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई। यूपी एसएसएफ और एसडीआरएफ का गठन किया गया। हर जिले में साइबर थाने और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। पीएसी की समाप्त की गई 34 कंपनियों को दोबारा गठित किया गया। तीन महिला पीएसी बटालियन बनाई गईं, जिन्हें बढ़ाकर छह किया जा रहा है।
     
    56 जिलों में पुलिस की हाईराइज बैरक
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग के लिए केवल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। पुलिसकर्मियों को उसी स्तर की सुविधाएं और संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे। सरकार ने पुलिस लाइन, बैरक और आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया है। प्रदेश के 56 जिलों में सबसे ऊंची इमारत पुलिस बैरक या पुलिस की आवासीय सुविधा की है।
     
    उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ी है। बदलती दुनिया और नई तकनीक के साथ पुलिस को भी लगातार खुद को तैयार करना होगा। तकनीक को समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समाधान के रूप में इस्तेमाल करना होगा।
     
    912 नियुक्तियां, 912 परिवारों के लिए भी प्रेरणा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शासन नवचयनित पुलिसकर्मियों से आम आदमी की समस्याओं के समाधान में उसी संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है, जिस संवेदनशीलता के साथ सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। ये नियुक्ति पत्र केवल 912 व्यक्तियों को नहीं मिल रहे, बल्कि 912 परिवारों और उनसे जुड़े समाज के लोगों के लिए भी प्रेरणा बनने जा रहे हैं।
     
    उन्होंने कहा कि इन युवाओं को देखकर उनके गांव और मोहल्ले के दूसरे नौजवानों में भी विश्वास पैदा होगा कि वे बिना सिफारिश और लेनदेन अपनी योग्यता से सरकारी सेवा का हिस्सा बन सकते हैं।
     
    पुलिस सेवा में कर्तव्य पहले, अधिकार बाद में: सुरेश खन्ना
    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में होने वाली भर्तियां विवाद और संदेह के घेरे में रहती थीं। पुलिस की सेवा का मतलब केवल पद नहीं है, बल्कि इसमें कर्तव्य पहले और अधिकार बाद में आते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी मिलने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति के अंदर अहंकार आ जाए। मुख्यमंत्री योगी के कार्यकाल में साढ़े नौ लाख से अधिक नियुक्तियां हुई हैं। नवचयनित पुलिसकर्मियों की कार्यशैली से ही लोग अंदाजा लगाएंगे कि योगी सरकार क्या कर रही है।
     
    35 हजार पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जारी: राजीव कृष्ण
    पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने 912 चयनित अभ्यर्थियों, विशेषकर 173 महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि सभी का चयन पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया से हुआ है। इनका आधारभूत प्रशिक्षण छह अक्टूबर से शुरू होगा। छह माह के संस्थागत और तीन माह के व्यावहारिक प्रशिक्षण के बाद इन्हें तैनाती दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 35 हजार पदों पर सीधी भर्ती और 9,457 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। यूपी पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता भी छह हजार से बढ़कर 60 हजार से अधिक हो चुकी है।
     
    पौधा और भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट कर किया स्वागत
    कार्यक्रम की शुरुआत में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पौधा और भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना का पौधा और राम दरबार की प्रतिमा देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से पारंपरिक पुष्पगुच्छ के स्थान पर पौधा भेंट करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य प्रकृति, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था अमिताभ यश समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और नवचयनित अभ्यर्थी मौजूद रहे।

  • BSP में परिवारवाद पर मायावती का बड़ा ऐलान, आकाश आनंद और बहन को संगठन से रखा जाएगा दूर

    BSP में परिवारवाद पर मायावती का बड़ा ऐलान, आकाश आनंद और बहन को संगठन से रखा जाएगा दूर

    नई दिल्ली
    बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आकाश आनंद और ईशान आनंद को लेकर बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने कहा है कि उनके भाई आनंद कुमार के परिवार से आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. मायावती ने कहा कि अब आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा.

     अपने एक्स पोस्ट में मायावती ने कहा कि यदि किसी को राजनीति में सफल होना है और समाज के लिए काम करना है तो उसे अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीएसपी के संस्थापक कांशीराम ने भी राजनीति में आने के बाद अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में काम करने की अनुमति दी थी.

    उन्होंने कहा कि कांशीराम से प्रेरित होकर उन्होंने भी अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का फैसला लिया. मायावती ने कहा कि लड़की होने की वजह से मजबूरी में उन्हें अपने किसी न किसी भाई-बहन को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा, जिसके तहत उनके छोटे भाई आनंद कुमार पिछले काफी वर्षों से उनकी सेवा में कार्यरत हैं.

    आकाश आनंद को लेकर क्या कहा
    मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे किया गया था. लेकिन शादी के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों की वजह से कुछ दिन पहले उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा. मायावती ने कहा कि आकाश आनंद अब अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह फंस चुके हैं और उन्हें पार्टी में वापस लेना पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात होगा.

    उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के परिवार से किसे पार्टी में आगे किया जाए, इसे लेकर वह पिछले कुछ समय से दुविधा में थीं. अब सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने फैसला लिया है कि परिवार से ऐसे सदस्य को आगे किया जाए, जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर बिल्कुल न चले.

    मायावती ने कहा कि आगे चलकर आनंद कुमार की बेटी की मदद लेने का सवाल भी है. उन्होंने कहा कि शादी के बाद यदि उनका मामला भी आकाश आनंद की तरह निकल गया तो यह पार्टी हित में सही नहीं होगा. इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी की कोई भी जिम्मेदारी देने से दूर रखा जाएगा और इस फैसले में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

    आगे कुछ कहा नहीं जा सकता
    मायावती ने कहा कि अब इन दोनों के स्थान पर आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा ही लग रहा है कि ईशान आनंद का आकाश आनंद की तरह कोई चक्कर नहीं रहेगा, लेकिन आगे कुछ भी नहीं कहा जा सकता.

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईशान आनंद ने पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया तो उन्हें भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में कोई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे किया जाएगा.

    मायावती ने कहा कि देश और जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ इस मुद्दे को लेकर 23 सितंबर को बीएसपी की बेहद जरूरी ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है, ताकि पार्टी के लोग अपने काम में पूरी तरह जुट सकें.

    पत्र से प्रभावित होकर लिया फैसला
    मायावती ने कहा कि परिवार को लेकर पार्टी और मूवमेंट के हित में उन्होंने यह फैसला कांशीराम से प्रेरित होकर और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के लिखे एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है. उन्होंने बताया कि 23 फरवरी 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने बंबई में अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखा था.

    मायावती के मुताबिक, उस पत्र में बाबा साहेब ने लिखा था कि उन्हें श्री उपशम के कई पत्र मिले हैं, जिनमें कहा गया था कि यशवंत उन्हें बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस में अकाउंटेंट और कैशियर के तौर पर अपनी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हैं. उन्होंने कहा था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न कि यशवंत की और न ही उनकी, इसलिए सार्वजनिक खाते में किसी भी तरह की अनियमितता की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनके अंतिम निर्देश की परवाह नहीं की गई तो वह उन्हें प्रेस से निकाल देंगे और चेतावनी नहीं मानने पर उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाएंगे.