Author: NewseDay

  • घर पर बनाएं शुद्ध आंवला तेल, गिरते बाल और डैंड्रफ से मिलेगा छुटकारा

    घर पर बनाएं शुद्ध आंवला तेल, गिरते बाल और डैंड्रफ से मिलेगा छुटकारा

    अगर आप भी गिरते बालों, डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होते बालों से परेशान हैं और बाजार के मिलावटी तेल को खरीद-खरीदरकर थक गए हैं तो अब उन्हें बाय कह दीजिए.आप घर पर ही नारियल तेल और ताजे आंवले की मदद से 100% शुद्ध और केमिकल-फ्री आंवला तेल बना सकते हैं.

    आजकल बाजार में मिलने वाले महंगे हेयर ऑयल्स में मिनरल ऑयल, सल्फेट्स और केमिकल्स की भरमार होती है जो बालों को पोषण देने के बजाय और नुकसान पहुंचाते हैं. आंवला में मौजूद विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं, जिससे बाल लंबे, घने, काले और चमकदार होते हैं. आइए जानते हैं इसे घर पर बनाने का बेहद आसान तरीका.

    सामग्री:
    ताजे आंवले – 5 से 6 (कद्दूकस किए या कटे हुए)

    शुद्ध नारियल तेल  – 1 कप

    मेथी दाना – 1 बड़ा चम्मच (बालों को मजबूती देने के लिए)

    करी पत्ते  – 10-12 (ऑप्शनल, बालों को काला और चमकदार बनाने के लिए)

    बनाने की विधि:
    ताजे आंवलों को धोकर अच्छे से सुखा लें. इसके बाद इनके बीज निकालकर आंवलों को कद्दूकस कर लें या मिक्सी में बिना पानी डाले दरदरा पीस लें.

    एक लोहे की कढ़ाई या भारी तले के बर्तन में नारियल तेल डालें और धीमी आंच पर गरम होने दें. (लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल करने से तेल में आयरन के गुण भी आ जाते हैं).

    अब गरम तेल में कद्दूकस किया हुआ आंवला, मेथी दाना और करी पत्ते डालें.

    गैस की आंच एकदम धीमी रखें और मिश्रण को 15 से 20 मिनट तक पकने दें. जब आंवले का रंग हल्का भूरा/काला होने लगे और तेल का रंग बदल जाए, तो गैस बंद कर दें.

    तेल को रातभर या 6-8 घंटे के लिए कढ़ाई में ही रहने दें ताकि आंवले और लोहे के सारे पोषण तेल में आ जाएं.

    अब एक पतले सूती कपड़े या बारीक छलनी की मदद से तेल को अच्छे से निचोड़कर छान लें. इस शुद्ध आंवला तेल को कांच की साफ और सूखी बोतल में भरकर रख लें.

  • एक गलती से छूटा गोल्ड, भारतीय शूटर्स ने जीता ब्रॉन्ज; चीन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    एक गलती से छूटा गोल्ड, भारतीय शूटर्स ने जीता ब्रॉन्ज; चीन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    नागोया
     एशियन गेम्स 2026 में भारतीय शूटर्स का जलवा बरकरार है। गुरुवार को भी भारतीय शूटिंग टीम ने मिक्स्ड इवेंट में पदक अपने नाम किया। अनंतजीत सिंह और परिनाज धालीवाल की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस जोड़ी ने फाइनल इवेंट में कमाल का प्रदर्शन किया। इस इवेंट में सभी खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर रही। एक समय भारतीय जोड़ी और गोल्ड जीतने वाली चीनी जोड़ी के बीच अंतर न के बराबर था। हालांकि, पुरानी गलती के कारण भारतीय टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

    भारतीय जोड़ी ने 44 का स्कोर बनाया। वहीं, दक्षिण कोरिया की टीम ने 51 का स्कोर बनाकर सिल्वर मेडल जीता। चीनी टीम ने 52 का स्कोर हासिल कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल जीता। अंत में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन शुरुआती गलती के कारण उन्हें ब्रान्ज से संतोष करना पड़ा।

    क्या थी भारतीय टीम की गलती?
    भारतीय जोड़ी ने इस मैच में बेहद साधारण शुरुआत की थी। इसी का नुकसान उन्हें आगे चलकर उठाना पड़ा। पहली सीरीज में भारत ने 7 का स्कोर हासिल किया था। वहीं, चीन और कोरिया का स्कोर 8 था। यहीं पिछड़ने के कारण भारत कभी वापसी नहीं कर सका। छठी सीरीज में जाकर भारत ने दक्षिण कोरिया की बराबरी कर ली थी। दोनों का स्कोर 44 था, लेकिन टाई ब्रेकर में भारतीय टीम हार गई और भारत को 7वीं सीरीज शूट करने का मौका नहीं मिला। वहीं, चीन और जापान के बीच सातवें राउंड के बाद विजेता का फैसला हुआ। अगर भारत ने शुरुआत में अच्छा खेल दिखाया होता तो गोल्ड मेडल जीत सकता था

    फाइनल इवेंट तीनों टीमों का स्कोर
    चीन     कोरिया     भारत
    8             8          7
    16          14        14
    23           22        21
    30           30        29
    38          38        36
    45           44        44 (टाई ब्रेकर में बाहर)
    52           51    

  • X का नया ‘X Number’ फीचर, बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

    X का नया ‘X Number’ फीचर, बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

    एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर एक ऐसा फीचर आया है, जिसके बाद किसी से बात करने के लिए आपको अपना फोन नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इतना ही नहीं, बिना एक-दूसरे को फॉलो किए भी चैट और कॉल कर सकेंगे. यानी नंबर भी प्राइवेट रहेगा और बातचीत भी हो जाएगी. आखिर कैसे काम करता है X का ये नया फीचर? आइए जानते हैं.

    जानिए क्या है ये नया X Number
    कई बार ऐसा होता है कि आप किसी से बात करना चाहते हैं, लेकिन प्राइवेसी की वजह से अपना फोन नंबर शेयर नहीं करना चाहते. कई बार आप सामने वाले को फॉलो भी नहीं करना चाहते. ऐसे में X का ये नया फीचर आपके काम आ सकता है.

    X नंबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का नया फीचर है, जिसकी मदद से लोग एक-दूसरे से बात कर सकते हैं. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर आप किसी से चैट या कॉल पर बात करना चाहते हैं, तो आसानी से कर सकते हैं.

    X Number आपको एक प्राइवेट कोड बनाने का ऑप्शन देता है. इस कोड को आप उस व्यक्ति के साथ शेयर कर सकते हैं, जिससे आप बात करना चाहते हैं. कोड शेयर करने के बाद आप X पर चैट या कॉल के जरिए बात कर सकते हैं.

    जानिए X Number कैसे करता है काम
    इस फीचर की मदद से आप एक कोड बना सकते हैं और जिसे आपसे बात करनी है, उसके साथ शेयर कर सकते हैं. कोड शेयर करने के बाद आप X पर एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं. इसके लिए दोनों लोगों का एक-दूसरे को फॉलो करना जरूरी नहीं है.

    ये फीचर सिर्फ चैट तक ही सीमित नहीं है. अगर आप किसी से कॉल या वीडियो कॉल पर बात करना चाहते हैं, तो वो भी कर सकते हैं. हालांकि, कॉल और वीडियो कॉल का ऑप्शन आपकी X की प्राइवेसी सेटिंग्स पर भी डिपेंड करता है.

    कोड बदलते ही चैट करने वाला हो जाएगा ब्लॉक!
    अगर आप अपने X नंबर को रिफ्रेश करके नया कोड बनाते हैं, तो पुराना कोड काम करना बंद कर देता है. यानी पुराने कोड से कोई भी व्यक्ति आपसे दोबारा संपर्क नहीं कर पाएगा. इस तरह आप अपनी प्राइवेसी को अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकते हैं.

    सबसे जरूरी बात ये है कि X नंबर कोई फोन नंबर नहीं है. ये एक प्राइवेट कोड है, जिसकी मदद से आप X पर किसी से चैट या कॉल कर सकते हैं. इसी को X Number कहा जाता है.

  • जंगल में अतिक्रमण की जांच करने गई टीम का ग्रामीणों से विवाद, हुई झूमाझटकी

    जंगल में अतिक्रमण की जांच करने गई टीम का ग्रामीणों से विवाद, हुई झूमाझटकी

    गरियाबंद.

    करका के जंगल में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की जांच करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।

    विभाग के अनुसार करीब 50 से 60 ग्रामीणों ने टीम को सरकारी कार्रवाई से रोकने की कोशिश की, जिसके चलते मौके पर विवाद, धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति बन गई। हालांकि गनीमत रही कि घटनाक्रम में किसी वन अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है और मामला किसी बड़ी घटना में तब्दील नहीं हुआ।

    जंगल का निरीक्षण करने पहुंची टीम, मौके पर गरमाया माहौल
    वन विभाग की टीम करका क्षेत्र में कथित अतिक्रमित वनभूमि का निरीक्षण और कार्रवाई के लिए पहुंची थी। विभाग के अनुसार टीम जब कथित अतिक्रमित क्षेत्र की ओर आगे बढ़ी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और शासकीय कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने की कोशिश की गई। विभाग का आरोप है कि इस दौरान ग्रामीण मुकेश मरकाम को मौके से ले जाया गया। मुकेश की ओर से पूरी घटना की वीडियोग्राफी किए जाने की बात भी विभाग ने कही है। मामले में वीडियो साक्ष्य के साथ थाना खल्लारी में FIR के लिए आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जंगल की जमीन पर कब्जे का आरोप
    करका की मौजूदा कार्रवाई को समझने के लिए इसका पुराना इतिहास भी महत्वपूर्ण है। करका कभी एक वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में तत्कालीन सीतानदी अभयारण्य के अंतर्गत आता था। सोंढूर बांध के निर्माण के बाद वर्ष 1980 के दशक में करका गांव का विस्थापन किया गया था। उपलब्ध विभागीय अभिलेखों के अनुसार करका के 55 व्यक्तियों को जल संसाधन विभाग द्वारा मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद वन विभाग के अनुसार बाद में इसी क्षेत्र की ऊंचाई पर स्थित वनभूमि पर फिर अतिक्रमण और वन कटाई की गतिविधियां सामने आईं। यानी गांव को हटाने और मुआवजा देने के दशकों बाद भी जंगल की जमीन को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ।

    30 हजार पेड़ों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान
    22 सितंबर 2026 को किए गए मैदानी निरीक्षण में वन विभाग को 1,100 से ज्यादा पेड़ों पर गर्डलिंग और बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ मिले। विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार वर्ष 2016 से 2017 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे काटे जाने के संकेत मिले हैं। GPS आधारित आकलन में लगभग 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि विभाग के अनुसार अंतिम क्षेत्रफल का निर्धारण DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद किया जाएगा।

    22 हेक्टेयर से शुरू हुआ मामला, अब 35 हेक्टेयर तक जांच
    वर्ष 2016 में भी करका से जुड़े 22 व्यक्तियों के खिलाफ करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर POR दर्ज किया गया था। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में नगरी न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था। अब वन विभाग सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज, GPS/DGPS मैपिंग और मैदानी साक्ष्यों के आधार पर क्षेत्र की स्थिति का दोबारा आकलन कर रहा है।

    जंगल बचाने की कार्रवाई या फिर पुराना विवाद?
    करका का मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र वन्यजीवों और हाथियों के आवागमन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग के अनुसार जंगल का लगातार क्षरण होने से वन्यजीवों के आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बढ़ सकती है। USTR का दावा है कि पिछले चार वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराई गई है। अब करका में कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद इस पुराने अतिक्रमण मामले को फिर चर्चा में ले आया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि जंगल में कितने पेड़ कटे और कितनी जमीन पर कब्जा हुआ सवाल यह भी है कि जिस करका को दशकों पहले बांध के लिए मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था, उसकी वनभूमि पर दोबारा कब्जे की कहानी आखिर इतनी लंबी कैसे हो गई?

  • सागर शराब कांड: पुलिस मुठभेड़ में इनामी आरोपी गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

    सागर शराब कांड: पुलिस मुठभेड़ में इनामी आरोपी गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

     सागर
     जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपितों में से एक मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर को  तड़के एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। मुठभेड़ में पुलिस की गोली मनीष के पैर में लगी। पुलिस के मुताबिक यह मुठभेड़ मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया-सेसई रोड घाटी पर हुई। इसमें उसका साथी आशीष साहू भी घायल हुआ है। मनीष की गिरफ्तारी पर पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

    मुखबिर की सूचना पर पुलिस की घेराबंदी
    पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि मनीष लोधी और आशीष साहू बाइक से मड़ावरा-नोनिया क्षेत्र की ओर आ रहे हैं। सूचना पर थाना बंडा और विनायका पुलिस की टीमों ने घेराबंदी की। बुधवार सुबह करीब तीन बजे दोनों आरोपित बाइक से आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने को कहा तो आरोपितों की ओर से पुलिस टीम पर फायर किया गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली आरोपित मनीष लोधी के पैर में लगी। उसका साथी आशीष साहू भागते समय गिरने से चोटिल हो गया।

    कट्टा-कारतूस-चाकू जब्त
    पुलिस टीम ने मनीष के पास से 12 बोर का देसी कट्टा और आशीष के पास से 15 बोर का कट्टा, एक जिंदा कारतूस, आठ खाली कारतूस, चाकू, बेसबाल का डंडा बरामद किया है। उनकी बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। पुलिस ने दोनों को घायल हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है।

    जहरीली शराब से हुईं 40 से ज्यादा मौतें
    बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक 41 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है। प्रशासन ने 20 मौतों की बात स्वीकार की है। पुलिस ने इस मामले में कुल 52 आरोपितों को चिह्नित किया है। इनमें से अब तक 39 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें शराब बनाने वाले और गांव में अवैध शराब बेचने वाले दो आरोपितों की मौत भी जहरीली शराब पीने के कारण हो चुकी है।

    जहरीली शराब कांड के सूत्रधारों में से एक
    पुलिस ने बताया कि मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर शराब ठेकेदार था। जहरीली शराब बनाने और बेचने के धंधे के मुख्य सूत्रधारों में उसकी भूमिका थी। मनीष ने ही अपने नेटवर्क के जरिए नकली शराब को सरकारी ठेकों और गांव-गांव की दुकानों तक पहुंचाया था। आशीष साहू इसमें उसका सहयोगी था।

    मनीष पर पहले से 11 मामले
    पुलिस के अनुसार मनीष लोधी के खिलाफ कुल 11 अपराध दर्ज हैं। वर्ष 2010 में उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम का पहला मामला दर्ज हुआ था। वर्ष 2012 में भी वह शराब तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। उसके खिलाफ छह आबकारी प्रकरण दर्ज हैं। वहीं आशीष साहू के खिलाफ तीन आबकारी अपराध दर्ज होना सामने आया है।

     

  • MP में अनुकंपा नियुक्ति की रफ्तार तेज, 600 परिवारों को मिले जॉइनिंग लेटर

    MP में अनुकंपा नियुक्ति की रफ्तार तेज, 600 परिवारों को मिले जॉइनिंग लेटर

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों पर स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है. लंबे समय से लंबित 859 अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में त्वरित निस्तारण करते हुए शिक्षा विभाग ने दो दिनों में 600 अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश जारी किए हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा "बाकी बचे 30 आदेश भी अगले दो दिन के भीतर जारी कर दिए जाएंगे. नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद अभ्यर्थियों को जल्द जॉइनिंग लेने के निर्देश दिए गए हैं। 

    859 में से 600 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी
    स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से अटके पड़े अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में आदेश जारी करने में तेजी दिखाई गई है. स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, "संवेदनशीलता से समाधान, परिवारों को आर्थिक संबल. मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के त्वरित निराकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशील पहल एवं अपेक्षा के अनुरूप लगभग 859 लंबित प्रकरणों में से 600 अनुकंपा नियुक्ति आदेश विगत दो दिवस में जारी किए जा चुके हैं। 

    अगले दो दिन में जारी हो जाएंगे 30 और आदेश
    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर आगे लिखा, "लगभग 30 और आगामी दो दोनों में जारी किए जाएंगे. शेष प्रकरणों में भी पूरी संवेदनशीलता के साथ आवश्यक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. हमारा प्रयास है कि दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को समय पर आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल सके। 

    स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से 859 अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण लंबित थे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों की बैठक बुलाई. इससे पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग सक्रिय हुए और बीत दो दिन में 600 अनुकंपा नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए. इसके लिए मंगलवार शाम से देर रात तक दस्तावेजों की जांच और नियुक्ति आदेश जारी करने का काम जारी था। 

  • नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

    नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

    नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बस्तर की नारंगी बहुउद्देशीय बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 99 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। सर्वेक्षण कार्य कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

  • Bhopal Master Plan 2047: 24 मीटर सड़क पर ही मिक्स्ड लैंड यूज, दुकानों के नियम बदलेंगे

    Bhopal Master Plan 2047: 24 मीटर सड़क पर ही मिक्स्ड लैंड यूज, दुकानों के नियम बदलेंगे

    भोपाल 
    भोपाल में रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों और सीलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब 3 घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीलिंग में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कहा- रहवासी इलाकों में कारोबार नहीं होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रहवासी उपयोग वाली जगहों पर सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी।

    कोर्ट ने कहा- जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या जहां मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। भोपाल में कई जगह निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।

    इसी सुनवाई में 21 साल से अटके भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट को जारी करने की मंजूरी भी मिल गई। सरकार फाइनल प्रकाशन से पहले कोर्ट को इसकी जानकारी देगी। नए मास्टर प्लान के लागू होने तक सीलिंग की कार्रवाई नहीं रुकेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

    10 शिकायतें पहुंचीं, शाम को खुल रहे थे सील दुकानें
    सुनवाई से पहले भोपाल के रहवासियों की करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी एके सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं। शिकायतों में कहा गया कि नगर निगम ने अगस्त में जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई सुबह बंद रहते हैं, लेकिन शाम होते ही दोबारा खुल जाते हैं।

    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि कागजों पर कार्रवाई के बावजूद जमीन पर उसका असर कई जगह दिखाई नहीं दे रहा है।

    अब नई कमेटी नहीं बनेगी
    सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से इस संबंध में बात हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। सीलिंग की कार्रवाई में रुकावट नहीं डाली जाएगी।

    दरअसल, पहले राज्य सरकार ने सीलिंग से जुड़े मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में कमेटी बनाने को लेकर अवमानना का मुद्दा भी उठा।

    एमिकस क्यूरी एके सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि सरकार की ओर से कमेटी बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के दायरे में आता है। सरकार के आश्वासन के बाद कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। हालांकि, अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह लिखित आदेश से स्पष्ट होगा।

    1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया
    सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया। 2005 में लागू किया गया मास्टर प्लान भी अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकार ने बताया कि नए मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार है। इसी ड्रॉफ्ट को जारी करने की अनुमति सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी।

    8,084 प्रतिष्ठानों को मिले थे नोटिस
    सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई शुरू की थी। निगम ने शहरभर में नोटिस बांटे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की प्रक्रिया चली।

    नगर निगम की सूची में कुल 62,500 दुकानें दर्ज थे। इनमें से 8,084 दुकानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया था।

    व्यापारियों के विरोध के बाद 22 दिन से रुकी थी कार्रवाई
    नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। मंगलवार की सुनवाई से पहले करीब 22 दिन से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि निगम ने गलत कार्रवाई दिखाने वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए और जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे बाद में दोबारा खुल गए।

    अगस्त में 10 सदस्यीय कमेटी पर लगी थी रोक
    इस मामले में अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए सभी राहत और स्टे आदेश भी रद्द कर दिए थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई पहले 15 सितंबर को होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में करीब तीन घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई।

    नियम तोड़ने पर एक्शन
    नगर निगम की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ढोल ग्यारस को देखते हुए जोन क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान दो स्थानों पर मांस की दुकानें संचालित मिलीं। नगर निगम द्वारा त्योहार के अवसर पर निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद दुकानें खुली मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई की। प्रतिबंधित अवधि में दुकान खोलने पर होगी कार्रवाई
    नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन कराना निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान यदि प्रतिबंधित अवधि में मांस की दुकानें खुली मिलती हैं तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    जोन क्रमांक 11 के स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मांस विक्रेताओं के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में निरीक्षण जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। 

    अब तक ऐसे रहे मास्टर प्लान के ड्राफ्ट

        अगस्त 2009 में ड्राफ्ट-2021 जारी हुआ। 2008 से तैयारी शुरू हुई। 813.92 वर्ग किमी क्षेत्रफल व 196 गांवों को शामिल किया था। बड़ा तालाब कैचमेंट- एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के नियमों व सर्वे में गलतियों से विरोध हुआ। यह अधिसूचित नहीं हो सका। इसे ही नए सिरे से बनाने के लिए 2011 में कमेटी बनाई। बैठकें हुईं, पर 2012 में इसे रद्द कर दिया गया।

        मार्च 2020 में ड्राफ्ट 2031 जारी हुआ। 1016.90 वर्ग किमी क्षेत्रफल प्लानिंग एरिया किया। कोरोना के कारण इस पर सुझाव आपत्ति की समय सीमा बढ़ाई। धारा 19-2 तक कार्रवाई पहुंची। अंतिम नोटिफिकेशन के लिए ड्राफ्ट तैयार था, लेकिन फरवरी 2024 में यह भी रद्द हो गया।

    रहवासियों की शिकायत- शोर, भीड़ और सुरक्षा का मुद्दा
    रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की मुख्य शिकायत शोर और भीड़ को लेकर है। उनका कहना है कि घरों के आसपास लगातार व्यावसायिक गतिविधियां होने से सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है।

    रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐसे इलाकों में भीड़ और आवाजाही बढ़ने से सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी ट्रैफिक और दुर्घटना का खतरा रहता है। इसी वजह से रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करानेकी मांग की जा रही है।

     

    सुप्रीम निर्देश… ड्राफ्ट में ये होंगे बदलाव

    -रह ड्राफ्ट में मिक्स्ड लैंड यूज के जो प्रावधान थे, नए में उन्हें ही लिया जाएगा। 24 मीटर चौड़ी रोड पर ही मिक्स्ड लैंडयूज रहेगा। शहर के नए हिस्से में गलियों में दुकानें अवैध रहेंगी।
    -10 नंबर, त्रिलंगा, कोलार का कटियार मार्केट, अवधपुरी के बाजार, इंद्रपुरी के बाजार, अशोका गार्डन 80 फीट रोड से लगी गलियों के बाजार क्षेत्र नियमित नहीं होंगे।

    -पार्किंग का स्पष्ट प्रावधान। अरेरा कॉलोनी समेत अन्य क्षेत्रों में छोटे प्लॉट पर बने नर्सिंग होम, अस्पताल से लेकर शॉपिंग सेंटर्स पर असर पड़ेगा। पार्किंग के लिए अपनी जमीन पर जगह देनी होगी या 500 मीटर के दायरे में व्यवस्था करनी होगी।

    -बेसमेंट में पार्किंग की जगह अन्य उपयोग को अवैध ।

    -हाउसिंग बोर्ड, बीडीए, निगम की 35000 संपत्तियां लीज होल्ड हैं। इनमें व्यावसायिक गतिविधि अमान्य होंगी।

    -लेआउट अप्रूव्ड 2433 कॉलोनी में 5% तक कमर्शियल एक्टिविटी। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगेगी।

    -पुराने शहर के चौक समेत अन्य पुराने बाजारों में दिल्ली की तरह 9 मीटर चौड़ी रोड पर ही कारोबार।
    -33% एरिया ग्रीन रहेगा।

    जनहित में मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने का निर्देश दिया है। सुनियोजित शहर और जनता के हित को ध्यान में रखकर बनाए ड्राफ्ट को जल्द जारी किया जाएगा।- कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, आयुक्त सह संचालक, टीएंडसीपी

  • कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

    कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

    कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर
     छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कबीरधाम जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 15 करोड़ 86 लाख 8 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।    जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में कबीरधाम जिले के नरसिंहपुर जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का मरम्मत कार्य के लिए एक करोड़ 71 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया के कामठी जलाशय के नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 98 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 112 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया की मोहपार जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का जीर्णेाद्धार तथा लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 15 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 95 हेक्टेयर क्षेत्र मंे सिंचाई सुविधा मिलेगी।

        इसी तरह से विकासखण्ड सहसपुर लोहारा की दमऊनाला व्यपवर्तन के नहर का लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 76 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। छिरहा डायवर्सन के गेट उन्नयन एवं नहर लाईनिंग कार्य एवं पक्के संरचनाओं का निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 31 लाख 72 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 48 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

  • निवेश बढ़ाने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, औद्योगिक प्लॉट बांटने से लेकर लाइसेंस तक नियम सरल

    निवेश बढ़ाने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, औद्योगिक प्लॉट बांटने से लेकर लाइसेंस तक नियम सरल

    चंडीगढ़
     हरियाणा में कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा अनुपालन का बोझ कम करने का सिलसिला जारी है। आठ प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि 14 अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को अगले माह तक लागू कर दिया जाएगा।

    इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं, दोहराव वाले अनुमोदनों और अतिरिक्त अनुपालनों को समाप्त कर नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों के लिए सेवाओं को अधिक सरल और त्वरित बनाना है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में अनुपालन न्यूनीकरण एवं डीरेगुलेशन अभियान की प्रगति की समीक्षा के बाद हरियाणा की स्थिति की जानकारी दी। राज्य के सुधार एजेंडा में भूमि विनियमन, निर्माण, उपयोगिताओं, औद्योगिक विकास, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा ईज आफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चिकित्सा व्यवसायियों के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) संबंधी आवश्यकताओं को सरल करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित लाइसेंस के लिए एकल नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित सेवाओं को इनवेस्ट हरियाणा पोर्टल के साथ एकीकृत करने का भी प्रस्ताव है। इससे विभिन्न विभागों के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को एक सुव्यवस्थित तौर पर संचालित करने में सहायता मिलेगी।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग ने बताया कि व्यवसायों के लिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त करने के हरियाणा के प्रस्ताव को डीरेगुलेशन सेल ने स्वीकृति दे दी है।

    ओवरलैपिंग लाइसेंस, अनुमोदन, एनओसी और परमिट को समाप्त करने से व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम होगा।

    एकमुश्त पंजीकरण शुरू किया जा चुका है।
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए स्व-घोषणा, स्थापना-पूर्व अनुमोदन तथा निरीक्षण से संरक्षण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य चल रहा है। औद्योगिक क्लस्टरों में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एचएसआइआइडीसी तथा हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है।

    तीन हिस्सों में बांटे जा सकेंगे औद्योगिक प्लॉट
    एचएसआइआइडीसी के निदेशक मंडल ने औद्योगिक प्लाटों को अधिकतम तीन प्लाटों में विभाजित करने की अनुमति दी है। हालांकि प्रत्येक परिणामी प्लाट का क्षेत्रफल 450 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए।

    आइएमटी मानेसर के सेक्टर-8 में 4.6 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिक आवास का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार इंडस्ट्रियल एस्टेट कुंडली में छह एकड़ क्षेत्र में ऐसी ही सुविधा विकसित की जा रही है।

    पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित ‘सक्षम’ फंड के माध्यम से बुनियादी ढांचे के उन्नयन की योजना है। एचएसआइआइडीसी ने साझा अग्निशमन बुनियादी ढांचे के लिए भी नई नीति जारी की है।