Author: NewseDay

  • 84 लाख योनियों का रहस्य: क्या हर आत्मा को सभी योनियों से गुजरना पड़ता है?

    84 लाख योनियों का रहस्य: क्या हर आत्मा को सभी योनियों से गुजरना पड़ता है?

     क्या मृत्यु के बाद मनुष्य फिर से जन्म लेता है? अगर हां, तो उसका अगला जन्म किस रूप में होता है? क्या यह सब केवल भाग्य से तय होता है या हमारे कर्म ही अगली यात्रा का रास्ता बनाते हैं?

    हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथ इन सवालों का बेहद गहरा जवाब देते हैं. पद्म पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है, जबकि गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीव की गति को उसके कर्मों से जोड़ा गया है. कुछ महापापों के संदर्भ में ऐसे पुनर्जन्मों का भी वर्णन मिलता है, जिन्हें सुनकर सामान्य मनुष्य हैरान हो सकता है. लेकिन यहीं से एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है.

    आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर 84 लाख योनियों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कहीं कहा जाता है कि हर आत्मा को सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ता है. कहीं हर पाप के लिए एक निश्चित पशु योनि बता दी जाती है. लेकिन क्या हमारे मूल शास्त्र वास्तव में यही कहते हैं? या फिर समय के साथ कुछ लोक मान्यताएं भी शास्त्रों के साथ जुड़ती चली गईं?

    आज जानेंगे कि 84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है, क्या हर आत्मा को इन सभी योनियों से गुजरना पड़ता है, मृत्यु के बाद जीव की गति कैसे निर्धारित होती है, कर्म अगले जन्म को किस तरह प्रभावित करते हैं और क्या मनुष्य जन्म-मृत्यु के इस चक्र से मुक्त हो सकता है.

    84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है?
    पद्म पुराण में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है-
    जलजा नव लक्षाणि स्थावरा लक्षविंशतिः।
    कृमयो रुद्रसङ्ख्यकाः पक्षिणां दश लक्षकम्।
    त्रिंशल्लक्षाणि पशवश्चतुर् लक्षाणि मानुषाः।।

    इस श्लोक में जीवों की विभिन्न योनियों का वर्गीकरण बताया गया है. इसके अनुसार 9 लाख जलचर, 20 लाख स्थावर यानी पेड़-पौधे और अन्य स्थिर वनस्पतियां, 11 लाख कृमि और कीट, 10 लाख पक्षी, 30 लाख पशु और 4 लाख मानव योनियों का उल्लेख मिलता है. इन सभी को मिलाकर संख्या 84 लाख बताई गई है.

    लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. इस श्लोक का उद्देश्य केवल जीवों की संख्या बताना नहीं माना जाना चाहिए. इसमें सृष्टि में मौजूद जीव-जगत की व्यापकता और विविधता को भी सामने रखा गया है. जल की गहराइयों से लेकर पेड़-पौधों तक, सूक्ष्म जीवों से लेकर पक्षियों और पशुओं तक और फिर मनुष्य तक, सृष्टि के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है.

    क्या हर आत्मा को 84 लाख योनियों से गुजरना पड़ता है?
    यहीं 84 लाख योनियों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है. पद्म पुराण में दिए गए इस श्लोक में योनियों का वर्गीकरण मिलता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि प्रत्येक आत्मा को एक-एक करके सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ेगा.

    इसलिए यह कहना कि हर आत्मा पहले जलचर बनेगी, फिर वनस्पति, फिर कीट, फिर पक्षी और फिर पशु-पक्षी की सभी योनियों से गुजरते हुए मनुष्य बनेगी, इस श्लोक से सीधे सिद्ध नहीं होता है.

    अगला जन्म किस आधार पर मिलता है?
    श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए कहते हैं कि जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी तरह आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है. अर्थात शरीर बदलता है, लेकिन आत्मा को नश्वर शरीर के समान नहीं माना गया है.

    क्या केवल एक कर्म से तय होता है अगला जन्म?
    यहां एक और जरूरी बात समझनी होगी. अगला जन्म केवल किसी एक कर्म से तय होता है, ऐसा सरल नियम शास्त्रों की पूरी शिक्षा को व्यक्त नहीं करता. कर्मों का संचय, जीवन की प्रवृत्तियां, संस्कार और चेतना जैसे विषय भी इस चर्चा में महत्वपूर्ण माने गए हैं.

    श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अंतिम समय के स्मरण और भाव की महत्ता बताते हैं. इसी आधार पर यह समझा जाता है कि मनुष्य जीवन भर जिस भाव और चेतना को विकसित करता है, उसका प्रभाव अंतिम समय पर भी पड़ सकता है. यानी पुनर्जन्म का विषय केवल एक अच्छे या बुरे कर्म की गणना नहीं, बल्कि जीव की व्यापक कर्म-यात्रा से जुड़ा हुआ माना गया है.

    क्या महापापों से मिलती है विशेष योनि?
    गरुड़ पुराण में कर्मों के फल का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें कुछ गंभीर पापों के लिए कठोर कर्मफल और विभिन्न गतियों का उल्लेख किया गया है. धर्मशास्त्रीय परंपरा में ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी और गुरु-पत्नी के साथ अनुचित संबंध जैसे कर्मों को गंभीर महापापों में गिना गया है. इनके परिणामों के संदर्भ में नरक, कष्ट और पुनर्जन्म जैसी विभिन्न गतियों का वर्णन मिलता है.

    लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है. हर पाप के लिए एक निश्चित पशु या पक्षी योनि तय है, ऐसा सरल फॉर्मूला पूरे गरुड़ पुराण की शिक्षा को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता है. कई प्रसंगों में पहले कर्म के फलस्वरूप कष्ट या नरक का वर्णन आता है और उसके बाद पुनर्जन्म की बात कही जाती है. इसलिए यह कहना कि 'फलां पाप करने पर निश्चित रूप से फलां पशु बनना पड़ता है', हर मामले में शास्त्र का सीधा निष्कर्ष नहीं माना जा सकता है.

    मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया?
    अब सवाल उठता है कि अगर जीव अलग-अलग योनियों में जन्म ले सकता है तो मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? इसका एक बड़ा कारण है – विवेक.

    भोजन, निद्रा, भय और प्रजनन जैसी मूल प्रवृत्तियां मनुष्य के साथ अन्य जीवों में भी देखी जाती हैं. लेकिन मनुष्य में धर्म-अधर्म का विचार करने, अपने कर्मों का चुनाव करने और अपने जीवन की दिशा बदलने की क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है.

    मनुष्य ज्ञान प्राप्त कर सकता है. तप कर सकता है. दान और सेवा कर सकता है. भक्ति कर सकता है और अपने भीतर के लोभ, क्रोध और अहंकार को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकता है. इसलिए भागवत परंपरा में मनुष्य जन्म को दुर्लभ अवसर के रूप में देखा गया है. यह केवल जीवन जीने का अवसर नहीं बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी माना गया है.

    क्या मोक्ष से पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो सकता है?
    सनातन धर्म का अंतिम लक्ष्य केवल अच्छा पुनर्जन्म प्राप्त करना नहीं माना गया है. मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की शिक्षा दी गई है. भगवद्गीता में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग जैसे मार्गों के माध्यम से आत्मिक उन्नति की बात कही गई है.

    अर्थात लक्ष्य केवल यह नहीं कि अगला जन्म किस योनि में मिलेगा. उससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि क्या मनुष्य अपने कर्मों और चेतना को इतना शुद्ध कर सकता है कि वह पुनर्जन्म के बंधन से ही मुक्त हो जाए.

    तो आखिर 84 लाख योनियों का रहस्य क्या है?
    पद्म पुराण में जीवों की विभिन्न योनियों का वर्गीकरण मिलता है. गरुड़ पुराण कर्म और कर्मफल के आधार पर जीव की गति का वर्णन करता है. श्रीमद्भागवत महापुराण राजा भरत और अजामिल जैसे प्रसंगों के माध्यम से कर्म, आसक्ति, पश्चाताप और भक्ति की शिक्षा देता है. वहीं श्रीमद्भगवद्गीता आत्मा की नश्वर शरीर से अलग प्रकृति और पुनर्जन्म के सिद्धांत को समझाती है.

    इन सभी शिक्षाओं को एक साथ देखें तो एक बात स्पष्ट होती है. 84 लाख योनियों को केवल डराने वाली संख्या के रूप में देखने के बजाय इसे सृष्टि की व्यापकता और जीव की अलग-अलग अवस्थाओं से जोड़कर समझा जा सकता है.

    हर आत्मा को एक-एक करके 84 लाख योनियों से गुजरना ही पड़ेगा, ऐसा स्पष्ट शास्त्रीय नियम नहीं मिलता. इसके बजाय कर्म, संस्कार, चेतना और आध्यात्मिक साधना को जीव की आगे की गति से जोड़ा गया है. इसलिए सनातन परंपरा मनुष्य जीवन को बेहद महत्वपूर्ण मानती है. क्योंकि आज हमारे पास जो जीवन है, उसमें हमारे पास अपने कर्म चुनने का अवसर है. हम सत्य, करुणा, सेवा, संयम और भक्ति का मार्ग चुन सकते हैं.

    शायद 84 लाख योनियों की सबसे बड़ी सीख यही है कि अगली यात्रा की चिंता करने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि हम इस जीवन की यात्रा किस दिशा में ले जा रहे हैं. क्योंकि हमारे आज के कर्म ही हमारी आगे की यात्रा के महत्वपूर्ण आधार माने गए हैं.

  • दुर्ग में सिंचाई कार्यों के लिए 40.85 करोड़ स्वीकृत, किसानों को मिलेगा लाभ

    दुर्ग में सिंचाई कार्यों के लिए 40.85 करोड़ स्वीकृत, किसानों को मिलेगा लाभ

    दुर्ग जिले के विभिन्न सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 40.85 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर
     छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा दुर्ग जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 40 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।     जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में दुर्ग जिले के सुरपा व्यपवर्तन योजना का जीर्णोद्धार एवं नहर प्रणाली का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 23 लाख 56 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 121 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाइ्र सुविधा मिलेगी।

    इसी तरह से मोहंदी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 55 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। तिरगा जलाशय का जीर्णोद्धार एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 107 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। गनियारी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 254 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रिसाली उमरपोटी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 97 लाख 94 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 162 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। 

    दुर्ग जिले के निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने हेतु चैनल निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 93 लाख 56 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। शिवनाथ मण्डल कार्यालय दुर्ग का जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 24 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। कपसदा जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 57 लाख 8 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर 90 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। नंदौरी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहरों के लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 77 लाख 57 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर 49 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

  • सट्टे की कमाई शेयर बाजार में खपाई, पिट्टी के 59.6 करोड़ के शेयर जब्त

    सट्टे की कमाई शेयर बाजार में खपाई, पिट्टी के 59.6 करोड़ के शेयर जब्त

    रायपुर.

    महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ईजमाय ट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी के खिलाफ 10 सितंबर को आरोप-पत्र दाखिल किया है. ईडी की पांचवीं पूरक अभियोजन शिकायत में पिट्टी के करीब 59.6 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया गया है.

    एजेंसी ने इन शेयरों को अपराध से अर्जित आय बताते हुए अदालत से इन्हें जब्त करने की अनुमति मांगी है. ईडी का आरोप है कि निशांत पिट्टी ने दुबई में रहने वाले स्काई एक्सचेंज के संचालक हरिशंकर टिबरेवाल के साथ मिलकर सट्टेबाजी से हासिल रकम को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के जरिए भारतीय शेयर बाजार में लगाने और अलग-अलग स्तरों पर उसे घुमाने में मदद की. एजेंसी के मुताबिक, पिट्टी और टिबरेवाल के बीच कारोबारी संबंध थे. ईडी ने आरोप लगाया है कि ईजमाय ट्रिप प्लानर्स लिमिटेड के प्रवर्तकों की ओर से शेयरों की कीमत पहले से तय कर सौदे किए गए. एजेंसी के अनुसार, इन लेन-देन के जरिए कंपनी के शेयर भाव और बाजार पूंजीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया.

    दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों के समर्थन में ईडी ने 2022 में भारत में आयोजित एक क्रिकेट सीरीज की स्पॉन्सरशिप का भी उल्लेख किया है. इस सीरीज में ईजमाय ट्रिप और स्काई एक्सचेंज सह-प्रायोजक थे. हालांकि, कंपनी पहले महादेव सट्टा एप या किसी अन्य सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध होने से इनकार कर चुकी है. ईडी की इस पूरक आरोप-पत्र में ईबीआईएक्स समूह के अध्यक्ष विकास गर्ग समेत कुल 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है. एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों को हरिशंकर टिबरेवाल से संबंधित कंपनियों से 765.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.

    ईडी के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल अमेरिकी कंपनी ईबीआईएक्स इंक के अधिग्रहण में किया गया. ईडी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 1885 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है. छह आरोप-पत्रों में कुल 116 लोगों को आरोपी बनाया गया है. मामले में ईडी और सीबीआई की जांच अभी जारी है. महादेव बुक के प्रमोटर और मूल रूप से भिलाई निवासी सौरभचंद्राकर को भारत लाने के प्रयास भी जारी हैं. बताया गया है कि पिछले तीन महीनों से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब तक रास्ता साफ नहीं हो पाया है. सौरभ को ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है और वह मस्कट के अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. उसे भारत लाने के लिए ईडी ने आवेदन किया है और विदेश मंत्रालय के माध्यम से भी प्रयास किए जा रहे हैं.

    पिछले डेढ़ साल में यह तीसरी बार है, जब सौरभ विदेश में पकड़ा गया है. इससे पहले रवि उप्पल और शुभम सोनी को भी भारत लाने के प्रयास किए गए थे. हालांकि, विदेश में पकड़े गए महादेव सट्टा मामले के किसी प्रमुख आरोपी को अब तक भारतीय एजेंसियां भारत नहीं ला सकी हैं. जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बावजूद ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आती रही है. एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, सौरभचंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़े अवैध सट्टा कारोबार का आकार 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है.

  • दीपिका कक्कड़ का छलका दर्द, बोलीं- अब डेली सोप करना मेरे लिए मुश्किल

    दीपिका कक्कड़ का छलका दर्द, बोलीं- अब डेली सोप करना मेरे लिए मुश्किल

    टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ लंबे वक्त से शोबिज से दूर हैं. 2025 में उन्होंने स्टेज 2 लिवर कैंसर होने की जानकारी दी थी. कैंसर ट्रीटमेंट की वजह से दीपिका की हेल्थ, लाइफस्टाइल को बड़ा झटका लगा है. उनके करियर पर भी फर्क पड़ा है. वो एक्टिंग से दूरी बनाए हुए हैं. इस बीच उन्हें बस व्लॉगिंग का ही सहारा है.

    दीपिका का छलका दर्द
    एक्ट्रेस ने लेटेस्ट व्लॉग में फैंस को बताया कि वो पति शोएब इब्राहिम संग एक म्यूजिक वीडियो में नजर आएंगी. हालांकि उन्होंने ये क्लियर किया कि अब वो टीवी शोज नहीं कर पाएंगी. दीपिका ने बताया कि वो 1 दिन के प्रोजेक्ट ले सकती हैं. डेली शोप इस मोमेंट पर उनके लिए करना मुश्किल है. दीपिका ने म्यूजिक वीडियो में अपने कमबैक पर बात की.

    वो कहती हैं- इस वक्त मेरी कंडीशन देखते हुए मुझे लगता है डेली शोप नहीं कर पाऊंगी. ये भी है कि मेरे ट्रीटमेंट के साथ कोई क्यों मुझे कास्ट करेगा. ये बताने की बात नहीं है. लेकिन कोई नहीं. इसमें कोई सोचने वाली बात नहीं है. क्योंकि ट्रीटमेंट है. जाहिर सी बात है साइड इफेक्ट्स होते हैं. मेरी कंडीशन देखते हुए 1 दिन का गाना शूट करना मैनेज किया जा सकता है. ये सब बोलते हुए दीपिका इमोशनल नजर आईं.

    एक वक्त वो टीवी इंडस्ट्री की बड़ी स्टार थीं. 'ससुराल सिमर का' से वो घर-घर की फेवरेट बहू बनीं. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. बीमारी ने उनके एक्टिंग करियर को बैकफुट पर ला दिया है.

    दीपिका ने शोएब संग म्यूजिक वीडियो शूट करने के एक्सपीरियंस पर भी बात की. वो कहती हैं- प्लानिंग शुरू हो गई है. आज मुझे रिहर्सल के लिए जाना है. ज्यादा नहीं हल्का फुल्का डांस है. दीपिका के स्क्रीन पर लौटने का फैंस को इंतजार है. उनका आखिरी फुल-फ्लेज्ड डेली शोप 'कहां हम कहां तुम' था. इसके बाद वो रियलिटी शो 'सेलिब्रिटी मास्टरशेफ' में नजर आई थीं.

    उन्होंने 2010 में 'नीर भरे तेरे नैना देवी' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वो अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो, ससुराल सिमर का, झलक दिखलाजा 8, नच बलिए 8, बिग बॉस 12, कहां हम कहां तुम, सेलिब्रिटी मास्टरशेफ में नजर आईं.

  • पंपों पर लगेगा बोर्ड, बिना वैध नंबर प्लेट ईंधन देने पर होगी कार्रवाई

    पंपों पर लगेगा बोर्ड, बिना वैध नंबर प्लेट ईंधन देने पर होगी कार्रवाई

    अमृतसर 

      पंजाब के अमृतसर में अब सड़क पर बिना वैध नंबर प्लेट के वाहन दौड़ाना भारी पड़ सकता है। शहर में बढ़ते अपराधों और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाया है।

    पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 के तहत एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत कमिश्नरेट क्षेत्र के किसी भी फ्यूल स्टेशन पर बिना वैध नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। पुलिस का यह फैसला शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
    प्रशासन के संज्ञान में आया था कि कई वाहन चालक
    जानबूझकर अपनी नंबर प्लेट को मोड़कर, तोड़कर, ढककर या उसमें छेड़छाड़ करके वाहन चलाते हैं। इस तरह की कारगुजारियों से ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को भी वाहनों की सही पहचान करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अस्पष्ट या फर्जी नंबर प्लेट वाले इन वाहनों का इस्तेमाल अक्सर हिट एंड रन, चेन स्नैचिंग, वाहन चोरी और लूटपाट जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। ऐसे में ईंधन मिलने पर रोक लगने से अपराधियों की गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी।

    नए वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को छूट
    जारी किए गए आदेश के मुताबिक, अमृतसर की सीमा में उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा जिनके आगे और पीछे वैध हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी (HSRP) लगी होगी। यदि नंबर प्लेट टूटी हुई, मुड़ी हुई, ढकी हुई या बदली हुई पाई गई, तो फ्यूल पंप पर सरेआम मनाही होगी।

    हालांकि, इस पाबंदी से कुछ जरूरी रियायतें भी दी गई हैं। जिन नए वाहनों पर वैध रजिस्ट्रेशन नंबर या वैध अस्थायी (टारानी) नंबर चस्पा होगा, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक आपातकालीन सेवाओं में लगे सरकारी व गैर-सरकारी वाहनों पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    पेट्रोल पंप संचालकों के लिए निर्देश और सीसीटीवी की अनिवार्यता
    इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन मालिकों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। सभी पंप संचालकों को अपने प्रवेश द्वार और ईंधन भरने वाली जगह के पास कम से कम 3 गुणा 3 फीट का एक बड़ा सूचना बोर्ड लगाना होगा, जिस पर साफ शब्दों में लिखा हो कि बिना वैध नंबर प्लेट के ईंधन नहीं दिया जाएगा।

    इसके अलावा, पंप परिसरों में लगे सीसीटीवी और एएनपीआर (ANPR) कैमरों को चौबीसों घंटे चालू रखना अनिवार्य किया गया है ताकि आने-जाने वाले हर वाहन की आगे और पीछे की नंबर प्लेट साफ-साफ रिकॉर्ड हो सके। पंप संचालकों को यह फुटेज कम से कम 30 दिनों तक संभाल कर रखनी होगी और पुलिस द्वारा मांगे जाने पर तुरंत उपलब्ध करानी होगी।

        बिना वैध नंबर प्लेट ईंधन नहीं, नए वाहनों को छूट: आदेश के मुताबिक, अमृतसर में जिन वाहनों के आगे और पीछे वैध हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी HSRP नहीं लगी होगी, उन्हें पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। नंबर प्लेट हटाई, टूटी, मुड़ी, ढकी या बदली हुई होने पर भी ईंधन नहीं मिलेगा। जिन नए वाहनों पर वैध रजिस्ट्रेशन नंबर या वैध अस्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर लगा होगा, उन्हें इस पाबंदी से छूट दी गई है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी वाहनों को भी छूट रहेगी।

        पेट्रोल पंप पर बोर्ड लगाना जरूरी: सभी पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन संचालकों को प्रवेश द्वार व ईंधन भरने वाली जगह के पास कम से कम 3 गुणा 3 फीट का सूचना बोर्ड लगाना होगा। बोर्ड पर साफ लिखा होगा कि बिना वैध नंबर प्लेट वाले वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन संचालकों को अपने सीसीटीवी और एएनपीआर कैमरे हर समय चालू रखने होंगे।

        कैमरों में स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड होनी चाहिए नंबर प्लेट: आने-जाने वाले वाहनों की आगे और पीछे की नंबर प्लेट कैमरों में स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड होनी चाहिए। पेट्रोल पंप संचालकों को कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। पुलिस की जरूरत पड़ने पर यह फुटेज उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

        बोतल या कंटेनर में ईंधन नहीं, विवाद पर 112 पर सूचना: पेट्रोल और डीजल पंपों पर किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति को बोतल, कंटेनर या किसी अन्य बर्तन में पेट्रोल-डीजल देने पर भी रोक रहेगी। अगर बिना नंबर प्लेट वाले वाहन को ईंधन देने से इनकार करने पर चालक विवाद, हंगामा या गाली-गलौज करता है, तो पेट्रोल पंप संचालक तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या 112 पर सूचना दे सकता है।

    नियम तोड़ने पर कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिक, चालक, पेट्रोल पंप संचालक या कर्मचारी के खिलाफ BNSS की धारा 223 और मोटर व्हीकल एक्ट की लागू धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस के मुताबिक, इस आदेश का उद्देश्य वाहनों की पहचान सुनिश्चित करना, ट्रैफिक नियमों की निगरानी मजबूत करना और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर नजर रखना है।

    बोतल में पेट्रोल देने पर रोक और विवाद पर तुरंत एक्शन
    सुरक्षा के लिहाज से पेट्रोल और डीजल पंपों पर किसी भी गैर-अधिकृत व्यक्ति को खुली बोतल, डिब्बे या किसी अन्य कंटेनर में ईंधन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि कोई वाहन चालक बिना नंबर प्लेट के फ्यूल मांगता है और पंप कर्मचारी द्वारा मना करने पर किसी तरह का विवाद, हंगामा या बदसलूकी करता है, तो संचालक या कर्मचारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना देंगे।

    यदि कोई भी व्यक्ति या पंप संचालक इन आदेशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 और मोटर व्हीकल एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • स्मृति-शेफाली का धमाका, भारत ने श्रीलंका को 147 रन से हराकर जीता ऐतिहासिक स्वर्ण पदक

    स्मृति-शेफाली का धमाका, भारत ने श्रीलंका को 147 रन से हराकर जीता ऐतिहासिक स्वर्ण पदक

    आइची-नागोया
    आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने गोल्ड मेडल जीत लिया है. गोल्ड मेडल मैच में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से पराजित किया. मंगलावर (22 सितंबर) को निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हुए मुकाबले में भारत ने श्रीलंका के सामने 217 रनों का टारगेट दिया था, लेकिन उसकी पूरी टीम 15.4 ओवरों में 69 रनों पर सिमट गई. मौजूदा एशियन गेम्स में ये भारत का पहला गोल्ड मेडल है. इससे पहले भारत ने मौजूदा गेम्स में 4 सिल्वर और दो ब्रॉन्ज जीते थे.

    भारत की महिला क्रिकेट टीम ने हांगझोउ एशियन गेम्स 2022 में भी गोल्ड मेडल जीता था. तब भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 19 रनों से पराजित किया था. अब उसने लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया. एशियन गेम्स 2026 में विमेंस क्रिकेट प्रतियोगिता का ब्रॉन्ज पाकिस्तान ने जीता. पाकिस्तानी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल मैच में बांग्लादेश को 31 रनों से हराया.

    रनचेज में श्रीलंकाई टीम ने शुरुआत से ही विकेट गंवाए और कभी भी मैच में वापसी नहीं कर पाई. कप्तान चमारी अटापट्टू ने सबसे ज्यादा 21 बॉल पर 29 रन बनाए, जिसमें पांच चौके शामिल रहे. भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने सबसे ज्यादा तीन विकेट झटके. वहीं शेफाली वर्मा, श्रेयंका पाटिल और श्री चरणी ने दो-दो विकेट लिए.

    स्मृति ने लगाई तूफानी फिफ्टी
    मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 3 विकेट पर 216 रन बनाए. स्मृति मंधाना ने 7 छक्के और 5 चौके की मदद से 45 बॉल पर 79 रनों का योगदान दिया. वहीं ऋचा घोष ने सिर्फ 22 बॉल पर नाबाद 49 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. ओपनर शेफाली वर्मा ने 29 बॉल पर 48 रनों की पारी खेली. शेफाली ने अपनी पारी में 3 छक्के और 3 चौके लगाए.

    शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना के बीच पहले विकेट के लिए 99 रनों की साझेदारी हुई. इस पार्टनरशिप ने ही बड़े स्कोर की नींव रखी. श्रीलंका की ओर से सुगंधिका कुमारी, चामुदी प्रबोदा और कविशा दिलहारी ने एक विकेट हासिल किए.

    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्वार्टर फाइनल में जापान को 8 विकेट से पराजित किया था. फिर उसने सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 114 रनों से धूल चटाई. श्रीलंका का क्वार्टर फाइनल मलेशिया से था, जहां टीम ने 86 रनों से जीत हासिल की. फिर सेमीफाइनल में श्रीलंका ने पाकिस्तान को 8 विकेट से धो दिया.

    देखा जाए तो भारत और श्रीलंका के बीच विमेंस टी20 इंटरनेशनल में अब तक 32 मुकाबले खेले गए हैं. इस दौरान भारतीय टीम ने 26 मैचों में जीत हासिल की. वहीं श्रीलंका ने केवल 5 मुकाबले जीते. जबकि एक मैच का नतीजा नहीं निकला. यानी आंकड़ों में भारतीय टीम का पलड़ा श्रीलंका पर हमेशा से भारी रहा है.

    भारत बनाम श्रीलंका h2h
    कुल विमेंस टी20I मैच: 32
    भारत ने जीते: 26
    श्रीलंका ने जीते: 5
    बेनतीजा: 1

    फाइनल में भारत की प्लेइंग इलेवन: स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, गुनालन कमलिनी, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, श्रेयंका पाटिल, श्री चरणी, नंदनी शर्मा और क्रांति गौड़.

    फाइनल में श्रीलंका की प्लेइंग इलेवन: इमेशा दुलानी, चमारी अटापट्टू (कप्तान), हसिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, हंसिमा करुणारत्ने, कौशानी नुथ्यांगना (विकेटकीपर), मिताली अयोध्या, काव्या कविंदी, चामुदी प्रबोदा और सुगंधिका कुमारी.

    भारत का स्क्वॉड: स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, गुनालन कमलिनी, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, श्रेयंका पाटिल, श्री चरणी, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, अरुंधति रेड्डी और राधा यादव.

    श्रीलंका का स्क्वॉड: इमेशा दुलानी, चमारी अटापट्टू (कप्तान), हसिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, हंसिमा करुणारत्ने, कौशानी नुथ्यांगना (विकेटकीपर), मिताली अयोध्या, काव्या कविंदी, चामुदी प्रबोदा, सुगंधिका कुमारी, रश्मिका सेववंडी, निमाशा मीपेज, संजना कविंदी और अनुष्का संजीवनी.

  • 2027 से पहले सपा-कांग्रेस में बढ़ी तकरार, इमरान मसूद-इकरा हसन में जुबानी जंग

    2027 से पहले सपा-कांग्रेस में बढ़ी तकरार, इमरान मसूद-इकरा हसन में जुबानी जंग

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही शह-मात की राजनीति अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंची है. सीट-शेयरिंग को लेकर जारी अंदरूनी घमासान में अब पश्चिमी यूपी के दो प्रमुख मुस्लिम चेहरे आमने-सामने आ गए हैं. यह मामला सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के बीच की सीधी सियासी जंग में तब्दील होता दिख रहा है। 

    सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. इतना ही नहीं, वे अखिलेश यादव की मुस्लिम पॉलिटिक्स पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. इमरान मसूद के सियासी तेवर को देखते हुए सपा ने कैराना से सांसद इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है। 

    सपा सांसद इकरा हसन ने इमरान मसूद पर करारा पलटवार करते हुए साफ कहा कि प्रदेश में अखिलेश यादव ही बीजेपी का मुकाबला कर पाने में सक्षम हैं. सीधे तौर पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए इकरा ने कहा कि कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति में कुछ न कर पाएगी. इस तरह कांग्रेस और सपा की लड़ाई इमरान मसूद बनाम इकरा हसन में तब्दील हो गई है। 

    इमरान मसूद का दबाव और 'अकेले लड़ने' का दांव
    उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के छह सांसद हैं, लेकिन सबसे मुखर इमरान मसूद ही नजर आते हैं. सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर को मजबूत करने का बीड़ा लगता है इमरान मसूद ने अपने कंधों पर उठा रखा है. इमरान मसूद लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि सपा अक्टूबर तक सीट-बंटवारा तय करे. उनका तर्क है कि राहुल गांधी की अगुवाई के बिना भाजपा का मुकाबला संभव नहीं है। 

    इमरान मसूद लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन को लेकर जो भी होना है, उसे तुरंत फाइनल रूप दिया जाना चाहिए. देरी होने की स्थिति से नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बिना भाजपा को नहीं हराया जा सकता है. गठबंधन में यदि अखिलेश यादव बड़ा दिल नहीं दिखाते हैं तो कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतरने से भी पीछे नहीं हटेगी. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि हम अपने जिले की सीटों पर कोई रियायत नहीं करने वाले हैं। 

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का यह आक्रामक रुख असल में कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पश्चिमी यूपी और मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा के सामने अपनी शर्तों पर सौदेबाजी करना चाहती है। 

    फ्रंटफुट पर सपा ने इकरा हसन को उतारा
    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इमरान मसूद से सीधे खुद उलझने के बजाय अपने क्षेत्रीय जनाधार वाले युवा चेहरों को आगे किया है. इमरान मसूद की आक्रामक बयानबाजी का जवाब देने के लिए उन्होंने पश्चिमी यूपी के अपने मुस्लिम चेहरे इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है. इकरा हसन ने बिना किसी हिचकिचाहट के इमरान मसूद पर पलटवार करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर कोई नेता भाजपा को हराने में सक्षम है, तो वे सिर्फ अखिलेश यादव हैं। 

    उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हैसियत बताते हुए इकरा हसन ने कहा कि अगर कांग्रेस अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ती है तो वह कुछ नहीं कर पाएगी. कांग्रेस-सपा गठबंधन को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गठबंधन रहा तो अच्छा है, वरना इसका नुकसान केवल और केवल कांग्रेस को होगा, सपा को नहीं. इकरा हसन का यह बयान राज्य में सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई सियासत गरमा रहा है। 

    इमरान मसूद बनाम इकरा हसन क्यों हो गया?
    इमरान मसूद के सामने इकरा हसन का यह दांव सपा की एक सोची-समझी रणनीति के तहत देखा जा रहा है. इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों ही पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम सियासी घरानों से आते हैं. मसूद के हमलों का जवाब देने के लिए इकरा को आगे करके सपा ने यह संदेश दिया है कि मुस्लिम मतदाताओं का पहला भरोसा आज भी सपा का 'पीडीए' (PDA) मॉडल ही है। 

    इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच की यह जुबानी जंग सिर्फ दो नेताओं का बयान भर नहीं है, बल्कि यह सपा-कांग्रेस के बीच चल रही गहरी रस्साकशी का नतीजा है. कांग्रेस जल्द से जल्द अपनी सीटें पक्की करके प्रचार में उतरना चाहती है, ताकि बाद में अखिलेश यादव के रहमों-करम पर न निर्भर रहना पड़े। 

    सपा पहले अपने जमीनी समीकरण दुरुस्त करना चाहती है और कांग्रेस को उसकी जमीनी ताकत (संगठन के अभाव) का अहसास कराकर कम से कम सीटें देना चाहती है. इमरान मसूद बनाम इकरा हसन के इस नए सियासी चैप्टर ने यह साफ कर दिया है कि 2027 का गठबंधन भले ही ऊपरी तौर पर तय दिख रहा हो, लेकिन धरातल पर सीटों और सियासी दबदबे की यह लड़ाई अभी और तीखी होने वाली है। 

  • निकाय चुनाव में BJP की बड़ी जीत, भजनलाल शर्मा के नेतृत्व पर पार्टी ने जताया भरोसा

    निकाय चुनाव में BJP की बड़ी जीत, भजनलाल शर्मा के नेतृत्व पर पार्टी ने जताया भरोसा

    जयपुर
    राजस्थान निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 309 में से 199 नगर निकायों पर जीत दर्ज की है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह परिणाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर है. चुनाव प्रचार के दौरान भजनलाल शर्मा ने जिस तरह रोड शो किए थे और सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा था. उससे 10 नगर निगमों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त या जीत दर्ज होने के बाद पार्टी का उत्साह बढ़ गया है. अब भाजपा की नजर आगामी पंचायत चुनावों पर है, जिन्हें अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है.

    पहले जानिए क्या कह रहे हैं चुनावी परिणाम
    राजस्थान के 309 नगर निकायों में से 199 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. 10 में से सात नगर निगम के परिणाम आ चुके हैं इनमें से छह पर भाजपा के मेयर बने हैं. तीन के परिणाम बाकी है जिसमें से दो में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और तीसरे में भी बीजेपी आगे है यानी 10 में से 9 नगर निगम भाजपा के पास आने वाले हैं.

    भजनलाल के लिए क्यों खास है ये बंपर जीत
    राजस्थान में यह एकतरफा जीत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मिली है. यह जीत उस वक्त मिली है जब भजनलाल शर्मा अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब आमतौर पर राजस्थान की जनता में एंटी इनकंबेंसी वाले भाव आना शुरू हो जाते हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब बीजेपी का कोर वोटर बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है.

    इस चुनाव को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूरी तरह लीड किया था. 10 के 10 नगर निगम क्षेत्रों में भजनलाल शर्मा ने रोड शो किए थे. चुनाव से पहले संकल्प पत्र जारी किया था. दावा किया था कि हम हमारे घोषणा पत्र के 78 फीसदी वादे पूरे कर चुके हैं.

    कुल मिलाकर यह चुनाव भजनलाल शर्मा ने अपने काम के आधार पर लड़ा और अपने चेहरे पर लड़ा. सफलता को आप आंकड़ों में देख सकते हैं और आंकड़े कह रहे हैं कि इस चुनाव में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है.

    आगे पंचायत चुनाव की परीक्षा बाकी
    अब आगे पंचायत चुनाव भी आ रहे हैं और एक बार फिर परीक्षा के मैदान में उतरना है. आज नतीजों के बाद बीजेपी दफ्तर में आए भजनलाल शर्मा का कॉन्फिडेंस बता रहा है कि वे एक और परीक्षा के लिए तैयार हैं. करीब ढाई साल पहले जब भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने थे तो वे विधायक भी पहली बार ही बने थे. कोई प्रशासनिक और सरकारी अनुभव नहीं था लेकिन इन दी वर्षों में उन्होंने चुपचाप अपना काम किया. नतीजा आज सबके सामने हैं.

  • SIR ड्राफ्ट में VIP वोटर्स के नाम पर EC की सफाई, जनप्रतिनिधियों के लिए क्या है खास प्रावधान?

    SIR ड्राफ्ट में VIP वोटर्स के नाम पर EC की सफाई, जनप्रतिनिधियों के लिए क्या है खास प्रावधान?

    नई दिल्ली
     कैबिनेट मंत्रियों के उनके सामान्य निवास स्थान के बजाय किसी अन्य जगह की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है।

    आयोग ने कहा है कि SIR के ड्राफ्ट रोल में पहले से फ्लैग किए गए जनप्रतिनिधियों और कुछ अन्य वर्गों के नाम शामिल किए गए हैं, ताकि क्लेम-ऑब्जेक्शन की अवधि में जरूरी डॉक्युमेंट्स जुटाए जा सकें।

    चुनाव आयोग ने आरपी एक्ट की धाराओं का दिया हवाला
    चुनाव आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 20(1बी) का भी उल्लेख किया। इसके मुताबिक, कोई सांसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान केवल अपने कर्तव्यों के सिलसिले में निर्वाचन क्षेत्र से एलॉट रहने के कारण उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना बंद नहीं माना जाएगा, जहां चुनाव के वक्त वह वोटर के रूप में रजिस्टर्ड था। वहीं, धारा 20(4) के तहत राष्ट्रपति द्वारा चुनाव आयोग से परामर्श के बाद कुछ पदों को इस प्रावधान के दायरे में घोषित किया गया है।

    कई संवैधानिक और सरकारी पद शामिल
    18 अप्रैल 1960 की अधिसूचना के तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल, कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा और विधानसभा के कुछ पीठासीन पदों के साथ-साथ केंद्र या राज्य के मंत्री, उपमंत्री और संसदीय सचिव जैसे पद इस प्रावधान में शामिल किए गए हैं। इसमें लोकसभा और विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति और उपसभापति भी शामिल हैं।

    ड्राफ्ट रोल में दस्तावेजों की जांच का मौका
    वीआईपी नामों को लेकर आयोग ने कहा कि इन प्रावधानों का मकसद ऐसे पदों पर रहने वाले लोगों के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट रखना है। ड्राफ्ट रोल के दौरान ऐसे नामों पर जरूरी दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है।

  • रायपुर में सब्जी कारोबारियों को हटाने पहुंचा अमला, विरोध के बाद लौटा

    रायपुर में सब्जी कारोबारियों को हटाने पहुंचा अमला, विरोध के बाद लौटा

    रायपुर.

    भाठागांव पानी टंकी के पास रोड किनारे व फुटपाथ पर रोजाना सब्जी बेचने वालों को खदेड़ने गये निगम के दस्ते को विरोध के चलते अपने बुलडोजर के साथ वापस लौटना पड़ गया. यहां नगर निगम द्वारा लगभग 1 करोड़ 29 लाख रुपये की लागत से चबूतरे वाला सब्जी बाजार बनाया गया है.

    इस चबूतरे का आवंटन पूर्व में चिन्हित सब्जी बेचने वालों को लॉटरी सिस्टम से निगम मुख्यालय के बाजार विभाग ने कर दिया. आवंटन करने के बाद आसपास और नदी पार से सब्जी बेचने के लिए आने वाले ग्रामीण जो रोड किनारे पसरा बिछाकर दुकानदारी करते थे, उन्हें खदेड़ने निगम का दस्ता बुलडोजर व पुलिस के साथ पहुंच गया. इसका सब्जी बेचने वालों ने विरोध कर वापस लौटा दिया. पूर्व पार्षद सतनाम सिंग पनाग और छाया पार्षद ब्रम्हा सोनकर ने बताया कि चबूतरा आवंटन में जमकर अनियमितता बरती गई है. कई लोगों के वाजिब नाम को व्हाइटनर लगाकर मिटाने के बाद दूसरों का नाम डाला गया है. यह किसके दबाव में हुआ, यह भाठागांव के नागरिक जानना चाहते हैं.

    सतनाम सिंग पनाग ने बताया कि इस बाजार का निर्माण कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में हुआ था, क्योंकि इस बाजार में स्थानीय के साथ ही गांव के कृषक भी अपनी सब्जी बेचने आते थे. छाया पार्षद सोनकर ने बताया कि बाजार आवंटन में अलग-अलग नंबर दिया गया है. इन नंबरों के हिसाब से किसी को 8 तो किसी के लिए 6 फीट जगह की मार्किंग की गई है. वहीं छाया पार्षद ब्रम्हा ने कहा कि एक ही परिवार के तीन-तीन अथवा चार-चार सदस्यों को स्थान आवंटित कर देने से यहां के वास्तविक सब्जी बेचने वालों को जगह नहीं मिली. साथ ही वार्ड के बाहर के लोगों को भी स्थान दिए जाने की शिकायत सामने आई है. इसके लिए वोटर आईडी और आधार कार्ड के माध्यम से स्थानीय और बाहरी की पहचान निगम प्रशासन पहले करे, फिर चबूतरा व जगह आवंटित करे. इस मामले में पीड़ित सब्जी व्यापारी निगम आयुक्त से 22 सितंबर को सुबह 11 बजे मुलाकात के लिए जाएंगे.