Author: NewseDay

  • मिनरल वाटर कंपनियों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, BIS प्रमाणन जरूरी; नियम नहीं मानने पर बंद होगा उत्पादन

    मिनरल वाटर कंपनियों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, BIS प्रमाणन जरूरी; नियम नहीं मानने पर बंद होगा उत्पादन

    लखनऊ
     बोतलबंद पानी की गुणवत्ता में खामियों पर राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अब मिनरल वाटर और बोतलबंद पेयजल की नई विनिर्माण इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) का प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) मिलने के बाद लाइसेंस जारी किया जाएगा।

    पहले से संचालित 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन लेना होगा। तय समयसीमा में प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उत्पादन बंद कराया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पिछले एक वर्ष में 811 इकाइयों के निरीक्षण और 660 नमूनों की जांच के बाद यह कदम उठाया है।

    जांच में 513 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इनमें 176 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। इस आधार पर 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित किए गए हैं, जबकि केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति केंद्र सरकार से की गई है।

    खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से मिली कम 
    एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीव पाए गए। वहीं, अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम मिली।

    निरीक्षण के दौरान कुछ इकाइयों में आवश्यक फिल्टर, पराबैंगनी किरणों से शोधन (यूवी) और ओजोनीकरण की सुविधाओं का भी अभाव मिला। इन खामियों के आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में आइएसआइ प्रमाणन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के बाद बीआइएस प्रमाणन की शर्त भी हटा दी गई थी।

    इसके बाद प्रदेश में बोतलबंद पानी की विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़कर 968 हो गई। गुणवत्ता और शोधन व्यवस्था में कमियां सामने आने के बाद प्रमाणन को फिर अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डा. रोशन जैकब के अनुसार, बोतलबंद पेयजल की शुद्धता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। इसलिए सभी विनिर्माण इकाइयों में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

     

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

    आवास जल्द पूरा करने वाले हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश

    रायपुर, 
     मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 और 1.0 के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

            मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के स्वीकृत आवासों का निर्माण कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि जो हितग्राही अपने आवास का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए।

    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0

            प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0: बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) घटक के तहत चल रही आवास निर्माण परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही, भागीदारी में किफायती आवास (AHP) घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के निर्माण स्थल में परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0

            इस योजना के तहत लाभार्थी आधारित आवास निर्माण घटक के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं की कटौती के बाद संशोधित परियोजनाओं की स्वीकृति के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगरीय प्रशासन विभाग के विभिन्न अन्य प्रस्तावों को भी बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।

           नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत कुल 2,43,087 मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2 लाख 25, हजार 411 आवास पूरी तरह से पूर्ण हो चुके हैं। 17 हजार 368 आवासों का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं, बीएलसी घटक के अंतर्गत स्वीकृत 2 लाख 6 हजार 118 मकानों में से 1 लाख 96 हजार 144 मकान पूर्ण हो चुके हैं और 9 हजार 666 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में जारी है।

         बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (राज्य शहरी विकास अभिकरण) सुमित अग्रवाल सहित ऊर्जा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगर तथा ग्राम निवेश, हाउसिंग बोर्ड, हुडको और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • LPG सब्सिडी के लिए आधार सत्यापन पर घिरी केंद्र सरकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

    LPG सब्सिडी के लिए आधार सत्यापन पर घिरी केंद्र सरकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

    नई दिल्ली
    घर में रसोई गैस का सिलेंडर बुक कराने के लिए अब आधार का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी परेशानी की वजह बन सकता है। खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल खड़ी कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी लेने के मकसद से 1 अक्टूबर से लागू किए गए इस नियम पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट आधार की अनिवार्यता पर सीमाएं तय कर चुका है, तो फिर यह शर्त क्यों लगाई गई?

    बुधवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी किया। वकील पुलकित लूथरा की जनहित याचिका पर सभी पक्षों को दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

    दिव्यांग उपभोक्ताओं की परेशानी
    याचिकाकर्ता की 75% स्थायी दृष्टिबाधितता है। उनका कहना है कि आइरिस यानी आंख की पुतली के आसपास के हिस्से की पहचान से होने वाला सत्यापन उनके और दूसरे दृष्टिबाधित उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल है।
    याचिका में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले का हवाला देकर अनिवार्य आधार सत्यापन के कानूनी आधार पर सवाल उठाया गया है।

    सरकार ने क्या दलील दी?
    केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों की समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील जोहेब हुसैन ने दलील दी कि आधार कानून की धारा 7 के तहत अनिवार्यता सरकारी खजाने से वित्तपोषित सब्सिडी, लाभ या सेवाओं पर लागू होती है।

    3.1 करोड़ उपभोक्ताओं पर असर
    याचिका में 17 सितंबर के मंत्रालयी पत्र और 19 सितंबर की प्रेस रिलीज का हवाला है। इसमें सत्यापन पूरा नहीं करने वालों की रिफिल बुकिंग रोकने और असमर्थ या अनिच्छुक उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर 5 या 10 किलो के सिलेंडर तक सीमित करने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत मांगी, लेकिन कोर्ट ने पहले सरकार का जवाब देखने की बात कही।

     

  • न्यूजीलैंड सीरीज से पहले बुमराह खेलेंगे इंडिया ए के मैच, वर्कलोड मैनेजमेंट पर जोर

    न्यूजीलैंड सीरीज से पहले बुमराह खेलेंगे इंडिया ए के मैच, वर्कलोड मैनेजमेंट पर जोर

     नई दिल्ली 
    भारतीय टीम के गेंदबाजी यूनिट के कप्तान इस समय जसप्रीत बुमराह हैं। फॉर्मेट कोई भी हो और कप्तान भी कोई भी हो, वह चाहेगा कि उसकी टीम में जसप्रीत बुमराह खेलें, लेकिन भारतीय टीम मैनेजमेंट का प्लान बुमराह के लिए काफी अलग है। जसप्रीत बुमराह को सिर्फ और सिर्फ एक फॉर्मेट पर फोकस करने के लिए कहा गया है। यह फॉर्मेट है रेड बॉल क्रिकेट। भारत का यह प्रीमियर बॉलर आपको सिर्फ रेड बॉल पकड़े ही अगले कुछ महीने नजर आएगा। सीमित ओवरों की क्रिकेट से उसे आराम दिया जाएगा।

    मीडिया की रिपोर्ट की मानें तो टीम मैनेजमेंट चाहता है कि बुमराह सिर्फ रेड बॉल क्रिकेट पर फोकस करें। यही कारण है कि उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जाने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले इंडिया ए गेम में उतारा जा सकता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने न्यूजीलैंड दौरे पर खेले जाने वाले दो इंडिया ए मैचों के लिए टीम घोषित कर दी है, जबकि तीसरे मैच के लिए आने वाले समय में टीम की घोषणा होगी, जिसमें बुमराह के भी खेलने की पूरी उम्मीद है।

    क्या है बुमराह को लेकर प्लान?
    बुमराह को इस वजह से भी इंडिया ए के लिए मैच खेलने के मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि वे अभी फिट नहीं हैं और मैच फिटनेस असल में कोई प्रोफेशनल मैच खेलकर ही पता चलेगी। टेस्ट सीरीज से पहले अगर मल्टी डेज मैच खेलने के लिए मिले तो यह और भी अच्छा रहेगा। वे फिट हो गए हैं, लेकिन फिर भी नवंबर में न्यूजीलैंड में होने वाली वनडे सीरीज में नहीं खेल पाएंगे, क्योंकि बोर्ड उनके वर्कलोड को देखते हुए सिर्फ टेस्ट सीरीज के लिए चुनने की प्लानिंग में है।

    रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि जसप्रीत बुमराह पूरी तरह फिट हो गए हैं, लेकिन फिर भी उन्हें रूटीन असेसमेंट के लिए उन्हें न्यूजीलैंड टूर से पहले बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी सीओई जाना होगा। बुमराह को दिसंबर में श्रीलंका के खिलाफ होने वाली सीमित ओवरों की सीरीज और फिर जनवरी में जिम्बाब्वे से होने वाली वनडे सीरीज से भी बाहर रखा जा सकता है और इसके पीछे की वजह है बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी।

    बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी है टीम इंडिया के लिए अहम
    टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया में 3-1 से बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हार मिली थी। ऐसे में भारतीय टीम मैनेजमेंट चाहता है कि भारत कम से कम घर पर इस सीरीज को फिर से जीते। इस वजह से बुमराह को एक बेटर शेप में रखने के इरादे से उन्हें सीमित ओवरों से बाहर रखा जा सकता है, क्योंकि टेस्ट सीरीज के ठीक बाद आईपीएल 2027 होगा। 27 फरवरी 2027 से आखिरी टेस्ट भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा। वहीं, आईपीएल में आराम देने का फैसला फ्रेंचाइजी को करना होता है और कोई क्रिकेटर आईपीएल से आराम नहीं लेता है, क्योंकि वहां से मोटी कमाई खिलाड़ियों की होती है। आईपीएल के बाद वह वनडे क्रिकेट पर फोकस कर सकते हैं, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर 2027 में वर्ल्ड कप होगा।

  • कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड

    कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड

    कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड

    रायपुर
     जिंदल स्टील लिमिटेड ने कर्मचारियों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को अपने सुरक्षा कार्यक्रम “दक्षता इंजीनियरिंग सेफ्टी” के लिए वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (वर्ल्डस्टील) का प्रतिष्ठित 2026 स्टीली अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन पीपल मिला है।

    यह पुरस्कार 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें स्टीलीए अवॉर्ड्स में दिया गया। जिंदल स्टील को चीन बाओवू, इन्फ्राबिल्ड, टाटा स्टील और यूएसिमिनास जैसी वैश्विक कंपनियों के बीच से स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति ने विजेता चुना।

    दक्षता कार्यक्रम का उद्देश्य हर कर्मचारी को उसकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार सुरक्षा के लिए तैयार करना है। इसमें केवल प्रशिक्षण में शामिल होना ही नहीं, बल्कि सुरक्षा ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और सुरक्षित व्यवहार का भी आकलन किया जाता है।

    इस कार्यक्रम के तहत जिंदल स्टील के छह स्थानों पर 27,100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया है। कंपनी ने 16,539 नए कर्मचारियों का सुरक्षा आकलन किया है और 69 प्रमाणित प्रशिक्षकों के माध्यम से 372 सुरक्षा एवं एचएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इन कार्यक्रमों में 96 प्रतिशत प्रशिक्षण पूरा किया गया।

    रायपुर मशीनरी डिवीजन में एआई आधारित कार्यस्थल निरीक्षण, डिजिटल जोखिम विश्लेषण और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां 17,752 सुरक्षा निरीक्षण किए गए और 379 उच्च जोखिम वाले कार्यों को हटाया गया या मशीनों के माध्यम से सुरक्षित बनाया गया।

    इसी अवधि में आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 15 प्रतिशत सुधार हुआ और इसे घटाकर 5.25 मिनट किया गया। साथ ही, रायपुर मशीनरी डिवीजन ने एलटीआईएफआर 0.00 हासिल किया, जो कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जिंदल स्टील की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    यह सम्मान जिंदल स्टील के उस निरंतर प्रयास की पहचान है, जिसके माध्यम से कंपनी हर कर्मचारी के लिए अधिक सुरक्षित, सक्षम और बेहतर कार्यस्थल तैयार कर रही है।

  • स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद चंडीगढ़ में अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद चंडीगढ़ में अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    चंडीगढ़.

    शहर के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। पहले सेक्टर-56, सेक्टर-33डी, सेक्टर-19सी और सेक्टर-23 के सरकारी स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिलने की सूचना सामने आई थी। अब आठ अन्य स्कूलों को भी ईमेल के जरिए बम की धमकी मिलने की जानकारी मिली है।

    इनमें निजी और सरकारी, दोनों तरह के स्कूल शामिल बताए जा रहे हैं। धमकी वाले ईमेल की सूचना के अनुसार, सेक्टर-46ए स्थित आशियाना स्कूल, मनीमाजरा का रिमिट स्कूल, सेक्टर-20डी का सरकारी स्कूल, सेक्टर-28 का सेंट सोल्जर्स स्कूल, सेक्टर-41सी का शिवालिक पब्लिक स्कूल, सेक्टर-26 का सेंट जॉन स्कूल, सेक्टर-37 का सेंट पीटरसन स्कूल और इसी सेक्टर का प्ले वे स्मार्ट स्कूल शामिल हैं। ईमेल में लिखा गया, “CHANDIGARH BoleGa KHALISTAN Zindabad Zindabad”। ईमेल में चंडीगढ़ के स्कूलों में बम धमाके करने की धमकी के साथ अलग-अलग समय का जिक्र किया गया। इसमें कुछ सरकारी कार्यालयों को भी निशाना बनाने की बात लिखी गई। इसके अलावा लिखा गया परविंदर सिंह झोटा की मौत का बदला लेने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को निशाना बनाया जाएगा। ईमेल में इस संबंध में धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

    ईमेल में CM और DGP कार्यालय का जिक्र
    ईमेल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसमें डीजीपी कार्यालय का भी जिक्र है। ईमेल में धमाकों के लिए CM को जिम्मेदार ठहराने जैसी बातें लिखी गई हैं। अंत में “KHALISTAN National ARMY” के नाम के साथ कुछ व्यक्तियों और संगठनों के नाम भी लिखे गए हैं। हालांकि, ईमेल में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम होने से यह साबित नहीं होता कि धमकी उसी ने भेजी है। पुलिस ईमेल भेजने वाले की पहचान और संदेश की सत्यता की जांच कर रही है।

  • भिलाई में साइबर अपराध पर पुलिस की कार्रवाई, म्यूल अकाउंट्स के जरिए ठगी करने वाले 7 आरोपी पकड़े गए

    भिलाई में साइबर अपराध पर पुलिस की कार्रवाई, म्यूल अकाउंट्स के जरिए ठगी करने वाले 7 आरोपी पकड़े गए

    भिलाई नगर.

    सुपेला, खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त कार्रवाई में कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन म्यूल खातों के जरिए लाखों रुपये के संदेहास्पद लेन-देन का खुलासा हुआ है।

    पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी मात्र 5 से 15 हजार रुपए के कमीशन के लिए अपने बैंक खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और उससे जुड़े सिम कार्ड अन्य व्यक्तियों को सौंप देते थे। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल आम जनता से ठगे गए पैसों को ट्रांसफर करने और पहचान छुपाने के लिए करते थे। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर दुर्ग पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की।

    सुपेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत फेडरल और उत्कर्ष बैंक से संबंधित मामलों में 02 आरोपियों शुभम चौधरी (22 वर्ष) और गुरमीत कौर को पकड़ा गया। वहीं खुर्सीपार थाना क्षेत्र में इंडियन बैंक खातों से जुड़े मामले में 5 आरोपियों तरुण नायक (40 वर्ष), निखिल नेताम (22 वर्ष), यसमीत सिंह (22 वर्ष), गौरव साहू (23 वर्ष) और नरगिस को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (2), 318 (3) और 317 (4) के तहत सुपेला और खुर्सीपार में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।

  • छत्तीसगढ़: रामभांठा को मिलेगी नए हाई स्कूल भवन की सौगात, ₹75 लाख की लागत से होगा निर्माण

    छत्तीसगढ़: रामभांठा को मिलेगी नए हाई स्कूल भवन की सौगात, ₹75 लाख की लागत से होगा निर्माण

    रायगढ़ के रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन

    शाला नायक सुमन के हाथों कराया भूमिपूजन, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया सम्मानित

    शिक्षा की ताकत से ही मेरे जीवन में आया बदलाव, छोटे से गांव से निकलकर आईएएस और वित्त मंत्री बनने तक का सफर शिक्षा से ही हुआ संभव  : ओ.पी. चौधरी

    रामभांठा स्कूल को 10वीं से 12वीं तक उन्नयन की मिली सुविधा, क्षेत्र के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में मिलेगी सहूलियत

    रायपुर, 
    छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्होंने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। नया स्कूल भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव बनेगा।

    कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शाला नायक सुमन के हाथों नवीन भवन का भूमिपूजन कराया। उन्होंने सुमन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में इतनी ऊंचाई हासिल करें कि भविष्य में आप हमसे भी बड़े विकास कार्यों का भूमिपूजन करें। वित्त मंत्री के इस आत्मीय व्यवहार से विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा।

    शिक्षा ने बदली मेरी जिंदगी, यही हर बच्चे की सफलता का आधार : वित्त मंत्री चौधरी

    विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने अपने जीवन के संघर्षों और शिक्षा के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज, प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। किसी भी देश के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    मंत्री चौधरी ने कहा कि मेरा जन्म रायगढ़ से लगभग 17 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बायंग में हुआ था। जब मैं आठ वर्ष का था, तब मेरे पिता का निधन हो गया। मेरी माताजी केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा ने मेरे जीवन को नई दिशा दी। शिक्षा की बदौलत मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचा और आज रायगढ़ के विधायक तथा छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    रामभांठा विद्यालय का 12वीं तक उन्नयन, अब बच्चों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा

    वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2025 में रामभांठा विद्यालय को हाई स्कूल से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के रूप में उन्नत किया गया। पहले यहां केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा थी, लेकिन अब बारहवीं कक्षा तक शिक्षा की व्यवस्था होने से रामभांठा और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी सहूलियत मिल रही है। उन्होंने कहा कि 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाला नया भवन विद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत करेगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगा।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    शिक्षक ही गढ़ते हैं समाज और राष्ट्र का भविष्य

    वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथों में होती है। शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं। 

    इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और सभी बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, बड़े सपने देखने तथा जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यक्रम में रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गबेल, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य नरेंद्र पटेल, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • बेसमेंट में अब नहीं चलेंगे रेस्टोरेंट और कोचिंग, MP में अग्नि सुरक्षा के नए नियम लागू

    बेसमेंट में अब नहीं चलेंगे रेस्टोरेंट और कोचिंग, MP में अग्नि सुरक्षा के नए नियम लागू

     इंदौर
     मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी
    नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी।

    पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर
    बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा।

    आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें

    1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं?

    आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा।

    निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं।

    2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी

    दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे।

    इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं।

    3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी
    अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

    4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा?
    नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा।

    5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी
    भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा
    निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है।

    7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू

    अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है।

    8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा?

    नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है।

    कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।।

    1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक
    नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे।

    2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की
    भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं।

    नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

    3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय
    नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा।

    जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा।

    4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी
    फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा।

    एजेंसियों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करने, उपकरणों की जांच व रखरखाव करने, दस्तावेज सुरक्षित रखने और काम पूरा होने का प्रमाणपत्र देने की जिम्मेदारी निभानी होगी। लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।

     

  • बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का जरिया: सीएम

    बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का जरिया: सीएम

    जब नारीशक्ति स्वस्थ-शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने मां स्कंदमाता को बताया वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी 

    बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का जरिया: सीएम

    2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं पूर्ववर्ती सरकारें: मुख्यमंत्री

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगतजननी मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप को वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी बताया। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता की आराधना हमें यह पावन संदेश देती है कि जब नारीशक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल होता है।

    2017 से पहले सिर्फ उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार
    सीएम ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि वर्ष 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारें केवल अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं। प्रदेश में माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं का अभाव और संस्थागत प्रसव की लचर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में थी। 

    डबल इंजन सरकार ने बनाया समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र
    मुख्यमंत्री ने लिखा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदला है। पहले सुविधाओं के अभाव में प्रदेश की लाखों बेटियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थीं, लेकिन विगत 9.5 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व तक समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र तैयार किया है।

    बदले परिदृश्य पर कराया ध्यानाकर्षण
    मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद बदले परिदृश्य पर भी ध्यानाकर्षण कराया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प से प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का सैचुरेशन 36 से बढ़कर 96 फीसदी से अधिक हो गया है। स्कूल ड्रॉपआउट रेट 20 से घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से श्रमिक व वंचित वर्ग की बेटियों को आधुनिक, विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा मिल रही है। कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक पढ़ाई की सुविधा के विस्तार से बेटियों को अपनी शिक्षा पूरी करने के अवसर मिल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में निवेश, उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का निवेश है।