Author: NewseDay

  • विलगांव चौधरी में विकास कार्यों पर 5.50 करोड़ खर्च का दावा, अब जमीनी हकीकत जानने की दरकार

    विलगांव चौधरी में विकास कार्यों पर 5.50 करोड़ खर्च का दावा, अब जमीनी हकीकत जानने की दरकार

    विलगांव चौधरी में 5.50 करोड़ के निर्माण कार्यों की फेहरिस्त, अब जमीन पर हिसाब की दरकार!

    33 निर्माण कार्यों की सूची में पेरीफेरल स्टोन बंड, रपटे और तालाब-पोखर शामिल; 80 लाख रुपये के एक मद का भी उल्लेख, स्वीकृति से लेकर भुगतान और मौके पर हुए कामों की जांच से सामने आएगी हकीकत

    मुरैना
     ग्राम पंचायत विलगांव चौधरी में निर्माण कार्यों को लेकर तैयार की गई सूची ने गांव में विकास कार्यों के खर्च और उनकी जमीनी हकीकत की पड़ताल का मुद्दा खड़ा कर दिया है। उपलब्ध दस्तावेज में पेरीफेरल स्टोन बंड, रपटा निर्माण और तालाब-कम-पोखर निर्माण सहित करीब 33 कार्यों का उल्लेख है। दस्तावेज के अंत में इन कार्यों की कुल लागत लगभग 5.50 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि 80 लाख रुपये की एक अलग राशि के साथ विभिन्न मदों का जिक्र भी दर्ज है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि इन कार्यों की वास्तविक स्वीकृत लागत कितनी है, कितनी राशि खर्च या भुगतान की जा चुकी है और मौके पर निर्माण की स्थिति क्या है?

    दस्तावेज में विलगांव चौधरी के अलग-अलग स्थानों पर स्टोन बंड निर्माण के कार्य दर्ज हैं। इनमें वृक्षारोपण स्थल, एमएस रोड के पास, शांतिधाम, विभिन्न मंदिरों, पार्क और अन्य स्थानों का उल्लेख है। इसके अलावा रामचंद्र का पुरा, जवाहर कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में रपटों के निर्माण तथा धाकड़ मोहल्ले, पानी की टंकी के पास और अन्य स्थानों पर तालाब-कम-पोखर निर्माण के कार्य सूचीबद्ध हैं। प्रत्येक कार्य के सामने एक आईडी और कुछ संख्यात्मक प्रविष्टियां भी दर्ज हैं।

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    33 कार्य, करोड़ों का हिसाब और कई सवाल

    सूची में कार्यों की संख्या और राशि से जुड़े विवरण सामने आने के बाद जरूरी है कि प्रत्येक निर्माण की अलग-अलग जांच की जाए। कितने कार्य पूरे हो चुके हैं, कितने अधूरे हैं और कितनों का केवल कागजों में उल्लेख है? क्या निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है? क्या स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान किया गया है? इन सवालों का जवाब संबंधित निर्माणों के भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका, स्वीकृति आदेश, बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।

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     जिम्मेदार – जिम्मेदारी तय होना जरूरी

    उपलब्ध सूची में उपयंत्री सुनील शाक्य, जनपद पंचायत जौरा और ग्राम पंचायत विलगांव चौधरी का उल्लेख है। सरपंच के रूप में ऊषा बघेले का नाम भी दर्ज है। ऐसे में संबंधित विभाग से कार्यवार स्वीकृत राशि, निर्माण की वर्तमान स्थिति, भुगतान और गुणवत्ता जांच का ब्योरा सामने आना चाहिए। यदि किसी कार्य में अनियमितता मिलती है, तो जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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    सरपंच सचिव से लेकर इंजिनियर तक की मिली भगत से धांधली.

    दरहसल,सरपंच के जिन 33 निर्माण कार्य की सूची सूची सामने आई है उनमें से अधिकांश निर्माण कार्य तो धरातल पर है ही नहीं कुछ एक दो है भी उनमें से कोई अधूरा है तो कोई समय से पहले ही जर्जर हो चुका है। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है। कि अधिक जो निर्माण कार्य मौके पर है ही नहीं उनको उपयंत्री सुनील शाक्य ने पास कैसे कर दिया है। क्या इस पूरे मामले में सरपंच सचिव से लेकर उपयंत्री तक की भूमिका संदिग्ध है। और अगर ऐसा है तो जिम्मेदार ऐसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे.?

  • सुकमा में आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था पर प्रशासन सख्त, 15 अधीक्षकों से मांगा जवाब

    सुकमा में आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था पर प्रशासन सख्त, 15 अधीक्षकों से मांगा जवाब

    सुकमा.

    जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचालित आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर विभागीय टीमों ने जिले की आवासीय शिक्षण संस्थाओं का आकस्मिक और सघन निरीक्षण किया.

    निरीक्षण प्रतिवेदनों की समीक्षा में कुछ संस्थाओं में निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं होने और मूलभूत व्यवस्थाओं में कमियां पाए जाने की बात सामने आई. इसके बाद प्रशासन ने संबंधित संस्थाओं के अधीक्षकों और अधीक्षिकाओं से जवाब तलब किया है. बालक आश्रम गुट्टागुड़ा, नीलावरम, मुनगा, नामापारा और मिरीवाड़ा सहित विभिन्न संस्थाएं इस कार्रवाई के दायरे में हैं. कन्या आश्रम चिंगावरम, पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास सुकमा तथा कोंटा, तोंगपाल और अन्य स्थानों के छात्रावासों को भी नोटिस जारी किया गया है. कुल 15 संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के दो दिन के भीतर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं.

    प्रशासन का कहना है कि आवासीय संस्थाओं में बच्चों के पोषण, रहने की सुविधा, अनुशासन और शिक्षा की व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता. दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आश्रम और छात्रावास केवल आवास नहीं, बल्कि शिक्षा और सुरक्षित जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करना और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है. अब संबंधित अधीक्षकों के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

  • बठिंडा में जनगणना की तैयारियां तेज, सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देकर समझाई गई जिम्मेदारियां

    बठिंडा में जनगणना की तैयारियां तेज, सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देकर समझाई गई जिम्मेदारियां

    बठिंडा 

    बठिंडा में जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियों के तहत नगर निगम की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। बलवंत गार्गी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से आए सुपरवाइजरों को पहले दिन जनगणना से संबंधित जानकारियां दी गईं।

    कार्यक्रम का आयोजन नगर निगम कमिश्नर एवं प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर लवजीत कलसी तथा असिस्टेंट कमिश्नर सुनील मेहता के मार्गदर्शन में मंगलवार को किया गया। नगर निगम की टीम ने प्रदीप कुमार, बलवान सिंह और राजल की देखरेख में प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं संभालीं।

    प्रशिक्षण के आरंभ में सुनील मेहता ने सुपरवाइजरों से अपनी जिम्मेदारियां पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाने की अपील की। उन्होंने निर्धारित समय पर सटीक और त्रुटिरहित काम पूरा करने पर जोर दिया।

    जनगणना की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की दी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान पंजाब की डायरेक्टर सेंसस नवजोत कौर खोसा (आईएएस) का संदेश वीडियो के माध्यम से प्रतिभागियों के साथ साझा किया गया। फील्ड ट्रेनरों ने जनगणना की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

    सुपरवाइजरों और गणनाकारों को उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की जानकारी देने के साथ जनगणना से जुड़े कानूनी प्रावधानों, भवनों की नंबरिंग, क्षेत्र का नक्शा तैयार करने और जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों के बारे में समझाया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया और विषयों को बेहतर ढंग से समझाने के लिए संबंधित वीडियो दिखाए गए।

    कई फील्ड ट्रेनर रहे मौजूद इस अवसर पर फील्ड ट्रेनर कपिल कुमार, सरबजीत शर्मा, प्रमोद कुमार, पवन कुमार, गमदूर सिंह, दीपक कुमार, अचिंत राज, राकेश कुमार, प्रलाद कुमार और अमित कुमार उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनगणना कार्य में शामिल कर्मचारियों को प्रक्रिया की सही जानकारी देकर काम को व्यवस्थित और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए तैयार करना रहा।

  • बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा बरकरार, फूल रथ की परिक्रमा ने बढ़ाई उत्सव की रौनक

    बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा बरकरार, फूल रथ की परिक्रमा ने बढ़ाई उत्सव की रौनक

    जगदलपुर.

    बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ रही है. जोगी बिठाई की रस्म के बाद 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है.

    मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया. पूजा-अर्चना और अभिवादन की रस्म के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ और ग्रामीणों ने उसे खींचकर गोलबाजार तथा मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई. रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी. इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार यह विशाल फूल रथ बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है. परंपरा के मुताबिक, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी.

    इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी. दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं. मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी. आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था के सहारे निभाई जा रही यह रस्म बस्तर दशहरा को देश के अनूठे सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान देती है.

  • PM मोदी से मिले Hyundai चेयरमैन ईइसुन चुंग, भारत में भारी निवेश से ऑटो सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    PM मोदी से मिले Hyundai चेयरमैन ईइसुन चुंग, भारत में भारी निवेश से ऑटो सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्‍ली
     दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई मोटर ग्रुप 2026 और 2032 के बीच भारत में 15.5 अरब डॉलर (करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इससे हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड और किआ इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लोकल सोर्सिंग और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े बिजनेस भी मजबूत होंगे।

    नई दिल्ली में हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक के बाद मंगलवार को इस सात साल के निवेश प्लान की घोषणा की गई। यह प्लान कोरियाई ऑटोमोटिव ग्रुप की ग्लोबल ग्रोथ स्ट्रैटेजी में भारत के बढ़ते महत्व को दिखाता है।

    भारत में बनेगी खास निवेश इकाई
    यह पहल भारत को हुंडई मोटर ग्रुप की भविष्य की ग्रोथ, उभरते बाजारों में विस्तार और अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इनोवेशन के लिए एक अहम रणनीतिक बाजार के तौर पर स्थापित करती है।

    इतने बड़े पैमाने पर निवेश की इस पहल को सही ढंग से लागू करने के लिए हुंडई मोटर ग्रुप भारत में एक खास निवेश इकाई बनाएगा। यह इकाई R&D इंफ्रास्ट्रक्चर, भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के बड़े इकोसिस्टम में निवेश का तालमेल बिठाएगी। साथ ही उसे लागू करेगी।

    भारत में निवेश और रणनीतिक विस्तार
    हुंदै मोटर समूह के कार्यकारी चेयरमैन ईसुन चुंग ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान भारत के वाहन उद्योग के भविष्य और समूह की दीर्घकालिक वृद्धि रणनीति पर चर्चा हुई। समूह ने कहा कि निवेश का बड़ा हिस्सा हुंदै मोटर इंडिया और किआ इंडिया की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना और भारत को समूह के प्रमुख वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है। भारत में समूह की मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता 14 लाख से अधिक वाहनों की है।

    कलपुर्जों का स्थानीयकरण बढ़ेगा
    हुंदै स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी बढ़ाकर कलपुर्जों का स्थानीयकरण करेगा। इससे भारत में वाहन कलपुर्जों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिलेगी। समूह नई प्रौद्योगिकियों और नए मोबिलिटी कारोबार में भी निवेश करेगा। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, वाहन वित्त और पुराने वाहनों के पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    रोजगार के मौके बढ़ेंगे
    कंपनी चेयरमैन चुंग ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर हुंदै मोटर के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में से एक है। भारत में समूह की मौजूदगी के 30 साल पूरे होने के बाद यह निवेश अगले 30 साल और उससे आगे तक देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत के औद्योगिक विकास में योगदान मिलेगा।

    भारत ग्रुप के सबसे अहम बाजारों में एक
    हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग ने कहा, 'भारत दुनियाभर में हुंडई मोटर ग्रुप के सबसे अहम और रणनीतिक बाजारों में से एक बना हुआ है। पिछले 30 साल भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाते हैं। यह निवेश अगले 30 साल और उसके बाद भी भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करता है।'

    चुंग ने आगे कहा, 'इस निवेश के जरिए हम रोजगार के और मौके पैदा करेंगे। भारत के लगातार औद्योगिक विकास में मदद करने के लिए अपने पार्टनर्स और स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।'

    कंपनी का बड़ा है प्‍लान
    ग्रुप की योजना बढ़ती मांग को पूरा करने और भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के तौर पर मजबूत करने के लिए अपनी हुंडई और किआ फैसिलिटीज में प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने की है। हुंडई मोटर ग्रुप की भारत में अभी सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 14 लाख से ज्‍यादा गाड़ियों की है। इसमें हुंडई की चेन्‍नई और पुणे फैसिलिटीज और किआ का अनंतपुर प्लांट शामिल हैं।

    दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर अपनी भारतीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में भी लगभग 70 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। इसमें गाड़ी टेस्टिंग ट्रैक भी शामिल है ताकि अगली पीढ़ी की ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के विकास में तेजी लाई जा सके। इसका प्‍लान लोकल इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने का है। साथ ही भारत को एक अहम इनोवेशन हब के तौर पर विकसित करने की भी योजना है।

    ग्रुप की योजना रीजनल पार्टनर्स में निवेश करके और एक ज्यादा मजबूत लोकल सप्लाई चेन विकसित कर घरेलू सोर्सिंग को मजबूत करने की है। यह EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, खास ऑटोमोटिव फाइनेंसिंग और गाड़ियों की रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में भी मौके तलाशेगा। साथ ही, यह ज्‍याादा संभावना वाले स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर मोबिलिटी सर्विसेज का विस्तार करेगा।

    भारत में 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी
    हुंडई मोटर ग्रुप के भारत में अभी 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं। उसने कहा कि इस निवेश से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, R&D और सप्लाई चेन में रोजगार के मौके पैदा होने की उम्मीद है।

    इस घोषणा में हुंडई और किआ के बीच निवेश के बंटवारे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

    हुंडई मोटर ग्रुप ने अपनी सहयोगी कंपनियों के जरिए भारत में कंपोनेंट और सर्विस से जुड़े कामकाज भी शुरू किए हैं। इन कंपनियों में हुंडई मोबिस, हुंडई ट्रांसिस, हुंडई कैपिटल, हुंडई विया और हुंडई ग्लोविस शामिल हैं।

  • MP में IAS अफसरों की नई पोस्टिंग जारी, सुखबीर सिंह को मिली मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी

    MP में IAS अफसरों की नई पोस्टिंग जारी, सुखबीर सिंह को मिली मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी

    भोपाल 
     मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंगलवार देर रात फिर एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है. मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 23 आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर के साथ प्रभार बदले गए हैं. सबसे बड़े बदलाव में पीडब्ल्यूडी, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा, भोपाल गैस त्रासदी व खाद्य सुरक्षा के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह(1997) को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया है. इसके साथ ही उन्हें पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रशासनिक व राजनीतिक दृष्टि से इस प्रशासनिक सर्जरी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। 

    मध्य प्रदेश के इन IAS के हुए ट्रांसफर, प्रभार बदले

        रश्मि अरुण शमी (1994) – अपर मुख्य सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण, नवीन पदस्थापना: अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी राहत और आयुक्त खाद्य सुरक्षा.
        सुखवीर सिंह (1997) – प्रमुख सचिव, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी व खाद्य सुरक्षा, नवीन पदस्थाना: प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री और PWD का अतिरिक्त प्रभार.
        जॉन किंग्सली ए. आर. (2004) – सचिव औद्योगिक नीति व निवेश प्रोत्साहन, व सूक्ष्म, लघु मध्यम उद्यम विभाग, नवीन पदस्थाना: सचिव सूक्ष्म, लघु मध्यम उद्यम विभाग.
        ऊषा परमार (2011), कलेक्टर पन्ना, नवीन पदस्थापना: अपर सचिव, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण.
        राजेश कुमार ओगरे (2012), अपर सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग, नवीन पदस्थापना : कलेक्टर, मऊगंज.
        सोमेश मिश्रा (2013), कलेक्टर नर्मदापुरम, नवीन पदस्थापना: संचालक, एड्स नियंत्रण सोसाइटी.
        राघवेन्द्र सिंह (2013), कलेक्टर जबलपुर, नवीन पदस्थापना: प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड, सह आयुक्त मंडी.
        पवन कुमार जैन (2013), उपसचिव सहकारिता विभाग, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर, भिण्ड.
        अरुण कुमार विश्वकर्मा (2014), कलेक्टर रायसेन, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर जबलपुर.
        आशीष वशिष्ठ (2014), प्रबंध संचालक राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम, समग्र सामाजिक सुरक्षा, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर नर्मदापुरम.
        अंकित अस्थाना (2014), उप सचिव, सामान्य प्रशासन, संचालक कर्मचारी चयन मंडल, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर सिंगरौली.
        आदित्य सिंह (2014), संचालक भोपाल गैस त्रासदी, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर बालाघाट.
        ऋजु बाफना (2014), कलेक्टर शाजापुर, नवीन पदस्थापना: अपर आयुक्त (राजस्व), उज्जैन संभाग.
        हर्ष सिंह (2015), कलेक्टर बुरहानपुर, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर पन्ना.
        संजय कुमार जैन (2015), कलेक्टर मऊगंज,नवीन पदस्थापना: उप सचिव, किसान कल्याण.
        सिद्धार्थ जैन (2016), कलेक्टर हरदा, नवीन पदस्थापना: उप सचिव, वाणिज्यिक कर.
        किरोड़ी लाल मीना (2016), कलेक्टर भिण्ड, नवीन पदस्थापना: उप सचिव, वित्त विभाग.
        गौरव बैनल (2016), कलेक्टर सिंगरौली,नवीन पदस्थापना: उप सचिव, सामान्य प्रशासन व संचालक, कर्मचारी चयन मण्डल.
        रोहित सिसोनिया (2017), उप सचिव किसान कल्याण, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर रायसेन.
        विवेक कुमार (2017), उप सचिव नवीन नवकरणीय उर्जा, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर बुरहानपुर.
        डॉ. परिक्षित संजय राव झाड़े (2017), मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंदौर, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर शाजापुर.
        कुमार सत्यम (2017), कलेक्टर बालाघाट, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर हरदा.
        संदीप केरकेट्टा (2018), उप सचिव सीएम, व प्रबंध संचालक बीज निगम, नवीन पदस्थापना: मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास प्राधिकरण

    इन आईएएस को मिले अतिरिक्त प्रभार

        के.सी. गुप्ता (1992) को खाद्य, नागरिक आपूर्ति का अतिरिक्त प्रभार
        शोभित जैन (2000) को कुटीर एवं ग्रामोद्योग का अतिरिक्त प्रभार
        संकेत भोंडवे (2007) को आवासीय आयुक्त, MP भवन दिल्ली का प्रभार
        स्वतंत्र कुमार सिंह (2007) को औद्योगिक नीति का प्रभार
        भरत यादव (2008) को जनसंपर्क विभाग का प्रभार
        अभय बेडेकर (2014) को पुरातत्व एवं संग्रहालय का प्रभार
        अंशुमन राज (2020) को इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम का प्रभार

  • जेल बदलना चाहता है आतंकी हवारा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामला संवेदनशील; IB की राय के बाद होगा फैसला

    जेल बदलना चाहता है आतंकी हवारा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामला संवेदनशील; IB की राय के बाद होगा फैसला

     चंडीगढ़
     सुप्रीम कोर्ट ने  दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्या कांड के दोषी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर खुफिया ब्यूरो (IB) से राय मांगे। याचिका में हवारा ने खुद को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी जेल में स्थानांतरित करने की मांग की है। बब्बर खालसा का यह आतंकी 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि ये संवेदनशील मामले हैं और वह राज्य सरकार की सलाह के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि हवारा जेल ब्रेक (जेल भागने) की घटना में शामिल था और इस हत्या के मामले में उसकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था।
    यह तर्क देते हुए कि स्थानांतरण से उसके भागने की संभावना बढ़ सकती है, भाटी ने उच्च जोखिम वाले कैदियों के स्थानांतरण पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक एडवाइजरी का हवाला दिया। उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा दायर एक हलफनामे का भी संदर्भ दिया और कहा कि यदि उसे स्थानांतरित किया जाता है तो पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होगी। भाटी ने यह भी कहा कि हवारा को चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।

    हवारा के वकील ने दिया मां का हवाला

    हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि जब यह हत्याकांड हुआ था तब हवारा महज 21 साल का था और मुख्यमंत्री की हत्या को 31 साल बीत चुके हैं। गोंसाल्वेस ने कहा, "मेरी (हवारा की) मां बहुत बुजुर्ग हैं, वे 82 वर्ष की हैं और उनकी हालत गंभीर है। वह पंजाब की उच्च सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं, न कि रिहा होने की।" उन्होंने आगे कहा कि जेल में उनका आचरण बेदाग रहा है।

    इस पर शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की-

        जब आपकी कोई विचारधारा होती है.. तो हम नहीं जानते कि यह कैसे बाहर आएगी… हर पापी का एक भविष्य होता है.. देखिए, लोग कहते हैं कि यदि आप एक व्यक्ति की हत्या करते हैं तो आप हत्यारे हैं और यदि आप 1,000 लोगों की हत्या करते हैं तो आप विजेता हैं। तो यही अंतर है। वह (हवारा) शायद शांत हो गया हो और बदला हुआ इंसान बन गया हो, लेकिन उसके बाद क्या चीज उसे भड़का दे, यह हम नहीं कह सकते।

    शीर्ष अदालत ने इसके बाद मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

    पिछले साल 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली व पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किया था। हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित नागरिक सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से जुड़े मामले में ताउम्र कैद की सजा काट रहा है, जिसमें बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

    शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में हवारा का व्यवहार 22 जनवरी 2004 की जेल ब्रेक घटना को छोड़कर निष्कलंक रहा है, जब वह भाग गया था और बाद में उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। याचिका में कहा गया है कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।

    2004 जेल ब्रेक कांड में भी आया नाम

    हवारा, परमजीत सिंह भियोरा, तारा और हत्या के दोषी देवी सिंह जनवरी 2004 में लगभग 100 फीट लंबी सुरंग खोदकर चंडीगढ़ की उच्च सुरक्षा वाली बुरैल जेल से भाग गए थे। हवारा और भियोरा को अगले दो वर्षों के भीतर फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में भगोड़ा घोषित तारा को थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था, जबकि देवी सिंह फरार है और उसे भी भगोड़ा घोषित किया गया है।

    याचिका में कहा गया, "याचिकाकर्ता (हवारा) वर्तमान में पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में अपने पूरे जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है… वह पंजाब राज्य के फतेहगढ़ साहिब जिले का मूल निवासी है और उसे पंजाब की ही जेल में रखा जाना चाहिए।"

    याचिकाकर्ता पर 36 मामले दर्ज हुए

    याचिका के अनुसार, बेअंत सिंह की हत्या के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ 36 झूठे मामले दर्ज किए गए थे और एक को छोड़कर बाकी सभी में उसे बरी कर दिया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि इसी मामले में दोषी ठहराए गए और जेल ब्रेक का हिस्सा रहे एक अन्य व्यक्ति को तिहाड़ से चंडीगढ़ की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

    याचिका में तर्क दिया गया, "केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता को वर्षों पहले उच्च जोखिम वाला कैदी माना गया था, आज उसे दिल्ली में रखने और पंजाब स्थानांतरित न करने का पर्याप्त कारण नहीं है।" इसमें यह भी जोड़ा गया कि उसकी बेटी पंजाब में ही रहती है।

    2007 में सुनाई गई थी मौत की सजा

    याचिका में कहा गया, "इस मामले में जो प्रश्न उठता है वह यह है कि क्या एक व्यक्ति, जिस पर गंभीर सामाजिक उथल-पुथल के संदर्भ में हत्या करने का आरोप लगा था—जहां तत्कालीन मृत मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के निर्देशों पर राज्य पुलिस द्वारा हजारों युवा सिखों को न्यायेतर तरीके से मार दिया गया था, और जिसके अपराध को उसके असफल जेल ब्रेक के प्रयास से और गंभीर मान लिया गया। लेकिन जिसने पिछले 19 वर्षों से जेल में जीवन व्यतीत किया है, क्या वह इस अदालत से पंजाब की जेल में स्थानांतरण के आदेश की मांग कर सकता है?"

    मार्च 2007 में एक ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में हवारा को मौत की सजा सुनाई थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में उसकी सजा को उम्रकैद में बदलते हुए निर्देश दिया था कि उसे शेष जीवन तक जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। हवारा की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उसके साथ-साथ अभियोजन पक्ष द्वारा दायर की गई अपीलें भी शीर्ष अदालत में लंबित हैं।

  • हैदराबाद में टीम इंडिया रचेगी नया इतिहास? 297 रन के रिकॉर्ड के बाद अब 300 का आंकड़ा छूने पर नजर

    हैदराबाद में टीम इंडिया रचेगी नया इतिहास? 297 रन के रिकॉर्ड के बाद अब 300 का आंकड़ा छूने पर नजर

    हैदराबाद
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज अब ऐसे मैदान पर पहुंच गई है, जहां बल्लेबाजों के बल्ले से रन बरसने की पूरी उम्मीद है. इंदौर में भले ही रनों का वैसा तूफान देखने को नहीं मिला, जिसकी उम्मीद थी, लेकिन हैदराबाद में तस्वीर बदल सकती है. यह वही मैदान है, जहां भारतीय टीम टी20 इंटरनेशनल में 300 रन के आंकड़े को छूने से महज तीन रन दूर रह गई थी. अब एक बार फिर सवाल है- क्या हैदराबाद में चौके-छक्कों की ऐसी बरसात होगी कि 300 रन का आंकड़ा भी पीछे छूट जाए?

    पांच मैचों की सीरीज में भारत 2-1 से आगे है. ऐसे में टीम इंडिया की नजर बढ़त मजबूत करने पर होगी, जबकि वेस्टइंडीज के सामने सीरीज में बने रहने की चुनौती है. कैरेबियाई टीम को जीत की जरूरत है और उसकी आक्रामक बल्लेबाजी को देखते हुए हैदराबाद का मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. अगर पिच ने साथ दिया और ओस ने गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ाईं, तो दोनों टीमों के बीच रनों की जबरदस्त जंग देखने को मिल सकती है। 

    हैदराबाद में भारत का 297 रन वाला धमाका

    12 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश के खिलाफ हैदराबाद में भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा हमला बोला था कि स्कोरबोर्ड पर 20 ओवर में 297/6 रन दर्ज हो गए. भारत 300 रन से महज तीन रन दूर रह गया था. इस मैच में संजू सैमसन ने 47 गेंदों में 111 रन लूटे थे. यह टी20 इंटरनेशनल में टीम इंडिया का सर्वोच्च स्कोर है. भारतीय बल्लेबाजों ने उस पारी में 14.85 के रन रेट से रन बनाए थे। 

    भारत ने इससे पहले और बाद में भी बड़े टी20 स्कोर बनाए हैं. 15 नवंबर 2024 को जोहानिसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया ने 283/1 रन ठोके थे. वहीं, 31 जनवरी 2026 को तिरुवनंतपुरम में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने 271/5 का स्कोर बनाया था. लेकिन हैदराबाद का 297 रन वाला रिकॉर्ड आज भी भारतीय टी20 बल्लेबाजी की सबसे बड़ी उपलब्धि बना हुआ है। 

    अब इसी मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबला होना है. भारत के पास अपना रिकॉर्ड बेहतर करने का मौका होगा, जबकि कैरेबियाई बल्लेबाज भी बड़े स्कोर की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहेंगे। 

    हैदराबाद में बड़े स्कोर का इतिहास
    राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की पहचान आईपीएल के उन मैदानों में होती है, जहां बल्लेबाज खुलकर अपने शॉट खेल सकते हैं. यहां आईपीएल में 286 और 277 रन जैसे बड़े स्कोर बन चुके हैं. इसके अलावा, भारत ने इसी मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ 297 रन बनाकर टी20 इंटरनेशनल में अपना सर्वोच्च स्कोर दर्ज किया था। 

    हालांकि, हैदराबाद में हाल ही में पिच को दोबारा तैयार किया गया है. ऐसे में पुराने रिकॉर्ड के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि इस बार भी बल्लेबाजों को वैसी ही परिस्थितियां मिलेंगी. पिच का ताजा मिजाज, उछाल और गेंद की गति मुकाबले की दिशा तय करने में अहम होंगे। 

    फिर भी, मैदान का इतिहास बल्लेबाजों का हौसला बढ़ाने के लिए काफी है. अगर गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है, तो बड़े शॉट खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए रन बनाना आसान हो सकता है. गेंदबाजों को अपनी लाइन-लेंथ में जरा भी ढील देने से बचना होगा, क्योंकि टी20 क्रिकेट में कुछ महंगे ओवर पूरे मैच का समीकरण बदल सकते हैं। 

    ओस आई तो गेंदबाजों की बढ़ेगी मुश्किल
    हैदराबाद में मुकाबले के दौरान ओस की भूमिका भी अहम हो सकती है. अगर दूसरी पारी में ओस पड़ती है, तो गेंद को पकड़ना और उस पर नियंत्रण बनाए रखना गेंदबाजों के लिए मुश्किल हो सकता है. इसका फायदा बल्लेबाजों को मिल सकता है, खासकर तब जब उन्हें बड़े लक्ष्य का पीछा करना हो। 

    टॉस जीतने वाली टीम को भी परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेना होगा. पिच की स्थिति, ओस की संभावना और पहली पारी के स्कोर को ध्यान में रखकर बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनना अहम रहेगा। 

    मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश से मैच में खलल पड़ने की आशंका नहीं है. यानी दर्शकों को पूरे मुकाबले में क्रिकेट का रोमांच देखने को मिल सकता है. अगर पिच और मौसम ने बल्लेबाजों का साथ दिया, तो हैदराबाद में एक और हाई-स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद बढ़ जाएगी। 

    SRH के मैदान पर अभिषेक से रहेंगी उम्मीदें
    हैदराबाद आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) का घरेलू मैदान भी है. इस टीम की पहचान आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता से बनी है. अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड और हेनरिक क्लासेन जैसे बल्लेबाजों ने टी20 क्रिकेट में तेज गति से रन बनाने की शैली को नई पहचान दी है। 

    अभिषेक भारतीय टीम के लिए भी बड़े शॉट खेलने की क्षमता रखते हैं. ऐसे में भारतीय बल्लेबाजी क्रम में उनसे तेज शुरुआत की उम्मीद होगी. हालांकि, भारत को सिर्फ एक बल्लेबाज पर निर्भर रहने की बजाय पूरी बल्लेबाजी इकाई से योगदान की जरूरत होगी. बड़े स्कोर वाले मुकाबलों में शुरुआती विकेट गंवाने के बाद वापसी करना आसान नहीं होता। 

    दूसरी ओर, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज भी अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं. कैरेबियाई टीम को अगर सीरीज में वापसी करनी है, तो उसके बल्लेबाजों को भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाना होगा. हैदराबाद की परिस्थितियां उसके लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं। 

    … वेस्टइंडीज के सामने 'करो या मरो'
    सीरीज में 2-1 की बढ़त भारत को मनोवैज्ञानिक फायदा देती है, लेकिन वेस्टइंडीज को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है. कैरेबियाई टीम के पास ऐसे बल्लेबाज हैं, जो कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदल सकते हैं. अगर उसके शीर्ष क्रम ने तेज शुरुआत दी, तो भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़े स्कोर को रोकने की चुनौती होगी। 

    भारत की कोशिश होगी कि वह अपनी बल्लेबाजी की ताकत का फायदा उठाकर सीरीज में अजेय बढ़त हासिल करे. वेस्टइंडीज के लिए जीत सिर्फ एक मैच जीतने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इससे सीरीज में बराबरी की उम्मीद भी जिंदा रहेगी। 

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या हैदराबाद में भारत अपने 297 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर पहली बार 300 का आंकड़ा पार करेगा या वेस्टइंडीज के बल्लेबाज भी रनों की इस जंग में ऐसा पलटवार करेंगे कि मुकाबला आखिरी ओवर तक पहुंच जाए?

  • पंजाब में झोटा की हत्या से तनाव, सिख संगठनों ने बाजार बंद कराए; परिवार की मांगों को लेकर हाईवे पर प्रदर्शन

    पंजाब में झोटा की हत्या से तनाव, सिख संगठनों ने बाजार बंद कराए; परिवार की मांगों को लेकर हाईवे पर प्रदर्शन

    मानसा
    पंजाब के मानसा जिले में एक नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है। इस मामले के मुख्य आरोपी मेडिकल स्टोर मालिक को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। वहीं, परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने पंजाब सरकार के विरोध में नेशनल हाईवे जाम कर दिया है।आरोपी अश्विनी कुमार को सालासर से हिरासत में लिया गया है। नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार को दिनदहाड़े हत्या हुई थी। झोटा ने आरोपी को एक बुजुर्ग व्यक्ति को कथित तौर पर नशीली दवाएं बेचते हुए पकड़ा था। यह घटना झोटा के लाइव फेसबुक सेशन के दौरान कैमरे में कैद हो गई थी। 

    हत्या के बाद आरोपी दुकानदार फरार हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। झोटा नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाते थे। वे केमिस्ट दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का भी विरोध करते थे।

     घटना के बाद तनाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया
    गोलीबारी के बाद मानसा शहर में तनाव फैल गया, जहां समर्थकों ने मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। झोटा के परिवार ने विरोध में अपने शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने मंगलवार को एक सहयोगी को गिरफ्तार किया, जिसने स्टोर मालिक को भागने में मदद की थी। 
     
    इस हत्या की राजनीतिक नेताओं ने व्यापक निंदा की, जिन्होंने सत्तारूढ़ AAP सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया। विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर "जंगल राज" का आरोप लगाते हुए नशा विरोधी आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    यह था मामला
    एंटी ड्रग टास्क फोर्स के नेता परमिंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मंगलवार को एक दुकानदार ने उन पर गोलियां चलाईं। जख्मी हालत में उन्हें मानसा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई।

    परमिंदर सिंह झोटा लंबे समय से शहर के मेडिकल स्टोरों पर नशा बेचने का विरोध कर रहे थे। इस बात को लेकर उनका कई दुकानदारों से झगड़ा भी हुआ था। मंगलवार को वह शहर के मुख्य बाजार रेलवे फाटक के पास एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे तभी दुकानदार ने उन पर गोलियां चला दीं। दुकानदार सरेआम गोलियां चलाता रहा। परमिंदर सिंह झोटा ने अपनी जान बचाने की कोशिश की, वह एक दुकान में घुस गए थे। वहीं, कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बुधवार सुबह परविंदर सिंह झोटा के निवास का दौरा किया। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

     

  • ब्लू ड्रम केस की पूरी टाइमलाइन, मुस्कान से कोई मिलने नहीं आया; साहिल से मिले दादी और भाई

    ब्लू ड्रम केस की पूरी टाइमलाइन, मुस्कान से कोई मिलने नहीं आया; साहिल से मिले दादी और भाई

     मेरठ

    उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आज गुरुवार को सजा सुनाई जानी है. मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को कोर्ट 30 सितंबर को दोषी करार दे चुकी है. अब दोनों की सजा पर फैसला होना है. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मौत की सजा की मांग की है। 

    इस मामले में 17 सितंबर को कोर्ट में अंतिम बहस पूरी हुई थी. अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखीं. सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि सौरभ के परिवार की ओर से कुल 22 गवाह पेश किए गए. इनमें सौरभ का भाई बबलू, उनकी मां और दोस्त शामिल हैं। 

    इसके अलावा उन दुकानदारों की भी गवाही हुई, जिनसे तौर पर ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत खरीदी गई थी. अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले की तैयारियों और वारदात के बाद आरोपियों के शिमला जाने से जुड़े साक्ष्य भी कोर्ट में रखे। 

    जेल में मुस्कान से मिलने नहीं आया परिवार

     बातचीत में मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान और साहिल को नशे की लत से बाहर निकालने में शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं. इसमें 3 से 4 महीने लगे. उन्होंने बताया कि साहिल से पहले उसकी दादी मिलने आती थीं, बाद में उसका भाई भी मिलने आने लगा, लेकिन अब तक मुस्कान से मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है। 

    जेल अधीक्षक का कहना है कि पिछले साल नवंबर में जेल में बेटी को जन्म देने के बाद मुस्कान धार्मिक हो गई है. वह अपनी करीब 6.5 साल की बेटी से मिलना चाहती है, लेकिन बेटी खुद अपनी मां से नहीं मिलना चाहती. मुस्कान को बताया गया है कि वह अपने परिवार को पत्र लिखकर बेटी से मुलाकात कराने की बात कह सकती है. जेल अधीक्षक ने यह भी बताया कि मुस्कान और साहिल दोनों मौजूदा स्थिति से वाकिफ हैं. आज जेल अधिकारियों के साथ उनकी नियमित मुलाकात भी हुई। 

    नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव
    दरअसल, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे. 25 फरवरी को घर में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया. 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन था। 

    अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ को नींद की दवा देने के बाद उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया. 4 मार्च को मुस्कान बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला चली गई. उसने सौरभ के फोन से मैसेज भेजकर परिवार को गुमराह किया। 

    17 मार्च को मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने घर में रखे नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए. इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया। 

    मामले में हुईं 126 पेशियां 
    इस मामले में मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक सुनवाई चली. अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था. इसके बाद सजा तय करने के लिए समय लिया गया. अब आज आने वाले कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।