Author: NewseDay

  • Sandpaper Gate: एक कैमरे ने उजागर की ऑस्ट्रेलिया की करतूत, स्मिथ-वॉर्नर पर लगा था 12 महीने का बैन

    Sandpaper Gate: एक कैमरे ने उजागर की ऑस्ट्रेलिया की करतूत, स्मिथ-वॉर्नर पर लगा था 12 महीने का बैन

    नई दिल्ली
     दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज की शुरुआत के साथ ही बॉल टेंपरिंग की घटना एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलियाई टीम इससे पहले जब दक्षिण अफ्रीका पहुंची थी, तब कंगारू खिलाड़ियों ने मैच जीतने के लिए बॉल टेंपरिंग की थी। इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम की बहुत बदनामी हुई थी। हालांकि, हैरान करने ववाली बात यह है कि ब्रॉडकास्टर ने बॉल टेंपरिंग का खुलासा गलती से किया था। फुटबॉल और रग्बी मैच कवर करने की आदत के कारण उन्होंने क्रिकेट में भी गेंद पर कैमरा बनाए रखा और बाद में जूम भी किया। इसी वजह से बेनक्राफ्ट के हाथ में सैंडपेपर दिखा। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की काली करतूत सामने आई।

    केप टाउन टेस्ट के ब्रॉडकास्टर एल्विन नाइकर ने बताया था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की बॉल टेंपरिंग पकड़े जाना एक संयोग ही था। बीबीसी के अनुसार उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलियाई टीम जिस तरह से पकड़ी गई, वह सरासर संयोग था। रग्बी और फुटबॉल का प्रसारण बहुत सुनियोजित होता है। पहले कैमरा एक और दो चालू होते हैं, फिर जब खेल रुक जाता है तो क्लोज-अप शॉट्स के जरिए पूरी कहानी दिखाई जाती है।' ऐसा ही क्रिकेट मैच में किया गया तो बॉल टेंपरिंग पकड़ी गई।

    हथेली पर गेंद घिसकर पकड़े गए बेनक्राफ्ट
    नैकर ने बताया कि 2018 की सीरीज खराब माहौल में शुरू हुई थी। पहले दो टेस्ट मैचों में गड़बड़ियों के बावजूद स्थानीय प्रसारक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की बॉल टेंपरिंग पर नजर नहीं रख रहे थे। उन्होंने कहा, 'किसी ने भी मुझे कुछ नहीं बताया। डरबन में पहले टेस्ट में जमकर बवाल हुआ था। इसके बाद पोर्ट एलिजाबेथ में दूसरे टेस्ट मैच में भी हंगामा हुआ। हमें तब भी कुछ समझ नहीं आया। गेंद विकेटकीपर के पास गई, फिर बैनक्रॉफ्ट के पास और वह गेंद को चमका रहे थे। पहले गेंद उसकी पैंट पर थी, फिर अगली गेंद पर, कैमरामैन का ध्यान बैनक्रॉफ्ट पर इसलिए रुका रहा, क्योंकि वह गेंद को अपनी पैंट पर नहीं, बल्कि अपनी हथेली पर रगड़ रहे थे।'

    बड़े लेंस में सामने आई सच्चाई
    नैकर ने कहा, 'जब उसने गेंद फेंकी, तो उसने अपना हाथ जेब में डाला। कैमरामैन ने बड़े-बड़े लेंस वाले कैमरे से जेब पर जूम किया। स्लो-मो ऑपरेटर ने उसे देखा, आगे-पीछे किया फिर जूम किया और सैंडपेपर नजर आया। इसके बाद बेनक्राफ्ट ने सैंडपेपर पैंट में छिपा लिया। इस घटना को ब्रॉडकास्टर ने बार-बार स्क्रीन पर दिखाया। जब बैनक्रॉफ्ट ने स्क्रीन पर देखा तो उसने उसे निकालकर अपनी अंडरवियर में रख लिया। कैमरामैन ने इसे रिकॉर्ड कर लिया। फिर भी यह लाइव नहीं था, हमने रिप्ले चलाया।'

    तीनों खिलाड़ियों पर लगा बैन
    इस घटना के बाद स्मिथ एक लाइव टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की। हालांकि, इसके बाद उन पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 12 महीने का बैन लगाया गया। इसके साथ ही उनसे कप्तानी भी छीन ली गई। वार्नर पर भी इसी तरह 12 महीने का बैन लगाया गया और उन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में कभी भी कप्तान बनने से रोक दिया गया। वहीं, बैनक्रॉफ्ट पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 9 महीने का बैन लगा दिया गया। इसमें हैरान करने वाली बात यह थी कि किसी भी गेंदबाज पर कोई एक्शन नहीं हुआ, जबकि गेंदबाज ही सबसे ज्यादा गेंद के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में यह कैसे संभव था कि किसी भी गेंदबाज को बॉल टेंपरिंग के बारे में जानकारी नहीं थी

  • शहर के समग्र विकास और बेहतर प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

    शहर के समग्र विकास और बेहतर प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

    रायपु

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज रायपुर के जयस्तंभ चौक स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के तीसरे माले में संचालित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) वार रूम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर शहर में यातायात प्रबंधन, महिला सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अवैध निर्माण और खुदाई पर नियंत्रण तथा नागरिकों में नागरिक बोध (सिविक सेंस) विकसित करने से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने और विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

     बोरा ने आईटीएमएस वार रूम में तकनीकी संसाधनों, निगरानी व्यवस्था और उपलब्ध आंकड़ों के उपयोग के विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया। उन्होंने आईटीएमएस वार रूम को सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने शहरी प्रबंधन, विभागीय समन्वय और नागरिक सुविधाओं को अधिक प्रभावी बनाने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

    यातायात व्यवस्था के लिए प्रमुख मार्गों का होगा आकलन

    बैठक में शहर के प्रत्येक प्रमुख मार्ग पर वाहनों की क्षमता, यातायात के दबाव और सड़क की उपलब्ध क्षमता का आकलन करने तथा नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और यातायात संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान की दिशा में काम करना है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और नगर निगम की संयुक्त टीम बनाकर समन्वित प्रयास करने तथा जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।

    सैनिटेशन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर

    प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रमुख मार्गों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई तथा घर-घर कचरा संग्रहण को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने आईटीएमएस की निगरानी व्यवस्था के माध्यम से गंदगी वाले स्थलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। शहर में स्वच्छता एवं सैनिटेशन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने और कचरे के उचित प्रबंधन पर भी चर्चा की गई। स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और स्वच्छ व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    महिला सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर जोर

    शहर में महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने और आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को बेहतर करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। आईटीएमएस के माध्यम से उपलब्ध निगरानी व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। आपदा प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर जोर दिया गया, ताकि आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    अवैध खुदाई और निर्माण पर प्रभावी निगरानी

    बैठक में शहर में अवैध खुदाई और अवैध निर्माण की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। निर्माण स्थलों पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक स्थलों पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकना है।

    जनजागरूकता से मजबूत होगा नागरिक बोध

    बैठक में नागरिकों को यातायात नियमों के पालन, सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और शहर की व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और नगर निगम की संयुक्त भागीदारी से जनजागरूकता अभियान चलाने की दिशा में काम करने पर चर्चा हुई। इसके माध्यम से नागरिकों में सिविक सेंस विकसित करने और शहर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जनभागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है।

    प्रमुख सचिव  बोरा के आईटीएमएस के निरीक्षण के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमित अग्रवाल, रायपुर नगर निगम के आयुक्त  संबित मिश्रा, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, डीसीपी सु अर्चना सिंह, एसीपी ट्रैफिक सु स्नेहिल साहू, संयुक्त संचालक  एस.के. सुंदरानी, अपर आयुक्त  लोकेश्वर साहू, उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि और अधीक्षण अभियंता  प्रदीप यादव भी मौजूद थे।

  • कैथल में पराली प्रबंधन योजना का असर, 629 टीमें कर रहीं निगरानी; पिछले साल मिले थे 11 मामले

    कैथल में पराली प्रबंधन योजना का असर, 629 टीमें कर रहीं निगरानी; पिछले साल मिले थे 11 मामले

    कैथल
    सरकार की तरफ से चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आने लगी है। जिले में अब तक 60 हजार एकड़ में धान फसल की कटाई हो चुकी है, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाएं हैं। धान कटते ही किसान बेलर से अवशेषों की गांठें बनवा रहे हैं, जो फैक्टरी में भेजी जा रही है। इससे किसान को भी फायदा हो रहा है और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ रही है।

    बता दें पिछले साल जिले में कुल 11 लोकेशन सामने आई थी। 13 अक्टूबर को पहली लोकेशन धान अवशेष की मिली थी, लेकिन इस बार राहत की बात ये है की 60 हजार एकड़ में धान कटाई होने के बाद भी किसी किसान ने अवशेष नहीं जलाए हैं।

    वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की टीम ने किया कैथल जिले का दौरा
    जिले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मुख्य वैज्ञानिक प्रवीण गुप्ता ने कैथल जिले का दौरा किया। उन्होंने कई ब्लाकों में कृषि विभाग के साथ धान अवशेष प्रबंधन को लेकर खेतों का दौरा किया। कई भी इस तरह की लोकेशन नहीं मिली है की खेतों में धान अवशेष जलाए जा रहे हो।

    बता दें कि जिले में धान अवशेष जलाने से रोकने के लिए कुल 629 टीमों का गठन किया हुआ है, ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को धान अवशेष जलाने से रोकने बारे जागरूक कर रही हैं। इसके साथ-साथ धान अवशेष खेतों में मिलाने के फायदे भी बताए जा रहे हैं।

    60 हजार किसानों ने किया साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण : मलिक
    कृषि विभाग के कार्यकारी अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आ रही है। किसान इस योजना से जुड़कर धान अवशेष खेतों में जलाने की बजाए इसका प्रबंधन करने में लगे हैं। इस बार 60 हजार किसानों ने साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाया है।

    धान अवशेष न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की राशि सरकार की तरफ से दी जा रही है। अब तक 60 हजार एकड़ में धान कट चुका हैं, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाए हैं। पिछले साल 11 लोकेशन सामने आई थी। वहीं 48 हजार किसानों को 50 करोड़ की राशि योजना के तहत दी गई थी। पूरे जिले का एक बार सर्वे हो चुका है, एक भी लोकेशन धान अवशेष की सामने नहीं आई है।

  • सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

    सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

    रायपुर

      डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
     
    डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री  मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

    सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है।

    अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।

    रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार

    मुख्यमंत्री  साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है।

    डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।

     शर्मा ने कहा कि पुलिस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल खाते खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी की दर में भी वृद्धि हुई है।

    उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान जनभागीदारी और नवाचार से ही संभव है। इसी सोच के साथ ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने अनेक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं।

    सात विषयों के माध्यम से गांव-शहर तक पहुंची साइबर जागरूकता

    छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित साइबर जागृति अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

    अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों पर विशेष रूप से नागरिकों को जागरूक किया गया।

    विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों को पहचानने के तरीके बताए गए।

    अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर उनके माध्यम से परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।

    सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

    साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

    भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी कई पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच को और व्यापक बनाया।

    जिलों के नवाचारों ने साइबर जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ा

    अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनेक अभिनव प्रयोग किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई।

    दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर जिले में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

    जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के माध्यम से संचालित विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

    ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए भविष्य की यातायात व्यवस्था के समाधान

    ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के ओवरऑल विजेता  कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ की अवधारणा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।

    उन्होंने उपलब्ध सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारण तथा यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।

    हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित राजधानी के प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग तथा यातायात जाम कम करने से संबंधित समाधान प्रस्तुत किए।

    एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव

    युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी अभिनव सुझाव प्रस्तुत किए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी परिकल्पनाएं शामिल रहीं।

    ट्रैफिक हैकाथॉन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में परीक्षण कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

    विधायक  राजेश मूणत ने कहा कि राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना होगा। यातायात से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष  प्रह्लाद रजक, विधायक  राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर मती मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक  अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

  • गरबा ड्रेस में हथियार प्रदर्शन पड़ा भारी, सिगरेट और पिस्टल दिखाने के मामले में 9 गिरफ्तार

    गरबा ड्रेस में हथियार प्रदर्शन पड़ा भारी, सिगरेट और पिस्टल दिखाने के मामले में 9 गिरफ्तार

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रास गरबा कार्यक्रम के दौरान बनाई गई एक रील सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में कुछ युवतियां गरबा की वेशभूषा में सिगरेट पीते और पिस्टलनुमा वस्तु लहराते नजर आ रही हैं।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की है। इस मामले में सिविल लाइन थाने में अपराध दर्ज कर कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो गरबा टिकट और मेकअप के प्रचार-प्रसार के लिए बनाया गया था। वीडियो में गरबा की पारंपरिक वेशभूषा में युवतियों को सिगरेट पीते और पिस्टलनुमा वस्तु का प्रदर्शन करते देखा गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पाबंद करने के लिए बाउंड ओवर की प्रक्रिया भी जारी है।

    धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर पुलिस की चेतावनी
    बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का आपत्तिजनक प्रदर्शन करने तथा सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने ऐसे मामलों में नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। वायरल रील को लेकर हुई इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला चर्चा में है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर कोई भी सामग्री पोस्ट करने से पहले प्रकृति और संभावित प्रभाव का ध्यान रखें।

  • हाईवे पर कार में लगी आग, डायल-112 की तत्परता से 07 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल कर अस्पताल पहुँचाया

    हाईवे पर कार में लगी आग, डायल-112 की तत्परता से 07 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल कर अस्पताल पहुँचाया

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा ने एक बार फिर त्वरित पुलिस सहायता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र में हाईवे पर कार में आग लगने की घटना के दौरान वाहन में सवार सभी 07 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 09 अक्टूबर को डायल-112 पर सूचना प्राप्त हुई कि बोरखली क्षेत्र में हाईवे पर एक कार में आग लग गई है और उसमें सवार लोग वाहन के अंदर फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही थाना राजोद की FRV-14 तथा थाना सरदारपुर की FRV-11 तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुईं।

    मौके पर पहुंचने पर पुलिस टीम ने पाया कि अहमदाबाद से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए जा रही मारुति सुजुकी एर्टिगा कार में अचानक आग लग गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 की दोनों टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार में सवार सभी 07 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। आग के कारण वाहन पूरी तरह जल गया तथा उसमें रखा सामान, कपड़े एवं लगभग 8 हजार रुपये की नकदी भी जल गई। पुलिस टीम की त्वरित प्रतिक्रिया से वाहन में सवार सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सका। बाद में सभी यात्रियों को अन्य वाहन से उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

    तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा से निभाया मानवीय दायित्व

    इस राहत एवं बचाव कार्य में FRV-14, थाना राजोद के  प्रकाश, कांस्टेबल 1125 एवं  तुलसीराम मेडा, पायलट तथा FRV-11, थाना सरदारपुर के  सौरभ मोरे, कांस्टेबल 1210 एवं  नितेश बाबेरिया, पायलट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा का उद्देश्य संकट की स्थिति में नागरिकों तक त्वरित पुलिस सहायता पहुंचाना है। राजोद क्षेत्र की यह घटना दर्शाती है कि आपात परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और मौके पर प्रभावी कार्रवाई नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

     

  • जनकल्याणकारी योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने का माध्यम है मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान: राज्यमंत्री गौर

    जनकल्याणकारी योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने का माध्यम है मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान: राज्यमंत्री गौर

    मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने का सशक्त माध्यम: राज्यमंत्री गौर

    गोविन्दपुरा विधानसभा में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान कार्यक्रम का हुआ आयोजन

    भोपाल 

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि 7 अगस्त से प्रारंभ हुआ मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उत्कृष्ट, संवेदनशील एवं दूरदर्शी सोच का परिणाम है। प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित होने वाले ये शिविर केवल गोविंदपुरा ही नहीं, अपितु पूरे प्रदेश में जन-कल्याण का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए संकल्पित है। यह अभियान एक आदर्श सरकार के सुशासन का सबसे बड़ा परिचायक है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर गोविंदपुरा विधानसभा में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं ।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि एम्स चिकित्सालय, ग्लोबल स्किल्स पार्क, सांदीपनी विद्यालय तथा भेल संस्थान क्षेत्र की प्रगति की संकेतक हैं। आगामी समय में अयोध्या बायपास में आकार लेने वाला 10 लेन मार्ग प्रदेश की विशिष्ट पहचान बनेगा, वहीं नगर निगम द्वारा सीवेज नेटवर्क का निर्माण कराया जा रहा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक नागरिक की समस्याओं का संवेदनशीलता से त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

    मास्टर प्लान में गोविंदपुरा के समग्र विकास के प्रावधान: कलेक्टर श्री मिश्रा

    कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का मूल उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर आमजन तक शासन की कल्याणकारी नीतियों का पारदर्शी लाभ पहुँचाना है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे शिविरों में अपने आवेदनों का पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि उनका त्वरित और व्यवस्थित निराकरण किया जा सके। कलेक्टर श्री मिश्र ने बताया कि हाल ही में जारी भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में गोविंदपुरा क्षेत्र में स्किल्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से संबंधित अनेक महत्वाकांक्षी विकास कार्यों के प्रस्ताव समाहित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा रेखांकित जन-समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।

    कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गौर एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राहियों श्रीमती गिरजा राय, श्री संजीव कुमार मालवीय, श्री अशोक परमार, श्री प्रवेश कन्हारे, सुश्री सीमा परमार तथा श्री केवल बारके को हितलाभ वितरित किए। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में नगर निगम आयुक्त श्रीमती संस्कृति जैन, एसडीएम श्रीमती निधि चौकसे, श्री प्रकाश चंद्र पांडे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • भारतीयों के अपमान पर भारत का सख्त रुख, अमेरिका को जवाब- ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं

    भारतीयों के अपमान पर भारत का सख्त रुख, अमेरिका को जवाब- ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं

    नई दिल्ली/वाशिंगटन 
     भारत ने H-1B वीजा हायरिंग पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की बात की कड़े शब्दों में आलोचना की है और उनके दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।विदेश मंत्रालय ने कहा, 'इससे भारतीयों के लिए मौके तो बनते ही हैं, साथ ही यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, प्रोडक्टिविटी, कॉम्पिटिटिवनेस और नौकरियां पैदा करने में भी मदद करता है, और अमेरिका में शेयरहोल्डर्स की संपत्ति भी बढ़ाता है।'जेडी वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले विदेशियों को बंधुआ मजदूर कहा था। वेंस ने अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को सबसे ज्यादा विदेशी बंधुआ मजदूर रखने वाली कंपनी भी बताया था।

    विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को जारी अपने बयान में कहा कि भारत अमेरिकी श्रम विभाग के उस फैसले से अवगत है, जो कुछ कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से संबंधित है। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होता है।

    भारत ने यह भी कहा किया कि अमेरिका का इतिहास ही विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और इनोवेशन से बना है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के योगदान को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की ओर से की गई टिप्पणियां अनुचित हैं और ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल गहरी आपत्ति पैदा करता है, जिसका संबंध दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से रहा है। भारत ने साफ किया कि वह इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

    अमेरिका ने क्या फैसला लिया है, जिससे भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ी?
    भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी पेशेवरों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर सख्ती कर रहा है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर को आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में कथित गड़बड़ियों और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच कर रहा है। हालांकि, सभी कंपनियों के खिलाफ आरोपों के विस्तृत सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस फैसले का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं। उनके मुताबिक, H-1B वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है।

    वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के साथ बड़ी संख्या में H-1B वीजा का इस्तेमाल किया। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को ‘इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ यानी बंधुआ सेवकों जैसी स्थिति में बताया। उनका तर्क था कि वीजा धारक अपनी नौकरी खोने पर अमेरिका में रहने का अधिकार भी गंवा सकते हैं, जिससे वे अपने नियोक्ता पर अधिक निर्भर हो जाते हैं। यही शब्दावली भारत की आपत्ति की वजह बनी है। भारत का कहना है कि विदेशी पेशेवरों के सामने मौजूद वीजा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन भारतीय प्रतिभाओं के योगदान को इस तरह की अपमानजनक शब्दावली से जोड़ना उचित नहीं है।

    ‘इंडेंचर्ड लेबर’ कहने पर भारत को आपत्ति क्यों?
    ‘इंडेंचर्ड लेबर’ का संबंध ऐसी श्रम व्यवस्था से है, जिसमें कोई व्यक्ति एक निश्चित अवधि तक काम करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट से बंधा होता है। ऐतिहासिक रूप से इस व्यवस्था का इस्तेमाल गुलामी दौर में भी हुआ था। भारत सहित कई देशों के लोगों को कॉन्ट्रैक्ट लेबर के रूप में दूसरे देशों में काम करने के लिए भेजा गया था। कई मामलों में उन्हें शोषण, कठिन परिस्थितियों और सीमित स्वतंत्रता का सामना करना पड़ा।

    H-1B वीजा धारकों की स्थिति ऐतिहासिक अनुबंधित मजदूरों के समान नहीं है। यह अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को रोजगार देने के लिए बनाया गया अस्थायी वर्क वीजा कार्यक्रम है। हालांकि, इस वीजा पर काम करने वाले व्यक्ति की नौकरी और इमिग्रेशन स्थिति के बीच महत्वपूर्ण संबंध होता है। वेंस की टिप्पणी में इसी निर्भरता को आधार बनाया गया है। लेकिन भारत की आपत्ति इस बात पर है कि इस समस्या को समझाने के लिए ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया, जिसका ऐतिहासिक संदर्भ बेहद संवेदनशील है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका का विकास भी उन प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और नवाचार से जुड़ा है, जो अलग-अलग पीढ़ियों में वहां पहुंचे। इसलिए भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणी को भारत ने अनुचित बताया और कहा कि दर्दनाक ऐतिहासिक तथा औपनिवेशिक विरासत से जुड़ी शब्दावली गहरी आपत्ति पैदा करती है।

    जेडी वेंस के बयान की भारत ने की आलोचना
    मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस की टिप्पणियों का भी खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा, 'उनकी बातें बेबुनियाद हैं और इस सच्चाई को नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में बहुत पढ़े-लिखे और कुशल योगदानकर्ता हैं।'

    मंत्रालय ने कहा, 'असल में, अमेरिका का इतिहास खुद कई पीढ़ियों के प्रवासियों से बना है, जिनकी मेहनत, उद्यम और इनोवेशन ने इसकी तरक्की और खुशहाली में योगदान दिया है। ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना, जो दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाती हो, बहुत अपमानजनक है।'

    विदेश मंत्रालय ने कहा, 'PERM, H-1B वीजा प्रोग्राम से अलग है, लेकिन भरोसा दिलाया कि इस प्रोग्राम के तहत एप्लीकेशन सस्पेंड होने से मौजूदा H-1B वीजा की वैलिडिटी या H-1B वीजा होल्डर्स और उनके आश्रितों (डिपेंडेंट्स) के स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।'

    अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों पर आधारित हालिया अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।

  • PERM के जरिए भारतीय IT कंपनियों पर शिकंजा? जानें ट्रंप प्रशासन क्यों कर रहा सख्ती

    PERM के जरिए भारतीय IT कंपनियों पर शिकंजा? जानें ट्रंप प्रशासन क्यों कर रहा सख्ती

    नई दिल्‍ली
     अमेरिका में बसने और अमेरिकन ड्रीम को पूरा करने का सपना संजोए बैठे हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को ट्रंप प्रशासन ने तगड़ा झटका दिया है. अमेरिकी सरकार ने आठ कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (Permanent Labor Certification-PERM) से सस्‍पेंड कर दिया है. जिन कंपनियों को इस प्रोग्रोम से सस्‍पेंड किया गया है, उनमें टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), एचसीएल टेक्‍नोलॉजी (HCL Technologies) , कॉग्जिनेंट (Cognizant), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), कैंपजैमिनी (Capgemini) और अडोब शामिल हैं. परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन क्‍या है, ट्रंप प्रशासन ने इसे क्‍यों सस्‍पेंड किया है और इस फैसले का भारतीय आईटी कंपनियों और कर्मचारियों पर क्‍या असर होगा, आइये जानते हैं। 

    अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) ने इन आठ कंपनियों को H-1B वर्कर वीजा सिस्टम के गलत इस्तेमाल और वीजा धोखाधड़ी के आरोप लगाकर परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन से सस्‍पेंड किया है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये कंपनियां विदेशी नागरिकों को नौकरी देने में प्राथमिकता देती हैं और अमेरिकी नागरिकों से रोजगार के अवसर छीन रही हैं. लेकिन, जानकारों का कुछ और ही कहना है. बहुत से लोग मानते हैं कि अमेरिका में अब ट्रंप की स्थिति अच्‍छी नहीं है. मिडटर्म चुनाव सिर पर हैं. उनके समर्थक उनसे नाराज हैं. इसलिए अब आईटी कंपनियों पर तलवार भांजकर सस्‍ती लोकप्रियता हासिल करने के फेर में हैं. भारतीय कंपनियां ट्रंप के निशाने पर लंबे समय से हैं। 

    PERM क्या है?
    PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा चलाई जाने वाली एक प्रक्रिया है. यह किसी भी विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की पहली और सबसे अनिवार्य सीढ़ी है. इसके बिना कोई भी कंपनी ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया (Form I-140) शुरू नहीं कर सकती. PERM वह प्रक्रिया है जिसके जरिए अमेरिकी नियोक्ता यह साबित करता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार पर गलत असर नहीं पड़ेगा. इसके बाद यह प्रक्रिया रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की दिशा में आगे बढ़ती है। 

    PERM के तहत कंपनियों को क्या साबित करना होता है?
    कंपनी को विज्ञापन देकर यह कानूनी रूप से साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई भी योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी नागरिक नहीं मिला. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी वर्कर को रखने से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी शर्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। 

    किन-किन कंपनियों पर हुई है कार्रवाई?

    कुल 8 बड़ी आईटी और टेक कंपनियों पर बैन लगा है. ये हैं-

        टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS),
        इंफोसिस (Infosys)
        विप्रो (Wipro)
        एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies)
        कॉग्निजेंट (Cognizant)
        माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)
        कैपजेमिनी (Capgemini)
        अडोब (Adobe).

    अमेरिकी प्रशासन ने 8 कंपनियों का PERM क्‍यों सस्‍पेंड किया?
    अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने H-1B वीजा सिस्टम और लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया का दुरुपयोग किया. अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग के अनुसार, वर्ष 2009 से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए, 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा मंजूर करवाए और 1 लाख से अधिक PERM हासिल किए, जिससे लाखों योग्य अमेरिकी नागरिक नौकरियों से वंचित रह गए। 

    PREM संस्‍पेशन का क्या असर होगा?
    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अब इन आठों कंपनियों से जुड़े किसी भी नए PERM आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसके अलावा, जो आवेदन पहले से प्रक्रिया में थे, उनका काम भी तुरंत रोक दिया जाएगा. इससे H-1B वीजा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का रास्ता पूरी तरह ठप हो गया है। 

    भारतीय आईटी कर्मचारियों पर इसका क्‍या असर होगा?
    टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक जैसेी भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका भेजती हैं. PERM रुकने से इन कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बंद हो गया है. इससे लगभग एक लाख से अधिक प्रोफेशनल्स का भविष्य अधर में लटक गया है। 

    H-1B धारकों के लिए यह ‘रेड अलर्ट’ क्यों है?
    H-1B वीजा सामान्यत: अधिकतम 6 साल के लिए वैध होता है. नियम यह है कि यदि 6 साल पूरे होने से काफी पहले कंपनी ने कर्मचारी के लिए लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) फाइल कर दिया हो, तभी उसे 6 साल से आगे वीजा एक्सटेंशन मिलता है. अब चूंकि इन कंपनियों का PERM सस्पेंड हो चुका है, इसलिए जो कर्मचारी 6 साल की सीमा के करीब हैं और जिनका PERM फाइल नहीं हुआ था, उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। 

    जिन कर्मचारियों का I-140 पहले से अप्रूव है, क्या उन पर भी असर पड़ेगा?
    नहीं, उन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा. जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड याचिका (Form I-140) पहले ही मंजूर हो चुकी है और जो केवल ग्रीन कार्ड नंबर (प्रायोरिटी डेट) मिलने का इंतजार कर रहे हैं, वे मौजूदा नियमों के तहत एक बार में 3 साल तक का H-1B एक्सटेंशन लेने के पात्र बने रहेंगे। 

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक सम्पन्न

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक सम्पन्न

    रायपुर

    मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत गठित राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित औद्योगिक इकाइयों के लिए वार्षिक जल आबंटन प्रदाय की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति हेतु जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने हेतु जल संग्रहण एवं प्रदाय के लिए समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।

     बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित उद्योगों (स्पंज आयरन, पावर प्लांट, सीमेंट एवं अन्य विनिर्माण इकाइयों) को जलाशयों व नदियों से दिए जाने वाले वार्षिक जल प्रदाय एवं नए आबंटन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई। भू-जल प्रबंधन और जल संरक्षण पर जोर

     बैठक में राज्य भू-जल प्रबंधन एवं नियमन प्राधिकरण के गठन के संबंध में भी चर्चा हुई। औद्योगिक संस्थानों को स्वीकृत सीमा के भीतर ही जल उपयोग करने और जल शुल्क का समयबद्ध भुगतान करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने उद्योगों को जल संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाने, वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

    मिशन अमृत 2.0 के तहत 9 पेयजल योजनाओं को मंजूरी

    बैठक में मिशन अमृत 2.0 तथा अन्य योजनाओं के अंतर्गत कुल 09 पेयजल प्रदाय योजनाओं के लिए स्वीकृत जल आबंटन की पुष्टि एवं अनुमोदन किया गया। इससे प्रदेश के नगरीय निकायों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल के संतुलित बंटवारे पर बल दिया

      मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल के संतुलित बंटवारे पर बल देने को कहा, ताकि आगामी शुष्क मौसम में पेयजल एवं कृषि सिंचाई पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

           बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी, भू-जल वैज्ञानिक सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।