Author: NewseDay

  • 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे।

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी

    शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है।

    विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

    विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

     

  • ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ से सुगम हो रही पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया

    ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ से सुगम हो रही पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदेश के 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान किए गए। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    17 जिलों के 82 हितग्राहियों को मिला लाभ

    स्वामित्व योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 34, हरदा में 10 और सिंगरौली में 6 हितग्राहियों के संपत्ति दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। डिंडोरी, मंडला और रायसेन में 5-5, जबकि अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर में 3-3 हितग्राहियों के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण हुआ है। इसी प्रकार अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में एक-एक हितग्राही के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है।

    ग्रामीणों को संपत्ति के वैधानिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण का आधार

    स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है।

    छिंदवाड़ा में पटवारी ने प्रदर्शित की डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया

    छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में पटवारी  सुनील गागड़े ने ‘सारा ऐप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।

    स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप देने और शासकीय सेवाओं को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है। 

  • पर्यटन नवाचार, रचनात्मकता, पर्यावरण-अनुकूल पहल और सांस्कृतिक विरासत के प्रभावी प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार

    पर्यटन नवाचार, रचनात्मकता, पर्यावरण-अनुकूल पहल और सांस्कृतिक विरासत के प्रभावी प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार

    भोपाल 

    सचिव पर्यटन और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाते हुए हमारा फोकस पर्यटन क्षेत्र में "ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस" को मजबूत करना है। मध्यप्रदेश निवेश, नवाचार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 के लिए एक सशक्त पर्यटन रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश पर्यटन निवेश, सुगम व्यावसायिक प्रक्रियाओं और विविध पर्यटन अनुभवों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाए।

    सचिव डॉ. इलैयाराजा ने बताया कि हम “3Gs” पर काम कर रहे है, जिनमें गाइड (Guides), गाइडलाइंस (Guidelines) और गियर (Gear) शामिल हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों को अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश पर्यटन नीति का उद्देश्य बड़े निवेशकों के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों, ग्रामीण समुदायों और होमस्टे संचालकों को भी पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन का लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM) 2026 के तीसरे दिन बीटूबी मीटिंग्स के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया। इसका उद्देश्य प्रदर्शकों की रचनात्मकता, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल पहलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश की पर्यटन विरासत, कला एवं शिल्प के प्रभावी प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना रहा। सम्मान समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक  आशीष कुमार, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक  दिलीप कुमार यादव और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

    समारोह में मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद ऑर्गनाइजिंग कमेटी के 36 सदस्यों और 52 स्पॉन्सर्स को सम्मानित किया गया, फिर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए।

    सर्वश्रेष्ठ टेबल स्पेस

    प्रथम: टूरिज्म विलेज धोबा। बैगा जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, लोककलाओं और ग्रामीण जीवन के वास्तविक अनुभव इसकी विशेषता हैं, जहां पर्यटक स्थानीय परिवारों के साथ रहकर जनजातीय परंपराओं और प्रकृति से जुड़ सकते हैं।

    द्वितीय: वीवर्स पैराडाइज को बुनकरों और हथकरघा परंपरा को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुति के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (6 वर्ग मीटर)

    प्रथम: बैम्बू राज। बांस से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से उपयोगिता, प्राकृतिक सौंदर्य और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल के लिए।

    द्वितीय: जिप्सी एडवेंचर्स। जंगल के समीप कैंपिंग, साइकिलिंग अभियान, ट्रेकिंग और तारों के अवलोकन जैसे प्रकृति-आधारित रोमांचक अनुभवों के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर)

    प्रथम: कुनो रिसॉर्ट। कुनो क्षेत्र की वन्यजीव संपदा और प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन अनुभवों से जोड़ने वाली प्रस्तुति के लिए।

    द्वितीय: यारनगर जंगल रिसॉर्ट। जंगल और प्रकृति-आधारित पर्यटन की प्रभावी प्रस्तुति के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर से अधिक)

    प्रथम: एमपी एस्केप्स। मध्यप्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को विशेष रूप से तैयार किए गए यात्रा कार्यक्रमों के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए।

    द्वितीय: शंभाला। भोपाल स्थित यह प्राकृतिक पर्यटन स्थल जैविक फार्म, हरियाली से घिरे आवास, फार्म टूर और प्रकृति के बीच विश्राम के अनुभवों के लिए जाना जाता है।

    सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल स्टॉल

    प्रथम: वैन वाइब। पर्यावरण के प्रति संवेदनशील स्टॉल प्रस्तुति के लिए।

    मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ विषयगत प्रस्तुति

    संयुक्त प्रथम: एमपी टूर्स एवं ट्रैवलिशियस एमपी। दोनों संस्थाओं को प्रदेश की पर्यटन पहचान को विषयगत रूप से प्रस्तुत करने के लिए सम्मानित किया गया। एमपी टूर्स वन्यजीव, विरासत, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खानपान और ग्रामीण अनुभवों को समाहित करती यात्राओं का आयोजन करती है।

    सर्वश्रेष्ठ कला एवं शिल्प प्रदर्शनी

    प्रथम: जरी जरदोजी में ताजवर खान को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश की पारंपरिक कढ़ाई कला, बारीक हस्तकारीगरी और धात्विक धागों से तैयार अलंकरण इसकी विशिष्ट पहचान हैं, जो प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा को दर्शाती है।

    द्वितीय: वुड क्राफ्ट में रीना भूरिया को लकड़ी पर आधारित हस्तशिल्प एवं कलात्मक कारीगरी के प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। 

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 का यह पुरस्कार समारोह प्रदेश के पर्यटन उद्यमियों और कारीगरों की रचनात्मकता तथा प्रतिबद्धता का उत्सव रहा। जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव पर्यटन, हस्तशिल्प और पर्यावरण-अनुकूल पहलों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने मध्यप्रदेश की विविधता और समृद्ध विरासत को सशक्त रूप से सामने रखा।

  • राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं से सीखेंगे पूर्वोत्तर के राज्य, जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का भी करेंगे दौरा

    राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं से सीखेंगे पूर्वोत्तर के राज्य, जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का भी करेंगे दौरा

    जयपुर
     राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर पहुंचा। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के विस्तार, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया।

    दो दिवसीय अध्ययन दौरे में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में प्रतिनिधिमंडल को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान) और राजनेट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

    कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में पहले से संचालित सफल डिजिटल परियोजनाओं के अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।

     नंद कुमारम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों की सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वहां प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आमजन की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी।

    राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने और लाभ वितरण में त्रुटियां कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सके।

     नंद कुमारम ने डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने पर भी जोर दिया।

    कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक  अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे
    दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इसके बाद अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करेंगे।

     

  • अम्बिकापुर में आयोजित हुई समान नागरिक संहिता पर विशाल बैठक

    अम्बिकापुर में आयोजित हुई समान नागरिक संहिता पर विशाल बैठक

    रायपुर

    समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों के विचार एवं सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से सरगुजा संभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समूह चर्चा और बैठक का आयोजन गुरुवार को अम्बिकापुर स्थित शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया गया। इस बैठक में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों से एक हजार से अधिक गणमान्य नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों तथा निगम, मंडल एवं आयोग के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्री एम.के. राउत (यूसीसी समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता), डॉ. ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्या), श्री श्याम लाल धावड़े (उच्च स्तरीय समिति के सचिव एवं आयुक्त रायपुर संभाग), श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा (सरगुजा संभागायुक्त) उपस्थित रहे।

    इन प्रमुख मुद्दों पर खुलकर रखी गई राय

      बैठक के दौरान समिति के समक्ष विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न पक्षों ने खुलकर अपने सुझाव और विचार रखे। सत्र के दौरान उपस्थित समाज प्रतिनिधियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की मूल अवधारणा, इसके विभिन्न पहलुओं और समिति द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

    व्यापक सामाजिक भागीदारी

    इस बैठक में सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले पांचों जिलों-सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर एवं कोरिया के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पंडो समाज, उरांव समाज, सर्व आदिवासी समाज, गोंड समाज, केवट समाज, नगेशिया समाज, बिंझिया समाज, पनिका समाज, यादव समाज, ब्राह्मण समाज, स्वर्णकार समाज, रोमन कैथोलिक समाज, मझवार समाज, रजवार समाज, साहू समाज, चेरवा समाज, मुण्डा समाज, चिक समाज, मुस्लिम सुन्नी समाज, अंजुमन इस्लामिया कमिटी, सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, रौनियार समाज और राजपूत समाज सहित विभिन्न संगठनों के लोगों ने लिखित एवं मौखिक रूप से अपने अभिमत प्रस्तुत किए।

    सुझावों के आधार पर तैयार होगा ड्राफ्ट

     समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वर्गों और संगठनों से प्राप्त सभी सुझावों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन सुझावों के संकलन और विश्लेषण के बाद ही समान नागरिक संहिता का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    ऑनलाइन माध्यम से भी दे सकते हैं सुझाव

    समिति ने नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि जो लोग इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। अपने विचार भेजने के लिए आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in या ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।

  • ग्रामीण संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं के रंगों से सजा पर्यटन ग्राम पंचवटी

    ग्रामीण संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं के रंगों से सजा पर्यटन ग्राम पंचवटी

    भोपाल

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 एग्जिबिशन में पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, तकनीक, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन के विविध आयाम आकर्षण का केंद्र बने रहे। आयोजन में लगाए गए 177 स्टॉल्स के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित देश-विदेश के पर्यटन स्थलों, होटल एवं रिसॉर्ट, ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होमस्टे, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को व्यावसायिक मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावसायिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना और मध्यप्रदेश को प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में वैश्विक पहचान दिलाना है।

    तकनीक और पर्यटन स्थलों का संगम बना मध्यप्रदेश पर्यटन पवेलियन

    मध्यप्रदेश पर्यटन के पवेलियन में प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव पर्यटन और विविध पर्यटन अनुभवों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बड़ी डिजिटल स्क्रीन, इंटरैक्टिव कियोस्क और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और वहां उपलब्ध अनुभवों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

    पवेलियन का विशेष आकर्षण AI आधारित डिजिटल पहल और AI अवतार ‘मोगली’ है। मोगली के माध्यम से आगंतुक मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और अपनी रुचि के अनुरूप यात्रा विकल्पों के बारे में संवादात्मक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह AI अवतार पर्यटकों की पसंद और यात्रा संबंधी जरूरतों के आधार पर संभावित यात्रा कार्यक्रम (इटिनरेरी) तैयार करने में भी सहायता करता है। इस पहल के माध्यम से मध्यप्रदेश पर्यटन ने डिजिटल नवाचार को पर्यटकों की यात्रा योजना से जोड़ने का प्रयास किया है।

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में ग्रामीण पर्यटन के प्रामाणिक अनुभवों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष ग्रामीण पर्यटन प्रदर्शनी तैयार की गई है। इसमें पर्यटक पारंपरिक होमस्टे, बैलगाड़ी की सवारी, स्थानीय लोक संगीत कलाकारों की प्रस्तुतियों और मिट्टी के बर्तन बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं के माध्यम से गांवों की समृद्ध संस्कृति और जीवनशैली से रूबरू हो रहे हैं। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य ग्रामीण परिवेश, स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और पारंपरिक कौशल को पर्यटन से जोड़ते हुए पर्यटकों को संपूर्ण ग्रामीण अनुभव प्रदान करना है। साथ ही, यह पहल स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने तथा ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

    वहीं, कला एवं शिल्प के स्टॉल्स पर बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, बटिक प्रिंट और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध रचनात्मक विरासत प्रदर्शित की जा रही है। ये पहल स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े उद्यमियों को व्यापक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाओं के साथ जिम्मेदार पर्यटन पर जोर

    MPTM 2026 में पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आयोजन को पूरी तरह सिंगल-यूज प्लास्टिक मुक्त और पेपरलेस रखने की व्यवस्था की गई है। अतिथियों के लिए स्थानीय जूट एवं कपड़े से बनी किट, पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और कुल्हड़ों तथा पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    अतिथियों के आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के उपयोग के माध्यम से कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, B2B बैठकों के जरिए पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और जिम्मेदार पर्यटन से जुड़े अवसरों एवं व्यावसायिक साझेदारियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट का तीसरा दिन प्रदेश की पर्यटन विविधता, तकनीकी नवाचार, स्थानीय कला एवं संस्कृति और सतत पर्यटन के प्रति प्रतिबद्धता को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। यह आयोजन पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नए व्यावसायिक अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

     

  • अररिया में नकली नोटों का बड़ा सिंडिकेट बेनकाब, ₹1 लाख देकर खरीदे ₹3 लाख के जाली नोट

    अररिया में नकली नोटों का बड़ा सिंडिकेट बेनकाब, ₹1 लाख देकर खरीदे ₹3 लाख के जाली नोट

     जोकीहाट (अररिया)
     सीमांचल के अररिया जिले में जाली नोटों (एफआईसीएन) के अवैध कारोबार की जड़ें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैली नजर आ रही हैं।

    महलगांव थाना क्षेत्र में बीते पांच अक्टूबर को 500 रुपये के 434 जाली नोटों (कुल दो लाख 17 हजार रुपये) के साथ पकड़े गए वार्ड सदस्य मो. पनाउल्लाह उर्फ पनबुल से पुलिस रिमांड और सघन पूछताछ में एक बड़े अंतरराज्यीय जाली करेंसी सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है।

    तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि जाली नोटों की खेप किसी स्थानीय प्रिंटर से नहीं निकली थी, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल के रणनीतिक शहर सिलीगुड़ी से विशेष सौदे के तहत खरीदा गया था।

    1 लाख असली दो, 3 लाख जाली लो
    पुलिस पूछताछ में वार्ड सदस्य पनाउल्लाह ने कबूल किया है कि इस पूरे सौदे की मुख्य कड़ी उसका करीबी साथी मो. आफताब था, जो फिलहाल फरार चल रहा है। आफताब ही पनाउल्लाह को सिलीगुड़ी लेकर गया था। वहां सिलीगुड़ी के एक शातिर जाली नोट तस्कर आलम से उसकी गोपनीय मुलाकात कराई गई।

    आफताब ने कराई थी आलम से डील
    सिलीगुड़ी में एक लाख रुपये की असली भारतीय करेंसी देकर तीन लाख रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले 500-500 के जाली नोट हासिल किए गए थे। बरामद खेप में से ₹83,000 की राशि या तो आफताब के पास थी या उसे पहले ही कहीं ट्रायल के रूप में खपाया जा चुका था, जिसकी गहनता से छानबीन की जा रही है।

    ग्रामीण हाट-बाजारों और खुदरा दुकानों में खपाने की थी साजिश
    पनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि इस नकली करेंसी को अररिया, जोकीहाट और आसपास के ग्रामीण हाट-बाजारों, पशु मेलों, गल्ला मंडियों और छोटी खुदरा दुकानों में खपाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। ग्रामीण इलाकों में 500 रुपये के नोटों की सूक्ष्म सुरक्षा विशेषताओं (Security Features) की जांच के लिए मशीनें नहीं होती हैं, जिसका फायदा उठाकर यह गिरोह आसानी से जाली नोटों को बाजार में उतार देता था।

    पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि क्या पनाउल्लाह और आफताब इससे पहले भी ऐसी कोई खेप सिलीगुड़ी से लाकर सीमांचल के बाजारों में खपा चुके हैं। इसके लिए पनाउल्लाह के सभी सक्रिय बैंक खातों के लेन-देन, यूपीआई विवरण और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।

    रातों-रात अमीर बनने की हवस
    पुलिस जांच में सामने आया है कि पनाउल्लाह कम समय में अकूत संपत्ति बनाने के फेर में जाली नोटों के इस काले साम्राज्य में उतरा था। हाल के दिनों में उसकी माली हालत में तेजी से बदलाव आया था। उसने जोकीहाट के बरडेंगा में जमीन खरीदकर एक पक्का मकान खड़ा कर लिया था, जिसे वह ग्रामीणों के सामने अपनी ‘कामत’ (कृषि फार्म हाउस) बताता था।

    बरडेंगा में बना लिया पक्का मकान
    पनाउल्लाह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया है। वर्ष 2019 में भी महलगांव थाने में उसके खिलाफ चोरी का संगीन मामला दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी कर चोरी का सामान बरामद किया था।

    सिलीगुड़ी रूट से बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका
    सिलीगुड़ी का इलाका नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के समीप 'चिकन नेक' कॉरिडोर में पड़ता है। पूर्व में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और बीएसएफ द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर से बांग्लादेशी जाली नोट गिरोहों के कई मॉड्यूल पकड़े जा चुके हैं। ऐसे में भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं बरामद जाली नोटों की खेप सीमा पार बांग्लादेश से तो तस्करी कर भारत नहीं लाई गई थी।

    एजेंसियों के कान खड़े
    महलगांव थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने बताया कि मामले की कड़ियां तेजी से जोड़ी जा रही हैं। फरार चल रहे मुख्य बिचौलिए मो. आफताब और सिलीगुड़ी के सप्लायर आलम की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इस सिंडिकेट के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।

     

  • इंदौर पुलिस ने किया चोरी का खुलासा, दोस्त ने ही घर से चुराया करीब डेढ़ करोड़ रुपये का सोना

    इंदौर पुलिस ने किया चोरी का खुलासा, दोस्त ने ही घर से चुराया करीब डेढ़ करोड़ रुपये का सोना

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में चोरी एवं संपत्ति संबंधी अपराधों की रोकथाम तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में इंदौर के थाना लसूड़िया पुलिस ने घर से सोने के बिस्किट एवं आभूषण चोरी होने के मामले का खुलासा करते हुए फरियादिया के साथ रहने वाले उसके दोस्त को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से लगभग 630 ग्राम सोने का बिस्किट, 40 ग्राम सोने की चेन, 2 लाख रुपये नकद और एक Apple iPhone 17 सहित कुल लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने गांव में सरपंची का चुनाव लड़ने और अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए चोरी करना स्वीकार किया है।

    ऐसे हुआ चोरी की वारदात का खुलासा

    फरियादिया निवासी नेपानिया मेन रोड, इंदौर ने थाना लसूड़िया में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 10 अगस्त 2026 से 13 सितंबर 2026 के बीच उनके घर की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी हो गए हैं। रिपोर्ट पर थाना लसूड़िया में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया।  पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह के निर्देशानुसार थाना प्रभारी लसूड़िया के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। विवेचना के दौरान फरियादिया ने बताया कि उनके घर से सोने का बिस्किट एवं अन्य आभूषण चोरी हुए हैं। उनके साथ रहने वाला दोस्त गोपाल जाखड़ घर से जाने के बाद अपना मोबाइल फोन बंद कर चुका था। फरियादिया द्वारा उस पर संदेह जताए जाने के बाद पुलिस ने गोपाल उर्फ गोपी जाखड़, जिला जोधपुर, राजस्थान को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने चोरी करना स्वीकार किया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

    चुनाव लड़ने और महंगे शौक के लिए बनाई चोरी की योजना

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि फरियादिया के साथ रहते समय उसने घर की अलमारी में सोने का बिस्किट देखा था। अगले महीने उसके गांव में सरपंची के चुनाव होने वाले थे और वह चुनाव लड़ने की योजना बना रहा था। चुनाव के खर्च तथा अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने सोने का बिस्किट चोरी करने की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस आरोपी से चोरी की शेष संपत्ति के संबंध में जानकारी जुटा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अपने घरों एवं कीमती सामान की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। पुलिस अपराधों की रोकथाम, चोरी की घटनाओं के खुलासे और नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

     

  • Punjab Politics: अकाली सरकार में महिला DGP की तैनाती का वादा, हरसिमरत बादल ने रैली में किया ऐलान

    Punjab Politics: अकाली सरकार में महिला DGP की तैनाती का वादा, हरसिमरत बादल ने रैली में किया ऐलान

    फरीदकोट.

    शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने फरीदकोट में रैली को संबोधित करते हुए नशे के खिलाफ अपनी पार्टी की प्रस्तावित रणनीति का एलान किया।

    उन्होंने कहा कि पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की सरकार बनने पर नशे के खात्मे के लिए एडीजीपी स्तर की एक महिला पुलिस अधिकारी नियुक्त की जाएगी। इस अधिकारी को विशेष रूप से नशे के खिलाफ अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

    हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘मावा धिया ललकार’ योजना के तहत गांवों में महिलाओं की विशेष फोर्स तैयार की जाएगी। उन्होंने माताओं और बहनों से अपील की कि वे अभी से अपने-अपने गांवों में इस मुहिम के तहत सक्रिय होकर काम शुरू करें।

  • देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को मिला प्रतिनिधित्व, व्यापारियों और उद्योगों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर रखने का मिलेगा अवसर

    देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को मिला प्रतिनिधित्व, व्यापारियों और उद्योगों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर रखने का मिलेगा अवसर

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ द्वारा कर प्रशासन में सुधार के लिए अपनाई गई तकनीकी पहलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा किया गया। इसके साथ ही वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। इससे प्रदेश के व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने किया।

    छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचार बने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय

    छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जीएसटी प्रशासन को अधिक सरल, सटीक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। राज्य में मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से कर प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में विभिन्न पहल की गई हैं।

    इन तकनीकी नवाचारों का उद्देश्य कर संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण करना, कर अनुपालन में सुधार लाना, संभावित कर अनियमितताओं की समय पर पहचान करना तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ करदाताओं को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए छत्तीसगढ़ के नवाचार

    जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में लागू तकनीक आधारित सुधारों पर तैयार प्रस्तुतीकरण राजस्व सचिव द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुतीकरण को देश के सभी राज्यों के साथ भी साझा किया गया।

    प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि किस प्रकार मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर उपयोग कर कर अनुपालन को मजबूत बनाने, संभावित अनियमितताओं की पहचान करने और करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने में सहायता मिल सकती है।

    छत्तीसगढ़ की इन पहलों की सराहना करते हुए अन्य राज्यों को भी राज्य के अनुभवों से सीख लेने तथा अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप इन तकनीकी नवाचारों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के इन नवाचारों को इससे पूर्व राष्ट्रीय समन्वय समिति की छठी बैठक में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

    राष्ट्रीय जीएसटी लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, व्यावहारिक और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी की पहल के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में शामिल किया गया है।

    देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को इस समिति में प्रतिनिधित्व मिलने से जीएसटी कानूनों और प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विचार-विमर्श में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।

    जीएसटी लॉ कमेटी कर कानूनों, नियमों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। इस समिति में विभिन्न राज्यों के अधिकारी कर कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली कठिनाइयों, कानूनी प्रावधानों की व्याख्या से संबंधित मुद्दों तथा व्यापार एवं उद्योग जगत की समस्याओं पर चर्चा करते हैं।

    प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगों की आवाज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगी

    लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व मिलने से प्रदेश के व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, कर सलाहकारों और विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    राज्य में जीएसटी कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, प्रक्रियागत जटिलताओं और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विषयों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। इन विषयों के परीक्षण और विचार-विमर्श के आधार पर आवश्यक सुझाव जीएसटी परिषद के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकेंगे।

    इससे छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर कर नीति एवं प्रक्रियाओं से संबंधित विचार-विमर्श में स्थान मिलेगा। साथ ही जीएसटी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, सरल और करदाताओं के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में राज्य अपनी भूमिका निभा सकेगा।

    तकनीक आधारित कर प्रशासन और व्यापार सुगमता को मिलेगा बढ़ावा

    वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचारों और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    राज्य में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण, विभागीय निगरानी और कर अनुपालन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभागीय कार्यों में दक्षता बढ़ने के साथ करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

    राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की बढ़ती भागीदारी

    जीएसटी प्रशासन में छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और लॉ कमेटी में राज्य को प्रतिनिधित्व मिलना कर प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

    एक ओर राज्य के तकनीकी नवाचारों और अनुभवों को अन्य राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लॉ कमेटी में भागीदारी से छत्तीसगढ़ को जीएसटी कानूनों एवं प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    इन दोनों पहलों से छत्तीसगढ़ में तकनीक आधारित कर प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ व्यापारियों और उद्योगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक जीएसटी व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।