Author: NewseDay

  • किसानों के लिए बड़ी खबर, यूपी में रबी फसलों के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ा; बीज-खाद पर मिलेगा अनुदान

    किसानों के लिए बड़ी खबर, यूपी में रबी फसलों के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ा; बीज-खाद पर मिलेगा अनुदान

    लखनऊ
     कृषि विभाग इस बार रबी सत्र में फसलाें के उत्पादन में बढ़ोतरी की रणनीति पर काम करेगा। इस बार रबी फसलों के 510 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस लक्ष्य की घाेषणा की। उन्होंने अनुदानित बीज व उर्वरकों की अंतरराज्यीय तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने और विभागीय पोर्टल के सर्वर को अधिक सुगम बनाने के भी निर्देश दिए।

    इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोष्ठी में कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश की कृषि विकास दर आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। पिछले वर्ष रबी सत्र में 480 लाख टन फसल उत्पादन हुआ था, इस बार इसमें 30 लाख टन की बढ़ोतरी का लक्ष्य है। दलहन-तिलहन उत्पादन में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 50 लाख मिनीकिट निश्शुल्क वितरित किए जा रहे हैं।

    कृषि यंत्रों पर लगभग 350 करोड़ रुपये और बीजों पर 600 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। प्रमुख सचिव कृषि डा. एमकेएस सुन्दरम ने बताया कि रबी सत्र के लिए 15.50 लाख टन यूरिया और 6.25 लाख टन डीएपी का स्टाक किया गया है। वहीं पहली बार चना व मटर के बीजों पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इस दौरान प्रगतिशील किसानों को मिनीकिट, कृषि यंत्रों के स्वीकृति पत्र और फेरोमोन ट्रैप का सांकेतिक वितरण किया गया।

    कार्यक्रम में सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, गाेसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम गुप्ता, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा, अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम, कृषि निदेशक त्रयंबक मणि त्रिपाठी, सीजीएम नाबार्ड पंकज कुमार, आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कुमार प्रशांत आदि उपस्थित रहे।

  • नाना पाटेकर ने बिहार में बिताए थे यादगार पल, मोकामा में चलाया हल और पटना में मिले सुशांत के पिता से

    नाना पाटेकर ने बिहार में बिताए थे यादगार पल, मोकामा में चलाया हल और पटना में मिले सुशांत के पिता से

    पटना
     नाना पाटेकर का बिहार से जुड़ा एक खास किस्सा आज फिर याद आ रहा है। जून 2020 में वह दो दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे थे। पटना एयरपोर्ट से सीधे मोकामा स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचे थे। यहां उन्होंने शहीदों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

    नाना पाटेकर जवानों के बीच आर्मी की वर्दी में भी नजर आए थे। उन्होंने जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया था।

    मोकामा में जवान नहीं, किसान के अंदाज में दिखे नाना
    नाना का बिहार दौरा सिर्फ सीआरपीएफ कैंप तक सीमित नहीं था। मोकामा के औंटा गांव में उन्होंने किसानों के बीच भी वक्त बिताया था। किसानों से बातचीत की और खेती-किसानी को करीब से समझने की कोशिश की।

    एक किसान को खेत में हल चलाते देख नाना खुद भी हल संभालने पहुंच गए थे। ऑक्स से खींचे जा रहे हल को लेकर खेत में उतरे नाना को देखकर वहां मौजूद लोग उत्साहित हो गए। इस दौरान उनकी सादगी और किसानों से जुड़ाव की तस्वीरें खूब चर्चा में आई थीं।

    बिहार में जवानों के साथ बिताया यादगार वक्त
    मोकामा में आयोजित सीआरपीएफ के कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने जवानों से बातचीत की। वह उनके बीच काफी सहज अंदाज में नजर आए।

    उन्होंने अपनी फिल्मों के चर्चित संवाद सुनाकर जवानों का मनोरंजन भी किया। नाना का यह अंदाज वहां मौजूद लोगों को काफी पसंद आया।

    वह जवानों के साथ खड़े हुए और उनके काम के प्रति सम्मान जताया। उनकी बिहार यात्रा का यह हिस्सा लंबे समय तक लोगों को याद रहा।

    पटना पहुंचे तो सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से मिले
    बिहार दौरे के दौरान नाना पाटेकर पटना भी पहुंचे थे। उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के राजीव नगर स्थित घर जाकर उनके पिता केके सिंह से मुलाकात की।

    नाना ने सुशांत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर परिवार के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की।

    उनका यह दौरा उस समय भी काफी चर्चा में रहा था। बिहार से नाना का यह जुड़ाव उनकी संवेदनशील छवि का एक अलग पहलू दिखाता है।

    किसानों के मुद्दों पर भी खुलकर बोलते थे नाना
    नाना पाटेकर किसानों की समस्याओं को लेकर भी अपनी बात रखते रहे थे। वह किसानों की परेशानियों को सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित करके देखने के पक्ष में नहीं थे।

    उन्होंने किसानों को भावनात्मक सहारे और सम्मान की जरूरत पर भी जोर दिया था। सामाजिक मुद्दों पर उनकी बेबाक राय अक्सर सुर्खियों में रहती थी।

    बिहार में खेत के बीच उनका हल चलाना भी इसी किसान-केंद्रित सोच से जोड़कर देखा गया। मोकामा का वह दौरा नाना के फिल्मी व्यक्तित्व से अलग उनकी सामाजिक छवि को सामने लाता है।

    75 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
    नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया।

    उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाए। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी पहचान अभिनय के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी बनी थी।

     

  • हरियाणा में बारिश-ओलावृष्टि से मौसम हुआ ठंडा, आज 5 जिलों में येलो अलर्ट

    हरियाणा में बारिश-ओलावृष्टि से मौसम हुआ ठंडा, आज 5 जिलों में येलो अलर्ट

    हिसार.

    प्रदेश में मौसम फिर से बदलने लगा है। पंचकूला में मौसम में बदलाव के बाद वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई। इसके साथ ही यमुनानगर में भी वर्षा होने से मंडी में फसल भीग गई।

    ओलावृष्टि और वर्षा के चलते तापमान में भी गिरावट हो सकती है। आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर तक वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वीरवार को ही पांच जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मौसम में फिर से बदलाव हुआ है। मंगलवार रात के बाद पंचकूला में वर्षा के साथ ओलावृष्टि होने से मौसम ठंडा हो गया।

    वहीं, यमुना नगर में वर्षा हुई। इससे मंडियों में पहुंची फसल को बचाने के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम में बदलाव के चलते वीरवार को पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसी प्रकार 10 अक्टूबर तक प्रदेश के अनेक जिलों में वर्षा हो सकती है।

  • पंचायत चुनाव के बाद राजस्थान में नियुक्तियों की तैयारी, दिल्ली से संभावित दावेदारों की नब्ज टटोल रही BJP

    पंचायत चुनाव के बाद राजस्थान में नियुक्तियों की तैयारी, दिल्ली से संभावित दावेदारों की नब्ज टटोल रही BJP

    जयपुर
    लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अब उम्मीद बढ़ गई है। बोर्ड, आयोग, निगम, प्राधिकरण और अकादमियों में नियुक्तियों को लेकर दिल्ली स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। संभावित दावेदारों के पास फोन पहुंचने और उनसे बायोडेटा व राजनीतिक-संगठनात्मक पृष्ठभूमि की जानकारी, दायित्व पूछने और सहमति मांगे जाने को नियुक्तियों की कवायद के आगे बढ़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है। पंचायत चुनाव के बाद नियुक्तियां होने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार संभावित नामों का पैनल पहले ही तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जा चुका है। अब सूची में शामिल नामों को लेकर दिल्ली से नब्ज टटोलने की कवायद चल रही है। राजस्थान सरकार अब तक करीब 11 महत्वपूर्ण नियुक्तियां कर चुकी है, लेकिन अभी भी 100 से अधिक बोर्ड, आयोग, निगम, प्राधिकरण और यूआईटी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य के पद रिक्त है।

    सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन के साथ साधे जाएंगे सियासी समीकरण
    पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। संगठन की राय को भी महत्व दिया गया है। इनमें लंबे समय से पार्टी और संगठन में सक्रिय नेताओं के साथ अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके कार्यकर्ताओं को मौका मिलने की चर्चा है। वहीं पिछले कुछ समय में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं के नाम भी संभावित सूची में हो सकते हैं। विधानसभा चुनाव हारने वाले कुछ नेता भी कतार में है।

    इन बोर्ड और आयोगों में रिक्त हैं पद
    राज्य महिला आयोग, पर्यटन विकास निगम, स्टेट कृषि विपणन बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, बुनकर संघ, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, पशुधन विकास बोर्ड, राज्य खेल परिषद, कर बोर्ड, युवा बोर्ड, आवासन मंडल, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति, बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, अल्पसंख्यक आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, समाज कल्याण बोर्ड, वक्फ बोर्ड, बीज निगम, हज कमेटी, डांग विकास बोर्ड, मुस्लिम वक्फ बोर्ड, मगरा विकास बोर्ड सहित कई अकादमियों और यूआइटी में नियुक्तियां होनी हैं

    कांग्रेस शासन में 70 से ज्यादा नेताओं को पद, 35 को मंत्री दर्जा
    पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी अपने कार्यकाल में 70 से अधिक नेताओं को विभिन्न बोर्ड, आयोग, निगम, अकादमियों और अन्य संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां दी थीं। इनमें 35 से अधिक नेताओं को कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। राजनीतिक नियुक्तियों का यह सिलसिला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर तक भी चर्चा में रहा था।

     

  • एशियाई पैरा गेम्स में भारत की बड़ी जिम्मेदारी, प्रमोद भगत और भाविना पटेल होंगे ध्वजवाहक

    एशियाई पैरा गेम्स में भारत की बड़ी जिम्मेदारी, प्रमोद भगत और भाविना पटेल होंगे ध्वजवाहक

    नई दिल्ली
    पैरालिंपिक चैंपियन प्रमोद भगत और भाविना पटेल 18 से 24 अक्टूबर तक जापान के नागोया में होने वाले एशियाई पैरा खेलों के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। भारत के सबसे सफल पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल भगत ने 2014 से 2023 के बीच एशियाई पैरा खेलों में छह पदक जीते हैं जिनमें दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक शामिल हैं।

    शीर्ष पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना ने 2018 से 2023 के बीच एशियाई पैरा खेलों में एक रजत और एक कांस्य पदक जीता है। भाविना ने कहा कि भारत का ध्वजवाहक चुना जाना मेरे लिए बेहद गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि जब आप तिरंगा थामते हैं तो आपको एहसास होता है कि आप अपने से कहीं बड़ी चीज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मैं प्रमोद के साथ उद्घाटन समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व करने को लेकर उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद है कि हमारे सभी खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे, इस पल का आनंद लेंगे और भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।

    भारतीय पैरालिंपिक समिति (पीसीआई) आठ अक्टूबर को विशेष विदाई समारोह में भारतीय दल को औपचारिक रूप से रवाना करेगी। समारोह में खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि होंगे, जबकि युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी।

    पीसीआई अध्यक्ष देवेंद्र झाझडिया ने कहा कि उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और भाविना पटेल का भारतीय दल का नेतृत्व करना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि दोनों असाधारण चैंपियन हैं और उन्होंने भारतीय पैरा खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका सफर, उपलब्धियां और जुझारूपन उन्हें भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। मुझे विश्वास है कि वे इस महत्वपूर्ण अभियान पर आगे बढ़ रहे हमारे खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे।

  • ‘टीम के लिए करना था…’ ईशान किशन ने बताया क्यों लिया बड़ा फैसला, श्रेयस अय्यर को लेकर कही ये बात

    ‘टीम के लिए करना था…’ ईशान किशन ने बताया क्यों लिया बड़ा फैसला, श्रेयस अय्यर को लेकर कही ये बात

    लखनऊ
     एकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से करारी शिकस्त देकर 5 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। कप्तान श्रेयस अय्यर के नाबाद 102 रनों की शतकीय पारी और डेब्यू कर रहे युवा ऑलराउंडर नमन धीर (3/31) के शानदार स्पेल की बदौलत भारत ने 172 रनों के लक्ष्य को महज 14.4 ओवरों में आसानी से हासिल कर लिया। इस मुकाबले में श्रेयस अय्यर के साथ तीसरे विकेट के लिए नाबाद 137 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी निभाने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन (37 नाबाद) ने अपनी भूमिका और टीम की रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है।

    ईशान किशन ने कही बड़ी बात
    भारतीय टीम ने पावरप्ले में ही दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद ईशान किशन ने श्रेयस अय्यर का बखूबी साथ निभाया और सपोर्टिंग रोल अदा किया। जियोस्टार से बात करते हुए ईशान किशन ने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, 'एक बल्लेबाज के तौर पर जब मैं बहुत अच्छी लय में नहीं दिख रहा होता हूं और दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाज (श्रेयस अय्यर) गेंद को बहुत अच्छी तरह से टाइम कर रहा होता है, तो मुझे सेकंड फिडल (धीमी पारी खेलकर साथ देना) रोल निभाने में कोई झिझक नहीं होती। श्रेयस लगातार बड़े शॉट्स खेल रहा था, इसलिए मेरा काम यही था कि मैं उसे विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने दूं।'

    श्रेयस अय्यर का पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक
    किशन ने आगे कहा कि उनका प्लान बेहद सरल था। उन्होंने लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। जब भी कोई गेंद उनके जोन में आई, उन्होंने रन बनाए और बाकी समय स्ट्राइक रोटेट करके श्रेयस को आक्रामक बल्लेबाजी करने का पूरा मौका दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने इस मुकाबले में महज 42 गेंदों में 10 चौके और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा। उनकी इस तूफानी पारी के बदौलत भारत ने 172 रनों के लक्ष्य को 32 गेंद शेष रहते ही हासिल कर लिया।

    नमन धीर की गेंदबाजी के कायल हुए किशन
    अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर 31 रन देकर 3 विकेट (शाही होप, रोमारियो शेफर्ड और शामार स्प्रिंगर) लेने वाले नमन धीर की तारीफ करते हुए किशन ने कहा कि मुंबई इंडियंस के दिनों से वे नमन को देखते आ रहे हैं, जहां वे एक पार्ट-टाइम बॉलर थे। किशन ने नमन के माइंडसेट की सराहना करते हुए कहा, 'अपने डेब्यू मैच में जब किसी युवा गेंदबाज को छक्का पड़ता है, तो वह अक्सर रक्षात्मक (Defensive) होकर गेंदबाजी करने लगता है। लेकिन नमन ने ऐसा बिल्कुल नहीं किया। उन्होंने बल्लेबाजों को फ्लाइट देना जारी रखा, जिसका फायदा उन्हें विकेट के रूप में मिला। इससे पता चलता है कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर कितनी मेहनत की है। उनके पास विकेट लेने की मानसिकता है, सिर्फ रन रोकने की नहीं। अगर वे इसी तरह गेंदबाजी करते रहे, तो बहुत आगे जाएंगे।' भारत और वेस्टइंडीज के बीच सीरीज का दूसरा टी20 मुकाबला शुक्रवार को रांची के जेएससीए (JSCA) इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा।

  • करीब 3 साल बाद धनंजय डिसिल्वा ने छोड़ी टेस्ट कप्तानी, खिलाड़ी के तौर पर श्रीलंका के लिए खेलते रहेंगे

    करीब 3 साल बाद धनंजय डिसिल्वा ने छोड़ी टेस्ट कप्तानी, खिलाड़ी के तौर पर श्रीलंका के लिए खेलते रहेंगे

    नई दिल्ली
    ऑलराउंडर धनंजय डिसिल्वा ने श्रीलंका की टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। तत्काल प्रभाव से उन्होंने टेस्ट कैप्टेंसी से हटने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने वादा किया है कि वह आगे भी श्रीलंका की टेस्ट टीम के लिए खेलते रहेंगे और चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। टेस्ट कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद धनंजय डिसिल्वा ने कहा है कि अब यह जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को देने का समय आ गया है। वे करीब 3 साल तक श्रीलंका की टेस्ट टीम के कप्तान रहे हैं।

    धनंजय डिसिल्वा को जनवरी 2024 में टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया था। तीन महीने बाद उन्हें कप्तानी करते हुए 3 साल हो जाते, लेकिन 33 महीने बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी। श्रीलंका की सिलेक्शन कमिटी को लिखे एक लेटर में डिसिल्वा ने कहा, "मेरी सच्ची राय है कि यह जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को मिलनी चाहिए।" उन्होंने इस्तीफा सौंपने के बाद इस बात की पुष्टि की है कि वह एक प्लेयर के तौर पर श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    श्रीलंका क्रिकेट के CEO एश्ले डिसिल्वा ने अपने हमनाम को सबसे लंबे फॉर्मेट में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “श्रीलंका क्रिकेट उनके बाकी करियर के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता है और हमारी टेस्ट टीम को दी गई लीडरशिप के लिए उन्हें धन्यवाद देता है।” दिमुथ करुणारत्ने से कमान संभालने के बाद धनंजय डिसिल्वा ने 18 टेस्ट मैचों में श्रीलंका की कप्तानी की, जिसमें यह देश सात मैच जीतने में सफल रहा। कप्तान के तौर पर उनका औसत 36.45 का रहा, जबकि रन 1130 ही बनाए। गेंदबाज के तौर पर 9 विकेट उनको मिले।

    भारत के खिलाफ खेली थी आखिरी टेस्ट सीरीज
    धनंजय डिसिल्वा ने आखिरी बार टेस्ट कप्तानी भारत के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान की। इस सीरीज के पहले मैच में टीम इंडिया को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन दूसरा टेस्ट मेजबान श्रीलंका ने सोनल दिनुशा के दो शतकों के दम पर बचा लिया था। दिनुशा ने दोनों पारियों में शतक जड़ा था और भारत को इस मैच में जीतने नहीं दिया था। श्रीलंका पर एक समय पारी से हारने का खतरा था, क्योंकि टीम फॉलोऑन खेल रही थी। बावजूद इसके भारत को इस मैच में जीत नहीं मिल पाई थी, क्योंकि सभी विकेट श्रीलंका के दूसरी पारी में नहीं गिरे थे।

    वहीं, अगर बात श्रीलंका के आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के चक्र की करें तो टीम मौजूदा समय में पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर है। 6 मैच अब तक श्रीलंकाई टीम ने खेले हैं, जिनमें से 1 ही मैच में जीत मिली है, जबकि दो मैच गंवाए हैं। अच्छी बात यह है कि 3 टेस्ट ड्रॉ भी श्रीलंका ने कराए हैं। श्रीलंका की जीत प्रतिशत 33.33 का है, जो जीतने पर अच्छा खासा आगे बढ़ सकता है।

  • नाना पाटेकर ने 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका

    नाना पाटेकर ने 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका

    75 की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनका अचानक जाना हर किसी को खल रहा है. वो सिर्फ बेहतरीन एक्टर नहीं थे, बल्कि वो सच्चे नागरिक भी थे. उन्होंने हमेशा देशहित की बात की और उसके लिए काम किया.

    पर्दे पर उन्होंने कई यादगार और दमदार किरदार निभाए. पर क्या आप जानते हैं कि नाना पाटेकर एक भारतीय प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में भी रह चुके हैं? बहुत कम लोग जानते हैं कि वो कारगिल युद्ध का भी हिस्सा रहे हैं. इस बात का खुलासा खुद नाना पाटेकर ने किया था.

    कारगिल का हिस्सा थे नाना
    नाना पाटेकर ने कारगिल के युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था. इसके बाद वो लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में भर्ती हो गए थे. 'द लल्लनटॉप' को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कारगिल युद्ध की एक छोटी सी स्टोरी शेयर थी. उन्होंने कहा- उस वक्त फर्नाडिस साहब थे रक्षा मंत्री. हम युद्ध में जाना चाहते थे. हमने कंमाडो कोर्स पूरा किया था. अच्छे शूटर हैं. नेशनल खेले हुए हैं. हमको मेडल भी मिला हुआ है.

    'युद्ध के दौरान हमने वहां फोन किया. हमने कहा कि हमें वॉर में जाना है. वहां से कहा गया कि आप सिविलियन हैं. इसलिए नहीं जा सकते. पर फर्नाडिस साहब हमें जानते थे. फिर उन्होंने हमसे पूछा कि कब जाना है. मैंने कहा कि अभी जाना है. मैं चला गया कारगिल युद्ध में. मैं क्विक रिएक्शन टीम का सदस्य बन गया. इतना सा तो कुछ हम कर सकते हैं देश के लिए. हमारा सबसे बड़ा हथियार बोफोर्स या एके 47 नहीं बल्कि हमारे जवान हैं.'

    घटाया था 20 किलो वजन
    नाना पाटेकर ने आगे कहा कि 'जब मैं युद्ध में गया था, तब 76 किलो था. जब आया तब 56 किलो का हो गया था. दो महीने में हड्डी पसली कम हो गए थे. पर सच कहें, तो हमको देश के लिए इतना करके बहुत खुशी मिली.' उन्होंने ने ये भी कहा कि अजीत डोभाल उनके लिए भाई सामान हैं. उन्हें दोस्त कहना गलत है. अजीत डोभाल संग उनका रिश्ता बेहद खास और अनोखा है.

    नाना पाटेकर ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के लिए कुछ कर दिखाने का मन बनाया. उन्होंने जो ठाना वो कर दिखाया. आज भले ही नाना हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़े किस्से, कहानियां कभी उन्हें भूलने नहीं देंगे.

  • Nana Patekar ने गोल्डन टेंपल में की सेवा, दर्शन के बाद बोले- ‘जीते जी दर्शन हो गए’

    Nana Patekar ने गोल्डन टेंपल में की सेवा, दर्शन के बाद बोले- ‘जीते जी दर्शन हो गए’

    अमृतसर.

    बॉलीवुड में अपने डॉयलॉग्स के लिए मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। वह 75 वर्ष के थे। नाना पाटेकर अपने गोवा स्थित घर में बेहोश मिले थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। 45 मिनट की जद्दोजहद के बाद उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    इस अदाकार का पंजाब से कोई डायरेक्ट लिंक को नहीं हैं, लेकिन दो बार नाना पाटेकर ने अमृतसर आकर पंजाबियों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी थी। वे साल 2018 के जनवरी में अपनी पत्नी नीलकांती पाटेकर के साथ अमृतसर पहुंचे थे। उन्होंने श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेका था, ये उनके श्री हरिमंदिर साहिब में पत्नी के साथ पहली व आखिरी दर्शन रहे। इस दौरान उन्होंने जहां श्री हरिमंदिर साहिब की पूरी परिक्रमा की, वहीं बर्तनों की सेवा भी निभाई थी।

  • दो मांगों को लेकर सड़कों पर उतरीं नर्सें, CG में आंदोलन से बढ़ी हलचल

    दो मांगों को लेकर सड़कों पर उतरीं नर्सें, CG में आंदोलन से बढ़ी हलचल

    राजनांदगांव.

    पिछले दिनों इंटर्न डाक्टरों की हड़ताल से पहले ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई है। वही एक बार फिर नर्सों ने आंदोलन छेड़ दिया है। जिससे फिर से स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर प्रभावित हो रही है। विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रही नर्सों का कहना है कि दो सूत्रीय मांगों के लिए हड़ताल जारी है।

    नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के बैनर तले अपनी 2 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। नर्सों ने बताया कि, ग्रेड पर बने प्रस्ताव को लागू करने, संविदा और दैनिक वेतनभोगी स्टाफ नर्सेज को वर्तमान कार्यरत अस्पतालों में नियमित करने की मांग पर मंगलवार से हड़ताल जारी है। मांगों पर आवाज बुलंद करते नर्सेज ने मेडिकल कॉलेज के सामने नारेबाजी की। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच, इलाज, देखभाल का काम प्रभावित रहा।

    2018 से कर रहे मांग
    नर्सिंग आफिसर्स एसोसिएशन के प्रातांध्यक्ष डां रीना राजपूत ने बताया कि, रायपुर में सांकेतिक हड़ताल कर नारेबाजी की थी। वहीं 28 से 33 के बीच कोरबा, अंबिकापुर, महासमुंद में प्रदर्शन किया लेकिन मांगे पूरी नहीं हो सकी। 7 अक्टूबर को काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया गया। 8 अक्टूबर को स्कूटी रैली निकाली जाएगी। दिवाली से पहले मांग पूरी करने की मांग की है। उनके द्वारा वर्ष 2018 से लगातार मांग की जा रही है।