Author: NewseDay

  • Pitru Paksha 2026: 27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध की पूरी तारीखें

    Pitru Paksha 2026: 27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध की पूरी तारीखें

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति आदर, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन काल माना गया है. भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में पितृलोक से हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर अपने परिजनों के बीच पधारते हैं.

    साल 2026 में पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर 2026, रविवार को आश्विन प्रतिपदा श्राद्ध के साथ होने जा रहा है, जो कि 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. इस बार किसी भी तिथि का क्षय न होने के कारण यह पावन पर्व पूरे 16 दिनों तक श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा. आइए जानते हैं पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत, तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त, क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए.

    कब है पहला श्राद्ध?
    प्रतिपदा श्राद्ध (प्रथम तिथि): 27 सितंबर 2026 (रविवार)

    सर्वपितृ अमावस्या (समापन): 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)

    26 सितंबर को क्या है?
    ज्योतिषियों के मुताबिक, 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, जिसे श्राद्ध पूर्णिमा के नाम से नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है. लेकिन, असल में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर यानी रविवार से होगी.

    श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त
    शास्त्रों के अनुसार, पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान हमेशा दोपहर के समय ही करना चाहिए. इसके लिए विशेष रूप से कुतप और रोहिणी काल को सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

    कुतप मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक

    रोहिणी मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से दोपहर 1 बजकर 12 मिनट तक

    अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से दोपहर 3 बजकर 36 मिनट तक

    प्रातः काल सूर्योदय के तुरंत बाद या संध्या काल में श्राद्ध कर्म करना सख्त मना होता है.

    श्राद्ध पक्ष में क्या करें?
    – श्राद्ध के दिन ब्राह्मण भोजन कराने से पहले भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए अवश्य निकालें. मान्यता है कि इनके माध्यम से अर्पित किया गया अन्न सीधे हमारे पितरों तक पहुंचता है.

    – पितरों को जलांजलि देते समय तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल मिलाएं. तर्पण करते समय दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा धारण करना अनिवार्य होता है.

    – इन दिनों में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और तिल का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है.

    – तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें, क्योंकि दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है.

    पितृ पक्ष में क्या न करें?

    तामसिक भोजन से दूरी
    पूरे 16 दिनों तक घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और बासी भोजन का सेवन न करें.

    मांगलिक कार्य न करें
    इस दौरान नए घर का गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या विवाह जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

    नई खरीदारी से बचें
    सामान्यतः श्राद्ध पक्ष में नए कपड़े, वाहन या प्रॉपर्टी आदि की खरीदारी करने से बचना चाहिए.

    अतिथि का अनादर न करें
    द्वार पर आए किसी भी भिक्षुक, असहाय व्यक्ति या पशु-पक्षी को खाली हाथ या भूखा न लौटाएं.

    शारीरिक संयम
    पितृ पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से बचना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

  • 700 ग्राम वजन से पलटा मैच, सुचिका ने विवादित फैसले पर उठाए सवाल

    700 ग्राम वजन से पलटा मैच, सुचिका ने विवादित फैसले पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली
    एशियन गेम्स 2026 में भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में पहला पदक दिलाने वाली सुचिका तारियाल ने अपना दर्द साझा किया है। सुचिका को सेमीफाइनल मुकाबले में विवादित फैसले के कारण हार का सामना करना पड़ा था। वह महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किलोग्राम कैटेगरी में विवादित फैसले के कारण बाहर हो गई थीं। इस फैसले का पूरी टीम और खुद सुचिका ने विरोध किया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

    भारत वापस लौटने पर उनका जबरदस्त स्वागत हुआ और वह फैंस से मिले प्यार से काफी खुश नजर आईं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

    एक राउंड और खिला देते- सुचिका
    गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में सुचिका ने कहा, 'लोग यहां मेरे स्वागत के लिए आए हैं, जिसे देखकर बहुत खुशी हो रही है। भले ही मैं मेडल का रंग बदल नहीं सकी, लेकिन आप लोगों के दिलों में जगह बना ली है। मेरे लिए इतना ही काफी है। वह मुझे एक राउंड और खिला देते, तो बेहतर रहता। मैं बेशक हार जाती, लेकिन उसे स्वीकार कर लेती, लेकिन जो हुआ, उसे स्वीकार नहीं सकती। यही वजह रही कि मैंने उनके फैसले का विरोध किया। हालांकि, कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं, लेकिन मुझे ही पता है कि मैंने वहां तक पहुंचने के लिए कितनी कड़ी मेहनत की थी। मैं ऐसे नहीं हार सकती।'

    क्या था विवाद?
    सुचिका को सिंगापुर की हुई हून टेओ के खिलाफ हार मिली थी, जिसके बाद भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विरोध के बाद मुकाबला आर्बिट्रेशन में गया, जहां जजों ने मुकाबले की समीक्षा की और दोबारा स्कोरिंग की। आखिरकार नतीजे का फैसला 'कम वजन वाले खिलाड़ी' के नियम से हुआ। दुर्भाग्य से, सुचिका का वजन अपनी प्रतिद्वंदी से 700 ग्राम ज्यादा था, जिसके चलते उन्होंने मुकाबला गंवा दिया।

    बैट लक के कारण हारीं सुचिका
    सुचिका ने कहा, "मैच को ड्रॉ घोषित किया गया, जबकि हम दोनों बराबरी पर ही थे। इसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया, वहां मैं भी हो सकती थी, लेकिन पता नहीं, उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? मैं इसे चीटिंग नहीं कह सकती, लेकिन अगर आप मुकाबला ड्रॉ कर रहे हो, मुझे भी जिता सकते हो। मुझमें ऐसी क्या कमी थी जो उन्हें जिता दिया गया। हां, इसे 'बैड लक' कहा जा सकता है।"

    फेडरेशन पर लगाए आरोप
    सुचिका ने मैच के बारे में बात करते हुए कहा, मुझे इस खेल का ज्ञान है। मैं दोनों ही रांउड जीत रही थी। फिर भी लोग कह रहे हैं कि मेरी तरफ से विरोध दर्ज करना गलत था। मैं एक मिनट के राउंड में भी उन पर हावी रही। वो पीछे-पीछे भाग रही थीं। मुझे लगता है कि फेडरेशन सिंगापुर का है, तो क्या पता उनको ही जिताना था। हालांकि, मैं ब्रॉन्ज मेडल से खुश हूं, क्योंकि ये मेरी जान से भी बढ़कर है, मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। मुझे बहुत खुशी है। भले ही मैं गोल्ड से चूक गई, लेकिन आप मेरे स्वागत के लिए यहां आए, इसकी बहुत खुशी है। मैं अब वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी करूंगी। आगे भी मेरी फाइट्स हैं। मैंने ब्रेव के लिए साइन किया है।'

  • 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से निगरानी, महिलाओं ने संभाली कमान

    2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से निगरानी, महिलाओं ने संभाली कमान

    महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से होगी निगरानी

    -निवी ट्रंचिंग ग्राउंड और देवरी गौशाला में लगाए गए पौधों की लोकेशन होगी दर्ज, जीवित पौधों की स्थिति भी सामने आएगी

    मुरैना
     शहर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से अमृत हरित महा अभियान एवं वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग की जाएगी। नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधों को अमृत मित्र पोर्टल के माध्यम से जियो टैग किया जाएगा। इससे पौधों की वास्तविक लोकेशन दर्ज होने के साथ उनकी स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है।
    नगर निगम क्षेत्र में वूमेन फॉर ट्री अभियान के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को कुल 2170 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए निवी ट्रंचिंग ग्राउंड में 1070 और देवरी गौशाला में 1000 पौधे लगाए हैं। पौधरोपण के बाद अब नगर निगम प्रशासन इनकी निगरानी और संरक्षण पर जोर दे रहा है।

    तीन माह बाद होगी स्थिति की निगरानी
    नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार लगाए गए पौधों की जियो ट्रैकिंग किया जाना अनिवार्य है। लगाए गए पौधे करीब तीन माह पुराने हो चुके हैं। ऐसे में इनकी जियो ट्रैकिंग कर लोकेशन दर्ज की जा रही है। इससे भविष्य में यह पता लगाने में आसानी होगी कि पौधरोपण वाले स्थान पर कितने पौधे मौजूद हैं और कितने पौधे जीवित हैं।

    महिलाओं के जिम्मे पौधों की देखभाल
    अभियान के तहत केवल पौधे लगाने तक ही जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पौधों की देखभाल का जिम्मा भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। महिलाओं द्वारा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है। नगर निगम का उद्देश्य पौधरोपण के साथ इन पौधों को संरक्षित कर उन्हें पेड़ के रूप में विकसित करना है।

     जियो ट्रैकिंग से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
    जियो ट्रैकिंग के बाद प्रत्येक पौधे की लोकेशन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी। आगे पौधों के बड़े होने के बाद उनकी स्थिति की दोबारा निगरानी की जाएगी। इससे पौधरोपण अभियान के परिणामों का आकलन करने और पौधों के जीवित रहने की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

  • ग्रामीण पर्यटन से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर, विदेशी सैलानियों को लुभा रहे गांव

    ग्रामीण पर्यटन से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर, विदेशी सैलानियों को लुभा रहे गांव

    विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल

    लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन के अतिथियों ने ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और हाट-बाजार का लिया अनुभव

    लमना में दिखी संस्कृति और अपनत्व की खूबसूरत तस्वीर

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवनशैली, लोक संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। पर्यटन के बदलते स्वरूप में अब पर्यटक केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांवों की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय खान-पान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे पर्यटकों का प्रवास इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की जीवंत मिसाल है।

    ब्रिटेन से आए श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणो ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी अतिथियों ने भी ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ सहजता से घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया।

    लमना विलेज स्टे में अतिथियों का  अनुभव केवल ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, पारंपरिक परिवेश और स्थानीय जीवन से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान अतिथियों ने ग्रामीणों से संवाद किया, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के सहज वातावरण का आनंद लिया।  अतिथियों ने ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया। 

    ग्रामीण हाट बना खास आकर्षण

    लमना प्रवास के दौरान स्थानीय ग्रामीण हाट का भ्रमण विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हाट में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा। ग्रामीण बाजार की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और लोगों के सहज व्यवहार ने अतिथियों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।  

    ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ने का अनुभव

    लमना विलेज स्टे की खासियत यह है कि यहां पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा बनकर उसे महसूस करते हैं। ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और पारंपरिक ग्रामीण वातावरण को नजदीक से जाना। गांव की सादगी, प्राकृतिक परिवेश और लोगों की सहज आत्मीयता ने उनके प्रवास को एक अलग तरह का अनुभव दिया।

    छत्तीसगढ़ के पर्यटन पहचान में जुड़ रहा नया अध्याय

    छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब प्रकृति और दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर अनुभव आधारित पर्यटन की ओर विस्तार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ने वाले पर्यटन मॉडल को महत्व मिल रहा है। 

    प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का संगम है लमना

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर सहित अनेक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल शामिल हैं।  लमना विलेज स्टे जैसे ग्रामीण पर्यटन केंद्र पर्यटकों को  प्रकृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    बस्तर से लमना तक—छत्तीसगढ़ में अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती तस्वीर

    पर्यटक अब केवल पर्यटन स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन, खान-पान, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। 

    लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का अनुभव इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। यहां विदेशी मेहमानों ने किसी पर्यटन स्थल को दूर से देखने के बजाय गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को समझा और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन की सहजता को महसूस किया।

    विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना छत्तीसगढ़ का अपनापन

    लमना प्रवास के दौरान श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए।  वे ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ आत्मीयता से मिले । 

    विदेशी पर्यटकों का गांवों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों और नए अनुभवों तक विस्तार पा रही हैं।

    ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। 

    लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के उस पर्यटन मॉडल की खूबसूरत झलक है, जहां प्रकृति के साथ संस्कृति, गांव के साथ आतिथ्य और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। छत्तीसगढ़ की यही सहज, आत्मीय और जीवंत पहचान देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

  • शूटिंग में भारत का डबल धमाका, 2 मिनट में जीते गोल्ड और सिल्वर मेडल

    शूटिंग में भारत का डबल धमाका, 2 मिनट में जीते गोल्ड और सिल्वर मेडल

    नई दिल्ली
     जश्न मनाइए, खुशियों में डूब जाइए। एशियन गेम्स 2026 में दिन का आगाज इससे बेहतर नहीं हो सकता था। सिर्फ 2 मिनट के अंदर भारत को दो मेडल मिले, जिसमें एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल रहा। ये दोनों ही शूटिंग से आए। इसके साथ ही एशियन गेम्स की मेडल टैली में भारतीय दल ने जबरदस्त छलांग लगाई है। पहले वह एक गोल्ड के साथ 15वें नंबर पर था, जबकि अब 12वें नंबर पर पहुंच गया है।

    इन इवेंट में आए मेडल
    जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 से भारत के लिए बहुत बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। निशानेबाजी में भारत ने दो मेडल जीते है। कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने देश को निशानेबाजी में पहला गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया है। वहीं पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल मुकाबले में कमलजीत और सुरुचि सिंह की भारतीय जोड़ी ने दक्षिण कोरिया की मजबूत जोड़ी को एकतरफा अंदाज में पछाड़ते हुए पोडियम के शीर्ष पर तिरंगा फहराया। यह एशियन गेम्स में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है।

    5 शूटरों ने किया कमाल
    पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, रुद्राक्ष पाटिल और नीरज कुमार की भारतीय टीम ने सटीक निशानेबाजी का मुआयना पेश करते हुए भारत के खाते में सिल्वर मेडल जोड़ दिया। क्वालिफिकेशन और टीम इवेंट में निरंतरता दिखाते हुए भारतीय शूटर्स ने दूसरा स्थान हासिल कर पोडियम पर तिरंगा लहराया। वहीं उनके जीतने के तुरंत बाद 2 मिनट के अंदर भारत ने शूटिंग में एक और मेडल जीता, लेकिन इस बार मेडल का रंग गोल्ड था।

    कमलजीत और सुरुचि सिंह का फाइनल स्कोर:
        इंडिया – 484.6 (गोल्ड)
        साउथ कोरिया – 478.0 (सिल्वर)
        ईरान – 415.8 (ब्रॉन्ज)

    एशियाई रिकॉर्ड तोड़कर फाइनल में बनाई थी कमलजीत और सुरुचि सिंह ने जगह
    भारतीय निशानेबाजों का दबदबा सुबह क्वालिफिकेशन राउंड से ही देखने को मिल रहा था। कमलजीत और सुरुचि सिंह ने क्वालिफिकेशन में 587 अंकों का नया एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए पहले स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। क्वालिफिकेशन में ही उन्होंने दूसरे स्थान पर मौजूद मंगोलिया की टीम पर 70 अंकों की विशाल बढ़त बनाकर अपने मजबूत इरादे जाहिर कर दिए थे।

  • Asian Games 2026: परिनाज-सतनाम ने बढ़ाया पंजाब का मान, जीते कांस्य पदक

    Asian Games 2026: परिनाज-सतनाम ने बढ़ाया पंजाब का मान, जीते कांस्य पदक

    अमृतसर.

    जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेलों के मंच पर पंजाब के जांबाज खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अदम्य साहस और बेजोड़ खेल कौशल का ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में गौरव और उत्साह की एक नई लहर पैदा कर दी है।

    एथलेटिक्स के रेस ट्रैक से लेकर निशानेबाजी की शूटिंग रेंज तक, और रोइंग के वाटर कोर्स से लेकर हॉकी के मैदान तक, पंजाब की मिट्टी से निकले इन होनहार एथलीटों ने हर जगह अपनी धाक जमाई है। जालंधर, पटियाला, मानसा और संगरूर जैसे जिलों से आए खिलाड़ियों ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नए मुकाम हासिल किए, बल्कि महत्वपूर्ण मुकाबलों में पदक जीतकर और निर्णायक जीत दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेल जगत में पंजाब का दबदबा आज भी अटूट है।

  • कबड्डी में भारत की जीत का सिलसिला जारी, महिला टीम ने पक्का किया सिल्वर

    कबड्डी में भारत की जीत का सिलसिला जारी, महिला टीम ने पक्का किया सिल्वर

    नागोया
    भारत की महिला कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल मैच में नेपाल को 48-24 के अंतर से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारतीय खिलाड़ियों ने आशा के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत हासिल की है। कबड्डी में हमेशा से ही भारत का वैश्विक स्तर पर दबदबा रहा है। इस टूर्नामेंट में भी टीम इंडिया का दबदबा कायम है और अब भारत को गोल्ड से कम कुछ मंजूर नहीं होगा। फाइनल में भारत का मुकाबला ईरान और चीनी ताइपे के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।

    फाइनल में जगह बनाने के साथ ही भारतीय टीम ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है, लेकिन सभी को टीम इंडिया से गोल्ड की आस है। फाइनल मुकाबला शनिवार को खेला जाएगा। वहीं, भारत की पुरुष टीम भी सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है और कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया है। भारत की पुरुष टीम से भी गोल्ड मेडल की आस है।

    एशियन गेम्स में अजेय है भारतीय टीम
    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय टीम अब तक कोई भी मैच नहीं हारी है। सेमीफाइनल से पहले टीम इंडिया ने अपने तीनों ग्रुप मुकाबले जीते थे। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश पर 42-21 की जीत के साथ की थी, जिसके बाद ईरान को 37-23 से हराया। इसके बाद जापान पर 50-25 से शानदार हासिल की और ग्रुप-ए में टॉप पर रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई।
    कबड्डी में भारत का दबदबा
    कबड्डी को 1990 में एशियाई खेलों में शामिल किए जाने के बाद से भारतीय पुरुष टीम ने 9 पदक जीते हैं। इनमें 8 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2018 में भारत का स्वर्ण पदक जीतने का सिलसिला टूटा था, जब टीम को कांस्य पदक मिला था।

    कोच को चैंपियन बनने का भरोसा
    भारत की महिला कबड्डी टीम की कोच नीता डाडवे ने ईरान के खिलाफ शानदार जीत के बाद कहा था , 'हमने ईरान के खिलाफ काफी रणनीति बनाई थी। पहली बार हम दस से अधिक अंक से जीते हैं। इससे पहले सारे मुकाबले करीबी रहे हैं।' यह पूछने पर कि भारत को कौन हरा सकता है, उन्होंने कहा , 'कोई नहीं। हम विश्व में नंबर एक हैं और यह हमारा खेल है। इसकी शुरूआत भारत में हुई। हमारे पास बेहतरीन खिलाड़ी, तकनीक, रफ्तार और दमखम के साथ आत्मविश्वास है।’

  • भारत-वेस्टइंडीज T20 के टिकट ₹1,000 से ₹12,500 तक, बिक्री तेज

    भारत-वेस्टइंडीज T20 के टिकट ₹1,000 से ₹12,500 तक, बिक्री तेज

    इंदौर 
     इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को प्रस्तावित भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबले के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुक्रवार सुबह 6 बजे शुरू हो गई। बिक्री शुरू होने के पहले दो घंटे में सामान्य गैलरी कैटेगरी के करीब 80% टिकट बिक गए। टिकटों की बिक्री अधिकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म District by Zomato के जरिए की जा रही है।

    टिकट बिक्री शुरू होते ही क्रिकेट प्रेमियों ने बुकिंग शुरू कर दी। शुरुआती घंटों में कई कैटेगरी के टिकटों की मांग तेजी से बढ़ी। अलग-अलग स्टैंड की लाइव उपलब्धता मांग के अनुसार लगातार बदल रही है।

    एक हजार से 12,500 तक टिकट
    मैच के लिए टिकटों की कीमत अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार तय की गई है। सामान्य गैलरी के टिकट करीब 1,000 से 1,800 रुपए तक है। पवेलियन की टिकट कीमत ₹5,500 से ₹8,500 तक रखी गई है, जबकि हॉस्पिटैलिटी कैटेगरी के टिकट ₹11,000 और ₹12,500 तक हैं। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकता है।

    स्टूडेंट टिकट के लिए भी रही जबरदस्त मांग
    स्टूडेंट और विशेष रूप से दिव्यांग दर्शकों के लिए आरक्षित रियायती टिकटों की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। स्टूडेंट कोटे के करीब 1,200 रजिस्ट्रेशन कुछ ही समय में पूरे हो गए। दस्तावेज सत्यापन के बाद करीब 1,000 छात्रों को टिकट दिए जाने हैं। ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के बाद टिकटों की उपलब्धता मांग के अनुसार बदल रही है।

    11 अक्टूबर को होगा मुकाबला
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच यह T-20 मुकाबला 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर शहर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह है और ऑनलाइन टिकट बिक्री शुरू होने के साथ स्टेडियम में मुकाबला देखने की होड़ भी बढ़ गई है।

  • पालकों की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, LKG शुरू करने के निर्देश

    पालकों की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, LKG शुरू करने के निर्देश

    बिलासपुर.

    हाईकोर्ट ने बेमेतरा जिले में स्वामी आत्मानंद एक्सीलेंट इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एलकेजी कक्षाएं तुरंत शुरु करने का आदेश दिया है। यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया।

    बता दें कि बेमेतरा के ग्राम साजा के रहने वाले सुदर्शन लोढ़ी, सूरज साहू, गोविंद पटेल, दकवार बंजारे, लालाराम सोनी, चंद्र प्रकाश, मुकेश सोनी, आत्माराम साहू, भारत साहू, ओम प्रकाश सोनी, सुनीला वर्मा और देकोराम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि उनके बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य आय वाले परिवारों से हैं। वे अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा दिलाने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एलकेजी में एडमिशन दिलाना चाहते हैं, लेकिन बेमेतरा जिले एलकेजी की प्रवेश प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई है।

    याचिका में लगाया गया था ये आरोप
    याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य के अन्य जिलों में एलकेजी में दाखिले हो रहे हैं, लेकिन बेमेतरा में जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रबंधन ने बजट और स्टाफ की कमी का हवाला देकर दाखिला प्रक्रिया शुरु नहीं किया है। मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार राज्य सरकार ने सभी जिलों में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा देने की नीति बनाई है, तो बेमेतरा को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। यह अनुच्छेद 14 और 21ए का उल्लंघन है। कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर व्यवस्था पूरी कर दाखिला शुरु करने का निर्देश  दिया। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एजी डॉ. सौरभ कुमार पांडेय ने तर्क दिया कि एलकेजी पर आरटीआई का अनिवार्य  प्रावधान लागू नहीं होता, लेकिन कोर्ट ने  इसे अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि क्षेत्रीय भेदभाव किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।

  • स्टेटकॉन-2026 में CM साय का जोर, विकास में रियल एस्टेट की भूमिका अहम

    स्टेटकॉन-2026 में CM साय का जोर, विकास में रियल एस्टेट की भूमिका अहम

    विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में रियल एस्टेट सेक्टर की होगी अहम भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री क्रेडाई छत्तीसगढ़ स्टेटकॉन-2026 ‘बिल्डिंग विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री ने कहा – 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में आधुनिक शहरों, गुणवत्तापूर्ण आवास और मजबूत अधोसंरचना पर रहेगा विशेष जोर

    स्टेट कैपिटल रीजन बनेगा प्रदेश के विकास का नया ग्रोथ इंजन, रायपुर के साथ दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव के विकास को मिलेगी नई गति

    सुशासन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 400 से अधिक सुधार, प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से बढ़ी पारदर्शिता

    नई औद्योगिक विकास नीति के बाद छत्तीसगढ़ को मिले 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

    रायपुर,
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित क्रेडाई छत्तीसगढ़ स्टेटकॉन-2026 ‘बिल्डिंग विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में रियल एस्टेट सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और शहरीकरण के साथ प्रदेश में आधुनिक शहरों, गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ आवास तथा मजबूत अधोसंरचना की आवश्यकता भी बढ़ रही है। राज्य सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के विकास के लिए पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाओं और निवेश के अनुकूल वातावरण के निर्माण की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अपना घर प्रत्येक परिवार का सपना होता है। समाज के हर वर्ग की आकांक्षा होती है कि उसके पास सुरक्षित और सुविधाजनक आवास हो। पिछले पौने तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट सेक्टर ने तेजी से प्रगति की है। आने वाले वर्षों में प्रदेश में बढ़ते निवेश, औद्योगिकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और नए शहरी केंद्रों के विकास के साथ इस क्षेत्र में संभावनाएं और बढ़ेंगी। उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े उद्यमियों से कहा कि वे प्रदेश के विकास में भागीदार बनें और गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण में योगदान दें।

    विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप तैयार किया ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विजन डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’ तैयार किया है। राज्य ने अपनी अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने की अपार क्षमता है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां प्रचुर खनिज संपदा, पर्याप्त बिजली और जल संसाधन उपलब्ध हैं। देश के प्रमुख क्षेत्रों से प्रदेश की कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है और यहां के मेहनतकश लोग हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ केवल एक कहावत नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों की सरलता, परिश्रम और सामर्थ्य की पहचान है।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली को निकट से देखा है। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत आधुनिक अधोसंरचना, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और जनकल्याण के नए अध्याय लिख रहा है।

    हर परिवार के पक्के घर का सपना हो रहा साकार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने देश के करोड़ों परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार किया है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में भी बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है और पक्के आवास तेजी से ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति दी है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों के लिए भी आवास बनाए जा रहे हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए तैयार नीति के अंतर्गत 15 हजार आवासों के निर्माण को भी स्वीकृति मिली है।

    स्टेट कैपिटल रीजन बनेगा छत्तीसगढ़ का नया ग्रोथ इंजन

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों के सुनियोजित एवं दीर्घकालीन विकास के लिए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रायपुर के साथ दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव क्षेत्र को जोड़ते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की योजना बनाई जा रही है। स्टेट कैपिटल रीजन से आवास, उद्योग, व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभरेगा।

    उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण को अवसर में बदलने के लिए सुनियोजित विकास आवश्यक है। शहरों में नागरिक सुविधाओं, परिवहन, आवास और अन्य बुनियादी अधोसंरचनाओं का विकास भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसमें रियल एस्टेट सेक्टर की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

    नक्सलवाद की समाप्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त होकर विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला। नक्सलियों द्वारा स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य विकास कार्यों का विरोध किए जाने के कारण अनेक क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। गोंडी भाषा में ‘नियद नेल्लानार’ का अर्थ ‘आपका अच्छा गांव’ है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में ठहरकर पात्र परिवारों तक योजनाओं और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रहा है।

    पर्यटन और होमस्टे से बस्तर में बन रहे रोजगार के नए अवसर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं के लिए देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया गया है। यहां विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय परिवारों के साथ जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति को निकट से जान रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए ऋण और सब्सिडी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पर्यटन क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए नई औद्योगिक विकास नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।

    सुशासन और रिफॉर्म से निवेश के लिए बन रहा बेहतर वातावरण

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 400 से अधिक सुधार किए हैं। विभिन्न शासकीय प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है और ई-फाइल प्रणाली लागू की गई है।

    उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण से लीकेज रोकने में मदद मिली है और प्रदेश के राजस्व में भी वृद्धि हुई है। सरकार का प्रयास है कि नागरिकों और निवेशकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें तथा अधिक से अधिक सेवाएं सरल और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हों।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति को निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और प्रदेश को अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल सहित अनेक क्षेत्रों में परियोजनाएं धरातल पर उतरनी प्रारंभ हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग, आवास, अधोसंरचना और शहरी विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन सभी क्षेत्रों की समन्वित प्रगति विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को गति देगी।

    रजिस्ट्री प्रक्रियाओं का लगातार हो रहा सरलीकरण : आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का पूरा फोकस गवर्नेंस और रिफॉर्म पर है। उद्योग, व्यापार और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार निर्णय लिए जा रहे हैं।

    चौधरी ने कहा कि रजिस्ट्री की प्रक्रियाओं को सरल और नागरिक अनुकूल बनाया जा रहा है। व्हाट्सएप के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने से लेकर ऑटो म्यूटेशन तक तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। महिला सशक्तीकरण की दिशा में महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर होने वाली रजिस्ट्री के संबंध में भी पंजीयन शुल्क से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। सरकार की कोशिश है कि शहरीकरण केवल शहरों के विस्तार तक सीमित न रहे, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं के साथ नए आर्थिक अवसरों का भी निर्माण करे।

    कार्यक्रम में क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल, निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष जी.वाई. रेड्डी, क्रेडाई के राष्ट्रीय सदस्य आनंद सिंघानिया, क्रेडाई रायपुर के अध्यक्ष पंकज लाहोटी, अभिषेक बछावत, अशोक मूंदड़ा सहित बड़ी संख्या में वास्तुविद, इंजीनियर, उद्यमी, रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि तथा क्रेडाई के विभिन्न पदाधिकारी उपस्थित थे।