Author: NewseDay

  • काशी में सीएम योगी ने किए बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन

    काशी में सीएम योगी ने किए बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन

    बाबा काल भैरव और काशी विश्वनाथ के दरबार में मुख्यमंत्री योगी ने नवाया शीश

    विधि-विधान से किया दर्शन-पूजन, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की
     
    एक सप्ताह में दूसरी बार काशी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    वाराणसी
     शक्ति की आराधना के पावन पर्व शारदीय नवरात्र में धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में बुधवार को मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने बाबा काल भैरव और श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में शीश नवाया। एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार काशी पहुंचे मुख्यमंत्री ने दोनों मंदिरों में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और लोक कल्याण की कामना की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने 7 अक्टूबर को भी काशी पहुंचकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई थी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर षोडशोपचार पूजन किया और बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाकर प्रदेश और देश की लोक कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। बाबा काल भैरव मंदिर में मौजूद बच्चों को प्यार से चॉकलेट दी और उनसे उनकी पढाई के बारे में बात की। 

    दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री के साथ वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, स्टाम्प मंत्री रविन्द्र जायसवाल, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक सुनील पटेल सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

  • हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

    हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

     लखनऊ
    प्रदेश में तीन माह में पंचायत चुनाव करा पाना आसान नहीं है। जातीय जनगणना, परीक्षाएं और विधानसभा चुनाव इन्हीं 3-4 महीनों में होने हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट के तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अध्ययन के बाद अगले कदम के बारे में निर्णय लेंगे।

    विगत 25 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाया गया था। उसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों को भी कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक बना दिया गया। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की मतदाता सूची 10 जून को जारी कर चुका है। आयोग का अपनी तैयारियां पूरी होने का दावा है।

    प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण तय करने के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 20 मई को किया गया था। इसका छह महीने का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होगा। फिलहाल पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है, जो अभी तक 75 में से 42 जिलों में सर्वे और भ्रमण का काम पूरा कर पाया है।

    उत्तर प्रदेश में जनगणना का दूसरा चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी के बीच चलेगा, जिसमें पूरी प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त रहेगी। जनवरी के पहले सप्ताह में ही विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने की संभावना है। ऐसे में न सरकार के लिए चुनाव करा पाना आसान होगा और न ही विपक्ष चाहेगा कि उसकी ऊर्जा, समय व संसाधन दो जगह बंटें। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े सूत्र भी बताते हैं कि इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की पूरी संभावना है।

    क्या कहा था इलाहाबाद हाईकोर्ट ने
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्राम पंचायत चुनाव मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। यह फैसला न्यायमूर्ति जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने शाम 4:00 बजे खुली अदालत में सुनाया। यह याचिका प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन और अन्य द्वारा समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

    पंचायत चुनाव पर न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान: ओपी राजभर
    पंचायत चुनाव को लेकर न्यायालय के निर्णय पर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति सरकार का पूरा सम्मान और विश्वास है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। हालांकि, अभी उन्होंने न्यायालय का आदेश पढ़ा नहीं है। ऐसे में आदेश का अध्ययन किए बिना इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
     
    राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव एक महत्वपूर्ण विषय है। इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पहले न्यायालय के आदेश का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उसमें दिए गए निर्देशों को समझा जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर विचार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। न्यायालय के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों का पूरा सम्मान करते हुए ही आगे की दिशा तय की जाएगी।

    33 जिलों का दौरा अभी बाकी : आयोग
    समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह ने कहा कि हम 42 जिलों का दौरा पूरा कर चुके हैं। हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी के अध्ययन के बाद आगे का निर्णय लेंगे। रिपोर्ट जल्दी देने के लिए कहा जाएगा तो पूरा आयोग एक साथ जाने के बजाय उसके सदस्य 2-3 टीमें बनाकर शेष जिलों का अलग-अलग दौरा पूरा करेंगे।

  • ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या के विरोध में पंजाब में प्रदर्शन, SHO सस्पेंड और DSP पर कार्रवाई की सिफारिश

    ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या के विरोध में पंजाब में प्रदर्शन, SHO सस्पेंड और DSP पर कार्रवाई की सिफारिश

    चंडीगढ़
    मानसा में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद आज के लिए पंजाब में बंद का आह्वान किया गया था। इस बीच सूबे में सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस प्रदर्शन को हर वर्ग समर्थन दे रहा है।फाजिल्का में पंजाब बंद के आह्वान के समर्थन में व्यापार मंडल, किसान और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बाजार बंद रखने का फैसला लिया है।शहर में फिलहाल दुकानें बंद हैं और यह बंद दोपहर एक बजे तक रहेगा। वहीं, विभिन्न संगठनों की ओर से सुबह 10:30 बजे शहर के बाजारों में रोष मार्च निकाला जाएगा, जो डीसी कार्यालय पहुंचेगा।

    जालंधर में किसानों के रोष प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने किसान नेताओं को घर में ही नजर बंद कर लिया। जंडियाला के निकटवर्ती गांव पुलिस ने प्रधान कुलविंदर सिंह मछियाणा को डिटेन कियावहीं, फिरोजपुर में बंद का समर्थन करने वाले वंचित समाज से संबंधित नेता दीप दशनानंद और मिसल सतलुज के पदाधिकारी मान सिंह किली को फिरोजपुर पुलिस ने सुबह सवेरे उनके घरों से हिरासत में ले लिया। दोनों नेताओं की ओर से पंजाब बंद का पूर्ण समर्थन करते हुए धरना देने का एलान किया गया था।

    किसान नेता भी समर्थन में आए
    इस समर्थन को किसानों को भी सपोर्ट मिल रहा है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सभी यूनियनों ने पंजाब के लोगों से अपील की है कि वे ड्रग माफिया के खिलाफ आज के 'पंजाब बंद' को सफल बनाएं। किसान मजदूर संघर्ष समिति ने पूरे पंजाब में जिला मुख्यालयों पर बंद का आह्वान किया है, और हमें उम्मीद है कि यह बंद सफल रहेगा। आपातकालीन सेवाएं चालू रहनी चाहिए। हमारा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए, और किसी को भी कोई गड़बड़ी नहीं करनी चाहिए।

    स्कूलों में दिखा असर
    बंद के मद्देनजर कई निजी स्कूलों ने भी बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बीती रात अभिभावकों को मैसेज भेजकर आज छुट्टी की सूचना दी थी।

    हालांकि, सरकारी स्कूल आम दिनों की तरह खुले हुए हैं। वहीं, जिला फाजिल्का केमिस्ट एसोसिएशन ने भी बंद का समर्थन किया है। इसके तहत दवाइयों की दुकानें सुबह 11 बजे तक बंद रहेंगी। इसके बाद केमिस्ट दुकानें खोल देंगे, ताकि मरीजों को दवाइयां लेने में परेशानी न हो।

    किसान संगठन सिद्धूपुर ने बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे जाम कर दिया। सभी जिलों में बाजार भी बंद रखे गए हैं। बठिंडा और फरीदकोट में किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बंद के लिए सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक का टाइम तय किया गया है। इस दौरान सिर्फ अस्पताल, मेडिकल स्टोर, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं की छूट है।

    इसी बीच मानसा के SSP वैभव चौधरी ने मानसा सिटी थाने की SHO बेअंत कौर को सस्पेंड कर दिया है। वहीं DSP हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ जांच के लिए DGP ऑफिस को सिफारिश कर दी गई है।

    परविंदर झोटा का 13 अक्टूबर को मानसा में नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। झोटा के पिता भीम सिंह ने डेडबॉडी लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इस हत्याकांड की CBI जांच की मांग की है।

    रेलों पर नहीं कोई असर
    पंजाब बंद को लेकर रेल यातायात पर अभी तक कोई असर नहीं है। रेल परिवहन पहले की तरह सामान्य रूप से संचालित है। लेकिन दूसरी तरफ बसें न चलने से सड़क मार्ग प्रभावित हो गया है। क्योंकि महज 10 फीसदी बसें ही चल रही हैं। इनमें भी लॉन्ग रूट की बसें शामिल हैं।

    सड़क मार्ग प्रभावित होने के बाद बस यात्रियों का रुख रेल पर देखा जा सकता है। ऐसे में स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ भी देखी जा सकेगी।

    बसें प्रभावित
    कई शहरों में सरकारी और प्राइवेट दोनों बसें बंद हैं। वहीं, बठिंडा में सभी प्राइवेट बस बंद हैं, लेकिन सरकारी बसें चल रही हैं। तरनतारन में पंजाब बंद का सुबह से जीवासर दिखने को मिला है। शहर के बोहड़ी चौक में पुलिस तैनात है जबकि सभी दुकानें बंद है। यहां बसों की आवाजाही भी कम है।

    फरीदकोट में बाजार अभी तक पूरी तरह बंद है। आम लोगों द्वारा समर्थन दिखाई दे रहा है जबकि आम दिनों में अब तक दुकानें खुलनी शुरू हो जाती हैं। दूसरी और बसें चल रही हैं लेकिन सभी स्कूल भी जिले में बंद है।

     BJP 36 स्थानों पर करेगी प्रदर्शन, केवल ढिल्लों ने की CBI जांच की मांग 

    भाजपा प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि पार्टी ने राज्य के 36 स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ज्ञापन में कहा गया कि परविंदर सिंह लंबे समय से मानसा में नशा तस्करी और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चला रहे थे।

    भाजपा नेताओं ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हत्या किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकती है।

    मामले में सीबीआई जांच हो
    पार्टी की मांगों में सीबीआइ जांच के अलावा हमलावर के कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज और फेसबुक लाइव समेत डिजिटल सुबूत सुरक्षित करने, पीड़ित परिवार, खासकर नाबालिग बच्चों को तत्काल पुलिस सुरक्षा देने, पंजाब में नशा तस्करी के नेटवर्क की जांच शामिल हैं।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मानसा में मंगलवार की सुबह नशा के खिलाफ मुहिम चला रहे परविंदर सिंह झोटा की हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक घटना है। इस मामले की सीबीआइ से उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ।

    बढ़ता जा रहा आक्रोश
    मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार को तिकोनी चौक पर अनिश्चितकालीन धरन जारी रहा। एक्शन कमेटी ने मांगें पूरी होने तक झोटा का अंतिम संस्कार नहीं करने का एलान किया है। झोटा का पार्थिव शरीर सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है।

    समर्थक मंगलवार से ही मोर्चरी के बाहर भी डटे हैं। परिवार का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

     

  • शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं, राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना होगा: मुख्यमंत्री

    शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं, राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना होगा: मुख्यमंत्री

    धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा: सीएम योगी

    वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में बोले मुख्यमंत्री, संन्यासी के जीवन का बताया ध्येय

    राष्ट्रवाद, धर्म-संस्कृति की रक्षा और लोककल्याण को बताया आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य

    भारत सेवाश्रम संघ ने सम-विषम परिस्थितियों में मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया: सीएम योगी

    स्वामी प्रणवानंद जी ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रजागरण का माध्यम बनाया

    देश और धर्म के लिए मरेंगे, देश और धर्म के लिए जिएंगे, सीएम योगी ने संन्यासियों के जज्बे को सराहा

    शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं, राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना होगा: मुख्यमंत्री

    इसी जज्बे से काशी विश्वनाथ धाम और भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ: मुख्यमंत्री

    वाराणसी, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक संन्यासी के जीवन का ध्येय ही होना चाहिए कि धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा। देश और धर्म के लिए जो भी त्याग होगा, वह महान होगा और उसी महानता को लेकर के कार्य करना है, उसी महानता के लिए अपने आप को समर्पित करना है। मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा और सेवा परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि भारत सेवाश्रम संघ ने सम और विषम परिस्थितियों में कभी भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इस संस्था ने जीवन का ध्येय राष्ट्रवाद रखा, आत्मोन्नति का माध्यम राष्ट्रोन्नति को बनाया और राष्ट्रोन्नति को ही आत्मोन्नति का माध्यम भी बनाया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ठीक 100 वर्ष पहले इसी काशी में एक महान राष्ट्रवादी साधक पूज्य स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने 1926 में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा का शुभारंभ किया था। यह देश गुलाम था, स्वामी प्रणवानंद जी महाराज देश के अलग-अलग कोने में जाकर के भारत की स्वाधीनता की अलख को भी जगाते थे और हिंदू जागरण के इस महान व्रत को भी अपने हाथों में लेकर के भारत को महान भारत बनाने, स्वतंत्र भारत की संकल्पनाओं को पूरा करने में अपना योगदान देते थे। आज यह संस्था भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में भारत के सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा को लेकर प्रभावी ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।

    राष्ट्र की विरासत, धर्म और संस्कृति की रक्षा भी जरूरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, उसकी विरासत, उसकी आध्यात्मिक धरोहर, उसकी ऐतिहासिक धरोहर, उसके मान बिंदु, उसके धर्म और संस्कृति, इन सब के ऊपर भी संकट आता है। काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते, तो क्या काशी में बाबा विश्वनाथ की इस पावन धरा पर, बाबा विश्वनाथ के पावन मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस कोई कर सकता था? राम जन्मभूमि पर 500 वर्षों तक गुलामी का कलंक (ढांचा) खड़ा रहता? मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि पर गुलामी का कलंक खड़ा रहता? कभी नहीं होता। उन्होंने कहा कि ये वही पाप है जो आपने बंट कर के किया था, और उसी पाप का परिमार्जन करने के लिए इन संतों ने अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग कालखंड में उस महाजागरण के अभियान को अपनी आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बनाया था, जिसमें स्वामी प्रणवानंद जी ने भी उसी आध्यात्मिक साधना को आगे बढ़ाया। 

    12-13 वर्ष की उम्र में गुरु की तलाश में गोरखपुर पहुंचे थे स्वामी प्रणवानंद जी

    स्वामी प्रणवानंद जी महाराज के जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि स्वामी प्रणवानंद जी ने 1912-13 में जिस धरा पर आकर के दीक्षा ली थी, वह गोरखपुर की गोरक्षपीठ है। उस समय के सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ जी के सानिध्य में रहकर उन्होंने साधना की और लंबे समय तक गोरखपुर में रहे। 

    मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि आज के बांग्लादेश के मेमनसिंह शहर के पास स्वामी जी की पावन जन्मभूमि है। स्कूली शिक्षा के दौरान छठी-सातवीं क्लास का विद्यार्थी अपने शिक्षक से अचानक एक दिन कहता है कि उसे गोरखपुर जाना है, उसके गुरु ने उसे बुलाया है। उन्होंने बताया कि विनोद नाम का वह छात्र अपने शिक्षक के साथ ढूंढते-ढूंढते गोरखपुर आता है। सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ जी के सामने पहुंचने पर बाबा ने कहा कि ये तो जन्म से योगी है, सिद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही वे अपनी साधना में बाबा के सामने बैठे, उनकी तीन घंटे की अखंड समाधि लगी थी। गोरखपुर के बाद काशी, और काशी के बाद फिर पूरे देश के अंदर स्वामी प्रणवानंद जी ने इस आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया। केवल आत्मोन्नति का नहीं, राष्ट्र उन्नति का माध्यम बनाया।

    शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं, राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना होगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ की परंपरा में पूजा केवल धूप और दीया से ही नहीं होती, अस्त्र-शस्त्र से भी मां जगत जननी मां भगवती की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि ये शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं हैं, ये पूजन की भी वस्तु है और राष्ट्र रक्षा के लिए भी जब आवश्यकता पड़ती है इसको धारण करने के लिए हमें तैयार होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रणवानंद जी ने अपने समय में इस अभियान को आगे बढ़ाया था। आज भारत सेवाश्रम संघ देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अच्छा लगा कि भारत सेवाश्रम संघ आज भी उन मूल्यों से विचलित नहीं हुआ है।

    पश्चिम बंगाल में संन्यासियों को धमकाने का काम कर रही थी जो सरकार, वह गई

    पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बंगाल में एक हिंदू विरोधी (ममता) सरकार भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों को धमकाने लग गई,  मैंने कहा अब तो गई यह सरकार, अब इसको कभी नहीं आना है, क्योंकि वह अब रावण की तरह धमकाने का काम कर रही है, कंस की तरह धमकाने का काम कर रही है, संन्यासियों को धमकाने का काम कर रही है, इसका मतलब अब वह सरकार गई। उन्होंने भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों की सराहना करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में भी वे विचलित नहीं हुए। 
    मुख्यमंत्री ने अपने बंगाल प्रवास का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां की सभाओं में संघ का कोई न कोई संन्यासी उनसे मिलने जरूर आता था। वे पहले मंच से दूर रहते थे, लेकिन उनके आग्रह पर मंच पर भी आ जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने संन्यासियों से पूछा कि कोई भय तो नहीं है, तो उनका जवाब था, नहीं, कैसा भय? क्या लेकर आए हैं, क्या लेकर जाएंगे? देश और धर्म के लिए मरेंगे, देश और धर्म के लिए जिएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही जज्बा जिसने विपरीत परिस्थितियों में भारत को भारत बनाया हुआ है। अगर यह जज्बा नहीं होता, तो क्या काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हो पाता? क्या 500 वर्षों के बाद अयोध्या का कलंक मिट करके भव्य राम मंदिर का निर्माण हो पाया होता? कभी नहीं। 

    100 गरीब कन्याओं को सिलाई मशीनें, 100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

    मुख्यमंत्री योगी ने भारत सेवाश्रम संघ के लोककल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत सेवाश्रम संघ गरीब कन्याओं को सिलाई मशीनें वितरित कर रहा है। मैं पिछली बार भी आया था, तब भी आपने दिया था। कुंभ में भी ऐसा दान का काम होता है और अन्न क्षेत्र भारत सेवाश्रम संघ का चलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह देश में कहीं भी भारत सेवाश्रम संघ का आश्रम देखते हैं, तो वहां जरूर जाते हैं, क्योंकि पूज्य योगी बाबा गंभीरनाथ जी की स्मृति इसके साथ जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि संघ 100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए उन्होंने संघ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि 100 परिवार इसके माध्यम से आत्मनिर्भर होंगे, और यही तो प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना है। 

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रेरणा स्थली है भारत सेवाश्रम संघ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में कार्यक्रम निरंतर होते रहने चाहिए। अनेक महापुरुषों को यहां बुलाइए। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा और पार्टी के साथ वे जुड़े हैं, उस पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रेरणा स्थली भारत सेवाश्रम संघ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति के खिलाफ नए राजनीतिक संगठन के रूप में उठ खड़ा होने के लिए प्रेरित करने की प्रेरणा स्वामी प्रणवानंद जी ने दी थी। 

    इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मंत्री रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र दयालु, हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष  पूनम मौर्य, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, सुनील पटेल, भारत सेवाश्रम संघ के जनरल सेक्रेटरी स्वामी विश्वात्मानंद महाराज, सहायक सेक्रेटरी स्वामी धनेशानंद जी महाराज, सहायक सेक्रेटरी स्वामी अम्बरीशानंद जी महाराज, गवर्निंग बॉडी मेंबर स्वामी आत्मज्ञानानंद जी महाराज के साथ भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासीगण, स्वयंसेवकगण उपस्थित रहे।

  • पंचायत चुनाव पर ओम प्रकाश राजभर का बयान, बोले- कोर्ट के निर्णय का पूरा सम्मान करेंगे

    पंचायत चुनाव पर ओम प्रकाश राजभर का बयान, बोले- कोर्ट के निर्णय का पूरा सम्मान करेंगे

    पंचायत चुनाव पर न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान, आदेश के अध्ययन के बाद तय होगी आगे की दिशा : ओम प्रकाश राजभर
     
    पंचायतीराज मंत्री बोले- न्यायपालिका के प्रति सरकार का पूरा विश्वास, निर्णय का सम्मान करना हम सभी का दायित्व
     
    बिना आदेश पढ़े कोई टिप्पणी करना उचित नहीं, सभी पहलुओं के अध्ययन के बाद होगा आगे की प्रक्रिया पर विचार
     
     लखनऊ

    पंचायत चुनाव को लेकर न्यायालय के निर्णय पर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति सरकार का पूरा सम्मान और विश्वास है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। हालांकि, अभी उन्होंने न्यायालय का आदेश पढ़ा नहीं है। ऐसे में आदेश का अध्ययन किए बिना इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
     
    राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव एक महत्वपूर्ण विषय है। इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पहले न्यायालय के आदेश का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उसमें दिए गए निर्देशों को समझा जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर विचार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। न्यायालय के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों का पूरा सम्मान करते हुए ही आगे की दिशा तय की जाएगी।

  • राष्ट्रीय मंच पर यूपी के बच्चों का जलवा, 5 वैज्ञानिक नवाचारों को मिला पुरस्कार

    राष्ट्रीय मंच पर यूपी के बच्चों का जलवा, 5 वैज्ञानिक नवाचारों को मिला पुरस्कार

    योगी सरकार में यूपी के बाल वैज्ञानिकों का राष्ट्रीय मंच पर जलवा, 5 नवाचारों ने जीते पुरस्कार

    12वीं राष्ट्रीय इंस्पायर-मानक प्रदर्शनी में मुजफ्फरनगर, औरैया, फर्रुखाबाद, रामपुर और लखनऊ के विद्यार्थियों ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव

    भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश भर के 790 मॉडल्स में से चयनित हुए यूपी के 5 नवाचार

    केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया सम्मानित 

    लखनऊ/नई दिल्ली
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के बीच प्रदेश के पांच बाल वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (एनआईएफ) की ओर से संचालित इंस्पायर-मानक योजना के तहत आयोजित 12वीं राष्ट्रीय स्तरीय प्रोजेक्ट एवं प्रदर्शनी प्रतियोगिता (एनएलईपीसी) में उत्तर प्रदेश के पांच विद्यार्थियों के नवाचारों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 अक्टूबर को आयोजित प्रतियोगिता में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने चयनित विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

    790 मॉडलों के बीच यूपी के नवाचारों ने बनाई जगह

    देशभर से चयनित 790 छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगिता में अपने वैज्ञानिक एवं तकनीकी मॉडल प्रस्तुत किए। उत्तर प्रदेश के 41 बाल वैज्ञानिकों ने राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। राष्ट्रीय निर्णायक मंडल ने मॉडलों की नवीनता, सामाजिक उपयोगिता, लागत प्रभाविता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर उनका मूल्यांकन किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद प्रदेश के पांच विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए।

    पांच जिलों के विद्यार्थियों ने बढ़ाया प्रदेश का मान

    राष्ट्रीय स्तर पर चयनित विद्यार्थियों में मुजफ्फरनगर के अलौकिक सिरस्वाल, औरैया के दिव्यांश कश्यप, फर्रुखाबाद की दक्षिणा सिंह, रामपुर के शुभ अग्रवाल और लखनऊ के अभिनन्जय पाण्डेय शामिल हैं। इन विद्यार्थियों की उपलब्धि ने प्रदेश की स्कूली प्रतिभा और नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है।

    नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन

    अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा के अनुसार, राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की भागीदारी और सफलता उनकी वैज्ञानिक दृष्टि, रचनात्मकता तथा समस्याओं के समाधान की क्षमता को दर्शाती है। इंस्पायर-मानक जैसी पहल विद्यार्थियों को कम उम्र से ही वैज्ञानिक सोच विकसित करने, नए विचारों पर काम करने और समाजोपयोगी समाधान तैयार करने का अवसर देती है।

  • बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम की तैयारी, ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव कराएगी योगी सरकार

    बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम की तैयारी, ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव कराएगी योगी सरकार

    योगी सरकार का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर, ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव

    पानी उतरते ही लखनऊ में सफाई अभियान तेज, नौ सेक्टर और 31 सब-सेक्टर में निगरानी

    सफाई, पेयजल और जलनिकासी संबंधी शिकायतों के लिए नगर निगम ने जारी किए विभागवार हेल्पलाइन नंबर

    नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण, गाद हटाने, कूड़ा उठान और जलनिकासी दुरुस्त करने के निर्देश

    लखनऊ
     योगी सर
    कार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बनाने और नागरिकों को संक्रमण एवं मच्छरजनित बीमारियों से बचाने के लिए राहत, स्वच्छता और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में लखनऊ नगर निगम ने बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही जोन-3 और जोन-6 में सफाई अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में जमा गाद, मिट्टी और कूड़ा हटाने के साथ एंटी लार्वा छिड़काव तथा संक्रमण से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। वहीं नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम ने सफाई, पेयजल और जलनिकासी संबंधी शिकायतों के लिए विभागवार हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। 

    नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत एवं सफाई कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी उतरने वाले क्षेत्रों में तत्काल सफाई, गाद हटाने और कूड़ा उठान कराया जाए। साथ ही जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और नागरिकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त और डॉ. अरविंद कुमार राव भी अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

    नौ सेक्टर और 31 सब-सेक्टर में बांटे प्रभावित क्षेत्र

    नगर निगम ने सफाई और राहत कार्यों की निगरानी के लिए दोनों जोन के प्रभावित क्षेत्रों को कुल नौ सेक्टर और 31 सब-सेक्टर में विभाजित किया है। जोन-3 में पांच सेक्टर और 21 सब-सेक्टर बनाए गए हैं, जहां 39 बीट कर्मियों सहित करीब 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं, जोन-6 में चार सेक्टर और 10 सब-सेक्टर के अंतर्गत 60 बीट में कार्यों की निगरानी की जा रही है। इस जोन में करीब 550 कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जबकि बुधवार को 300 से अधिक कर्मचारी विभिन्न कार्यों में लगाए गए।

    ड्रोन से छिड़काव, गाद हटाने का कार्य जारी

    जोन-3 के नंदा फॉर्म, संत कबीर नगर, मिल्लत नगर, पुराना दाउद नगर, कैलाश विहार, पवन विहार और लौहरामऊ सहित कई इलाकों में तीन ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव कराया गया। छह टैंकरों से सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव भी किया गया। गणेश विहार, नंदा फॉर्म और दाउद नगर में गाद हटाने के साथ झाड़ियों की कटाई और कूड़ा उठान जारी है। जोन-6 के सैंथा, हयातनगर, गुलमी खेड़ा, दौलत खेड़ा और टांड खेड़ा सहित अन्य मोहल्लों में भी छिड़काव और डी-सिल्टिंग कराई जा रही है।

    शिकायतों के लिए जारी किए कंट्रोल रूम नंबर

    प्रभावित नागरिक सफाई के लिए 8808837500, 6389923234, 9219902911 और 9219902912 पर संपर्क कर सकते है। पेयजल एवं सेप्टिक टैंक संबंधी शिकायतों के लिए 9451831593, 9889806396, 9454508087 और 7991332892 तथा जलनिकासी के लिए 8810721631, 6389923231, 9219902913 और 9219902914 नंबर जारी किए गए हैं। 
    नगर निगम ने प्रभावित नागरिकों से समस्याओं की सूचना संबंधित कंट्रोल रूम पर देने की अपील की है, ताकि समयबद्ध कार्रवाई कर प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और सामान्य जनजीवन बहाल किया जा सके।

  • मध्य प्रदेश में शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार, इंदौर कॉन्क्लेव में ₹2,753.10 करोड़ की परियोजनाओं पर होगा मंथन

    मध्य प्रदेश में शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार, इंदौर कॉन्क्लेव में ₹2,753.10 करोड़ की परियोजनाओं पर होगा मंथन

    अर्बन कॉन्क्लेव 2026
    इंदौर में 28 अक्टूबर को आयोजित होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव

    अर्बन चैलेंज फंड की 2,753.10 करोड़ रूपये की परियोजनाओं को मिलेगा नया आयाम

    बैंक अनुबंध और लेटर ऑफ अवार्ड होंगे जारी

    इंदौर 

    मध्यप्रदेश में समृद्ध एवं आधुनिक नगरीय अधोसंरचना के सर्वांगीण विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा प्रदेश के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित बनाने के ध्येय से आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में 'अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख नगरीय विकास परियोजनाओं की भौतिक प्रगति, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े दूरगामी रणनीतिक पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाने तथा नगरीय विकास की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। अर्बन कॉन्क्लेव में ‘अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संस्थानों एवं बैंकों के साथ अनुबंध किये जाएँगे तथा संबंधित एजेंसियों को 'लेटर ऑफ अवार्ड' प्रदान किए जाएँगे ।

    अर्बन चैलेंज फंड के तहत प्रदेश के विभिन्न नगरों में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 2,753.10 करोड़ रूपये है। इस वित्तीय नियोजन के माध्यम से इंदौर, उज्जैन और रीवा की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था के वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा सीवरेज नेटवर्क एवं उपचार संयंत्रों के व्यापक उन्नयन कार्य शामिल हैं। इसी श्रृंखला में धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में 'एकीकृत मंदिर क्षेत्र विकास' की महत्वाकांक्षी परियोजना तथा रीवा नगर की सर्वसमावेशी जलप्रदाय योजना के कार्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है।

    कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के नगरीय निकायों में आधारभूत सुविधाओं के अभूतपूर्व विस्तार, आधुनिक शहरी अधोसंरचना के निर्माण तथा वित्तीय संसाधनों के सर्वाधिक प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग की संभावनाओं को नए आयाम दिए जा रहे हैं। अर्बन चैलेंज फंड से संचालित ये परियोजनाएं न केवल शहरों में जन-सुविधाओं का विस्तार कर 'ईज़ ऑफ लिविंग' के उच्च मानक स्थापित करेंगी, बल्कि नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी संबल प्रदान करेंगी।

    राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्टअप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉन्क्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्टअप्स एवं युवा आधिकारिक वेब पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन (Registration) करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से मध्यप्रदेश के शहरों में सतत्, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा। 

  • यूपी में पेयजल योजनाओं के लिए ₹1,242 करोड़ मंजूर, खर्च पर लागू होंगी वित्तीय शर्तें

    यूपी में पेयजल योजनाओं के लिए ₹1,242 करोड़ मंजूर, खर्च पर लागू होंगी वित्तीय शर्तें

    योगी सरकार का बड़ा फैसला, ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए 1,242 करोड़ रुपये की दी स्वीकृति

    स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के लिए निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों का पालन करने की भी शर्तें

    जल जीवन मिशन के तहत यूपी में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी योगी सरकार

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवारों को पेयजल की सुविधा लगातार मिलती रहे, इसके लिए योगी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण क्षेत्रों की पाइप पेयजल योजनाओं के संचालन और रख-रखाव के लिए 1,242 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस संबंध में राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक को शासनादेश जारी किया गया है।

    योगी सरकार के इस फैसले से गांवों में पानी की आपूर्ति करने वाली योजनाओं को सुचारु बनाए रखने और उनकी नियमित देखरेख में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण परिवारों को पेयजल सुविधा का लाभ लगातार उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो सकेगी।

    पेयजल योजनाओं के रखरखाव के लिए बड़ी धनराशि
    ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पाइप पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,242 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य पेयजल योजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करना और गांवों में पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत करना है।

    वित्तीय नियमों का पालन जरूरी
    राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक को जारी शासनादेश में स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के लिए निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है। राशि का उपयोग तय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। इससे सरकारी धन के निर्धारित मद में खर्च और योजनाओं के संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    ग्रामीण परिवारों को मिलेगा लाभ
    ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का नियमित संचालन बेहद जरूरी है। इनकी देखरेख और रख-रखाव बेहतर होने से पानी की आपूर्ति में आने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने और आम लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

  • डॉलर के मुकाबले रुपये को लेकर RBI अलर्ट, संजय मल्होत्रा ने दिया भरोसा- हालात संभालने के लिए उठाएंगे जरूरी कदम

    डॉलर के मुकाबले रुपये को लेकर RBI अलर्ट, संजय मल्होत्रा ने दिया भरोसा- हालात संभालने के लिए उठाएंगे जरूरी कदम

    नई दिल्ली

    भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव हो तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार या बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहता है. ऐसे में भारत के लिए कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे जरूरी सामान खरीदना महंगा हो सकता है. इससे देश के आयात बिल और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपये की चाल को व्यवस्थित रखने और जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठा रहा है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मनीकंट्रोल को दिए एक खास इंटरव्यू में साफ कहा है कि जरूरत पड़ने पर सेंट्रल बैंक और कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

    आरबीआई गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल में उठाए गए कदमों का मकसद विदेशी निवेश को रोकना या देश से पैसा बाहर जाने पर पाबंदी लगाना नहीं है. आरबीआई चाहता है कि फॉरेन करेंसी मार्केट का इस्तेमाल उन लोगों और कंपनियों की जरूरत पूरी करने के लिए हो, जिन्हें आयात, निर्यात या दूसरे भुगतान के कारण रुपये और फॉरेन करेंसी की कीमत में बदलाव से बचाव करना है. सवाल यह है कि आरबीआई ने कौन-से नियम बदले हैं, रुपये पर इसका क्या असर हो सकता है और क्या ब्याज दरें भी बढ़ाई जा सकती हैं?

    फॉरेन करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी रोकने के लिए RBI का कदम
    आरबीआई ने हाल में फॉरेन करेंसी से जुड़े कुछ नियम सख्त किए हैं. अब रद्द किए गए फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर रोक लगाई गई है. इसके अलावा, फॉरेन करेंसी मार्केट में कुछ सौदों के लिए रिजर्व रखने की जरूरत से जुड़े नियम भी बदले गए हैं. डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस को स्पष्ट किया गया है और संबंधित लीमिट को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर किया गया है. इन बदलावों का फोकस ऐसे डील्स पर लगाम लगाना है, जिनमें असली कारोबारी जरूरत के बजाय कीमतों में उतार-चढ़ाव से कमाई करने की कोशिश की जा रही हो।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने देखा कि फॉरेन करेंसी से जुड़े बड़ी संख्या में सौदे उसी दिन रद्द करके दोबारा बुक किए जा रहे थे. कुछ मामलों में करीब एक-तिहाई सौदे उसी दिन बंद या रद्द हो रहे थे, जिस दिन वे किए गए थे।

    आरबीआई गवर्नर के अनुसार, अगर किसी कंपनी को आयात का भुगतान करने के लिए डॉलर की जरूरत है, तो वह आमतौर पर उस जरूरत से जुड़ा सौदा कुछ समय तक बनाए रखेगी. बार-बार सौदे रद्द करना और दोबारा करना सट्टेबाजी की ओर इशारा कर सकता है. इसी वजह से आरबीआई ने ये कदम उठाए हैं. हालांकि, हर सौदे को सट्टेबाजी मानना सही नहीं होगा. असली उद्देश्य जरूरत से ज्यादा और एकतरफा दांव को कम करना है।

    क्या विदेशी निवेशकों के लिए पैसा लाना-ले जाना मुश्किल होगा?
    आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि ये कदम कैपिटल कंट्रोल नहीं हैं. इसका मतलब है कि विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करने या निवेश से पैसा निकालने पर सामान्य रूप से रोक लगाने का उद्देश्य नहीं है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों और बॉन्ड में पैसा लगा सकते हैं और जरूरत के मुताबिक उसे वापस भी ले जा सकते हैं. विदेशी निवेशक और नॉन रेसिडेंशियल अपने निवेश से जुड़े रिस्क से बचने के लिए हेजिंग भी कर सकते हैं. हेजिंग का मतलब है कि भविष्य में कीमत बदलने से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने की व्यवस्था करना है।

    आरबीआई गवर्नर का कहना है कि इन नियमों को विदेशी पूंजी के आने-जाने पर रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार को व्यवस्थित रखना है।

    क्या रुपये को किसी खास लेवल पर रोकना चाहता है RBI?
    सोमवार को रुपये में मजबूती देखने को मिली, लेकिन गवर्नर ने कहा कि आरबीआई रुपये को किसी खास कीमत या तय दायरे में रखने का लक्ष्य नहीं बनाता. सेंट्रल बैंक की कोशिश यह है कि रुपये में अचानक और जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो तथा सट्टेबाजी के कारण बाजार की सामान्य चाल प्रभावित न हो।

    संजय मल्होत्रा ने कहा कि फॉरेन करेंसी मार्केट भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जरूरत से ज्यादा निराशावादी नजर आ रहा है. उनके मुताबिक, भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है. सेवा निर्यात और विदेश में काम करने वाले भारतीयों से आने वाला पैसा अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यापार समझौते, कारोबार करना आसान बनाने वाले सुधार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और ऊर्जा के दूसरे स्रोतों को बढ़ावा देने जैसे कदम निर्यात को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

    क्या रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ेंगी?
    भारतीय रुपये पर दबाव आने की स्थिति में ब्याज दरें बढ़ाने के सवाल पर गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना है. वित्तीय स्थिरता के रिस्क से निपटने के लिए आरबीआई के पास दूसरे नियामक और निगरानी से जुड़े उपाय भी हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्याज दरों और वित्तीय स्थिरता को पूरी तरह अलग नहीं रखा जा सकता. ब्याज दरों में बदलाव का असर बैंकों, कर्ज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए मौद्रिक नीति बनाते समय वित्तीय स्थिरता को भी ध्यान में रखना जरूरी है. उन्होंने यह नहीं कहा कि रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें निश्चित रूप से बढ़ाई जाएंगी।

    आगे भी कदम उठा सकता है RBI, अर्थव्यवस्था पर भरोसा
    आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आरबीआई के पास बाजार में जरूरत के मुताबिक कदम उठाने के कई ऑप्शन हैं. हाल के कुछ आरबीआई के फैसलों का शुरुआती असर पॉजिटिव दिखा है. अगर सट्टेबाजी कम करने के लिए और कदम जरूरी हुए, तो केंद्रीय बैंक उन पर विचार करेगा।

    उन्होंने भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है. साथ ही, आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि बैंक अच्छी स्थिति में हैं, कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत हैं और घरेलू विकास भी अच्छा बना हुआ है. इसके बावजूद, दुनिया में बदलते हालात और फॉरेन करेंसी मार्केट की चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी है।

    संजय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार और आरबीआई मिलकर देश की भुगतान संतुलन स्थिति को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे. उनका संदेश साफ है कि रुपये की किसी खास कीमत को तय करना लक्ष्य नहीं है. कोशिश बाजार को व्यवस्थित रखने, अचानक उतार-चढ़ाव कम करने और जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी पर रोक लगाने की है. साथ ही, जरूरत पड़ने पर आरबीआई आगे भी कार्रवाई कर सकता है।