Author: NewseDay

  • जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं फरियादें, बोले- पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करें

    जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं फरियादें, बोले- पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करें

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। प्रार्थना पत्रों का अवलोकन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग मामूली घटनाओं को बड़ा बनाना चाहते हैं।

    ऐसे में जनपदों में हर छोटी से छोटी घटना पर जिलाधिकारी व एसपी स्वयं नजर रखें। तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की सुनवाई करें और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर मामलों का पटाक्षेप कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता व लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

    हर पीड़ित से मिले सीएम, समयबद्ध निस्तारण का दिया निर्देश
    मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित से मिले। उनकी समस्याओं व शिकायतों को सुना। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विद्युत आदि से जुड़ी शिकायतों का प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि सरकार साढ़े 9 वर्ष से बिना भेदभाव हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान करा रही है।

    अधिकारी संवेदनशील होकर जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाएं, मरीजों के इलाज की व्यवस्था कराएं और भूमाफिया/दबंगों पर कठोरतम कार्रवाई करें।

    पुलिस से संबंधित शिकायतों पर हुए सख्त
    सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष पुलिस व राजस्व से जुड़ीं शिकायतें अधिक रहीं। इस पर मुख्यमंत्री सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं का जनपदों में निराकरण कराएं। यदि किसी मातहत द्वारा लापरवाही की शिकायत मिले तो उस पर भी कार्रवाई करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

    बच्चे से पूछा- कैसे हो, कहां पढ़ते हो
    ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आए नन्हे बच्चे से मुख्यमंत्री ने हालचाल पूछा। फिर पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने उसकी तरफ चॉकलेट बढ़ाई तो उसने झट से चॉकलेट ले ली। फिर सीएम ने चॉकलेट वापस मांगी तो बच्चे ने मना कर दिया। इस पर पूरा हॉल खिलखिला उठा। मुख्यमंत्री ने सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए बच्चे से मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा।

     

  • सभापति चुनाव से पहले तिजारा में विवाद, कांग्रेस पार्षद को रोकने पर हंगामा

    सभापति चुनाव से पहले तिजारा में विवाद, कांग्रेस पार्षद को रोकने पर हंगामा

    भिवानी.

    तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव से एक दिन पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश में बाड़ेबंदी के बाद तिजारा लौट रहे कांग्रेस पार्षदों को रविवार रात करीब नौ बजे पंचकूला टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक लिया।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस पार्षदों को अमरावती पुलिस चौकी ले गई और उनके वाहनों को भी थाने में खड़ा करा दिया। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता इमरान खान के नेतृत्व में नेता और पार्षद पिंजौर पुलिस थाने के बाहर एकत्र हो गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इमरान खान ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में ठहरे कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद रविवार को तिजारा के लिए रवाना हुए थे। पंचकूला जिले में टोल प्लाजा के पास पुलिस ने उनकी गाड़ियों को रोक लिया।

    कांग्रेस का आरोप है कि हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों और बाउंसरों ने पार्षदों को अपने साथ अमरावती पुलिस चौकी पहुंचाया। कांग्रेस ने इसे सोमवार को होने वाले सभापति चुनाव में पार्षदों को मतदान से रोकने की कोशिश बताया है। सोमवार को तिजारा नगर परिषद सभापति पद के लिए मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को रोके जाने की घटना ने तिजारा की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तत्काल पार्षदों को छोड़े जाने की मांग की है।

  • ग्लोइंग स्किन के लिए बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स, जानें बनाने और लगाने का तरीका

    ग्लोइंग स्किन के लिए बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स, जानें बनाने और लगाने का तरीका

    आजकल ग्लोइंग और फ्रेश स्किन पाने के लिए लोग कई तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स के साथ-साथ घरेलू नुस्खे भी आजमाते हैं. उन्हीं में से एक है चुकंदर से बने आइस क्यूब्स. चुकंदर में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जबकि बर्फ की ठंडक चेहरे को कुछ समय के लिए ठंडक और फ्रेशनेस देने में मदद कर सकती है.

    खास बात यह है कि चुकंदर के आइस क्यूब्स को घर पर बनाना काफी आसान है. इसके लिए आपको सिर्फ चुकंदर और थोड़ा सा पानी चाहिए. चाहें तो इसमें एलोवेरा जेल, गुलाब जल या विटामिन ई ऑयल भी मिला सकते हैं. तो आइए जानते हैं चुकंदर के आइस क्यूब्स कैसे तैयार करें और चेहरे पर इन्हें इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है.
    चुकंदर के आइस क्यूब्स बनाने के लिए क्या चाहिए?

    चुकंदर
    थोड़ा सा पानी
    1 चम्मच एलोवेरा जेल (ऑप्शनल)
    गुलाब जल (ऑप्शनल)
    थोड़ा सा विटामिन E ऑयल (ऑप्शनल)

    कैसे बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स?
        सबसे पहले एक मध्यम आकार का चुकंदर अच्छी तरह धोकर छील लें. अब इसे छोटे टुकड़ों में काटकर थोड़ा सा पानी डालें और ब्लेंडर में अच्छी तरह पीस लें. अगर आप बिल्कुल साफ जूस चाहते हैं तो इसे छलनी या मलमल के कपड़े से छान सकते हैं.
        अब इसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल, थोड़ा सा गुलाब जल या विटामिन E ऑयल मिला सकते हैं. हालांकि, ये चीजें डालना जरूरी नहीं है. सिर्फ चुकंदर के जूस से भी आइस क्यूब्स तैयार किए जा सकते हैं.
        तैयार मिश्रण को साफ आइस क्यूब ट्रे में डालें और करीब 4 से 6 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दें. जब ये पूरी तरह जम जाएं तो क्यूब्स को निकालकर एयरटाइट कंटेनर या जिप लॉक बैग में रख सकते हैं. इन्हें करीब दो हफ्ते तक फ्रीजर में स्टोर किया जा सकता है.

    चेहरे पर कैसे लगाएं?
    आइस क्यूब को सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय इसे किसी पतले और मुलायम कपड़े में लपेट लें. इससे बहुत ज्यादा ठंड की वजह से स्किन पर जलन होने का खतरा कम रहेगा. अब इसे चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में घुमाएं. इसे करीब 1-2 मिनट तक ही इस्तेमाल करें.

    आप इन आइस क्यूब्स को हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत ज्यादा देर तक या रोजाना चेहरे पर बर्फ लगाने से स्किन में जलन हो सकती है, इसलिए इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें.

    इन बातों का रखें ध्यान
    चुकंदर के आइस क्यूब्स हर किसी की स्किन पर एक जैसा असर करें, यह जरूरी नहीं है. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ या चेहरे के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, लालिमा या खुजली हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें.

  • 20 लाख वोटरों के नाम कटने पर सवाल, केबीएस सिद्धू ने 2002 मैपिंग नियम को घेरा

    20 लाख वोटरों के नाम कटने पर सवाल, केबीएस सिद्धू ने 2002 मैपिंग नियम को घेरा

    चंडीगढ़.

    पंजाब में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने कहा है कि किसी मतदाता के नाम को उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची में दर्ज नाम से मैप करना कानून में निर्धारित शर्त नहीं है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी कृत्रिम शर्त को पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिसके कारण मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में 13 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 20 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखकर बाहर किया गया है। उन्होंने ऐसे लोगों से नया फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है।

    "एसआईआर" में 12.8 लाख मतदाता लापता
    पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी किए गए उत्सवपूर्ण प्रेस नोट में, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के घर-घर जनगणना चरण के समापन के उपलक्ष्य में, एक ऐसा वाक्य छिपा है जिस पर जनता का ध्यान कहीं अधिक जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सुश्री अनिंदिता मित्रा, आईएएस ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 93.40% मतदाताओं का मिलान 2003 की मतदाता सूचियों या पिछली एसआईआर की सूचियों से सफलतापूर्वक कर लिया गया है। इसके बाद का गणित स्पष्ट है: लगभग 6.60% – 1,93,94,408 एकत्रित जनगणना प्रपत्रों के आधार पर, लगभग 12.8 लाख पंजाबी मतदाता – वर्तमान में मिलान से बाहर हैं। इस समूह को नोटिस 13 अगस्त 2026 से भेजे जाने शुरू होंगे, "ईसीआई के निर्देशों के अनुपालन में।"

    2.14 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाले राज्य के लिए 12.8 लाख कोई मामूली संख्या नहीं है। यह कई विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की कुल संख्या से भी कहीं अधिक है। प्रत्येक प्रभावित नागरिक और वास्तव में पंजाब की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रत्येक जागरूक पर्यवेक्षक का यह प्रश्न पूछने का पूरा अधिकार है: आगे क्या होगा और इसका क्या समाधान है? समाधान पर चर्चा करने से पहले, प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित श्रेणियों के अनुसार, पंजाब के 2.14 करोड़ मतदाताओं को जिन विशिष्ट वर्गों में विभाजित किया गया है, उन्हें स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। ये शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हैं, और इन्हें आपस में मिलाना समस्या की गंभीरता को गलत समझने का सबसे पक्का तरीका है।

  • कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं. भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण और बुद्ध जैसे अवतारों का वर्णन पुराणों और धार्मिक परंपराओं में मिलता है. इनके बाद दशम और अंतिम अवतार के रूप में कल्कि अवतार का उल्लेख किया गया है.

    मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. लेकिन भगवान कल्कि का जन्म कब होगा? उनका जन्म कहां होगा? उनके माता-पिता कौन होंगे और उनका स्वरूप कैसा होगा? इन सवालों का जवाब जानने की उत्सुकता आज भी लोगों के मन में रहती है. तो आइए जानते है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित उनके स्वरूप के बारे में.

    धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान
    भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब धर्म की स्थापना के लिए वे अवतार लेते हैं. इसी भाव को भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की परंपरा से जोड़ा जाता है. कल्कि अवतार को इसी क्रम का भविष्य में होने वाला अवतार माना गया है. श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है. इसके अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा.

    कहां होगा भगवान कल्कि का जन्म?
    श्रीमद्भागवत महापुराण में बताया गया है कि भगवान कल्कि का जन्म शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर होगा. श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है कि भगवान कल्कि शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर प्रकट होंगे.

    यानी धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के जन्मस्थान के रूप में शंभल ग्राम का उल्लेख मिलता है. हालांकि शंभल की भौगोलिक पहचान को लेकर अलग-अलग धार्मिक और विद्वत परंपराओं में मत मिलते हैं.

    कैसा होगा भगवान कल्कि का स्वरूप?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि एक दिव्य योद्धा के रूप में प्रकट होंगे. उन्हें घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार धारण किए हुए बताया गया है. पुराणिक वर्णनों में उनका वाहन देवदत्त नाम का दिव्य घोड़ा बताया गया है. मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि इसी घोड़े पर सवार होकर अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. इसके बाद धर्म की पुनर्स्थापना होगी और युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी.

    भगवान कल्कि की माता का नाम क्या होगा?
    पौराणिक परंपराओं में भगवान कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमती बताया गया है. इसी परिवार में भगवान कल्कि के प्राकट्य की धार्मिक मान्यता है. कल्कि अवतार से जुड़ी विस्तृत कथाएं केवल श्रीमद्भागवत पुराण में ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रंथों और पुराणिक परंपराओं में भी मिलती हैं. इसलिए उनके परिवार, विवाह और अन्य विवरणों में ग्रंथ के अनुसार अंतर दिखाई दे सकता है.

    कौन होंगे भगवान कल्कि के गुरु?
    कल्कि अवतार से जुड़ी पुराणिक कथाओं में भगवान परशुराम का भी विशेष उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही कल्कि को युद्ध और शस्त्र विद्या की शिक्षा देंगे. इसी वजह से कल्कि और परशुराम का संबंध हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष माना जाता है.

    कब होगा कल्कि अवतार?
    अब सबसे बड़ा सवाल है कि भगवान कल्कि का अवतार आखिर कब होगा?
    धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार को कलयुग के अंतिम चरण से जोड़ा गया है. हिंदू कालगणना के अनुसार कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है और धार्मिक मान्यता के अनुसार अभी इसका काफी समय बाकी है. इसलिए वर्तमान समय में भगवान कल्कि के अवतार की कोई निश्चित तारीख या वर्ष शास्त्रों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है.

    कल्कि अवतार को भविष्य में होने वाली उस घटना के रूप में देखा जाता है, जब कलयुग अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे.

    कल्कि अवतार के बाद क्या होगा?
    पौराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म, अन्याय और अराजकता चरम पर पहुंच जाएगी, तब भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा. वे अधर्म का अंत करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. इसके बाद युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी और सत्ययुग के पुनः प्रारंभ होने की धार्मिक मान्यता है.

    इस तरह कल्कि अवतार केवल भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की कथा नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और युग परिवर्तन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुराणिक मान्यता है. हालांकि, भगवान कल्कि के प्राकट्य का समय भविष्य से जुड़ा धार्मिक विषय है. इसलिए वर्तमान समय में उनके अवतार की कोई निश्चित तारीख बताना शास्त्रसम्मत नहीं है.

  • सुचिका तारियाल का गोल्ड का सपना टूटा, सेमीफाइनल हारकर मिला ब्रॉन्ज मेडल

    सुचिका तारियाल का गोल्ड का सपना टूटा, सेमीफाइनल हारकर मिला ब्रॉन्ज मेडल

    नई दिल्ली
     भारत को एमएमए महिला फाइटर सुचिका तारियाल से उम्मीद थी कि वह एशियन गेम्स-2026 में 60 किलोग्राम भारवर्ग के मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतकर आएंगी, लेकिन सोमवार को खेले गए सेमीफाइनल मैच में सिंगापुर की टी हून ने उन्हें हरा दिया और इसी के साथ भारतीय खिलाड़ी को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।

    इस मैच के बाद सुचिका फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनके हावभाव देखकर लग रहा था कि उनके मुताबिक वह जीत की हकदार थीं, लेकिन सिंगापुर की खिलाड़ी को विजेता घोषित किया गया जिससे वह निराश लग रही थीं।

    ऐसा रहा मैच
    सुचिका ने पहले राउंड में शानदार खेल दिखाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को ज्यादा मौके नहीं दिए। दूसरे मिनट में ही सुचिका ने हून को जमीन पर गिरा दिए और अच्छे पंच बरसाए। हालांकि, सिंगापुर की खिलाड़ी उठ खड़ी हुईं और उन्होंने पलटवार भी किया। दूसरे राउंड में हून ने अपनी आक्रामकता से सुचिका को कमजोर किया और दबाव बनाया। सुचिका ने हार नहीं मानी और तुरंत पलटवार किया, लेकिन सिंगापुर की खिलाड़ी दोबारा सुचिका पर हावी हो गईं। सुचिका ने आखिरी मिनट तक सिंगापुर की खिलाड़ी के सामने हार नहीं मानी। उन्हें लगा था कि वह मुकाबला जीत गई हैं, लेकिन मैच तीसरे राउंड में पहुंचा।

    सिंगापुर की खिलाड़ी हावी
    आखिरी राउंड में सिंगापुर की खिलाड़ी ने सुचिका को कई किक मारीं जबकि सुचिका ने शांत रहने की रणनीति अपनाई। वह निर्णायक वार करने की कोशिश करती दिखीं। बिल्कुल आखिरी पलों में सुचिका ने कुछ कॉम्बिनेशन अटैक किए जिससे हून को परेशानी हुई। फिर आखिरी बजर बजने के बाद सुचिका अपनी प्रतिद्वंद्वी पर झपटीं और उन्हें ज़मीन पर गिरा दिया। रेफरी ने आकर दोनों फाइटर्स को अलग किया। रेफरी ने सिंगापुर की खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जिससे सुचिका खुश नहीं दिखीं। उन्होंने रेफरी से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। भावुक सुचिका मैट पर बैठी रोने लगीं।

     

  • घोसी में BSP ने खोले पत्ते, अजय जायसवाल को बनाया प्रत्याशी; मायावती के निर्देश पर नाम का ऐलान

    घोसी में BSP ने खोले पत्ते, अजय जायसवाल को बनाया प्रत्याशी; मायावती के निर्देश पर नाम का ऐलान

    मऊ
    UP Election 2027: मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने अजय जायसवाल को अपना प्रभारी प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार दिया है: बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर आजमगढ़ मंडल के मुख्य मंडल प्रभारी दिनेश चंद्रा ने कोपागंज स्थित एक निजी विद्यालय के मैदान में आयोजित कार्यकर्ता महासम्मेलन में भारी भीड़ की मौजूदगी में इस नाम की घोषणा की: बसपा ने जिले की चार में से अब तक तीन विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। 

    भाजपा छोड़कर बसपा में आए अजय जायसवाल
    अजय जायसवाल काफी सालों से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता और समर्थक रहे हैं. हालांकि, करीब एक महीने पहले ही उन्होंने भाजपा छोड़कर बसपा का दामन थामा था. बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया है. अजय जायसवाल एक व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लगातार सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। 

    कार्यकर्ता महासम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़
    कोपागंज में आयोजित इस घोषणा कार्यक्रम में बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आरएस राजभर सहित जिले के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. मंच से मुख्य मंडल प्रभारी दिनेश चंद्रा ने कहा कि प्रदेश का सर्व समाज, दबे-कुचले और परेशान लोग मायावती को फिर से मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार चुनाव में उनके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है। 

    सपा के आरोपों पर बसपा का पलटवार
    सपा द्वारा 'कमल और हाथी साथ हैं' के लगाए जा रहे आरोपों पर दिनेश चंद्रा ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सपा मुखिया का आधा परिवार खुद भारतीय जनता पार्टी में शामिल है, इसलिए सपा को पहले अपने परिवार की चिंता करनी चाहिए. चंद्रा ने बताया कि अजय जायसवाल के सामाजिक कार्यों और स्थानीय लोगों की इच्छा को देखते हुए ही बहन जी ने उन्हें आशीर्वाद देकर अपना प्रत्याशी बनाया है। 

    शिक्षा और समाज सेवा को प्राथमिकता
    प्रत्याशी घोषित होने के बाद अजय जायसवाल ने कहा कि वे पिछले 10 सालों से घोसी के घर-घर जाकर समाज की सेवा कर रहे हैं. शिक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और वे हर साल जीके कंपटीशन कराकर 100 बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास 8 शव वाहन और बसें हैं, वे हर साल कंबल बांटते हैं, कुंभ के समय तीन दिन ट्रेन फ्री कराई थी और 17 हजार लोगों को अयोध्या धाम भेज चुके हैं। 

  • भागलपुर में दर्दनाक हादसा, स्नान करने गए 6 बच्चों की डूबकर मौत

    भागलपुर में दर्दनाक हादसा, स्नान करने गए 6 बच्चों की डूबकर मौत

    भागलपुर
     बिहार के भागलपुर में बड़ा हादसा हो गया. सुल्तानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 27 स्थित विष्णु टोला के छह बच्चे कर्मा-धर्मा पूजा को लेकर स्नान करने गए थे. इसी दौरान सभी बच्चे गहरे पानी में चले गए और डूब गए. हादसे में छह बच्चों की मौत हो गई. घटना तरैटा नारायणपुर वहियार की बताई जा रही है. पूरे इलाके में मातम पसर गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

    बताया जा रहा है कि सभी बच्चे करीब 12 साल की उम्र के थे. कर्मा-धर्मा पूजा को लेकर बच्चे स्नान करने के लिए बाढ़ के पानी में गए थे. इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने बच्चों की तलाश शुरू की. काफी प्रयास के बाद सभी बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

    6 बच्चों की मौत से पसरा मातम
    मृत बच्चों की पहचान पूजा, ज्योति, मिंकी, राहुल, आयुष और विकास के रूप में हुई है. सभी सुल्तानगंज नगर परिषद के वार्ड नंबर 27 के विष्णु टोला के रहने वाले बताए जा रहे हैं. हादसे की खबर मिलते ही मृत बच्चों के परिवारों में कोहराम मच गया. एक साथ छह बच्चों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पूजा को लेकर बच्चे स्नान करने के लिए बाढ़ के पानी में गए थे. बाढ़ के कारण इलाके में पहले से ही पानी भरा हुआ है. ऐसे में गहरे पानी में जाने से यह दर्दनाक हादसा हो गया.

    परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल
    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बाढ़ के पानी में बच्चों के जाने को लेकर चिंता जताई है. लोगों ने प्रशासन से ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान जलभराव वाले स्थानों पर विशेष निगरानी जरूरी है, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके. प्रशासन की ओर से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है. हादसे के बाद इलाके में गम का माहौल है और परिजनों को संभालना मुश्किल हो रहा है.

     

  • CG में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर ब्रेक, 7 दिन के लिए टली

    CG में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर ब्रेक, 7 दिन के लिए टली

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को 7 दिन के लिए टाल दिया है। रविवार को JDA के प्रतिनिधिमंडल की स्वास्थ्य मंत्री के साथ डॉक्टरों और जूनियर डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर बातचीत हुई।

    मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए 7 दिन का समय मांगा है। JDA ने मंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है। इस दौरान डॉक्टर अपनी नियमित ड्यूटी और चिकित्सा सेवाएं जारी रखेंगे।

    7 दिन में समाधान की उम्मीद
    JDA ने बताया कि बातचीत में संगठन की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने इन मांगों के निराकरण की दिशा में जरूरी कार्रवाई के लिए 7 दिन का समय मांगा है। संगठन का कहना है कि वह सरकार के साथ बातचीत के जरिए मांगों का समाधान चाहता है। साथ ही मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा।

    हड़ताल टली, विरोध जारी रहेगा
    अनिश्चितकालीन हड़ताल भले ही 7 दिन के लिए टाल दी गई है, लेकिन JDA शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाता रहेगा। इस दौरान डॉक्टरों की ओर से अलग-अलग विरोध कार्यक्रम किए जाएंगे।इनमें ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट ,कैंडल मार्च रैली और शांतिपूर्ण प्रदर्शन अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम शामिल हैं।

    7 दिन बाद फिर तय होगी रणनीति
    JDA ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि 7 दिन के भीतर सरकार की ओर से मांगों के समाधान को लेकर ठोस फैसला लिया जाएगा। अगर तय समय में मांगों का अपेक्षित समाधान नहीं होता है तो JDA की जनरल बॉडी आगे की रणनीति तय करेगी। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल समेत अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाने का फैसला भी लिया जा सकता है। संगठन ने कहा कि डॉक्टरों की मांगों के साथ-साथ मरीजों के हित और चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी।

  • MP Weather: 24 सितंबर से भारी बारिश, अब तक 33.9 इंच बरसा पानी

    MP Weather: 24 सितंबर से भारी बारिश, अब तक 33.9 इंच बरसा पानी

    भोपाल
     देश में मानसून की पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रदेश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्रों से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी. प्रदेश में 22 जून को मानसून के आगमन हुआ था. मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में करीब 20 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. प्रदेश में अलीराजपुर जिले में सबसे कम बारिश हुई है. यहां बारिश का आधा कोटा ही पूरा हो सका। 

    हालांकि, मानसून की विदाई के पहले एक बार मानसून पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के एक दर्जन जिलों को तरबतर करेगा. अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र के ऊपर बन रहे निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। 

    इन जिलों को भिगोने के बाद शुरू होगी विदाई
    अलनीनो की वजह से इस बार बारिश में कमी की आशंका जताई गई थी, इसका प्रदेश के कई हिस्सों में असर दिखाई दिया है. प्रदेश में औसतन 6 फीसदी कम बारिश हुई है. प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में औसत से 2 फीसदी कम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 10 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो गई है. पश्चिमी राजस्थान से मानसून ने विदा लेना शुरू कर दिया है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर से बारिश की विदाई शुरू होने जा रही है. हालांकि, विदाई के पहले प्रदेश में झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। 

    मौसम वैज्ञानिक अरूण शर्मा के मुताबिक "अंडमान सागर और आसमान क्षेत्र के ऊपर स्थित निम्न दवाब का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है. इसके चलते 23 और 24 सितंबर को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के जिलों में अच्छी बारिश होगी. इसके चलते जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां भी बारिश के कोटे में सुधार की उम्मीद है। 

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में बारिश का दौर रहेगा। मौसम विभाग ने 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले रिमझिम जारी रहेगी। प्रदेश में अब तक औसत 33.9 इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तर अंडमान सागर एवं आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके आगे बढ़ने और 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। ऐसा होने से 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश शुरू होगी। इस दिन प्रदेश के छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    32 जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 24% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। रविवार तक आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% कम पानी गिरा है।

    मध्य प्रदेश के 20 जिले रह गए प्यासे
    मध्य प्रदेश में 1 जून से 20 सितंबर तक के आंकड़ों को देखा जाए तो मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 10 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक कम बारिश हुई है. प्रदेश में सबसे कम बारिश अलीराजपुर जिले में हुई है. यहां बारिश का कोटा आधा ही पूरा हो सका. अलीराजपुर के अलावा कई जिले हैं जहां बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. इसके अलावा विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन जैसे जिलों में भी कम बारिश हुई है, जहां बड़े पैमाने पर गेहूं और धान की फसल होती है. कम बारिश से यह फसलें प्रभावित होंगी। 

    इसके अलावा इंदौर, उज्जैन में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि राजधानी भोपाल में सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और भोपाल का बड़ा तालाब भरने से भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं। 

    मध्य प्रदेश के बांधों में पहुंचा भरपूर पानी
    हालांकि, मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश के बाद भी प्रदेश में गर्मी के सीजन में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना होगा. प्रदेश के बांधों में भरपूत पानी पहुंचा है. प्रदेश के बड़े बांध 80 फीसदी और उससे ज्यादा भर चुके हैं. मंदसौर जिले में आने वाला गांधी सागर बांध 79.35 फीसदी भर चुका है, जबकि तवा बांध 87.26 फीसदी भर चुका है. जबलपुर के बरगी बांध का बारिश में कई बार गेट खोलना पड़ा है. यह बांध पूरी तरह से लबालब हो चुका है। 

    यही स्थिति बाणसागर डैम की है. प्रदेश के 45 प्रमुख बांधों में से 34 बांध 80 फीसदी से ज्यादा भर चुके हैं, इनमें प्रदेश के सभी बड़े बांध शामिल हैं. प्रदेश में ऐसा कोई बांध नहीं है, जो 50 फीसदी से कम भरा हो. सबसे कम जल भराव वाला बांध ओंकारेश्वर है, वह भी 69.84 फीसदी पानी भर चुका है। 

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

    भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
    भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

    इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।