Author: NewseDay

  • राजनांदगांव में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच तेज, विभाग ने की छापेमारी

    राजनांदगांव में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच तेज, विभाग ने की छापेमारी

    राजनांदगांव.

    क्वांर नवरात्रि पर्व 2026 के अवसर पर धर्मनगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दर्शन हेतु आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम द्वारा मेला क्षेत्र में सतत एवं सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। कुल 21 प्रतिष्ठानों पर दबिश दी गई है।

    मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं को शुद्ध, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य व पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के दल द्वारा मेला प्रांगण में संचालित कुल 21 खाद्य प्रतिष्ठानों / दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, मिष्ठान्न भंडार, चाट – समोसा ठेला, प्रसाद विक्रय केंद्रों एवं पेय पदार्थ स्टॉलों की जांच की गई तथा खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आवश्यक कड़े निर्देश जारी किए गए। खाद्य सामग्री का ढंका होना अनिवार्यः चाट, समोसा, जलेबी, मिठाई एवं अन्य खुले खाद्य पदार्थों को पूरी तरह ढंककर अथवा जालीदार शोकेस में ही रखने के निर्देश दिए गए, ताकि धूल, मक्खी एवं कीटों से बचाव हो सके। स्वच्छ पेयजल एवं खाद्य- ग्रेड बर्फ का उपयोग पेय पदार्थों (जूस, लस्सी, शरबत आदि) के निर्माण में केवल पीने योग्य स्वच्छ पानी और खाद्य-ग्रेड बर्फ का ही उपयोग करने की सख्त हिदायत दी गई।

    विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि मेला अवधि के दौरान खाद्य सुरक्षा दल द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और संदेहास्पद खाद्य सामग्रियों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। यदि किसी भी प्रतिष्ठान में दूषित, बासी अथवा अमानक खाद्य सामग्री का विक्रय पाया जाता है, तो संबंधित खाद्य कारोबारी के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी के आरोपों पर कोर्ट सख्त, अगली सुनवाई तक पेश करने होंगे सबूत

    सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी के आरोपों पर कोर्ट सख्त, अगली सुनवाई तक पेश करने होंगे सबूत

    ग्वालियर 
     सिंधिया राज परिवार की संपत्ति को लेकर चल रहे समझौता विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. समझौता प्रतिवेदन पर कोर्ट में धोखाधड़ी के आधार पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी को लेकर कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के खिलाफ अदालत में धोखाधड़ी के सबूत पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    पद्मराजे राणा की बेटी ने लगाई बंटवारा विवाद में आपत्ति
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच सिंधिया राज परिवार के 40 हज़ार करोड़ रु के संपत्ति बंटवारा को लेकर चला आ रहा विवाद भले ही आपसी समझौते तक पहुंच गया हो लेकिन कोर्ट में नए दावेदार की आपत्ति के बाद मामला और उलझ गया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी ने संपत्ति में अपनी मां के अधिकार को लेकर हिस्सेदारी का दावा किया है. साथ ही सहमति से समझौते के मसौदे के लिए हस्ताक्षर धोखाधड़ी से लिए जाने का आरोप लगाया था। 

    पिछली सुनवाई में हुई थी प्रतिमा देवी के आरोपों पर बहस
    प्रतिमा देवी के आवेदन पर ग्वालियर कोर्ट ने मामले में उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया था, जिसके तहत पिछली 7 अक्टूबर को उनके आवेदन पर बहस हुई थी. इसमें प्रतिमा देवी की और से दावा किया गया था कि, समझौते के लिए पूर्व में सहमति पत्र पर उनकी मां के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए थे. जबकि इसके जवाब में उनकी तीनों मौसियों उषा राजे, वसुंधरा राजे और यधोधरा राजे सिंधिया की और से कोर्ट को कहा गया कि आरोप निराधार हैं. साथ ही यह भी बताया था की, हस्ताक्षर सहमति से हुए थे, इसके बाद फैमिली का रॉयल डिनर भी हुआ था और सबने फोटोग्राफ्स भी लिए थे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसल सुरक्षित रख लिया था। 

    कोर्ट का आदेश- साक्ष्य से साबित करें धोखाधड़ी
     जब इस केस पर दोबारा सुनवाई हुई तो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्मा राम टोंक ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रतिमा देवी को अगली हियरिंग में गवाही देने और धोखाधड़ी के सबूत पेश करने को कहा है. उन्हें साबित करना होगा कि, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए थे. इसके अलावा अगली सुनवाई पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं की और से बंटवारा आपसी राजीनामा होने का पक्ष रखा जाएगा. इस केस से जुड़े वकील एड शर्मा ने बताया कि अब अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। 

  • पंजाब में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, मानसा में बरसे बादल; फसलों पर मंडराया खतरा

    पंजाब में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, मानसा में बरसे बादल; फसलों पर मंडराया खतरा

    पठानकोट/ जालंधर / मानसा

    पंजाब में मौसम विभाग ने आज (15 अक्टूबर) भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके साथ ओले भी गिर सकते हैं। बुधवार रात तरनतारन के पट्टी में ओले गिरे। वहीं गुरुवार सुबह पठानकोट, जालंधर और मानसा में बारिश हुई।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), चंडीगढ़ के अनुसार, आज बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका है। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 16 अक्टूबर से पंजाब में मौसम की गतिविधियां कमजोर पड़ने के आसार हैं।

    9 जिलों में ओलावृष्टि संभव, 13 में अलर्ट मौसम विभाग के जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के मुताबिक, पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली में ओले गिरने की आशंका है। इन जिलों में कई स्थानों पर बारिश भी हो सकती है। वहीं, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर और संगरूर में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    इन 13 जिलों में मौसम खराब रहने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। हालांकि, हर जिले में बारिश या ओलावृष्टि की तीव्रता एक जैसी नहीं होगी।

    किसानों के लिए जरूरी: खुले धान को ढकें बारिश और तेज हवाओं से खेतों में खड़ी फसल के साथ मंडियों में खुले में रखा धान भी प्रभावित हो सकता है। धान की कटाई और खरीद के सीजन में बारिश से उपज भीगने, उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और ढुलाई में देरी का खतरा है।

    बिजली चमके तो पेड़ के नीचे न रुकें आंधी-तूफान के दौरान बिजली गिरने, पेड़ टूटने और बिजली की तारों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।मौसम में अचानक यह बदलाव क्यों, कब से मिलेगी राहत पंजाब और चंडीगढ़ में मौसम बदलने की वजह उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ तथा उत्तरी हरियाणा के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण है। इनके प्रभाव से क्षेत्र में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। IMD ने 16 अक्टूबर से पंजाब के लिए चेतावनी नहीं दिखाई गई है, जिससे मौसम की गतिविधियों में कमी आने के संकेत मिलते हैं।

    बारिश से बढ़ेगी ठंडक 
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सोमवार को पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में पिछले दिन के मुकाबले 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह सामान्य से 2.4 डिग्री नीचे बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में सबसे अधिक तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रूपनगर में दर्ज किया गया। पंजाब के न्यूनतम तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य का औसत न्यूनतम तापमान पिछले दिन की तुलना में 4.1 डिग्री नीचे आया और सामान्य के करीब रहा। पठानकोट में सबसे कम न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    विभिन्न शहरों का तापमान 
    अमृतसर का अधिकतम पारा 29.7 डिग्री, लुधियाना का 31.6 डिग्री, पटियाला का भी 31.6 डिग्री, पठानकोट का 29.3 डिग्री, बठिंडा का 29.1 डिग्री, एसबीएस नगर का 30.0 डिग्री, फरीदकोट का 30.3 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं अमृतसर का न्यूनतम पारा 16.9 डिग्री, लुधियाना का 17.2 डिग्री, पटियाला का 18.0 डिग्री, पठानकोट का 17.2 डिग्री, बठिंडा का 16.5 डिग्री दर्ज किया गया। 

  • रामलीला मैदान में धरने के लिए रोजाना कितना खर्च?

    रामलीला मैदान में धरने के लिए रोजाना कितना खर्च?

    नई दिल्ली
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने आधिकारिक प्रोटेस्ट साइट जंतर-मंतर को लिस्ट से हटा दिया है और उसकी जगह तीन नए स्थान चिह्नित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, सीबीएस ग्राउंड (शाहदरा) और बुराड़ी ग्राउंड शामिल है। बड़ी बात यह है कि अब तक लोग बिना एक पैसे खर्च किए संसद से नजदीक और सेंट्रल दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन अब उन्हें ऐसे विरोध प्रदर्शन करने के लिए न सिर्फ लाख रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे बल्कि जगह के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा उन्हें उन स्थानों पर लगने वाली कीमत पर GST भी चुकानी पड़ेगी। कुल मिलाकर कहें तो राजधानी दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना अब जेब पर भारी पड़ने वाला है।

    जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में रद्द किए जाने के बाद, अब सरकार द्वारा स्वीकृत नए मैदानों पर प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को 1 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च करनी होगी। इस लागत में सुरक्षा जमा राशि, सफाई शुल्क और 18% जीएसटी (GST) भी शामिल है। बता दें कि रामलीला मैदान की बुकिंग MCD (नगर निगम) संभालता है, जबकि CBS ग्राउंड (शाहदरा) और बुराड़ी ग्राउंड DDA (दिल्ली विकास प्राधिकरण) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, DDA राजनीतिक गतिविधियों के लिए मैदान कैसे आवंटित करेगा, इसके नियम अभी बनाए जा रहे हैं।

    रामलीला मैदान में 1 दिन का कितना खर्च?
    जंतर-मंतर पर जहाँ मुफ्त में प्रदर्शन किया जा सकता था, वहीं ऐतिहासिक रामलीला मैदान में केवल एक दिन के प्रदर्शन की कुल बुकिंग लागत 1,21,080 रुपये बैठती है। बारीकी से नजर डालें तो इसके तहत सुरक्षा जमा राशि 50,000, मैदान सुरक्षा शुल्क 5,000, दैनिक किराया 50,000, दैनिक सफाई शुल्क 4,000, लाइसेंस शुल्क 2,000 और 18% जीएसटी 10,080 रुपये शामिल है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह रामलीला मैदान बुक करने के लिए कुल 1,21,080 रुपये का खर्च आएगा।

    शाहदरा (CBS) और भलस्वा ग्राउंड का गणित
    DDA के ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल पर फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए अलग से कोई स्पष्ट श्रेणी नहीं बनाई गई है। वैसे सीबीएस ग्राउंड के 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र की एक दिन की बुकिंग के लिए 95,832 रुपये, सुरक्षा जमा 9,982 रुपये, सफाई शुल्क और ₹1,800 जीएसटी 18 फीसदी मिलाकर वहां के लिए कुल 1,07,614 देने पड़ते हैं। हालांकि, सिक्योरिटी डिपॉजिट को छोड़कर, रोज़ाना का खर्च ₹11,782 होगा। किराया बुक की गई जगह के साइज़ पर निर्भर करता है।

    बुराड़ी ग्राउंड के लिए देने होंगे 2,87,333 रुपये
    बुराड़ी ग्राउंड की बुकिंग के लिए भी पेमेंट का ऐसा ही तरीका है,जो अभी DDA की बुकिंग लिस्ट में नहीं दिख रहा है। बुराड़ी ग्राउंड की जगह अभी भलस्वा ग्राउंड लिस्ट में है। वहां 8,000 वर्ग मीटर जगह बुक करने के लिए ₹2,55,552 की सिक्योरिटी डिपॉजिट, ₹26,933 का रोज़ाना सफाई का खर्च, और टैक्स के तौर पर ₹4,850 की जरूरत होगी। यानी इस मैदान पर प्रदर्शन करने के लिए कुल 2,87,333 रुपये का भुगतान करना होगा। भले ही सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिल जाए, फिर भी इस ग्राउंड के इस्तेमाल का रोज़ाना खर्च ₹31,733 बैठता है; दूसरे शब्दों में, कहें तो जंतर-मंतर के बंद होने से अब दिल्ली में कोई भी सामाजिक या राजनीतिक प्रदर्शन आयोजित करना एक बेहद खर्चीला काम बन गया है।

  • होशियारपुर में माइनिंग मामले को लेकर CBI की दबिश, गांव अमरो में पहुंची 10 गाड़ियों की टीम

    होशियारपुर में माइनिंग मामले को लेकर CBI की दबिश, गांव अमरो में पहुंची 10 गाड़ियों की टीम

    होशियारपुर 

    पंजाब के होशियारपुर जिले में अवैध माइनिंग के ठिकानों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने अचानक रेड मारी है. जिले के तलवाड़ा इलाके में पड़ने वाले अमरो गांव में जांच एजेंसी की करीब 10 गाड़ियां एक साथ मौके पर पहुंची हैं. जिस इलाके में लंबे समय से अवैध खनन किए जाने के आरोप लग रहे थे, वहां सीबीआई की इस कार्रवाई से खनन करने वालों के बीच हलचल मच गई है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है. इस क्षेत्र में 100 से 110 फीट तक गहरी माइनिंग करने और पहाड़ गायब करने के मामलों में जांच की संभावना जताई जा रही है। 

    जानकारी के अनुसार दसूहा, मुकेरियां और तलवाड़ा इलाके में अवैध माइनिंग से जुड़ा यह विवाद पहले ही अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है. स्थानीय स्तर पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हैं कि कुछ जगहों पर 100 से 110 फीट तक गहरी माइनिंग की गई थी. कई स्थानों पर तो अवैध खनन के जरिए पूरे पहाड़ को ही गायब कर दिया गया था। 

    इसी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से सीबीआई को निर्देश दिए गए थे. हालांकि हाईकोर्ट के उन निर्देशों और आज की इस कार्रवाई के बीच के ऑफिशियल संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है। 

    फिलहाल अमरो गांव में चल रही इस रेड से जुड़े कई विजुअल्स सामने आए हैं, जिनमें जांच एजेंसी की गाड़ियां मौके पर नजर आ रही हैं. इसके बावजूद अधिकारियों की तरफ से इस कार्रवाई, जांच के दायरे या किसी संभावित बरामदगी को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस मामले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। 

  • नवरात्र में फलाहार करने वाले रहें सावधान! केले का पीला रंग नहीं है केमिकल से पकाने का सबूत, जानें जरूरी बातें

    नवरात्र में फलाहार करने वाले रहें सावधान! केले का पीला रंग नहीं है केमिकल से पकाने का सबूत, जानें जरूरी बातें

    पटना
     नवरात्र में व्रत रखने वालों के बीच केले की मांग बढ़ गई है। बाजार में बड़ी मात्रा में केले बिक रहे हैं, लेकिन इन्हें पकाने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जल्दी पकाकर बाजार में उतारने की होड़ में कुछ कारोबारी अनुचित रसायनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में केवल केले का रंग और चमक देखकर उसकी गुणवत्ता तय करना सही नहीं है।

    जल्दी पकाने के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ का खतरा
    त्योहारों के दौरान फलों की बढ़ती मांग के कारण उनकी आपूर्ति भी तेज हो जाती है। ऐसे में फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने की आशंका जताई जा रही है।

    हालांकि, केवल पीले रंग या चमक के आधार पर किसी केले को रसायन से पकाया हुआ नहीं कहा जा सकता। इसके लिए उचित जांच जरूरी है।

    हर पीला केला केमिकल वाला नहीं होता
    प्राकृतिक रूप से पके केले का रंग हल्के हरे से पीले तक हो सकता है और उस पर भूरे धब्बे भी दिख सकते हैं। दूसरी ओर, एकसमान पीला रंग या हरा डंठल होना अपने आप में रासायनिक पकाने का प्रमाण नहीं है। उपभोक्ताओं को फल की गुणवत्ता के साथ उसकी गंध, बनावट और ताजगी पर भी ध्यान देना चाहिए।

    गलत तरीके से पकाने पर हो सकती है परेशान
    फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत रसायनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

    प्रशासन की नजर, खाद्य सुरक्षा जांच पर जो
    त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बाजार में बिकने वाले फलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जांच और निगरानी महत्वपूर्ण है। रसायनों के अनुचित इस्तेमाल की आशंका वाले मामलों में नमूने लेकर जांच करने से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    केले खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    केले खरीदते समय सड़े, कटे, चिपचिपे या असामान्य गंध वाले फल न लें। विश्वसनीय विक्रेता से फल खरीदें और खाने से पहले केले को साफ पानी से धोकर छीलें।

    छीलने के बाद हाथ भी साफ कर लें। याद रखें कि घरेलू स्तर पर देखकर यह निश्चित करना संभव नहीं है कि केला किस तरीके से पकाया गया है।

    सेहत के लिए जरूरी बात
    नवरात्र में फलाहार करते समय साफ-सुथरे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल चुनें। किसी फल का रंग देखकर ही उसे नकली या जहरीला न मानें। संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें।

        केमिकल से पकाए गए केले का सेवन सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केला खरीदते समय सावधानी बरतें और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान दें।
        सुधाकर मिश्रा, डायटीशियन , पटना

     

  • छिंदवाड़ा में शिक्षकों के लिए नया आदेश, तैनाती वाले गांव में ही रहना होगा; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    छिंदवाड़ा में शिक्षकों के लिए नया आदेश, तैनाती वाले गांव में ही रहना होगा; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    छिंदवाड़ा
     विकासखंड शिक्षा
    अधिकारी हो या फिर विकासखंड शिक्षा कोऑर्डिनेटर या फिर कोई भी शिक्षक जिसकी जहां पर ड्यूटी है उसे वहीं पर रहना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि, शिक्षा में अगर सुधार नहीं हुआ तो लापरवाह की खैर नहीं। 

    जहां पर ड्यूटी वहीं पर रहना होगा वरना होगी कार्रवाई
    कलेक्टर हरेन्द्र नारायन ने बुधवार को शिक्षा विभाग की बैठक लेकर कहा कि, ''सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के उद्देश्य से ही बीईओ, बीआरसी, बीएसी, जनशिक्षक जैसे पद बनाए गए हैं. स्कूलों का नियमित निरीक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कराना इनकी जिम्मेदारी है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े सभी फील्ड अधिकारी अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालय पर निवास करें और अधिकारी की अनुमति उपरांत ही मुख्यालय से बाहर जाएं। 

    उन्होंने लगातार लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद भी सुधार न दिखने पर कड़ी नाराजगी जताई एवं बीईओ और बीआरसी परासिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को दिये. कलेक्टर ने बैठक में बीईओ, बीआरसी सहित संबंधित सभी फील्ड अधिकारियों के मुख्यालय में निवास की स्थिति की फिर समीक्षा की और इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त किया. प्रमाण पत्र संतोषप्रद नहीं पाए जाने पर उन्होंने स्पष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

    गंभीरता से कराएं अपार आईडी एन्ट्री का काम
    बैठक में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्माण में डाटा में गलती मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और पोर्टल से ऑरिजनल डेटा देने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने कहा कि, ''विद्यार्थियों की अपार आईडी क्रिएशन का काम बहुत जरूरी है, सभी बीईओ, बीआरसी इस काम की गंभीरता को समझें.'' उन्होंने सभी विकासखण्डों को सौ फीसदी अपार आई डी क्रिएशन का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। 

    स्कॉलरशिप एवं आवास सहायता राशि टाइम पर करें
    कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातीय वर्ग के सभी पात्र विद्यार्थियों का एमपी टास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं। इन सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और आवास सहायता योजना का समय पर फायदा दिलाएं। 

  • हड़प्पा सभ्यता को करीब से जानेंगे पर्यटक, राखीगढ़ी महोत्सव में कब्रिस्तान से डीएनए शोध तक की दिखेगी कहानी

    हड़प्पा सभ्यता को करीब से जानेंगे पर्यटक, राखीगढ़ी महोत्सव में कब्रिस्तान से डीएनए शोध तक की दिखेगी कहानी

    हिसार
    इतिहास की किताबों में दर्ज सभ्यता को समझने के लिए अब केवल लिखित विवरण पर निर्भर नहीं रहना होगा। राखीगढ़ी महोत्सव में पर्यटक उस अतीत से भी रूबरू होंगे, जिसे जमीन के नीचे दबी कब्रों, मानव कंकालों और उनके वैज्ञानिक अध्ययन ने सामने लाने में मदद की है।

    पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने टीला नंबर सात पर मिले हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान की कहानी पर एक लघु फिल्म तैयार की है। संग्रहालय की डिजिटल गैलरी में दिखाई जाने वाली इस फिल्म में खोदाई से लेकर डीएनए अध्ययन तक की प्रक्रिया को सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पुरातात्विक शोध को विशेषज्ञों और शोधपत्रों तक सीमित रखने के बजाय आम दर्शकों के लिए समझने योग्य बनाना है।

    कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है।

    इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा।

    एक कंकाल के डीएनए पर हुआ
    शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई।

    एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा

    इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

    कब्रों में मिल चुके आभूषण
    संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे।

    पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा।

    एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध
    राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई।

    एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे।

    पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा।

    इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन
    राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

     

  • रेवाड़ी में प्रॉपर्टी आईडी को लेकर विवाद, चेकर-मेकर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    रेवाड़ी में प्रॉपर्टी आईडी को लेकर विवाद, चेकर-मेकर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    रेवाड़ी.

    शहर में प्रॉपर्टी आइडी की छोटी-छोटी समस्या को लेकर आम लोगों को नगर परिषद के अधिकारियों के पास चक्कर काटने पड़ते हैं। चेकर-मेकर पर मनमानी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। ताता मामला शहर के नई आबादी स्थित एक प्रापर्टी आइडी का है। पहले चेकर-मेकर ने उसे ओके कर दिया।

    बाद में उसी आइडी पर स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज क्लियर नहीं होने का हवाला देते हुए आपत्ति लगा दी। डीएमसी प्रदीप अहलावत के संज्ञान में जब यह मामला पहुंचा तो उन्होंने एक्सइएन अंकित वशिष्ठ को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एक्सईएन ने भी बिना देरी किए चेकर-मेकर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने के लिए पत्र लिखा है।

    खामियों के 500 आवेदन आए –
    खामियों के 500 आवेदन आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नाम व पता गलत होने की शिकायतें आईं थीं। इस मौके पर किसी का निस्तारण नहीं किया गया। इनमें नाम और पता गलत के 300, मोबाइल नंबर गलत के 115 और अन्य के 85 शिकायतें शामिल हैं। मालिकों को अपनी प्रॉपर्टी आईडी ठीक करने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे नप के अधिकारी गृहकर वसूली करने की बजाय गलती ठीक करने में उलझे हुए हैं। नगर परिषद क्षेत्र में प्रॉपर्टी सर्वे मुख्यालय स्तर पर याशी कंसल्टेंसी एजेंसी से कराया था।

    पिछले दो तीन साल पहले शुरू हुए सर्वे के बाद एजेंसी की ओर से सर्वे के नोटिस प्राॅपर्टी मालिकों को दिए गए तो अधिकतर ने खामियां बताकर शिकायत की। इसको लेकर नगर परिषद ने वार्डों में शिविर भी लगाए गए, लेकिन शिकायतों का निवारण नहीं हुआ। रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र में काफी ऐसी प्रॉपर्टी अटकी हुई हैं, जिनका समाधान होना बाकी है। प्राॅपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम और नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) पोर्टल पर अपलोड हुए आवेदनों पर आपत्तियां जताई जा रही हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही। इसलिए सरकार ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए निदेशालय को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

  • बिहार में बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर किसानों को राहत, 22 अक्टूबर से चलेगा विशेष अभियान, जानें किस जिले में कितने किसानों को मिला पैसा

    बिहार में बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर किसानों को राहत, 22 अक्टूबर से चलेगा विशेष अभियान, जानें किस जिले में कितने किसानों को मिला पैसा

    पटना 
    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नेभारी बारिश और बाढ़ के कारण फसल का नुकसान झेलने वाले किसानों के खाते में कृषि इनपुट अनुदान की राशि भेजी। सीएम ने कुल 2 लाख 48 हजार 407 किसानों के बैंक खाते में लगभग 112.52 करोड़ रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजे। सीएम ने कहा कि राज्य भर के 4.57 लाख किसानों ने कृषि इनपुट के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में 2.48 लाख पात्र किसानों को आर्थिक मदद ट्रांसफर कर दी गई है। बाकी किसानों को पैसा कब मिलेगा, यह भी सीएम ने बता दिया है।

    सम्राट चौधरी ने पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद हॉल में कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत लाभार्थियों को राशि ट्रांसफर की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के समय किसानों को मदद पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे फिर से खेती का काम शुरू कर सकें।

    बचे हुए किसानों को कब मिलेगा कृषि इनपुट का पैसा?
    बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल का नुकसान झेलने वाले जिन किसानों को कृषि इनपुट अनुदान पहले चरण में नहीं भेजा गया है, उन्हें दूसरे फेज में यह राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि दूर्गा पूजा के बाद यह पैसा भेज दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश भी दिया कि वे 22 अक्टूबर से एक विशेष अभियान चलाएं, ताकि बाढ़ से फसल नुकसान झेलने वाले जिन किसानों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है, उन्हें भी अनुदान मिल सके। सीएम ने स्पष्ट कहा कि आपदा से प्रभावित कोई भी किसान अनुदान से वंचित नहीं रहना चाहिए।

    फसल नुकसान पर कितना अनुदान देती है बिहार सरकार?
    दरअसल, बिहार सरकार बारिश और बाढ़ जैसे प्राकृतिक कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को कृषि इनपुट अनुदान देती है। इस योजना के तहत किसानों को बिना सिंचाई वाले क्षेत्र में 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्रों में 17000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाती है।

    सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि इनपुट अनुदान के जरिए सरकार आपदा के समय किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करती है। फसल का नुकसान होने के बाद किसानों को अपनी खेती का कार्य जारी रखने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में समन्वय के लिए कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों द्वारा किए गए कार्यों की भी सराहना की।

    सीएम ने कहा कि बिहार सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने किसानों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों का भी जिक्र किया।

    इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा और प्रदेश के वरीय अधिकारी शामिल हुए।

    किस जिले में कितने किसानों को मिला अनुदान-
        बेगूसराय 50,579
        भागलपुर 74,455
        समस्तीपुर 29,995
        भोजपुर 36,097
        वैशाली 12,146
        पूर्णिया 5,963
        मधेपुरा 8,832
        पटना 5,845
        मुंगेर 2,575
        औरंगाबाद 3,776
        अरवल 2,773
        लखीसराय 4,846
        कटिहार 2,892
        सारण 3,330
        शेखपुरा 1,449
        खगड़िया 2,388
        पश्चिम चंपारण 414
        कैमूर 319