Author: NewseDay

  • मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर में विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये मंजूर

    मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर में विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये मंजूर

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए कुल 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 164.87 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमन्य की गई है। इसमें से पहली किस्त के रूप में 115 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति देते हुए धनराशि अवमुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

    इस योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के साथ बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। शासन ने 6 अप्रैल 2023 को इस योजना को लागू किया था। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दी जा सकती है।

  • भिलसांय में सेवा संकल्प अभियान की पहल, स्वास्थ्य शिविर में उमड़े ग्रामीण, वृक्षारोपण भी हुआ

    भिलसांय में सेवा संकल्प अभियान की पहल, स्वास्थ्य शिविर में उमड़े ग्रामीण, वृक्षारोपण भी हुआ

    ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्राम पंचायत भिलसांय में स्वास्थ्य शिविर एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गौरा मां दुर्गा समग्र विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में सैकड़ों ग्रामीणों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

    कार्यक्रम संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राजपूत की उपस्थिति में संपन्न हुआ। शिविर में देवेंद्रनगर से डॉक्टर अनूप सोनी एवं आरबीके एएमओ अपनी स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचे। चिकित्सकीय टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। वहीं, जिन मरीजों की स्थिति को देखते हुए आगे जांच की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें बेहतर उपचार के लिए देवेंद्रनगर भेजा गया।

    स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को किया जागरूक

    शिविर में सीएचओ रानू वर्मा, आशा कार्यकर्ता मंजू शर्मा, मनोरमा गुप्ता, सोमवती वर्मा, मनसा देवी पटेल और अर्चना वर्मा सहित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्रोपती गुप्ता एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाने में सहयोग किया। इस अवसर पर अरविंद सिंह परिहार, आशु शुक्ला, पवन गर्ग, रमेश गर्ग, अवधेश शर्मा, अशोक सिंह और हरप्रसाद शर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।
    कार्यक्रम के समापन पर वृक्षारोपण किया गया। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया। स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाली इस पहल को ग्रामीण क्षेत्र में जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

  • मखाना खेती पर प्रशिक्षण सम्पन्न

    मखाना खेती पर प्रशिक्षण सम्पन्न

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा मखाना की खेती पर दो दिवसीय जिला सेमिनार गत दिवस पन्ना शहर के एक निजी गार्डन में संपन्न हुआ। सहायक संचालक उद्यान पी.के. श्रीवास्तव ने बताया कि मखाना की खेती के लिये पन्ना सहित मध्यप्रदेश के 14 जिलों को शामिल किया गया है। इस अवसर पर मखाना अनुसंधान संस्थान दरभंगा बिहार के वैज्ञानिकमनोज सिंह ने मखाना की खेती करने की विधि बताई। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के विषय विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। जिला स्तरीय सेमिनार में पन्ना, पवई, गुनौर एवं शाहनगर के लगभग 180 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी सहित आई.डी. अहिरवार एवं धर्मेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।

  • Dhanbad News: मिड-डे मील के लिए स्पर्श पोर्टल से होगा भुगतान, प्रधानाध्यापकों को मिले नए निर्देश

    Dhanbad News: मिड-डे मील के लिए स्पर्श पोर्टल से होगा भुगतान, प्रधानाध्यापकों को मिले नए निर्देश

     धनबाद
     जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मध्याह्न भोजन) योजना को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी एसएनए स्पर्श प्रणाली के अंतर्गत विद्यालय स्तर पर खर्च सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।

    डीएसई शालिनी डुंगडुंग ने कहा है कि प्रखंड स्तर पर आयोजित मासिक गुरु गोष्ठी में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं। विद्यालय प्रधानों को व्यय से संबंधित रिपोर्ट, वेंडर का नाम और भुगतान विवरण लेकर गुरु गोष्ठी में उपस्थित होना होगा।

    एक अप्रैल से पूर्व की अवशेष राशि और चालू वित्तीय वर्ष के आवंटन के समायोजन के बाद ही बिल प्रखंड कार्यालय को भेजे जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत केंद्रांश 60 प्रतिशत और राज्यांश 40 प्रतिशत मद में प्राप्त राशि का आवंटन स्पर्श पोर्टल के माध्यम से प्रखंड के मेकर आइडी से जिला कार्यालय को फारवर्ड किया जाएगा।

    विद्यालय स्तर से भेजे जाने वाले प्रत्येक बिल पर अध्यक्ष, संयोजिका और प्रभारी प्रधानाध्यापक का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। राशन, सब्जी और रसोई गैस के बिल अलग-अलग तैयार करने होंगे।

    प्रखंड कार्यालय में सभी बिलों व प्रतिवेदनों का संधारण एमडीएम कंप्यूटर आपरेटर करेंगे। डीएसई ने सभी बीईईओ, कार्यक्रम अधिकारियों, सीआरपी, बीआरपी और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आपसी समन्वय बनाकर बिल अपलोड करने का निर्देश दिया है।

  • 7 किलोमीटर लंबी एक सड़क, जो किरंदुल तक की 11घंटे की पैदल यात्रा को एक घंटे की यात्रा में बदल देगी

    7 किलोमीटर लंबी एक सड़क, जो किरंदुल तक की 11घंटे की पैदल यात्रा को एक घंटे की यात्रा में बदल देगी

    किरंदुल (छत्तीसगढ़)

    बस्तर की घने जंगलों वाली पहाड़ियों में बसे दूर-दराज के गावं लोहागांव के निवासियों के लिए किरंदुल तक पहुंचनाहमेशा से ही खड़ी और ऊबड़-खाबड़ इलाके से होकर एक कठिन यात्रा रहा है, जिसमें पैदल जाने पर लगभग 11 घंटे लगते हैं ।अब विकसित की जा रही 7 किलोमीटर सड़क इस स्थिति को पूरी तरह बदल देगी, जिससे संभावित रूप से वाहन द्वारा किरंदुल की यात्रा लगभग एक घंटे तक हो जाएगी ।

    इस सड़क का निर्माण छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एनएमडीसी- सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) की सहायता से किया जा रहा है । यह सीधे लोहागांव से किरंदुल तक नहीं जाति । इसके बजाय, यह सड़क लोहागांव को डिपॉजिट-11सी कार्यालय से जोड़ेगी और पुरंगल में मौजूदा सड़क नेटवर्क से जुड़ेगी, जहां से सड़कें राज्य राजमार्ग और किरंदुल की ओर जाती हैं ।

    इस कनेक्टिविटी से पारंपरिक रूप से एक मुश्किल ट्रेक को वाहनों के चलने लायक रास्ते में बदला जा सकता है । लोहागांव से सड़क नेटवर्क तक जाने वाला वर्तमान मार्ग वास्तव में ऊबड़-खाबड़, खड़ी चढ़ाई और घने जंगल से होकर गुजरने वाला एक ट्रेकिंग पथ था । मौजूदा सड़क तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा में ही लगभग तीन घंटे लग सकते हैं । नई सड़क बन जाने के बाद, उम्मीद है कि यात्रा के उस हिस्से को मोटरसाइकिल से तय करने में सिर्फ 15 मिनट लगेंगे । 7 किलोमीटर सड़क पर काम पहले ही शुरू हो चुका है, जिसमें से लगभग 2.5 किलोमीटर काम पूरा हो चुका है और शेष 4.5 किलोमीटर पर काम अभी शेष है ।

    हालांकि, इसके लाभ लोहागांव से भी आगे तक पहुंचने की उम्मीद है । यह सड़क दंतेवाड़ा और उससे सटे बीजापुर जिले के क्षेत्रों में फैले अन्य दूरदराज के गांवों के लिए संपर्क में भी सुधार करेगी, जिनमें एंड्री, तमोदी, पुरंगल, गामपुर और बेंगपाल शामिल हैं ।

    इन बस्तियों के निवासियों के लिए, बेहतर कनेक्टिविटी का मतलब बाजारों, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच हो सकता है । जिन ग्रामीणों को वर्तमान में मौजूदा सड़क नेटवर्क तक पहुंचने के लिए जंगल के मुश्किल रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, वे अब अपने घरों के बहुत करीब मोटर चालित सड़कों तक पहुंच सकेंगे ।

    बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता विशेष रूप से मेडिकल इमरजेन्सी के समय स्पष्ट होती है । छत्तीसगढ़ सरकार के ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर’ अभियान के तहत हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक टीम ने बैलाडीला की पहाड़ियों और जंगल से होते हुए लोहागांव तक का सफर तय किया और वहाँ के निवासियों का इलाज किया । इस दौरान
    लोहागाँव के अलग-थलग होने की बात सामने आई ।

    इसलिए, लोहागांव निवासियों के लिए इस सड़क का प्रभाव सिर्फ यात्रा के समय तक ही सीमित नहीं होगा । किरंदुल की जो यात्रा वर्तमान में पैदल तय करने में लगभग 11 घंटे लगते हैं, नई कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद वाहन द्वारा लगभग एक घंटे में पूरी की जा सकेगी । इस सड़क से ग्रामीणों के लिए वन-उत्पादों को बाजारों में ले जाने और घर की जरूरत का सामान लेकर लौटना आसान हो जाएगा, जिससे वर्तमान में एक कठिन यात्रा में लगने वाली शारीरिक मेहनत और समय की बचत होगी ।

    इस परियोजना को राज्य वन विभाग द्वारा एनसीएल की सहायता से निष्पादित किया जा रहा है । चूंकि रास्ता वन भूमि से होकर गुजरता है, इसलिए परियोजना में वन विभाग की अपेक्षित अनुमतियां और प्रक्रियाएं शामिल हैं । यह सड़क गांवों के एक समूह के लिए एक व्यापक परिवर्तन का प्रतीक भी है, जो इलाके की बनाबाट के कारण बाकी जगहों से कटे हुए थे ।

    लोहागांव को डिपॉजिट-11सी इलाके और पुरंगल में पहले से मौजूद सड़क नेटवर्क से जोड़कर, यह परियोजना कई दूर-दराज की बस्तियों को बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ सकता है । हालाँकि, लोहागांव के लोगों के लिए सबसे वास्तविक परिवर्तन शायद सबसे सरल ही होता है ।

    किरंदुल तक 11घंटे की यात्रा, जल्द ही वाहन द्वारा लगभग एक घंटे की यात्रा बन सकती है – जबकि मौजूदा सड़क तक पहुंचने के लिए तीन घंटे की यात्रा 15 मिनट मोटरसाइकिल की सवारी बन सकती है । बस्तर के एक दूर-दराज इलाके में, यह अंतर रोजमर्रा की जिंदगी में कनेक्टिविटी के मायने को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है ।

  • धान-ज्वार-बाजरा उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर

    धान-ज्वार-बाजरा उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर

    भोपाल 

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए प्रदेश में अब तक लगभग 6.80 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें धान उत्पादक 6.77 लाख तथा मोटा अनाज उत्पादक 13 हजार किसान शामिल हैं। पंजीकृत किसानों का कुल रकबा 10.88 लाख हेक्टेयर है। किसान पंजीयन में आ रही तकनीकी समस्याओं के निराकरण और पंजीयन प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी को आवश्यक निर्देश दिए थे। अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अधिकारियों से चर्चा कर पंजीयन की स्थिति और तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की। बैठक का उद्देश्य तकनीकी समस्याओं का निराकरण कर किसानों को पंजीयन में सुविधा उपलब्ध कराना तथा निर्धारित समय-सीमा में पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराना है। विभाग के अनुसार, किसानों के पंजीयन के लिए विभिन्न माध्यमों से सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसान 10 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं।

    एग्रीस्टेक आईडी से भूमि के रकबे की जानकारी

    बैठक में बताया गया कि समर्थन मूल्य पर वास्तविक किसानों से धान एवं मोटा अनाज की खरीदी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस वर्ष पहली बार किसान पंजीयन में एग्रीस्टेक आईडी का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से किसान की भूमि के रकबे की जानकारी प्राप्त की जा रही है। इससे पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और पंजीयन केंद्रों के ऑपरेटरों द्वारा किसी किसान का रकबा अनधिकृत रूप से दूसरे किसान के पंजीयन में जोड़ने की आशंका पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, उपार्जन प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम है।

    एग्रीस्टेक आईडी बनाने और रिकॉर्ड सुधारने की सुविधा

    भूमिधारक किसानों की एग्रीस्टेक आईडी बनाने के लिए पटवारी, सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर तथा फार्मर रजिस्ट्री सेल्फ एप के माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराई गई है। एग्रीस्टेक आईडी में किसान के समस्त खसरों के रिकॉर्ड संधारित किए जाते हैं। यदि किसी किसान का कोई खसरा छूट गया है, तो उसे रिकॉर्ड में जोड़ने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    डिजिटल क्रॉप सर्वे की व्यवस्था यथावत

    किसान के रकबे पर बोई गई फसल की जानकारी प्राप्त करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे की व्यवस्था पिछले वर्ष की तरह ही रखी गई है। वहीं, राजस्व पट्टे, वन पट्टे तथा मंदिर और ट्रस्ट की भूमि के पंजीयन के लिए एग्रीस्टेक आईडी की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। ऐसे रकबों का पंजीयन पूर्व की व्यवस्था के अनुसार पंजीयन केंद्र अथवा डीएसओ लॉगिन के माध्यम से किया जा सकेगा।

  • झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं की खामियों पर जताई चिंता, भर्ती रद्द करने के फैसले पर अगली सुनवाई सोमवार को

    झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं की खामियों पर जताई चिंता, भर्ती रद्द करने के फैसले पर अगली सुनवाई सोमवार को

    रांची
    झारखंड सरकार द्वारा जेपीएससी की परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और राज्य सरकार की ओर से वकील अच्युत केशव ने पक्ष रखा. सबसे पहले प्रार्थियों के वकील इंद्रजीत ने अदालत में अपनी बात रखते हुए परीक्षा संचालक एजेंसी TDPL की भूमिका, परीक्षा की पारदर्शिता और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने अदालत को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के रद्द करने वाले आदेश को नेचुरल जस्टिस के खिलाफ बताया. वहीं, राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि व्यापक तौर पर गड़बड़ी हुई है इसलिए सेग्रिगेशन संभव नहीं है.

    राज्य सरकार ने कहा सेग्रिगेशन संभव नहीं
    राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अच्युत केशव ने आगे सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि किन परिस्थितियों में नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने कदम उठाना पड़ा. सरकार की ओर से दलील देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि "एक मछली पूरे तालाब को दूषित कर देती है." उनका तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और गोपनीयता भंग हुई है. इस कारण से निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं रह गया था, इसलिए पूरी प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत था.

    हाईकोर्ट ने परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी पर जताई चिंता
    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी में अब तक जितनी भी बहाली प्रक्रियाएं हुई हैं, उनमें किसी न किसी चरण में खामियां देखने को मिली हैं. कभी पीटी (PT) परीक्षा में तो कभी मेन्स (Mains) एग्जाम में कमियां देखने को मिली हैं. अदालत ने परीक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों पर चिंता भी जताई है. इससे एक दिन पहले यानी कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा रद्द मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब जेपीएससी रद्द मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर दिन सोमवार को दोपहर 2:15 बजे से होगी. तब तक मामले में पूर्व से मिली अंतरिम राहत बरकरार रहेगी.

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप सफलतापूर्वक संपन्न

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप सफलतापूर्वक संपन्न

    लखनऊ

    रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश तथा भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के इन-स्पेस और नगर विकास विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रूपाम सभागार में हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग, जियोस्पेशियल इंडस्ट्री और प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने इन-स्पेस के विशेषज्ञों और देश भर से आए इंडस्ट्री पार्टनर्स से आग्रह किया कि आधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग प्रदेश के किसानों की खेती-बाड़ी सुधारने, सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में पैदावार बढ़ाने तथा सूखा और बाढ़ से बेहतर ढंग से निपटने में किया जाए। उन्होंने गवर्नेंस, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा नेटवर्क तथा सुरक्षित पुलों, सड़कों और नहरों की वैज्ञानिक प्लानिंग में भी इन तकनीकों के इस्तेमाल पर बल दिया, ताकि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 का संकल्प पूरा हो सके।

    मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश के समस्त भूखंडों के जियोटैगिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को अपने खेत की सही बाउंड्री की जानकारी मिल सकेगी और भूमि विवादों का निस्तारण आसान होगा। उन्होंने भवन कर के लिए शत-प्रतिशत घरों की मैपिंग स्पेस एप्लीकेशंस के माध्यम से कराने की भी बात कही, ताकि नगर विकास विभाग अपने संसाधनों में वृद्धि कर सके।

    इस पूरे आयोजन में उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। विभाग ने न केवल इस कार्यशाला की परिकल्पना और सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया, बल्कि रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर के माध्यम से कृषि, वन, जल, भू-संसाधन, शहरी प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपग्रह आधारित तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाया। प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी, जबकि विशेष सचिव एवं आरएसएसी-यूपी निदेशक रमेश चन्द्र ने स्पेस टेक्नोलॉजी को नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर प्रदेश के विकास को नई गति देने का आह्वान किया।

    कार्यशाला में रिमोट सेंसिंग सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिरुद्ध उनियाल ने खनिज, जल और आपदा प्रबंधन पर, वैज्ञानिक आलोक सैनी ने शहरी विकास एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर तथा डॉ. पी.पी.एस. यादव ने पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। नगर विकास, आवास, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, वन, ग्रामीण विकास सहित प्रदेश के 50 से अधिक विभागों और जनपदों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। 22 इंडस्ट्री पार्टनर्स ने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए, जबकि 75 प्राइवेट फर्मों ने सक्रिय भागीदारी की। इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिकों और कई जनपदों के जिलाधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया।

    अंतिम सत्र में प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और स्पेस एप्लीकेशंस से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच राउंड टेबल चर्चा हुई, जिसमें विभागों की समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर विस्तार से बातचीत हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निरंतर और दूरदर्शी प्रयासों से उत्तर प्रदेश आज अंतरिक्ष तकनीक को ज़मीनी स्तर पर अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। यह कार्यशाला सुशासन, उत्पादकता और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम साबित हुई है।

  • बिहार में स्वरोजगार को बढ़ावा, बेगूसराय के 117 लाभुकों को मिली आर्थिक सहायता; जानें योजना का लाभ

    बिहार में स्वरोजगार को बढ़ावा, बेगूसराय के 117 लाभुकों को मिली आर्थिक सहायता; जानें योजना का लाभ

    बेगूसराय
     अपने कारोबार की शुरुआत कर आत्मनिर्भर बनने की राह देख रहे जिले के 117 उद्यमियों के लिए बुधवार को अच्छी खबर आई।

    मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभुकों के बैंक खातों में पहली किस्त के रूप में दो-दो लाख रुपये हस्तांतरित किए गए।

    पटना के बापू सभागार में आयोजित एक दिवसीय उद्यमिता कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सात हजार से अधिक लाभुकों के खाते में करीब 150 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की।

    बेगूसराय के लाभुक भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। जिला पदाधिकारी रिची पांडेय ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय प्रकोष्ठ से कार्यक्रम में भाग लिया।

    उनके साथ जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक ज्ञानेश्वरी किरण समेत संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद जिले के 197 उद्यमियों की अंतिम सूची तैयार की गई थी।

    117 लाभुकों की ट्रेनिंग पूरी
    इनमें 117 लाभुकों ने निर्धारित उद्यमिता प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले लाभुकों को ही योजना की पहली किस्त दी गई है। योजना के तहत पात्र लाभुकों को कुल 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलती है।

    इसमें पांच लाख रुपये तक अनुदान और पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण का प्रविधान है। इसका उद्देश्य युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है।

  • टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़ी है और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्परता से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से जनविश्वास अभियान के माध्यम से सरकार घर-घर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रत्येक वर्ग को राहत देने तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर योजनाएं संचालित कर रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला चिकित्सालय पहुंचकर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया तथा मरीजों से चर्चा कर उनके उपचार एवं अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली बच्चों को निःशुल्क चश्में वितरित किए। साथ ही क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मरीजों को पोषण सहायता के उद्देश्य से फूड बास्केट प्रदान की।

    बुजुर्ग महिला से ली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, बच्चों को किया दुलार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों से चर्चा करते हुए उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उनका संवेदनशील अंदाज भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने एक बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बुजुर्ग महिला से चर्चा करते हुऐ कुशलक्षेम पूछा, बुजुर्ग महिला ने बताया कि इलाज बहुत अच्छा मिल रहा है और अब पहले से आराम है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से दुलार करते भी नजर आए। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बच्चों के सर पर दुलार से हाथ फेरते हुए उनका भी हाल-चाल पूछा।

    अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री द्वारा स्कूली बच्चों को वितरित किए गए निःशुल्क चश्में

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव बच्चों के बीच पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों को निशुल्क चश्में वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा शासकीय कन्या शाला की कक्षा 12वी की छात्रा कु. शिवानी, कु. छाया एवं शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा कु. मुस्कान को चश्मा वितरित किया।

    हरदा में जिला अन्धत्व निवारण कार्यक्रम के अन्तर्गत 135 स्कूलों में 20320 बच्चों की जांच की गई जिसमें 1156 बच्चों में दृष्टिदोष पाए जाने पर उन्हें निशुल्क चश्में वितरित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण आहार की टोकरी भी वितरित की। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से युक्त लगभग 8 किलोग्राम की प्रत्येक फूड बास्केट में आटा, मूंगफली दाना, दाल और चना आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने हरदा जिले के ग्राम झिरी की रामबाई धुर्वे, उषा गिनारे तथा टिमरनी के परसराम लोवंशी को पोषण आहार की टोकरी प्रदान की।

    उल्लेखनीय है कि नि-क्षय पोषण योजना के अंतर्गत क्षय रोगियों को पोषण सहायता के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में व्यापक स्तर पर जांच एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक हरदा जिले के हाईरिस्क ग्रामों एवं मोहल्लों को कवर करते हुए घर-घर जाकर 1 लाख 86 हजार 332 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाईरिस्क ग्रामों एवं वार्डों में एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन और बलगम (स्यूटम) जांच के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से टीबी मरीजों को पोषण आहार की फूड बास्केट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल को मिला आईएसओ सर्टिफिकेट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राप्त आईएसओ सर्टिफिकेट भी कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह को प्रदान किया। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों का किया सम्मान, वृद्धजनों ने दिया स्नेह और आशीर्वाद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम अंतर्गत हरदा में सार्थक सेवा वृद्धजन आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों से आत्मीय भेंट की। उन्होंने वृद्धजनों को शाल, फल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। वृद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों से उनकी कुशलक्षेम जानी तथा आश्रम में उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धाश्रम का भ्रमण किया तथा सेवा संकल्प अभियान के तहत आश्रम में आयोजित विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आश्रम में आयोजित भ्रमण, भेंट एवं सम्मान सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।

    सार्थक सेवा आश्रय समिति को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संस्था के रूप में शासन स्तर से मान्यता प्रदान की गई है। समिति द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशन में वृद्धाश्रम का आधिकारिक संचालन किया जा रहा है। संस्था द्वारा वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को ऐसा पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उन्हें अपनापन, सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाएं, पौष्टिक भोजन एवं मानसिक शांति का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में 50 सीटर वृद्धाश्रम में 37 वृद्धजन निवासरत हैं, जिनमें 19 महिलाएं एवं 18 पुरुष शामिल हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल, पूर्व विधायक  संजय शाह, जिला पंचायत अध्यक्ष  गजेंद्र शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दर्शन सिंह गहलोत,  राजेश वर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष  अंशुल गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष टिमरनी  देवेन्द्र भारद्वाज,  विशाल सिंह बघेल, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री सुदाम खाड़े, कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।