Author: NewseDay

  • राजेंद्र सलूजा को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सभी आरोपों से बरी

    राजेंद्र सलूजा को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सभी आरोपों से बरी

    गुना
     मध्य प्रदेश में गुना से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप लगा था. जिस पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई चल रही थी. सालों से चल रहे इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है. कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया है कि पूर्व विधायक ने कूटरचित दस्तावेज बनवाए थे। 

    राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण का आरोप
    बता दे की राजेंद्र सिंह सलूजा द्वारा गुना विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी. जिसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सलूजा सामान्य वर्ग से आते हैं, उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है. जांच के बाद 2011 को उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था. पत्रकार कोमल प्रसाद शाक्य ने कोर्ट में एफआईआर के लिए प्राइवेट इस्तगासा लगाया था. (जब पुलिस कोई एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जिसे कानून की भाषा में इस्तगासा कहा जाता है। 

    ग्वालियर हाईकोर्ट ने आरोपों से किया बरी
    उस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राजेंद्र सिंह सलूजा, उनके पिता अमरीक सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120B के तहत मामला संज्ञान में लिया था. इसमें निचली अदालत से अग्रिम जमानत हो गई थी. इसके बाद कोमल प्रसाद शाक्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में आदेश दिया था कि हाईकोर्ट एक साल में इस मामले में फैसला ले. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. जहां बुधवार को कोर्ट ने मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। 

    सालों चला कोर्ट में केस, राजेंद्र सलूजा ने जताई खुशी
    राजेंद्र सिंह सलूजा ने जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2012 में याचिका कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी. इसके बाद रिव्यू पिटीशन भी 2013 में खारिज हो गई थी. हालांकि वह पहले ही 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे. मामले में ईटीवी भारत से फोन पर चर्चा में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने बताया कि "सब टेकरी सरकार की कृपा और आशीर्वाद है. मैं न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता हूं। यह सब जनता का आशीर्वाद है. टेकरी सरकार ने आज तक मेरे को एक कांटा भी नहीं लगने दिया. गुना जिले की जनता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं. जो मेरे बुरे समय भी मेरे साथ खड़ी रही. बता दें पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा गुना के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी मंदिर बालाजी के परम भक्त माने जाते हैं। 

  • योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत, इंफ्रास्ट्रक्चर से तकनीक तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत, इंफ्रास्ट्रक्चर से तकनीक तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत

     योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक पर दिया जोर

    पिछले नौ वर्षों में जेल विभाग के बजट में 215 फीसदी का इजाफा

     वर्ष 2017-18 में 913 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 2,877 करोड़ हुआ बजट

    लखनऊ
    योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। इस दौरान जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और नई तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की। इसमें सबसे अधिक धनराशि जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गयी। 

    जेल विभाग के बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
    डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि योगी सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही जेलों की व्यवस्थाओं को भी समय के अनुरूप बनाने पर जोर दिया है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की जेल व्यवस्था में एक ओर जहां क्षमता विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के जरिए सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल विभाग के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग के लिए कुल 913.07 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में जेल विभाग के बजट में करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया जबकि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी योगी सरकार की ओर से जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।

    जेलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
    डीजी ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में नई जेलों के निर्माण के साथ ही बंदी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़, और हापुड़ में 190.08 करोड़ की लागत से जिला कारागार का निर्माण किया जा रहा है। नई जेलों के निर्माण के साथ ही प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। संभल में प्रस्तावित जेल के लिए शासन की ओर से 24.56 करोड़, शामली में 96.20 करोड़, बलिया में 24.12 करोड़, सहारनपुर में 50.87 करोड़, अमरोहा में 32.28 करोड़ और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि के लिए स्वीकृत किए गये हैं।

  • राजोआना को फांसी या उम्रकैद? केंद्र ने SC में सजा कम करने का विरोध किया, 28 को होगी सुनवाई

    राजोआना को फांसी या उम्रकैद? केंद्र ने SC में सजा कम करने का विरोध किया, 28 को होगी सुनवाई

    नई दिल्ली
    केंद्र सरकार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा पाए दोषी बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका का विरोध किया है जिसमें उन्होंने अपनी सजा को कम करने की मांग की है।30 से अधिक वर्षों से हिरासत में रह रहे राजोआना ने राष्ट्रपति के समक्ष 2012 से लंबित दया याचिका पर निर्णय में देरी के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, “हमें उनकी मांगों पर आपत्ति है। राज्य [पंजाब] में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं होगा।”

    केंद्र सरकार द्वारा याचिका का विरोध किए जाने के मद्देनजर, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और अपारेश कुमार सिंह सहित पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करेगी।"चूंकि अब वे अपनी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने पर जोर दे रहे हैं, जिसका आप विरोध कर रहे हैं, इसलिए हम मामले की योग्यता के आधार पर सुनवाई करेंगे," पीठ ने कहा।श्री नटराज द्वारा मामले की तैयारी के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की।

    बब्बर खालसा के उग्रवादी राजोआना को तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। बेअंत सिंह की हत्या 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सिविल सचिवालय के बाहर एक आत्मघाती बम विस्फोट में हुई थी। इस विस्फोट में हमलावर दिलावर सिंह और 17 अन्य लोग भी मारे गए थे।

    एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में रजोआना को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2010 में बरकरार रखा था। उनकी फांसी 31 मार्च, 2012 को तय की गई थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा उनकी ओर से दया याचिका प्रस्तुत करने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था।

    14 साल से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका
    राजोआना की याचिका का मुख्य आधार उसकी दया या
    चिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होना है। राजोआना की ओर से दलील दी गई है कि उसकी दया याचिका वर्ष 2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है।

    14 साल से अधिक समय तक फांसी की सजा के अनिश्चित भविष्य में रहने से उसे मानसिक पीड़ा और असहनीय तनाव का सामना करना पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि दया याचिका पर फैसला लेने में इतनी लंबी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।

    राजोआना के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उन पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया जाएगा, जिनमें दया याचिका पर अत्यधिक देरी को मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के आधार के रूप में स्वीकार किया गया है। 23 सितंबर को वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राजोआना अब मुख्य रूप से मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के मुद्दे पर जोर दे रहा है।

    31 अगस्त 1995 को हुआ था बम विस्फोट
    बलवंत सिंह राजोआना को 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए आत्मघाती बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था। इस विस्फोट में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। जांच में राजोआना को मामले में बैकअप बम हमलावर बताया गया था।

    विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा। राजोआना को 31 मार्च 2012 को फांसी दी जानी थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से उसकी ओर से दया याचिका दाखिल किए जाने के बाद फांसी पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

    2019 में केंद्र ने रखा था सजा कम करने का प्रस्ताव
    राजोआना की सजा को लेकर वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने भी पहल की थी। गृह मंत्रालय ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर राजोआना की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सका।

    इसके बाद राजोआना ने वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और केंद्र के प्रस्ताव को लागू करने के साथ-साथ उसकी दया याचिका पर फैसला करने की मांग की। इस दौरान केंद्र ने अदालत को बताया था कि मामले में फैसला टाल दिया गया है। दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होने के कारण यह मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है।

    पंजाब के मौजूदा माहौल का दिया हवाला
    इस बार केंद्र ने राजोआना की सजा कम करने का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। केंद्र का ताजा रुख ऐसे समय आया है जब पंजाब में राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं।

    हालांकि, केंद्र ने अदालत के समक्ष मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा कम करने को अनुकूल नहीं बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को केंद्र के विरोध और राजोआना की ओर से सजा में देरी को आधार बनाकर दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

     

  • मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, वैश्विक मंच पर चमकेगी प्रदेश की आतिथ्य क्षमता

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, वैश्विक मंच पर चमकेगी प्रदेश की आतिथ्य क्षमता

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश की आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल

    मुख्य सचिव बर्णवाल और केंद्रीय पर्यटन सचिव कुमार ने ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट’ में एग्जिबिशन का किया शुभारंभ
    टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलियर्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, टेबल स्पेस और ग्रामीण पर्यटन है एग्जिबिशन का मुख्य आकर्षण
    मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से संवाद कर बढ़ाया उत्साह
    177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगे, पर्यटन ग्राम पंचवटी में दिखी ग्रामीण होम-स्टे की सुंदरता

    भोपाल

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और केंद्रीय सचिव पर्यटन मंत्रालय भुवनेश कुमार ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर मे ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ (सप्तम संस्करण) के दूसरे दिन एग्जिबिशन का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का निरंतर विकास हो रहा है और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सके। मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में लगाई गई यह प्रदर्शनी टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों व होम-स्टे संचालकों जैसे स्टेकहोल्डर्स को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एग्जिबिशन का अवलोकन कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल पहल की भी जानकारी प्राप्त की। 

    मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से किया संवाद

    मुख्य सचिव बर्णवाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए देश-विदेश से आए ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हितधारकों से उनके व्यावसायिक पैकेजेस, आगामी योजनाओं और मध्यप्रदेश में पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रदेश के पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वन्यजीव विविधता और अनूठे ग्रामीण पर्यटन अनुभवों को वैश्विक पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। 

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM 2026) में इस बार 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगाए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को और गति देना है। 

    मध्यप्रदेश के पवेलियन में दिखी पर्यटन की खास झलक

    मध्य प्रदेश के पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में लगाई गई बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों और आगंतुकों को यहाँ के खूबसूरत ऐतिहासिक किलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत अनुभव कराया जा रहा हैं। इसके साथ ही, अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन्टरैक्टिव कियोस्क (Interactive Kiosks) के जरिए आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी खुद देख और समझ पा रहे हैं, जिससे यह पूरा अनुभव बेहद आधुनिक और सुगम बन गया है।

    पर्यटन ग्राम पंचवटी का किया अवलोकन

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटकों को अनूठे और वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराया जा रहा है। इस प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव को जीवंत रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट परिसर में एक विशेष प्रतिकृति पर्यटन ग्राम पंचवटी 

    तैयार की गई है। इस जीवंत प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए होम-स्टे का अनुभव, स्टारगेजिंग, बैलगाड़ी की सवारी, साइकलिंग, जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियाँ, तीर-कमान चलाने की कला, तथा विभिन्न हस्तकलाओं की प्रदर्शनी जैसी आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अनूठे स्थल पर नेशनल पार्क की झलक, प्राकृतिक झरने, गोंड पेंटिंग, तथा जनजातीय ग्रामीणों द्वारा अपनी जीवनशैली और कहानियों का सजीव चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। 

    मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर मध्य प्रदेश की अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा (हैंडलूम) की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है—इनमें बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, भैरवा क्राफ्ट और बाटिक प्रिंट प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये स्टॉल न केवल राज्य की लोक कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक शानदार जरिया भी हैं।

    इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी., मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, फिक्की मध्यप्रदेश के चेयरमैन महेंद्र प्रताप सिंह सहित संबंधित अधिकारी सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

  • साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    नई दिल्ली

    कनाडा की कवि और लेखिका ऐनी कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वीडिश अकादमी ने गुरुवार को यह घोषणा की। पुरस्कार उनके साहसिक और नए अंदाज के लेखन के लिए दिया गया है। उनके काम में पुरानी क्लासिकल परंपरा से हल्की-फुल्की बातचीत के जरिए आज के साहित्य के लिए नए रूप बनाए गए हैं। बता दें कि यह पुरस्कार स्वीडिश अकादमी देती है। इसकी राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है, जो करीब 1.2 मिलियन डॉलर है।

    अकादमी की स्थायी सचिव इंग्रिड कार्लबर्ग ने बताया कि कार्सन इस खबर से बहुत हैरान थीं। बातचीत के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस समय आइसलैंड में हैं और हवा की दिशा सुन रही हैं। कार्सन का लेखन कविता, गद्य, संवाद और अनुवाद का ऐसा मिश्रण है, जो किसी एक शैली में नहीं बंधता। उनका जन्म टोरंटो में हुआ था। 2022 से उनके पास आइसलैंड की नागरिकता भी है।

    वे प्राचीन ग्रीक साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं। इन अनुवादों का उनके अपने लेखन पर गहरा असर पड़ा है। उनके काम में ओपेरा के गीत, साहित्यिक आलोचना और 1998 की कविता-उपन्यास 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड' शामिल हैं। अकादमी ने कहा कि उनकी लगभग सारी रचनाएं शब्दों के प्रति भाषाविद के जुनून और कवि की नए अर्थ खोजने की चाह के बीच के रिश्ते पर टिकी हैं। वे खुद शब्दों की उत्पत्ति को अपने काम की शुरुआत मानती हैं। प्राचीन ग्रीक से उनके अनुवाद अपने आप में स्वतंत्र रचनाएं माने जा सकते हैं।

    उनकी शैली का उदाहरण 2019 की 'नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय' है। यह एक मंचन रचना है, जिसमें यूरिपिडीज के नाटक 'हेलेन' की हेलेन ऑफ ट्रॉय और मर्लिन मुनरो की कहानियों को एक साथ जोड़ा गया है। 76 साल की कार्सन इस साल पुरस्कार पाने की पसंदीदा दावेदारों में थीं। सट्टेबाजी कंपनी लैडब्रोक्स के मुताबिक उनका नाम आगे चल रहा था। इस पुरस्कार को पाने वालों में अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन, एलिस मुनरो और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे नाम भी शामिल था।

    कौन हैं एन कार्सन

    एन कार्सन कनाडा की एक प्रसिद्ध निबंधकार, अनुवादक, क्लासिकल साहित्य की विद्वान और कवयित्री हैं। उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य और दर्शन को आधुनिक कविता और लेखन से जोड़ा। उनका लेखन पारंपरिक कविता से काफी अलग माना जाता है। एन कार्सन को प्राचीन यूनानी भाषा और साहित्य में रुचि बचपन से ही थी।

    ऐन कार्सन का जन्म 21 जून 1950 को कनाडा के टोरंटो शहर में हुआ था। उनके पिता बैंक में काम करते थे। हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके एक लैटिन भाषा के शिक्षक ने उन्हें प्राचीन यूनान की दुनिया और वहां की भाषा से परिचित कराया। इसके बाद यूनानी भाषा और साहित्य में उनकी रुचि बढ़ती गई।

  • SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

    SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

     नई दिल्ली

    चुनाव आयोग के मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच देश के 272 नागरिकों और उच्च न्यायपालिका के 42 पूर्व जजों ने एक ओपन लेटर जारी किया है. इस पत्र में चुनाव आयोग का खुलकर समर्थन किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार बेबुनियाद सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए. पूर्व जजों ने विपक्ष के विरोध को'माहौल बनाने की सियासत' करार दिया है। 

    दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखते हुए कहा. 'ये सारा शोर मतदाताओं का नहीं, बल्कि वो राजनीतिक दल मचा रहे हैं जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं। 

    जस्टिस भुइयां के बयान पर रिटायर्ड जजों की आपत्ति
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी. उन्होंने इसे नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली एक मनमानी प्रक्रिया करार दिया था. जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और दूसरे रिटायर्ड जजों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 

    उनका कहना था कि जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी मौजूदा जज को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। 

    इन पूर्व जजों का तर्क है कि कानून के दायरे में रहकर योग्य और अयोग्य मतदाताओं की छंटनी करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है. इस प्रशासनिक प्रक्रिया को 'नागरिकों को दोयम दर्जे का बनाना' कहना किसी भी तरह से संतुलित नजरिया नहीं है। 

    एक तरफ पूर्व जजों का एक बड़ा समूह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसके कानूनी अधिकारों का बचाव कर रहा है. दूसरी तरफ वकीलों के संगठनों (LAFC) ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन कर दिया है। 

    बिना ठोस सबूत के EC पर आरोपों को बताया गलत
    इस बीच, पूर्व जजों के खुले पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. पत्र में बिना किसी ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने पर सवाल उठाए गए हैं। 

    पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार 'तस्कर' या 'समझौतावादी' कहकर बदनाम करने से लोकतंत्र में आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है. 'संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका हनन करना या उन्हें नीचा दिखाना सही नहीं है। 

    SIR का बचाव करते हुए पूर्व जजों ने कहा कि ये पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है. 'भरोसा ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है' और चुनावों को अमान्य ठहराने की ऐसी कोशिशें देश में अशांति और अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं। पत्र के आखिर में राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वो अपनी शिकायतों को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर रखें, न कि सड़कों पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाएं। 

  • ‘Made in Bihar’ को बढ़ावा देगी सरकार, 1 करोड़ परिवार बनेंगे उद्यमी; सरकारी खरीद में मिलेगा फायदा

    ‘Made in Bihar’ को बढ़ावा देगी सरकार, 1 करोड़ परिवार बनेंगे उद्यमी; सरकारी खरीद में मिलेगा फायदा

    पटना
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को कहा कि वर्ष 2030 के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत की तस्वीर बदलने की तैयारी है। सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि प्रदेश के एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाया जाएगा।

    बापू सभागार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के चयनित लाभुकों के उन्मुखीकरण एवं प्रथम किस्त वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरकार की औद्योगिक नीति और रोजगार को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।

    ‘Made in Bihar’ उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘पर्चेस प्रेफरेंस एक्ट’ बनाया है। इसके तहत राज्य सरकार की खरीद में बिहार में बनने वाले उत्पादों को 25 से 40 प्रतिशत तक हिस्सेदारी मिलेगी।

    स्टील, कपड़ा या अन्य कच्चा माल यदि बिहार का उद्यमी तय मानकों के अनुसार तैयार करता है तो सरकार उसी उत्पाद को खरीदने को प्राथमिकता देगी।

    बिहार में ही उत्पादन, बाहर से सामान लाने पर जोर नहीं
    सम्राट चौधरी ने कहा कि अब दूसरे राज्यों में उत्पादन कर बिहार में सामान बेचने की व्यवस्था को बदलने पर जोर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि साइकिल बनाने वाला कोई व्यक्ति लुधियाना से आकर पटना में साइकिल नहीं बेचेगा, बल्कि उसे बिहार में ही उत्पादन करना होगा। इसी तरह दूसरे राज्यों के स्टील प्लांट से सामान तभी खरीदा जाएगा, जब बिहार में उसका उत्पादन उपलब्ध न हो।

    50 करोड़ तक के टेंडर में बिहारी उद्यमियों को फायदा
    राज्य के उद्यमियों को सरकारी काम दिलाने के लिए टेंडर नियमों में भी बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 50 करोड़ रुपये तक की सरकारी योजनाओं के टेंडर में यदि कोई बिहारी उद्यमी L2, L3 या L4 पर है और L1 की दर पर काम करने को तैयार है, तो काम उसी बिहारी उद्यमी को दिया जाएगा।

    45 हजार नए उद्यमी तैयार करने का दावा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार फिलहाल करीब 45 हजार नए उद्यमियों को खड़ा कर रही है। कार्यक्रम के दौरान करीब सात हजार लाभुकों को पहली या अगली किस्त की राशि सीधे भेजी गई। इसके लिए राज्य सरकार ने करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं।

    हर उद्यमी को 10 लाख रुपये तक की मदद
    चयनित लाभुकों में 14 हजार एससी/एसटी, 10 हजार से अधिक अति पिछड़ा वर्ग, करीब साढ़े नौ हजार महिलाएं, नौ हजार युवा और लगभग ढाई हजार अल्पसंख्यक उद्यमी शामिल हैं। सरकार प्रत्येक उद्यमी को 10 लाख रुपये का सहयोग दे रही है, जिसमें पांच लाख रुपये अनुदान और पांच लाख रुपये ऋण है।

    ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि करीब 44 हजार उद्यमी पांच-पांच लोगों को भी रोजगार देते हैं तो सीधे तौर पर करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार का लक्ष्य उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है।

    पलायन रोकना सरकार का मुख्य लक्ष्य
    सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का मुख्य संकल्प उन करीब 12 लाख लोगों का पलायन रोकना है, जो मजदूरी और दूसरी जरूरतों के लिए राज्य से बाहर जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि एमएसएमई को बढ़ावा देकर बिहार में रोजगार और उद्योग का विस्तार किया जाएगा। जेम पोर्टल के जरिए उत्पादों को सीधे अपलोड करने और सरकारी खरीद की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है।

    ‘मेक इन बिहार’ को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी
    उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी और युवा राज्य की कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत और पूंजी हैं।

    उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के तहत 4,800 चयनित लाभार्थियों को दो लाख रुपये की दर से पहली किस्त दी जा रही है। इस पर करीब 96 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    एक करोड़ रोजगार और क्लस्टर विकास पर जोर
    मंत्री ने कहा कि बिहार एमएसएमई नीति 2026 का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना है।

    इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना 2026’ का लोकार्पण किया गया। इसके तहत ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्लस्टर’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ को बढ़ावा दिया जाएगा।

     

  • भेड़-बकरियों में प्लेग का खतरा बढ़ा, इंदौर संभाग में 8.42 लाख पशुओं को लगाया गया PPR डोज

    भेड़-बकरियों में प्लेग का खतरा बढ़ा, इंदौर संभाग में 8.42 लाख पशुओं को लगाया गया PPR डोज

    इंदौर
     पशुपालक सावधान हो जाएं. क्योंकि कई एशियाई देशों में फैल रही भेड़ बकरियों में प्लेग की बीमारी का खतरा देश के पशुओं में भी मंडरा रहा है. लिहाजा पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के अंतर्गत पीपीआर (Peste des Petits Ruminants) रोग के नियंत्रण एवं उन्मूलन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. इस महामारी से निपटने के लिए इंदौर संभाग में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 

    इंदौर में टीकाकरण अभियान शुरु
    अभियान के तहत 4 माह एवं उससे अधिक आयु के भेड़ एवं बकरियों को पीपीआर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है. अभियान के दौरान पशुपालकों को टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की देखभाल एवं टीकाकरण संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है. मध्य प्रदेश में इस कार्यक्रम का प्रथम चरण वर्ष 2020 से प्रारंभ किया गया था. वर्तमान में पीपीआर टीकाकरण अभियान का तृतीय चरण संचालित किया जा रहा है। 

    2030 तक पीपीआर रोग मुक्त होने का लक्ष्य
    दरअसल, पीपीआर भेड़ एवं बकरियों में होने वाला अत्यंत संक्रामक एवं गंभीर विषाणुजनित रोग है, जिसे सामान्यतः भेड़ एवं बकरी प्लेग के नाम से भी जाना जाता है. संक्रमित पशुओं में यह बीमारी गंभीर एवं मृत्यु का कारण बन सकती है. रोग की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण अत्यंत प्रभावी उपाय है. भारत सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक पीपीआर रोग के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी क्रम में इंदौर संभाग के इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी एवं बुरहानपुर जिलों में भेड़ एवं बकरियों का व्यापक स्तर पर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। 

    8 लाख से ज्यादा पशुओं को लगा पीपीआर डोज
    पशुपालन विभाग की टीकाकरण टीमें गांव-गांव एवं पशुपालकों के पशु समूहों तक पहुंचकर टीकाकरण कर रही हैं. पशुपालन इंदौर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. मनीष इंगोले द्वारा बताया गया कि, ''अब तक 8 लाख 42 हजार 259 से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है. टीकाकरण अभियान 15 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा.'' उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि, ''वे अपने सभी भेड़ एवं बकरी पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण करवाएं तथा टीकाकरण दल को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। 

    उन्होंने पशुपालकों से यह भी अपील की है कि, ''बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सा संस्था अथवा पशु चिकित्सक को सूचित करें, ताकि समय पर आवश्यक उपचार एवं रोग नियंत्रण की कार्रवाई की जा सके. पीपीआर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। 

  • UP में शराब उत्पादन का बदलेगा तरीका, गन्ने के शीरे की जगह अनाज का होगा इस्तेमाल; प्रयागराज में खुलेगा नया बार

    UP में शराब उत्पादन का बदलेगा तरीका, गन्ने के शीरे की जगह अनाज का होगा इस्तेमाल; प्रयागराज में खुलेगा नया बार

    लखनऊ
     यूपी में गन्ने की कमी और शराब की बढ़ती मांग ने आबकारी विभाग को देसी शराब के उत्पादन का तरीका बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब गन्ने के शीरे पर निर्भरता कम करते हुए अनाज से शराब का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों से बड़े पैमाने पर अनाज खरीदने की तैयारी है। आबकारी विभाग ने इसके लिए सहमति दे दी है।

    अभी तक प्रदेश में देसी शराब के साथ अंग्रेजी रम के उत्पादन में बड़े पैमाने पर गन्ने के शीरे का इस्तेमाल होता रहा है। गन्ने की उपलब्धता कम होने से शीरे की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। दूसरी ओर शराब की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए आबकारी विभाग ने वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में अनाज के इस्तेमाल पर जोर दिया है। पिछले दिनों मुख्यालय में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।

    अधिकारियों ने माना कि गन्ने और शीरे की उपलब्धता पर पूरी तरह निर्भर रहने से शराब उत्पादन में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में अनाज से बनने वाली शराब का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए पंजाब और हरियाणा समेत उन राज्यों से अनाज की खरीद बढ़ाई जाएगी । विभागीय स्तर पर अनाज आधारित शराब के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिला आबकारी अधिकारी सुशील कुमार मिश्र ने बताया कि गन्ने की कमी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    जिले में खुलेगा लो अल्कोहलिक ब्रिवरेज बार
    अगर आप ऐसी बीयर या शराब के शौकीन है कि पीने के बाद हल्का सुरूर तो हो, लेकिन नशे में झूमें नहीं तो अब आपको ऐसा बार मिलने जा रहा है। प्रयागराज के पहले लो अल्कोहलिक ब्रिवेजर बार को जिला बार समिति ने अनुमोदन दे दिया है। अनुमोदन मिलने के बाद होटल संचालक ने इसकी राशि भी जमा कर दी है, माना जा रहा है कि 10 दिन के भीतर यहां पर लोगों को पीने के लिए कम नशे वाली बीयर और वाइन मिलेगी।

    अब तक जिले में जो भी बार खुले हैं, उनमें हर प्रकार की अंग्रेजी शराब मिलती है। महानगरों में लो अल्कोहलिक ब्रिवरेज बार का चलन है। प्रयागराज जैसे शहर में अब तक किसी ने इसे खोलने का साहस नहीं जुटाया था। अब जबकि शहरीकरण बढ़ रहा है और मॉडर्न जीवनशैली को लोग अपना रहे हैं तो शहर में इसकी मांग उठने लगी थी। इसे देखते हुए सिविल लाइंस सुभाष चौराहे करीब स्थित सम्राट होटल में इस बार को खोला जा रहा है।

    अनाज से तैयार होती है व्हिस्की
    अब तक अनाज से मुख्य रूप से व्हिस्की ही तैयार की जाती है। हालांकि रम और देसी के लिए मुख्य रूप से गन्ने का रस ही इस्तेमाल किया जाता है। देसी शराब ही प्रदेश में सबसे ज्यादा मांग वाली शराब है। गन्ने का इस्तेमाल होने से देसी शराब का उत्पादन प्रभावित हो सकता हे। ऐसे में इसके विकल्प के रूप में अनाज के इस्तेमाल की तैयारी शुरू कर दी गई है।

  • ‘विष्णु भैया’ के विजन से बदली रजिस्ट्री व्यवस्था, समय और धन दोनों की बचत; 30 मिनट में हुई रजिस्ट्री

    ‘विष्णु भैया’ के विजन से बदली रजिस्ट्री व्यवस्था, समय और धन दोनों की बचत; 30 मिनट में हुई रजिस्ट्री

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    विष्णु भैया के विजन के अनुरूप पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन की हो रही बचत

    महज 30 मिनट में हुई रजिस्ट्री, नम्रता और प्रिया को मिली 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत

    महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च

    समय और धन की हुई बचत —राजनांदगांव की दो महिलाओं ने साझा किए पंजीयन व्यवस्था में बदलाव के अनुभव

    रायपुर
    कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए घंटों इंतजार और अधिक खर्च की चिंता रहती थी, लेकिन अब पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। राजनांदगांव की श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं दोनों महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कुल करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। वहीं, उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन की पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में दोनों महिलाओं ने इस सुखद अनुभव को साझा किया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत, उपकर की समाप्ति और तकनीक आधारित सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिलने के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी आसान हुई है।

    रजिस्ट्री में 30 हजार रुपये की बचत, दोनों महिलाओं के चेहरे पर आई खुशी

    श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने बताया कि महिला क्रेता होने के कारण उन्हें पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त किए जाने का लाभ भी उन्हें मिला।

    इन दोनों रियायतों के कारण संपत्ति पंजीयन पर होने वाला कुल खर्च कम हुआ और उन्हें करीब 30 हजार रुपये की बचत हुई। दोनों महिलाओं ने इस आर्थिक राहत को उपयोगी बताते हुए कहा कि शुल्क में कमी से अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।

    प्रिया ने बताया—सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो गया रजिस्ट्री का कार्य

    श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन प्रक्रिया में आए बदलाव के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उप-पंजीयक कार्यालय में उनकी रजिस्ट्री और उससे संबंधित प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हो गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित अन्य सुविधाओं के कारण उन्हें पंजीयन कराने में आसानी हुई।

    उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक हुई है। कम समय में काम पूरा होने से अनावश्यक इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिली।

    डिजिटल सुविधाओं से रजिस्ट्री हुई आसान, नामांतरण की प्रक्रिया भी हुई सरल

    पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार पंजीयन के लिए समय निर्धारित कर सकते हैं। वहीं, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से पंजीयन शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है। इसके साथ ही आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

    ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को मिल रहा प्रोत्साहन

    राज्य शासन द्वारा महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से संपत्ति पंजीयन का आर्थिक भार कम हुआ है। यह पहल महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने को प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल को मिली करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत इसी व्यवस्था का प्रत्यक्ष उदाहरण है। शुल्क में छूट के साथ कम समय में रजिस्ट्री पूरी होने से दोनों महिलाओं को दोहरा लाभ मिला।

    नम्रता और प्रिया की कहानी—सुशासन से मिली दोहरी राहत

    श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन शुल्क में रियायत तथा डिजिटल सुविधाओं से मिले लाभ के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुल्क में राहत और कम समय में पंजीयन की सुविधा से उनका अनुभव पहले की तुलना में बेहतर रहा।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

    राजनांदगांव की नम्रता और प्रिया की यह कहानी बताती है कि नागरिक सेवाओं में किए गए सुधारों का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचता है। महज 30 मिनट में रजिस्ट्री और करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक बचत उनके लिए केवल प्रशासनिक सुधार का परिणाम नहीं, बल्कि समय, धन और अनावश्यक परेशानी से मिली राहत का अनुभव है।