Author: NewseDay

  • राहुल गांधी को पीयूष गोयल का जवाब, चुनाव आयुक्तों को मिले पदों और सम्मान का किया जिक्र

    राहुल गांधी को पीयूष गोयल का जवाब, चुनाव आयुक्तों को मिले पदों और सम्मान का किया जिक्र

     नई दिल्ली
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश भर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस पर निशाना साधा है. गोयल ने कांग्रेस पर बचकाना व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। 

    पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस का बचकाना व्यवहार पूरे देश ने देखा है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने पहले मुख्य चुनाव आयु्क्त को कैबिनेट में शामिल किया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद्म भूषण, पद्म विभूषण से सम्मानित किया और राज्यपाल भी बनाया। 

    ये सौदेबाजी का प्रतीक लगता है: पीयूष गोयल
    उन्होंने कहा, 'एक प्रकार से एम.एस. गिल जी का तो कभी सरकार में हैं, कभी इलेक्शन कमिश्नर बनते हैं, कभी पार्लियामेंट में पहुंच जाते हैं, कभी यूनियन कैबिनेट में जाते हैं. ये सौदेबाजी का ही प्रतीक लगता है। 

    केंद्रीय मंत्री ने टी.एन. शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका CEC का कार्यकाल 31 दिसंबर 1985 को खत्म हो गया था. लेकिन दो महीने के अंदर ही कांग्रेस ने उन्हें राज्यपाल बना दिया। केंद्रीय मंत्री ने इन उदाहरणों के जरिए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए हैं. पीयूष गोयल ने सवाल उठाया कि क्या यह रिश्वत देने जैसा नहीं है?

    इस तरह का पक्षपात शायद ही कहीं हुआ हो: पीयूष गोयल
    पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है लेकिन अपने पुराने फैसलों और ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज करती है. कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए गोयल ने कहा कि उनके शासनकाल में एक मुख्य चुनाव आयुक्त को पार्टी के टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, जबकि एक अन्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई. इसके अलावा दो मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल भी बनाया गया। 

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक बार मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने अधीन काम करने वाले चुनाव आयुक्त पर कांग्रेस के एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया था, लेकिन उसे हटाने से इनकार कर दिया गया।  

    पीयूष गोयल ने कहा कि इस तरह का पक्षपात शायद ही किसी दूसरी सरकार में देखने को मिला होगा.  पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयुक्त के ऑफिस को कितने निचले स्तर पर गिरा दिया और कैसे चुनाव आयुक्तों का गलत इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा, 'राजनीतिक रिवार्ड देकर, कांग्रेस के लिए उनकी जो सेवाएं थीं, उसको उन्होंने रिवार्ड किया। 

    पीयूष गोयल ने आगे सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने 2005 का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा, 'उस समय की सरकार कह रही थी कि सोनिया गांधी ने नवीन चावला को इलेक्शन कमिश्नर बनाया. सोनिया गांधी कैसे बना सकती हैं? वे तो सरकार में थीं नहीं. उस समय तो व्यवस्था ये थी कि प्रधानमंत्री और सरकार इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्त करती थी. तो सोनिया गांधी जी कब से तय करने लगीं कि किसको क्या पद देना चाहिए? कौन चला रहा था सरकार तब?'

    कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड CEC तक सीमित नहीं: पीयूष गोयल
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आगे कहा कि कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड सिर्फ चुनाव आयुक्त तक सीमित नहीं है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'टीकाराम मीणा केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. एक वर्ष के बाद उन्हें कांग्रेस के राजस्थान के मेनिफेस्टो टीम में ले लिया, कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना दिया। 

  • भारत-अमेरिका के बीच सैन्य तकनीक का सीक्रेट खेल, Su-30MKI के N011M बार्स रडार तक सीमित रखी पहुंच

    भारत-अमेरिका के बीच सैन्य तकनीक का सीक्रेट खेल, Su-30MKI के N011M बार्स रडार तक सीमित रखी पहुंच

     नई दिल्ली

    तरंग शक्ति अभ्यास के दौरान अमेरिकी वायु सेना ने भारतीय अधिकारियों को F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान के कॉकपिट के पास भी नहीं जाने दिया. वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि अमेरिकी लोग विमान के करीब भी नहीं आने देते, फिर बिक्री की बात कैसे करते हैं. उन्होंने बताया कि कॉकपिट नहीं दिखाया गया, हालांकि करीबी फॉर्मेशन में उड़ान भरने की अनुमति दी गई। अमेरिकी पैसिफिक एयर फोर्सेज कमांडर जनरल केविन श्नाइडर ने कहा कि F-35 जैसे प्रोग्राम की सुरक्षा गाइडलाइन तय करती है कि क्या और कितना शेयर किया जा सकता है. यह घटना कोई नई नहीं है। 

    2008 में जब भारतीय वायु सेना ने अपने सबसे आधुनिक Su-30 MKI विमानों को अमेरिका के रेड फ्लैग अभ्यास में भेजा था, तब भारत ने भी ठीक ऐसी ही सावधानी बरती थी. दोनों घटनाएं साफ बताती हैं कि वायु सेनाएं सेंसिटिव तकनीक को कितनी गंभीरता से बचाती हैं। 

    2008 के रेड फ्लैग में Su-30 MKI की सुरक्षा व्यवस्था
    2008 में भारत ने नेवादा स्थित नेलिस एयर फोर्स बेस पर रेड फ्लैग अभ्यास के लिए अपने Su-30 MKI फ्लैंकर भेजे. ये विमान उस समय भारतीय वायु सेना के सबसे एडवांस फाइटर जेट थे. इनमें रूसी NIIP N011M बार्स पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड अरे यानी PESA रडार लगा था। 

    रक्षा मंत्रालय ने पायलटों को निर्देश दिया कि रडार को पूरा ऑपरेशनल मोड में न चलाएं. भारतीय वायु सेना ने उस समय स्पष्ट कहा था कि रडार की फ्रिक्वेंसी टॉप सीक्रेट हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल करके विमान के महत्वपूर्ण कार्यों को जाम किया जा सकता है. अमेरिका से अच्छे संबंध होने के बावजूद भविष्य को ध्यान में रखते हुए सावधानी जरूरी है। 

    इसलिए बार्स रडार को सिर्फ सीमित ट्रेनिंग मोड में चलाया गया. इस मोड में रेंज और क्षमताएं घट जाती हैं, जिससे  मेजबान पक्ष उसकी फ्रिक्वेंसी का विस्तृत नक्शा नहीं बना पाता. इसके अलावा डेटा-लिंक, चाफ, फ्लेयर और R-77 बीवीआर मिसाइल के सिमुलेशन पर भी पाबंदियां लगाई गईं. भारतीय पायलट पूर्ण कॉकपिट डेटा पिक्चर के बिना काम करते रहे ताकि संवेदनशील तकनीक सुरक्षित रहे। 

    हालांकि पूरी पहुंच नहीं दी गई, फिर भी इंट्रोडक्शन स्टेज में कुछ जानकारी साझा की गई थी. Su-30 MKI क्रू ने अमेरिकी समकक्षों के साथ राइड एक्सचेंज किए. अमेरिकी पायलट फ्लैंकर के पिछले सीट पर बैठकर उड़ान भर सके. बाद के वर्षों में भी यह सिलसिला जारी रहा। 

    2023 के कोप इंडिया अभ्यास में कलाईकुंडा में तब के पैसिफिक एयर फोर्सेज कमांडर जनरल केनेथ एस विल्सबैक ने भारतीय पायलट के साथ Su-30 MKI के पिछली सीट पर ट्रेनिंग मिशन के दौरान उड़ान भरी. भारतीय वायु सेना ने इसकी पुष्टि भी की. पहले के कोप इंडिया दौरों में भी अमेरिकी पायलट Su-30 ट्रेनर वेरिएंट में बैठ चुके थे।

    तरंग शक्ति में F-35 को अलग क्षेत्र में रखा गया और सीमित संपर्क रहा, लेकिन अमेरिकी वायु सेना को Su-30 MKI के प्रदर्शन, रडार व्यवहार और रणनीति का काफी अनुभव मिला. दोनों पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं को समझ रहे थे लेकिन कोर सीक्रेट्स छिपाए रखे। 

    कर्नल फॉर्नोफ के दावे और भारतीय जवाब
    अभ्यास के बाद अमेरिकी कर्नल टेरेंस फॉर्नोफ का एक निजी ब्रीफिंग वीडियो इंटरनेट पर फैला. फॉर्नोफ F-15 पायलट थे. नेलिस एयर फोर्स वॉरफेयर सेंटर में रिक्वायरमेंट्स एंड टेस्टिंग के निदेशक. उन्होंने रिटायर्ड पायलटों के समूह को संबोधित करते हुए दावा किया कि F-15 पायलटों ने Su-30 MKI को एक-बनाम-एक लड़ाइयों में पूरी तरह दबा दिया।  

    उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट हैरान और हक्के-बक्के रह गए तथा शुरुआती कुछ दिनों के बाद और एक-बनाम-एक लड़ाई नहीं लड़ना चाहते थे. फॉर्नोफ के अनुसार F-15 ने थ्रस्ट-वेक्टरिंग की कमजोरी का फायदा उठाया. जब Su-30 पोस्ट-स्टॉल मैन्यूवर में जाता तो वह आसमान से गिरने लगता और F-15 गन से निपट लेता। 

    उन्होंने यह भी कहा कि Su-30 के इंजन विदेशी वस्तु से नुकसान के प्रति बहुत संवेदनशील हैं इसलिए भारतीय पायलट टेकऑफ के बीच एक मिनट का अंतराल मांगते थे. फ्रैटरिसाइड यानी अपनी तरफ की गलती से मार गिराए जाने की दर ऊंची बताई गई। 

    फॉर्नोफ ने माना कि कागजों पर Su-30 का रडार, थ्रस्ट, थ्रस्ट वेक्टरिंग और हथियार रेंज बेहतर है लेकिन एक बार भारतीय पायलट पूरी तरह महारत हासिल कर लें तो F-15 और F-16 को नियमित रूप से हरा सकते हैं. हालांकि Su-30 किसी भी तरह से F-22 के आसपास भी नहीं है. अमेरिकी वायु सेना ने बाद में स्पष्ट किया कि ये फॉर्नोफ की निजी राय थी. उन्होंने सहयोगियों को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रखा था। 

    भारतीय पक्ष का अलग बयान और वास्तविक प्रदर्शन
    भारतीय खातों और बाद की रिपोर्टिंग ने फॉर्नोफ के दावों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि सुखोई ने शीर्ष अमेरिकी पायलटों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया. पूरे अभ्यास में हाई सर्विसबिलिटी रेट बनाए रखा. एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने उस समय बताया कि हमारे पायलट अकेले काम कर रहे थे जबकि अमेरिकी पायलट नेटवर्क का हिस्सा थे और नेविगेशन, टारगेट की जानकारी तथा दुश्मन के डिटेल मिल रहे थे। 

    हम सारी जानकारी मैन्युअली ले रहे थे फिर भी इन बाधाओं के बावजूद फिट रहे. भारतीय स्रोतों के अनुसार लगभग दस एक-बनाम-एक लड़ाइयों में कोई Su-30 MKI नहीं गिराया गया. ज्यादातर किल भारतीय पक्ष के नाम रहे. सभी मुठभेड़ ACMI सिस्टम पर रिकॉर्ड हुईं. थ्रस्ट-वेक्टरिंग का प्रदर्शन फॉर्नोफ के बयान से अलग था और अमेरिकी एयरक्रू ने भारतीय मैन्यूवर की सराहना की. फ्रैटरिसाइड दोनों तरफ हुए। 

    भारतीय पक्ष ने इन्हें AWACS सपोर्ट न मिलने और अमेरिकी कंट्रोलर्स के खराब ग्राउंड कंट्रोल से जोड़ा, जिसकी डीब्रीफिंग में स्वीकार भी किया गया. भारतीय वायु सेना के पास Link-16 और एडवांस्ड IFF नहीं था जबकि अमेरिकी पक्ष के पास था. सर्विसबिलिटी 90% से ऊपर बताई गई. विदेशी वस्तु से नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई। 

    इंजन NPO सैटर्न के थे. एक मिनट का टेकऑफ अंतराल सुरक्षा उपाय था क्योंकि क्षतिग्रस्त इंजन रूस भेजने पड़ते और स्थानीय रिप्लेसमेंट उपलब्ध नहीं थे. भारतीय वायु सेना ने 90 प्रतिशत से ऊपर मिशन अचीवमेंट रेट बताया और घर से दूर तथा प्रतिबंधों के बावजूद बड़े फोर्स एंगेजमेंट में अच्छा प्रदर्शन किया। 

    दोनों घटनाओं से निकलने वाला बड़ा सबक
    तरंग शक्ति में F-35 की सीमित पहुंच और 2008 में Su-30 MKI पर लगाए गए प्रतिबंध एक ही सिद्धांत को दर्शाते हैं. वायु सेनाएं वॉरगेम्स के दौरान अपनी वर्गीकृत तकनीक की रक्षा करती हैं. अमेरिका अपने स्टील्थ विमान के कॉकपिट और सेंसर फ्यूजन को बचाता है तो भारत अपने बार्स रडार की फ्रिक्वेंसी और पूर्ण क्षमताओं को। 

    दोनों पक्ष एक-दूसरे को उड़ान भरते हुए देखते हैं, रणनीति सीखते हैं लेकिन कोर सीक्रेट्स हाथ में नहीं आने देते. यह सामान्य प्रथा है. भविष्य में जब चीन के J-20 जैसे विमानों से मुकाबला हो सकता है तो तरंग शक्ति जैसे अभ्यास भारतीय पक्ष को स्टील्थ जेट का व्यवहार समझने का मौका देते हैं बिना उसके अंदरूनी रहस्य जाने। 

    इसी तरह 2008 में अमेरिकी पक्ष ने फ्लैंकर की क्षमताओं का अनुभव लिया लेकिन पूर्ण रडार मैपिंग नहीं कर पाया. सुरक्षा और सहयोग दोनों साथ चलते हैं. तकनीक की रक्षा राष्ट्रीय हित का हिस्सा है और दोनों देश इसे समझते हैं। 

     

     

  • गृह, परिवहन और पर्यटन विभाग में बदलाव, छत्तीसगढ़ में 22 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी

    गृह, परिवहन और पर्यटन विभाग में बदलाव, छत्तीसगढ़ में 22 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक कार्यकुशलता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सचिवालय सेवा के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया है।

    सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव मनराखन भूआर्य द्वारा जारी आदेश के तहत सचिवालय सेवा के कुल 22 सहायक सचिवालय सहायक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नए विभागों में पदस्थ किया गया है।

    गृह और वित्त विभागों में पदस्थापना

    जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग, पर्यटन विभाग, गह विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, वित्त विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग आदि में नए अधिकारियों की तैनाती की है।

    ममता साहू की जेल विभाग में पदस्थापना

    सौरव मंडल को गृह विभाग से सामान्य प्रशासन विभाग, ममता साहू को सामान्य प्रशासन विभाग से जेल विभाग और अभिषेक देवांगन को सामान्य प्रशासन से जेल विभाग में पदस्थापना मिली है।

    चन्द्रनारायण की गृह विभाग में पदस्थापना

    इसके अलावा संगीता देवी को सामान्य शासन विभाग से वित्त विभाग, चन्द्रनारायण को नगरीय प्रशासन विभाग से गृह विभाग और धनेश्वर पटेल को मुख्यमंत्री सचिवालय से चिकित्सा शिक्षा विभाग में तैनाती मिली है।

     

  • चाकू लेकर पहुंची महिला पर आरोप, सांसद डोला सेन ने की शिकायत

    चाकू लेकर पहुंची महिला पर आरोप, सांसद डोला सेन ने की शिकायत

    कोलकाता  
    ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के बाहर एक महिला पर चाकू लेकर हमला करने की कोशिश का आरोप लगा है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सांसद डोला सेन ने महिला के नशे में होने का दावा किया है। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। महिला वहां क्यों पहुंची थी? क्या पुलिस जांच में हमले की कोशिश और उसके इरादे की पुष्टि होगी?
     
    पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने आरोप लगाया है कि कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास के बाहर एक महिला ने उन पर चाकू से हमला करने की कोशिश की। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक हमला करने वाली महिला ने खुद को ममता बनर्जी की भतीजी होने का दावा किया।  बताया गया कि ममता बनर्जी दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन करने के लिए घर से निकल रही थीं, तभी महिला उनकी ओर दौड़ी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद ममता बनर्जी के सहयोगियों ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

    महिला ने ममता बनर्जी के पास पहुंचने के लिए क्या किया?
    तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट के आरोपों के मुताबिक, महिला कालीघाट स्थित आवास के बाहर पहुंची थी। आरोप है कि उसने ममता बनर्जी की साड़ी खींची और उसके पास से चाकू भी मिला। स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार, घटना शाम करीब छह बजे हुई। महिला ने ममता बनर्जी को ‘पिशी’ यानी बुआ कहकर संबोधित किया और उनकी ओर दौड़ पड़ी। आरोप है कि उसने ममता बनर्जी की तरफ झपटने की कोशिश की। इसके बाद वह सड़क पर लेट गई और गाली-गलौज करने लगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि महिला ने वास्तव में चाकू से हमला किया या किसी को चोट पहुंची।

    कार्यकर्ताओं ने महिला को कैसे पकड़ा?
    आरोप है कि ममता बनर्जी के साथ मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने महिला को पकड़ लिया। उसे जमीन पर दबाकर रोका गया और पूछताछ के बाद कालीघाट पुलिस को सौंप दिया गया। बताया गया कि पकड़े जाने के दौरान भी महिला विरोध कर रही थी। पार्टी के लोगों का दावा है कि महिला ने खुद को ममता बनर्जी की भतीजी बताकर भीड़ में घुसने की कोशिश की थी। हालांकि, उसकी पहचान और ममता बनर्जी से उसके किसी संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई का विवरण भी नहीं दिया गया है।

    डोला सेन ने महिला को लेकर क्या दावा किया?
    तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद डोला सेन ने कथित तौर पर दावा किया कि महिला नशे के प्रभाव में थी और उसके हाथ में चाकू था। उनके मुताबिक, महिला ने ममता बनर्जी की भतीजी होने का दावा करके लोगों के बीच पहुंचने की कोशिश की। घटना के बाद ममता बनर्जी के सहयोगियों ने सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी स्थिति कैसे बनी। हालांकि, महिला के नशे में होने और उसके इरादे को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    क्या घटना के बाद पुलिस कार्रवाई करेगी?
    महिला को कालीघाट पुलिस के हवाले किए जाने की जानकारी सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने घटना को उनकी सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। पार्टी की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने और पुलिस से कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है। वहीं, अमित शाह की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए गए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में उनके या भाजपा के इस घटना से जुड़े होने का कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि पुलिस जांच में महिला की पहचान, उसके पास चाकू होने और घटना के पीछे की वजह को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • NHAI ने बदले प्रोजेक्ट के नियम, 500 करोड़ के ठेकों में अब क्या होगा नया?

    NHAI ने बदले प्रोजेक्ट के नियम, 500 करोड़ के ठेकों में अब क्या होगा नया?

    नई दिल्ली

    नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट में निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने उनका डिजिटल रिकार्ड भी तैयार करने का निर्णय किया है।

    अब से 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं का निर्माण शुरू होने से लेकर महत्वपूर्ण पड़ावों, चुनौतियों व उसके समाधान, मशीनों व उपकरणों के उपयोग सहित परियोजना पूरी होने तक की वीडियो रिकार्डिंग ठेकेदार फर्म को करानी होगी। इस संबंध में एनएचएआई की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
    ठेकेदार फर्मों को वीडियो एजेंसी नियुक्त करनी होगी

    एनएचएआई ने कहा है कि ठेकेदार फर्मों को प्रोजेक्ट निर्माण अवधि के लिए पेशेवर वीडियो निर्माण एजेंसी की नियुक्ति भी करनी होगी। प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान पेशेवर एजेंसी द्वारा महत्वपूर्ण निर्माण गतिविधियों, इंजीनियरिंग के मुख्य पड़ावों, उपलब्धियों, चुनौतियों और विकास को सम्मिलित करते हुए वीडियो डाक्यूमेंट्री तैयार करनी होगी।

    दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि डाक्यूमेंट्री में निर्माण का प्रारंभ, कार्यस्थल की तैयारी, सर्वेक्षण, जांच, गतिशीलता, पाइल फाउंडेशन, सब-स्ट्रक्चर वर्क, पुलों, वायडक्ट्स, फ्लाईओवर आदि का निर्माण, गर्डर्स, पेवमेंट और सड़क निर्माण, महत्वपूर्ण निर्माण चुनौतियां, बाधाएं, समाधान, सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण उपायों के साथ ही परियोजना के लाभ और उद्देश्यों का वर्णन भी करना होगा।

    हाइवे निर्माण की होगी वीडियोग्राफी

    प्राधिकरण ने कहा है कि यह वीडियोग्राफी इस तरह स्पष्ट होनी चाहिए कि जब भी आवश्यक हो, निर्माण प्रक्रिया के किसी भी चरण को बाद में देखा जा सके। यह परियोजना की डाक्यूमेंट्री लगभग 15 से 20 मिनट की होगी।

    डाक्यूमेंट्री का यह संग्रह एनएचएआई अपनी लाइब्रेरी में सुरक्षित रखेगा। प्राधिकरण का मानना है कि यह परियोजनाओं के डिजिटल संकलन के साथ ही गुणवत्ता पर निगरानी में भी सहायक साबित हो सकता है।

  • स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की प्रतिष्ठित सूची में IIT पटना के 10 प्रोफेसर, शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

    स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की प्रतिष्ठित सूची में IIT पटना के 10 प्रोफेसर, शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

     पटना
    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) पटना के 10 संकाय सदस्यों ने वैश्विक स्तर पर संस्थान का मान बढ़ाया है। वर्ष 2026 के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा संकलित दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में इन्हें जगह मिली है।

    यह उपलब्धि संस्थान में हो रहे शोध कार्यों और वैज्ञानिकों के अकादमिक योगदान को वैश्विक पहचान मिलने के रूप में देखी जा रही है।

    शोध के प्रभाव और उद्धरण के आधार पर चयन
    यह वैश्विक डेटाबेस एल्सेवियर की ओर से उपलब्ध कराए गए स्कोपस डेटा का उपयोग कर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है।

    इसमें दुनिया भर के शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक योगदान और उनके शोध के प्रभाव का आकलन किया जाता है। वैज्ञानिकों को 22 प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है।

    चयन के लिए समग्र उद्धरण सूचकांक का उपयोग किया जाता है, जो शोध प्रकाशनों की पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

    पूर्व निदेशक समेत भौतिकी विभाग के शिक्षाविद शामिल
    सूची में आइआइटी पटना के पूर्व निदेशक प्रो. टीएन सिंह, प्रशासन के डीन और भौतिकी विभाग के प्रो. अवधेंद्र कुमार ठाकुर तथा भौतिकी विभाग के प्रमुख प्रो. नवीन कुमार निश्चल शामिल हैं। इन शिक्षाविदों के शोध योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से संस्थान की अकादमिक प्रतिष्ठा को बढ़ावा मिला है।

    इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के शोधकर्ताओं को भी सम्मान
    मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरजीत कुमार पाल, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान (एचएसएस) विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋचा चौधरी और गणित विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतिभामाय दास को भी सूची में शामिल किया गया है। कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रीपर्णा साहा ने भी इस सूची में जगह बनाई है।

    इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ भी शामिल
    मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. अनिर्बान भट्टाचार्य, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. महेशकुमार एच. कोलेकर और इसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रंजन कुमार बेहरा भी सूची में शामिल हैं। अलग-अलग विषयों के इन शिक्षाविदों की मौजूदगी संस्थान में विविध क्षेत्रों में हो रहे शोध कार्यों को रेखांकित करती है।

    वैश्विक पहचान से संस्थान की शोध प्रतिष्ठा को बढ़ावा
    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की सूची में शामिल होना शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक प्रकाशनों और उनके प्रभाव की अंतरराष्ट्रीय पहचान से जुड़ा है।

    आइआइटी पटना के 10 संकाय सदस्यों का चयन संस्थान के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे विज्ञान, तकनीक और अंतरविषयक शोध के विभिन्न क्षेत्रों में संस्थान की उपस्थिति भी सामने आती है।

     

  • सागर में बनेगा भव्य परशुराम चौराहा, चारों ओर लगेंगे फरसा, धनुष और शिलालेख

    सागर में बनेगा भव्य परशुराम चौराहा, चारों ओर लगेंगे फरसा, धनुष और शिलालेख

     सागर

     शहर का प्रमुख सिविल लाइन चौराहा अब परशुराम चौराहा के नाम से जाना जाएगा। महापौर संगीता सुशील तिवारी के प्रयासों से ब्राह्मण समाज की कई दशकों पुरानी मांग पूरी हुई है। चौराहे पर परशुराम स्तंभ का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

    महापौर ने मौके पर पहुंचकर स्तंभ का निरीक्षण किया। चौराहे के चारों ओर फरसा, धनुष और शिलालेख लगाए जाएंगे। वहीं, अटल पार्क में भगवान परशुराम की 35 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कार्य जारी है।
    समाज की मांग पर एमआइसी में रखा गया था प्रस्ताव

    सिविल लाइन चौराहे का नाम भगवान परशुराम के नाम पर रखने की मांग ब्राह्मण समाज लंबे समय से कर रहा था। इसी क्रम में दिनकर तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने महापौर संगीता सुशील तिवारी को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के माध्यम से चौराहे का नाम बदलकर परशुराम चौराहा करने की मांग रखी गई थी।

     

  • ‘जनता समझ चुकी है कांग्रेस की रणनीति’, राहुल पर बरसे शाह

    ‘जनता समझ चुकी है कांग्रेस की रणनीति’, राहुल पर बरसे शाह

     अहमदाबाद  
    गुजरात के निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गुजरात में 41 साल बाद भी जीत हासिल नहीं कर पाई है। शाह ने राहुल गांधी से आत्मनिरीक्षण करने को कहा और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की लगातार चुनावी हार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का परिणाम बताया जाएगा। उन्होंने गुजरात से लेकर राजस्थान और त्रिपुरा तक के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत का दावा किया।

    अमित शाह ने गुजरात चुनाव के नतीजों पर क्या कहा?
    शाह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी 32 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़े हैं। शाह के मुताबिक, गांधीनगर नगरपालिका में भाजपा के वोट प्रतिशत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गुजरात में आखिरी बार 1985 में जीती थी और अब 41 साल बाद भी यहां जीत नहीं पाई है। शाह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इस हार को भी एसआईआर का परिणाम बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जीत को एसआईआर से जोड़कर खारिज करने के बजाय कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए।

    क्या दूसरे राज्यों के चुनावों का भी अमित शाह ने किया जिक्र?
    शाह ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी में हुए उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस को इनमें एक भी सीट नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि असम के नौगांव में भाजपा ने कांग्रेस से सीट छीन ली। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार की जीत और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस से सीट जीतने का भी उन्होंने जिक्र किया। पुदुचेरी में एनडीए के साथ एआईएनआरसी के उम्मीदवार की जीत का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि चुनावी नतीजे कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संकेत हैं। ये आंकड़े और चुनावी उदाहरण शाह ने अपने बयान में कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाने के लिए दिए।

    राजस्थान और त्रिपुरा में भाजपा की जीत को लेकर क्या बोले शाह?
    अमित शाह ने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने नगर निगम की 90 फीसदी, नगर परिषद की 66 फीसदी और नगर पालिकाओं की 65 फीसदी सीटों पर जीत हासिल की। त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि कुल 4,600 सीटों में से एनडीए को 4,000 सीटों पर जीत मिली। उन्होंने खास तौर पर कहा कि त्रिपुरा में ये चुनाव बैलेट बॉक्स से हुए थे। शाह ने उन लोगों पर निशाना साधा जो चुनावी हार के लिए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में कांग्रेस 30 साल से नहीं जीती है, जबकि बंगाल में 56 साल से उसे जीत नहीं मिली है।

    राहुल गांधी और कांग्रेस को लेकर अमित शाह ने क्या आरोप लगाए?
    शाह ने कहा कि राहुल गांधी के कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से भाजपा लगातार चुनाव जीत रही है। उन्होंने राहुल गांधी के विपक्षी दलों को एकजुट करने के प्रयासों पर भी सवाल उठाया। शाह ने कहा कि 14 पार्टियों के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने और आठ हजार लोगों की भीड़ जुटाने से कोई देश की आवाज नहीं बन जाता। उनके मुताबिक, जनता की आवाज गांवों, खेतों, जंगलों और दूर-दराज के इलाकों में है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी जनता ने कांग्रेस को हराया है।

    एसआईआर और घुसपैठियों के मुद्दे पर क्या बोले शाह?
    अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर के बहाने घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता कांग्रेस की इस राजनीति को समझ चुकी है। शाह ने कहा कि कांग्रेस को अपनी रणनीति पर विचार करना चाहिए और 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के लिए तैयार रहना चाहिए। 

  • संबंधित अधिकारियों को फोन कर दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

    संबंधित अधिकारियों को फोन कर दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

    लखनऊ
    आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी प्रतिबद्धता के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंगलवार को लखनऊ स्थित अपने आवास पर आयोजित जनता दर्शन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें एवं परेशानियां उनके समक्ष रखीं। उपमुख्यमंत्री ने प्रत्येक फरियादी से संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना और उनके शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    जनता दर्शन में उपचार एवं आर्थिक सहायता, पुलिस कार्रवाई, राजस्व संबंधी मामलों, भूमि विवाद, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से सामने आईं। उपमुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी फरियादियों की बात सुनी और संबंधित प्रकरणों की जानकारी प्राप्त की। कई मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर शिकायतों की स्थिति जानी तथा नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, उदासीनता अथवा अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • कवर्धा में वन विकास निगम ने मैदानी अमले को दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    कवर्धा में वन विकास निगम ने मैदानी अमले को दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा काष्ठ निष्कासन में गुणवत्ता बढ़ाने, वन संरक्षण और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कवर्धा के सिंगपुर बीट में एक दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में मैदानी अमले को वृक्षों के वैज्ञानिक पातन (वृक्ष कटाई ) और लगुण (लट्ठे तैयार करने) की उन्नत तकनीकों का जंगल में प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया गया।

    कार्यशाला में बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण काष्ठ तैयार करने और निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए निर्धारित लॉगिंग प्लान का शत-प्रतिशत पालन करने पर जोर दिया गया। मैदानी अमले को काष्ठ की लंबाई और निर्धारित श्रेणी के अनुसार कटाई एवं छंटाई करने की तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि उपलब्ध काष्ठ का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रशिक्षण के दौरान वृक्षों की कटाई में श्रमिकों की सुरक्षा के साथ आसपास के छोटे पौधों और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को नुकसान से बचाने के उपाय बताए गए। 

     छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमरनाथ प्रसाद के निर्देशन में यह कार्यशाला आयोजित हुई। क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री राम अवतार दुबे, मंडल प्रबंधक श्री राम कुमार सिदार सहित अन्य अधिकारी, कूप प्रभारी और मैदानी श्रमिक शामिल हुए।