Author: NewseDay

  • सीएम डॉ. यादव ने किशोर कुमार को किया याद, गायन और अभिनय की विरासत को बताया अमूल्य

    सीएम डॉ. यादव ने किशोर कुमार को किया याद, गायन और अभिनय की विरासत को बताया अमूल्य

    किशोर कुमार, गायन और अभिनय से हमारी स्मृतियों में रहेंगे मौजूद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अभिनेता रघुवीर यादव को मिला इस वर्ष का किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान
    गायक अभिनेता किशोर कुमार की नगरी खंडवा में शीघ्र प्रारंभ होगा एयरपोर्ट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान अलंकरण समारोह 2026 से वर्चुअली जुड़े

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खंडवा की माटी के सपूत बहुमुखी प्रतिभा के धनी गायक और अभिनेता किशोर कुमार महान कलाकार थे। उन्हें संसार से विदा हुए 39 वर्ष हो गये, लेकिन वे अपने अभिनय और गीतों से प्रशंसकों के लिए अमर हैं और आगे भी स्मृतियों में बने रहेंगे। मध्यप्रदेश सरकार, हरफनमौला किशोर कुमार की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार "किशोर कुमार अलंकरण" प्रतिवर्ष प्रतिभा संपन्न कलाकार को प्रदान करती है। वर्ष 2026 के पुरस्कार के लिये अभिनेता रघुवीर यादव का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खंडवा के विकास के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य हो रहा हैं। खंडवा में शीघ्र ही एयरपोर्ट भी बनेगा और जिले के प्रसिद्ध धार्मिक महत्व के स्थल ओंकारेश्वर तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन आसान हो जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस वर्ष राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से अलंकृत किए गए अभिनेता रघुवीर यादव को अलंकरण के लिये बधाई दी। समारोह में रघुवीर यादव को 5 लाख रुपए की सम्मान निधि, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वर्चुअली खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार अलंकरण समारोह और संगीत संध्या को संबोधित कर रहे थे।

    किशोर कुमार का अंदाज याद रहेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गायक और अभिनेता किशोर कुमार का अपनी जन्मभूमि खंडवा से विशेष लगाव था। वे सदैव कहते थे – "दूध जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जाएंगे।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनेक ऐसे गीत हैं जिन्हें किशोर कुमार ने न सिर्फ गाया बल्कि उन गीतों से जीवन दर्शन भी दिया। "रोते-रोते हंसना सीखो, हंसते-हंसते रोना…" और "जिन्‍दगी एक सफर है सुहाना…" ऐसा ही गीत हैं। फिल्म "पड़ोसन" में किशोर कुमार का अलग अंदाज दिखाई दिया, जो दर्शकों को सदैव याद रहेगा। फिल्म "चलती का नाम गाड़ी" उनके फिल्मी कैरियर की एक विशेष फिल्म रही, जिसमें उनके भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार ने भी अभिनय किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किशोर कुमार को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

    विलक्षण है रघुवीर यादव की प्रतिभा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश निवासी रघुवीर यादव विलक्षण प्रतिभा रखते हैं। वे वेब सीरिज 'पंचायत' में प्रधान की भूमिका से चर्चित हुए लेकिन इसके पहले पीपली लाइव के 'बुधिया', फिल्म लगान के 'भूरा' और उसके पहले "मुंगेरीलाल के हसीन सपने" में 'मुंगेरीलाल' का किरदार निभाकर उन्होंने नाम कमाया है। उनका ठेठ ग्रामीण अंदाज माटी की सौन्धी खुशबू का अहसास करवाता है। अभिनेता रघुवीर यादव ने मध्यप्रदेश पर्यटन के लिए लोकप्रिय जिंगल "एमपी अजब है सबसे गजब है" के लिए भी आवाज दी हैं। उन्हें किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत कर मध्यप्रदेश सरकार स्वयं गौरवान्वित हो रही है।

    किशोर कुमार राष्ट्रीय अलंकरण समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, संस्कृति राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, विधायक नारायण सिंह पटेल, विधायक श्रीमती छाया मोरे, महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, पूर्व विधायक देवेन्द्र वर्मा और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।h

  • कच्चे तेल में फिर उछाल की आशंका, भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? SBI रिसर्च की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

    कच्चे तेल में फिर उछाल की आशंका, भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? SBI रिसर्च की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

     नई दिल्ली

    भारत के लिए बड़ी चेतावनी (Big Warning For India) आई है और ये वेस्ट एशिया से कनेक्टेड है. इस बड़े संकट को लेकर एसबीआई रिसर्च की ओर से अलर्ट किया गया है. SBI की नई रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि कच्चा तेल फिर से भारत का खेल बिगाड़ सकता है और महज आने वाले 10 दिन में इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में (Crude Oil Price) 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये भारत के लिए परेशानी का सबब होगा, क्योंकि इससे देश की आयतित वस्तुओं की कीमत 130 डॉलर तक जा सकती है। 

    कच्चा तेल… बिगाड़ेगा खेल
    एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम और ग्लोबल सप्लाई की बहाली के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों के लिए तीन संभावित चरणों का फ्रेमवर्क पेश किया गया है. SBI Research के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में निकट भविष्य में तेज गिरावट आने की संभावना बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम (Brent Crude Price) अगले 10 कारोबारी दिनों में संभावित रूप से 110 डॉलर प्रति बैरल तक उछल सकता है. अगर ऐसा होता है कि फिर भारत की कच्चे तेल की बास्केट 130 डॉलर तक पहुंच सकती है। 

    रुपया को स्थिर करने में परेशानी
    सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि कि भू-राजनीतिक टेंशन और आपूर्ति-पक्ष के बढ़ते जोखिमों के कारण, ब्रेंट की कीमत पूर्वानुमान से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल होती है, तो भारतीय बास्केट की कीमत 10 व्यापारिक दिनों की पूर्वानुमान अवधि में लगभग 127 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल होगी। 

    एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये बड़े जोखिम लगातार तेल की कीमतों पर लगातार दबाव डालने का काम रहे हैं, जिससे भारतीय रुपया को स्थिर करने के प्रयासों में जटिलता पेश आ रही है. उन्होंने कहा है कि, 'डेटेड ब्रेंट और इंडियन बास्केट दोनों के लिए रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क का पूर्वानुमान बढ़ती प्रवृत्ति दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की कीमतों में तेज गिरावट की संभावना नहीं है और है भी तो सिर्फ लंबी अवधि में ही संभव है। 

    तेल की कीमतों का Rupee कनेक्शन
    कच्चे तेल की कीमतों का यह दृष्टिकोण ऐसे समय में आया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने इंडियन करेंसी रुपया को संभालने के लिए तमाम उपाय लागू किए हैं. इनका असर भी दिखा है और Indian Rupee अमेरिकी डॉलर की तुलना में 1% तक ऊपर नजर आया है। 

    उपायों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर-आपूर्ति विंडो शामिल है, जिसे खुले विदेशी मुद्रा बाजार से लगभग 10-12 अरब डॉलर की मंथली Dollar डिमांड को स्थानांतरित करने के लिए डिजाइन किया गया है. करेंसी चेंज से जुड़े पिछले हस्तक्षेपों के विपरीत, नई व्यवस्था में भारत के फॉरेक्स रिजर्व से सीधे डॉलर की बिक्री शामिल है। 

    हालांकि, रिसर्च रिपोर्ट ने तरलता की कठिन परिस्थितियों पर भी फोकस किया है और इसमें बैंकों के न्यूनतम डेली कैश रिजर्व रेशियो को बनाए रखने की आवश्यकता को 90% से बढ़ाकर 99% किया गया है, जबकि सरकारी प्रतिभूतियों की 25,000 करोड़ रुपये की नियोजित बिक्री को शामिल है. अनुमान लगाया गया है कि RBI आरबीआई के इन उपायों से समय के साथ बैंकिंग सिस्टम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली जा सकती है. ऐसे में सिर्फ आरबीआई का हस्तक्षेप रुपये को सीमित समर्थन ही दे सकता है। 

    दबाव बहुत, लेकिन भारत में है दम 
    एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि 3 नवंबर से पहले ब्रेंट क्रूड प्राइस काफी हद तक सीमित दायरे में रहेगा, जिनमें मामूली गिरावट की संभावना है. यानी राजनयिक प्रयासों और इमरजेंसी ऑयल रिजर्व जारी करने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसमें समय लगेगा। 

    एक्सपर्ट्स ने इन तमाम दबावों के बावजूद कहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आकस्मिकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, हालांकि FY2027 में भुगतान संतुलन अधिशेष घटकर 55-60 अरब डॉलर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि,  'संक्षेप में कहें तो, भारत का फॉरेक्स रिजर्व सबसे कठिन परिस्थितियों में भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त से अधिक है। 

  • Indian Navy को मिलेगी नई मजबूती, ‘समर्थक’ के शामिल होने से समुद्री अभियान होंगे और मजबूत

    Indian Navy को मिलेगी नई मजबूती, ‘समर्थक’ के शामिल होने से समुद्री अभियान होंगे और मजबूत

    मुंबई 

    भारत में बना स्वदेशी जहाज 'समर्थक' 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना में शामिल होगा. कर्नाटक के कारवार स्थित नौसेना बेस पर इसे शामिल किया जाएगा. लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड ने केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत इसे बनाया है. यह नौसेना में शामिल होने वाले चार बहुउद्देशीय जहाजों में पहला है। 

    'समर्थक' को समुद्र में निगरानी रखने और गश्त लगाने के लिए बनाया गया है. लेकिन यह सिर्फ यही काम नहीं करेगा. आपदा के समय यह राहत और बचाव अभियान में मदद करेगा. साथ ही, बिना ड्राइवर के चलने वाले ड्रोन और दूसरे उपकरणों को समुद्र में तैनात करने के काम भी आएगा. जहाज का मोटो है 'विजयार्थम् एकनिष्ठता', जिसका अर्थ है 'विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है' .

    समुद्र में निगरानी से लेकर गश्त तक करेगा

    'समर्थक' का मुख्य काम समुद्र में निगरानी रखना और गश्त लगाना होगा. इसके अलावा, यह समुद्र में छोटे स्तर के सुरक्षा अभियानों में भी काम आएगा. हथियारों और दूसरे उपकरणों की जांच के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. यह जहाज बिना ड्राइवर के चलने वाले ड्रोन और दूसरे उपकरणों को समुद्र में ले जाने के साथ उन्हें वहां तैनात करने में भी मदद करेगा. यानी इन उपकरणों को समुद्र में पहुंचाने के लिए 'समर्थक' एक बड़े जहाज की तरह काम करेगा। 

    आपदा के समय भी आएगा काम
    समुद्र में किसी आपदा के दौरान राहत और बचाव के काम में भी 'समर्थक' की मदद ली जा सकेगी. जरूरत पड़ने पर इसे सीमित सुविधाओं वाले अस्पताल जहाज में बदला जा सकता है. इसके अलावा, समुद्र में फंसे या क्षतिग्रस्त जहाजों को निकालने से जुड़े अभियानों में भी यह काम आ सकता है। 

    'समर्थक' में स्वदेशी सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं. इन्हें समुद्र की मुश्किल परिस्थितियों में काम करने के हिसाब से तैयार किया गया है. जहाज को नौसेना के भविष्य के बेड़े में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया है। 

    प्रतीक चिह्न में दिखेगा हाथी
    जहाज के प्रतीक चिह्न में समुद्र की लहरों से निकलता हुआ भारतीय हाथी दिखाया गया है. यह ताकत, समझदारी और फुर्ती का प्रतीक है. जहाज का मोटो 'विजयार्थम् एकनिष्ठता' भी इसके लक्ष्य को बताता है कि विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है। 

  • GST Council के बड़े फैसले से मेडिकल उपकरण कंपनियों को राहत की उम्मीद, AiMeD बोला- लंबे समय से थी मांग

    GST Council के बड़े फैसले से मेडिकल उपकरण कंपनियों को राहत की उम्मीद, AiMeD बोला- लंबे समय से थी मांग

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापार को आसान बनाने, टैक्स रिफंड में तेजी लाने और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई बड़ी सिफारिशें की गई थीं. खासकर मेडिकल और फार्मा सेक्टर के लिए इस बैठक में बड़े फैसले लिए गए थे। 

    मेडिकल इक्विपमेंट और फार्मा कंपनियों (जैसे AiMeD) के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि काउंसिल ने कैपिटल गुड्स (जैसे बड़ी मशीनरी/प्लांट) और इनपुट सर्विसेज पर फंसी हुई इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रिफंड को मंजूरी दे दी है. पहले मशीनरी या बाहरी सेवाओं पर दिया गया GST ब्लॉक हो जाता था. अब वह रिफंड के रूप में वापस मिल सकेगा, जिससे कंपनियों का कैश फ्लो मजबूत होगा और उपकरण निर्माताओं की लागत घटेगी। 

    नया नियम लागू होने के बाद इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट के तहत दावों पर रिस्क मूल्यांकन के आधार पर 90% प्रोविजनल रिफंड बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक रूप से स्वीकृत किया जाएगा। 

    मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के संगठन 'एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री' (AiMeD) ने GST काउंसिल के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है. सरकार ने यह सिफारिश की है कि अगर किसी सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (यानी कच्चे माल पर टैक्स ज्यादा और तैयार माल पर कम) की समस्या है, तो कंपनियों को पूंजीगत सामान (मशीनों) और बाहरी सेवाओं पर दिए गए टैक्स का रिफंड मिलना चाहिए। 

    पुराने नियम से क्या दिक्कत थी?
    दरअसल, यह फैसला उद्योग जगत की एक बहुत पुरानी और बड़ी मांग को पूरा करता है. इससे भारत में फैक्ट्रियां लगाने और बिजनेस करने का माहौल बहुत आसान और बेहतर हो जाएगा. पहले के नियमों के तहत जब कंपनियां कोई नया प्लांट लगाने के लिए बड़ी मशीनें खरीदती थीं या बाहर से प्रोफेशनल सेवाएं (जैसे कंसल्टेंसी, मार्केटिंग या सुरक्षा वगैरह) लेती थीं तो उस पर जो GST चुकाया जाता था, वह फंस जाता था। 

    मान लीजिए कोई कंपनी नया प्लांट लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करती है, तो उस पर प्लांट और मशीनरी के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये का जीएसटी देना पड़ता था. पहले इस 18 करोड़ रुपये के टैक्स के इस्तेमाल या रिफंड का कोई साफ रास्ता नहीं होता था. यह पैसा पूरी तरह ब्लॉक हो जाता था, जिससे प्रोजेक्ट की लागत बहुत बढ़ जाती थी और भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में दूसरी कंपनियों से पिछड़ने लगती थीं। 

    उद्योग जगत ने किया फैसले का स्वागत 
    इस बारे में AiMeD के फोरम कोऑर्डिनेटर और हिंदुस्तान सिरिंज एंड मेडिकल डिवाइसेज लिमिटेड (HMD) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव नाथ ने कहा, 'हम सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने पिछले कई सालों से उठाई जा रही हमारी बातों और सुझावों पर सकारात्मक ध्यान दिया है. यह सुधार हमारे टैक्स सिस्टम की एक बड़ी गलती को ठीक करता है. पहले घरेलू निर्माताओं को मशीनें लगाने और जरूरी बिजनेस सेवाओं पर भारी टैक्स का बोझ उठाना पड़ता था। 

    राजीव नाथ की मानें तो अब सरकार ने इस फंसे हुए टैक्स को वापस पाने का रास्ता खोल दिया है और कंपनियों के पास कैश फ्लो बेहतर होगा. इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया भर में मुकाबला करने लायक बनाने और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने में बहुत मदद मिलेगी। 

    इससे क्या-क्या फायदे होंगे?
    AiMeD को पूरा भरोसा है कि इस नए कदम से देश को कई बड़े लाभ मिलेंगे. कंपनियों के पास पैसा सुरक्षित रहने से वे देश में और अधिक नए प्लांट लगाने के लिए आगे आएंगी. उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश में ही मेडिकल उपकरणों का उत्पादन और मजबूत होगा. प्रधानमंत्री का 'मेक इन इंडिया' का सपना और मजबूत होगा तथा भारत दुनिया का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकेगा. अब पूरी इंडस्ट्री और AiMeD इस संबंध में सरकार की तरफ से आधिकारिक नोटिफिकेशन आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 

     एक्सपायरी दवाओं के राइट-ऑफ पर ITC की छूट
    इसके अलावा GST काउंसिल की तरह से फॉर्मा सेक्टर को एक और बड़ी राहत दी गई है, जिन दवाओं या स्वास्थ्य उत्पादों की एक्सपायरी खत्म हो जाती है और जिन्हें कानूनन नष्ट करना पड़ता है, उनके राइट-ऑफ पर ITC लाभ की स्पष्टता से फार्मा सेक्टर को फायदा मिलेगा। 

  • भोपाल के GMC में रोबोटिक सर्जरी की तैयारी तेज, आधुनिक तकनीक से मरीजों को मिलेगा इलाज

    भोपाल के GMC में रोबोटिक सर्जरी की तैयारी तेज, आधुनिक तकनीक से मरीजों को मिलेगा इलाज

    भोपाल
     गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में रोबोटिक सर्जरी को लेकर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य डॉक्टरों और पीजी विद्यार्थियों को आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीक की जानकारी देना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने रोबोटिक सर्जरी की कार्यप्रणाली और इसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया। साथ ही, आने वाले समय में हमीदिया अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने की उम्मीद जताई गई।

    डीन डॉ. कविता एन. सिंह के नेतृत्व में हुआ आयोजन
    गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित इस सत्र का नेतृत्व डीन डॉ. कविता एन. सिंह ने किया। इसमें सर्जरी और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के पीजी विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने उन्हें रोबोटिक सर्जरी की तकनीक, काम करने के तरीके और प्रशिक्षण की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

    डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने समझी नई तकनीक
    सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने रोबोटिक सर्जरी से जुड़ी तकनीकी बारीकियों को समझा। डॉ. अरविंद राय, डॉ. रामोले, डॉ. धीरज श्रीवास्तव, डॉ. सोना सोनी, डॉ. जूही और डॉ. पूर्वा सहित कई पीजी विद्यार्थियों ने इस तकनीक में रुचि दिखाई।

    क्या है रोबोटिक सर्जरी?
    रोबोटिक सर्जरी आधुनिक शल्य चिकित्सा की एक तकनीक है। इसमें विशेष उपकरणों और रोबोटिक प्रणाली की मदद से डॉक्टर ऑपरेशन करते हैं। इस तकनीक के लिए चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को सर्जरी के नए तरीकों से परिचित कराना और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए तैयार करना है।

    हमीदिया अस्पताल में सुविधा शुरू होने की उम्मीद
    आयोजक दल ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय और हमीदिया अस्पताल के सहयोग की सराहना की। साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले समय में संस्थान में रोबोटिक सर्जरी प्रणाली उपलब्ध हो सकेगी। हालांकि, इसकी शुरुआत की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

    चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
    रोबोटिक सर्जरी प्रणाली उपलब्ध होने पर पीजी विद्यार्थियों और डॉक्टरों को आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीक सीखने के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे संस्थान में प्रशिक्षण और उन्नत सर्जरी सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस पहल को जीएमसी में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की जानकारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • युवा उत्सव में वाद-विवाद एवं रंगोली प्रतियोगिता हुई सम्पन्न

    युवा उत्सव में वाद-विवाद एवं रंगोली प्रतियोगिता हुई सम्पन्न

    युवा उत्सव में वाद-विवाद एवं रंगोली प्रतियोगिता हुई सम्पन्न    

     (माधव महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नवरात्र में आकर्षक रंगोली बनाई )

    ग्वालियर
    माधव महाविद्यालय में अंतर कक्षा युवा उत्सव के अंतर्गत सोमवार को रंगोली एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। नई शिक्षा नीति 2020:कागजों में क्रांति या ज़मीनी बदलाव विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में पक्ष में आशु गुर्जर,गौरव राजौरिया, आदित्य जाट तथा अनुराग भारद्वाज ने नई शिक्षा नीति 2020 के जमीनी बदलाव पर तर्कपूर्ण विचार प्रस्तुत किये। विपक्ष में शुभांगी शर्मा,आयुषी खरे,गोविंद भदौरिया, महेंद्र शर्मा,राज गुप्ता,दर्शिल श्रीवास्तव, तनुष्का दीक्षित ने नई शिक्षा नीति 2020 की खामियों को  तर्कसंगत उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में  पक्ष में आदित्य जाट को तथा विपक्ष में दर्शील श्रीवास्तव को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में डॉ.नीलेन्द्र सिंह तोमर तथा डॉ.संतोष शर्मा उपस्थित रहे।
    रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने नवरात्रि को,भारत की विकसित होती छवि को,योग के महत्व को दर्शाने के साथ ही सुंदर कल्पनाशीलता को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। प्रतियोगिता में महक धाकड़ ने प्रथम,निहासा जादौन ने द्वितीय,आयुषी खरे ने तृतीय तथा अनुराग भारद्वाज ने सांत्वना स्थान प्राप्त किया। सुमित प्रजापति की प्रस्तुति प्रशंसनीय रही। प्रतियोगिता का निर्णय डॉ. संजय पांडे,डॉ.सरिता दीक्षित ने किया।
    आयोजन में समिति के सभी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • CJI के मुहावरे ने मचाई धूम, MJP के 3 लाख फॉलोअर्स

    CJI के मुहावरे ने मचाई धूम, MJP के 3 लाख फॉलोअर्स

    नई दिल्ली
    सीजेआई सूर्यकांत की मक्खी मारने के लिए हथौड़ा इस्तेमाल नहीं कर सकते वाली टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर माखी जनता पार्टी नाम का एक नया मजाकिया संगठन सामने आ गया है। सिर्फ 72 घंटों में इसके इंस्टाग्राम अकाउंट को 40 लाख से ज्यादा व्यू और 3.3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स मिल चुके हैं।

    माखी जनता पार्टी
    कॉकरोच के बाद अब मक्खी की एंट्री हो गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मुहावरा कहा- 'मक्खी मारने के लिए हथौड़ा इस्तेमाल नहीं कर सकते' और सोशल मीडिया पर माखी जनता पार्टी’ (MJP) बन गई है। अब इस संगठन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ तालमेल बिठाने और एकजुटता दिखाने की कोशिश शुरू कर दी है। सीजेपी भी पहले एक टिप्पणी पर मजाक के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में वह युवाओं के बीच विरोध और जवाबदेही की मांग का बड़ा मंच बन गई।

    एमजेपी ने मंगलवार को दावा किया कि सिर्फ 72 घंटों के अंदर उसके इंस्टाग्राम अकाउंट को 40 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स मिल चुके हैं। संगठन के पेज पर आर्यन नाम के एक छात्र को इसका संस्थापक बताया गया है। अकाउंट की एक इंस्टाग्राम स्टोरी में यह भी लिखा गया कि संगठन अभी प्रवक्ता (स्पोक्सपर्सन) की तलाश कर रहा है। पेज की जानकारी के मुताबिक, यह अकाउंट जून 2021 में इंस्टाग्राम पर बना था और मौजूदा हैंडल 'makhijantaparty.ig' अपनाने से पहले उसने आठ बार अपना यूजरनेम बदला था।
     
    सीजेआई की 'मक्खी मारने के लिए हथौड़ा' वाली टिप्पणी कैसे बनी वजह
    एमजेपी के एक पोस्ट से साफ पता चलता है कि इसका नाम सीधे सीजेआई सूर्यकांत की हालिया टिप्पणी से लिया गया है। यह टिप्पणी 9 अक्टूबर को एक सुनवाई के दौरान आई थी। उस दिन सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर को होने वाले सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद करने के पीछे की वजह पर सवाल उठा रहा था।

    कोर्ट की बेंच ने कहा कि सुरक्षा चिंताओं के आधार पर सार्वजनिक परिवहन को नियंत्रित या रेगुलेट करना सही हो सकता है, लेकिन पूरे सिस्टम को ही रोक देना बिल्कुल अलग बात है। पीठ ने साफ कहा कि कोई भी नियमन कर सकता है लेकिन हर चीज पर रोक लगाना पूरी तरह से अलग बात है… आप हर चीज को नहीं रोक सकते। जजों ने अधिकारियों को याद दिलाया कि वे मक्खी मारने के लिए हथौड़ा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

    इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए एमजेपी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि जब सीजेआई ने ही कहा-‘मक्खी मारने के लिए हथौड़ा इस्तेमाल नहीं कर सकते!’ अब तो मक्खी भी बोलेगी हम भी किसी से कम नहीं। हिंदी में इसका मतलब था कि जब सीजेआई खुद मान रहे हैं कि छोटी बात के लिए बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए, तो अब मक्खी भी अपनी आवाज उठाएगी।

    सीजेपी और नेहा बोरा के साथ
    एमजेपी ने न सिर्फ सीजेपी बल्कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की सदस्य नेहा बोरा के साथ भी एकजुटता जताई है। नेहा बोरा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध कर रही हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक बयान में एमजेपी ने कहा कि वह बोरा की 'हिम्मत और पक्के इरादे' का समर्थन करता है। संगठन ने लिखा कि सवाल उठाना और जवाबदेही की मांग करना लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।

  • TVS Radeon Update: कम कीमत में 69 KM माइलेज वाली बाइक, तीन वेरिएंट और नए ग्राफिक्स के साथ हुई पेश

    TVS Radeon Update: कम कीमत में 69 KM माइलेज वाली बाइक, तीन वेरिएंट और नए ग्राफिक्स के साथ हुई पेश

    नई दिल्ली
    टीवीएस ने अपनी पॉपुलर कम्यूटर मोटरसाइकिल को अपडेट कर दिया है. हम बात कर रहे हैं टीवीएस रेडियॉन (TVS Radeon) के 2026 एडिशन की. ये बाइक ऑल-एलईडी लाइटिंग, रिवाइज्ड ग्राफिक्स और नए कलर ऑप्शन के साथ आती है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को ठीक त्योहारी सीजन की शुरुआत में लॉन्च किया है। 

    त्योहारों के वक्त गाड़ियों की बिक्री बढ़ती है. इस मौके का फायदा उठाने के लिए कंपनी ने टीवीएस रेडियॉन का अपडेटेड वर्जन मैदान में उतारा है. आइए जानते हैं नई रेडियॉन में हमें क्या कुछ खास देखने को मिलेगा। 
     
    कितनी है कीमत? 
    नई टीवीएस रेडियॉन (TVS Radeon) की कीमत 67,100 रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है और 73,100 रुपये एक्स-शोरूम तक जाती है. ये बाइक तीन वेरिएंट्स- बेस, डिजी-ड्रम और डिजी-डिस्क में आएगी. बेस वेरिएंट की कीमत पहले के मुकाबले 1250 रुपये ज्यादा है. वहीं टॉप वेरिएंट यानी डिजी-डिस्क पहले के मुकाबले सस्ता है। 

    सभी वेरिएंट्स की बात करें, तो बेस वेरिएंट की कीमत 67,100 रुपये एक्स शोरूम है. वहीं डिजी-ड्रम की कीमत 70,100 रुपये और टॉप स्पेक्स डिजी-डिस्क की कीमत 73,100 रुपये एक्स शोरूम है। 

    क्या है बाइक में क्या? 
    अपडेट्स की बात करें, तो नई टीवीएस रेडियॉन में एलईडी लाइटिंग सभी वेरिएंट्स में मिलेगी. इसके अलावा नई मोटरसाइकिल में नया हेडलैम्प दिया गया है, जो सिग्नेचर डीआरएल के साथ आता है. बाइक में एलईडी टेललैम्प और एलईडी टर्न इंडीकेटर मिलता है. ये सभी फीचर्स स्टैंडर्ड हैं

    डिजी-डिस्क में फ्रंट डिस्क ब्रेक मिलता है, जबकि अन्य दोनों वेरिएंट्स में ड्रम ब्रेक दिए जाते हैं. मोटरसाइकिल में अपडेटेड ग्राफिक्स मिलेंगे. बेस वेरिएंट में ब्लैक और ब्लू के अलावा ब्लैक और रेड में आता है. वहीं डिजी ड्रम में ब्लैक के साथ ऑरेंज और रेड के साथ ब्लैक कलर का विकल्प मिलेगा। 

    टॉप वेरिएंट डिजी डिस्क में ब्लैक के साथ ऑरेंज और रेड के साथ ब्लैक डीटी मिलता है. इसके अलावा बाइक के फीचर्स में को बदलाव नहीं किया गया है. बाइक में 109.7 सीसी का एयर और ऑयल कूल्ड इंजन आता है, जो 8 एचपी की पावर और 8.7 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  

    बाइक में 10 लीटर कैपेसिटी वाला फ्यूल टैंक मिलता है. टीवीएस रेडियॉन का क्लेम्ड माइलेज 69.3 किलोमीटर प्रति लीटर का है. रेडियॉन में यूएसबी चार्जिंग और कलर डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। 

  • WhatsApp यूजर्स की मौज! बर्थडे विश से जरूरी मैसेज तक होंगे शेड्यूल, जानें कब मिलेगा नया फीचर

    WhatsApp यूजर्स की मौज! बर्थडे विश से जरूरी मैसेज तक होंगे शेड्यूल, जानें कब मिलेगा नया फीचर

    मुंबई 

    WhatsApp पर किसी को जन्मदिन की बधाई देना भूल जाते हैं या फिर जरूरी मैसेज भेजने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ता है, तो जल्द ही आपकी यह परेशानी दूर हो सकती है. WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है कि, जिसकी मदद से यूजर्स पहले से मैसेज लिखकर उसका समय तय कर सकेंगे. इसके बाद मैसेज अपने आप तय टाइम पर भेज दिया जागा. खास खास बात यह है कि इस फीचर से सिर्फ टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि फोटो और वीडियो भी शेड्यूल किए जा सकेंगे. यानी मैसेज भेजने के लिए उस वक्त फोन हाथ में रखने या ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं होगी। 

    कुछ Android यूजर्स के लिए शुरू हुई टेस्टिंग
    रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp फिलहाल इस फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ कर रहा है. WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सुविधा WhatsApp के Android बीटा वर्जन 2.26.40.7 इस्तेमाल करने वाले कुछ यूजर्स को मिल रही है. आने वाले हफ्तों में इसे और यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक सभी यूजर्स के लिए इसके रोलआउट की कोई तय तारीख नहीं बताई है। 

    कैसे काम करेगा मैसेज शेड्यूल करने वाला फीचर?
    इस फीचर का इस्तेमला करना काफी आसान हो सकता है. यूजर को सबसे पहले WhatsApp की किसी चैट में जाकर मैसेज लिखना होगा. इसके बाद सेंड बटन को दबाकर रखने पर, अगर उसके अकाउंट में यह सुविधा उपलब्ध है, तो मैसेज भेजने की तारीख और समय चुनने का ऑप्शन दिखाई दे सकता है. टाइम फिक्स करने के बाद मैसेज शेड्यूल हो जाएगा और चुने गए समय पर अपने आप भेज दिया जाएगा। 

    टेक्स्ट के साथ फोटो और वीडियो भी कर सकेंगे शेड्यूल
    इस फीचर में यूजर्स को सिर्फ टेक्स्ट मैसेज शेड्यूल करने की सुविधा नहीं मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक, फोटो और वीडियो को भी तय समय पर भेजने के लिए शेड्यूल किया जा सकेगा. हालांकि, एक बार में केवल एक फोटो या वीडियो शेड्यूल करने का विकल्प मिल सकता है. फोटो भेजने से पहले यूजर्स उसमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत के हिसाब से कैप्शन भी जोड़ सकेंगे। 

    10 मिनट से लेकर दो हफ्ते तक का समय चुनने का विकल्प
    रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स मैसेज को कम से कम 10 मिनट बाद और ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ते तक के लिए शेड्यूल कर सकेंगे. इसका फायदा यह होगा कि जन्मदिन, सालगिरह या किसी जरूरी काम से जुड़ा मैसेज पहले ही तैयार करके रखा जा सकेगा. तय समय आने पर मैसेज अपने आप चला जाएगा. इसके लिए ऐप को खुला रखना या फोन को ऑनलाइन रखना भी जरूरी नहीं होगा। 

    प्राइवेट और ग्रुप चैट, दोनों में करेगा काम
    यह फीचर सिर्फ किसी एक व्यक्ति को मैसेज भेजने तक सीमित नहीं रह सकता. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे प्राइवेट चैट से साथ ग्रुप चैट में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि ग्रुप मैसेज को लेकर एक खास बात सामने आई है. शेड्यूल करते समय ग्रुप में जो सदस्य मौजूद होंगे उन्हें ही वह मैसेज मिल सकता है. बाद में ग्रुप में जुड़ने वाले सदस्यों को पहले से शेड्यूल किया गया मैसेज मिलने की उम्मीद नहीं है। 

    भेजने से पहले शेड्यूल मैसेज डिलीट कर सकेंगे
    अगर आपने कोई मैसेज शेडयूल कर दिया है, लेकिन बाद में उसे भेजने का इरादा बदल जाता है तो उसे डिलीट करने का ऑप्शन भी मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स चैट की जानकारी वाले सेक्शन में जाकर शेड्यूल किए गए मैसेज देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटा सकेंगे. अगर मैसेज भेजे जाने से पहले ही डिलीट कर दिया जाता है, तो सामने वाले व्यक्ति को इसकी सूचना मिलने की उम्मीद नहीं है। 

    आम यूजर्स को कब मिलेगा यह फीचर?
    फिलहाल WhatsApp के शेड्यूल्ड मैसेज फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, WhatsApp ने अभी तक इसके ग्लोबल रोलआउट की आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है. ऐसे में आम यूजर्स को इस फीचर के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। 

  • खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    योगी सरकार का खेती को लाभकारी बनाने पर जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी

    12 से 18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान

    उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों के लिए 15 अक्टूबर से विशेष अभियान

    चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से होगा निस्तारण

    लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी, अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश

    लखनऊ

    योगी सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे कृषकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, जबकि वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी के मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। इसी क्रम में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना, सादाबाद व बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी।

    इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने, गुटबंदी और दलगत विवाद होने जैसे कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आ रही थीं। विशेष प्रयासों के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन्हें चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया।

    आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
    लंबे समय से लंबित मामलों को निस्तारित करते हुए आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई। इसके अलावा बस्ती के औराडीहा व प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई।

    उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के लिए विशेष अभियान
    चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

    अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है। अभियान की अवधि के बाद भी तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

    तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता पर निस्तारण
    चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

    इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।