Author: NewseDay

  • 81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण

    81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण

    सेवा की कहानी

    81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण

    पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क अब केवल 500 रुपये, परिवार को मिली 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत

    सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं से बुजुर्गों को मिली सहूलियत, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव

    रायपुर, 
    उम्र के इस पड़ाव में जब कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाना और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकता है, तब सरल और सुविधाजनक पंजीयन व्यवस्था उन्हें बड़ी राहत देती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी निवासी 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर के लिए अपने पुत्र रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराना ऐसा ही अनुभव रहा। पारिवारिक संपत्ति के दानपत्र पर पंजीयन शुल्क केवल 500 रुपये होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को कम समय में सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना और संपत्ति से जुड़े कार्यों में अनावश्यक दौड़भाग को कम करना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह भी जान रहा है कि इन सुविधाओं का उनके जीवन में किस तरह प्रभाव पड़ रहा है।

    मां के लिए कम हुई दौड़भाग, बेटे के नाम आसानी से हुआ संपत्ति हस्तांतरण

    श्रीमती सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में बार-बार कार्यालय जाना परेशानी का कारण बन सकता है। अपने पुत्र के नाम जमीन का दानपत्र कराने के दौरान उन्हें पंजीयन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान लगी। प्रक्रिया सरल होने और शुल्क कम होने से उनके परिवार को आर्थिक राहत के साथ-साथ अनावश्यक दौड़भाग से भी सहूलियत मिली।

    उनके लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण किसी परिवार के लिए केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि संपत्ति और परिवार के भविष्य से जुड़ा निर्णय भी होता है। सरल पंजीयन व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को उनके लिए अधिक सहज बनाया।

    शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर अब केवल 500 रुपये

    राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। इन दस्तावेजों पर पहले संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे घटाकर अब केवल 500 रुपये निर्धारित किया गया है।

    श्रीमती सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क सुधार का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क कम होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई। कम खर्च में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण पूरा होना उनके लिए सीधे तौर पर आर्थिक राहत का कारण बना।

    तकनीक से आसान हो रही पंजीयन के बाद की प्रक्रिया

    पंजीयन विभाग द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ तकनीक आधारित सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की सुविधा बढ़ी है।

    पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है। इस तरह पंजीयन से जुड़ी सेवाओं को एक सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    शुल्क में राहत और सरल व्यवस्था ने बनाया अनुभव आसान

    श्रीमती सोनकुंवर और उनके पुत्र रवि राम पाल ने पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण पर शुल्क में मिली राहत तथा पंजीयन प्रक्रिया में मिली सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

    81 वर्षीय सोनकुंवर की यह कहानी बताती है कि जब शासन की नीति में कम शुल्क और सरल प्रक्रिया दोनों का समावेश होता है, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचता है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई यह कहानी इसी बदलाव की एक झलक है, जहां पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया कम खर्चीली, सुविधाजनक और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अधिक सहज बनी।

  • दिव्यांगजनों को एक ही जगह मिलीं कई सेवाएं, UDID से सहायक उपकरण तक की सुविधा

    दिव्यांगजनों को एक ही जगह मिलीं कई सेवाएं, UDID से सहायक उपकरण तक की सुविधा

    दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में सेवा का संकल्प, शिविरों में मिली सुविधाओं की सौगात

    मूल्यांकन-चिन्हांकन से लेकर UDID, मेडिकल प्रमाण पत्र, पेंशन और सहायक उपकरण तक एक ही स्थान पर मिली सेवाएं

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं, सुविधाएं और शासकीय योजनाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में आयोजित मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा गया।

    दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का आवश्यक मूल्यांकन एवं चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायक उपकरणों से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही विभागीय योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

    इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर अनेक आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला। शिविर में दिव्यांगजनों के तत्काल मेडिकल प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की कार्यवाही की गई। राशन कार्ड और बस पास से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन देने के साथ पेंशन योजनाओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की गई।

    शिविर में 6 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल एवं बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल वितरित किए गए। आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिला। सुविधाएं प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया।

    सेवा की कहानी
     इन शिविरों की खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन संबंधी कार्यवाही और सहायक उपकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। यह पहल दिव्यांगजनों तक योजनाओं की पहुंच आसान बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • फसल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो MSP पर खरीद में दिक्कत, हरियाणा में 27 सितंबर तक मौका

    फसल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो MSP पर खरीद में दिक्कत, हरियाणा में 27 सितंबर तक मौका

    चंडीगढ़
     मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर खरीफ की फसल का पंजीकरण कराने के लिए किसानों को एक बार फिर से मौका दिया गया। सोमवार को पोर्टल खोला गया जो 27 सितंबर तक खुला रहेगा। पहले दिन सोनीपत से 11, फरीदाबाद से 23 नूंह से 13 तथा महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी तथा गुरुग्राम से तीन-तीन किसानों सहित कुल 56 किसानों ने एसडीएम कार्यालय में पंजीकरण के लिए आवेदन दिया है।

    पंजीकरण नहीं कराने वाले किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदने तथा अन्य सुविधा नहीं देने का निर्णय लिया गया है। किसान की ओर से आवेदन एसडीएम संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार तीन दिन के अंदर सत्यापित कर अनुमानित विवरण तैयार कर ई-खरीद किसान पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

    प्रदेश सरकार ने उन किसानों को एक बार फिर से मौका दिया जो 31 जुलाई तक पोर्टल पर फसल का विवरण नहीं दर्ज कर पाए थे। पिछले खरीफ सीजन में पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या के मुकाबले इस सीजन में पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या 1.52 लाख कम है।

  • राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ा जाए

    राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ा जाए

    देहरदून
    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले। इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें। मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। अच्छा कार्य करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य जिलों के साथ साझा किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े तथा शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे, यह सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

    बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया।

    बैठक में समाज कल्याण मंत्री  खजान दास, विधायक मती ममता राकेश, सचिव गृह  शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण  धर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद मती रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक  ए.पी.अशुमन, आईजी  बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण  संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण  संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • ₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क, सीतारमण बोलीं- ग्राहक नहीं देंगे पैसा

    ₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क, सीतारमण बोलीं- ग्राहक नहीं देंगे पैसा

    चंडीगढ़ 
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी आधारित यूपीआई लेनदेन पर लगने वाला व्यापारी छूट दर शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह शुल्क भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच होगा और इसका भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद के सत्र के दौरान भी इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे को लेकर गलतफहमी फैलाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

    सीतारमण के अनुसार, व्यापारी छूट दर कोई कर या उपकर नहीं है और इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने और सेवाओं में सुधार के लिए सेवा प्रदाताओं के बीच लगाया जाने वाला शुल्क है।

    राष्ट्रीय भुगतान निगम ने 15 सितंबर को व्यापारी छूट दर से जुड़ी नई व्यवस्था लागू की। इसके तहत दो हजार रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। हालांकि, ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेगा। प्रत्येक लेनदेन पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है। सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले लेनदेन पर इस व्यवस्था का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। शुल्क का वितरण बैंक और भुगतान अनुप्रयोग उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं समेत भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच किया जाएगा।

    राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर भी साधा निशाना
    वित्त मंत्री ने इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान हुई कथित नकल के मामले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसे लोगों का समर्थन या उन्हें प्रोत्साहित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन किसी का इस तरह मजाक उड़ाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, विपक्ष के नेता को ऐसे व्यवहार को बढ़ावा नहीं देना चाहिए था। 

    पंजाब को धन आवंटन पर आरोपों को किया खारिज
    पंजाब सरकार की ओर से केंद्र से मिलने वाले धन में भेदभाव के आरोपों पर सीतारमण ने कहा कि किसी भी राज्य के साथ उसके अधिकार के धन को लेकर भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि राज्यों को मिलने वाली राशि में कोई अनावश्यक कटौती नहीं की जाती और भुगतान समय पर किया जाता है। वित्त मंत्री ने आम आदमी पार्टी पर अपनी सरकार के कामकाज पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव नजदीक होने के कारण इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं और इन्हें राज्य सरकार की कथित विफलताओं को छिपाने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • श्रीलंका पर 147 रन की जीत के बाद बोलीं हरमनप्रीत, ‘बॉलिंग यूनिट को खास क्रेडिट’

    श्रीलंका पर 147 रन की जीत के बाद बोलीं हरमनप्रीत, ‘बॉलिंग यूनिट को खास क्रेडिट’

    निशिन (जापान)
    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने गोल्ड मेडल जीत लिया है। फाइनल मैच में भारत ने श्रीलंका को 147 रन के अंतर से हराया और एकतरफा जीत के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने गेंदबाजों को श्रेय दिया और कहा कि भारत की गेंदबाजी यूनिट की जमकर तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर दोनों तेज गेंदबाजों का नाम लिया,जिन्होंने पावरप्ले में लगातार गेंदबाजी अच्छी गेंदबाजी की।

    हरमनप्रीत कौर से मैच के बाद जब पूछा गया कि बिना कोई मैच हारे गोल्ड मेडल जीतने पर कैसा लग रहा है तो उन्होंने कहा कि यह एक शानदार एहसास है। टूर्नामेंट से पहले, हमने बिना कोई मैच हारे खिताब जीतने के बारे में बहुत बात की थी, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि हमने अपने लिए जो ऊंचे स्टैंडर्ड तय किए थे, उन्हीं पर खेलते रहना है।

    हर खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया
    कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा, 'यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि हर कोई हर गेम को इतनी पॉजिटिव सोच के साथ ले रहा है। हर एक खिलाड़ी जिसे मौका मिला, उसने आगे बढ़कर अच्छा प्रदर्शन किया। एक कैप्टन और एक टीम के तौर पर, हम ठीक यही चाहते थे। अजेय रहना और लगातार इस क्वालिटी का परफॉर्मेंस देना। यही हमने खुद से उम्मीद की थी और यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि हर कोई इस विजन को कॉन्फिडेंस के साथ पूरा कर रहा है।'

    गेंदबाजों को दिया जीत का श्रेय
    टीम में युवा और अनुभव के मेल पर हरमनप्रीत कौर ने कहा, 'हमारी बॉलिंग यूनिट को खास क्रेडिट मिलना चाहिए, क्योंकि हमने इसमें बहुत मेहनत की है। क्रांति और नंदिनी जैसे युवा बॉलर्स ने बड़ी जिम्मेदारियां लीं और जिस तरह से उन्होंने रिस्पॉन्ड किया, खासकर पावर-प्ले में उनका स्पेल शानदार था। यह कुछ ऐसा था जिस पर हमारे बॉलिंग कोच और स्टाफ उनके साथ बहुत करीब से काम कर रहे थे। यंगस्टर्स के अलावा, हमारा स्पिन अटैक हमारी कोर स्ट्रेंथ है। श्रेयंका और दीप्ति जैसे बॉलर लगातार मैच-विनर हैं और हमेशा सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में से हैं। कुल मिलाकर, एक्सपीरियंस और फ्रेश टैलेंट के बीच बैलेंस एकदम सही था, और जब जरूरत थी तो सभी ने अच्छा परफॉर्म किया।'

  • एशियन गेम्स में महिला बैडमिंटन का मेडल सूखा बरकरार, जापान से हारी भारतीय टीम

    एशियन गेम्स में महिला बैडमिंटन का मेडल सूखा बरकरार, जापान से हारी भारतीय टीम

    नई दिल्ली
     एशियन गेम्स-2026 में मंगलवाल को भारत को एक बड़ी निराश हाथ लगी है। पीवी सिंधू जैसी स्टार खिलाड़ी से सज्जित भारतीय महिला बैडमिंटन टीम को जापान के हाथों हार का सामना करना पड़ा। जापान ने भारत को 3-1 से मात दी। इसी के साथ भारत का सफर इन खेलों में निराशाजनक रूप से खत्म हो गया।

    इस हार के साथ ही भारत का एशियाई खेलों में महिला बैडमिंटन टीम इवेंट में मेडल का सूखा जारी है। भारत ने आखिरी बार साल 2014 में इस इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टीम ये सूखा खत्म करेगी,लेकिन ऐसा नहीं हो सका और जापान ने जबरदस्त घरेलू दर्शकों के समर्थन से भारत को बुरी तरह हरा दिया।

    सिंधू ने किया निराश
    पूरे देश को सिंधू से बहुत उम्मीदें थीं। उनका मुकाबला तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और पुरानी प्रतिद्वंद्वी अकाने यामागुची से था जो पिछले महीने वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंची थीं। इस साल चार मुकाबलों में से दो बार वर्ल्ड नंबर-3 खिलाड़ी को हराने के बाद सिंधू पूरे आत्मविश्वास में दिखीं और अच्छी शुरुआत करते हुए पहला गेम 23-21 से जीता, लेकिन फिर जापानी खिलाड़ी ने वापसी की और दूसरा गेम 21-18 से जीतकर मैच को निर्णायक गेम में पहुंचा दिया। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट सिंधू निर्णायक गेम 11-21 से हार गईं। यामागुची की इस जीत से जापान ने 1-0 की बढ़त बना ली।

    इसके बाद, 20 साल की टोमोका मियाजाकी ने उन्नति हुड्डा को आसानी से 21-16, 21-18 से हरा दिया। इस जीत ने जापान को 2-0 से आगे कर दिया।

    जॉली और गोपीचंद ने जगाई उम्मीद
    हालांकि, त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी अगर मैच हार जाती तो भारत की हार यहीं तय हो जाती। इस जोड़ी ने भारत को एक उम्मीद थी। पिछले महीने चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद पूरे आत्मविश्वास से भरी भारतीय जोड़ी ने वर्ल्ड नंबर-3 युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो को हरा दिया। भारतीय जोड़ी ने ये मैच 21-17, 21-16 से अपने नाम किया।

    इस जीत ने भारत की वापसी की उम्मीद जगाई जो अगले ही मैच में खत्म हो गई। अगले मैच में युवा तन्वी शर्मा का सामना पूर्व वर्ल्ड चैंपियन नोजोमी ओकुहारा से था। ओकुहारा ने 18 मिनट में 21-12, 21-10 से जीत दर्ज की और जापान को 3-1 से जीत दिलाने में मदद की।

  • जगदलपुर पहुंचे DGP अरुण देव गौतम, बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था का लेंगे जायजा

    जगदलपुर पहुंचे DGP अरुण देव गौतम, बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था का लेंगे जायजा

    जगदलपुर.

    जगदलपुर.
    नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद अब बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के अगले चरण पर पुलिस का फोकस है. इसी सिलसिले में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे. उन्होंने बस्तर संभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में नक्सल मुक्त हुए इलाकों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई.

    मैदानी अधिकारियों से अभियान और जमीनी हालात को लेकर फीडबैक लिया गया. अब चुनौती नक्सल गतिविधियों की वापसी रोकने के साथ सामान्य व्यवस्था को मजबूत करना है. बैठक में आगामी सुरक्षा रणनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया. साथ ही सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पुलिस की आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया गया. डीजीपी का यह दौरा नक्सल उन्मूलन के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

    गांवों तक पहुंचे पुलिस, विकास कार्यों पर भी नजर
    डीजीपी ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को अंदरूनी इलाकों और गांवों में नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, जवान क्षेत्र में जाकर स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझें और वहां चल रहे विकास कार्यों का भी अवलोकन करें। शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनता का विश्वास जीतने को पुलिसिंग की प्राथमिकता बताया।

    सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति का पूरा लाभ
    बैठक में नक्सल पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। डीजीपी ने पात्र पुनर्वासितों को नीति के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम लाभ दिलाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए।

    तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शिता पर जोर
    सभी जिलों में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

    ये अफसर भी रहे मौजूद
    बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, आईजी बस्तर बीएन मीणा, आईजी सीआरपीएफ कबीब के, आईजी बीएसएफ संजय पंत, केंद्रीय सुरक्षा बलों के डीआईजी, बस्तर, कोंडागांव और सुकमा के एसपी समेत अन्य राजपत्रित अधिकारी मौजूद रहे।

  • जमुई कांड में पुलिस की कार्रवाई, मुख्य आरोपी नंदन यादव घायल; दूसरे का पैर टूटा

    जमुई कांड में पुलिस की कार्रवाई, मुख्य आरोपी नंदन यादव घायल; दूसरे का पैर टूटा

    जमुई
     छात्रा के साथ छेड़खानी और शर्मनाक हरकत के आरोपी का पुलिस ने एनकाउंटर किया है। ये एनकाउंटर जमुई जिले में ही हुआ, जहां छेड़खानी के मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गोली मार दी है। आरोपी नंदन के पैर में गोली लगी है।

    जमुई में छात्रा से शर्मनाक हरकत करने वाले का एनकाउंटर
    बताया जा रहा है कि छात्रा से छेड़खानी करने वालों में सबसे आगे नंदन यादव ही था। उसी ने छात्रा के साथ बेहद ही शर्मनाक हरकत की थी। इसके बाद से ही पुलिस उस पर FIR दर्ज कर उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें से 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी के बाद पुलिस नंदन यादव की तलाश में थी। इसी बीच पुलिस को उसके जमुई में ही छिपे होने की खबर मिली।

    मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने मारी गोली
    नंदन यादव ही इस केस में मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस जानकारी जुटाते हुए उसके ठिकाने मड़वा पहाड़ी पर पहुंच गई। वहां पुलिस ने नंदन को चारों तरफ से घेर लिया और उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी। पुलिस का कहना है कि नंदन ने इस दौरान भागने पर कोशिश की तो पुलिस ने उसे रोकने के लिए गोली चलाई। ये गोली नंदन यादव के पैर में लगी। इसके बाद वो वहीं गिर गया। फिर पुलिस ने उसे दबोच लिया और इलाज के लिए अस्पताल ले आई। वहीं दूसरा आरोपी हरेराम फरार बताया जा रहा है।

    इसी मड़वा पहाड़ी के पास हुई थी छेड़खानी
    आपको बता दें कि 19 सितंबर की शाम इसी मड़वा पहाड़ी के पास, जहां नंदन यादव को पुलिस ने पैर में गोली मारी, जमुई की छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी। मुंह पर गमछा बांधे और छात्रा को उठाकर जंगल की तरफ ले जाने की कोशिश करने वाला आरोपी ही नंदन यादव बताया जा रहा है। जमुई जिले की पुलिस ने उसे उसी इलाके में गोली मारी, जहां उसने छात्रा के साथ छेड़खानी और शर्मनाक हरकत की थी।

    वीडियो हुआ था वायरल
    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले को लेकर हड़कंप मच गया था. वीडियो में कुछ युवक स्कूली छात्र और छात्रा के साथ अभद्रता और छात्रा के साथ बैड टच करते नजर आ रहे थे. वीडियो देशभर में वायरल होने के बाद प्रशासन भी एक्टिव मोड में आ गया था. मामले में सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई थी और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. महिला आयोग ने भी मामले पर संज्ञान लिया था। 

    सोशल मीडिया पर वायरल करने वाला अरेस्ट
    इससे पहले घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।आरोपी की पहचान रामाशीष चौधरी के रूप में हुई है। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर यह कार्रवाई की है।

    19 सितंबर को हुई थी बदसलूकी
    घटना 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे की है। दोनों पीड़ित बच्चे 10वीं क्लास में पढ़ते हैं। शनिवार को ट्यूशन के बाद दोनों जमुई स्थित मड़वा पहाड़ी घूमने गए थे। लौटते समय कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया और इसके बाद ये घटना हुई।

    बिहार के जमुई में छात्रा के साथ बीच सड़क पर छेड़खानी और अश्लील हरकतें की गई। उसके दोस्त के साथ आरोपियों ने गाली-गलौज और मारपीट की। इतना ही नहीं, छात्रा के साथ हुई आपत्तिजनक हरकत का वीडियो बनाया, और इसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया।

    प्राइवेट पार्ट को किया था टच
    मड़वा पहाड़ी घूमने गए दोनों स्टूटेंड्स के साथ करीब 1 घंटे तक अभद्रता की गई। इस दौरान दोनों ने भागने के लिए कई बार संघर्ष किया। इस दौरान नंदन यादव छात्रा का पीछा करता है और उसे पीछे से पकड़ लेता है।

    वीडियो में आरोपी छात्रा के साथ जबरदस्ती करता दिखाई देता है। पहले आरोपी ने छात्रा को पीछे से पकड़ा, इसके बाद वो उसके प्राइवेट पार्ट पर हाथ रखते हुए गोद में उठा लेता है।

    ये हरकत देखकर छात्र तुरंत अपनी दोस्त को बचाने के लिए वहां पहुंचता है और उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश करता है। दोनों के बीच खींचतान होती है। छात्र किसी तरह अपनी दोस्त को छुड़ा लेता है।

    इसके बाद भी आरोपी दोनों को परेशान करने और रोकने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। दोनों बच्चे लगातार वहां से निकलने की कोशिश करते रहते हैं।

  • यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    नई दिल्ली

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों सहित 12 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होंगे। वहीं वोटों की गिनती भी 16 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी और देर शाम तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। सबसे अहम बात यह है कि 12 में से 10 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं।

    वहीं एक सीट उत्तराखंड की है। यहां से भाजपा के श्री नरेश बंसल रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव होगा।

    गौरतलब है कि आगामी 25 नवंबर को राज्यसभा के कुल 11 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा के कुल 8 सांसद हैं। वहीं एक बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। भाजपा के नरेश बंसल, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं, सपा से राम गोपाल यादव और बसपा के एकमात्र सांसद रामजी भी रिटायर हो रहे हैं।

    चुनाव का पूरा शेड्यूल
    चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी।

    विधान परिषद चुनाव का भी ऐलान
    इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है।

    UP में NDA खेमे के पास करीब 292 विधायक
    यूपी में एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक हैं. इस लिहाज से बीजेपी गठबंधन आसानी से 7 से 8 सीटें जीत सकता है. वहीं, सपा के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सपा 2 सीटें बेहद आसानी से अपने पाले में कर लेगी. वहीं, उत्तराखंड से खाली हो रही सीट पर सत्ताधारी दल का मजबूत दबदबा है. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए यह सीट भी भाजपा के पाले में जाएगी। 

    बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा?
    पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल अप्रैल में वह राज्य सभा के लिए चुनी गईं थीं. अब यहां उपचुनाव हो रहा है। 

    चुनाव का टाइम टेबल
    राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा और नॉमिनेशन 6 अक्टूबर को बंद होंगे। नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। वोटिंग 16 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी।

    कौन-कौन हो रहा रिटायर?
    उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरजा शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ दिनेश शर्मा शामिल हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड से एकमात्र सेवानिवृत्त सदस्य हैं।

    आयोग ने निर्देश दिया है कि मतपत्रों पर प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले से तय विनिर्देशों वाले एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाए।