Author: NewseDay

  • भाजपा विधायक का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक

    भाजपा विधायक का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक

    भाजपा विधायक का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक

    आगरा की फतेहाबाद विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे विधायक छोटेलाल वर्मा 

    लखनऊ
    आगरा की फतेहाबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक छोटेलाल वर्मा का गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा कि जनपद आगरा के फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक छोटे लाल वर्मा जी का निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि।

    मुख्यमंत्री ने प्रभु श्री राम से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
    ॐ शांति!

  • पंजाब वक्फ बोर्ड चपरासी भर्ती मामला, हाई कोर्ट ने प्रदीप कुमार की नियुक्ति पर विचार के दिए निर्देश

    पंजाब वक्फ बोर्ड चपरासी भर्ती मामला, हाई कोर्ट ने प्रदीप कुमार की नियुक्ति पर विचार के दिए निर्देश

     

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब वक्फ बोर्ड में चपरासी पद की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहे अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया है।

    कोर्ट ने कहा कि जब चयनित अभ्यर्थियों में से कोई उम्मीदवार उपलब्ध पद पर नियुक्ति ग्रहण नहीं करता है और उसकी जगह रिक्ति बनी रहती है, तो मेरिट के अनुसार वेटिंग लिस्ट के अगले उम्मीदवार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    छह साल पहले शुरू हुई भर्ती की प्रक्रिया
    जस्टिस नामित कुमार की पीठ ने यह आदेश प्रदीप कुमार की याचिका पर सुनाया। पंजाब वक्फ बोर्ड ने 30 अगस्त 2020 को विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें चपरासी के 34 पद शामिल थे।

    बाद में इन पदों की संख्या घटाकर 24 कर दी गई। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि पांच अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। प्रदीप कुमार वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर थे।

    याचिकाकर्ता के अनुसार चयनित 24 उम्मीदवारों में से केवल 23 ने चपरासी पद पर ज्वाइन किया। एक चयनित उम्मीदवार करनवीर सिंह ने चपरासी के पद पर ज्वाइन नहीं किया, बल्कि किसी अन्य पद पर नियुक्त हुआ। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में भी 24 में से 23 नियुक्तियां चपरासी पद पर होने और बाद में चार लोगों के इस्तीफा देने की बात सामने आई थी। इस तरह पांच पद रिक्त बताए गए थे।

    वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी
    पंजाब वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में दलील दी कि वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी और याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन दिसंबर 2022 में प्राप्त हुआ था। इसी आधार पर उसकी नियुक्ति के दावे को फरवरी 2023 में खारिज कर दिया गया था।

    हाई कोर्ट ने हालांकि पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वेटिंग लिस्ट में नाम होने मात्र से नियुक्ति का स्वत अधिकार नहीं बनता, लेकिन नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध रिक्ति और अभ्यर्थी की मेरिट को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से कार्रवाई करने की छूट भी नहीं है। अदालत ने कहा कि रिक्ति उपलब्ध होने पर मेरिट के अनुसार अगले अभ्यर्थी को नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए।

    प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज वाला आदेश रद
    हाई कोर्ट ने प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज करने वाला आदेश रद कर दिया। पंजाब वक्फ बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह चपरासी पद पर उनकी नियुक्ति के मामले पर विचार करे और अन्य 23 उम्मीदवारों को नियुक्ति दिए जाने की तारीख से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण समेत सभी काल्पनिक लाभ देने पर निर्णय ले। यह पूरी कार्रवाई आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर करनी होगी।

     

  • अमेरिका ने किया MQ-20 का ऑटोनॉमस टेस्ट, बिना पायलट उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन

    अमेरिका ने किया MQ-20 का ऑटोनॉमस टेस्ट, बिना पायलट उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन

    न्यूयॉर्क

    MQ-20 एवेंजर जनरल एटॉमिक्स द्वारा विकसित जेट इंजन वाला बिना पायलट वाला फाइटर जेट है. यह विमान 741 km/hr की गति से उड़ सकता है. 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है. करीब 20 घंटे हवा में रह सकता है. अमेरिकी नौसेना ने इसे अपने भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के रूप में नहीं चुना है। 
     
    बल्कि यह ऑटोनॉमस, मिशन प्लानिंग और कमांड-कंट्रोल सिस्टम के विकास के लिए टेस्ट एयरक्राफ्ट यानी सरोगेट के रूप में काम कर रहा है. जनरल एटॉमिक्स के अनुसार यह भूमिका पिछले पांच साल से ज्यादा समय से निभा रहा है, भले ही नए खास बनाए गए डेमोंस्ट्रेटर विमान आ चुके हों। 

    10 सितंबर को हुए ग्रे फ्लैग 2026 प्रदर्शन में अमेरिकी नौसेना की स्ट्राइक प्लानिंग एंड एग्जिक्यूशन सिस्टम्स टीम ने एक पूरा मिशन तैयार किया, उसे MQ-20 को भेजा और बाद में परिणामों की समीक्षा की. यह सिर्फ बिना पायलट के उड़ान भरने का परीक्षण नहीं था. असल चुनौती यह है कि कमांडर ऑटोनॉमस विमानों को बड़े युद्ध योजना का हिस्सा कैसे बनाएं। 

    सीएएमपी तकनीक क्यों खास है?
    इस परीक्षण का मुख्य आधार कोलैबोरेटिव ऑटोनॉमी मिशन प्लानिंग यानी CAMP है. सीएएमपी योजना को अलग-अलग विमान के लिए लागू करने की भूमिका, कार्य, समय, अधिकार और सीमाओं में बदल देता है. ऑटोनॉमस सिस्टम को पता चल जाता है कि उसे क्या हासिल करना है और किन सीमाओं के अंदर रहना है। 

    अगर हर ऑटोनॉमस विमान के लिए लगातार एक ऑपरेटर उड़ान पथ नियंत्रित करे तो ज्यादा विमान तैनात करने पर कंट्रोलर, ग्राउंड स्टेशन और संचार क्षमता भी उतनी ही बढ़ानी पड़ेगी. इससे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की उपयोगिता सीमित हो जाती है. सीएएमपी एक अलग मॉडल पेश करता है। 

    ऑपरेटर मिशन के उद्देश्य, समय, अधिकार और पाबंदियां तय करते हैं. बाकी ऑटोनॉमस विमान खुद संभालता है. इससे ऑपरेटर का बोझ कम होता है और भविष्य में कई कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को आसानी से शामिल किया जा सकता है। 

    बिगड़े संचार माहौल में भी काम करने की क्षमता
    यह क्षमता विरोधी के जैमिंग या सैटेलाइट संचार बाधित होने पर भी महत्वपूर्ण है. अगर विमान को पहले से अपना मिशन, समय, इलाका और सीमाएं पता हों तो वह सीधा कंट्रोल टूटने पर अपना काम जारी रख सकता है। 

    पहले नवंबर 2024 में अमेरिकी नौसेना ने पैटक्सेंट रिवर से कैलिफोर्निया में उड़ रहे MQ-20 को लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिए नियंत्रित किया था. वह लंबी दूरी के कमांड-कंट्रोल का परीक्षण था. ग्रे फ्लैग 2026 मिशन स्तर की ऑटोनॉमस की ओर बढ़ता है। 

    MQ-20 परिपक्व जेट पावर्ड प्लेटफॉर्म है. इस पर नए सॉफ्टवेयर, ऑटोनॉमस फंक्शन और संचार आर्किटेक्चर का परीक्षण आसानी से हो सकता है. इसकी गति, उड़ान अवधि और मिशन सिस्टम असल युद्ध विमान के करीब हैं. जनवरी 2026 में जनरल एटॉमिक्स ने बताया कि एवेंजर ने सरकारी रेफरेंस ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर के साथ क्रूड एग्रेसर विमान के खिलाफ लाइव ऑटोनॉमस इंटरसेप्ट भी किया। 

    ऑनबोर्ड सेंसर से खुद से फैसले लिए. इससे भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर विकसित करने में मदद मिल रही है. सीएएमपी की असली ताकत इंटरऑपरेबिलिटी में है. भविष्य में ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य सिस्टम एक नेटवर्क में जुड़ेंगे. यह ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य नेटवर्क्ड सिस्टम को एक ही मिशन उद्देश्य के इर्द-गिर्द कॉर्डिनेट करने में मदद कर सकता है। 

  • तलाक केस में पत्नी के मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का आदेश

    तलाक केस में पत्नी के मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का आदेश

    ग्वालियर
    ग्वालियर खंडपीठ की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में ऐसा फैसला सुनाया है जिसने तलाक की कार्यवाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। हाईकोर्ट में एक मामला पहुंचा जहां, निचली कोर्ट ने तलाक की कार्यवाही के दौरान महिला का मेडिकल टेस्ट कराने की अनुमति दे दी थी। इस मामले में जरुरी बात ये है कि कोर्ट द्वारा यह अनुमति तब दी गई थी जब, पति-पत्नी अपनी गवाही दे चुके थे और साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। पत्नी ने निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनती देते हुए अपनी दलील रखी।

    मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी सकती- हाईकोर्ट का फैसला
    हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद और शारीरिक स्वायत्तता से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने अशोकनगर जिला अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत तलाक के मुकदमे में पत्नी का मेडिकल परीक्षण कराने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्षों की गवाही पूरी हो चुकी हो और मामला अंतिम बहस के स्तर पर पहुंच गया हो, तब किसी पक्षकार को अपनी खामियां छिपाने या नए सबूत जुटाने के लिए मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    यह है मामला
    याचिकाकर्ता का विवाह 28 अप्रैल 2004 को हुआ था। जुलाई 2011 में अलग होने के बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की। पति का आरोप था कि पत्नी के तीन ऑपरेशन हो चुके है और शारीरिक स्थिति के कारण वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को नकारते हुए साथ रहने की इच्छा जताई थी और बताया कि शादी के बाद अपेंडिक्स का इलाज हुआ था, जिसकी जानकारी पति को पहले से थी।

    निचली अदालत दी थे अनुमति, पत्नी ने दी चुनौती
    निचली अदालत में दोनों पक्षों की गवाहियां और साक्ष्य दर्ज होने के बाद जब केस अंतिम बहस के लिए तय हुआ, तब 22 जून 2012 को पति ने धारा 151 सीपीसी के तहत पत्नी के मेडिकल परीक्षण के लिए आवेदन दिया। जिला अदालत अशोकनगर ने 2 जुलाई 2012 को इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने अधिवक्ता मधुर भार्गव के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

     

  • सिंधु कला केंद्र में दिखेगी 1800 साल पुरानी धरोहर, दुर्लभ सिक्कों का होगा खास संग्रह

    सिंधु कला केंद्र में दिखेगी 1800 साल पुरानी धरोहर, दुर्लभ सिक्कों का होगा खास संग्रह

    इंदौर 

     सिंध की प्राचीन संस्कृति, कला और ऐतिहासिक धरोहरों से आज की युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए इंदौर शहर में एक भव्य 'सिंधु कला केंद्र' का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लगभग 10 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में आकार ले रहे इस प्रोजेक्ट पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इस कला केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहां सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं रखी जाएंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए लोगों को उस पुराने दौर की जिंदगी का साक्षात अहसास कराया जाएगा।

    ऑडिटोरियम से लेकर सिंधी फूड जोन तक की सुविधा

        सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी के मुताबिक, समाज के सहयोग से बन रहे इस प्रोजेक्ट को अगले 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिसर में एक भव्य संग्रहालय के साथ-साथ 270 सीटों वाला एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम भी तैयार किया जाएगा।

    यहां सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वर्कशॉप और प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा सकेंगी। इसके अलावा, सिंधी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए एक खास 'सिंधी फूड जोन' भी बनाया जाएगा। आने वाले समय में यह केंद्र सभी समाज के लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

    एआई और 3D तकनीक से जीवंत होगा सिंध का पुराना दौर
        इस म्यूजियम को बेहद आधुनिक तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। 3D और इमर्सिव तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुराने सिंध क्षेत्र के रहन-सहन, व्यापार, पहनावे और संस्कृति को डिजिटल रूप में पर्दे पर उतारा जाएगा। इसका मकसद दर्शकों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं है।

    उन्हें उस युग में होने का जीवंत अनुभव कराना है। इस पूरे काम के लिए इतिहास में रुचि रखने वाले जानकारों की एक अलग टीम बनाई जा रही है, जो देशभर में मौजूद सिंध की प्राचीन वस्तुओं और जानकारियों को एक जगह इकट्ठा करेगी।

    सहेजे जा रहे 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के और पुश्तैनी धरोहरें

        प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट अर्जुन हबलानी ने बताया कि विभाजन से पहले के सिंध की यादों को संजोने के लिए वरिष्ठ नागरिकों और इतिहास प्रेमियों की मदद ली जा रही है। यहां तक कि पाकिस्तान में रह रहे सिंधी समुदाय के लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है।

        लोगों ने स्वेच्छा से पुराने बर्तन, ताले, हाथ वाले पंखे और कई ऐतिहासिक वस्तुएं उपलब्ध कराई हैं। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण सिंध क्षेत्र के राजाओं के 1700 से 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के होंगे। इनमें चच वंश के राजा यशादित्य (लगभग 679-712 ईस्वी) के समय के वे सिक्के भी शामिल हैं, जिन पर मुकुट पहने हुए राजा और त्रिशूल की आकृति उकेरी गई है।

     

  • इंदौर झांकी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, वॉच टावर-CCTV से होगी निगरानी

    इंदौर झांकी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, वॉच टावर-CCTV से होगी निगरानी

     इंदौर
     अनंत चतुर्दशी के ऐतिहासिक झांकी चल समारोह को लेकर इंदौर पुलिस ने सुरक्षा का पूरा खाका तैयार कर लिया है। बुधवार को पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर आपातकालीन इंतजामों की समीक्षा की। इस बार पुलिस व्यवस्था को छह संभाग, 12 जोन और 22 सेक्टर में बांटकर मैदान में उतारा जाएगा।

    प्रमुख स्थानों पर वाच टावर, ड्रोन, सीसीटीवी और फेस रिकग्निशन कैमरों से निगरानी होगी। चल समारोह के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर वाच टावर बनाए जाएंगे। यहां पुलिसकर्मी सीसीटीवी और पीए सिस्टम के जरिए लगातार निगरानी करेंगे।

    प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों की बहुमंजिला इमारतों पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा। पुलिसकर्मी दूरबीन और कैमरों से नजर रखेंगे। ड्रोन यूनिट भी पूरे समारोह के दौरान सक्रिय रहेगी। ड्रोन से मिलने वाले फुटेज पर वाचर्स नजर रखेंगे और किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी संबंधित पुलिस टीम को तत्काल दी जाएगी।

    बदमाशों पर खास नजर
    पुलिस के अनुसार चिह्नित गुंडे-बदमाशों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। किसी भी तरह का विवाद, उपद्रव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। आयोजकों को झांकियों और अखाड़ों के सभी वाहनों की फिटनेस और मैकेनिकल जांच पहले कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    विद्युत व्यवस्था का सुरक्षा प्रमाणपत्र भी लेना होगा। प्रत्येक वाहन के लिए वैध लाइसेंस वाले चालक के साथ स्पेयर ड्राइवर रखने को कहा गया है। चल समारोह में शामिल वाहन चालकों की ब्रीद एनालाइजर से जांच होगी। शराब या अन्य नशे के सेवन की पुष्टि होने पर चालक को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।

     

  • पंजाब में फ्री गारंटियों की होड़, जनता को राहत और अर्थव्यवस्था पर बहस

    पंजाब में फ्री गारंटियों की होड़, जनता को राहत और अर्थव्यवस्था पर बहस

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में सियासी दलों की ओर से मुफ्त गारंटियों पर फिर दांव खेलने की तैयारी है। सूबे की सियासत में ये मुफ्त सुविधाएं अब महज लोकलुभावन घोषणाएं ही नहीं रहीं, बल्कि मतदाताओं तक असरदार पहुंच का एक बड़ा माध्यम बन चुकी हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार जहां इसे अपनी सियासी ताकत का एक बड़ा आधार मानती है वहीं सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी इन सबके बंद होने का डर भी दिखा रही है।अपने लोक मिलनी कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अब खुलेआम इस तरह की आशंका मतदाताओं के समक्ष जता रहे हैं। 

    पुराना है सियासी दांव
    मुफ्त गारंटियों व सुविधाओं की बात करें तो यह सियासी दांव नया नहीं है। पंजाब में पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखें तो इस तरह की लोकलुभावन घोषणाएं पहले की जाती रही हैं। सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस तरह के वादे किए और उन्हें इसका लाभ भी मिला।

    साल 2022 में पहली बार पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की सरकार को तो इसका बंपर फायदा मिला था। लिहाजा, इस बार भी आप इस पर बड़ा दांव खेलने जा रही है। ऐसे में दूसरे दल भी विभिन्न वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए इस तरह की मुफ्त गारंटियों का सहारा लेने की तैयारी में हैं।

    उधर, राजनीतिक मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि चुनावी चौसर पर इन मुफ्त गारंटियों के बूते मिली जीत सूबे की अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित करती है। मुफ्त बंट रहे राजस्व के कारण राज्यों का राजकोषीय घाटा बढ़ता है। सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों व नए रोजगार सृजन जैसे बुनियादी ढांचागत निवेश के लिए बजट की भारी कमी होती है। 

    सीएम की चेतावनी
    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि पारंपरिक विरोधी पार्टियों की सत्ता में वापसी से पंजाब की कल्याणकारी योजनाएं खतरे में पड़ जाएंगी। मान ने कहा कि विरोधी धड़े यदि सत्ता में आ गए तो मुफ्त बिजली व महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजनाएं और 1000-1500 रुपये की सम्मान राशि बंद कर देंगे। साथ ही, निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों को कमजोर किया जाएगा। लोक मिलनी कार्यक्रमों में इस तरह की आशंका जताते हुए सीएम दोबारा आप को मौका देने की अपील कर रहे हैं।

    गेमचेंजर बनीं इन घोषणाओं से पलटे समीकरण
    साल 2022 : आप सरकार
    – 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, दो माह में 600 यूनिट तक बिलिंग चक्र में शून्य बिल की व्यवस्था है।
    – महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर।
    – मावां-धीयां सत्कार योजना : महिलाओं को हर महीने 1000 व एससी महिलाओं को 1500 रुपये आर्थिक राशि मिलती है।
    – मुख्यमंत्री सेहत योजना : हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा।
    आम आदमी क्लीनिक : क्लीनिकों में प्राथमिक इलाज, दवाओं और निर्धारित जांचें मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं।
    – मेरी रसोई राशन किट : करीब 40 लाख परिवारों को तिमाही मुफ्त किट में चीनी, चना दाल, सरसों तेल, हल्दी और नमक देने की योजना।
    – सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और किसानों के लिए मुफ्त बिजली। किशोरियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड।

    साल 2017 : कांग्रेस सरकार
    – किसानों के लिए मुफ्त बिजली और कर्ज माफी योजना।
    – अप्रैल 2021 से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर।
    – सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त साइकिल सुविधा।
    – आटा-दाल योजना में सब्सिडी वाला राशन। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2021 में 750 से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह की गई।
    – आशीर्वाद योजना : आर्थिक रूप से कमजोर-एससी परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता राशि साल 2021 में 21 से बढ़ाकर 51 हजार की गई।

    साल 2007-2017 : शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार
    – आटा-दाल योजना, 2016-17 तक करीब 36.35 लाख परिवार योजना के दायरे में थे।
    – किसानों को मुफ्त बिजली, एससी, बीसी व बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली।
    – माई भागो विद्या योजना : सरकारी स्कूलों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए मुफ्त साइकिलें दी जाती थीं।
    – मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा : साल 2016 से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालुओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती थी।
    – शगुन योजना : गरीब व एससी परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता योजना। 

  • शासकीय शालाओं में 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती, तीन परीक्षाओं का शेड्यूल जारी

    शासकीय शालाओं में 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती, तीन परीक्षाओं का शेड्यूल जारी

    शासकीय शालाओं में 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू, तीन परीक्षाओं की तिथियां घोषित

    सरकारी स्कूलों में 5,000 नियमित पद और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा पद भरे जाएंगे

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ के शासकीय और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में कुल 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी अनुसार, शासकीय विद्यालयों में 5 हजार नियमित पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित की जाएगी।नियमित भर्ती में सहायक शिक्षक के 2,292, सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 200, शिक्षक के 1,654 और व्याख्याता के 854 पद शामिल हैं। इनमें ई संवर्ग के 2,227 और टी संवर्ग के 2,773 पद हैं।

    घोषित कार्यक्रम के अनुसार सहायक शिक्षक की लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर 2026, को आयोजित होगी इसी प्रकार शिक्षक की 25 अक्टूबर 2026 को और व्याख्याता की 29 नवंबर 2026 को होगी। सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पदों की परीक्षा तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई है। सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि व्याख्याता पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी ।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा (शैक्षणिक) पदों पर पहली बार केंद्रीय कृत कंप्यूटर आधारित भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। इन पदों की भर्ती अधिसूचना सितंबर माह में जारी की जा रही है और ऑनलाइन आवेदन अक्टूबर माह से शुरू करने की तैयारी है।उल्लेखनीय है कि शासकीय एवं उत्कृष्ट विद्यालयों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 6812 पदों की भर्तियाँ की जा रही हैं ।

  • बस्ती-वार्ड स्तर पर होगा ग्रामीणों से संवाद, गांव की जरूरतों के आधार पर बनेगी विकास योजना

    बस्ती-वार्ड स्तर पर होगा ग्रामीणों से संवाद, गांव की जरूरतों के आधार पर बनेगी विकास योजना

    2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना

    ग्रामीणों की भागीदारी से तय होगी गांवों के विकास की दिशा

    गांव की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बनेगी विकास की कार्ययोजना 

    अक्टूबर-नवंबर में बस्ती और वार्ड स्तर पर होगा ग्रामीणों से सीधा संवाद

    रायपुर, 
     प्रदेश के गांवों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों, स्थानीय संसाधनों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

          विकसित ग्राम पंचायत योजना को वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने का प्रमुख माध्यम बनाया गया है। इसके तहत गांवों में उपलब्ध संसाधनों, मौजूदा परिसंपत्तियों और विकास संबंधी कमियों का आकलन कर ग्रामीणों की सहभागिता से आवश्यक कार्यों की पहचान की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद योजनाओं को विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकित किया जाएगा।

    2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में होगी योजना निर्माण की शुरुआत
          प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस अवसर पर ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित आधारभूत आंकड़ों, मानचित्रों, अनुमेय कार्यों और योजना निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। 
         ग्राम सभाओं में गांव की विकास संबंधी कमियों, जल बजट और ई-जल पोर्टल से प्राप्त अनुशंसित कार्यों की जानकारी भी साझा की जाएगी। इसके साथ ही गांवों में मौजूद ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान की जाएगी, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन अभी तक डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।
          ग्राम सभा में बस्ती, वार्ड और ग्राम स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन तथा सामुदायिक परामर्श की प्रक्रिया और समय-सीमा भी निर्धारित की जाएगी, ताकि योजना निर्माण में अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    अक्टूबर-नवंबर में गांव-गांव पहुंचकर लिए जाएंगे ग्रामीणों के सुझाव
         विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने के लिए सितंबर माह में प्रारंभिक तैयारियां पूरी की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के साथ ही युक्तधारा पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न मानचित्र परतों के आधार पर ग्राम पंचायतों का आधारभूत डेटा तैयार किया जाएगा। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।

          इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं होने वाली परिसंपत्तियों को युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विकास संबंधी कमियों की पहचान कर प्रस्तावित कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा।

    दिसंबर में ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत होगी विकास योजना
         दिसंबर माह में भूमि एवं क्षेत्र परिचय के आधार पर तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, उनके संभावित स्थानों और संबंधित विवरण की जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। ग्राम सभा में व्यक्तिगत लाभार्थियों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित कर विकसित ग्राम पंचायत योजना को अनुमोदित किया जाएगा। ग्राम सभा से अनुमोदित योजना को डिजिटल समेकन की आगामी प्रक्रिया के लिए विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा।

    15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर होगा योजनाओं का समेकन
           ग्राम पंचायतों से अनुमोदित योजनाएं प्राप्त होने के बाद 15 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विकासखंड स्तर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकीकृत करते हुए संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी। इसके बाद विकासखंड स्तर पर तैयार समेकित योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। इस प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं को विकासखंड और जिला स्तर की विकास कार्ययोजनाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

    जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान
           विकसित ग्राम पंचायत योजना के अंतर्गत गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर ऐसे कार्यों की पहचान की जाएगी, जिनसे स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और गांवों के विकास को गति मिल सके।

    ग्राम सभा की सहमति से तय होंगे विकास कार्य
           विकसित ग्राम पंचायत योजना की संपूर्ण प्रक्रिया में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीणों की राय और स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों में आवश्यकतानुसार नए कार्य शामिल किए जा सकेंगे तथा अनुपयुक्त कार्यों को हटाया जा सकेगा। प्रत्येक प्रस्तावित कार्य का स्थल सत्यापन करने के साथ ही समुदाय के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद कार्यों को अंतिम अनुमोदन के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

          इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सहभागी एवं पारदर्शी बनाने के साथ ही गांवों के समग्र और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी।

  • कूनो सफारी सीजन शुरू होने को तैयार, खुले जंगल में 16 चीतों की होगी पहली झलक

    कूनो सफारी सीजन शुरू होने को तैयार, खुले जंगल में 16 चीतों की होगी पहली झलक

    श्योपुर 

    मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में सफारी का रोमांच इस बार अपने चरम पर होने वाला है। 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पर्यटन सत्र में सैलानियों को एक बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। पिछले चार सालों में ऐसा पहली बार होगा जब अक्टूबर की शुरुआत में ही 16 चीते खुले जंगल में घूमते नजर आएंगे। चीतों के इस खुले दीदार से पार्क प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हो सकती है।

    20 हजार सैलानियों के आने का अनुमान, कारोबारियों के खिले चेहरे
    पिछले सीजन में कूनो में चीतों का दीदार करने करीब 9,117 पर्यटक पहुंचे थे। लेकिन इस बार खुले जंगल में 16 चीतों की मौजूदगी को देखते हुए प्रबंधन ने करीब 20 हजार पर्यटकों के आने का अनुमान जताया है। सैलानियों की इस संभावित भीड़ से श्योपुर के स्थानीय होटल संचालकों, सफारी वाहनों और गाइडों समेत दर्जनों कारोबारों में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है।

    सफारी बुकिंग हुई आसान, श्योपुर में खुलेगा चौथा काउंटर
    पर्यटकों की बढ़ती तादाद को देखते हुए सुविधाओं में भी इजाफा किया जा रहा है। अब तक सफारी की ऑफ़लाइन टिकट सिर्फ टिकटोली, अहेरा और पीपलवाड़ी (विजयपुर) गेट से ही मिलती थी। लेकिन 1 अक्टूबर से श्योपुर जिला मुख्यालय पर स्थित कूनो कार्यालय में भी चौथा बुकिंग काउंटर शुरू हो जाएगा। इस नई व्यवस्था से सैलानियों को सफारी बुकिंग के लिए सीधे पार्क के गेट तक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

    50 करोड़ से बनेगी फोरलेन सड़क
        पार्क के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में 'टिकटोली गेट' को खास तरीके से विकसित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग यहां एक फैसिलिटेशन सेंटर तैयार कर रहा है, जहां पर्यटक आराम करने के साथ-साथ चीतों और श्योपुर की स्थानीय संस्कृति से जुड़ी रोचक जानकारियां ले सकेंगे।

    इसके अलावा, टिकटोली तक पहुंच को और आसान बनाने के लिए सेसईपुरा रोड को फोरलेन करने का प्लान है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

    कूनो में 51 चीतों का कुनबा
    वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 51 है। इन चीतों को देखने और सफारी का बेहतरीन अनुभव देने के लिए इस बार पार्क के अंदर गाड़ियों और गाइडों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।