Author: NewseDay

  • घरों तक PNG पहुंचाने पर जोर, कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के निर्देश

    घरों तक PNG पहुंचाने पर जोर, कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के निर्देश

    भोपाल

    भारत सरकार शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन में वृद्धि किए जाने के लिये देश भर में एक अभियान चला रही है। इसमें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संबंधी अधोसंरचना उपलब्ध है। इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार एक ही समय पर एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने पर रोक लगाई गई है तथा ऐसे घरों में जहां पीएनजी सप्लाई उपलब्ध है, यदि उनके द्वारा पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया जाता है तो उन घरों को एलपीजी सप्लाई बंद करने का प्रावधान किया गया है। इस फ्रेमवर्क को समय-सीमा में लागू करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सभी अधिकृत सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र (GA) में एक पीएनजी समन्वय समिति (PCC) गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। जिला स्तर पर जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। समिति नगरीय निकाय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित कंपनियों से समन्वय कर शहर का एक्शन प्लान तैयार करेगी।

    पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने दी गई सुविधा

    सभी सीजीडी संस्थाओं द्वारा जिन कॉलोनियों में सीजीडी अधोसंरचना उपलब्ध है, उन कॉलोनी के घरों में पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन करने तथा पीएनजी कनेक्शन स्थापित करने के लिए जिलावार सीजीडी संस्थाएं कार्यरत है। घरेलू एवं कमर्शियल कनेक्शन की मांग/शिकायत दर्ज करने तथा निराकरण करने के लिए आम जनता निम्नानुसार दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं –

    1. अवंतिका गैस लिमिटेड- पीथमपुर (9753905737), इंदौर (9810750088), इंदौर (8085682649), उज्जैन (7091688388), ग्वालियर (8949647203)

    2. गैल गैस लिमिटेड- देवास (9424098887,07272250879), रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788)

    3. नवेरिया गैस लिमिटेड- धार (07292-223311)

    4. थिंक गैस- भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-3000-0046)

    5. इण्डियन आयल कंपनी – गुना (9425991090), मऊगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333)

    6. भारत पेट्रोलियम कंपनी- मैहर, सतना, शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954)

    7. गुजरात गैस लि. – उज्जैन, देवास, इंदौर (7342990916), रतलाम, झाबुआ (7412230292)

    प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।

  • स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    शहरी विकास, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण अनुकूल शहरों सहित विभिन्न विषयों पर आधारित होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    इंदौर

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव 28 अक्टूबर को आयोजित होगा। नगरीय विकास को नई गति देने, शहरी अधोसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहरों को अधिक सुविधायुक्त और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कॉन्क्लेव में राज्य सरकार के विजन को साझा किया जाएगा।

    श्रेणी-2 के शहरों के विकास एवं डिजिटल गवर्नेंस पर विचार-मंथन

    कॉन्क्लेव में महानगरों से आगे बढ़कर श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा स्वीकृतियां, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी (एनओसी) तथा एफएआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

    नगरीय प्रशासन में सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित सत्र में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (एबीपीएएस), ऑनलाइन एनओसी एवं विकास अनुज्ञा प्रणाली, कॉलोनी अधिनियम, डिजिटल गवर्नेंस, जीआईएस आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और ग्रीन फाइनेंसिंग

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और सर्कुलर एकॉनामी विषय पर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में शहरी जल पुनः उपयोग एवं जल प्रबंधन, अमृत 2.0, बीआरएसआर फ्रेमवर्क, नमो हरित नगर योजना, सिटी फॉरेस्ट एवं सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता सुधार की पहल, ईज ऑफ लिविंग एवं लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, एमआरएफ, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा सीबीजी इकोसिस्टम शामिल हैं।

    कॉन्क्लेव में शहरी निवेश, वित्तीय संसाधन, साझेदारी और वैश्विक विशेषज्ञता के अवसरों पर भी मंथन होगा। इसमें अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाएं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028: विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के निर्माण पर होगा विशेष सत्र

    कॉन्क्लेव में सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें नियोजन, प्राथमिकता वाली अधोसंरचना में निवेश, टेंपल बॉन्ड, सीएसआर, डिजिटल ट्विन मॉडलिंग तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। साथ ही तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं आयोजन प्रबंधन को भी सत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। अर्बन कॉन्क्लेव प्रदेश में नगरीय अधोसंरचना, नवाचार, टिकाऊ शहरी विकास और रोजगार सृजन को एक नई दिशा एवं गति प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

     

  • सेवा भाव और नेतृत्व पर होगी चर्चा, डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ऑनलाइन सत्र में करेंगे संवाद

    सेवा भाव और नेतृत्व पर होगी चर्चा, डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ऑनलाइन सत्र में करेंगे संवाद

    ‘सेवा भाव’ पर विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को

    नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे संवाद
    प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों से सत्र में भाग लेने की अपील
    सत्र में सहभागिता पर मिलेंगे ‘Service Orientation’ competency के विशेष क्रेडिट

    भोपाल 
    कर्मयोगी भारत द्वारा नागरिक केन्द्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ‘सेवा भाव’ विषय पर बुधवार 7 अक्टूबर 2026 को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जाएगा। सत्र का संचालन नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे। सत्र में शासकीय सेवकों में संवेदनशीलता, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के साथ लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना विकसित करने पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी कर अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन सत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।

    सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक होगा सत्र

    विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगा। सीधा प्रसारण iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। इससे केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी ऑनलाइन सत्र में शामिल हो सकेंगे। सत्र की लिंक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के Events Section में उपलब्ध कराई जाएगी।

    सहभागी अधिकारी-कर्मचारियों को मिलेंगे विशेष क्रेडिट

    अधिकारी-कर्मचारियों की सहभागिता और सीखने के प्रति उनकी सक्रियता को प्रोत्साहित करने के लिए 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से सत्र में शामिल होने वाले सभी उपयोगकर्ताओं को ‘Service Orientation’ competency के अंतर्गत विशेष क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे।

    नागरिकों को शासन के केन्द्र में रखने पर जोर

    मिशन कर्मयोगी में नागरिक केन्द्रितता को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। उद्देश्य ऐसी पेशेवर, सक्षम और उत्तरदायी सिविल सेवा का निर्माण करना है, जो शासन और लोक सेवा प्रदाय में नागरिकों को केन्द्र में रखे। iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर नागरिक केन्द्रितता और सेवा उन्मुखीकरण से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं जिन्हें बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों द्वारा पूरा किया जा चुका है।

    विशेष सत्र के माध्यम से शासकीय सेवकों में सहानुभूति, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने तथा लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना को आत्मसात करने पर जोर दिया जाएगा। कर्मयोगी भारत ने सभी स्तरों के अधिकारियों-कर्मचारियों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है जिससे शासन के सभी स्तरों पर सेवा, संवेदनशीलता और नागरिक केन्द्रित प्रशासन की साझा कार्य-संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सके।

     

  • लाखों का बोटोक्स इलाज अब मुफ्त! इंदौर MY अस्पताल में लकवे के मरीजों को राहत, डॉक्टरों ने किया अलर्ट

    लाखों का बोटोक्स इलाज अब मुफ्त! इंदौर MY अस्पताल में लकवे के मरीजों को राहत, डॉक्टरों ने किया अलर्ट

     इंदौर 
    इंटरनेट मीडिया पर बोटोक्स को लेकर तरह-तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कहीं इसे लकवे का इलाज बताया जा रहा है तो कहीं कुछ घंटे या दो दिन में हाथ-पैरों की हरकत पूरी तरह लौट आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इंदौर में स्ट्रोक या लकवे के बाद हाथ-पैरों में होने वाली स्पास्टिसिटी यानी मांसपेशियों के असामान्य कड़ापन से परेशान पात्र मरीजों को एमवाय अस्पताल में बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) का उपचार नि:शुल्क दिया जा रहा है।

    निजी अस्पतालों में महंगा पड़ने वाला यह उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। अस्पताल में अब तक 1000 से अधिक मरीज इसका लाभ ले चुके हैं।विशेषज्ञों के अनुसार बोटोक्स लकवे का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लकवे के बाद विकसित होने वाली स्पास्टिसिटी को कम करने के लिए किया जाता है।

    स्पास्टिसिटी से हाथ मुट्ठी की तरह बंद, पैर जमीन पर रखने में परेशानी
    स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों में प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां समय के साथ असामान्य रूप से सख्त होने लगती हैं। इसे स्पास्टिसिटी कहा जाता है।

    ऐसे मरीजों में हाथ लगातार मुड़ा रह सकता है, उंगलियां मुट्ठी की तरह बंद हो सकती हैं और कोहनी सीधी करने में परेशानी हो सकती है। पैरों में कड़ापन बढ़ने पर पैर सामान्य तरीके से जमीन पर नहीं पड़ता, जिससे चलने में परेशानी हो सकती है।

    कई बार यह कड़ापन फिजियोथेरेपी और रोजमर्रा के कामों में भी बाधा बनता है। ऐसे चुनिंदा मरीजों में विशेषज्ञ बोटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल करते हैं।

    प्रभावित मांसपेशी की पहचान के बाद लगाया जाता है इंजेक्शन
    डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल मरीज की जांच कर यह देखती हैं कि किस मांसपेशी में असामान्य खिंचाव या कड़ापन है। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हीं चुनिंदा मांसपेशियों में बोटोक्स लगाया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों की अत्यधिक सक्रियता को अस्थायी रूप से कम करना होता है।

    3 से 6 महीने तक रह सकता है असर
    बोटोक्स का असर स्थायी नहीं होता। मरीज की स्थिति, मांसपेशियों की प्रतिक्रिया और स्पास्टिसिटी की गंभीरता के आधार पर कुछ मरीजों को तीन से छह महीने बाद दोबारा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, हर मरीज को तय अंतराल पर दोबारा इंजेक्शन लगाना जरूरी नहीं है।

    दोबारा बोटोक्स देना है या नहीं, कितनी मात्रा में देना है और किन मांसपेशियों में देना है, इसका निर्णय डॉक्टर मरीज की दोबारा जांच के बाद करते हैं।

    मरीज बोले- यहां आकर पता चला बोटोक्स मुफ्त है
    एमवाय अस्पताल में उपचार करा रहे एक मरीज ने बताया कि उसे पहले जानकारी नहीं थी कि यहां बोटोक्स की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। लकवे के बाद हाथ ठीक से नहीं उठता था और पैर से चलने में भी परेशानी थी।

    अलग-अलग जगह इलाज कराने के बाद एमवाय अस्पताल में बोटोक्स लगाया गया। इसके बाद हाथ में कुछ हरकत आने लगी और चलने में भी सुधार महसूस हुआ।मरीज ने कहा कि यदि इस सुविधा की जानकारी पहले होती तो इलाज के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता। सरकारी अस्पताल में उपचार निशुल्क मिलने से मरीज और परिवार पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होता है।

    दिसंबर 2025 में आया था लकवा, बोटोक्स के बाद हाथ में राहत
    एक महिला ने बताया कि उसके पिता को दिसंबर 2025 में लकवा आया था। इसके बाद उनका हाथ ठीक से नहीं उठता था। इलाज और पुनर्वास के दौरान बोटोक्स दिया गया। महिला के मुताबिक, इसके बाद हाथ में पहले की तुलना में राहत महसूस हुई और हरकत में सुधार आया।

    दो महीने पहले बोटोक्स लगा, हाथ का कड़ापन हुआ कम
    दादी को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर आए एक युवक ने बताया कि करीब दो महीने पहले बोटोक्स लगाया गया था। इससे पहले हाथ काफी कड़क रहते थे।अब हाथ पहले की तुलना में लूज हुआ है और मूवमेंट भी आने लगी है। पैर में भी पहले हरकत नहीं थी, लेकिन उपचार के बाद उसमें भी मूवमेंट महसूस हो रही है।

    डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि एमवाय अस्पताल में बोटोक्स थेरेपी निशुल्क की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है। मरीज किसी भी भ्रामक जानकारी में आकर खुद से कोई इंजेक्शन न लगवाएं। उन्होंने बताया कि यहां 10 साल से यह थेरेपी दी जा रही है।

  • चीतों की सुरक्षा के लिए MP में बड़ा प्लान, कूनो से बाहर निकलते ही ट्रैकिंग; वन अफसरों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

    चीतों की सुरक्षा के लिए MP में बड़ा प्लान, कूनो से बाहर निकलते ही ट्रैकिंग; वन अफसरों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

    ग्वालियर
     श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा।

    5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा
    योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा।

    इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे
    चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

    इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

    दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते
    कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा।

    कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला
    इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा।

    इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे।

    हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड
    प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।

     

  • एक साल बीता, फिर भी कार्रवाई का इंतजार; IPS पूर्ण कुमार केस की अधूरी जांच पर उठे सवाल

    एक साल बीता, फिर भी कार्रवाई का इंतजार; IPS पूर्ण कुमार केस की अधूरी जांच पर उठे सवाल

    चंडीगढ़
     हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या को सात अक्टूबर को एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन मामले की जांच अभी तक अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है।

    चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के बाद कई स्तर पर जांच की, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। यहां तक कि पुलिस ने एफआइआर में किसी अधिकारी का नाम भी नहीं लिखा था।

    ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सात अक्टूबर 2025 को 2001 बैच के 52 वर्षीय आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास के बेसमेंट में अपनी सर्विस रिवाॅल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

    अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
    घटना के बाद पुलिस को मौके से उनका अंतिम नोट मिला था। अंतिम नोट में पूर्ण कुमार ने हरियाणा के कई वरिष्ठ व सेवानिवृत्त पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

    उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार भी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्हीं की शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने नौ अक्टूबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की।

    बाद में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) भी जोड़ी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।

    आत्महत्या के बाद हुए थे कई विरोध प्रदर्शन
    वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या के बाद चंडीगढ़ समेत हरियाणा और पंजाब में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके परिवार, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।

    चंडीगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पूर्ण कुमार के अंतिम नोट में लगाए गए आरोपों का मुद्दा उठाया गया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

  • Captain Smit Health Update: खोपड़ी में चोट, नजर और दिमाग पर असर; तेज सिरदर्द के लिए चल रहा इलाज

    Captain Smit Health Update: खोपड़ी में चोट, नजर और दिमाग पर असर; तेज सिरदर्द के लिए चल रहा इलाज

    मुंबई 

    फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही उड़ान में को-पायलट के हमले में घायल भारतीय कप्तान स्मित मच्छर की हालत को लेकर नया अपडेट सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, हमले में उनकी खोपड़ी टूट गई थी और चोट का असर उनकी नजर के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र पर भी पड़ा है. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की, जिसके बाद उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ले जाया गया. अब UAE में डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं. फिलहाल, उनकी हालत स्थिर है। 

    स्मित मच्छर की हालत कैसी है?
    सूत्रों के मुताबिक, कॉकपिट में कुल्हाड़ी से हुए हमले में कप्तान स्मित मच्छर की खोपड़ी टूट गई थी. चोट की वजह से उनकी नजर प्रभावित हुई और उन्हें तंत्रिका तंत्र में भी नुकसान हुआ. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की. इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए यूएई भेजा गया. वहां डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। 

    सूत्रों ने कहा कि भारतीय पायलट स्मित मच्छर को लगातार तेज सिरदर्द की समस्या भी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, दर्द से राहत देने के लिए उन्हें हेवी डोज वाली और नींद की दवाएं दी जा रही हैं. हालांकि, इस मुश्किल स्थिति के बीच स्मित का हौसला बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, वह सकारात्मक हैं और बार-बार कह चुके हैं कि वह दोबारा विमान उड़ाना चाहते हैं। 

    जांच एजेंसियों ने दर्ज किया स्मित का बयान
    सूत्रों ने बताया कि स्मित का बयान जांच एजेंसियां दर्ज कर चुकी हैं. उनकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए यह बयान घटना की पूरी तस्वीर समझने में अहम हो सकता है. जांच का मुख्य सवाल यही है कि उड़ान के दौरान कॉकपिट में आखिर क्या हुआ। 

    नेतन्याहू ने की फोन पर बात
    इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार को फोन पर स्मित से बातचीत की थी. इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छर ने बताया कि हमले से पहले सह-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी और उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे. मच्छर ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। 

    नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं. उन्होंने कहा, ‘आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया.’ विमान को सऊदी अरब में आपात स्थिति में उतारा गया था। 

    कॉकपिट में क्या हुआ था?
    दरअसल, यह घटना 30 सितंबर
    2026 की है. फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी. करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छर पर पीछे से हमला कर दिया. हमले में मच्छर गंभीर रूप से घायल हुए और विमान तेजी से नीचे गिरने लगा. उन्होंने पहले कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन को-पायलट ने उसे बंद कर दिया. इसके बाद घायल मच्छर ने आखिरी ताकत लगाकर अंदर से दरवाजा घुमा कर खोल दिया. यात्री अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू किया। 

  • Delhi-Patna Vande Bharat: दिवाली-छठ पर स्पेशल ट्रेन की तैयारी, कम होगा सफर का समय; जानें किराया-स्टॉपेज

    Delhi-Patna Vande Bharat: दिवाली-छठ पर स्पेशल ट्रेन की तैयारी, कम होगा सफर का समय; जानें किराया-स्टॉपेज

     नई दिल्ली
    दिवाली और छठ के आसपास दिल्ली से बिहार जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना हर साल बड़ी चुनौती बन जाता है. इस बार भी त्योहारों से पहले रेगुलर ट्रेनों में सीटों की डिमांड ऐसी रही कि 60 दिन पहले बुकिंग खुलते ही ट्रेनें फुल हो गईं. इस रूट पर रेगुलर ट्रनों में अब तत्काल कोटे का ही सहारा है, वो भी अगर रेलवे का ऐप सही-सलामत काम करे. क्योंकि सभी ट्रेनों में या तो टिकट बुकिंग रिग्रेट (Regret) हो चुकी है या वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि टिकट कंफर्म होने को कोई चांस नहीं। 

    ऐसे में यात्रियों के लिए रेलवे की तरफ से एक नया विकल्प सामने आ सकता है. दिल्ली से पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल चलाने की तैयारी है, जिससे त्योहारों के दौरान सफर करने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है. रेलवे ने अभी इस ट्रेन को चलाने की अंतिम मंजूरी नहीं दी है, लेकिन उत्तर रेलवे (Nothern Railway) ने प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है. मंजूरी मिलती है तो यात्रियों को दिवाली और छठ के बीच दिल्ली-पटना रूट पर तेज रफ्तार ट्रेन का विकल्प मिल सकेगा. आइए जानते हैं यह ट्रेन कब चलेगी, कहां रुकेगी और कितना किराया हो सकता है। 

    कब से कब तक चल सकती है ट्रेन?

    प्रस्ताव के मुताबिक, दिल्ली और पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल की सेवाएं 21 अक्टूबर से 28 नवंबर के बीच चलाने की तैयारी है. इसके लिए दो जोड़ी ट्रेनों का प्रस्ताव रखा गया है। 

    पहली जोड़ी 02252/02251 नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलेगी. नई दिल्ली से इसके फेरे सोमवार, बुधवार और शनिवार को प्रस्तावित हैं. वहीं पटना से वापसी 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को होगी. इस जोड़ी के कुल 16 फेरे प्रस्तावित हैं। 

    दूसरी जोड़ी 02253/02254 पटना से 24 अक्टूबर से 28 नवंबर तक चलाने का प्रस्ताव है. पटना से इसके फेरे शनिवार, सोमवार और बुधवार को होंगे. वहीं नई दिल्ली से इसकी वापसी 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक रविवार, मंगलवार और गुरुवार को प्रस्तावित है। 

    दिल्ली-पटना 13 घंटे लेगी ट्रेन
    यह ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा करेगी. प्रस्तावित समय के मुताबिक, नई दिल्ली से ट्रेन सुबह 8:35 बजे रवाना होगी. रास्ते में यह अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा में रुकेगी. इसके बाद ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचेगी। 

    वापसी में क्या होगी टाइमिंग?
    पटना से नई दिल्ली के लिए ट्रेन सुबह 10 बजे रवाना होने का प्रस्ताव है. यह दोपहर करीब 3:35 बजे प्रयागराज पहुंचेगी और इसके बाद रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचने का समय रखा गया है. यानी दिल्ली से पटना जाने वाले यात्रियों को सुबह रवाना होकर रात तक पटना पहुंचने का विकल्प मिल सकता है. वापसी में भी सुबह पटना से निकलकर रात तक दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। 

    कितना हो सकता है किराया?
    अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है तो एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब ₹2,575 से ₹2,600 हो सकता है. वहीं एग्जीक्यूटिव चेयर कार के लिए भोजन सहित किराया करीब ₹4,650 से ₹4,680 रहने का प्रस्ताव है. यानी टिकट बुक करने से पहले यात्रियों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उनके बजट और यात्रा के समय के हिसाब से यह विकल्प कितना सुविधाजनक बैठता है. भोजन का विकल्प टिकट बुक करते समय ही चुनना होगा. भोजन नहीं लेने पर टिकट कुछ सस्ता हो सकता है। 

    अभी टिकट बुक कर सकते हैं?
    फिलहाल नहीं. यह ट्रेन अभी प्रस्तावित है और रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी मिलने के बाद ही रिजर्वेशन शुरू होगा. उत्तर रेलवे के सीपीआरओ के मुताबिक, मंजूरी मिलते ही आईआरसीटीसी पर बुकिंग शुरू की जाएगी. इसलिए अगर आप दिवाली या छठ के दौरान दिल्ली से पटना जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस ट्रेन की घोषणा और बुकिंग शुरू होने पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 

    त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है ट्रेनों की मांग?
    दिवाली और छठ के समय दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाते हैं. खासकर छठ के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इस वजह से रेगुलर ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है. रेलवे भीड़ को संभालने के लिए अलग-अलग रूट पर स्पेशल ट्रेनें चलाता है. दिल्ली-पटना वंदे भारत स्पेशल भी इसी तैयारी का हिस्सा हो सकती है। 

  • उत्तर प्रदेश की प्रगति पर CM योगी का फोकस, स्टार्टअप से यूनिकॉर्न तक बदली प्रदेश की तस्वीर

    उत्तर प्रदेश की प्रगति पर CM योगी का फोकस, स्टार्टअप से यूनिकॉर्न तक बदली प्रदेश की तस्वीर

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को उप्र की प्रगति से साक्षात्कार कराया। उन्होंने 2017 के बाद प्रदेश की उड़ान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया।

    वहीं पूर्ववर्ती सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा?

    पूर्ववर्ती सरकारों ने अनलिमिटेड पोटेंशियल का नहीं किया उपयोग

    मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे 'बीमारू' ही बनाए रखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है।

    मोबाइल से मॉड्यूल और माइक्रोचिप तक पहुंच रही विकास यात्रा
    मुख्यमंत्री ने बताया कि आज साढ़े 9 वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है।

    2017 से पहले सैफई महोत्सव ही था सांस्कृतिक उत्थान
    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की तस्वीर भी दिखाई। कहाकि आज के परिदृश्य से अलग पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था।

    भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा उप्र
    मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने प्राथमिकता बदली। परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक का संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स बढ़ा तो डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा बढ़ा तो आज उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है।

    तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश
    मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम भी युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार देने वाला बना रहा है।

    कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज उसका निर्माता बन रहा है। असेंबली से एआई तक यह यात्रा केवल तकनीक की नहीं, हमारे युवाओं के रोजगार, उद्यम और समृद्धि की यात्रा है।

    'नए उत्तर प्रदेश' की दिख रही नई उड़ान
    सीएम ने बताया कि इसी कड़ी में आज (मंगलवार) लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करूंगा। इस अवसर पर HCL GUVI Emerging Tech Skilling Centre का शुभारंभ भी होगा। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प के साथ यही 'नए उत्तर प्रदेश' की नई उड़ान है।

  • एमपी ट्रांसको की नई पहल, HTLS कंडक्टर से बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन नेटवर्क होगा मजबूत

    एमपी ट्रांसको की नई पहल, HTLS कंडक्टर से बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन नेटवर्क होगा मजबूत

    एमपी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन: ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ग्वालियर के महत्वपूर्ण 132 केवी पारेषण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों में लगे एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग (एचटीएलएस) कंडक्टरों से बदला जा रहा है। कार्य पूर्ण होने पर इन लाइनों की विद्युत पारेषण क्षमता करीब तीन गुना तक बढ़ सकेगी।

    39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में शुरू हुआ क्षमता उन्नयन कार्य

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन से जुड़े 132 केवी डीसीडीएस महलगांव-तिघरा तथा महलगांव-मोतीझील सर्किटों में कंडक्टर बदलने का कार्य शुरू हो गया है। कुल लगभग 39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में मौजूदा एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों के स्थान पर पैंथर समतुल्य एचटीएलएस कंडक्टर लगाए जा रहे हैं। इससे इन महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनों की करंट वहन क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण संभव हो सकेगा।

    सबस्टेशनों मे भी होगा अपरेटिंग का कार्य

    कंडक्टर बदलने के साथ संबंधित सबस्टेशनों के फीडर बे और उपकरणों की क्षमता का भी उन्नयन किया जा रहा है। इसके तहत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन में दो 132 केवी फीडर बे, 132 केवी मोतीझील सबस्टेशन में एक तथा 132 केवी तिघरा सबस्टेशन में एक फीडर बे के अपरेटिंग का कार्य भी शुरू किया गया है। इससे लाइन और सबस्टेशन उपकरणों की क्षमता में आवश्यक सामंजस्य स्थापित होगा।

     मौजूदा कॉरिडोर से ही बढ़ेगी  तीन गुना पारेषण क्षमता

    एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके कारण मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक पावर का पारेषण किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

    बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर किया जा रहा उन्नयन

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि ग्वालियर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण विद्युत मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) उपलब्ध कराना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर में ही क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है।

    पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन होगा संभव

    एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से महत्वपूर्ण 132 केवी लाइनों की क्षमता बढ़ने से पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और इन लाइनों पर अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन उपलब्ध होगा। संबंधित स्विचयार्ड और फीडर बे उपकरणों के उन्नयन से बढ़ी हुई पारेषण क्षमता का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा।

    ग्वालियर शहर के बढ़ते लोड को पूरा करने में होगा सहायक

     ट्रांसमिशन लाइन की इस क्षमता उन्नयन से ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।

    ज्यादा लोड वहन करने व अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम

    उल्लेखनीय है कि एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। कंडक्टर की अधिक थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक पावर का पारेषण किया जा सकता है।