Author: NewseDay

  • पंजाब के पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000+ पदों पर भर्ती के CM मान ने दिए निर्देश

    पंजाब के पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000+ पदों पर भर्ती के CM मान ने दिए निर्देश

    चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बैठक के बाद राजस्व पटवार यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने पटवारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए 1000 से अधिक राजस्व पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई भर्ती से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व संबंधी रोजमर्रा के प्रशासनिक काम अधिक सुचारू होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि यूनियन ने अपनी जायज मांगें माने जाने पर अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने पटवारियों के पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय कैडर करने की मांग को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर लिया है।”

    उन्होंने कहा, “इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया सुचारू होगी और वरिष्ठता तथा पदोन्नतियों संबंधी आ रही प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। यह फैसला प्रशासनिक सुधारों और विभाग के कामकाज में सुधार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।”

    उन्होंने कहा, “जिला स्तर पर पटवारी कैडर को बहाल करने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा जल्द ही औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।”

    कर्मचारियों के कल्याण के प्रति पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं पटवारियों से अपील करता हूं कि वे पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें और राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि सभी पटवारी सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी से निर्धारित समय में निभाते रहेंगे।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करेगी। उन्होंने कहा कि मैं यूनियन से साथ ही यह अपील करता हूं कि भविष्य में भी सेवा से जुड़े सभी जायज मुद्दों के समाधान के लिए किसी भी तरह की हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से समाधान निकालना सुनिश्चित करें।” 

    कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

    कर्मचारियों और जनता के बीच संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने पटवारियों से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी और लगन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की हर जायज़ मांग पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करने को तैयार है, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचें।

    मुख्यमंत्री ने यूनियन को यह भी नसीहत दी कि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या मांग को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाने के बजाय आपसी बातचीत और संवाद के जरिए ही समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    AI मास्टरक्लास
    बैठक में पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय करने की मांग को भी सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पटवारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। जिला स्तरीय कैडर बहाल करने के प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी दिलाई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने यूनियन के हड़ताल वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने पटवारियों से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचने की अपील भी की। मान ने भविष्य में सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श का रास्ता अपनाने को कहा है।

     

  • रबी सीजन से पहले किसानों की बढ़ी चिंता, चंबल के बांध पूरी तरह नहीं भरे; MP-राजस्थान में होगी बैठक

    रबी सीजन से पहले किसानों की बढ़ी चिंता, चंबल के बांध पूरी तरह नहीं भरे; MP-राजस्थान में होगी बैठक

    कोटा
    मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों को सरसब्ज करने वाली चंबल सिंचाई परियोजना पर भी इसका असर पड़ने वाला है। चंबल के बांधों में भी अपेक्षाकृत कम पानी है। चंबल जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की तकनीकी समिति की बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है।

    बैठक के मद्देनजर दोनों राज्यों की संयुक्त समिति चंबल के चारों बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन करेगी। इसी के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा तय होगा। जल बंटवारे में पेयजल और उद्योगों के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद वाष्पीकरण ह्रास का आकलन कर सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा तय की जाएगी।

    सूत्रों ने बताया कि तकनीकी समिति की बैठक का शेड्यूल 25 सितम्बर तक तय किया गया था, लेकिन हाल में दोनों राज्यों में हुई बारिश से बांधों में पानी की आवक हुई है। इसलिए अब पानी का आकलन पांच अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक होगी। इस बार बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य अभियंता करेंगे।

    चंबल के बांध कितने भरे हैं
    बांध    जलभराव (%)
    गांधी सागर बांध    75.65
    राणाप्रताप सागर बांध    73.29
    जवाहर सागर बांध    75.64
    कोटा बैराज    98.08

    गांधी सागर बांध का जलस्तर 1302.14 फीट पहुंचा
    चंबल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर का जलस्तर हाल में हुई बारिश से करीब एक फीट बढ़ गया है। गांधी सागर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई। इससे बांध का जलस्तर भराव क्षमता 1312 फीट के मुकाबले 1302.14 फीट तक पहुंच गया है। यह कुल जलभराव क्षमता का 75.65 प्रतिशत है।

    फैक्ट फाइल
        1960 में चम्बल का नहरी तंत्र विकसित
        63 दाईं और बाईं मुख्य नहर की शाखाओं, उपशाखाओं व वितरिकाओं की संख्या
        16 किमी आबादी क्षेत्र में दाईं मुख्य नहर व इसकी छोटी नहर
        5 किमी आबादी क्षेत्र में बाईं मुख्य नहर, माइनरें तथा वितरिकाएं
        1.27 लाख हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
        1.2 लाख हैक्टेयर बाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
        6656 क्यूसेक दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
        1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
        3 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित
        124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में
        248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है
        24.6 प्रतिशत हिस्सेदारी एमपी की होती है दाईं मुख्य नहर के समस्त कार्यों में
        24.6 प्रतिशत राशि राजस्थान वहन करता है दाईं मुख्य नहर के कार्यों में

    इनका कहना है
    अक्टूबर के पहले सप्ताह में जल बंटवारे को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसमें पानी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। फिलहाल बैठक का एजेंड़ा नहीं आया है। बैठक में मुख्यतया जल प्रवाह के संबंध में ही चर्चा होगी।
    -संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा

  • वाहन चालान पर बड़ा बदलाव: नहीं भरा जुर्माना तो RC ट्रांसफर समेत कई सेवाएं होंगी बंद

    वाहन चालान पर बड़ा बदलाव: नहीं भरा जुर्माना तो RC ट्रांसफर समेत कई सेवाएं होंगी बंद

    लखनऊ
    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने वाहनों के चालान को और सख्त बनाया है। वाहन के जुर्माने पर हर जिले में सुनवाई कराने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त होगा व अपील करने की भी सुविधा मिलेगी। सुनवाई, अपील की 30-30 दिन में सुनवाई करके निर्णय देना होगा। ऐसा न होने पर प्राधिकारी व अपील अधिकारी पर भी पांच से 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।

    इसका नेक्स्ट जेन ई-चालान मोबाइल एप व पोर्टल बुधवार मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। दैनिक जागरण ने 28 जुलाई को अब वाहन चालान के जुर्माने पर हर जिले में होगी सुनवाई शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। केंद्रीय मंत्रालय मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 167-ख में वाहनों के चालान के जुर्माने का निर्णय करने का नियम बनाया। इसमें प्रदेश सरकार हर जिले में जुर्माने का फैसला करने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त करेगी।

    यह प्राधिकारी ऑनलाइन व इलेक्ट्रानिक माध्यम से 30 दिनों में सुनवाई करके निर्णय देगा। यदि निर्णय से कोई व्यक्ति संतुष्ट नहीं है तो आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) या समकक्ष अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकता है। अपीलीय प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर निस्तारण करना होगा। यदि किसी आदेश के 30 दिन निकल जाएं और उचित कारण हो तो 30 दिन अपील स्वीकार की जा सकती है।

    सुनवाई व अपील अधिकारी यदि 30 दिन में निर्णय नहीं देता तो उस अधिकारी पर 5000 से 10,000 तक का जुर्माना भी लगेगा।यदि किसी वाहन ई-चालान हो गया व वाहन स्वामी चालान का भुगतान नहीं करता है या कोर्ट व अधिकारी की ओर से तय जुर्माना भरने का आदेश होने के बाद भी भुगतान नहीं करता है तो जब तक चालान का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वाहन से संबंधित अधिकांश सेवाएं जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का ट्रांसफर, एनओसी, डुप्लीकेट आरसी आदि जारी नहीं होंगी।

    वाहन पोर्टल पर संबंधित वाहन के कालम में लेनदेन न करने योग्य लिख दिया जाएगा। ऐसे वाहन स्वामी को चालान जमा करने की सूचना आनलाइन भेजी जाएगी। वहीं, यदि चालान का मामला अभी कोर्ट या सक्षम प्राधिकारी के पास विचाराधीन है तो उस दौरान यह प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। उल्लेखनीय है कि अभी तक वाहन का चालान होने पर 90 दिन बाद प्रकरण को संबंधित कोर्ट में भेजने का नियम रहा है।

    यूपी में इस तरह हुए चालानप्रदेशभर में 2024-25 में 27 लाख एक हजार 786 ई-चालान जारी हुए थे। इनमें चार पहिया वाहन आधे से अधिक हैं। इनमें 2,79,296 वाहन ऐसे हैं जिन पर कई तरह के चालान लंबित है। 2025-26 में प्रदेशभर में 30 लाख से अधिक वाहनों का चालान हुआ था।

  • पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अपडेट, 122 EBC जातियों की स्थिति का होगा आकलन; तय होगा आरक्षण

    पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अपडेट, 122 EBC जातियों की स्थिति का होगा आकलन; तय होगा आरक्षण

    पटना
    बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण का मानक तय हो गया है। पंचायती राज विभाग द्वारा तय गाइडलाइन के आधार पर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग अध्ययन करेगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल लगभग 122 जातियों की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन होगा। इसके लिए जल्द ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग से जुड़े गांवों और शहरों में सर्वे शुरू होगा।

    ईबीसी आयोग निर्धारित मानक पर सर्वें करा कर पंचायत चुनाव में ईबीसी प्रतिनिधियों लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने की अनुशंसा करेगी। पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एनेक्सर-1) के लिए अधिकतम 50 फीसदी ही आरक्षण देना है। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग और ईबीसी आयोग के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। आयोग ने विभाग से अध्ययन के लिए सहायता मांगी थी। पंचायती राज विभाग ने आयोग को भरोसा दिया है कि डीएम सहित जिलों के संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भेज कर आयोग को मदद दिलायेगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार के पंचायत चुनावों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के पहले त्रिस्तरीय जांच (ट्रिपल टेस्ट) अनिवार्य है। इसमें पहली शर्त है कि किसी भी स्थिति में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। दूसरा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग की किन-किन जातियों को आरक्षण की वास्तव में जरूरत है। तीसरा, इसके लिए समर्पित आयोग हो, जो समयसीमा में अध्ययन कर रिपोर्ट दे। सरकार ने पहले ही ईबीसी आयोग को अध्ययन के लिए समर्पित आयोग घोषित कर दिया है।

    एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही ओबीसी को आरक्षण
    वर्तमान में उपलब्ध जनगणना पर राज्य की कुल आबादी में जितनी आबादी एससी- एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जा सकता है। बीते पंचायत चुनाव में यहां पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण दिया गया था। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में भी ईबीसी को आरक्षण लगभग पिछले चुनाव की तरह ही मिलेगा।

    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में 122 जातियां
    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में लगभग 122 जातियां हैं। गाइडलाइन के आधार पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायतों में ओबीसी की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को देगा। सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को मिलेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को भेजी जायेगी। राज्य स्तर पर आरक्षण का दायरा तय नहीं होगा, बल्कि पंचायत ही मानक रखा गया है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ने की स्थिति में ईबीसी के लिए आरक्षित पंचायतों की संख्या में भी वृद्धि तय है।

    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में प्रमुख जातियां
    कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू, नाई आदि

    पंचायतों के नये परिसीमन के बाद होगा चुनाव
    राज्य में वर्तमान में 8049 ग्राम पंचायत हैं। नये परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 12500 हजार से अधिक होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन विभाग को परिसीमन करना है।
    ● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।

    ● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन।

    ● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति।

    ● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ओबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व।

    ● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति।

  • पंजाब में ED रेड से हड़कंप, IAS अफसर के घर से ढाई करोड़ कैश बरामद

    पंजाब में ED रेड से हड़कंप, IAS अफसर के घर से ढाई करोड़ कैश बरामद

    चंडीगढ़
    पंजाब और चंडीगढ़ में दो दिन से ED की रेड चल रही है। टीम बुधवार देर रात दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन के चंडीगढ़ स्थित घर भी पहुंची।ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के पंजाब और चंडीगढ़ दफ्तरों में 2 दिन से ED की रेड चल रही है। ED ने मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के भांजे के घर लुधियाना में भी रेड की। देर रात टीम दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन के घर भी पहुंची। 

    सरकार ने हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने ED की छापेमारी की निगरानी के लिए वारंट ऑफिसर नियुक्त किया है। वारंट ऑफिसर को मौके पर जाकर छापेमारी की स्थिति देखने और इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

    वारंट ऑफिसर किसी भी समय छापेमारी वाली जगह पर जाकर निरीक्षण कर सकता है। उसे गुरुवार दोपहर 2 बजे तक मामले की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी होगी।

    इधर, एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि पंजाब के एक IAS अधिकारी के घर से करीब ढाई करोड़ कैश, सवा किलो सोना-चांदी और जमीन के कुछ दस्तावेज मिले हैं। इनकी जांच जारी है।

    ED की रेड के बीच पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व पंजाब के भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्‌टू ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट से खलबली मचा दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि पंजाब का एक मंत्री देश छोड़कर भाग गया है। बताया जा रहा है कि बिट्‌टू का इशारा मंत्री मुंडियां की तरफ है। हालांकि, इसकी ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है।

    आज AAP करेगी टीमों का घेराव
    वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) आज मोहाली में GMADA दफ्तर पर ED की कार्रवाई के विरोध में केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों का घेराव करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय एजेंसियों के जरिए पंजाब सरकार और अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

    AAP नेताओं ने कहा कि लंबी छापेमारी के बावजूद ED को अब तक कुछ नहीं मिला। पार्टी ने ED की कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे अधिकारियों को डराने की कोशिश बताया। AAP ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही पंजाब में ED की सक्रियता बढ़ी है। भाजपा की धक्केशाही को पंजाब बर्दाश्त नहीं करेगा।

    मोहाली दफ्तर के 3 मंजिल सील किए
    ED ने मंगलवार सुबह मोहाली स्थित GMADA के फेज-8 में मुख्यालय में कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद ED और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान व अधिकारी मौके पर अब भी मौजूद हैं। ED अधिकारी सरकारी रिकॉर्ड खंगालने के साथ GMADA के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं।

    मोहाली दफ्तर के 3 मंजिलों को सील किए जाने और रिकॉर्ड जब्त किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है। इसके अलावा IAS अधिकारी राजीव गुप्ता की सेक्टर-19 स्थित कोठी में टीम पहुंची थी। ED की टीम बुधवार देर रात सेक्टर-39 की कोठी नंबर 926 में भी पहुंच गई, जहां दिल्ली के पूर्व मंत्री सतिंदर जैन रहते रहे थे।

    मंत्री के रिश्तेदार के घर भी पहुंची ED
    इसी जांच के दौरान बुधवार को पंजाब के शहरी आवास एवं विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी उर्फ प्रिंस के लुधियाना के साहनेवाल स्थित घर पर भी ED ने तलाशी ली। रिपोर्टों के अनुसार, वहां कार्रवाई दोपहर करीब ढाई बजे शुरू हुई और देर तक जारी रही।

    26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे
    ED के अनुसार, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे की कार्रवाई की गई है। इनमें कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और उनसे जुड़े लोगों के ठिकाने शामिल हैं।

    ED के मुताबिक, GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के कार्यालयों में भी PMLA के तहत सर्वे किया जा रहा है, ताकि संबंधित कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड और सबूत जुटाए जा सकें।

    290 करोड़ के बैंक फ्रॉड और GMADA से जुड़े लेनदेन की जांच
    ED के मुताबिक, जांच में तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, मामले में नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदेन के साथ GMADA से कथित तौर पर वैधानिक बकाया में छूट और रद्द किए गए प्लॉट के दोबारा आवंटन की भी जांच की जा रही है।

    एजेंसी के अनुसार, रेमिगेट से जुड़े मामले में करीब 57 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ दिए जाने की भी जांच है। साथ ही जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कथित अनियमितताओं में एक निजी कंसल्टेंसी फर्म की भूमिका और अधिकारियों से उसके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

    जांच अभी जारी है। ED की तलाशी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • पितृ पक्ष 2026: महाभरणी, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या का खास महत्व, जानें पूरी तारीखें

    पितृ पक्ष 2026: महाभरणी, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या का खास महत्व, जानें पूरी तारीखें

     पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है. इन दिनों लोग अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे कर्म करते हैं. पितृ पक्ष की हर तिथि का अपना महत्व है, क्योंकि सामान्य तौर पर जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है. हालांकि इस पूरे पक्ष में तीन तिथियां ऐसी मानी जाती हैं, जिनका महत्व खास तौर पर बताया गया है.

    महाभरणी श्राद्ध
    पितृ पक्ष की खास तिथियों में भरणी श्राद्ध का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. इसे कई जगह महाभरणी श्राद्ध भी कहा जाता है. भरणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण इस श्राद्ध का अपना विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.

    परंपराओं के अनुसार, किसी परिजन की मृत्यु के बाद एक वर्ष पूरा होने पर भरणी श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में है. वहीं अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु होने पर भी भरणी श्राद्ध को विशेष माना जाता है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इसके नियमों में अंतरदेखने को मिल सकता है.

    2026 में महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को पड़ेगा. इस दिन तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है.

    मातृ नवमी
    पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है. यह दिन विशेष रूप से परिवार की दिवंगत महिलाओं और मातृ पक्ष के पूर्वजों को समर्पित माना जाता है.

    इस दिन मां, दादी, नानी या परिवार की अन्य दिवंगत महिला सदस्यों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. यही वजह है कि इसे मातृ श्राद्ध भी कहा जाता है. अगर किसी महिला पूर्वज की मृत्यु तिथि को लेकर परिवार में स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो कई परंपराओं में नवमी तिथि को उनके लिए श्राद्ध करने की मान्यता मिलती है.

    2026 में मातृ नवमी 4 अक्टूबर को होगी. इस दिन पूर्वज महिलाओं को याद करके उनकी स्मृति में दान-पुण्य और श्राद्ध कर्म किया जा सकता है.

    सर्वपितृ अमावस्या
    पितृ पक्ष की सभी तिथियों में सर्वपितृ अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है. यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इसे महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है.

    इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि परिवार को मालूम नहीं है. इसके अलावा यदि किसी कारण से किसी पूर्वज का निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तो भी परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या को उनके लिए कर्म किया जाता है.

    2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को पड़ेगी. इसे पितृ पक्ष का समापन दिवस माना जाता है.

    क्या सिर्फ इन्हीं 3 दिनों में श्राद्ध करना चाहिए?
    ऐसा नहीं है. पितृ पक्ष की हर तिथि महत्वपूर्ण होती है. सामान्य नियम के अनुसार जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है. उदाहरण के लिए अगर किसी पूर्वज की मृत्यु कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुई थी, तो पितृ पक्ष की अष्टमी पर उनका श्राद्ध किया जाता है. तीन तिथियों को विशेष बताने का कारण यह है कि इनके साथ कुछ खास परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इसलिए इनके बारे में जानकारी रखना उपयोगी माना जाता है.

    अगर मृत्यु की तिथि याद न हो तो क्या करें?
    कई परिवारों में पुरानी पीढ़ियों की मृत्यु की सही तिथि की जानकारी नहीं होती. ऐसी स्थिति में चिंता करने की जरूरत नहीं मानी जाती. धार्मिक परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या को ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध करने का विशेष अवसर माना गया है. इस दिन परिवार अपने उन सभी पूर्वजों को याद कर सकता है जिनकी मृत्यु तिथि उपलब्ध नहीं है. तर्पण, पिंडदान, भोजन और दान जैसे कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किए जाते हैं.

    2026 पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर अब देख लें एक नजर में
    पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर 2026, शनिवार
    प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर 2026, रविवार
    द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर 2026, सोमवार
    तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर 2026, मंगलवार
    चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर 2026, बुधवार
    षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
    सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
    अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
    नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2026, रविवार
    दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
    एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
    द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
    मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
    त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
    चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
    सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर 2026, शनिवार

  • बर्खास्त AIG राजजीत का सरेंडर, ड्रग तस्करी और आय से अधिक संपत्ति के केस में कार्रवाई

    बर्खास्त AIG राजजीत का सरेंडर, ड्रग तस्करी और आय से अधिक संपत्ति के केस में कार्रवाई

    पटियाला
    करीब छह साल से फरार चल रहे बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) राजजीत सिंह ने आज पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वह अक्तूबर 2019 से फरार बताए जा रहे थे। राजजीत सिंह नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े कई गंभीर मामलों में नामजद थे।राजजीत सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थी। उनके खिलाफ नशा तस्करी के एक बड़े रैकेट में शामिल होने के आरोप थे। इसके अलावा, उन पर जबरन वसूली के भी आरोप लगे थे। 
    राजजीत सिंह के खिलाफ वर्ष 2019 में ड्रग तस्करी, जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद से पुलिस को उसकी तलाश थी। अब पंजाब के DGP गौरव यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

    राजजीत सिंह को अप्रैल 2023 में सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद से वह अंडरग्राउंड हो गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से गठित SIT की जांच में उसका नाम बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े कथित ड्रग तस्करी और वसूली नेटवर्क में सामने आया था।

    इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो और स्पेशल टास्क फोर्स ने उसके खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद वह फरार हो गया था। उसकी तलाश के लिए लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था।

    निर्दोषों को फंसाने और वसूली के भी आरोप

    जांच रिपोर्टों में राजजीत सिंह पर ड्रग तस्करों को कथित संरक्षण देने, निर्दोष लोगों को ड्रग मामलों में फंसाने और उनसे वसूली करने जैसे आरोप लगाए गए थे। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला भी दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में इन आरोपों को जांच के दौरान सामने आए आरोपों के रूप में दर्ज किया गया है।

    50 से ज्यादा NDPS सैंपल फेल होने का भी मामला

    मामले की जांच में उस अवधि के दौरान 50 से अधिक NDPS सैंपल फेल होने का मुद्दा भी सामने आया था, जब राजजीत सिंह तरनतारन के SSP और इंद्रजीत सिंह CIA प्रभारी के तौर पर तैनात थे। पंजाब सरकार ने SIT रिपोर्टों के आधार पर अप्रैल 2023 में राजजीत सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

    जानिए, केस में कब-क्या हुआ

        जून 2017 में हुआ रैकेट का भंडाफोड़: विशेष कार्य बल (STF) ने राजजीत सिंह के अधीनस्थ रहे सीआईए (CIA) प्रभारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया था। उसके घर से 4 किलोग्राम हेरोइन, अन्य ड्रग्स और अवैध हथियार बरामद हुए। यहीं से पुलिस-ड्रग्स तस्कर नेक्सस का खुलासा हुआ।
        नवंबर 2017 में SIT का गठन: इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (विशेषकर राजजीत सिंह) की संलिप्तता की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
        2018 में सीलबंद रिपोर्ट सौंपी: SIT ने मामले की गहन जांच करने के बाद अपनी 3 स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंप दीं। ये रिपोर्ट कई सालों तक सीलबंद रहीं।
        फरवरी 2018 में मामला दर्ज हुआ: 2018 में STF ने इस पूरे ड्रग्स-तस्करी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश को लेकर FIR दर्ज की।
        मार्च-अप्रैल 2023 में रिपोर्ट्स खुलीं और बर्खास्तगी हुई: हाईकोर्ट के निर्देश पर जब बरसों पुरानी सीलबंद SIT रिपोर्ट खोली गईं, तो राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंद्रजीत की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हो गई। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 17 अप्रैल 2023 को राजजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
        19-20 अप्रैल 2023 को FIR में नामजद व नया केस हुआ: राजजीत सिंह को आधिकारिक तौर पर 2018 के NDPS मामले में सह-आरोपी बनाया गया। ठीक अगले दिन 20 अप्रैल को विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक और नया केस दर्ज किया।
        3 साल तक फरार रहा: गिरफ्तारी से बचने के लिए राजजीत सिंह लगातार अंडरग्राउंड रहा और पुलिस को चकमा देता रहा। पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया। आरोपी राजजीत सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी याचिकाएं खारिज हो गईं।

        10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया: राजजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से कानूनी सुरक्षा मांगी। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने अदालत को बताया कि वह आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया।
        24 सितंबर 2026 को सरेंडर किया: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए राजजीत सिंह ने पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद पंजाब पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

    वर्ष 2019 में, उन्हें आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में भी नामजद किया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर थे। पंजाब पुलिस ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। उनके आत्मसमर्पण को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब पुलिस उनसे विभिन्न मामलों में पूछताछ करेगी। इस गिरफ्तारी से कई और खुलासे होने की उम्मीद है। 

  • विकास की नई रफ्तार पर मध्यप्रदेश, बढ़ती निवेश दर से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

    विकास की नई रफ्तार पर मध्यप्रदेश, बढ़ती निवेश दर से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

    बढ़ती विकास दर और तेज़ी से बढ़ता निवेश, नयी गति से विकास कर रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  भोपाल के एक निजी होटल में प्रतिष्ठित मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत – बढ़ता मध्यप्रदेश' कॉन्क्लेव को संबोधित किया। कान्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास दर दो अंकों में पहुंच गई है और रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक स्थिति बनी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब वास्तविक प्रगति कर रहा है। प्रदेश की विकास दर टू-डिजिट में है और इस समय बेरोजगारी की दर न्यूनतम स्तर पर है। बड़ी संख्या में निवेशक मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं और प्रदेश में भारी मात्रा में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नये अवसर भी तैयार हो रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुकूल वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

    कॉन्क्लेव में प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और उपलब्ध संभावनाएं इसे निवेश का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं। प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां हमारे आर्थिक बदलाव का बड़ा कारण बनकर उभरीं हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश की सेवा करने का अवसर दिया है, यह मेरा सौभाग्य है। उन्होंने जनकल्याण और सुशासन के बलबूते देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश भी 2002-03 के बाद सुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अमृतकाल में देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2002-03 तक प्रति व्यक्ति आय मात्र 11 हजार रुपए थी। इसके अगले 20 साल में हमारी सरकार आने पर प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 40 हजार रुपए हो गई। उसके बाद हमारी सरकार बनी तो ढाई साल में 1 लाख 57 हजार रुपए हो गई। हमने अमृतकाल में वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हम दीर्घकालिक विजन के साथ नीतियों का निर्माण कर रहे हैं। सकारात्मक भाव के साथ कार्य कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने कई चुनौतियों को समाप्त किया है। बुंदेलखंड में देश की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक) और राजस्थान के साथ सालों पुराने जल बंटवारे के विवाद को पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना की सौगात मिली। केन-बेतवा लिंक से बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के जिलों को पानी मिलेगा, वहीं पीकेसी से राजस्थान और मालवा क्षेत्र के जिले लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश में पानी की कोई कमी नहीं है। दूसरी चुनौती थी- नक्सलवाद, जिसे हमने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में समाप्त किया है। मध्यप्रदेश तय समय-सीमा में लाल सलाम को आखिरी सलाम करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त बिजली, उद्योग स्थापित करने के लिए लैंड बैंक, बेहतर कानून व्यवस्था, अपराध मुक्त जीवन पद्धति, श्रमिकों के आंदोलन नहीं होना जैसी विशेषताएं हैं। हमारा प्रदेश कृषि, अनाज उत्पादन और खनन क्षेत्र में अग्रणी है। मध्यप्रदेश हीरा उत्पादक प्रदेश है। यहां टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन और वन्यजीव पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की समृद्धि के लिए गुजरात मॉडल को हमने मध्यप्रदेश में लागू करने का प्रयास किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदीजी ने नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध का काम तेजी से पूर्ण कराया। जिससे गुजरात के साथ ही मध्यप्रदेश को भी सिंचाई सुविधा और बिजली आपूर्ति का लाभ मिला है। देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहां बेरोजगारी दर सबसे कम है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आमतौर पर औद्योगिक निवेश का 10 प्रतिशत धरातल पर उतरता है। लेकिन मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां पिछले ढाई साल में 30 प्रतिशत निवेश जमीन पर आ चुका है। राज्य में उद्योग अनुकूल 25 नीतियां और पारदर्शी व्यवस्था लागू हैं। मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में अग्रणी है। हमने रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने स्टॉफ की सैलरी में 5000 रुपए प्रति महीना वीजीएफ देना शुरू कर दिया है। राज्यों के बीच व्यापार-व्यवसाय और उद्योग स्थापना के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जीआईएस-2025 में आए 30 लाख करोड़ के निवेश में से अब तक 11 लाख करोड़ से अधिक धरातल पर आ चुका है और आगे भी काम तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में हमें आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन अगर चैट-जीपीटी, ग्रोक या अन्य प्लेटफॉर्म गलत उत्तर दें, तो उसे सही भी कराना चाहिए। जैसे मैंने चैट-जीपीटी से क्षिप्रा का नाम कालिदास के ग्रंथों के आधार पर 'शिप्रा' कराया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की आबादी 9 करोड़ के आसपास है। सभी नौकरियों की संख्या 10 लाख है। हमारी सरकार बनने के बाद 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर भर्ती की गई। लगभग ढाई लाख लोगों को पदोन्नति दी गई। हर साल लगभग 1 लाख पदों पर भर्ती करने की प्रक्रिया जारी है। हमारे एमएसएमई सेक्टर से 1 करोड़ 20 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। प्रदेश में लगभग 2 करोड़ किसान खेती से जुड़े हैं। मध्यप्रदेश स्वावलंबन की ओर बढ़ रहा है, हमारे युवा अब रोजगार देने वाले बन रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। देश में तीर्थाटन की पुरानी परंपरा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में देवस्थानों को भव्य स्वरूप दिया है। पहले बाबा विश्वनाथ का कारिडोर बना, फिर महाकाल कॉरिडोर का विकास किया गया। श्रीमहाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में तीर्थाटन में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2022 तक उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख होती थी, जो पिछले साल बढ़कर 8 करोड़ लोग आए और इस बार 12 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में जब 2028 के सिंहस्थ में 30 से 40 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आएंगे तो उन्हें कोई कष्ट नहीं होना चाहिए। उज्जैन की कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है। आसपास के शहरों को कनेक्ट करते हुए हाईवे बनाए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य परिवहन की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बसें प्रारंभ की जा रही हैं। ये नारंगी रंग की बसें देशभर में जाएंगी और मध्यप्रदेश का मान बढ़ाएंगी। इलेक्ट्रिस बसों को रजिस्ट्रेशन में छूट दी जाएगी। प्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का विशाल रोड नेटवर्क हैं। लोक निर्माण विभाग ने एक ऐप विकसित किया है, जिसमें गड्ढों की फोटो डालने पर उसे तुरंत ठीक कराया जाता है। हमारी सरकार लगातार लाड़ली बहनों के लिए राशि बढ़ा रही है। अब तक 55 हजार करोड़ रुपए की राशि बहनों को दे चुकी है। बहनों को रोजगार आधारित उद्योग में काम करने पर 5000 रुपए अलग से मिलते हैं। राज्य में तीन साल में बड़ा बदलाव आया है। परिवार की आय और जीवनशैली बदली है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय स्कूल शिक्षा में रोल मॉडल बन चुके हैं। प्राइवेट स्कूलों के बच्चे शासकीय स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। हमारी सरकार ने स्कूल शिक्षा का बजट बढ़ाकर 38 हजार करोड़ किया है। बोर्ड परीक्षाओं में लगातार तीन साल तक शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले शासकीय स्कूलों के शिक्षकों को सरकार सम्मानित कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट में 50 प्रतिशत बच्चे शासकीय स्कूलों से आते हैं। हमारी सरकार ने प्रदेश में जर्जर स्कूलों के लिए फंड जारी कर दिया है। अगले दो साल में प्रदेश का एक भी विद्यालय जर्जर भवन में नहीं लगेगा। बालाघाट से नक्सलवाद खत्म होने के बाद आज हम कोर एरिया में जा पा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर सालों से कोई विकास नहीं हुआ था। किसी को टीके नहीं लगाए गए थे। अब जरूरत है, सभी को एक साथ मिलकर काम करें। नदी जोड़ों अभियान 5 साल में हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मोदी के जीवन का लक्ष्य गरीब के जीवन में उजाला लाना है। हमारी चुनाव प्रक्रिया तो अमेरिका तक पसंद करता है।

    एक निजी प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने अपने दोनों बेटों का विवाह सामूहिक आयोजन में किया। शादियों पर फिजूलखर्ची क्यों होनी चाहिए ? अगर कोई बड़े पद पर बैठा राजनेता अपने परिवार के लिए इस प्रकार के मितव्ययी निर्णय लेता है, तो यह समाज में ज्यादा प्रभावशील होता है।

     

  • सिंहस्थ सेवादूतों को मिलेगी खास ट्रेनिंग, भोपाल में बनेगा नया सेंटर

    सिंहस्थ सेवादूतों को मिलेगी खास ट्रेनिंग, भोपाल में बनेगा नया सेंटर

    सिंहस्थ सेवादूतों के लिए भोपाल में बनेगा अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ट्रेनिंग सेंटर बनने तक सांदीपनि विद्यालय भवन-परिसरों में होगा सेवादूतों का प्रशिक्षण
    सिंहस्थ : 2028 के लिए 15 हजार से अधिक स्वयं सेवक संभालेंगे सेवा का मोर्चा
    सिंहस्थ सेवा कार्य के लिए मुख्यमंत्री निवास में हुई भारत स्काउट एण्ड गाइड की विशेष संगोष्ठी

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आस्था का विराट पर्व है। इसके भव्य और दिव्य आयोजन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के साथ पूरी क्षमता के साथ तैयार होना होगा। यह हम सबका दायित्व है कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में भारत स्काउट एंड गाइड के पदाधिकारियों एवं गाइड्स के साथ सिंहस्थ सेवा कार्य 2028 के संदर्भ में आयोजित एक विशेष संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ में भीड़ नियंत्रण सहित कई प्रकार की व्यवस्थाएं संभालने वाले स्काउट एंड गाइड के मास्टर ट्रेनर, सेवादूतों एवं स्वयं सेवकों के विधिवत् प्रशिक्षण के लिए भोपाल में एक अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस ट्रेनिंग सेंटर के बनने एवं इसमें प्रशिक्षण शुरू होने तक आवश्यकतानुसार सांदीपनि विद्यालय के भवनों एवं परिसरों का इस्तेमाल किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा, भारत स्काउट एवं गाइड का मूल मंत्र है और ‘तैयार रहो’ इसका ध्येय वाक्य। स्काउट एंड गाइड ने अपने कार्य के आधार पर दुनिया में अलग ही पहचान बनाई है। पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से उज्जैन सिंहस्थ के आयोजन में इस संगठन की कार्यशैली, सामर्थ्य और समर्पण को करीब से देखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा किसुरक्षित और सुव्यवस्थित सिंहस्थ कराना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 सेवा-भाव, प्रबंधन क्षमता और सुशासन की व्यापक परीक्षा भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी संदर्भ में अपील करते हुए कहा कि आप सबको सेवा के लिए, किसी भी चुनौती और अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हमेशा की तरह तैयार रहना होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आजादी के बाद हुए पांच सिंहस्थों में भारत स्काउट-गाइड ने सेवा के कई अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। सिंहस्थ 2028 में भीड़ प्रबंधन की चुनौती सबसे बड़ी होगी। उज्जैन सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2016 में करीब 7,500 स्काउट एवं गाइड ने 10 कैंपों के जरिए सेवाएं दी थीं। इस बार 15 हजार से अधिक प्रशिक्षित स्वयं सेवक 20 से अधिक कैंपों के माध्यम से सेवा का मोर्चा संभालेंगे। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन संस्थान के सहयोग से 100 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे। प्रदेश के हर जिले से 500 तथा उज्जैन संभाग के सभी जिलों से एक-एक हजार युवाओं को सेवादूतों के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण के बाद तेजी से धार्मिक पर्यटन बढ़ा है। इस वर्ष यहां 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड को सिंहस्थ में सेवा के लिए तैयार हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीक एवं सोशल मीडिया के इस दौर में स्काउट एंड गाइड को इंटरनेट और सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी प्रशिक्षित होना होगा।

    मध्यप्रदेश स्काउट एंड गाइड के राज्य कोषाध्यक्ष और सिंहस्थ सेवा दल के प्रभारी रहे रमेश शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 में स्काउट एंड गाइड को 30 से अधिक शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें से 20 शिविर स्काउट-गाइड के होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं सिहस्थ के पूर्व आयोजनों में सेवादूत के रूप में कार्य कर चुके हैं। ऐसे धार्मिक आयोजनों में स्काउट एंड गाइड की भूमिका को बेहतर तरीके से समझते हैं।

    संगोष्ठी में भारत स्काउट एंड गाइड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अर्गल, संस्था के राज्य सचिव डॉ. प्रेम कुमार, सचिव स्कूल शिक्षा संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह सहित प्रदेश के सभी संभागों से आए सेवादूत उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सेवादूतों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाये। 

  • लखनऊ में 4526 आवासीय भूखंडों की सौगात, वरुण विहार-नैमिष नगर में आज से बड़ा अपडेट

    लखनऊ में 4526 आवासीय भूखंडों की सौगात, वरुण विहार-नैमिष नगर में आज से बड़ा अपडेट

    लखनऊ
    लखनऊ विकास प्राधिकरण की नैमिष नगर और वरुण विहार योजनाओं का शुभारंभ बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। शाम चार बजे मुख्यमंत्री दोनों महत्वाकांक्षी टाउनशिप योजनाओं का भूमि पूजन करेंगे और भूखंडों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कराएंगे। साथ ही एलडीए की पांच अपार्टमेंट परियोजनाओं का भी शिलान्यास होगा। दोनों योजनाओं में कुल 4526 आवासीय भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला जा रहा है। पंजीकरण की प्रक्रिया 24 सितंबर से 24 अक्तूबर तक एक माह के लिए खुली रहेगी।

    वरुण विहार के भूखंड 2800 रुपये वर्गफुट
    आगरा एक्सप्रेसवे क्षेत्र के निकट विकसित की जा रही वरुण विहार योजना में 112.5 वर्ग मीटर से लेकर 450 वर्ग मीटर तक के 2847 भूखंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनकी कीमत 2800 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित की है।

    नैमिष नगर के भूखंड 3800 रुपये प्रति वर्गफुट
    सीतापुर रोड र नैमिष नगर योजना में 1679 भूखंड उपलब्ध होंगे। योजना में 72 वर्ग मीटर के 197, 112.5 वर्ग मीटर के 524, 162.5 वर्ग मीटर के 520, 200 वर्ग मीटर के 299, 288 वर्ग मीटर के 103 तथा 450 वर्ग मीटर के 30 भूखंड शामिल हैं। भूखंडों की कीमत 3800 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित की गई है। नैमिष नगर व वरुण विहार को 12,600 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।

    आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा वरुण विहार
    एलडीए ने आगरा एक्सप्रेसवे से वरुण विहार को सीधे जोड़ने के लिए यूपीडा और शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के तहत एक्सप्रेसवे से वरुण विहार योजना में उतरने के लिए एक विशेष रैंप बनाया जाएगा। वर्तमान में वरुण विहार योजना तक पहुंचने के लिए आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड का सहारा लेना पड़ता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार रैंप केवल योजना में प्रवेश के लिए होगा। यानी लखनऊ या अन्य दिशा से आने वाले वाहन सीधे वरुण विहार में उतर सकेंगे। हालांकि वापसी के दौरान लोगों को पहले की तरह सर्विस रोड का उपयोग करना होगा। एलडीए के एक अधिकारी के अनुसार इस संबंध में यूपीडा और शासन को पत्र भेज दिया गया है। चूंकि एक्सप्रेसवे यूपीडा के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    आयोजन को लेकर आज रूट डायवर्जन
    ● आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन घुरघुरी तालाब मोहान रोड या मलिहाबाद होकर गुजर सकेंगे।

    ● खुशहालगंज किसानपथ अंडरपास से वाहन बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास के बजाय घुरघुरी तालाब मोहान रोड या बुद्धेश्वर से जाएंगे।

    ● मौंदा चौराहा से वाहन घुरघुरी तालाब मोहान रोड या बुद्धेश्वर होकर जाएंगे।

    ● बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास से वाहन बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास से यू-टर्न से होकर जाएंगे।

    ● बड़ागांव आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन मोहान रोड या बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास होकर जाएंगे।

    ● कठहिंगरा आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन कठहिंगरा गांव से घुरघुरी तालाब मोहान रोड होकर गुजर सकेंगे।

    ● भलिया आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन मोहान रोड घुरघुरी तालाब होकर गुजर सकेंगे।

    ● झलियामऊ आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन कठहिंगरा अंडरपास होकर गुजर सकेंगे।