Author: NewseDay

  • अब बड़े गर्व के कहता हूं कि भारत की सबसे यंग वर्कफोर्स मेरे पास है और उसकी प्रतिभा मेरी सबसे बड़ी सामर्थ्य है: मुख्यमंत्री योगी

    अब बड़े गर्व के कहता हूं कि भारत की सबसे यंग वर्कफोर्स मेरे पास है और उसकी प्रतिभा मेरी सबसे बड़ी सामर्थ्य है: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटीज में स्थापित करने का है लक्ष्य, इस अभियान में एचसीएल बने भागीदारः मुख्यमंत्री योगी

    एचसीएल टेक के लखनऊ कैंपस की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    अगले पांच वर्षों में कम से कम 50 एआई स्टार्टअप्स को लखनऊ में स्थापित करने, उन्हें मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में सरकार पूरा सहयोग देगी: मुख्यमंत्री

    लखनऊ को केवल आईटी सर्विसेज का केंद्र नहीं, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी और डीप टेक का प्रमुख केंद्र बनाना होगा: सीएम

    एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया, दोनों की साझा यात्रा पर हर व्यक्ति को गौरव की अनुभूति: सीएम

    अब बड़े गर्व के कहता हूं कि भारत की सबसे यंग वर्कफोर्स मेरे पास है और उसकी प्रतिभा मेरी सबसे बड़ी सामर्थ्य है: मुख्यमंत्री योगी

    बलिया से लेकर बिजनौर तक की यात्रा को अब मात्र 10 घंटे में पूरा कर सकते हैं: सीएम

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटीज में स्थापित करने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसमें विश्व स्तर के कम से कम 50 एआई स्टार्टअप्स को लखनऊ में स्थापित करने, उन्हें मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार पूरा सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने एचसीएल टेक को भी इस अभियान में भागीदार बनने का आह्वान किया।

    एचसीएल टेक लखनऊ कैंपस की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एचसीएल को इसके लिए ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ को केवल आईटी सर्विसेज का केंद्र नहीं, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी और डीप टेक का प्रमुख केंद्र बनाना होगा। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा।

    एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया
    उन्होंने कहा कि एचसीएल की पांच दशक की यात्रा के संस्थापक शिव नाडर ने इसी उत्तर प्रदेश से शुरुआत की थी। आज यूपी की धरती से शुरू हुई यह यात्रा वैश्विक पहचान बना चुकी है। दस वर्ष पहले शिव नाडर के विजन के साथ लखनऊ में एचसीएल कैंपस की स्थापना ने इस यात्रा को नई पहचान दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया। दोनों की साझा यात्रा आज उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एससीएल कैंपस की सफलता के पीछे कर्मचारियों की मेहनत के साथ किसी मां की दुआ, किसी पिता का सपना और किसी परिवार का विश्वास भी जुड़ा है। जब लखनऊ की बेटी यहां से अपने करियर की उड़ान भरती है तो केवल उसकी जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार का जीवन बदलता है। उसकी सफलता आने वाली अनेक बेटियों के लिए नई राह और प्रेरणा बनती है।

    युवा वर्कफोर्स यूपी की सबसे बड़ी ताकत

    उन्होंने कहा कि दस वर्ष पहले यूपी के युवाओं को बेहतर करियर के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता था। आज स्थिति बदल गई है। यूपी का युवा अपने करियर के लिए लखनऊ को चुन रहा है और दुनिया भर का युवा यूपी में आ रहा है। मुख्यमंत्री ने एचसीएल के कर्मचारियों से कहा कि वे केवल कंपनी के कर्मचारी नहीं, बल्कि अब उत्तर प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी जमीन के साथ उसकी युवा और प्रतिभाशाली वर्कफोर्स है। आज वे गर्व से कहते हैं कि भारत की सबसे युवा वर्कफोर्स यूपी में है और उसकी प्रतिभा प्रदेश की सबसे बड़ी सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि दस वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की पहचान को लेकर अलग तरह की चर्चाएं होती थीं। आज प्रदेश की पहचान बदल चुकी है। एक समय वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया की चर्चा होती थी, आज वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन की चर्चा होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। बलिया से बिजनौर तक करीब 1200 किलोमीटर की दूरी अब लगभग 10 घंटे में तय की जा सकती है, जबकि एक दशक पहले यही दूरी तय करने में कई दिन लगते थे।

    आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में यूपी की नई पहचान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का करीब 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में यूपी का योगदान करीब 60 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले आईटी और आईटीईएस के माध्यम से प्रदेश का निर्यात करीब 12 से 15 हजार करोड़ रुपये था, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इसे 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी एक दशक पहले करीब 3,800 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2030 तक इसे दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

    आईटी सेक्टर अब केवल नोएडा तक सीमित नहीं
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आईटी सेक्टर अब केवल नोएडा तक सी
    मित नहीं है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा में आईटी पार्क संचालित हैं। प्रदेश में सात सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कार्यरत हैं, जबकि वाराणसी, बरेली, कानपुर और गोरखपुर में नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर में 12 आईटी और आईटीईएस स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं। नई स्टार्टअप नीति के तहत नोएडा और लखनऊ को यू हब यानी डीप टेक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। लखनऊ में देश की पहली एआई सिटी और व्यापक एआई इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।

    एचसीएल का विकास केवल बिजनेस तक सीमित नहीं

    मुख्यमंत्री ने एचसीएल के सामाजिक सरोकारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि एचसीएल टेक ने उत्तर प्रदेश में केवल बिजनेस नहीं किया, बल्कि सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सीतापुर और बुलंदशहर में आवासीय कैंपस और स्कूलों के माध्यम से बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में एचसीएल के कार्यक्रम 50 लाख से अधिक लोगों और 3,000 से अधिक गांवों तक पहुंचे हैं। ग्रामीण महिलाओं और स्वयंसेवी समूहों को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाने, बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा करने का कार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल बड़े शहरों में बड़े कैंपस बनाना नहीं है। वास्तविक विकास तब है, जब गांव का किसान बेहतर तकनीक से जुड़े, बहन-बेटियों को आजीविका के नए अवसर मिलें, गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें तथा ग्रामीण युवा नई अर्थव्यवस्था और नए अवसरों का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि एक ओर एचसीएल का ग्लोबल टेक्नोलॉजी कैंपस और दूसरी ओर गांवों में सामुदायिक विकास के कार्यक्रम- ग्लोबल इनोवेशन और ग्रासरूट डेवलपमेंट का यह संगम ही इन्क्लूसिव ग्रोथ का वास्तविक मॉडल है।

    ‘डिजिटल इंडिया’ को लेकर भी कभी विरोधी दलों ने उड़ाई थी खिल्ली

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का दूरदर्शी विजन देश के सामने रखा था, तब विरोधी दलों ने इसकी खिल्ली उड़ाई थी। लोग सवाल करते थे कि भारत में डिजिटल क्रांति कैसे संभव होगी। इसी तरह जब जनधन खाते खोले गए तो उनका भी मजाक उड़ाया गया और कहा गया कि गरीबों के खाते खुलवाने से क्या होगा। लेकिन आज डीबीटी के माध्यम से गरीबों तक शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने में तकनीक की निर्णायक भूमिका सामने है। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब पांच दशक पहले जब शिव नाडर जी ने एचसीएल की नींव रखी होगी, तब भी लोगों ने सवाल उठाए होंगे कि यह प्रयास कितना आगे बढ़ पाएगा, लेकिन उनके दूरदर्शी विजन ने एचसीएल को वैश्विक कंपनी के रूप में स्थापित किया। यूपी की धरती से शुरू हुई एचसीएल की वैश्विक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपनों और दूरदर्शी सोच पर शुरुआत में सवाल उठ सकते हैं, लेकिन विजन और सामर्थ्य उन्हें दुनिया के सामने सफलता की कहानी बना देते हैं।

    इस अवसर पर एचसीएल ग्रुप की अध्यक्ष रोशनी नादर मल्होत्रा, शिव नादर फाउंडेशन के अध्यक्ष शिखर मल्होत्रा, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ और निवर्तमान चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह, यूपी के आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आलोक कुमार और अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। 

    उत्तर प्रदेश एचसीएल ग्रुप की कर्मभूमि, यहां की प्रतिभा और अवसरों पर हमारा अटूट विश्वास: रोशनी नादर

    एचसीएल टेक की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश एचसीएल ग्रुप की कर्मभूमि और उसका घर है। इसी धरती ने संस्थापक शिव नादर के भारत को ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैप पर स्थापित करने के सपने को आधार दिया। उन्होंने कहा कि 2016 में लखनऊ में एचसीएल आईटी सिटी में निवेश का निर्णय केवल कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि इस विश्वास का प्रतीक था कि सही अवसर, इंफ्रास्ट्रक्चर और वातावरण उपलब्ध होने पर ग्लोबल टेक्नोलॉजी और टैलेंट महानगरों से बाहर भी विकसित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि एचसीएल आईटी सिटी की 10वीं वर्षगांठ पर फेज-2 का शुभारंभ, 500 करोड़ रुपये का निवेश और करीब 6,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्तर प्रदेश के युवाओं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। रोशनी नादर ने बताया कि एचसीएल स्थानीय कॉलेजों के 1,000 छात्रों के लिए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू कर रहा है, जिससे उन्हें भविष्य के लिए फ्यूचर-रेडी स्किल्स और नए करियर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि एचसीएल फाउंडेशन के माध्यम से उत्तर प्रदेश में करीब 50 लाख लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और राज्य सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास और आर्थिक प्रगति की इस यात्रा का हिस्सा बनना एचसीएल ग्रुप के लिए गौरव की बात है।

    मुख्यमंत्री ने एचसीएल आईटी सिटी लखनऊ के फेज-2 का किया शुभारंभ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर एचसीएल आईटी सिटी लखनऊ के फेज-2 विस्तार का शुभारंभ किया। लगभग 500 करोड़ रुपये के निवेश से 20 एकड़ भूमि पर करीब 9.5 लाख वर्गफुट का नया क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें नया आईटी भवन, करीब 5,000 सीटों की क्षमता, मल्टीलेवल कार पार्किंग और कैफेटेरिया जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। इस विस्तार से लखनऊ में करीब 6,000 नए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

    एचसीएल फाउंडेशन के पांच विशेष लाभार्थियों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

    इस अवसर पर एचसीएल फाउंडेशन के विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े पांच विशेष लाभार्थियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित किया गया। इनमें प्रतिमा देवी को करीब 1.5 लाख रुपये मूल्य का रोटावेटर एवं हैरो, चांदनी सिंह को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल करने पर प्रमाणपत्र एवं शॉल, छित्तो देवी को जलकुंभी हस्तशिल्प के माध्यम से आजीविका सृजन के लिए 50 हजार रुपये मूल्य की रस्सी निर्माण एवं फ्लैटनिंग मशीन, मास्टर लवकुश को क्लब फुट के सफल उपचार के लिए प्रमाणपत्र एवं शॉल तथा रोशनी को डेयरी आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन कार्यक्रम के तहत 30 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

  • IND vs WI 1st T20I: गेंदबाजों के बाद अय्यर का शतक, भारत ने 8 विकेट से जीता मुकाबला

    IND vs WI 1st T20I: गेंदबाजों के बाद अय्यर का शतक, भारत ने 8 विकेट से जीता मुकाबला

    लखनऊ
     कप्तान श्रेयस अय्यर के तूफानी शतक की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को पहले टी-20 मुकाबले में आठ विकेट से हरा दिया। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 171 रन बनाए। जवाब में भारत ने महज 14.4 ओवर में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। यह टीम इंडिया की लगातार 10वीं टी-20 जीत है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम 19.1 ओवर में 171 रन पर सिमट गई। कप्तान शाई होप ने 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि शेरेफन रदरफोर्ड ने 56 रन बनाकर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया।

    भारत की ओर से डेब्यू कर रहे नमन धीर ने प्रभावी गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट हासिल किए। कुलदीप यादव और अक्षर पटेल को दो-दो सफलताएं मिलीं। भारतीय गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर शिकंजा कसते हुए पूरी टीम को 20 ओवर से पहले ही पवेलियन भेज दिया।

    172 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और चौथे ओवर तक टीम ने 35 रन पर दो विकेट गंवा दिए। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ मिलकर वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की जमकर खबर ली।

    श्रेयस ने महज 42 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और 43 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। उनकी पारी में 10 चौके और छह छक्के शामिल रहे। ईशान किशन ने भी उनका शानदार साथ दिया और 27 गेंदों पर नाबाद 37 रन बनाए। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 137 रन की अटूट साझेदारी की।

    अपने पहले शतक को लेकर अय्यर ने क्या कहा?
    पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में श्रेयस अय्यर अपने पहले T20I शतक को लेकर काफी भावुक और खुश नजर आए। उन्होंने शतक लगाने के इस अहसास को बेहद खास बताया और कहा कि वे लंबे समय से T20I में अपना पहला शतक लगाने का सपना देख रहे थे, जो आज पूरा हो गया। इस पल को याद करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह पारी साबित करती है कि अगर आप मेहनत करें, तो सपने सच जरूर होते हैं।

    टीम की माइंडसेट को लेकर अय्यर ने दिया बड़ा बयान
    भारतीय टीम की माइंडसेट को लेकर अय्यर ने कहा कि जीत का अहसास हमेशा खास और अलग होता है और ड्रेसिंग रूम में भी इसी बात पर चर्चा होती है। टीम का सीधा नियम है कि जिस खिलाड़ी का दिन हो, वह मैच खत्म करके ही लौटे। आज उनका दिन था, जबकि पिछले कुछ मैचों में बाकी बल्लेबाजों ने फिनिश किया था। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया है और अगर भारत इसी आक्रामक सोच के साथ खेलता रहा, तो T20 क्रिकेट की सबसे खतरनाक टीमों में से एक बनेगा।

    श्रेयस अय्यर ने शतक लगाकर अपने नाम किए कई रिकॉर्ड
    श्रेयस अय्यर T20I में शतक जड़ने वाले भारत के तीसरे कप्तान बन गए हैं, उनसे पहले यह कारनामा सिर्फ रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव ही कर पाए हैं। हालांकि, लक्ष्य का पीछा करते हुए शतक बनाने वाले श्रेयस भारत के पहले कप्तान हैं। इस मामले में उन्होंने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 94 रन बनाए थे। टी20 क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए शतक लगाने वाले श्रेयस चौथे भारतीय खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और केएल राहुल यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।

    कप्तान के तौर पर शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय
    श्रेयस अय्यर का यह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला शतक है। इसके साथ ही वह भारतीय 'r20I कप्तानों की उस खास सूची में शामिल हो गए, जिसमें उनसे पहले रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव का नाम है। रोहित शर्मा ने कप्तान रहते हुए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन शतक लगाए हैं, जबकि सूर्यकुमार यादव ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2023 में शतकीय पारी खेली थी। श्रेयस की इस ऐतिहासिक पारी ने भारत को आसान जीत दिलाने के साथ रिकॉर्ड बुक में भी उनका नाम दर्ज करा दिया।

  • भारत की समुद्री शक्ति को मिला बड़ा बूस्ट, नया फ्लीट सपोर्ट शिप हुआ नौसेना में शामिल; Rafale डील भी जल्द

    भारत की समुद्री शक्ति को मिला बड़ा बूस्ट, नया फ्लीट सपोर्ट शिप हुआ नौसेना में शामिल; Rafale डील भी जल्द

    मुंबई 

    114 राफेल फाइटर जेट की खेप भारत आने से पहले डिफेंस सेक्‍टर से बड़ी खुशखबरी सामने आई है. इससे इंडियन नेवी की ताकत बढ़ने की संभावना है. भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘सूर्या’ शामिल किया गया है. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया फ्लीट सपोर्ट शिप-1 है.  इसका जलावतरण (यानी लॉन्‍च) किया गया. इस जहाज का नाम ‘सूर्या’ रखा गया है और इसकी मौजूदगी से नौसेना की पहुंच और क्षमता मजबूत होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सूर्या को इंडियन नेवी में शामिल किया. इसी अवसर पर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नए एडवांस स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया. साथ ही एक और फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील (शुरुआत) भी रखी गई. भारत इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के साथ ही इंडियन नेवी को भी अपग्रेड कर रहा है। 

    इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ही स्थान पर एक ही अवसर के दौरान ये तीनों उपलब्धियां भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा, ‘यह जलावतरण हमारी उपलब्धि का प्रतीक है, कील रखना हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती हुई क्षमता का प्रतीक है. आज हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में हम जहाज बनाने के साथ-साथ भारत की समुद्री शक्ति के भविष्य की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। 

    गौरवशाली विरासत को मजबूत करने का प्रयास
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बार-बार अपनी क्षमता साबित की है. मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी अभियान, निकासी अभियान या समुद्री सुरक्षा जैसी हर परिस्थिति में नौसेना ने अपनी तत्परता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को बड़ी समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना कोई नया अध्याय शुरू करना नहीं है. बल्कि यह उस गौरवशाली विरासत को फिर से मजबूत करने का प्रयास है, जिसे भारत ने सदियों पहले स्थापित किया था. इस समुद्री यात्रा में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

    राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक
    डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने आगे बताया कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक है. आठ दशकों से अधिक समय से यह संस्थान देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद मंत्रालय और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के प्रयासों से इसकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2025 में इसे मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिलना इसके बदलाव और पिछले वर्षों में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों का प्रमाण है. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की समुद्री ताकत का निर्माण अकेले नौसेना या अकेले जहाज निर्माण कारखाने नहीं कर सकते. इसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय समुद्री तंत्र जरूरी है। 

    समंदर में इंडियन नेवी की पहुंच होगी मजबूत
    उन्होंने विश्वास जताया कि नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, शिक्षण संस्थान, उद्योग, एमएसएमई तथा नव उद्यम एक एकीकृत टीम के रूप में काम करें. उन्होंने कहा कि फ्लीट सपोर्ट शिप का जलावतरण भारतीय नौसेना की पहुंच, लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय रहने की क्षमता और अभियान प्रभावशीलता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि देश आयातित प्लेटफार्म पर निर्भरता से आगे बढ़कर स्वयं उन्नत प्रणालियों और प्लेटफार्म को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आज भारतीय जहाज निर्माण कारखाने उन्नत युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है। 

    ‘आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल’
    रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जबकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा हमारी अगली बड़ी छलांग है. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी स्थिति हासिल करनी होगी, जहां उसके जहाज निर्माण कारखाने भारतीय नौसेना के साथ-साथ मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी जहाज और समुद्री सेवाएं उपलब्ध करा सकें. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लक्ष्य स्पष्ट है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण किया जाए. ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध हो तथा विश्व पटल पर सम्मान के साथ खड़ा हो। 

  • घरों तक PNG पहुंचाने पर जोर, कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के निर्देश

    घरों तक PNG पहुंचाने पर जोर, कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के निर्देश

    भोपाल

    भारत सरकार शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन में वृद्धि किए जाने के लिये देश भर में एक अभियान चला रही है। इसमें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संबंधी अधोसंरचना उपलब्ध है। इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार एक ही समय पर एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने पर रोक लगाई गई है तथा ऐसे घरों में जहां पीएनजी सप्लाई उपलब्ध है, यदि उनके द्वारा पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया जाता है तो उन घरों को एलपीजी सप्लाई बंद करने का प्रावधान किया गया है। इस फ्रेमवर्क को समय-सीमा में लागू करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सभी अधिकृत सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र (GA) में एक पीएनजी समन्वय समिति (PCC) गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। जिला स्तर पर जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। समिति नगरीय निकाय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित कंपनियों से समन्वय कर शहर का एक्शन प्लान तैयार करेगी।

    पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने दी गई सुविधा

    सभी सीजीडी संस्थाओं द्वारा जिन कॉलोनियों में सीजीडी अधोसंरचना उपलब्ध है, उन कॉलोनी के घरों में पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन करने तथा पीएनजी कनेक्शन स्थापित करने के लिए जिलावार सीजीडी संस्थाएं कार्यरत है। घरेलू एवं कमर्शियल कनेक्शन की मांग/शिकायत दर्ज करने तथा निराकरण करने के लिए आम जनता निम्नानुसार दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं –

    1. अवंतिका गैस लिमिटेड- पीथमपुर (9753905737), इंदौर (9810750088), इंदौर (8085682649), उज्जैन (7091688388), ग्वालियर (8949647203)

    2. गैल गैस लिमिटेड- देवास (9424098887,07272250879), रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788)

    3. नवेरिया गैस लिमिटेड- धार (07292-223311)

    4. थिंक गैस- भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-3000-0046)

    5. इण्डियन आयल कंपनी – गुना (9425991090), मऊगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333)

    6. भारत पेट्रोलियम कंपनी- मैहर, सतना, शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954)

    7. गुजरात गैस लि. – उज्जैन, देवास, इंदौर (7342990916), रतलाम, झाबुआ (7412230292)

    प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।

  • स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    शहरी विकास, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण अनुकूल शहरों सहित विभिन्न विषयों पर आधारित होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    इंदौर

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव 28 अक्टूबर को आयोजित होगा। नगरीय विकास को नई गति देने, शहरी अधोसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहरों को अधिक सुविधायुक्त और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कॉन्क्लेव में राज्य सरकार के विजन को साझा किया जाएगा।

    श्रेणी-2 के शहरों के विकास एवं डिजिटल गवर्नेंस पर विचार-मंथन

    कॉन्क्लेव में महानगरों से आगे बढ़कर श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा स्वीकृतियां, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी (एनओसी) तथा एफएआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

    नगरीय प्रशासन में सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित सत्र में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (एबीपीएएस), ऑनलाइन एनओसी एवं विकास अनुज्ञा प्रणाली, कॉलोनी अधिनियम, डिजिटल गवर्नेंस, जीआईएस आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और ग्रीन फाइनेंसिंग

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और सर्कुलर एकॉनामी विषय पर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में शहरी जल पुनः उपयोग एवं जल प्रबंधन, अमृत 2.0, बीआरएसआर फ्रेमवर्क, नमो हरित नगर योजना, सिटी फॉरेस्ट एवं सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता सुधार की पहल, ईज ऑफ लिविंग एवं लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, एमआरएफ, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा सीबीजी इकोसिस्टम शामिल हैं।

    कॉन्क्लेव में शहरी निवेश, वित्तीय संसाधन, साझेदारी और वैश्विक विशेषज्ञता के अवसरों पर भी मंथन होगा। इसमें अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाएं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028: विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के निर्माण पर होगा विशेष सत्र

    कॉन्क्लेव में सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें नियोजन, प्राथमिकता वाली अधोसंरचना में निवेश, टेंपल बॉन्ड, सीएसआर, डिजिटल ट्विन मॉडलिंग तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। साथ ही तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं आयोजन प्रबंधन को भी सत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। अर्बन कॉन्क्लेव प्रदेश में नगरीय अधोसंरचना, नवाचार, टिकाऊ शहरी विकास और रोजगार सृजन को एक नई दिशा एवं गति प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

     

  • सेवा भाव और नेतृत्व पर होगी चर्चा, डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ऑनलाइन सत्र में करेंगे संवाद

    सेवा भाव और नेतृत्व पर होगी चर्चा, डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ऑनलाइन सत्र में करेंगे संवाद

    ‘सेवा भाव’ पर विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को

    नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे संवाद
    प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों से सत्र में भाग लेने की अपील
    सत्र में सहभागिता पर मिलेंगे ‘Service Orientation’ competency के विशेष क्रेडिट

    भोपाल 
    कर्मयोगी भारत द्वारा नागरिक केन्द्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ‘सेवा भाव’ विषय पर बुधवार 7 अक्टूबर 2026 को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जाएगा। सत्र का संचालन नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे। सत्र में शासकीय सेवकों में संवेदनशीलता, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के साथ लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना विकसित करने पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी कर अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन सत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।

    सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक होगा सत्र

    विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगा। सीधा प्रसारण iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। इससे केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी ऑनलाइन सत्र में शामिल हो सकेंगे। सत्र की लिंक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के Events Section में उपलब्ध कराई जाएगी।

    सहभागी अधिकारी-कर्मचारियों को मिलेंगे विशेष क्रेडिट

    अधिकारी-कर्मचारियों की सहभागिता और सीखने के प्रति उनकी सक्रियता को प्रोत्साहित करने के लिए 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से सत्र में शामिल होने वाले सभी उपयोगकर्ताओं को ‘Service Orientation’ competency के अंतर्गत विशेष क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे।

    नागरिकों को शासन के केन्द्र में रखने पर जोर

    मिशन कर्मयोगी में नागरिक केन्द्रितता को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। उद्देश्य ऐसी पेशेवर, सक्षम और उत्तरदायी सिविल सेवा का निर्माण करना है, जो शासन और लोक सेवा प्रदाय में नागरिकों को केन्द्र में रखे। iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर नागरिक केन्द्रितता और सेवा उन्मुखीकरण से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं जिन्हें बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों द्वारा पूरा किया जा चुका है।

    विशेष सत्र के माध्यम से शासकीय सेवकों में सहानुभूति, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने तथा लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना को आत्मसात करने पर जोर दिया जाएगा। कर्मयोगी भारत ने सभी स्तरों के अधिकारियों-कर्मचारियों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है जिससे शासन के सभी स्तरों पर सेवा, संवेदनशीलता और नागरिक केन्द्रित प्रशासन की साझा कार्य-संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सके।

     

  • लाखों का बोटोक्स इलाज अब मुफ्त! इंदौर MY अस्पताल में लकवे के मरीजों को राहत, डॉक्टरों ने किया अलर्ट

    लाखों का बोटोक्स इलाज अब मुफ्त! इंदौर MY अस्पताल में लकवे के मरीजों को राहत, डॉक्टरों ने किया अलर्ट

     इंदौर 
    इंटरनेट मीडिया पर बोटोक्स को लेकर तरह-तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कहीं इसे लकवे का इलाज बताया जा रहा है तो कहीं कुछ घंटे या दो दिन में हाथ-पैरों की हरकत पूरी तरह लौट आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इंदौर में स्ट्रोक या लकवे के बाद हाथ-पैरों में होने वाली स्पास्टिसिटी यानी मांसपेशियों के असामान्य कड़ापन से परेशान पात्र मरीजों को एमवाय अस्पताल में बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) का उपचार नि:शुल्क दिया जा रहा है।

    निजी अस्पतालों में महंगा पड़ने वाला यह उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। अस्पताल में अब तक 1000 से अधिक मरीज इसका लाभ ले चुके हैं।विशेषज्ञों के अनुसार बोटोक्स लकवे का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लकवे के बाद विकसित होने वाली स्पास्टिसिटी को कम करने के लिए किया जाता है।

    स्पास्टिसिटी से हाथ मुट्ठी की तरह बंद, पैर जमीन पर रखने में परेशानी
    स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों में प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां समय के साथ असामान्य रूप से सख्त होने लगती हैं। इसे स्पास्टिसिटी कहा जाता है।

    ऐसे मरीजों में हाथ लगातार मुड़ा रह सकता है, उंगलियां मुट्ठी की तरह बंद हो सकती हैं और कोहनी सीधी करने में परेशानी हो सकती है। पैरों में कड़ापन बढ़ने पर पैर सामान्य तरीके से जमीन पर नहीं पड़ता, जिससे चलने में परेशानी हो सकती है।

    कई बार यह कड़ापन फिजियोथेरेपी और रोजमर्रा के कामों में भी बाधा बनता है। ऐसे चुनिंदा मरीजों में विशेषज्ञ बोटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल करते हैं।

    प्रभावित मांसपेशी की पहचान के बाद लगाया जाता है इंजेक्शन
    डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल मरीज की जांच कर यह देखती हैं कि किस मांसपेशी में असामान्य खिंचाव या कड़ापन है। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हीं चुनिंदा मांसपेशियों में बोटोक्स लगाया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों की अत्यधिक सक्रियता को अस्थायी रूप से कम करना होता है।

    3 से 6 महीने तक रह सकता है असर
    बोटोक्स का असर स्थायी नहीं होता। मरीज की स्थिति, मांसपेशियों की प्रतिक्रिया और स्पास्टिसिटी की गंभीरता के आधार पर कुछ मरीजों को तीन से छह महीने बाद दोबारा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, हर मरीज को तय अंतराल पर दोबारा इंजेक्शन लगाना जरूरी नहीं है।

    दोबारा बोटोक्स देना है या नहीं, कितनी मात्रा में देना है और किन मांसपेशियों में देना है, इसका निर्णय डॉक्टर मरीज की दोबारा जांच के बाद करते हैं।

    मरीज बोले- यहां आकर पता चला बोटोक्स मुफ्त है
    एमवाय अस्पताल में उपचार करा रहे एक मरीज ने बताया कि उसे पहले जानकारी नहीं थी कि यहां बोटोक्स की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। लकवे के बाद हाथ ठीक से नहीं उठता था और पैर से चलने में भी परेशानी थी।

    अलग-अलग जगह इलाज कराने के बाद एमवाय अस्पताल में बोटोक्स लगाया गया। इसके बाद हाथ में कुछ हरकत आने लगी और चलने में भी सुधार महसूस हुआ।मरीज ने कहा कि यदि इस सुविधा की जानकारी पहले होती तो इलाज के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता। सरकारी अस्पताल में उपचार निशुल्क मिलने से मरीज और परिवार पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होता है।

    दिसंबर 2025 में आया था लकवा, बोटोक्स के बाद हाथ में राहत
    एक महिला ने बताया कि उसके पिता को दिसंबर 2025 में लकवा आया था। इसके बाद उनका हाथ ठीक से नहीं उठता था। इलाज और पुनर्वास के दौरान बोटोक्स दिया गया। महिला के मुताबिक, इसके बाद हाथ में पहले की तुलना में राहत महसूस हुई और हरकत में सुधार आया।

    दो महीने पहले बोटोक्स लगा, हाथ का कड़ापन हुआ कम
    दादी को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर आए एक युवक ने बताया कि करीब दो महीने पहले बोटोक्स लगाया गया था। इससे पहले हाथ काफी कड़क रहते थे।अब हाथ पहले की तुलना में लूज हुआ है और मूवमेंट भी आने लगी है। पैर में भी पहले हरकत नहीं थी, लेकिन उपचार के बाद उसमें भी मूवमेंट महसूस हो रही है।

    डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि एमवाय अस्पताल में बोटोक्स थेरेपी निशुल्क की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है। मरीज किसी भी भ्रामक जानकारी में आकर खुद से कोई इंजेक्शन न लगवाएं। उन्होंने बताया कि यहां 10 साल से यह थेरेपी दी जा रही है।

  • चीतों की सुरक्षा के लिए MP में बड़ा प्लान, कूनो से बाहर निकलते ही ट्रैकिंग; वन अफसरों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

    चीतों की सुरक्षा के लिए MP में बड़ा प्लान, कूनो से बाहर निकलते ही ट्रैकिंग; वन अफसरों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

    ग्वालियर
     श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा।

    5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा
    योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा।

    इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे
    चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

    इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

    दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते
    कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा।

    कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला
    इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा।

    इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे।

    हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड
    प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।

     

  • एक साल बीता, फिर भी कार्रवाई का इंतजार; IPS पूर्ण कुमार केस की अधूरी जांच पर उठे सवाल

    एक साल बीता, फिर भी कार्रवाई का इंतजार; IPS पूर्ण कुमार केस की अधूरी जांच पर उठे सवाल

    चंडीगढ़
     हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या को सात अक्टूबर को एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन मामले की जांच अभी तक अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है।

    चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के बाद कई स्तर पर जांच की, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। यहां तक कि पुलिस ने एफआइआर में किसी अधिकारी का नाम भी नहीं लिखा था।

    ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सात अक्टूबर 2025 को 2001 बैच के 52 वर्षीय आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास के बेसमेंट में अपनी सर्विस रिवाॅल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

    अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
    घटना के बाद पुलिस को मौके से उनका अंतिम नोट मिला था। अंतिम नोट में पूर्ण कुमार ने हरियाणा के कई वरिष्ठ व सेवानिवृत्त पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

    उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार भी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्हीं की शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने नौ अक्टूबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की।

    बाद में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) भी जोड़ी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।

    आत्महत्या के बाद हुए थे कई विरोध प्रदर्शन
    वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या के बाद चंडीगढ़ समेत हरियाणा और पंजाब में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके परिवार, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।

    चंडीगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पूर्ण कुमार के अंतिम नोट में लगाए गए आरोपों का मुद्दा उठाया गया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

  • Captain Smit Health Update: खोपड़ी में चोट, नजर और दिमाग पर असर; तेज सिरदर्द के लिए चल रहा इलाज

    Captain Smit Health Update: खोपड़ी में चोट, नजर और दिमाग पर असर; तेज सिरदर्द के लिए चल रहा इलाज

    मुंबई 

    फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही उड़ान में को-पायलट के हमले में घायल भारतीय कप्तान स्मित मच्छर की हालत को लेकर नया अपडेट सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, हमले में उनकी खोपड़ी टूट गई थी और चोट का असर उनकी नजर के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र पर भी पड़ा है. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की, जिसके बाद उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ले जाया गया. अब UAE में डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं. फिलहाल, उनकी हालत स्थिर है। 

    स्मित मच्छर की हालत कैसी है?
    सूत्रों के मुताबिक, कॉकपिट में कुल्हाड़ी से हुए हमले में कप्तान स्मित मच्छर की खोपड़ी टूट गई थी. चोट की वजह से उनकी नजर प्रभावित हुई और उन्हें तंत्रिका तंत्र में भी नुकसान हुआ. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की. इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए यूएई भेजा गया. वहां डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। 

    सूत्रों ने कहा कि भारतीय पायलट स्मित मच्छर को लगातार तेज सिरदर्द की समस्या भी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, दर्द से राहत देने के लिए उन्हें हेवी डोज वाली और नींद की दवाएं दी जा रही हैं. हालांकि, इस मुश्किल स्थिति के बीच स्मित का हौसला बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, वह सकारात्मक हैं और बार-बार कह चुके हैं कि वह दोबारा विमान उड़ाना चाहते हैं। 

    जांच एजेंसियों ने दर्ज किया स्मित का बयान
    सूत्रों ने बताया कि स्मित का बयान जांच एजेंसियां दर्ज कर चुकी हैं. उनकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए यह बयान घटना की पूरी तस्वीर समझने में अहम हो सकता है. जांच का मुख्य सवाल यही है कि उड़ान के दौरान कॉकपिट में आखिर क्या हुआ। 

    नेतन्याहू ने की फोन पर बात
    इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार को फोन पर स्मित से बातचीत की थी. इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छर ने बताया कि हमले से पहले सह-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी और उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे. मच्छर ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। 

    नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं. उन्होंने कहा, ‘आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया.’ विमान को सऊदी अरब में आपात स्थिति में उतारा गया था। 

    कॉकपिट में क्या हुआ था?
    दरअसल, यह घटना 30 सितंबर
    2026 की है. फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी. करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छर पर पीछे से हमला कर दिया. हमले में मच्छर गंभीर रूप से घायल हुए और विमान तेजी से नीचे गिरने लगा. उन्होंने पहले कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन को-पायलट ने उसे बंद कर दिया. इसके बाद घायल मच्छर ने आखिरी ताकत लगाकर अंदर से दरवाजा घुमा कर खोल दिया. यात्री अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू किया।