Author: NewseDay

  • 15 दिनों में शत-प्रतिशत डेटा एंट्री पूरी करने के निर्देश, त्रुटिरहित प्रविष्टि पर रहेगा विशेष जोर

    15 दिनों में शत-प्रतिशत डेटा एंट्री पूरी करने के निर्देश, त्रुटिरहित प्रविष्टि पर रहेगा विशेष जोर

    प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का डेटा होगा अपडेट

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को व्यवस्थित और सुदृढ़ बनाने के क्रम में बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शत-प्रतिशत दर्ज कराया जाए। इसके लिए 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

    निर्देशों में डेटा एंट्री के दौरान सावधानी बरतने, विवरण का सत्यापन करने और विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने पर विशेष जोर दिया गया है। पत्र में वरिष्ठ विशेषज्ञ (प्री-प्राइमरी), समग्र शिक्षा तथा मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को भी डेटा की गुणवत्ता का नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके माध्यम से बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विवरण व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

    स्टूडेंट मॉड्यूल में दर्ज होगा बच्चों का विवरण
    यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल के सेक्शन-4 ‘स्टूडेंट डिटेल्स’ में बालवाटिकाओं एवं सह-स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण दर्ज किया जाएगा। यह प्रक्रिया भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सांख्यिकी ब्यूरो के कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में आगे बढ़ाई जा रही है।

    डेटा एंट्री में शुद्धता पर विशेष जोर
    महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित बच्चों के विवरण का सत्यापन करते हुए पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा दर्ज किया जाए। प्रविष्टि के दौरान विशेष सावधानी बरतने और त्रुटिरहित जानकारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़े विश्वसनीय एवं उपयोगी बने रहें।

    15 दिनों में पूरा करना होगा कार्य
    सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्य को प्राथमिकता देते हुए अपने स्तर से विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा करें और 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री पूरी कराना सुनिश्चित करें। निर्देशों के अनुपालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों के समन्वय पर भी जोर दिया गया है।

    बालवाटिका के बच्चों का व्यवस्थित डेटा प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर योजना बनाने और बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने में सहायक होगा। सरकार गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
    संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

    बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर निर्धारित समय-सीमा में शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित दर्ज कराया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। सभी जिलों को 15 दिनों में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • पीएम-सेतु योजना के तहत छह क्लस्टरों में आईटीआई के उन्नयन की तैयारी, लगभग 1,446 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित

    पीएम-सेतु योजना के तहत छह क्लस्टरों में आईटीआई के उन्नयन की तैयारी, लगभग 1,446 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल से सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। तेजी से बदलती तकनीक और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में पीएम-सेतु योजना के प्रदेश में क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए क्रमशः भिलाई स्टील प्लांट और एनएमडीसी लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। इन दोनों प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की भागीदारी से आईटीआई में प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कौशल विकास को रोजगार और औद्योगिक प्रगति से जोड़ने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। पीएम-सेतु योजना इसी दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से आईटीआई को केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक कौशल, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य में नए उद्योगों और निवेश के विस्तार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग भी बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हो और प्रदेश के युवाओं को अपने कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें।

    प्रदेश के 30 आईटीआई का होगा कायाकल्प

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के अंतर्गत देशभर के एक हजार शासकीय आईटीआई को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है।

    योजना का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक एवं उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।

    छत्तीसगढ़ में पीएम-सेतु योजना के क्रियान्वयन के लिए दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर सहित छह क्लस्टर चयनित किए गए हैं। इनमें छह हब आईटीआई और 24 स्पोक आईटीआई सहित कुल 30 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन प्रस्तावित है।

    प्रदेश के छह क्लस्टरों में पांच वर्षों की अवधि में लगभग 1,446 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसके अंतर्गत हब आईटीआई के लिए 81 करोड़ रुपए तथा प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

    योजना में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित उद्योग भागीदार की वित्तीय सहभागिता क्रमशः 50 प्रतिशत, 33 प्रतिशत और 17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से आईटीआई में आधुनिक मशीनों, उपकरणों, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संसाधनों के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

    उद्योग और आईटीआई के बीच मजबूत होगी साझेदारी

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। उद्योगों की सीधी भागीदारी से युवाओं को ऐसी तकनीकों और कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिनका वास्तविक औद्योगिक इकाइयों में उपयोग हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि उद्योगों की आवश्यकता और युवाओं के कौशल के बीच अंतर को कम करना जरूरी है। पीएम-सेतु के माध्यम से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और व्यावहारिक अनुभव को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने से प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    दुर्ग क्लस्टर में भिलाई स्टील प्लांट की महत्वपूर्ण भागीदारी

    पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत दुर्ग क्लस्टर के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की इकाई भिलाई स्टील प्लांट (BSP) एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा।

    इस क्लस्टर में शासकीय आईटीआई दुर्ग को हब आईटीआई तथा शासकीय आईटीआई भिलाई, महिला आईटीआई भिलाई, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा को स्पोक आईटीआई के रूप में शामिल किया गया है।

    भिलाई स्टील प्लांट की विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव का लाभ प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्र में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों, मशीनों और कार्यप्रणाली के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज भिलाई स्टील प्लांट के साथ एमओयू संपन्न कर इस सहभागिता को औपचारिक स्वरूप दिया गया।

    बस्तर के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने की बड़ी पहल

    बस्तर क्लस्टर के लिए एनएमडीसी लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा। बस्तर क्लस्टर में शासकीय आईटीआई बस्तर को हब आईटीआई तथा जगदलपुर, गीदम, कोंडागांव और नारायणपुर के शासकीय आईटीआई को स्पोक आईटीआई के रूप में सम्मिलित किया गया है।

    मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एनएमडीसी लिमिटेड के साथ एमओयू संपन्न

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय और दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। एनएमडीसी जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान की सहभागिता से बस्तर के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें स्थानीय एवं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विकसित हो रहे रोजगार के अवसरों का लाभ लेने में सहायता मिलेगी।

    सरगुजा और कोरबा क्लस्टर में भी उद्योगों की सहभागिता

    सरगुजा क्लस्टर के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति प्रदान की है। इस क्लस्टर के लिए टाटा IIS का चयन ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की स्वीकृति के लिए प्रकरण विभाग को प्रस्तुत किया गया है तथा एमओयू के प्रारूप में आवश्यक संशोधन के लिए इसे एसईसीएल को भेजा गया है।

    इसी प्रकार कोरबा क्लस्टर के लिए एनटीपीसी कोरबा द्वारा एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति दी गई है। एनटीपीसी कोरबा द्वारा ऑपरेटिंग पार्टनर के चयन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

    रायपुर और रायगढ़ क्लस्टर के लिए प्रक्रिया जारी

    रायपुर एवं रायगढ़ क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के चयन की प्रक्रिया भी जारी है। इसके लिए राज्य के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से निविदाएं जारी की गई हैं।

    रायपुर क्लस्टर के संबंध में हीरा ग्रुप से प्राप्त प्रश्नों का निराकरण किया जा चुका है। रायगढ़ क्लस्टर के लिए एनटीपीसी लारा से संपर्क किया गया है और योजना में सहभागिता तथा क्रियान्वयन को लेकर प्रारंभिक चर्चा की जा रही है।

    हब-स्पोक मॉडल से मजबूत होगा कौशल प्रशिक्षण नेटवर्क

    पीएम-सेतु योजना में हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से आईटीआई के बीच तकनीकी संसाधनों, आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञता और प्रशिक्षण सुविधाओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

    हब आईटीआई को उन्नत प्रशिक्षण एवं संसाधनों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि उससे जुड़े स्पोक आईटीआई भी इन संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकेंगे। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ेगी।

    उद्योग भागीदारों की सक्रिय सहभागिता से प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को समय-समय पर उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने में भी सहायता मिलेगी।

    कौशल से रोजगार और रोजगार से समृद्धि की दिशा में बढ़ रहा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, कौशल, उद्योग और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़कर युवाओं के लिए अवसरों का मजबूत तंत्र विकसित कर रही है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने के साथ युवाओं को भविष्य की तकनीकों और आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने कौशल और नवाचार के बल पर रोजगार सृजित करने वाला भी बने। कौशल से रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त होगा और हमारे युवाओं की शक्ति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार बनेगी।

    रोजगार, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि पीएम-सेतु योजना प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है। आईटीआई के आधुनिकीकरण और उद्योगों की प्रत्यक्ष सहभागिता से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनके कौशल उन्नयन के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव  बसव राजू, संचालक  हेमंत नंदनवार, एनएमडीसी के कार्यपालक निदेशक  संजीव साही, सेल के  पवन कुमार सहित संबंधित विभागों एवं औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • AIIMS Bhopal News: 8 घंटे चली सर्जरी रही सफल, आधुनिक चिकित्सा से ट्रांसजेंडर महिला को मिली नई शुरुआत

    AIIMS Bhopal News: 8 घंटे चली सर्जरी रही सफल, आधुनिक चिकित्सा से ट्रांसजेंडर महिला को मिली नई शुरुआत

    भोपाल
     अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल में डॉक्टरों की टीम ने एक ट्रांसजेंडर महिला की जटिल बॉटम सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की यह पहली सर्जरी बताई जा रही है। करीब आठ घंटे तक चले ऑपरेशन के जरिए मरीज के शरीर को उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई। सर्जरी मरीज की इच्छा, सहमति, काउंसलिंग और चिकित्सकीय जांच के बाद की गई।

    मरीज ने लगभग 14 साल तक पुरुष के रूप में जीवन बिताया, लेकिन वह स्वयं को महिला के रूप में पहचानती थीं। इसी पहचान के अनुरूप जीवन जीने की इच्छा लेकर वह एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचीं। यहां विशेषज्ञों ने उनकी काउंसलिंग की और जरूरी जांचों के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।

    आठ घंटे की जटिल सर्जरी 
    एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, यह प्रक्रिया संवेदनशील होने के साथ चिकित्सकीय रूप से चुनौतीपूर्ण भी थी। विशेषज्ञों की टीम ने करीब आठ घंटे में ऑपरेशन पूरा किया। सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया और उनकी सेहत में संतोषजनक सुधार होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    अस्पताल से जाते समय मरीज ने इस बदलाव पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सर्जरी से उन्हें अपनी पहचान के अनुरूप जीवन जीने और भविष्य में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

    इन्होंने किया ऑपरेशन
    इस सर्जरी को एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की अध्यक्ष डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने अपनी टीम के साथ अंजाम दिया।

    ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के समन्वय से यह जटिल प्रक्रिया पूरी की गई।

    एम्स में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समर्पित क्लीनिक
    एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए समर्पित क्लीनिक संचालित है। यहां मरीजों को जांच, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस तरह की सर्जरी में मरीज की इच्छा, सूचित सहमति और चिकित्सकीय मूल्यांकन को विशेष महत्व दिया जाता है।

    क्या होती है बॉटम सर्जरी?
    बॉटम सर्जरी लैंगिक पहचान के अनुरूप शरीर के जननांगों में बदलाव करने वाली सर्जरी है। ट्रांसजेंडर महिलाओं के मामले में इसका उद्देश्य शारीरिक संरचना को उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाना होता है। यह एक जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेषज्ञों की टीम, विस्तृत परामर्श और ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल की जरूरत होती है।

        यह सर्जरी संस्थान की बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और सभी लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रदेश के शासकीय अस्पताल में पहली बार ऐसी सर्जरी होना संस्थान के लिए गर्व की बात है।
        – लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) डॉ. नरेंद्र कोतवाल, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।

     

  • कस्टम मिलिंग मामले में पूर्व कांग्रेस नेता रामगोपाल की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जेल भेजा

    कस्टम मिलिंग मामले में पूर्व कांग्रेस नेता रामगोपाल की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जेल भेजा

    रायपुर

     कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को जेल भेज दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पांच दिन की हिरासत पूरी होने के बाद मंगलवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया।

    सुनवाई के बाद ईडी की विशेष अदालत ने रामगोपाल को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।

    करीब 140 करोड़ रुपये के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले से जुड़े इस मामले में ईडी ने रामगोपाल को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ के लिए पांच दिन की कस्टडी रिमांड हासिल की थी। ईडी इस मामले में कस्टम मिलिंग से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।

    जांच के सिलसिले में रामगोपाल अग्रवाल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। एजेंसी ने उनसे मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ की।

    क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला ?

    यह मामला खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से जुड़ा है। उस समय प्रोत्साहन राशि को 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर इस व्यवस्था के तहत मिल मालिकों से दो किस्तों में 20-20 रुपये प्रति क्विंटल की राशि ली गई।

     

  • पूजा की जरूरी सामग्री एक पैक में उपलब्ध कर आत्मनिर्भरता की राह मजबूत कर रहीं वाराणसी की महिलाएं

    पूजा की जरूरी सामग्री एक पैक में उपलब्ध कर आत्मनिर्भरता की राह मजबूत कर रहीं वाराणसी की महिलाएं

    नवरात्रि विशेष-4: उत्पादन की शक्ति

    योगी सरकार की पहल से प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार, 65 दुकानों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच रहे स्थानीय उत्पाद

    पूजा की जरूरी सामग्री एक पैक में उपलब्ध, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और आमदनी बढ़ाने का अवसर

    वाराणसी
    एक तरफ घर-घर मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं, दूसरी तरफ मुर्दहा गांव में कुछ महिलाओं के हाथ चुनरी सहेज रहे हैं, रोली तौल रहे हैं, हवन सामग्री बांध रहे हैं। पहले जिनकी दुनिया घर की चौखट तक सिमटी थी, आज उनके बनाए पूजा कॉम्बो पैक वाराणसी के बाजार में पहुंच रहे हैं। हरहुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुर्दहा में माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नवरात्र की मांग को आजीविका के अवसर में बदल रही हैं। मां की चुनरी से लेकर हवन-पूजन की जरूरी सामग्री तक एक ही पैक में उपलब्ध है। नौ दिन शक्ति की उपासना हो रही है और ये महिलाएं उसी शक्ति को अपने हुनर और हौसले से जमीन पर उतार रही हैं।

    एक पैक में पूरी पूजा, हर पैक में महिलाओं की मेहनत
    माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की निहारिका देवी और सीमा देवी अपने समूह की अन्य महिलाओं के साथ सुबह से ही काम में जुट जाती हैं। कोई चुनरी सहेजती है, कोई रोली और चंदन तौलती है, तो कोई सिंदूर, अक्षत, धूप, कपूर, कलावा और हवन सामग्री को करीने से पैक करती है। इन सबको मिलाकर बनता है नवरात्र का पूजा कॉम्बो पैक। इस पैक की खासियत यह है कि भक्त को पूजा की तैयारी के लिए बाजार में भटकना नहीं पड़ता। जो चाहिए, सब एक जगह मिल जाता है। नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। समूह की महिलाओं ने इसी मांग को अवसर में बदल दिया है।

    65 प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार
    उत्पाद बन जाने के बाद असली चुनौती उसे सही ग्राहक तक पहुंचाने की होती है और इसका जवाब बने हैं प्रेरणा मार्ट। योगी सरकार की महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की पहल के तहत ये मार्ट स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहे हैं। उपायुक्त (स्व रोजगार) पवन कुमार सिंह के अनुसार वाराणसी के आठ ब्लॉकों में आठ-आठ प्रेरणा मार्ट संचालित हैं। जिला मुख्यालय पर एक मार्ट अलग है। इस तरह जिले में कुल 65 प्रेरणा मार्ट हैं, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही करती हैं।

    उत्पादक से उद्यमी तक का सफर
    ब्लॉक मिशन मैनेजर पूजा तिवारी बताती हैं कि प्रेरणा मार्ट के माध्यम से महिलाएं केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी बिक्री और विपणन से भी जुड़ रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपनी पहचान उद्यमी के रूप में बना रही हैं। नवरात्र में हम देवी के नौ रूपों की उपासना करते हैं और ये महिलाएं उसी शक्ति का व्यावहारिक रूप दिखा रही हैं। वे परिवार को संभालती हैं, समूह में मिलकर काम करती हैं और बाजार में अपने उत्पाद की पहचान गढ़ती हैं। मुर्दहा की ये महिलाएं हर पैक के साथ यही संदेश दे रही हैं कि शक्ति की सच्ची आराधना अपने हुनर पर भरोसा करना है।

    “नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए प्रेरणा मार्ट के माध्यम से हमारे बनाए पैक लोगों तक पहुंच रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। हमें खुशी है कि हम अपने काम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे पा रहे हैं।”-निहारिका देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह
     
    “पहले हम घर के कामकाज तक ही सीमित रहते थे, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद कुछ नया करने का अवसर मिला है। सरकार की ओर से समूह की महिलाओं को आगे बढ़ने के ऐसे अवसर मिलना हमारे लिए उत्साह बढ़ाने वाला है।
    सीमा देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह

    नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री के कॉम्बो पैक तैयार करना महिलाओं के लिए आमदनी बढ़ाने का अच्छा अवसर है। इससे उनके पारंपरिक कौशल को बाजार मिल रहा है और समूह के माध्यम से मिलकर काम करने की भावना भी मजबूत हो रही है।
    पवन कुमार सिंह, उपायुक्त (स्व रोजगार), वाराणसी

  • मुख्यमंत्री के प्रोग्राम में आए ग्राम प्रहरी बोले, मानदेय बढ़ने से आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

    मुख्यमंत्री के प्रोग्राम में आए ग्राम प्रहरी बोले, मानदेय बढ़ने से आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

    प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों को 3500 रुपये मानदेय और पांच लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा

    बरेली
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ाने और पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा से ग्राम प्रहरियों में खुशी की लहर है। मंगलवार को बरेली पुलिस लाइन में आयोजित ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह में पहुंचे बरेली और पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों के ग्राम प्रहरियों ने प्रदेश सरकार के फैसले की सराहना की। ग्राम प्रहरियों ने कहा कि मानदेय में बढ़ोतरी से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, वहीं कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से परिवार के स्वास्थ्य संबंधी खर्च की चिंता कम होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्राम प्रहरियों की समस्याओं और जरूरतों पर ध्यान दे रही है।

    प्रेमपाल बोले- सरकार ने ग्राम प्रहरियों की मेहनत को दिया सम्मान
    बरेली के बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम प्रहरी प्रेमपाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानदेय बढ़ाने का निर्णय उनके लिए राहत देने वाला है। सरकार की ओर से कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी सराहनीय है। इससे ग्राम प्रहरियों के साथ उनके परिवारों को भी लाभ मिलेगा।

    रामदयाल ने कैशलेस इलाज की सुविधा को बताया बड़ी राहत
    बरेली के ग्राम प्रहरी रामदयाल ने भी प्रदेश सरकार के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने विशेष रूप से पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा की सराहना की। रामदयाल ने कहा कि बीमारी के समय इलाज पर होने वाला खर्च परिवार के लिए बड़ी चिंता बन जाता है। ऐसे में सरकार की यह पहल ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित होगी। मानदेय बढ़ने से भी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहूलियत मिलेगी।

    शेरसिंह ने कहा- मानदेय बढ़ने से मिलेगी आर्थिक मजबूती
    बिथरी चैनपुर के ग्राम प्रहरी शेरसिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी गांव की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस के सहयोगी के रूप में काम करते हैं। सरकार ने मानदेय बढ़ाकर उनकी जिम्मेदारियों और योगदान को महत्व दिया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलने से ग्राम प्रहरियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया।

    पीलीभीत के बालकराम ने भी जताई खुशी
    पीलीभीत जिले के देवरिया कला निवासी ग्राम प्रहरी बालकराम ने मानदेय बढ़ाने और कैशलेस इलाज की सुविधा की घोषणा पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों के हित में उठाया गया यह कदम उनके परिवारों के लिए लाभकारी साबित होगा। मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी से आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। वहीं इलाज की सुविधा मिलने से बीमारी के समय आर्थिक परेशानियों का सामना कम करना पड़ेगा।

    रामपाल ने भी मुख्यमंत्री के फैसले की सराहना की
    पीलीभीत के ग्राम प्रहरी रामपाल ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों के मानदेय में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार उनके लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले ग्राम प्रहरियों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से ग्राम प्रहरियों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

    2500 से बढ़कर 3500 रुपये हुआ मानदेय, 68 हजार ग्राम प्रहरियों को लाभ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बरेली पुलिस लाइन में आयोजित समारोह में ग्राम प्रहरियों का मासिक मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये करने की घोषणा की। इससे प्रदेश के करीब 68 हजार ग्राम प्रहरियों को लाभ मिलेगा। मानदेय में एक हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी होने से प्रत्येक ग्राम प्रहरी को सालाना 12 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने की भी घोषणा की। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम प्रहरियों को सम्मानित भी किया गया।

    गांवों की सुरक्षा में ग्राम प्रहरियों की अहम भूमिका
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में कहा कि गांवों में ग्राम प्रहरियों की भूमिका शहरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की तरह महत्वपूर्ण है। ग्राम प्रहरी गांव की गतिविधियों पर नजर रखकर संदिग्ध व्यक्तियों और घटनाओं की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को ग्राम प्रहरियों के साथ नियमित बैठकें करने और उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित गांव ही आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव बन सकते हैं। प्रदेश सरकार ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ इसमें योगदान देने वाले ग्राम प्रहरियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, समारोह में पहुंचे ग्राम प्रहरियों ने मानदेय वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधा की घोषणा को अपने हित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

  • पंजाब में बुजुर्ग का 50 दिन का टावर धरना खत्म होने की उम्मीद, उतारने पहुंची प्रशासनिक टीम

    पंजाब में बुजुर्ग का 50 दिन का टावर धरना खत्म होने की उम्मीद, उतारने पहुंची प्रशासनिक टीम

    पठानकोट.

    कमेटी जैनी जुगियाल के दो बुजुर्ग संघर्षकर्मी आखिरकार 50 दिन बाद टावर से नीचे उतरने को राजी हो गए। माधोपुर-पठानकोट क्षेत्र में करीब 100 फीट ऊंचे टावर पर बैठे 88 वर्षीय शरम सिंह और 83 वर्षीय कुलविंदर सिंह को मनाने के लिए सोमवार को जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।

    अधिकारियों ने संघर्ष कमेटी के सदस्यों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों के समाधान के लिए एक सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और सरकार के अन्य नेताओं के साथ बैठक करवाने का आश्वासन दिया। सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे डीसी डॉ. पल्लवी, एसएसपी मनप्रीत सिंह और एडीसी जनरल हरदीप सिंह लुबाना माधोपुर स्थित टॉवर के पास पहुंचे।

    अधिकारियों ने यूनियन सदस्यों के साथ बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि लंबे समय से लंबित मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद दोनों बुजुर्ग टावर से नीचे उतरने के लिए सहमत हो गए। इसके बाद उन्हें क्रेन की सहायता से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। 

  • युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर, हरियाणा में खाली राशन डिपो के लाइसेंस होंगे जारी

    युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर, हरियाणा में खाली राशन डिपो के लाइसेंस होंगे जारी

    चरखी दादरी
    सरकार प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा गरीब एवं पात्र परिवारों को सुगम तरीके से राशन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है

    इसी कड़ी में प्रदेशभर में रिक्त राशन डिपो के लाइसेंस जारी करने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन दुकानों के आवंटन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    डीएफएससी नीतू कुमारी ने बताया कि इच्छुक एवं पात्र आवेदक हरियाणा अंत्योदय सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर तक है।

    इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को आवश्यक खाद्यान्न की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करना, युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, ग्रामीण व दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राशन प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना भी इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।

    वेबसाइट पर उपलब्ध है तमाम जानकारी
    डीएफएससी नीतू कुमारी ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया, पात्रता शर्तों और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग हरियाणा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

    उन्होंने जिले के सभी इच्छुक एवं पात्र आवेदकों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं से अपील की है कि वे निर्धारित पात्रता शर्तों एवं दिशा-निर्देशों का भली-भांति अध्ययन करने के बाद अंतिम तिथि 10 नवंबर से पहले अपना आवेदन ऑनलाइन जमा करवाएं ।

     

  • प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उत्कृष्ट प्रशिक्षण तक तैयार होगा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

    प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उत्कृष्ट प्रशिक्षण तक तैयार होगा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों में ऐसी अनेक प्रतिभाएं हैं, जिन्हें सही समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतिस्पर्धा के पर्याप्त अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रतिभाओं के लिए गांव के खेल मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक आगे बढ़ने का सुनियोजित मार्ग तैयार करना है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन इसी सोच को धरातल पर उतारने की महत्वपूर्ण पहल है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की भरपूर क्षमता है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र में हो और उन्हें लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की कार्ययोजना ऐसी हो, जिसमें खिलाड़ी की प्रतिभा की पहचान से लेकर उसके उच्च प्रदर्शन वाले खिलाड़ी बनने तक की पूरी यात्रा के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।

    गांवों और दूरस्थ अंचलों तक पहुंचे खेल प्रतिभाओं की खोज

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल बड़े शहरों और स्थापित खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छत्तीसगढ़ के गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। तीरंदाजी, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों से इन क्षेत्रों के युवाओं का स्वाभाविक जुड़ाव रहा है। ऐसी प्रतिभाओं को चिन्हित कर वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण से जोड़ने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन की सफलता इस बात से तय होगी कि हम जमीनी स्तर पर कितनी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे पाते हैं। कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों अथवा अवसर की कमी के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए।

    स्कूल से ही मजबूत होगी खेल संस्कृति

    मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्कूल स्तर से खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में बच्चों का खेल के मैदानों से स्वाभाविक जुड़ाव होता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण यह जुड़ाव कम हुआ है। इसे फिर मजबूत करने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री  साय ने स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भी विकसित करते हैं। स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान होने से योग्य बच्चों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा और वे भविष्य में खेलों को एक बेहतर करियर के रूप में भी अपना सकेंगे।

    फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक बनेगा प्रशिक्षण का मजबूत तंत्र

    बैठक में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित प्राथमिकता वाले खेलों के विकास की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

    जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा की गई। फीडर सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान के बाद उनके प्रदर्शन और प्रगति की नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे प्रत्येक चयनित खिलाड़ी के प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आवश्यकता का नियमित आकलन हो तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर तक पहुंचने के अवसर मिलते रहें।

    प्रशिक्षित कोच और स्पोर्ट्स साइंस पर विशेष फोकस

    मुख्यमंत्री  साय ने खेलवार प्रशिक्षित और योग्य कोचों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस खेल की जहां संभावनाएं अधिक हैं, वहां उसी के अनुरूप विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की पदस्थापना और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    बैठक में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं के विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, फिटनेस, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सेवाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की योजना पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में तकनीक और खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण की इन सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।

    बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की भी समीक्षा की गई। सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की वर्तमान क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने तथा यहां संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पहले से उपलब्ध खेल अधोसंरचनाओं का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित रखरखाव के साथ आवश्यकतानुसार उनका उन्नयन किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

    टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना भी आवश्यक है। प्रतियोगिताओं से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन का आकलन कर पाते हैं और उनमें बड़े मुकाबलों के लिए आवश्यक आत्मविश्वास विकसित होता है।

    बैठक में टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चिन्हित कर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

    महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री  साय ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा और क्षमता सिद्ध की है। उन्हें सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आवश्यक खेल सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

    बैठक में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तैयार करने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    अगले पांच वर्षों के लिए तैयार होगी स्पष्ट कार्ययोजना

    मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट, परिणामोन्मुख और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर भी विस्तृत मंथन किया गया।

    मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का विकास किसी एक विभाग तक सीमित विषय नहीं है। सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करते हुए प्रदेश में मजबूत खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश केवल खेल सुविधाओं का विस्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण, प्रतियोगिता और उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक खिलाड़ी को हर जरूरी सहयोग एक सुनियोजित व्यवस्था के तहत मिले।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले। गांव के खेल मैदान से शुरू हुआ उसका सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से हम ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नई पहचान दे।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, खेल विभाग के सचिव  यशवंत कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • जिंदल स्टील बनी छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की रायगढ़ टीम ‘चक्रधर चैंपियंस’ की फ्रेंचाइजी मालिक

    जिंदल स्टील बनी छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की रायगढ़ टीम ‘चक्रधर चैंपियंस’ की फ्रेंचाइजी मालिक

    रायपुर
    जिंदल स्टील ने छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले संस्करण में रायगढ़ की टीम ‘चक्रधर चैंपियंस’ की फ्रेंचाइजी का स्वामित्व हासिल किया है। यह लीग में भाग लेने वाली छह फ्रेंचाइजी में से एक है। प्रतियोगिता का आयोजन 21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक रायपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में किया जाएगा।

    छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं खेल तथा युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा की और टीम की जर्सी का अनावरण किया। इस लीग में अपनी भागीदारी के माध्यम से जिंदल स्टील का उद्देश्य युवा हॉकी खिलाड़ियों को अपनी क्षमता और प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक मंच उपलब्ध कराना तथा प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।

    इस साझेदारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिंदल स्टील लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक श्री देबज्योति रॉय ने कहा, “हम प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का हिस्सा बनकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। ‘चक्रधर चैंपियंस’ के माध्यम से हम युवा खिलाड़ियों को एक सशक्त प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करने की उम्मीद करते हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें, महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर सकें और छत्तीसगढ़ में हॉकी के विकास में अपना योगदान दे सकें।”

    इस फ्रेंचाइजी के साथ जिंदल स्टील का जुड़ाव प्रदेश में सामुदायिक विकास और युवा सशक्तिकरण के प्रति कंपनी की व्यापक प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करता है। कंपनी का विशेष ध्यान युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर केंद्रित है।