Author: NewseDay

  • 20 लाख वोटरों के नाम कटने पर सवाल, केबीएस सिद्धू ने 2002 मैपिंग नियम को घेरा

    20 लाख वोटरों के नाम कटने पर सवाल, केबीएस सिद्धू ने 2002 मैपिंग नियम को घेरा

    चंडीगढ़.

    पंजाब में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने कहा है कि किसी मतदाता के नाम को उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची में दर्ज नाम से मैप करना कानून में निर्धारित शर्त नहीं है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी कृत्रिम शर्त को पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिसके कारण मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में 13 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 20 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखकर बाहर किया गया है। उन्होंने ऐसे लोगों से नया फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है।

    "एसआईआर" में 12.8 लाख मतदाता लापता
    पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी किए गए उत्सवपूर्ण प्रेस नोट में, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के घर-घर जनगणना चरण के समापन के उपलक्ष्य में, एक ऐसा वाक्य छिपा है जिस पर जनता का ध्यान कहीं अधिक जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सुश्री अनिंदिता मित्रा, आईएएस ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 93.40% मतदाताओं का मिलान 2003 की मतदाता सूचियों या पिछली एसआईआर की सूचियों से सफलतापूर्वक कर लिया गया है। इसके बाद का गणित स्पष्ट है: लगभग 6.60% – 1,93,94,408 एकत्रित जनगणना प्रपत्रों के आधार पर, लगभग 12.8 लाख पंजाबी मतदाता – वर्तमान में मिलान से बाहर हैं। इस समूह को नोटिस 13 अगस्त 2026 से भेजे जाने शुरू होंगे, "ईसीआई के निर्देशों के अनुपालन में।"

    2.14 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाले राज्य के लिए 12.8 लाख कोई मामूली संख्या नहीं है। यह कई विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की कुल संख्या से भी कहीं अधिक है। प्रत्येक प्रभावित नागरिक और वास्तव में पंजाब की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रत्येक जागरूक पर्यवेक्षक का यह प्रश्न पूछने का पूरा अधिकार है: आगे क्या होगा और इसका क्या समाधान है? समाधान पर चर्चा करने से पहले, प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित श्रेणियों के अनुसार, पंजाब के 2.14 करोड़ मतदाताओं को जिन विशिष्ट वर्गों में विभाजित किया गया है, उन्हें स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। ये शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हैं, और इन्हें आपस में मिलाना समस्या की गंभीरता को गलत समझने का सबसे पक्का तरीका है।

  • कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं. भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण और बुद्ध जैसे अवतारों का वर्णन पुराणों और धार्मिक परंपराओं में मिलता है. इनके बाद दशम और अंतिम अवतार के रूप में कल्कि अवतार का उल्लेख किया गया है.

    मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. लेकिन भगवान कल्कि का जन्म कब होगा? उनका जन्म कहां होगा? उनके माता-पिता कौन होंगे और उनका स्वरूप कैसा होगा? इन सवालों का जवाब जानने की उत्सुकता आज भी लोगों के मन में रहती है. तो आइए जानते है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित उनके स्वरूप के बारे में.

    धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान
    भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब धर्म की स्थापना के लिए वे अवतार लेते हैं. इसी भाव को भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की परंपरा से जोड़ा जाता है. कल्कि अवतार को इसी क्रम का भविष्य में होने वाला अवतार माना गया है. श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है. इसके अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा.

    कहां होगा भगवान कल्कि का जन्म?
    श्रीमद्भागवत महापुराण में बताया गया है कि भगवान कल्कि का जन्म शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर होगा. श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है कि भगवान कल्कि शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर प्रकट होंगे.

    यानी धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के जन्मस्थान के रूप में शंभल ग्राम का उल्लेख मिलता है. हालांकि शंभल की भौगोलिक पहचान को लेकर अलग-अलग धार्मिक और विद्वत परंपराओं में मत मिलते हैं.

    कैसा होगा भगवान कल्कि का स्वरूप?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि एक दिव्य योद्धा के रूप में प्रकट होंगे. उन्हें घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार धारण किए हुए बताया गया है. पुराणिक वर्णनों में उनका वाहन देवदत्त नाम का दिव्य घोड़ा बताया गया है. मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि इसी घोड़े पर सवार होकर अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. इसके बाद धर्म की पुनर्स्थापना होगी और युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी.

    भगवान कल्कि की माता का नाम क्या होगा?
    पौराणिक परंपराओं में भगवान कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमती बताया गया है. इसी परिवार में भगवान कल्कि के प्राकट्य की धार्मिक मान्यता है. कल्कि अवतार से जुड़ी विस्तृत कथाएं केवल श्रीमद्भागवत पुराण में ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रंथों और पुराणिक परंपराओं में भी मिलती हैं. इसलिए उनके परिवार, विवाह और अन्य विवरणों में ग्रंथ के अनुसार अंतर दिखाई दे सकता है.

    कौन होंगे भगवान कल्कि के गुरु?
    कल्कि अवतार से जुड़ी पुराणिक कथाओं में भगवान परशुराम का भी विशेष उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही कल्कि को युद्ध और शस्त्र विद्या की शिक्षा देंगे. इसी वजह से कल्कि और परशुराम का संबंध हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष माना जाता है.

    कब होगा कल्कि अवतार?
    अब सबसे बड़ा सवाल है कि भगवान कल्कि का अवतार आखिर कब होगा?
    धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार को कलयुग के अंतिम चरण से जोड़ा गया है. हिंदू कालगणना के अनुसार कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है और धार्मिक मान्यता के अनुसार अभी इसका काफी समय बाकी है. इसलिए वर्तमान समय में भगवान कल्कि के अवतार की कोई निश्चित तारीख या वर्ष शास्त्रों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है.

    कल्कि अवतार को भविष्य में होने वाली उस घटना के रूप में देखा जाता है, जब कलयुग अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे.

    कल्कि अवतार के बाद क्या होगा?
    पौराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म, अन्याय और अराजकता चरम पर पहुंच जाएगी, तब भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा. वे अधर्म का अंत करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. इसके बाद युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी और सत्ययुग के पुनः प्रारंभ होने की धार्मिक मान्यता है.

    इस तरह कल्कि अवतार केवल भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की कथा नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और युग परिवर्तन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुराणिक मान्यता है. हालांकि, भगवान कल्कि के प्राकट्य का समय भविष्य से जुड़ा धार्मिक विषय है. इसलिए वर्तमान समय में उनके अवतार की कोई निश्चित तारीख बताना शास्त्रसम्मत नहीं है.

  • सुचिका तारियाल का गोल्ड का सपना टूटा, सेमीफाइनल हारकर मिला ब्रॉन्ज मेडल

    सुचिका तारियाल का गोल्ड का सपना टूटा, सेमीफाइनल हारकर मिला ब्रॉन्ज मेडल

    नई दिल्ली
     भारत को एमएमए महिला फाइटर सुचिका तारियाल से उम्मीद थी कि वह एशियन गेम्स-2026 में 60 किलोग्राम भारवर्ग के मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतकर आएंगी, लेकिन सोमवार को खेले गए सेमीफाइनल मैच में सिंगापुर की टी हून ने उन्हें हरा दिया और इसी के साथ भारतीय खिलाड़ी को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।

    इस मैच के बाद सुचिका फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनके हावभाव देखकर लग रहा था कि उनके मुताबिक वह जीत की हकदार थीं, लेकिन सिंगापुर की खिलाड़ी को विजेता घोषित किया गया जिससे वह निराश लग रही थीं।

    ऐसा रहा मैच
    सुचिका ने पहले राउंड में शानदार खेल दिखाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को ज्यादा मौके नहीं दिए। दूसरे मिनट में ही सुचिका ने हून को जमीन पर गिरा दिए और अच्छे पंच बरसाए। हालांकि, सिंगापुर की खिलाड़ी उठ खड़ी हुईं और उन्होंने पलटवार भी किया। दूसरे राउंड में हून ने अपनी आक्रामकता से सुचिका को कमजोर किया और दबाव बनाया। सुचिका ने हार नहीं मानी और तुरंत पलटवार किया, लेकिन सिंगापुर की खिलाड़ी दोबारा सुचिका पर हावी हो गईं। सुचिका ने आखिरी मिनट तक सिंगापुर की खिलाड़ी के सामने हार नहीं मानी। उन्हें लगा था कि वह मुकाबला जीत गई हैं, लेकिन मैच तीसरे राउंड में पहुंचा।

    सिंगापुर की खिलाड़ी हावी
    आखिरी राउंड में सिंगापुर की खिलाड़ी ने सुचिका को कई किक मारीं जबकि सुचिका ने शांत रहने की रणनीति अपनाई। वह निर्णायक वार करने की कोशिश करती दिखीं। बिल्कुल आखिरी पलों में सुचिका ने कुछ कॉम्बिनेशन अटैक किए जिससे हून को परेशानी हुई। फिर आखिरी बजर बजने के बाद सुचिका अपनी प्रतिद्वंद्वी पर झपटीं और उन्हें ज़मीन पर गिरा दिया। रेफरी ने आकर दोनों फाइटर्स को अलग किया। रेफरी ने सिंगापुर की खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जिससे सुचिका खुश नहीं दिखीं। उन्होंने रेफरी से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। भावुक सुचिका मैट पर बैठी रोने लगीं।

     

  • घोसी में BSP ने खोले पत्ते, अजय जायसवाल को बनाया प्रत्याशी; मायावती के निर्देश पर नाम का ऐलान

    घोसी में BSP ने खोले पत्ते, अजय जायसवाल को बनाया प्रत्याशी; मायावती के निर्देश पर नाम का ऐलान

    मऊ
    UP Election 2027: मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने अजय जायसवाल को अपना प्रभारी प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार दिया है: बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर आजमगढ़ मंडल के मुख्य मंडल प्रभारी दिनेश चंद्रा ने कोपागंज स्थित एक निजी विद्यालय के मैदान में आयोजित कार्यकर्ता महासम्मेलन में भारी भीड़ की मौजूदगी में इस नाम की घोषणा की: बसपा ने जिले की चार में से अब तक तीन विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। 

    भाजपा छोड़कर बसपा में आए अजय जायसवाल
    अजय जायसवाल काफी सालों से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता और समर्थक रहे हैं. हालांकि, करीब एक महीने पहले ही उन्होंने भाजपा छोड़कर बसपा का दामन थामा था. बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया है. अजय जायसवाल एक व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लगातार सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। 

    कार्यकर्ता महासम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़
    कोपागंज में आयोजित इस घोषणा कार्यक्रम में बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आरएस राजभर सहित जिले के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. मंच से मुख्य मंडल प्रभारी दिनेश चंद्रा ने कहा कि प्रदेश का सर्व समाज, दबे-कुचले और परेशान लोग मायावती को फिर से मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार चुनाव में उनके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है। 

    सपा के आरोपों पर बसपा का पलटवार
    सपा द्वारा 'कमल और हाथी साथ हैं' के लगाए जा रहे आरोपों पर दिनेश चंद्रा ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सपा मुखिया का आधा परिवार खुद भारतीय जनता पार्टी में शामिल है, इसलिए सपा को पहले अपने परिवार की चिंता करनी चाहिए. चंद्रा ने बताया कि अजय जायसवाल के सामाजिक कार्यों और स्थानीय लोगों की इच्छा को देखते हुए ही बहन जी ने उन्हें आशीर्वाद देकर अपना प्रत्याशी बनाया है। 

    शिक्षा और समाज सेवा को प्राथमिकता
    प्रत्याशी घोषित होने के बाद अजय जायसवाल ने कहा कि वे पिछले 10 सालों से घोसी के घर-घर जाकर समाज की सेवा कर रहे हैं. शिक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और वे हर साल जीके कंपटीशन कराकर 100 बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास 8 शव वाहन और बसें हैं, वे हर साल कंबल बांटते हैं, कुंभ के समय तीन दिन ट्रेन फ्री कराई थी और 17 हजार लोगों को अयोध्या धाम भेज चुके हैं। 

  • भागलपुर में दर्दनाक हादसा, स्नान करने गए 6 बच्चों की डूबकर मौत

    भागलपुर में दर्दनाक हादसा, स्नान करने गए 6 बच्चों की डूबकर मौत

    भागलपुर
     बिहार के भागलपुर में बड़ा हादसा हो गया. सुल्तानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 27 स्थित विष्णु टोला के छह बच्चे कर्मा-धर्मा पूजा को लेकर स्नान करने गए थे. इसी दौरान सभी बच्चे गहरे पानी में चले गए और डूब गए. हादसे में छह बच्चों की मौत हो गई. घटना तरैटा नारायणपुर वहियार की बताई जा रही है. पूरे इलाके में मातम पसर गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

    बताया जा रहा है कि सभी बच्चे करीब 12 साल की उम्र के थे. कर्मा-धर्मा पूजा को लेकर बच्चे स्नान करने के लिए बाढ़ के पानी में गए थे. इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने बच्चों की तलाश शुरू की. काफी प्रयास के बाद सभी बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

    6 बच्चों की मौत से पसरा मातम
    मृत बच्चों की पहचान पूजा, ज्योति, मिंकी, राहुल, आयुष और विकास के रूप में हुई है. सभी सुल्तानगंज नगर परिषद के वार्ड नंबर 27 के विष्णु टोला के रहने वाले बताए जा रहे हैं. हादसे की खबर मिलते ही मृत बच्चों के परिवारों में कोहराम मच गया. एक साथ छह बच्चों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पूजा को लेकर बच्चे स्नान करने के लिए बाढ़ के पानी में गए थे. बाढ़ के कारण इलाके में पहले से ही पानी भरा हुआ है. ऐसे में गहरे पानी में जाने से यह दर्दनाक हादसा हो गया.

    परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल
    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बाढ़ के पानी में बच्चों के जाने को लेकर चिंता जताई है. लोगों ने प्रशासन से ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान जलभराव वाले स्थानों पर विशेष निगरानी जरूरी है, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके. प्रशासन की ओर से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है. हादसे के बाद इलाके में गम का माहौल है और परिजनों को संभालना मुश्किल हो रहा है.

     

  • CG में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर ब्रेक, 7 दिन के लिए टली

    CG में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर ब्रेक, 7 दिन के लिए टली

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को 7 दिन के लिए टाल दिया है। रविवार को JDA के प्रतिनिधिमंडल की स्वास्थ्य मंत्री के साथ डॉक्टरों और जूनियर डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर बातचीत हुई।

    मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए 7 दिन का समय मांगा है। JDA ने मंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है। इस दौरान डॉक्टर अपनी नियमित ड्यूटी और चिकित्सा सेवाएं जारी रखेंगे।

    7 दिन में समाधान की उम्मीद
    JDA ने बताया कि बातचीत में संगठन की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने इन मांगों के निराकरण की दिशा में जरूरी कार्रवाई के लिए 7 दिन का समय मांगा है। संगठन का कहना है कि वह सरकार के साथ बातचीत के जरिए मांगों का समाधान चाहता है। साथ ही मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा।

    हड़ताल टली, विरोध जारी रहेगा
    अनिश्चितकालीन हड़ताल भले ही 7 दिन के लिए टाल दी गई है, लेकिन JDA शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाता रहेगा। इस दौरान डॉक्टरों की ओर से अलग-अलग विरोध कार्यक्रम किए जाएंगे।इनमें ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट ,कैंडल मार्च रैली और शांतिपूर्ण प्रदर्शन अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम शामिल हैं।

    7 दिन बाद फिर तय होगी रणनीति
    JDA ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि 7 दिन के भीतर सरकार की ओर से मांगों के समाधान को लेकर ठोस फैसला लिया जाएगा। अगर तय समय में मांगों का अपेक्षित समाधान नहीं होता है तो JDA की जनरल बॉडी आगे की रणनीति तय करेगी। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल समेत अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाने का फैसला भी लिया जा सकता है। संगठन ने कहा कि डॉक्टरों की मांगों के साथ-साथ मरीजों के हित और चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी।

  • MP Weather: 24 सितंबर से भारी बारिश, अब तक 33.9 इंच बरसा पानी

    MP Weather: 24 सितंबर से भारी बारिश, अब तक 33.9 इंच बरसा पानी

    भोपाल
     देश में मानसून की पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रदेश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्रों से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी. प्रदेश में 22 जून को मानसून के आगमन हुआ था. मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में करीब 20 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. प्रदेश में अलीराजपुर जिले में सबसे कम बारिश हुई है. यहां बारिश का आधा कोटा ही पूरा हो सका। 

    हालांकि, मानसून की विदाई के पहले एक बार मानसून पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के एक दर्जन जिलों को तरबतर करेगा. अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र के ऊपर बन रहे निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। 

    इन जिलों को भिगोने के बाद शुरू होगी विदाई
    अलनीनो की वजह से इस बार बारिश में कमी की आशंका जताई गई थी, इसका प्रदेश के कई हिस्सों में असर दिखाई दिया है. प्रदेश में औसतन 6 फीसदी कम बारिश हुई है. प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में औसत से 2 फीसदी कम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 10 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो गई है. पश्चिमी राजस्थान से मानसून ने विदा लेना शुरू कर दिया है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर से बारिश की विदाई शुरू होने जा रही है. हालांकि, विदाई के पहले प्रदेश में झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। 

    मौसम वैज्ञानिक अरूण शर्मा के मुताबिक "अंडमान सागर और आसमान क्षेत्र के ऊपर स्थित निम्न दवाब का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है. इसके चलते 23 और 24 सितंबर को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के जिलों में अच्छी बारिश होगी. इसके चलते जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां भी बारिश के कोटे में सुधार की उम्मीद है। 

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में बारिश का दौर रहेगा। मौसम विभाग ने 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले रिमझिम जारी रहेगी। प्रदेश में अब तक औसत 33.9 इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तर अंडमान सागर एवं आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके आगे बढ़ने और 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। ऐसा होने से 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश शुरू होगी। इस दिन प्रदेश के छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    32 जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 24% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। रविवार तक आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% कम पानी गिरा है।

    मध्य प्रदेश के 20 जिले रह गए प्यासे
    मध्य प्रदेश में 1 जून से 20 सितंबर तक के आंकड़ों को देखा जाए तो मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 10 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक कम बारिश हुई है. प्रदेश में सबसे कम बारिश अलीराजपुर जिले में हुई है. यहां बारिश का कोटा आधा ही पूरा हो सका. अलीराजपुर के अलावा कई जिले हैं जहां बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. इसके अलावा विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन जैसे जिलों में भी कम बारिश हुई है, जहां बड़े पैमाने पर गेहूं और धान की फसल होती है. कम बारिश से यह फसलें प्रभावित होंगी। 

    इसके अलावा इंदौर, उज्जैन में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि राजधानी भोपाल में सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और भोपाल का बड़ा तालाब भरने से भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं। 

    मध्य प्रदेश के बांधों में पहुंचा भरपूर पानी
    हालांकि, मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश के बाद भी प्रदेश में गर्मी के सीजन में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना होगा. प्रदेश के बांधों में भरपूत पानी पहुंचा है. प्रदेश के बड़े बांध 80 फीसदी और उससे ज्यादा भर चुके हैं. मंदसौर जिले में आने वाला गांधी सागर बांध 79.35 फीसदी भर चुका है, जबकि तवा बांध 87.26 फीसदी भर चुका है. जबलपुर के बरगी बांध का बारिश में कई बार गेट खोलना पड़ा है. यह बांध पूरी तरह से लबालब हो चुका है। 

    यही स्थिति बाणसागर डैम की है. प्रदेश के 45 प्रमुख बांधों में से 34 बांध 80 फीसदी से ज्यादा भर चुके हैं, इनमें प्रदेश के सभी बड़े बांध शामिल हैं. प्रदेश में ऐसा कोई बांध नहीं है, जो 50 फीसदी से कम भरा हो. सबसे कम जल भराव वाला बांध ओंकारेश्वर है, वह भी 69.84 फीसदी पानी भर चुका है। 

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

    भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
    भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

    इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

  • UPITS 2026: 6 पार्टनर देश और 600 अंतरराष्ट्रीय खरीदार होंगे शामिल, CM योगी ने तैयारियों का लिया जायजा

    UPITS 2026: 6 पार्टनर देश और 600 अंतरराष्ट्रीय खरीदार होंगे शामिल, CM योगी ने तैयारियों का लिया जायजा

    माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने की यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 की तैयारियों की समीक्षा, दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

    प्रदेश की समृद्ध परंपरा, हुनर और उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करेगा यूपीआईटीएस-2026

    ओडीओपी स्टॉल्स, स्थानीय कलाकारों और युवाओं की भागीदारी पर जोर

    युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर प्रदान करने का महत्वपूर्ण मंच होगा ट्रेड शोः मा0 मुख्यमंत्री

    उत्तर प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य को गति देने के लिए चौथे संस्करण में शामिल होंगे 06 भागीदार देश, 600 अंतर्राष्ट्रीय खरीदार और 20 से अधिक उच्च-प्रभाव वाले नॉलेज सेशन

    गौतमबुद्धनगर
          उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के सभागार में प्रशासनिक, प्राधिकरण एवं पुलिस अधिकारियों के साथ आगामी उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 (UPITS-2026) की तैयारियों की समीक्षा की। मा0 मुख्यमंत्री जी ने आयोजन की सफलता, सुरक्षा, व्यवस्थापन, विदेशी मेहमानों एवं आगंतुकों की सुविधा तथा सभी विभागों के मध्य प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश की समृद्ध परंपरा, हुनर, स्थानीय उत्पादों एवं औद्योगिक क्षमताओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के साथ-साथ वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

          मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस संस्करण के लिए अंतर्राष्ट्रीय आउटरीच के बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं, जिसके तहत 06 प्रमुख भागीदार देशों- जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस के साथ सक्रिय साझेदारी स्थापित की गई है। इन देशों के प्रतिनिधिमंडल समर्पित प्रीमियम फोयर पवेलियन, द्विपक्षीय व्यावसायिक सत्रों और संरचित बी2बी बैठकों के माध्यम से भाग लेंगे। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ और विदेशी भारतीय मिशनों के समन्वित प्रयासों से 72 देशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 600 अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के इस आयोजन में भाग लेने की संभावना है। उन्होंने निर्देश दिये कि विदेशी खरीदारों और प्रदर्शकों के लिए उचित आवास की व्यवस्था की जाये। भाग लेने वाले देशों के उच्चायुक्तों के लिए संपर्क अधिकारी (लायजन ऑफिसर) नियुक्त किए जाएं और आगंतुकों तथा प्रतिनिधियों की सहायता के लिए गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय एवं तकनीकी विश्वविद्यालयों के छात्रों को वाॅलिंटियर्स के रूप में तैनात किया जाए। 
          मा0 मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों को माननीय केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उचित रूप से जोड़ा जाना चाहिए और मंत्री, उद्योगों तथा व्यापारिक प्रतिनिधियों के बीच सार्थक बातचीत को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त बैठकें आयोजित की जाये तथा प्रसिद्ध वक्ताओं के साथ नॉलेज सेशन संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि टेक्निकल सेशन में उत्तर प्रदेश शासन के संबंधित विभागों के मंत्रियों एवं प्रमुख सचिवों को आवश्य आमंत्रित किया जाए, ताकि महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श एवं विभागीय समन्वय सुनिश्चित हो सके। नॉलेज सेशन में जनता की भागीदारी को भी प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाना सुनिश्चित करें। 

          माननीय मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि यूपीआईटीएस 2026 में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के साथ-साथ अवध, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे यह आयोजन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक विविधता का एक सच्चा प्रतिनिधित्व बन सके। इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए 25 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के स्लॉट तैयार किए गए हैं, जिनमें कथक नृत्य, पखावज और सितार वादन, भोजपुरी और आल्हा लोक गायन, राई और थारू जनजातीय नृत्य तथा स्टार म्यूजिकल नाइट्स शामिल हैं। 
          माननीय मुख्यमंत्री ने आयोजन के दौरान संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए यातायात, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन और पेयजल की व्यापक व्यवस्था करने की आवश्यकता पर बल दिया। तीनों संबंधित प्राधिकरणों को स्वच्छता, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए परस्पर समन्वय बनाना होगा। आयोजन स्थल स्वच्छ, व्यवस्थित और प्लास्टिक-मुक्त रहना चाहिए, जिसके प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं। सभी सरकारी विभागों को 23 सितंबर तक अपने स्टॉल लगाने का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया, उन्होंने प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग्स, पोस्टर और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाने तथा अतिरिक्त टावर लगाकर नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने और विश्वसनीय इंटरनेट व वाई-फाई सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों से संपर्क करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाये और रील्स या सोशल मीडिया कंटेंट बनाते समय आगंतुकों को मर्यादा बनाए रखने व सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाये। 

          मा0 मुख्यमंत्री जी ने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपनी-अपनी जिम्मेदारियों एवं दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए सभी तैयारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर अंतिम रूप प्रदान करें। उन्होंने सभी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा एवं निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अव्यवस्था अथवा कमी न रह जाए। आयोजन की सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात, आवास, आगंतुक सुविधाओं एवं अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ कार्य करें, ताकि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 का आयोजन सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

          पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने माननीय मुख्यमंत्री को यूपीआईटीएस 2026 के लिए यातायात योजना और व्यवस्थाओं के बारे में अवगत कराया। आगंतुकों, प्रदर्शकों, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों और आम जनता की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए स्थल तक जाने और वहां से आने वाले सभी मार्गों की समीक्षा और अद्यतन किया गया है। सभी प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्रिस्किंग (जांच) और भीड़-प्रबंधन उपायों सहित व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। संभावित फुटफॉल को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए निरंतर निगरानी के साथ प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदुओं पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएंगे। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री को आयोजन स्थल तक आवागमन की सुविधा के साथ-साथ आगंतुकों और प्रदर्शकों के लिए निर्दिष्ट पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी। भीड़भाड़ को कम करने और आगंतुकों के लिए एक सहज अनुभव सुनिश्चित करने के लिए यातायात नियमन, मार्ग प्रबंधन और पार्किंग संचालन का समन्वय किया जाएगा। सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल और भीड़-नियंत्रण उपायों को मजबूत किया गया है, तथा संबंधित टीमों को पूरे आयोजन के दौरान सतर्क और तत्पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। 

          साइट की तैयारी, यातायात प्रबंधन और आगंतुक सुविधाओं के संबंध में स्थानीय प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट ने व्यापक व्यवस्था की है। पार्किंग क्षेत्रों और प्रदर्शनी स्थल के बीच आगंतुकों के लिए पर्यावरण-अनुकूल और परेशानी मुक्त परिवहन की सुविधा के लिए 500 से अधिक ईवी शटल बसें चलाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, आने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों और वीवीआईपी की सहायता के लिए नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक समर्पित यूपीआईटीएस सुविधा काउंटर संचालित किया जा रहा है। एनएमआरसी मेट्रो लाइनों, शहर की बसों के रैप्स, मल्टीप्लेक्स सिनेमा स्क्रीन, रेडियो और डिजिटल चैनलों पर बहु-चैनल प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिन्होंने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर पहले ही 1.3 करोड़ (13 मिलियन) से अधिक वीडियो व्यूज हासिल कर लिए हैं। खरीदारों, प्रदर्शकों और मेहमानों की सहायता के लिए सीएम फेलो, उद्यमी मित्र और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय व अन्य क्षेत्रीय संस्थानों के युवा स्वयंसेवक मौके पर तैनात हैं। 

          जिलाधिकारी ने बताया कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस, औद्योगिक संगठनों, जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के प्रशासकों और प्रतिनिधियों के साथ लक्षित समन्वय बैठकें की गई हैं। Gen-Z  और स्कूली छात्रों की भारी भागीदारी को प्रेरित करने के लिए, जिले ने एक डिजिटल रील चैलेंज, एक यंग एंटरप्रेन्योर प्रतियोगिता और युवाओं को जोड़ने तथा यूपीआईटीएस 2026 के दौरान उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन की गई विशेष क्विज सहित संवाद स्थापित करने के लिए युवा पहलों की एक श्रृंखला की योजना बनाई है। 

          इस वर्ष की केंद्रीय थीम ‘अद्वितीय सोर्सिंग का अद्भुत मंच से प्रेरित, यूपीआईटीएस 2026 में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट वन क्राफ्ट, सीएम युवा, एमएसएमई, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, रक्षा और एयरोस्पेस, कृषि और संबद्ध क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा और हेल्थकेयर, टेक्सटाइल और हथकरघा, टाउन ऑफ एक्सीलेंस एक्सपोर्टर्स, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट (क्रेडाई), तथा पर्यटन और संस्कृति जैसे प्रमुख विकास चालकों का व्यापक प्रदर्शन होगा। मजबूत औद्योगिक गति का प्रदर्शन करते हुए, भूतल और द्वितीय तल के हॉलों में 36,500 वर्ग मीटर प्रदर्शनी स्थान पहले ही बुक किया जा चुका है, जिसमें भाग लेने वाले औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए पूर्ण ले-आउट को अंतिम रूप दे दिया गया है, जो उत्तर प्रदेश की क्षमता के वैश्विक प्रदर्शन के लिए पूरी तरह तैयार है।

          इस अवसर पर मा0 मंत्री एम0एस0एम0ई0 भूपेन्द्र सिंह चौधरी, मा0 राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग बृजेश सिंह, मा0 राज्यमंत्री एम0एस0एम0ई0 हंसराज विश्वकर्मा, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एव औद्योगिक विकास दीपक कुमार, आयुक्त अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार, ए0डी0जी0 मेरठ जोन भानू भास्कर, मण्डलायुक्त मेरठ भानू चन्द्र गोस्वामी सहित प्रशासन, प्राधिकरण तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहें।
          सौजन्य से सूचना विभाग गौतमबुद्धनगर।

  • बाइक चोरों के निशाने पर पंचकूला, 2026 में 133 वाहन चोरी और 57 ही बरामद

    बाइक चोरों के निशाने पर पंचकूला, 2026 में 133 वाहन चोरी और 57 ही बरामद

    पंचकूला
     जिले में वाहन चोरी की घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही पंचकूला में 133 वाहन चोरी हो चुके हैं, जबकि पुलिस इनमें से केवल 57 वाहन ही बरामद कर सकी है।

    यानी चोरी हुए वाहनों के मुकाबले बरामदगी का आंकड़ा आधे से भी कम है। पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो वाहन चोरी की समस्या लगातार बनी हुई है। वर्ष 2025 में पंचकूला में 339 वाहन चोरी हुए थे, जबकि पुलिस 144 वाहन ही बरामद कर सकी।

    वर्ष 2024 में 342 वाहन चोरी हुए और 73 बरामद हुए। इसी तरह 2023 में 357 वाहन चोरी के मामलों में 94 वाहन बरामद किए गए। वर्ष 2022 में सबसे अधिक 409 वाहन चोरी हुए थे, जिनमें से 115 वाहन बरामद किए गए।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 से 2026 के पहले छह महीनों तक जिले में कुल 1,580 वाहन चोरी हुए हैं। इनमें से 483 वाहनों की ही बरामदगी हो सकी।

    आंकड़े बताते हैं कि वाहन चोरी के मामलों में पुलिस के सामने चोरी हुए वाहनों को ट्रेस कर बरामद करना बड़ी चुनौती है। विशेषकर वर्ष 2024 में 342 वाहनों की चोरी के मुकाबले महज 73 वाहन बरामद हुए, जिससे बरामदगी का आंकड़ा काफी कम रहा।

    दोपहिया सबसे ज्यादा निशाने पर
    पुलिस के अनुसार चोरी के ज्यादातर मामलों में दोपहिया वाहन शामिल हैं। 97 सीसी की मोटरसाइकिलें चोरों के निशाने पर रहती हैं। पुलिस के मुताबिक इनके आसान इग्निशन सिस्टम और पर्याप्त एंटी-थेफ्ट फीचर नहीं होने से इन्हें चुराना आसान होता है।

    वर्ष          चोरी हुए वाहन     बरामद वाहन
    (जनवरी-जून)  
    2026               133                57
    2025               339               144
    2024                 342              73
    2023                 357              94
    2022                  409            115
    कुल                     1,580           483

    चोरी की बाइक बरामद, मालिक के लिए फिर भी कागजी दौड़
    चोरी हुई बाइक बरामद होने के बाद उसे वापस लेने के लिए मालिक को लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मनीमाजरा निवासी की बाइक चंडीमंदिर थाना पुलिस ने बरामद की, उसे जानकारी अखबार में खबर पढ़कर मिली। थाने पहुंचने पर बाइक की दोनों नंबर प्लेट गायब मिलीं और वाहन क्षतिग्रस्त था। पुलिस ने चेसिस नंबर से पहचान की।

    बाइक लेने के लिए अदालत में सुपुर्दारी अर्जी, वकील और जमानतदार की व्यवस्था करनी पड़ी। कोर्ट से रिलीज आर्डर के बाद मालिक व जमानतदार की अलग फाइल बनी।

    जमानतदार को संपत्ति के दस्तावेज देने, नोटरी से सत्यापन और पुलिस चौकी में प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाइक मिली। करीब एक माह में 3 हजार रुपए कागजी कार्रवाई और पांच हजार रुपए मरम्मत पर खर्च हुए। मुकदमा लंबित रहने तक कोर्ट की अनुमति के बिना बाइक बेचने पर भी रोक है।

    वकील बोले- एक सप्ताह में मिलना चाहिए वाहन
    पंचकूला जिला अदालत के एडवोकेट अवनीत ढाकला ने कहा कि पंजीकृत मालिक का वाहन बरामद होने के बाद प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए। वाहन को एक सप्ताह के भीतर उसके मालिक को सुपुर्द किया जा सकता है। सामान्य मामलों में भी करीब 20 दिन प्रक्रिया में लग जाते हैं। चोरी के पीड़ित को वाहन चोरी होने के बाद दोबारा कागजी प्रक्रिया में परेशान नहीं होना चाहिए।

     

  • ग्वालियर में सफाई का बढ़ेगा बेड़ा, 29 नए टिपर से नगर निगम होगा मजबूत

    ग्वालियर में सफाई का बढ़ेगा बेड़ा, 29 नए टिपर से नगर निगम होगा मजबूत

    ग्वालियर
     दीपावली से पहले शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर करने के लिए नगर निगम के बेड़े में 29 नए टिपर वाहन शामिल होने जा रहे हैं। इनमें पहले चरण के 19 वाहनों में से आठ की डिलीवरी हो चुकी है। बाकी 11 वाहन एक सप्ताह में आने की संभावना है।

    286 हो जाएगी वाहनों की संख्या
    इसके अलावा 10 और टिपर वाहनों का टेंडर जारी किया गया है, जिसे जल्द खोला जाएगा। नए वाहनों के शामिल होने के बाद निगम के टिपर वाहनों की संख्या 257 से बढ़कर 286 हो जाएगी। इससे 66 वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए वाहनों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी है।

    18 प्रतिशत क्षेत्रों में नहीं पहुंच रहे वाहन
    निगम के सर्वे में सामने आया था कि करीब 82 प्रतिशत क्षेत्रों में कचरा संग्रहण वाहन पहुंच रहे हैं, जबकि 18 प्रतिशत क्षेत्रों में अभी वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं।

    चूंकि, दीपावली के दौरान घरों और बाजारों से सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकलने की संभावना है। ऐसे में निगम का जोर अतिरिक्त वाहनों के माध्यम से संग्रहण व्यवस्था को सुचारू रखने पर है।