Author: NewseDay

  • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के दौर में दूसरी बार DA बढ़ने की उम्मीद

    केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के दौर में दूसरी बार DA बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली

     केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। साल की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान इसी महीने यानी अक्टूबर में ही होने की उम्मीद है। आठवें वेतन आयोग के दौर में यह दूसरी बार होगा जब सरकार महंगाई भत्ते का ऐलान करेगी। इससे पहले अप्रैल महीने में भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए को 2 पर्सेंट बढ़ाया गया था।

    कब हुआ था 8वें वेतन आयोग का गठन
    वैसे तो सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में ही आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था लेकिन 2025 के नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस और समिति का गठन हुआ। इससे एक महीने पहले यानी अक्टूबर 2025 में सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर में सरकार ने डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया था। बता दें कि सातवें वेतन आयोग की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हो गई। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जब लागू करेगी तो जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा।

    अप्रैल में पहली बार डीए का ऐलान
    आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने में पहली बार डीए का ऐलान किया था। यह ऐलान जनवरी से जून छमाही के लिए किया गया था। डीए में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई और इसका कैल्कुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत ही किया गया। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का भत्ता 60 पर्सेंट है।

    कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?
    केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 60 पर्सेंट की दर से डीए मिल रहा है। AICPI-IW के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर DA में 4 से 5 पर्सेंट बढ़ोतरीका अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 64 पर्सेंट से 65 पर्सेंट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अंतिम डीए दर का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। बता दें कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर रहा है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसके आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे में बड़ा बदलाव हो सकता है।

    वहीं, डीए पर क्या फैसला होगा, इसके बारे में वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही फैसला होगा। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी।

  • MP Ladli Behna: 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! ₹1,500 पाने से पहले पूरा करें जरूरी काम

    MP Ladli Behna: 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! ₹1,500 पाने से पहले पूरा करें जरूरी काम

    भोपाल 

    त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है। 

    'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है। 

    कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त?
    सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी। 

    किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम
    कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें। 

    पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है। 

    बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है। 

    समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है। 

    कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस?
    अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी। 

    बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत?
    अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं। 

    किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें
    किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी। 

    ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस

        सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.
        वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.
        अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें
        इसके बाद कैप्चा भरें.
        रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.
        वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.
        लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट

    पैसा नहीं आए तो क्या करें?
    अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है। 

    इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें। 

  • West Bengal Name Change: 27 साल से जारी कवायद, अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम पर फिर गरमाई सियासत

    West Bengal Name Change: 27 साल से जारी कवायद, अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम पर फिर गरमाई सियासत

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि सीएम सुवेंदू अधिकारी की सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने का विधेयक ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा सत्र में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. बीजेपी नेता के मुताबिक यह फैसला राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ने के मकसद से लिया गया है. पिछले 27 सान में तीन बार पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें राज्‍य सरकारों की तरफ से की गई. हालांकि केंद्र और राज्‍य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण पहले ऐसा नहीं हो सका. इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्‍ट बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा रख दिया जाए। 

    अब वेस्‍ट बंगाल नहीं, पश्चिम बंगा?
    समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा
    कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्‍ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी. हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी. नाम बदलने का मुद्दा पश्चिम बंगाल में नया नहीं है. इसके पीछे बंगाली पहचान और औपनिवेशिक दौर से जुड़े नाम को बदलने की दलील पहले भी दी जाती रही है. लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। 

    1999 से चल रही नाम बदलने की कहानी
    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशों का इति
    हास करीब ढाई दशक पुराना है. 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगा नाम रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था. उस समय बांग्ला नाम पर भी चर्चा हुई थी. प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली. 2011 में ममता बनर्जी सरकार आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा. उस समय पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा गया. सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में वेस्‍ट बंगाल नीचे आता है. इससे राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. हालांकि केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी। 

    2016 में फिर बदला प्रस्ताव
    2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई. सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया. 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका. केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई. साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी. यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया। 

    वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन
    समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंगा भवन’ की जानकारी भी दी. उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है. यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा. इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है. वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी। 

  • रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, मोहम्मद जावेद को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, मोहम्मद जावेद को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रायपुर

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर और लंबे इंतजार की परेशानी से अब नागरिकों को राहत मिल रही है। बिलासपुर के नवापारा, सिरगिट्टी निवासी मोहम्मद जावेद ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। इस बार संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ ही ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से उनका नामांतरण भी हो गया। इससे उन्हें नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ा। वहीं व्यापार विहार में शुरू हुए नए सर्वसुविधायुक्त पंजीयन कार्यालय ने उनके लिए रजिस्ट्री की प्रक्रिया को और सुविधाजनक बना दिया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इन बदलावों से मिले अपने अनुभव साझा किए।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। तकनीक के माध्यम से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के साथ नए पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से सेवाओं की पहुंच का भी विस्तार किया जा रहा है।

    पहले तहसील के चक्कर, अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण

    श्री मोहम्मद जावेद ने बताया कि पहले संपत्ति का पंजीयन कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे और नामांतरण होने का इंतजार भी करना पड़ता था। इस बार रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण होने से उन्हें इस पूरी दौड़भाग से राहत मिली और समय भी बचा।

    ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता कम हो रही है। जावेद के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यही रहा कि रजिस्ट्री के बाद उन्हें अलग से तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ा।

    व्यापार विहार में नया कार्यालय, पंजीयन कराना हुआ और सुविधाजनक

    श्री जावेद ने पंजीयन कार्यालयों के विस्तार से मिली सुविधा का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले पंजीयन संबंधी कार्य के लिए नेहरू चौक स्थित कार्यालय जाना पड़ता था। व्यापार विहार में नया सर्वसुविधायुक्त पंजीयन कार्यालय शुरू होने के बाद उनके लिए पंजीयन संबंधी काम कराना अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    उन्होंने नए कार्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि बेहतर सुविधाओं के कारण पंजीयन का पूरा अनुभव पहले की तुलना में सहज हुआ है।

    ढाई वर्षों में 34 नए पंजीयन कार्यालय स्वीकृत, सेवाओं का हो रहा विस्तार

    पंजीयन सेवाओं को नागरिकों के और नजदीक पहुंचाने के लिए प्रदेश में कार्यालयीन अधोसंरचना और मानव संसाधन का भी विस्तार किया जा रहा है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 34 नए पंजीयन कार्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही पंजीयन अधिकारियों के 78 नए पद सृजित किए गए हैं।

    रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों में सब-रजिस्ट्रारों की संख्या में तीन गुना वृद्धि की गई है। नए कार्यालयों और अधिकारियों की संख्या बढ़ने से नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक पंजीयन सेवाएं उपलब्ध कराने और कार्यालयों में कार्यभार को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है।

    मोहम्मद जावेद की कहानी में दिखा पंजीयन व्यवस्था का बदलता स्वरूप

    श्री मोहम्मद जावेद का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में सुधार केवल रजिस्ट्री की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। ऑटोम्यूटेशन से रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं नए कार्यालयों के विस्तार से नागरिकों के लिए पंजीयन सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो रही है।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव और सुझावों को सामने ला रहा है। मोहम्मद जावेद के लिए इस बदलाव का सीधा अर्थ है—रजिस्ट्री के बाद तहसील के चक्कर से राहत, समय की बचत और नए पंजीयन कार्यालय में बेहतर सुविधा।

     

  • Rashifal 7 October 2026: बुधवार को इन राशियों पर रहेगी कृपा, नौकरी-कारोबार में मिल सकता है फायदा

    Rashifal 7 October 2026: बुधवार को इन राशियों पर रहेगी कृपा, नौकरी-कारोबार में मिल सकता है फायदा

    मेष
    आज के दिन आपका लक आपका साथ देगा। करियर के नए अवसर आपके सामने आएंगे। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक रहेगी। आज आपको तारीफ भी मिल सकती है। इंकम बढ़ने के भी योग हैं।

    वृषभ
    आज के दिन कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। नौकरी में बदलाव की भी बड़ी संभावना है। संतुलित डाइट और एक्सरसाइज को शामिल करके अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। जीवन में संतुलन बनाए रखें।

    मिथुन
    आज प्रमोशन पाने के लिए आपको पूरे लगन के साथ ऑफिस के टास्क कंप्लीट करने चाहिए। व्यापार अच्छा चलेगा और आप अच्छे मुनाफे की भी उम्मीद कर सकते हैं। आर्थिक रूप से यह एक अच्छा दिन है।

    कर्क
    आज के दिन लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। हो सकता है कि आपके दोस्त सहयोगात्मक न हों। धैर्य रखने की कोशिश करें और कठोर शब्दों का प्रयोग न करें।

    सिंह
    आज के दिन हिम्मत न हारें और पॉजिटिव रहने की कोशिश करें। दफ्तर में टिके रहने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी। आर्थिक रूप से, अपने भविष्य को सुरक्षित करने पर फोकस करें।

    कन्या
    आज बदलाव के लिए खुले रहने से आपको अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। हर पहलू में संतुलन बनाए रखें। प्यार में शांत रहें। काम पर टीमवर्क पर ध्यान दें। वित्त का समझदारी से प्रबंधन करें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

    तुला
    आज कारोबार से जुड़े लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। काम का प्रेशर ज्यादा महसूस होगा। व्यवसायी लोग अपना कार्यक्षेत्र बदलना चाह रहे होंगे। लाइफ में प्रॉब्लम आना नॉर्मल है। धन का मामला उम्मीद से कम रहेगा।

    वृश्चिक
    आज कुछ अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिससे आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। हेल्थ आज अच्छी रहेगी। दिन की शुरुआत में अपने करियर को लेकर आप स्ट्रगल करेंगे।

    धनु
    आज आपको अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखना चाहिए। आपको अपने सहकर्मियों से कही गई बातों में सावधानी बरतने की जरूरत है। काम में सहयोग और बातचीत की आवश्यकता होती है।

    मकर
    आज पर्सनल और प्रोफेशनल कनेक्शन को मजबूत करने का अवसर है। करीबियों के साथ अपने कनेक्शन को मजबूत करने के अवसरों की तलाश करें। काम पर नई चुनौतियों से न कतराएं।

    कुंभ
    आज वित्तीय मामलों पर पूरा ध्यान दें। सोच-समझकर प्लानिंग के डिसीजन लें। सेहत के लिहाज से, अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए यह एक अच्छा दिन है।

    मीन
    प्रोडक्टिविटी आज रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी। यह आपको बेचैन कर देगी। आपको अपने जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए मोटिवेट किया जाता है। रोमांटिक रिश्तों में धैर्य की आवश्यकता हो सकती है।

  • गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश

    गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश

    रायपुर

     नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर नगर निगम में संचालित योजनाओं, विकास कार्यों एवं निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक में अरपा नदी को प्रदूषण से बचाने शहर के 70 छोटे-बड़े नालों के पानी के उपचार की समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए विस्तृत डीपीआर तैयार कर सभी तकनीकी पहलुओं का सूक्ष्म परीक्षण करने को कहा। कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, नगर निगम के आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे और सूडा के सीईओ  सुमित अग्रवाल भी बैठक में मौजूद थे।
        
    प्रमुख सचिव  बोरा ने अरपा नदी में नालों के जरिए पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तार से जानकारी ली। निगम के अधिकारियों ने बताया कि कुल 70 छोटे-बड़े नाले अरपा नदी में मिलते हैं। प्रमुख सचिव ने बैठक में कहा कि इन नालों के जरिए दूषित पानी सीधे नदी में न पहुंचे, इसके लिए प्रभावी और दीर्घकालीन समाधान जरूरी है। नालों के पानी का समुचित उपचार कर ही नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने डीपीआर तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक नाले की स्थिति और पानी की मात्रा का आकलन कर उपचार एवं आवश्यकतानुसार ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। योजना तैयार करते समय तकनीकी व्यवहार्यता, भविष्य की जरूरतों और इसके दीर्घकालीन प्रभावों सहित सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाला समय पानी का है, इसलिए सतही जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    शहर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में लगातार दिखे सुधार

    प्रमुख सचिव ने शहर की साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों को निरंतर बनाए रखना जरूरी है। नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे शहर की साफ-सफाई का स्तर लगातार बेहतर हो। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
        
    उन्होंने नगरीय निकायों में संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए और सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। नगरीय सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी काम करने को कहा। 

    बैठक में प्रमुख सचिव ने निर्माणाधीन एजुकेशन हब नालंदा परिसर की प्रगति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि 500 लोगों की बैठक क्षमता वाले नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम तल के स्लैब का कार्य पूरा हो गया है तथा द्वितीय तल के स्लैब का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। प्रमुख सचिव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
        
     बोरा ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और नगरीय अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर में अधोसंरचना मद के अंतर्गत कुल 542 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 334 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 182 प्रगतिरत हैं तथा 26 कार्य अप्रारंभ हैं। प्रमुख सचिव ने प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। 

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण

    समीक्षा बैठक के बाद प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे के साथ तारबाहर स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने इस दौरान आईटीएमएस की पूरी कार्यप्रणाली व संचालन को देखा। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को उपयोगी बताते हुए  बोरा ने शहर के यातायात और सुरक्षा को और भी चाक-चौबंद करने व्यवस्था को और बेहतर बनाने कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

  • छत्तीसगढ़ में लक्ष्य शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण अब तक किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

    छत्तीसगढ़ में लक्ष्य शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण अब तक किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

    रायपुर

    प्रदेश में खेतों में बोनी का कार्य लगभग अंतिम चरण पर है। 6 अक्टूबर की स्थिति में राज्य के 48.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

    किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 13.40 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। खेती का प्रारंभिक कार्य लगभग अंतिम चरण में है। राज्य में अब तक 48.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का शत्-प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। 

    प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 18.02 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। जो चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। उक्त भंडारण के विरूद्ध राज्य के किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।   

    इसी प्रकार खरीफ सीजन 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.62 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है। 

    प्रदेश में अब तक 1155.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी.

    अधिकारियों ने बताया कि 06 अक्टूबर सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 1155.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 1139.9 मि.मी. से 15.3 मिली मीटर अधिक है। 

    जरूरतमंद किसानों को 8178.54 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियत हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 5 अक्टूबर की स्थिति में 8178.54 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 6938.10 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • एक गाय से शुरू हुआ सफर, आज 10 पशुओं का समृद्ध पशुधन

    एक गाय से शुरू हुआ सफर, आज 10 पशुओं का समृद्ध पशुधन

    रायपुर

    एक गाय से शुरू हुआ पशुपालन का छोटा-सा प्रयास आज 10 पशुओं के समृद्ध पशुधन में बदल चुका है। सरगुजा जिले के ग्राम चटीरमा निवासी अगस्तु खाखा ने मेहनत, लगन और पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से पशुपालन को परिवार की स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें हर महीने आय हो रही है, वहीं कृत्रिम गर्भाधान से तैयार उन्नत नस्ल के पशुओं की बिक्री भी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनी है।

    अगस्तु बताते हैं कि उन्होंने पशुपालन की शुरुआत केवल एक गाय से की थी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों से उन्हें पशुओं की बेहतर देखभाल और नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग की सलाह को अपनाया और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा का लाभ लेना शुरू किया। इससे धीरे-धीरे उनके पशुधन की संख्या बढ़ती गई और पशुपालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला।

    आज अगस्तु के पास कुल 10 पशु हैं। इनमें चार गायें दुग्ध उत्पादन कर रही हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की नियमित बिक्री से परिवार को स्थायी आमदनी मिल रही है। पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य जरूरी खर्च निकालने के बाद अगस्तु को पशुपालन से लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।

    उन्नत नस्ल के पशुओं से मिला अतिरिक्त आर्थिक लाभ

    कृत्रिम गर्भाधान ने अगस्तु के पशुधन की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी आय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त पशुओं में से चार गायों और दो बछड़ों की बिक्री कर वे लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर चुके हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली और पशुपालन को आगे बढ़ाने के लिए उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।

    वर्तमान में उनके पशुधन में दो बछियां गर्भित हैं, जिनसे आने वाले महीनों में नए बछड़ों के जन्म की उम्मीद है। वहीं तीन छोटी बछियां भी भविष्य में पशुधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का आधार बनेंगी। इस तरह एक गाय से शुरू हुआ उनका प्रयास लगातार विस्तार ले रहा है।

    तकनीकी मार्गदर्शन ने पशुपालन को बनाया लाभकारी

    अगस्तु का कहना है कि पशुपालन विभाग से मिली तकनीकी सलाह, कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा और पशुओं की देखभाल संबंधी मार्गदर्शन ने उन्हें पशुपालन को बेहतर और लाभकारी तरीके से आगे बढ़ाने में काफी मदद की है। वे अपने अनुभव से उत्साहित हैं और आने वाले समय में पशुधन की संख्या और बढ़ाकर परिवार की आय को अधिक मजबूत करना चाहते हैं।

    अगस्तु खाखा की यह कहानी बताती है कि विभागीय तकनीकी सहयोग और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर छोटे स्तर से शुरू किया गया पशुपालन भी ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है।

  • फार्म 6 के साथ नहीं लिया जाएगा घोषणा पत्र : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र  संजीव कुमार झा

    फार्म 6 के साथ नहीं लिया जाएगा घोषणा पत्र : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र संजीव कुमार झा

    भोपाल 

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा ने मंगलवार को उप जिला निर्वाचन अधिकारियों के निर्वाचन सदन भोपाल से वर्चुअल बैठक की। इस दौरान उन्होंने पूरे प्रदेश में 7, 8 और 9 अक्टूबर को पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए प्रदेश के प्रत्येक मतदान केंद्र में विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान किसी भी मतदाता से फार्म 6 के अलावा घोषणा पत्र नहीं लिया जाएगा। सभी जिला उप निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करें। इसके साथ ही उन्होंने व्यापक स्तर पर प्रचार प्रचार करने के निर्देश दिए।

     झा ने कहा कि जिन युवाओं की उम्र 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की है गई, उनके भी फॉर्म लिए जाएंगे। इसके साथ ही 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए एडवांस में फॉर्म जमा कराए। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन की सुविधा भी प्रदान की गई है। कोई भी मतदाता voters.eci.gov.in पर अथवा ECINET mobile app पर जाकर अपना नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।  झा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा की वे इस ऑनलाइन प्रक्रिया को व्यापक रूप से प्रचारित करें और युवा मतदाताओं को खास तौर पर ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए अब तक के कार्यों की समीक्षा भी की। इंदौर तथा विदिशा में अच्छी प्रगति के लिए सराहना की। जो जिले इस कार्य में पिछड़े हैं उन्हें प्रगति के निर्देश दिए।

     

  • विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रबंधन

    विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रबंधन

    भोपाल

    मध्यप्रदेश सरकार राज्य में विकास कार्यों को गति देने, अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से 3000 करोड़ रुपये का वित्तीय संसाधन (ऋण) जुटाने जा रही है। इस राशि को 1000-1000 करोड़ रुपये के तीन सुव्यवस्थित चरणों में लिया जाएगा। मंगलवार को हुई भारतीय रिजर्व बैंक की ई-कुबेर पोर्टल नीलामी प्रक्रिया से कम ब्याज दर पर प्रदेश सरकार को ऋण प्राप्त होगा।

    उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने वित्तीय प्रबंधन के इस कदम को राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए दूरदर्शी और अत्यंत सकारात्मक फैसला बताया है। भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफार्म से प्राप्त होने वाला यह ऋण प्रदेश के आधारभूत ढ़ांचे जैसे सड़क निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, भू-अर्जन क्षेत्र, सिंचाई परियोजनाएं, बांध निर्माण, मेडिकल सेक्टर, विद्युत क्षेत्र, भवन निर्माण एवं आमजन की सुरक्षा से संबंधित कार्य किये जायेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ऋण राशि का उपयोग राजस्व व्यय जैसे वेतन भत्ते, लाड़ली बहना योजना, पेंशन, प्रशासनिक व्यय, सीएम किसान कल्याण निधि एवं अनुदान राज्य सहायता में नहीं किया जाता है।

    उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि सरकार ऋण लेकर पूंजीगत कार्यों में व्यय करती है। “पूंजीगत व्यय में वृद्धि से आधारभूत संरचना, उत्पादन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, जिससे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि को गति मिलती है। GSDP में वृद्धि के साथ रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ते हैं, जिसका प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लाभ आमजन की आय और जीवन-स्तर में वृद्धि के रूप में परिलक्षित होता है। इससे विकास परियोजनाओं की ग्रोथ और प्रदेश में समृद्धि आती है। किसी भी प्रदेश में ऋण लेकर विकास कार्यों में लगाना प्रदेश को विकासोन्मुखीकरण की ओर ले जाना है। वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) और आरबीआई (RBI) की निर्धारित सीमाओं के तहत ली जा रही यह राशि पूरी तरह से राज्य के विकास कार्यों में निवेश की जाएगी।

    वित्तीय प्रबंधन एवं विकास रणनीति के मुख्य बिंदु

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्धारित ऋण सीमा के अंतर्गत बाज़ार परिस्थितियों के अनुसार 1000-1000 करोड़ रुपये की तीन किस्तों में यह राशि जुटाई जाएगी, जिसमें कम ब्याज दर पर बेहतर प्रबंधन हो सके। आर्थिक गतिविधियों के बुनियादी ढांचे में पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) होने से राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेज़ी आएगी। 

    मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रमाण

    उप-मुख्यमंत्री  देवड़ा ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (FRBM) सीमा 3 प्रतिशत के भीतर ही यह वित्तीय प्रबंधन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का जीएसडीपी (GSDP) अनुपात मजबूत स्थिति में है और राज्य सरकार समय पर ऋण भुगतान का बेहतरीन रिकॉर्ड बनाए हुए है। वित्तीय रणनीति से प्रदेश में चल रहे विकास प्रोजेक्ट्स में और तेज़ी आएगी, जिससे 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प को सीधे मजबूती मिलेगी