Author: NewseDay

  • मध्य गंगा स्टेज-2 परियोजना का 97 प्रतिशत काम पूरा, 4.10 लाख से अधिक किसानों को होगा लाभ

    मध्य गंगा स्टेज-2 परियोजना का 97 प्रतिशत काम पूरा, 4.10 लाख से अधिक किसानों को होगा लाभ

    खेतों तक पानी, घरों तक पेयजल: योगी सरकार की जल परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर
     
    नहरों के पुनरुद्धार से 37 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुविधा, 42 हजार किसान लाभान्वित

    लखनऊ
    योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में सिंचाई और पेयजल सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना, मध्य गंगा स्टेज-2, कनहर सिंचाई परियोजना और नहरों के पुनरुद्धार जैसे कार्य प्रदेश में जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लाखों किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जबकि बड़ी आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी।

    जल शक्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश के मुताबिक जल केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के निर्माण से झांसी, बांदा, महोबा और ललितपुर जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा। इससे करीब 3 लाख किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ 21 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी। बुंदेलखंड जैसे जल संकट से प्रभावित क्षेत्र के लिए यह परियोजना खेती को अधिक भरोसेमंद बनाने और ग्रामीण परिवारों की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। सिंचाई की बेहतर उपलब्धता से किसानों को फसलों के लिए पानी जुटाने में सहूलियत मिलेगी और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    मध्य गंगा स्टेज-2 का 97 प्रतिशत कार्य पूरा
    मध्य गंगा स्टेज-2 परियोजना का 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके पूर्ण होने पर अमरोहा, संभल और मुरादाबाद में कुल 1.46 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होगी व 4.10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा। वहीं, महाराजगंज में रोहिन नदी पर रोहिन बैराज का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इससे 5,386 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होगी और 16 हजार किसानों को लाभ पहुंचेगा।

    108 गांव को हजारों लोगों को फायदा
    कनहर सिंचाई परियोजना से उत्तर प्रदेश के अलावा झारखंड और छत्तीसगढ़ को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना पूरी होने पर 35,467 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होगी। साथ ही दो लाख लोगों को पेयजल सुविधा मिलेगी और 108 गांवों के 53 हजार किसान लाभान्वित होंगे।

    नहरों के जरिए सिंचाई सुविधा हुई मजबूत
    प्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नहरों के पुनरुद्धार पर भी काम जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से 613 किलोमीटर लंबाई की 110  नहरों की खुदाई और गैप कार्यों को पूरा कर टेल तक पानी पहुंचाया गया। इससे 37,285 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई और 42 हजार किसानों को लाभ मिला।

  • योगी सरकार के सहयोग और निजी प्रयास से सरकारी स्कूल में दीं कॉन्वेंट जैसी सुविधाएं

    योगी सरकार के सहयोग और निजी प्रयास से सरकारी स्कूल में दीं कॉन्वेंट जैसी सुविधाएं

    मेरठ
    नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के बीच शक्ति के उस रूप को भी नमन करने का अवसर है, जो बिना किसी शोर के समाज की तकदीर बदलने में जुटा है। मां दुर्गा जहां सृजन, साहस और संकल्प की प्रतीक हैं, वहीं शिक्षा के मंदिर में इन्हीं मूल्यों को साकार कर रही हैं मेरठ के रजपुरा ब्लॉक स्थित रजपुरा प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पुष्पा यादव। उन्होंने साबित किया है कि मां दुर्गा की भांति संकल्प मजबूत हो तो सरकारी स्कूल को भी रणभूमि बनाकर अशिक्षा रूपी दानव का संहार किया जा सकता है। मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से सरकारी स्कूल भी बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का केंद्र बन सकते हैं। योगी सरकार के ऑपरेशन कायाकल्प से मिली मदद और अपने निजी प्रयासों से पुष्पा यादव ने विद्यालय की तस्वीर बदलने के साथ गांव के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया है। यहां बच्चे पढ़ाई के साथ खेल, योग, कला, संगीत और अंग्रेजी वार्तालाप जैसी गतिविधियों से भी अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं।

    गांव की चौखट से शिक्षा के नए मुकाम तक
    ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना अपना संकल्प बना चुकीं पुष्पा यादव बताती हैं कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत मिली सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने के साथ उन्होंने निजी संसाधनों से भी विद्यालय को संवारने में योगदान दिया। साफ-सफाई, बेहतर फर्नीचर और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका प्रयास है कि गांव के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वे अवसर मिलें, जिनके लिए अभिभावक अक्सर निजी स्कूलों का रुख करते हैं।

    कॉन्वेंट जैसी सुविधाएं, सरकारी स्कूल में बढ़ा भरोसा
    विद्यालय में बच्चों को अंग्रेजी वार्तालाप में निपुण बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े। गतिविधि आधारित शिक्षण से पढ़ाई को रुचिकर बनाया जा रहा है। कला, संगीत और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों में भी बच्चों को भाग लेने के अवसर मिलते हैं। मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न आयोजन किए जाते हैं। बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाओं के जरिए विद्यालय बच्चों की प्रतिभा निखारने का केंद्र बन रहा है। वर्तमान में यहां करीब डेढ़ सौ बच्चे अध्ययनरत हैं।

    खेल और योग से निखर रहा बच्चों का व्यक्तित्व
    पुष्पा कहती हैं कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ शारीरिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। इसी सोच के तहत विद्यालय में इंडोर और आउटडोर खेलों की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। खेलों से बच्चों में अनुशासन, सहयोग और टीम भावना विकसित होती है। प्रार्थना सभा के दौरान योगाभ्यास की व्यवस्था भी की है। इससे बच्चों को एकाग्रता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कला और संगीत जैसी गतिविधियां उनकी रचनात्मकता को निखारती हैं। इस तरह विद्यालय में मानसिक और शारीरिक विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

    पुस्तकालय में खुल रही ज्ञान की नई दुनिया
    बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए विद्यालय में पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसमें पुष्पा यादव के परिवार के सदस्य और मित्र भी निजी स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराकर सहयोग कर रहे हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को विज्ञान, इतिहास, भूगोल, विभिन्न धर्मों और महापुरुषों की जीवनियों के बारे में जानने का अवसर मिलता है। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान पाठ्यक्रम से आगे बढ़ता है और उनमें नई चीजें जानने की जिज्ञासा विकसित होती है।

    पीटीएम से मजबूत हुआ अभिभावकों का भरोसा
    बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण है। इसे ध्यान में रखते हुए पुष्पा यादव ने विद्यालय में अभिभावक-शिक्षक बैठक यानी पीटीएम की नियमित शुरुआत की। इन बैठकों में अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई और प्रगति की जानकारी मिलती है। शिक्षक भी बच्चों की जरूरतों और समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम कर सकते हैं। नियमित संवाद से विद्यालय और परिवार के बीच समन्वय मजबूत होता है और बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ती है।

    निजी प्रयासों से बढ़ा नामांकन, संवर रहा भविष्य
    विद्यालय में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए बाल वाटिका बनाई गई है। इसके माध्यम से बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाया जाता है। साफ-सफाई, नैतिक शिक्षा और अच्छी आदतों पर भी जोर दिया जाता है, ताकि विद्यार्थी जिम्मेदार नागरिक बन सकें। पुष्पा यादव की पहल बताती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग, निजी प्रयास और बच्चों के प्रति समर्पण मिलकर विद्यालय की तस्वीर बदल सकते हैं। नवरात्र में मां दुर्गा की शक्ति और संकल्प का संदेश पुष्पा यादव के कार्यों में भी दिखाई देता है। उनकी पहल इस बात की मिसाल है कि समर्पित शिक्षिका का संकल्प न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को रोशन कर सकता है।

  • 51 शक्तिपीठों में खास है आरासना अंबाजी मंदिर, जानें कैसे गुजरात सीमा पर स्थापित हुआ मां का दूसरा धाम

    51 शक्तिपीठों में खास है आरासना अंबाजी मंदिर, जानें कैसे गुजरात सीमा पर स्थापित हुआ मां का दूसरा धाम

    जयपुर
    देश के 51 शक्तिपीठों में शुमार जगतजननी मां अम्बा का यह इकलौता ऐसा शक्तिपीठ है, जो भौगोलिक रूप से दो स्थानों पर एक समान आस्था के साथ पूजा जाता है। एक सिरोही जिले में पिंडवाड़ा के समीप स्थित मूल 'आरासुरी अंबा माता मंदिर' और दूसरा गुजरात सीमा पर स्थित विश्वप्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव सती के पार्थिव देह को लेकर ब्रह्मांड में भ्रमण कर रहे थे, तब मां पार्वती का पावन 'नाभि' अंग आरासना की इसी सुरम्य पहाड़ी पर गिरा था। आज भी दोनों ही धामों पर मां के नाभि स्वरूप की उपासना होती है।

    भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रांत उपाध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. उदयसिंह डिंगार के अनुसार, आरासना अंबाजी देश के प्रमुख शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है। इस धाम की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि मुख्य मंदिर में मां की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां देवी के नाभिकमल रूपी 'चक्र' की पूजा की जाती है।

    त्रिशूल से किया था नरभक्षी आरासुर का संहार
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस सुरम्य वनक्षेत्र में आरासुर नामक एक भयानक नरभक्षी राक्षस का भारी आतंक था। स्थानीय जनजीवन की रक्षा के लिए मां शक्ति ने अपने त्रिशूल से उस दैत्य का संहार किया और क्षेत्र में शांति स्थापित की।

    इसी से माता का नाम ‘आरासुरी देवी’ पड़ा। वर्तमान मंदिर के पृष्ठ भाग में स्थित पहाड़ी पर आज भी उस प्राचीन स्थल पर त्रिशूल स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है।

    भक्त की पुकार पर चट्टान पर उभरे थे कुमकुम पद-चिह्न
    जनश्रुति के अनुसार, माली समाज की एक परम भक्त महिला प्रतिदिन दुर्गम पहाड़ी पर चढ़कर मां के त्रिशूल की पूजा करती थीं। वृद्धावस्था में जब वे अशक्त हुईं और पहाड़ी चढ़ने में असमर्थ हो गईं, तो उन्होंने मां से कातर भाव से प्रार्थना की।

    भक्त की अनन्य साधना से रीझकर आदिशक्ति ने पहाड़ी की तलहटी में एक विशाल चट्टान पर कुमकुम के पद-चिह्न ‘चक्र’ के रूप में प्रकट कर दिए। तब से उस चट्टान पर चक्र की उपासना होने लगी। सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी उसी माली परिवार के वंशज पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंदिर में सेवा-पूजा का दायित्व निभा रहे हैं।

    शर्त टूटने से सीमा पर ही स्थापित हो गईं मां
    इतिहासकार डॉ. डिंगार बताते हैं कि गुजरात के दांता स्टेट के दरबार मां आरासुरी के अनन्य उपासक थे और हर वर्ष दर्शन के लिए यहां आते थे। उन्होंने मां से दांता पधारने की प्रार्थना की। देवी ने शर्त रखी कि मार्ग में पीछे मुड़कर नहीं देखना। यात्रा के दौरान दांता राज्य की सीमा पर जैसे ही राजा ने संशयवश पीछे मुड़कर देखा, मां की शक्ति वहीं ठहर गई।

    इसके बाद दांता दरबार ने उसी स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, जो आज ‘दांता अंबाजी’ के नाम से दुनियाभर में विख्यात है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते आरासना अंबाजी को ही अंबा भवानी का मूल और आदि प्राकट्य स्थल माना जाता है।

  • झारखंड का छिपा धार्मिक इतिहास आया सामने, महिष्मर्दिनी से चामुंडा तक देवी प्रतिमाओं की अनूठी विरासत

    झारखंड का छिपा धार्मिक इतिहास आया सामने, महिष्मर्दिनी से चामुंडा तक देवी प्रतिमाओं की अनूठी विरासत

    रांची
     शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। झारखंड में मिली प्राचीन दुर्गा की प्रतिमाओं की जानकारी बड़ी रोचक है। जगह-जगह मिली मां की प्रतिमाओं से स्पष्ट होता है कि यहां मातृ संस्थाएं जीवित व जीवंत रहीं। मां की अनेक प्रतिमाएं मिलती हैं।

    उनके रूप अलग-अलग हैं। ये समय और संस्कृति को दर्शाते हैं। इन पुरातात्विक साक्ष्यों से पठार का एक नया इतिहास भी हमारे सामने आता है। इसे देखने-समझने की जरूरत है। छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र झारखंड के भूभाग में शक्ति की आराधना के अनेकानेक प्रमाण पुरातात्त्विक साक्ष्य मौजूद हैं। ऐतिहासिक संदर्भों में इन पुरासाक्ष्यों का विशेष महत्व है।

    झारखंड के विभिन्न भागों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं महिष्मर्दिनी, महिषासुरमर्दिनी, सिंहवाहिनी, चामुंडा सहित सप्तमात्रिकाएं एवं तारा की प्रस्तर प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं। यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कुछ प्रमुख देवीस्थान रजरप्पा स्थान से छिन्नमस्तिका एवं तारापीठ बंगाल सीमा में (झारखंड से समीप) एवं चतरा से मां तारा की प्रतिमा, भद्रकाली के नाम से विख्यात हैं।

    इसी प्रकार चतरा के कौलेश्वरी देवी जो अत्यंत ही ऐतिहासिक हैं, का नाम उल्लेखनीय हैं। वस्तुतः शक्ति की आराधना झारखंड (छोटानागपुर, ओड़िशा, बंगाल, आदि से सटे क्षेत्रों) के संदर्भ में अति महत्वपूर्ण है।

    ऐसा प्रतीत होता है कि देवी असुर संग्राम की मुख्य भूमि जो पौराणिक रूप से अभिकल्पित अथवा व्याख्यायित है इसी क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में वर्णित है। यद्यपि यह विशेष एवं विस्तारित अध्ययन की मांग करता है।

    सृष्टि की मूल शक्ति
    एक अन्य ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करना अति महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि शाक्त संप्रदाय के सैद्धान्तिक /व्यावहारिक स्वरूप का विकास शैव सम्प्रदाय के विकास से घनिष्ठ रूप से संबंधित है एवं शैव विचारधारा के साथ देखा जाना तर्कसंगत रूप से स्वीकार्य है।

    भारतीय धार्मिक सांस्कृतिक परंपरा में शिव शक्ति की आराधना के व्यापक प्रसंग एवं प्रमाण हैं। अगर दार्शनिक दृष्टि से भी देखें तो भारतीय परंपरा में एवं मातृ तत्व (नारी तत्त्व) को ही सृष्टि का मूल शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है अर्थात संपूर्ण प्रकृति/सृष्टि के मूल में सृजन एवं पोषण की संकल्पना में मुख्यतः नारी तत्त्व ही है।

    बेनीसागर की महिष्मर्दिनी
    पुरातात्विक दृष्टि से झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से शक्ति पूजा के साक्ष्य मंदिर वस्तु संरचना एवं प्रस्तर मूर्तियां से अभिव्यक्त होती हैं। इस क्रम में पश्चिमी सिंहभूम के बेनीसागर से प्राप्त महिष्मर्दिनी की प्रस्तर प्रतिमा अत्यंत ही उल्लेखनीय है। इस प्रतिमा में अष्टभुजा देवी द्वारा महिष रूपी दानव का वध करते हुए दर्शाया गया है। इस प्रकार की मूर्तियां ओड़िशा के क्षेत्र से प्रभावित प्रतीत होती हैं।

    ओड़िशा क्षेत्रों में इस प्रकार की देवी प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं। इसके अतिरिक्त बेनीसागर से देवी के चामुंडा स्वरूप की प्रस्तर मूर्ति प्राप्त है। यहां से कई प्रस्तर पट्टिका पर उत्कीर्ण देवी प्रतिमाएं भी विशेष रूप से प्राप्त हुईं हैं। बेनीसागर एक प्रमुख प्राचीन शैव स्थल है एवं कुछ अध्येताओं की नज़र में तंत्रविद्या का एक प्रमुख प्राचीन केंद्र के रूप में भी अभिप्रमाणित है।

    यह स्थल छठीं शताब्दी से सत्रहवीं शताब्दी तक धार्मिक सांस्कृतिक रूप से आबाद रहा और यहां शैव एवं शाक्त धार्मिक विचारधारा से संबंधित व्यापक प्रमाण मिले हैं। यहां समीप में ही ओड़िशा की सीमा में प्रसिद्ध खिचिंगेश्वरी देवी का मंदिर भी है।

    शाक्त सम्प्रदाय का एक प्रमुख केंद्र
    दूसरा प्रमुख क्षेत्र शाक्त संप्रदाय से संबंधित है झारखंड का कांची नदी क्षेत्र जहां दसवीं से ग्यारहवीं शताब्दी तक शैव शाक्त धार्मिक विचारधारा का जो विकास हुआ, यहां की दो प्राचीन प्रस्तर प्रतिमाएं, जिनमें एक सिंहवाहिनी दुर्गा एवं दूसरी महिषासुरमर्दिनी की प्रस्तर प्रतिमा अत्यंत उल्लेखनीय है।

    यहां से प्राप्त कुछ प्रस्तर स्तंभों पर उत्कीर्ण कलाकृतियों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह स्थल भी शाक्त सम्प्रदाय का एक प्रमुख केंद्र था। यहां से एक प्राचीन मठ जैसी पकी ईंट की संरचना भी प्राप्त है।

    कांची नदी क्षेत्र में शाक्त परंपरा के कई पुरातात्त्विक स्थल मौजूद हैं। इनके से एक प्रमुख है देउरी मंदिर यहां से एक अत्यंत सुंदर महिष्मर्दिनी की प्रस्तर प्रतिमा प्रतिवेदित है।

    तारा की बहुसंख्यक प्रतिमाएं
    देवी प्रतिमाओं में तारा की बहुसंख्यक प्रस्तर प्रतिमाएं हजारीबाग चतरा आदि के क्षेत्रों से प्राप्त हैं। यद्यपि तारा बौद्धों की वज्रयान शाखा की प्रमुख देवी हैं और प्रस्तर प्रतिमाओं में विभिन्न प्रकार के उनके रूपों को प्रदर्शित किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि तारा शाक्त परंपरा में दस महाविद्याओं में एक प्रमुख विद्या के रूप में विख्यात हैं तथा तंत्र विद्या की प्रमुख देवी हैं।

    हिंदू पौराणिक ग्रंथों एवं मान्यताओं में तारा का एक प्रमुख स्थान है। यहां एक विशेष तथ्य यह है कि तारा की आराधना को भद्रकाली की आराधना से संबंधित करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक सांस्कृतिक सम्मिलन के संकेत का सूचक भी है।

    इसे प्राचीन संदर्भों में भी देखा जाना चाहिए क्योंकि बौद्ध देवी तारा को भद्रकाली के नाम से इटखोरी में पूजा जाता है। अतः यह देवी तत्त्व के आत्मसातीकरण से घनिष्ठ रूप से संबंधित प्रतीत होता है।

    यह सांस्कृतिक सम्मेलन एवं आत्मसातीकरण की परम्परा भी नवीं शताब्दी से निरंतर प्रवहमान है। यही कारण है कि इटखोरी एवं आसपास के पुरास्थलों से बौद्ध देवी देवताओं के साथ हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं साथ-साथ मिलती हैं।

    चामुंडा देवी की प्रतिमाएं
    झारखंड के कई जगहों से चामुंडा देवी की प्रस्तर प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई हैं । इसके अतिरिक्त देवी के ललिता स्वरूप अर्थात् ललिता देवी , पार्वती के अतिरिक्त बहुसंख्यक उमामहेश्वर की प्रस्तर प्रतिमाएं भी प्राप्त होती हैं। झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण के दैहर, चैथी, सोहरा आदि क्षेत्रों से भी देवी के उक्त विभिन्न स्वरूपों की प्रस्तर प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं।

    झारखंड के राजमहल क्षेत्र में भी चामुंडा एवं महिष्मर्दिनी की प्रस्तर प्रतिमाएं प्राप्त हैं। यह क्षेत्र पालकालीन कलात्मक अवशेषों एवं प्राचीन धरोहरों के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सिंहवाहिनी दुर्गा
    इस संदर्भ में कोडरमा के सतगावां प्रखंड के घोड़सिमर स्थित घुड़मेश्वर धाम में सिंहवाहिनी दुर्गा की वृहदाकार प्रस्तर प्रतिमाएं हैं जो ऐतिहासिक पुरातात्त्विक संदर्भों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वस्तुतः वृहदाकार प्रस्तर प्रतिमाओं का निर्माण इस बात का सूचक है कि शाक्त सम्प्रदाय एवं उसके अनुयायियों के प्रभाव में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही थी।

    यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पंद्रहवीं शताब्दी के बाद भी महिष्मर्दिनी की प्रस्तर प्रतिमाएं निरंतर निर्मित की जाती रहीं। इसके साथ ही गुमला के कुछ क्षेत्रों से बड़े प्रस्तर खंडों पर महिष्मर्दिनी की प्रतिमा उत्कीर्ण किए जाने के साक्ष्य मिलते हैं।

    लोहरदगा में भी ऐसे अवशेष प्राप्त होते हैं। छोटानागपुर के झारखंड क्षेत्र में शाक्त संप्रदाय से संबंधित विशेषकर दुर्गा प्रतिमाएं एवं उनके विभिन्न स्वरूप का विस्तृत ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक संदर्भों में अध्ययन किया जाना अत्यंत ही आवश्यक है।

    इससे न सिर्फ ऐतिहासिक अपितु कला इतिहास एवं विभिन्न क्षेत्रगत धार्मिक सांस्कृतिक उपादानों को भी व्यापक रूप से समझने एवं क्षेत्रीय इतिहास संरचना के निर्माण में मदद मिलेगी।
     (डाॅ. नीरज कुमार मिश्र भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में रांची मंडल में सहायक अधीक्षण पुरातत्त्वविद हैं।)

     

  • गोपालकों और किसानों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    गोपालकों और किसानों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से तैयार होंगे उत्पाद

    पूजा सामग्री से जैविक खाद और पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं तक गो आधारित उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में गो आधारित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और इनसे जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रदेश के सभी 75 जिलों में आउटलेट खोलने की योजना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गोपालकों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए नया माध्यम मिलेगा। इससे पशुपालन को केवल दूध उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय गोवंश से प्राप्त अन्य उपयोगी उत्पादों के व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से अलग-अलग श्रेणियों के उत्पाद तैयार कर उसे आउटलेट के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। डेयरी उत्पादों के अलावा गोबर से जैविक खाद, हवन सामग्री, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीये, गोबर से गमले और सजावटी वस्तुएं भी तैयार की जाएंगी। सीएम योगी के विजन के अनुरूप गो आधारित पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे उत्पादों के लिए व्यवस्थित बाजार विकसित होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री से जुड़े छोटे उद्यमों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    गोपालकों से ग्रामीण उद्यमियों तक खुलेंगे अवसरों के द्वार
    गो आधारित उत्पादों के कारोबार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें अलग-अलग स्तर पर लोगों की भागीदारी होगी। गोपालक और किसान दूध, गोबर तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों की आपूर्ति करेंगे, जबकि स्थानीय उद्यमी इनसे उपयोगी उत्पाद तैयार करने, उनकी पैकेजिंग और विपणन का काम संभाल सकते हैं। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उत्पाद निर्माताओं के लिए भी इस क्षेत्र में अवसर विकसित किए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों के विकास की संभावनाएं बनेंगी।

    पूजा सामग्री से घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक विविधता
    उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गो आधारित उत्पादों को व्यापक श्रेणियों में आउटलेट पर रखा जाएगा। पूजा-पाठ से संबंधित सामग्री में गोबर के उपले, हवन कप, धूपबत्ती, अगरबत्ती और दीये समेत तमाम उत्पाद शामिल किए जाएंगे। घरेलू उपयोग के लिए गोबर के गमले, सजावटी वस्तुएं और हस्तशिल्प तैयार किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त गो आधारित कच्चे माल से पर्यावरण-अनुकूल वस्तुएं भी तैयार की जाएंगी। पंचगव्य आधारित दैनिक आवश्यकताओं के उत्पाद भी बनाए जाएंगे। सभी जिलों में आउटलेट खोलने की योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को एक बाजार से जोड़ने की व्यवस्था स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा देगी।

  • सर्दियों में गीजर चालू करने से पहले जरूर जांचें ये 7 चीजें, छोटी गलती बन सकती है जानलेवा

    सर्दियों में गीजर चालू करने से पहले जरूर जांचें ये 7 चीजें, छोटी गलती बन सकती है जानलेवा

    सर्दियां आते ही घरों में गर्म पानी की जरूरत बढ़ जाती है. सुबह नहाने से लेकर बच्चों को तैयार करने तक, गीजर रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाता है. लेकिन कई घरों में गीजर महीनों तक बंद रहता है और ठंड शुरू होते ही लोग बिना जांच किए उसे चालू कर देते हैं. कई बार ये छोटी से गलती जानलेवा भी बन जाती है.

    गीजर में बिजली, गर्म पानी और दबाव का इस्तेमाल होता है. ऐसे में खराब वायरिंग, पानी का रिसाव, खराब सुरक्षा वाल्व या तापमान कंट्रोल करने वाले सिस्टम में गड़बड़ी होने पर करंट लगने, गर्म पानी से जलने और मशीन खराब होने का खतरा हो सकता है. गैस से चलने वाले गीजर में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस का खतरा भी रहता है. इसलिए सर्दियों में पहली बार गीजर चालू करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

    सबसे पहले गीजर और उसके आसपास की जांच करें
    गीजर कई महीने बंद रहा हो, तो सबसे पहले उसके बाहरी हिस्से, पाइप और बिजली के कनेक्शन को ध्यान से देखें. कहीं पानी टपक तो नहीं रहा, पाइप में दरार तो नहीं है, दीवार पर नमी तो नहीं दिख रही और बिजली के तार कटे या जले हुए तो नहीं हैं. स्विच बोर्ड के आसपास कालापन, जलने की गंध या ढीलापन दिखे तो गीजर चालू न करें.

    अगर गीजर की बॉडी में जंग लगी है, पानी लगातार रिस रहा है या पहले इस्तेमाल के दौरान अजीब आवाज आती थी, तो उसे सीधे चालू करने के बजाय सर्विस टेक्नीशियन से जांच कराएं. मशीन को खोलकर अंदर की वायरिंग या हीटिंग एलिमेंट खुद ठीक करने की कोशिश न करें. गीजर ज्यादा पुराना है तो बिना सर्विसिंग के सीजन में चालू करने से बचें.

    इलेक्ट्रिक गीजर में पानी भरने के बाद ही चालू करें
    यह सबसे जरूरी सावधानियों में से एक है. इलेक्ट्रिक स्टोरेज गीजर को खाली टैंक में चालू करने से हीटिंग एलिमेंट खराब हो सकता है. इसे ड्राई हीटिंग कहा जाता है. इसलिए बिजली चालू करने से पहले यह पक्का करना जरूरी है कि टैंक में पानी भर चुका है.

    इसके लिए पानी की सप्लाई चालू करें और गीजर का इनलेट वाल्व खोलें. फिर गर्म पानी वाले नल को खोलकर देखें. जब नल से हवा निकलना बंद हो जाए और लगातार पानी आने लगे, तो आमतौर पर इसका मतलब है कि टैंक भर गया है. इसके बाद पाइप और कनेक्शन में रिसाव की जांच करें. सब ठीक होने पर ही बिजली चालू करें.

    अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि पानी सही तरीके से भर रहा है या नहीं, तो गीजर के मैनुअल के मुताबिक काम करें या टेक्नीशियन की मदद लें. खाली या आधे भरे टैंक में गीजर चलाने का जोखिम न लें.

    बिजली का स्विच और वायरिंग भी जांचें
    गीजर ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाला उपकरण है. इसलिए उसका बिजली कनेक्शन सही होना जरूरी है. पुराने या ढीले तार, खराब स्विच, गलत अर्थिंग और पानी के संपर्क में आया बिजली का हिस्सा करंट लगने का खतरा बढ़ा सकता है.

    गीजर के लिए सही क्षमता वाला बिजली कनेक्शन, अच्छी अर्थिंग और करंट लीक होने पर सप्लाई बंद करने वाला सुरक्षा उपकरण होना चाहिए. इसे RCCB या ELCB कहा जाता है. यह बिजली के रिसाव का पता लगाकर सप्लाई काटने में मदद करता है. अगर आपको नहीं पता कि आपके घर में यह सुरक्षा मौजूद है या ठीक से काम कर रही है, तो किसी योग्य इलेक्ट्रिशियन से जांच कराएं.

    अगर गीजर चालू करते ही बिजली का सुरक्षा स्विच गिर जाता है, चिंगारी निकलती है या जलने की गंध आती है, तो उसे बार-बार चालू करने की कोशिश न करें. बिजली की सप्लाई बंद कराकर जांच करवाएं. गीजर या उसके स्विच को गीले हाथों से न छुएं.

    गीजर का सेफ्टी वाल्व क्यों जरूरी है?
    स्टोरेज गीजर में पानी गर्म होने पर टैंक के अंदर दबाव बढ़ता है. इस दबाव को सुरक्षित सीमा में रखने के लिए सेफ्टी या प्रेशर-रिलीफ वाल्व दिया जाता है. अगर यह वाल्व खराब हो जाए या बंद हो जाए, तो दबाव बढ़ने पर खतरा पैदा हो सकता है.

    सर्दियों में पहली बार गीजर चालू करने से पहले यह देख लें कि वाल्व और उससे जुड़ा पाइप बाहर से ठीक दिखाई दे रहा है या नहीं. उसे बंद, मोड़ा या किसी चीज से ढका नहीं होना चाहिए. अगर वाल्व से लगातार पानी टपक रहा है, उसमें जंग लगी है या वह खराब दिखाई देता है, तो गीजर इस्तेमाल करने से पहले सर्विस टेक्नीशियन से जांच कराएं. इस वाल्व को खुद खोलने या उसकी मरम्मत करने की कोशिश न करें.

    कई महीनों से बंद है तो सर्विस कब जरूरी है?
    अगर गीजर पिछले साल से सर्विस नहीं हुआ है, पानी गर्म होने में ज्यादा समय लगता है या इस्तेमाल के दौरान खटखटाने जैसी आवाज आती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले सर्विस कराना बेहतर है. पानी में मौजूद मिनरल्स से टैंक और हीटिंग एलिमेंट पर परत जम सकती है. इससे गीजर की गर्म पानी बनाने की क्षमता कम हो सकती है और बिजली की खपत बढ़ सकती है.

    सर्विस के दौरान टेक्नीशियन टैंक, हीटिंग एलिमेंट, तापमान नियंत्रित करने वाले सिस्टम, सेफ्टी वाल्व और जरूरी बिजली कनेक्शन की जांच कर सकता है. गीजर को खोलकर सफाई करना, अंदर के हिस्सों को बदलना या टैंक खाली करना खुद करने के बजाय ट्रेन्ड टेक्निशियन से कराना सेफ है. सर्विस कितनी बार जरूरी है, यह गीजर के मॉडल, पानी की क्वॉलिटी और कंपनी के निर्देशों पर निर्भर करता है.

    गैस वाला गीजर है तो इन बातों को न करें नजरअंदाज
    गैस से चलने वाले गीजर में बिजली के अलावा गैस जलने से जुड़ा जोखिम भी होता है. इसे बंद बाथरूम या ऐसी जगह नहीं लगाना चाहिए जहां हवा आने-जाने का रास्ता न हो. गैस जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड बन सकती है. यह जहरीली गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसे पहचानना आसान नहीं है. इसकी वजह से सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी और गंभीर स्थिति में जान का खतरा हो सकता है.

    गैस गीजर का इस्तेमाल करने से पहले यह देख लें कि हवा आने-जाने के रास्ते और धुआं बाहर निकालने वाला पाइप बंद न हो. अगर गैस की गंध आए, तो गीजर बंद करें और सुरक्षित तरीके से गैस की सप्लाई रोकें. माचिस न जलाएं और बिजली के स्विच न चलाएं. जगह से बाहर निकलकर गैस सेवा या संबंधित एक्सपर्ट से मदद लें. गैस गीजर को बंद बाथरूम में चलाना सुरक्षित नहीं है.

    तापमान बहुत ज्यादा न रखें, बच्चों को भी रखें सुरक्षित
    गीजर का पानी बहुत गर्म होने पर त्वचा जल सकती है. बच्चों और बुजुर्गों के मामले में खास सावधानी जरूरी है. गीजर का तापमान अपनी जरूरत के हिसाब से रखें और नहाने से पहले पानी का तापमान जांच लें. छोटे बच्चों को गर्म पानी के नल या गीजर के स्विच के साथ अकेला न छोड़ें.

    गीजर को जरूरत से ज्यादा देर तक चालू रखने से बचें. पानी गर्म हो जाने पर उसे बंद कर दें और नहाने से पहले बिजली बंद करना एक्स्ट्रा सावधानी हो सकती है, खासकर अगर घर की वायरिंग पुरानी है या सुरक्षा को लेकर संदेह है. हालांकि, बिजली बंद कर देना खराब अर्थिंग या खराब वायरिंग का विकल्प नहीं है. इन समस्याओं को ठीक कराना जरूरी है.

    इन संकेतों को देखकर गीजर तुरंत बंद कर दें
    अगर गीजर से जलने की स्मेल आए, बिजली का स्विच बार-बार गिरने लगे, पानी असामान्य रूप से गर्म हो, टैंक या पाइप से भाप निकले, तेज खटखटाहट सुनाई दे या पानी लगातार रिसे, तो उसे इस्तेमाल न करें. बिजली या गैस की सप्लाई सुरक्षित तरीके से बंद करें और विशेषज्ञ से जांच कराएं. गीजर के सुरक्षा सिस्टम को हटाकर या बाईपास करके चलाना खतरनाक हो सकता है.

  • लुधियाना में वीजा कंसल्टेंट के दफ्तर पर ताबड़तोड़ गोलियां, बाइक सवार हमलावर फरार

    लुधियाना में वीजा कंसल्टेंट के दफ्तर पर ताबड़तोड़ गोलियां, बाइक सवार हमलावर फरार

    लुधियाना.

    लुधियाना के पॉश इलाके मॉडल टाउन एक्सटेंशन में बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने एक वीजा कंसल्टेंसी के दफ्तर को निशाना बनाकर फायरिंग की। शुरुआती पड़ताल में यह मामला रंगदारी के लिए धमकी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, क्योंकि पीड़ित को पहले भी लगातार धमकियां मिल रही थीं।

    रविवार देर रात दो अज्ञात हमलावर एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और 'राइटवे वीजा कंसल्टेंट्स' के दफ्तर के बाहर रुककर दहशत फैलाने के इरादे से 2 से 3 राउंड गोलियां चलाईं। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। सूत्रों और शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, इस सनसनीखेज वारदात की जड़ें पुरानी धमकियों और रंगदारी से जुड़ी हो सकती हैं। पुलिस को यह जानकारी मिली है कि वीजा कंसल्टेंट के दफ्तर को चलाने वाले पीड़ित को पहले भी कई बार धमकियां मिल चुकी थीं और उससे पैसों की डिमांड की जा रही थी। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन धमकियों के पीछे किस गैंग या शख्स का हाथ है और बदमाशों द्वारा कितनी रकम की मांग की गई थी।

    वारदात की सूचना मिलते ही मॉडल टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। मॉडल टाउन के एसएचओ गुरशिंदर कौर ने बताया कि पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं और आसपास के तमाम रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि बदमाशों के आने-जाने के रूट का पता चल सके। फिलहाल पुलिस पीड़ित के आधिकारिक बयानों को दर्ज कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बयानों के आधार पर ही इस पूरी वारदात की परतें खुल सकेंगी और यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस फायरिंग के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस की विशेष टीमें आरोपियों की शिनाख्त कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।

  • फटी एड़ियों से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय, केला-शहद से लेकर वैसलीन तक आएंगे काम

    फटी एड़ियों से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय, केला-शहद से लेकर वैसलीन तक आएंगे काम

    क्या आप भी ऐसी चप्पलें पहनते हैं, जिनमें एड़ियां छिप जाएं? क्या आपकी एड़ियों में भी चीस मचती है? अगर हां, तो ज्यादातर मामलों में एड़ियों का फटना ही इसकी वजह होता है. कुछ लोग सोचते हैं कि एड़ियां सिर्फ और सिर्फ सर्दियों में फटती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. मौसम बदलने पर भी फटी एड़ियां काफी परेशान करती हैं. एड़ियों में इतनी दरारें पड़ जाती हैं कि चलने में दर्द होने लगता है और कई बार लोगों के सामने चप्पल या सैंडल उतारने में भी झिझक महसूस होती है. लोग अक्सर चेहरे और बालों की देखभाल तो खूब करते हैं, लेकिन पैरों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं जिसकी वजह से एड़ियां फटती हैं.

    फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए लोग बाजार से महंगी क्रीम और लोशन खरीदते हैं. अगर आपकी एड़ियां भी रूखी और फटी हुई हैं, तो हर बार महंगे फुट क्रीम या ट्रीटमेंट पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. रसोई में मौजूद कुछ चीजें पैरों की स्किन को मॉइस्चराइज करने और डेड स्किन हटाने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, अगर एड़ियों में गहरी दरारें, खून या इंफेक्शन है तो घरेलू नुस्खों के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.

    क्यों फटती हैं एड़ियां?
    एड़ियों के फटने की कई वजहें हो सकती हैं. बहुत देर तक खड़े रहना, ज्यादा वजन, गलत साइज के जूते-चप्पल पहनना, स्किन का ज्यादा ड्राई होना और पैरों की सही देखभाल न करना इसकी आम वजहों में शामिल हैं. ऐसे में एड़ियों की स्किन धीरे-धीरे सख्त और रूखी होने लगती है और फिर उसमें दरारें पड़ जाती हैं.

    अगर शुरुआत में ही पैरों की देखभाल शुरू कर दी जाए तो इस समस्या को काफी हद तक बढ़ने से रोका जा सकता है.

    1. केला लगाएंगे तो मुलायम होंगी एड़ियां: केला सिर्फ खाने के काम नहीं आता, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व स्किन को मॉइस्चराइज करने में भी मदद कर सकते हैं. इसमें विटामिन A, B6 और C पाए जाते हैं, जो स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं.

    कैसे इस्तेमाल करें?
    इसके लिए 2 पके हुए केले लें और उन्हें अच्छी तरह मैश करके स्मूद पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को पैरों, खासकर एड़ियों और उंगलियों के आसपास लगाएं. करीब 20 मिनट तक लगा रहने दें और फिर पानी से पैर धो लें. इसे रात में सोने से पहले कुछ दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

    2. शहद से करें पैरों की देखभाल: शहद स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसमें ऐसे गुण भी होते हैं जो रूखी स्किन को शांत करने में मदद कर सकते हैं. इसलिए फटी एड़ियों की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    कैसे इस्तेमाल करें?
    एक टब गुनगुने पानी में करीब 1 कप शहद मिलाएं. पैरों को पहले साफ करें और फिर करीब 20 मिनट तक इस पानी में रखें. इसके बाद पैरों को अच्छी तरह सुखाकर मॉइस्चराइजर लगा लें. रात में सोने से पहले इस उपाय को रोजाना किया जा सकता है.

    3. वेजिटेबल ऑयल से रातभर रखें नमी लॉक: रसोई में रखा वेजिटेबल ऑयल भी रूखी एड़ियों के लिए काम आ सकता है. तेल स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है और रूखी-सूखी स्किन को सॉफ्ट करने में मदद कर सकता है.

    कैसे इस्तेमाल करें?
    सबसे पहले पैरों को साफ करके अच्छी तरह सुखा लें. अब 2 चम्मच वेजिटेबल ऑयल लेकर एड़ियों और पैर की उंगलियों पर अच्छी तरह लगाएं. इसके बाद साफ और आरामदायक कॉटन के मोजे पहनकर सो जाएं. रातभर तेल लगा रहने से पैरों की स्किन को मॉइस्चर मिल सकता है.

    4. वैसलीन में नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर लगाएं: फटी एड़ियों की देखभाल में वैसलीन काफी काम की चीज है. ये स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाने में मदद करती है, जिससे नमी लॉक रहती है. वहीं नींबू में मौजूद एसिडिक गुण डेड स्किन को ढीला करने में मदद कर सकते हैं.

    कैसे इस्तेमाल करें?
    सबसे पहले पैरों को करीब 15 मिनट तक गुनगुने पानी में भिगोएं. इसके बाद पैरों को सुखा लें. अब 1 चम्मच वैसलीन में नींबू के 4-5 बूंद रस मिलाएं. इस मिश्रण को एड़ियों पर अच्छी तरह लगाएं और ऊपर से कॉटन या आरामदायक मोजे पहनकर रातभर छोड़ दें.

    ध्यान रखें: अगर एड़ियों में गहरी दरार, कट या जलन है तो नींबू लगाने से बचें, क्योंकि इससे जलन बढ़ सकती है.

    5. चावल का आटा, शहद और सिरका से हटाएं डेड स्किन: अगर एड़ियों पर मोटी और डेड स्किन जम गई है तो चावल के आटे से बना स्क्रब मदद कर सकता है. चावल का आटा स्किन की ऊपरी डेड स्किन को हटाने में मदद करता है, जबकि शहद स्किन को नमी देने में मदद करता है.

    कैसे तैयार करें स्क्रब?
    2 चम्मच चावल का आटा, 1 चम्मच शहद और 5-6 बूंद सिरका लें. तीनों चीजों को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें.

    अब पैरों को करीब 10 मिनट तक गुनगुने पानी में भिगोएं और फिर सुखा लें. तैयार पेस्ट को एड़ियों पर लगाकर बहुत हल्के हाथों से स्क्रब करें. इसके बाद पानी से पैर धो लें. इस स्क्रब को हफ्ते में 2-3 बार से ज्यादा न करें और अगर त्वचा में कट या जलन हो तो इसका इस्तेमाल न करें.

    सिर्फ नुस्खे नहीं, रोज की ये आदतें भी जरूरी
    फटी एड़ियों से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खे आजमाना ही काफी नहीं है. पैरों की रोजाना देखभाल भी जरूरी है. नहाने के बाद और रात में सोने से पहले एड़ियों पर अच्छा मॉइस्चराइजर या पेट्रोलियम जेली लगाएं.

    हफ्ते में कुछ बार पैरों को करीब 10 मिनट गुनगुने पानी में भिगोकर मुलायम करें और फिर हल्के हाथों से डेड स्किन हटाएं. इसके बाद मॉइस्चराइजर लगाकर कॉटन के मोजे पहनकर सो सकते हैं. ऐसा करने से पैरों की स्किन में नमी बनी रहने में मदद मिलती है और एड़ियों के ज्यादा फटने का खतरा कम हो सकता है.

  • जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    जमीन की रजिस्ट्री में चंचल कुमारी पाल को मिली 50 प्रतिशत शुल्क की छूट, नामांतरण की परेशानी से भी राहत

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, आर्थिक बचत के साथ आसान हुई नामांतरण की प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से महिलाओं को मिल रहा दोहरा लाभ

    रायपुर, 
    संपत्ति की रजिस्ट्री में आर्थिक बचत और नामांतरण की आसान प्रक्रिया ने दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल को दोहरी राहत दी है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उनका रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है। वहीं, नामांतरण की प्रक्रिया में हुए सुधारों से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करना भी पहले की तुलना में आसान हो गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में श्रीमती पाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले नामांतरण से जुड़े कार्यों में परेशानी होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया अधिक सहज और सुविधाजनक हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन व्यवस्था में नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसी पहल से नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ अनावश्यक कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिल रही है।

    महिलाओं के लिए आधा हुआ पंजीयन शुल्क, चंचल को मिला आर्थिक लाभ

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की रियायत का उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे संपत्ति पंजीयन पर होने वाला खर्च कम हुआ और उन्हें आर्थिक राहत मिली।

    राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है।

    श्रीमती पाल ने इस पहल को महिलाओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि पंजीयन शुल्क में कमी से आर्थिक बोझ घटा है। यह सुविधा महिलाओं को अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने के लिए प्रोत्साहित करने में भी सहायक है।

    पहले नामांतरण में होती थी परेशानी, अब प्रक्रिया हुई सरल

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने पंजीयन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से मिली सुविधा का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण से संबंधित कार्यों में परेशानी होती थी और प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। अब नामांतरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हुई है।

    पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

    श्रीमती पाल ने बताया कि नामांतरण की प्रक्रिया आसान होने से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिली है। उनके लिए यह बदलाव पंजीयन शुल्क में आर्थिक राहत के साथ एक अतिरिक्त लाभ के रूप में सामने आया है।

    संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत का उद्देश्य पंजीयन का आर्थिक भार कम करने के साथ संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

    अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार है। पंजीयन शुल्क में कमी से महिलाओं और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।

    दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल का अनुभव दर्शाता है कि शुल्क में रियायत और पंजीयन सेवाओं में सुधार से महिलाओं को आर्थिक एवं प्रक्रियागत दोनों स्तरों पर राहत मिल रही है।

    मुख्यमंत्री और वित्त एवं पंजीयन मंत्री के प्रति जताया आभार

    श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट और नामांतरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

    सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही बदलाव की कहानियां

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

    दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। उनके लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि अपने नाम संपत्ति पंजीयन कराने में मिली महत्वपूर्ण सुविधा है। वहीं, नामांतरण की सरल प्रक्रिया ने संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सहज बनाया है। इस तरह पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधार महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रहे हैं।

  • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार

    अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार

    प्रदेश में 3.67 करोड़ से अधिक परिवारों की दहलीज तक निरंतर पहुंच रहा राशन, बिना किसी भेदभाव पहुंचा योजनाओं का लाभ

    तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में अंत्योदय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार निरंतर और समर्पित भाव से कार्य कर रही है। भुखमरी और कुपोषण को समाप्त कर हर नागरिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के संकल्प का ही नतीजा है कि प्रदेश का सार्वजनिक वितरण तंत्र आज देश के सबसे विश्वसनीय मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। खाद्य एवं रसद विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में कुल 3,67,52,818 कार्डधारक परिवारों के 14,71,04,181  लाभार्थियों तक नियमित और पारदर्शी रूप से खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के संवेदनशील विजन के चलते बिना किसी जाति, वर्ग या क्षेत्रीय भेदभाव के राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे करोड़ों वंचित परिवारों को सुरक्षा और आत्मसम्मान दोनों प्राप्त हुए हैं।

    लखनऊ मंडल में रिकॉर्ड 1.72 करोड़ लाभार्थी: जन-जन तक सरकारी गारंटी पहुंचाने में अव्वल
    प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में लखनऊ मंडल खाद्यान्न सुरक्षा के कुशल क्रियान्वयन में शीर्ष स्थान पर उभरा है। मंडल के छह जनपदों में कुल 45,24,479 राशन कार्ड धारक परिवारों के 1,72,13,915 सदस्यों को पोषण सुरक्षा का सीधा और नियमित लाभ मिल रहा है।

     सीतापुर: 9,25,642 राशन कार्डधारक 34,66,349 लाभार्थी
     लखीमपुर खीरी: 8,67,320 राशन कार्डधारक 31,20,657 लाभार्थी
     हरदोई: 8,00,618 राशन कार्डधारक 31,06,086 लाभार्थी
     लखनऊ: 7,56,120 राशन कार्डधारक 30,23,717 लाभार्थी
     उन्नाव: 6,14,246 राशन कार्डधारक 23,11,523 लाभार्थी
     रायबरेली: 5,60,533 राशन कार्डधारक 21,85,583 लाभार्थी

    सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में 31 से 34 लाख से अधिक नागरिकों का यह शत-प्रतिशत कवरेज प्रमाणित करता है कि योगी सरकार की प्रशासनिक मशीनरी दूरदराज के गांवों तक निरंतर सक्रियता से काम कर रही है।

    तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त
    पूर्ववर्ती सरकारों में राशन वितरण के दौरान घटतौली, अपात्रों के कार्ड और कालाबाजारी की जो समस्याएं दशकों से बनी हुई थीं, योगी सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उन्हें पूरी तरह जड़ से समाप्त कर दिया है। प्रदेश की प्रत्येक उचित दर दुकान पर ई-पॉस मशीनों की स्थापना और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाकर वितरण को पूर्णतः पारदर्शी कर दिया गया है। तकनीक के इस सटीक समन्वय से फर्जीवाड़े पर विराम लगा है और यह सुनिश्चित हुआ है कि गोदाम से निकलने वाले अनाज का एक-एक दाना केवल और केवल असली जरूरतमंद की थाली तक ही पहुंचे।

    एक देश, एक राशन कार्ड से मिली नई मजबूती: कामगारों का पलायन भी नहीं रोक पाएगा निवाला
    रोजी-रोटी और रोजगार के सिलसिले में अपने गृह जनपद या राज्य से बाहर जाने वाले गरीब कामगारों व प्रवासी श्रमिकों के लिए यह व्यवस्था वरदान साबित हुई है। योगी सरकार ने केंद्र की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति के साथ कदमताल करते हुए राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी को इतने सरल और सुगम तरीके से लागू किया है कि कोई भी लाभार्थी राज्य के किसी भी जिले या देश के किसी भी कोने से अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकता है। इस पहल ने श्रमिकों को घर-परिवार से दूर रहने पर भी खाद्य सुरक्षा का अटूट भरोसा दिया है।

    अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार
    योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम और पात्र गृहस्थी परिवारों को प्रति यूनिट 5 किलोग्राम अनाज का नियमित आवंटन सामाजिक विषमता की खाई को पाटने का सशक्त माध्यम बना है। अनाज की चिंता से मुक्त होकर गरीब परिवार अब अपनी बचत को बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए साधनों में लगा रहे हैं। निरंतर नीतिगत सुधारों, जमीनी निगरानी और जनहितैषी प्राथमिकताओं के बल पर योगी सरकार का यह कल्याणकारी मॉडल आज प्रदेश के 14 करोड़ से अधिक नागरिकों के विश्वास और सम्मान का सबसे मजबूत आधार बन चुका है।