Author: NewseDay

  • दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, वक्ताओं ने 51 शक्तिपीठों को एक साथ मूर्त रूप देने के प्रकल्प को बताया राष्ट्र की आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम

    दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, वक्ताओं ने 51 शक्तिपीठों को एक साथ मूर्त रूप देने के प्रकल्प को बताया राष्ट्र की आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम

    भोपाल 

    देवी के प्रमुख 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्ति धाम प्रकल्प भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की व्यापक परिकल्पना है। यह प्रकल्प देशभर के लोगों को प्रेरणा देने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए ज्ञान को साधना में ढालना और आध्यात्मिक ऊर्जा को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।

    यह विचार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को  बालमुकुंद आश्रम, झालरिया मठ में 51 शक्तिपीठों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर व्यक्त किए। शक्ति धाम न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा कालिदास संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि नवरात्रि के प्रारंभ होने से पहले मां भगवती का स्मरण करते हुए देवी के 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में विचार-विमर्श करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शक्ति की आराधना, श्रद्धापूव्रक स्मरण और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन हमारे जीवन को सार्थक, प्रेरणास्पद और सुगम बनाता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नही है, बल्कि उस ज्ञान को साधना और व्यवहार में उतारकर अपने जीवन, देश की प्रगति तथा समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना आवश्यक है। 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सभी प्रयासरत हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इस विषय से जुड़े गूढ़ रहस्यों और आध्यात्मिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला है। यह पहल स्वागत योग्य है। जब यह प्रकल्प साकार होगा, तब देशभर के श्रद्धालुओं को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से इस महत्वपूर्ण प्रकल्प को पूर्णता प्रदान की जाएगी। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ हुआ। अतिथियों का परिचय कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक  गोविंद गंधे ने दिया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन शक्ति धाम न्यास के सचिव  राकेश शर्मा ने प्रस्तुत किया।

    आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र- उपमुख्यमंत्री  शुक्ल

    कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। देश में आध्यात्मिकता का विकास आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढिय़ों में धार्मिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और सेवा के संस्कारों का विकास हो सके। इन संस्कारों से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी पीडि़त मानवता की सेवा में अपना योगदान दे सकेगी। उन्होंने कहा कि धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति विश्वभर में सम्मान का भाव है। धार्मिक परंपराएं समाज को नैतिक मूल्यों, सदाचार और मानव कल्याण की प्रेरणा देती है।  शुक्ल ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां-जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। नर्मदा नदी के किनारे देवी के 51 शक्तिपीठों को एक साथ स्थापित करने की परिकल्पना साकार होने से श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा। इससे देश में धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकल्प के अंतर्गत भव्य भवन का निर्माण और संकल्प की पूर्णता हम सभी का सामूहिक दायित्व है। इस पुनीत कार्य में योगदान देने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात होगी। शक्ति धाम प्रकल्प विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने तथा भारत को सनातन धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देगा।

    भारत की आध्यात्मिक परंपरा विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है- भैयाजी जोशी

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि 51 शक्तिपीठ शक्तिधाम प्रकल्प को साकार करने के संकल्प के साथ सभी यहां से जाएंगे। यह हम सभी का सौभाग्य है कि भारत में हो रहे महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के साक्षी बन रहे है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि देवभूमि, पुण्यभूमि और तपस्वियों की साधना भूमि है। यहां ऋषि-मुनियों ने साधना और चिंतन के माध्यम से मानवता को मार्गदर्शन प्रदान किया है। भारत की पहचान यहां के तीर्थस्थलों, मंदिरों, मठों, धार्मिक यात्राओं, मेलों और साधु-संतों की परंपरा से है। यह भूमि महापुरुषों, चिंतकों और महान विचारकों की कर्मभूमि रही है। भारत का चिंतन शाश्वत है और समस्त मानवता के कल्याण की भावना से प्रेरित है।  जोशी ने कहा कि विश्व में भारत की प्रासंगिकता कभी समाप्त नही हो सकती। देश को ऐसा समाज बनाना होगा, जो दुर्बल नहीं, बल्कि शक्ति-संपन्न हो और विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम हो। महान ऋषि-मुनियों के योगदान तथा समग्र दृष्टिकोण पर आधारित भारतीय शास्त्र परंपरा ने भारत को विश्व में विशिष्ट स्थान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष सम्मान प्राप्त है। देवी शक्ति के प्रति करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। शक्ति की उपासना समाज को सामर्थ्य संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्तिधाम प्रकल्प इसी आध्यात्मिक चेतना को व्यापक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    कार्यक्रम में संत समाज के अध्यक्ष संत  रितेश दास महाराज, सिंहस्थ केंद्रीय समिति के पूर्व अध्यक्ष  मखन सिंह चौहान, महापौर  मुकेश टटवाल, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  ओम जैन, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष  जगदीश अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष मती कमला कुंवर तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष मती शिवानी कुंवर मंचासीन रहे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष  सौभाग्य सिंह, शक्तिधाम न्यास के अध्यक्ष  प्रशांत हरतालकर,  विभाष उपाध्याय,  सुरेश गिरी, नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष  सोनू गेहलोत, कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, एमआईसी सदस्य  शिवेंद्र तिवारी,  रघुवीर सिंह,  केतन भाई,  दिनेश गौतम,  आदित्य अग्रवाल,  प्रशांत त्रिपाठी और  अरुण व्यास सहित गणमान्य नागरिक, वैदिक बटुक तथा आमंत्रित वक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  दीपक उपाध्याय ने किया तथा आभार प्रदर्शन  राधेश्याम गुरुजी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विश्व कल्याण की कामना के साथ सामूहिक शक्तिपाठ किया गया। इसके पश्चात वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।

     

  • योगी कैबिनेट की मंजूरी: यूपी में किसानों से होगी मोटे अनाज की खरीद, 2026-27 की क्रय नीति स्वीकृत

    योगी कैबिनेट की मंजूरी: यूपी में किसानों से होगी मोटे अनाज की खरीद, 2026-27 की क्रय नीति स्वीकृत

    किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति को मंजूरी
     
    मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद के लिए प्रदेश में 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव
     
    बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 और हाइब्रिड ज्वार में 324 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
     
    किसानों से 31 दिसंबर तक होगी खरीद, यथासंभव 48 घंटे में बैंक खाते में पहुंचेगा भुगतान
     
    लखनऊ

     प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति तय कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। खरीद के लिए 455 क्रय केंद्र खोलने की तैयारी है। बाजरे और हाइब्रिड ज्वार के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हुई है। खरीद की अवधि एक अक्टूबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है।
     
    कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने क्रय नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों से भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। उपज का भुगतान बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर सीधे किसानों के खातों में कराया जाएगा।
     
    बाजरा 2900 और मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा
    नई क्रय नीति के अनुसार, बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसमें 125 रुपये की वृद्धि हुई है। मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वहीं, हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 3699 रुपये से बढ़कर 4023 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसमें 324 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ज्वार मालदांडी का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
     
    बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
    प्रदेश में मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद शामिल है। सबसे अधिक खरीद का लक्ष्य बाजरे के लिए रखा गया है।
     
    बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र खुलेंगे

    मोटे अनाज की खरीद के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र होंगे। क्रय केंद्र मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जहां संबंधित फसल की अच्छी आवक होती है और सरकारी खरीद की पर्याप्त संभावना रहती है।
     
    इन 25 जिलों में होगी मक्का की खरीद
    मक्का की खरीद बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर में की जाएगी।
     
    बाजरे की खरीद के लिए 33 जिले निर्धारित
    बाजरे की खरीद बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर में होगी।
     
    ज्वार की खरीद के लिए चुने गए 13 जिले

    ज्वार की सरकारी खरीद उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में की जाएगी।
     
    ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
    सरकारी खरीद के लिए किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। क्रय केंद्रों पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद होगी। इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। खरीद की प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन संचालित होगी।
     
    आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे मिलेगा भुगतान
    किसानों से खरीदी गई उपज का भुगतान उनके आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों का सत्यापन होगा। सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में धनराशि भेजने की व्यवस्था की गई है।

  • UP में जेवर एयरपोर्ट के नामकरण पर बड़ा फैसला, अब ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से होगी पहचान

    UP में जेवर एयरपोर्ट के नामकरण पर बड़ा फैसला, अब ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से होगी पहचान

    जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’: सीएम योगी

    सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री के सम्मान में योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, नामकरण प्रस्ताव पारित

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में गिनाईं पीएम मोदी के 25 वर्षों की उपलब्धियां

    कहा- सेवा, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास तक पहुंची यात्रा

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित

    मुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी: सीएम

    लखनऊ
     नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर अब ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एयरपोर्ट के नामकरण का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिए गए इस निर्णय को मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति प्रदेश सरकार की कृतज्ञता और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके मार्गदर्शन एवं योगदान के सम्मान का प्रतीक बताया।

    कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया है। 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री जी ने सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा पूरी की। यह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। 25 वर्षों की यह यात्रा ‘सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम’ की भावना से संचालित रही है। यह यात्रा केवल सत्ता या शासन की यात्रा नहीं, बल्कि ‘जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास’ की यात्रा है।

    जेवर एयरपोर्ट का नामकरण, प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता का संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर प्रधानमंत्री जी की ओर से उत्तर प्रदेश को मिली एक बड़ी सौगात है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। इसी भावना के साथ कैबिनेट ने एयरपोर्ट का नाम ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ किए जाने का प्रस्ताव पारित किया है। कैबिनेट प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, उनके सतत मार्गदर्शन, उत्तर प्रदेश के विकास के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता और देश को नई दिशा देने वाले नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करती है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जी के यशस्वी नेतृत्व के प्रति अभिनंदन भी व्यक्त किया। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी।

    काशी से जेवर तक, यूपी से प्रधानमंत्री का विशेष जुड़ाव
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी काशी से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उत्तर प्रदेश की धरती से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री जी ने काशी आगमन पर कहा था- ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है।’ इसके बाद काशी और प्रधानमंत्री जी का संबंध केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा। काशी के विकास, आध्यात्मिक पुनर्जागरण और उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के बीच एक नया संबंध बना। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और केंद्र-प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से उत्तर प्रदेश में विकास की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश प्रशासनिक जड़ता, असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था। इसके बाद पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल वातावरण को विकास का आधार बनाया गया।

    2,483 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और नमो भारत से बदली कनेक्टिविटी
    मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग ₹60 हजार करोड़ खर्च किए गए हैं। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई गति दी है। ₹30 हजार करोड़ से अधिक लागत से दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत/आरआरटीएस परियोजना देश में हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन की नई मिसाल बनी है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है। इसी बदलती कनेक्टिविटी का नया केंद्र जेवर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने जा रहा है। सीएम ने इसे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और भविष्य में देश के बड़े एविएशन हब में विकसित होने वाली परियोजना बताया।

    फ्रेट कॉरिडोर से डिफेंस कॉरिडोर तक, औद्योगिक तस्वीर बदली
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के बड़े लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। दादरी ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख जंक्शन बन चुका है। 1,050 किलोमीटर से अधिक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रदेश से गुजर रहा है। वाराणसी में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर देश का पहला मल्टीमॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और 100 एकड़ का देश का पहला फ्रेट विलेज विकसित हुआ है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल असेंबली यूनिट, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और 1,000 एकड़ का पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क औद्योगिक विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

    किसानों को सीधे लाभ, फसल ऋण से गन्ना भुगतान तक
    किसान कल्याण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है। करीब 86 लाख किसानों की ऋणमाफी की गई है। प्रदेश में 5.50 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹13,42,978 करोड़ का फसल ऋण वितरित किया गया। 79.51 लाख किसानों को फसल क्षति के मद में भुगतान मिला है, जबकि गन्ना किसानों को ₹3.30 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।

    आवास, राशन और पानी से गरीबों के जीवन में बदलाव
    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास मिले हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 3.67 करोड़ राशन कार्डधारक परिवारों के करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत 2.46 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन दिया जा चुका है। खास तौर पर बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। जनधन योजना, बैंकिंग विस्तार और बैंक मित्रों के नेटवर्क ने प्रदेश में वित्तीय समावेशन को भी मजबूत किया है।

    आयुष्मान से एम्स तक स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार
    मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत के तहत प्रदेश में करीब 6.08 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। राज्य में 9.90 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज मिला है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 1.09 करोड़ से अधिक मरीजों को ₹18,798 करोड़ के मुफ्त उपचार का लाभ मिला है। आरोग्य मेलों के माध्यम से 14.67 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स का संचालन भी स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

    शौचालय, उज्ज्वला और नमामि गंगे से बदली तस्वीर
    सीएम योगी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में 3.37 करोड़ से अधिक शौचालय और 59,183 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। प्रदेश सरकार होली और दीपावली पर महिलाओं को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करा रही है। नमामि गंगे के तहत गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए व्यापक काम हुआ है। काशी सहित गंगा के विभिन्न तटों पर विकास और संरक्षण की परियोजनाओं ने धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से नई पहचान बनाई है।

    महिला सशक्तीकरण से गांव की अर्थव्यवस्था को ताकत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी अभियान के तहत 10 लाख स्वयं सहायता समूहों से एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 15 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक सहायता मिली है। स्वामित्व योजना के तहत 91 हजार से अधिक गांवों में काम हुआ और 1.10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को घरौनी के रूप में संपत्ति का प्रमाण मिला। महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण तथा अनुसूचित जाति-जनजाति और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के कल्याण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

    यूपी का हुनर ‘लोकल से ग्लोबल’ तक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद योजना ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री जी ने विदेश यात्राओं के दौरान काशी की गुलाबी मीनाकारी, निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की जरदोजी जैसे यूपी के उत्पादों को वैश्विक मंच दिया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को यूपी के इन स्थानीय उत्पादों को उपहार में देना ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को मजबूती देने वाला कदम रहा। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, दुग्ध, गन्ना, आम, आंवला और मोटे अनाज के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में है।

    युवाओं को नौकरी, प्रशिक्षण और डिजिटल ताकत
    सीएम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 62 लाख से अधिक युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट दिए गए। प्रदेश में 9.50 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां हुई हैं और 65 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। रोजगार मेलों, आईटीआई और कौशल विकास मिशन के माध्यम से 31.11 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय, काशी में आधुनिक खेल परिसर और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी परियोजनाओं से खेल और युवा प्रतिभाओं को नई दिशा मिली है।

    राम मंदिर से महाकुंभ तक, सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण
    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के योगदान को आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास से आगे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से 500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई। काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास हुआ और गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ धाम तक भव्य एवं दिव्य मार्ग बना। विदेश से करीब 100 वर्ष पुरानी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा वापस लाई गई और काशी विश्वनाथ धाम में पुनर्स्थापित की गई। भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष 127 वर्ष बाद भारत वापस आए। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। मुख्यमंत्री ने काशी तमिल संगमम, अभिधम्म दिवस, बौद्ध सर्किट, संत रविदास जन्मस्थली विकास परियोजना, संग्रहालय एवं प्रतिमा परियोजनाएं, चौरी-चौरा शताब्दी आयोजन तथा लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ जैसे कार्यों को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की कड़ी बताया। उन्होंने वाराणसी के संगीत और लखनऊ की पाक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने, सारनाथ से जुड़े बौद्ध स्थलों को वैश्विक पहचान मिलने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने को भी प्रदेश की महान विभूतियों के योगदान के राष्ट्रीय सम्मान के रूप में रेखांकित किया।

  • पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की तैयारी? 12 से 15 नए प्रांत बनाने की चर्चा, पंजाब-सिंध में चिंता

    पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की तैयारी? 12 से 15 नए प्रांत बनाने की चर्चा, पंजाब-सिंध में चिंता

     इस्लामाबाद

    पाकिस्तान में देश का राजनीतिक नक्शा बदलने की चर्चा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर चार बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने के पक्ष में हैं. इससे देश में 12 से 15 नए प्रांत बनाए जा सकते हैं. एक विकल्प में 160 छोटे प्रशासनिक क्षेत्र बनाने की भी बात है। 

    फिलहाल पाकिस्तान में चार प्रांत हैं. इनमें पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान शामिल हैं. इनके बंटवारे से प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है. लेकिन इसका असर सिर्फ सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा. इससे देश में राजनीतिक ताकत का संतुलन भी बदल सकता है। 

    पाकिस्तान के प्रांतों में आबादी का बड़ा अंतर

    दरअसल, पाकिस्तान के चारों प्रांत आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से काफी अलग हैं. पंजाब देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रांत है. यहां करीब 12.8 करोड़ लोग रहते हैं. यह पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी है. वहीं दूसरी ओर, बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है. लेकिन यहां करीब डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं। 

    द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब जैसे बड़े प्रांत का प्रशासन चलाना भी चुनौती है. ग्रामीण इलाकों में लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए घंटों सफर करना पड़ सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पंजाब की एक चौथाई से कम आबादी को घर पर साफ पीने का पानी नियमित रूप से मिलता है। 

     सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का तर्क है कि बड़े प्रांतों को प्रभावी तरीके से चलाना मुश्किल है. हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं की वजह सिर्फ प्रशासनिक ढांचा नहीं है. देश कमजोर आर्थिक विकास, महंगाई और भारी कर्ज के बोझ से भी जूझ रहा है। 

    पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही है. देश के इतिहास के दो-पांचवें से ज्यादा समय तक सेना सीधे सत्ता में रही है. निर्वाचित सरकारें भी कई बार उसके प्रभाव में काम करती रही हैं. द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट में सेना की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के पास बड़ी जमीन और कारोबार हैं. सरकारी संसाधनों में भी उसकी अहम हिस्सेदारी है। 

    ऐसे में प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने से सत्ता का संतुलन बदल सकता है. अगर नए प्रांत केंद्र सरकार पर ज्यादा निर्भर हुए, तो सेना और केंद्र के लिए उन पर प्रभाव बनाए रखना आसान हो सकता है. हालांकि, यह इस प्रस्ताव के संभावित राजनीतिक असर से जुड़ा आकलन है। 

    पंजाब और सिंध क्यों हैं अहम?
    पाकिस्तान के प्रांत केवल प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं. वे राजनीतिक ताकत के बड़े केंद्र भी हैं. पंजाब को परंपरागत रूप से पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का मजबूत गढ़ माना जाता है. वहीं, सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का प्रभाव रहा है। 

    इन प्रांतों की बड़ी आबादी और चुनावी ताकत उन्हें केंद्र के सामने मजबूत स्थिति देती है. अगर इन्हें छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, तो उनकी राजनीतिक ताकत बंट सकती है. इससे केंद्र सरकार का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि छोटे प्रांतों को चलाना आसान होगा या नहीं. सवाल यह भी है कि क्या इससे केंद्र के लिए प्रांतों पर नियंत्रण रखना आसान हो जाएगा। 

    पाकिस्तान में प्रशासनिक ढांचे को बदलने की मांग पहले भी उठ चुकी है. योजना मंत्री अहसान इकबाल छोटे प्रशासनिक क्षेत्र और ज्यादा प्रांत बनाने की जरूरत पर बात कर चुके हैं. इसमें 12 से 15 प्रांत बनाने और 160 तक छोटे प्रशासनिक क्षेत्र तैयार करने का विचार भी शामिल रहा है। 

    यह चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब असीम मुनीर का पाकिस्तान की राजनीति में प्रभाव बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने PML-N और PPP के साथ काम करते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है. वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं. उनके समर्थक उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं. अधिकारियों ने उनके आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई भी की है। 

    प्रांतों के पुनर्गठन की चर्चा के बीच खैबर पख्तूनख्वा में भी तनाव है. यह प्रांत इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के शासन में है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार और PTI के बीच बातचीत नाकाम होने के बाद इमरान खान के हजारों समर्थकों ने इस्लामाबाद की ओर मार्च शुरू किया. पाकिस्तानी सरकार ने राजधानी के आसपास सुरक्षा बढ़ाई और प्रदर्शनकारियों को अंदर आने से रोकने की बात कही. मालूम हो, इससे केंद्र और खैबर पख्तूनख्वा की सरकार के बीच तनाव बढ़ा है. यह प्रांत उग्रवादी हिंसा की समस्या से भी जूझ रहा है। 

    बलूचिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में भी चुनौतियां
    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा होती रही है. यहां संसाधनों और इस्लामाबाद की भूमिका को लेकर भी विवाद हैं. ऐसे में प्रांत को बांटने का फैसला जमीन, संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों से जुड़े संवेदनशील सवाल खड़े कर सकता है। 

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी शासन, महंगाई, टैक्स और आर्थिक हालात को लेकर असंतोष सामने आता रहा है. इन हालात के बीच देश की आंतरिक सीमाओं को बदलना आसान नहीं होगा. छोटे प्रांत बनाने के पक्ष में प्रशासनिक तर्क दिए जा रहे हैं. लेकिन इस बदलाव से राजनीतिक ताकत का बंटवारा भी हो सकता है. इसलिए यह प्रस्ताव पाकिस्तान का नक्शा बदलने के साथ-साथ सत्ता के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। 

  • Cancer Medicine Price: कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का शिकंजा, मुनाफे की सीमा 30% तय करने की तैयारी

    Cancer Medicine Price: कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का शिकंजा, मुनाफे की सीमा 30% तय करने की तैयारी

    नई दिल्ली
    कैंसर का इलाज सिर्फ मरीज की सेहत की परीक्षा नहीं लेता. कई बार यह पूरे परिवार की जमा-पूंजी भी खत्म कर देता है. अस्पताल के चक्कर और जांच के खर्च के बीच महंगी दवाएं खरीदना भी बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से कैंसर की दवाओं की कीमत घटाने की दिशा में उठाया गया कदम लाखों मरीजों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है. सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. अनुमान है कि इससे कई दवाओं की कीमत 20 से 70 प्रतिशत तक घट सकती है. सरकार के मुताबिक मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। 

    हालांकि, अभी सभी कैंसर दवाओं की कीमतें एक साथ कम नहीं होंगी. यह फैसला सिर्फ उन कैंसर दवाओं पर लागू होगा, जिन्हें सरकार तय की जाने वाली अंतिम सूची में शामिल करेगी. ये ऐसी दवाएं हैं जिनकी कीमतों पर फिलहाल सरकार की ओर से तय सीमा लागू नहीं है. विशेषज्ञों की एक समिति तय करेगी कि किन दवाओं को इस नियम के दायरे में लाया जाए. इसके बाद NPPA अधिसूचना जारी करेगा और कीमतों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी. इस नियम में ब्रांडेड और जेनेरिक के साथ देश में बनी और विदेश से मंगाई जाने वाली दवाएं भी शामिल हो सकती हैं. सरकार का मकसद कैंसर के इलाज का खर्च कम करना और दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना है। 

    कैंसर की दवाओं पर कितना घट सकता है खर्च?
    NPPA के अनुमान के मुताबिक इस फैसले से दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP में 20 से 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. हालांकि हर दवा की कीमत में एक जैसी कटौती नहीं होगी. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि फिलहाल उसकी कीमत में निर्माता से लेकर थोक और खुदरा विक्रेता तक कितना मार्जिन जुड़ता है. सरकार ने मरीजों के लिए सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की संभावित बचत का अनुमान लगाया है. कैंसर दवाओं का भारतीय बाजार करीब 12,500 करोड़ रुपए सालाना का बताया गया है. इसमें गैर-अनुसूचित दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। 

    क्या होता है व्यापारिक मार्जिन?
    जब कोई दवा निर्माता से निकलकर वितरक और दुकानदार के जरिए मरीज तक पहुंचती है तो बीच की कड़ियों पर भी कमाई का हिस्सा जुड़ता है. इसी अंतर को व्यापारिक मार्जिन कहा जाता है. NPPA की बैठक के विवरण के मुताबिक गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं में औसत व्यापारिक मार्जिन करीब 170 प्रतिशत तक पाया गया. कुछ मामलों में यह 700 प्रतिशत तक होने का अनुमान है. नई व्यवस्था का मकसद इसी तरह के ऊंचे मार्जिन पर लगाम लगाना है. प्रस्ताव के तहत व्यापारिक मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। 

    विशेषज्ञ समिति तय करेगी किन दवाओं पर लागू होगा फैसला
    दवा मूल्य नियामक ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है. अब विशेषज्ञ समिति उन कैंसर दवाओं की सूची तैयार करेगी जिन्हें नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. फार्मास्युटिकल विभाग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं यानी DGHS के तहत समिति गठित करने को कहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक समिति से 14 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट देने को कहा गया है. सूची को जरूरत के मुताबिक समय-समय पर अपडेट भी किया जा सकता है. अंतिम सूची और अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चलेगा कि कौन-सी दवा कितनी सस्ती होगी। 

    2019 में भी घटाई गई थीं कैंसर दवाओं की कीमतें
    सरकार ने इससे पहले 2019 में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की थी. उस समय 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित किया गया था. NPPA के मुताबिक इस कदम से 526 ब्रांड की कीमतों में कमी आई थी. कुछ ब्रांड की MRP में 91 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी. उस फैसले से सालाना करीब 984 करोड़ रुपए की बचत का अनुमान लगाया गया था. अब नए प्रस्ताव को उसी तरह की पहल का अगला कदम माना जा रहा है। 

    सुप्रीम कोर्ट भी उठा चुका है महंगी दवाओं का मुद्दा
    कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है. 22 सितंबर को अदालत ने आवश्यक कैंसर दवाओं की ज्यादा कीमतों पर कड़ी टिप्पणी की थी. 29 सितंबर की सुनवाई के दौरान एक दवा का उदाहरण भी सामने आया जिसकी खुदरा विक्रेताओं को आपूर्ति कीमत करीब 2,700 रुपए बताई गई जबकि उसकी MRP लगभग 27,000 रुपए थी. अदालत ने दवाओं पर खुदरा मार्जिन को लेकर सवाल उठाए थे. इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की गई है। 

  • 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे।

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी

    शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है।

    विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

    विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

     

  • ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ से सुगम हो रही पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया

    ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ से सुगम हो रही पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदेश के 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान किए गए। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    17 जिलों के 82 हितग्राहियों को मिला लाभ

    स्वामित्व योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 34, हरदा में 10 और सिंगरौली में 6 हितग्राहियों के संपत्ति दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। डिंडोरी, मंडला और रायसेन में 5-5, जबकि अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर में 3-3 हितग्राहियों के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण हुआ है। इसी प्रकार अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में एक-एक हितग्राही के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है।

    ग्रामीणों को संपत्ति के वैधानिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण का आधार

    स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है।

    छिंदवाड़ा में पटवारी ने प्रदर्शित की डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया

    छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में पटवारी  सुनील गागड़े ने ‘सारा ऐप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।

    स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप देने और शासकीय सेवाओं को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है। 

  • पर्यटन नवाचार, रचनात्मकता, पर्यावरण-अनुकूल पहल और सांस्कृतिक विरासत के प्रभावी प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार

    पर्यटन नवाचार, रचनात्मकता, पर्यावरण-अनुकूल पहल और सांस्कृतिक विरासत के प्रभावी प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार

    भोपाल 

    सचिव पर्यटन और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाते हुए हमारा फोकस पर्यटन क्षेत्र में "ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस" को मजबूत करना है। मध्यप्रदेश निवेश, नवाचार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 के लिए एक सशक्त पर्यटन रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश पर्यटन निवेश, सुगम व्यावसायिक प्रक्रियाओं और विविध पर्यटन अनुभवों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाए।

    सचिव डॉ. इलैयाराजा ने बताया कि हम “3Gs” पर काम कर रहे है, जिनमें गाइड (Guides), गाइडलाइंस (Guidelines) और गियर (Gear) शामिल हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों को अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश पर्यटन नीति का उद्देश्य बड़े निवेशकों के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों, ग्रामीण समुदायों और होमस्टे संचालकों को भी पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन का लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM) 2026 के तीसरे दिन बीटूबी मीटिंग्स के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया। इसका उद्देश्य प्रदर्शकों की रचनात्मकता, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल पहलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश की पर्यटन विरासत, कला एवं शिल्प के प्रभावी प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना रहा। सम्मान समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक  आशीष कुमार, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक  दिलीप कुमार यादव और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

    समारोह में मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद ऑर्गनाइजिंग कमेटी के 36 सदस्यों और 52 स्पॉन्सर्स को सम्मानित किया गया, फिर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए।

    सर्वश्रेष्ठ टेबल स्पेस

    प्रथम: टूरिज्म विलेज धोबा। बैगा जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, लोककलाओं और ग्रामीण जीवन के वास्तविक अनुभव इसकी विशेषता हैं, जहां पर्यटक स्थानीय परिवारों के साथ रहकर जनजातीय परंपराओं और प्रकृति से जुड़ सकते हैं।

    द्वितीय: वीवर्स पैराडाइज को बुनकरों और हथकरघा परंपरा को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुति के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (6 वर्ग मीटर)

    प्रथम: बैम्बू राज। बांस से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से उपयोगिता, प्राकृतिक सौंदर्य और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल के लिए।

    द्वितीय: जिप्सी एडवेंचर्स। जंगल के समीप कैंपिंग, साइकिलिंग अभियान, ट्रेकिंग और तारों के अवलोकन जैसे प्रकृति-आधारित रोमांचक अनुभवों के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर)

    प्रथम: कुनो रिसॉर्ट। कुनो क्षेत्र की वन्यजीव संपदा और प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन अनुभवों से जोड़ने वाली प्रस्तुति के लिए।

    द्वितीय: यारनगर जंगल रिसॉर्ट। जंगल और प्रकृति-आधारित पर्यटन की प्रभावी प्रस्तुति के लिए।

    सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर से अधिक)

    प्रथम: एमपी एस्केप्स। मध्यप्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को विशेष रूप से तैयार किए गए यात्रा कार्यक्रमों के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए।

    द्वितीय: शंभाला। भोपाल स्थित यह प्राकृतिक पर्यटन स्थल जैविक फार्म, हरियाली से घिरे आवास, फार्म टूर और प्रकृति के बीच विश्राम के अनुभवों के लिए जाना जाता है।

    सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल स्टॉल

    प्रथम: वैन वाइब। पर्यावरण के प्रति संवेदनशील स्टॉल प्रस्तुति के लिए।

    मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ विषयगत प्रस्तुति

    संयुक्त प्रथम: एमपी टूर्स एवं ट्रैवलिशियस एमपी। दोनों संस्थाओं को प्रदेश की पर्यटन पहचान को विषयगत रूप से प्रस्तुत करने के लिए सम्मानित किया गया। एमपी टूर्स वन्यजीव, विरासत, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खानपान और ग्रामीण अनुभवों को समाहित करती यात्राओं का आयोजन करती है।

    सर्वश्रेष्ठ कला एवं शिल्प प्रदर्शनी

    प्रथम: जरी जरदोजी में ताजवर खान को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश की पारंपरिक कढ़ाई कला, बारीक हस्तकारीगरी और धात्विक धागों से तैयार अलंकरण इसकी विशिष्ट पहचान हैं, जो प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा को दर्शाती है।

    द्वितीय: वुड क्राफ्ट में रीना भूरिया को लकड़ी पर आधारित हस्तशिल्प एवं कलात्मक कारीगरी के प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। 

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 का यह पुरस्कार समारोह प्रदेश के पर्यटन उद्यमियों और कारीगरों की रचनात्मकता तथा प्रतिबद्धता का उत्सव रहा। जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव पर्यटन, हस्तशिल्प और पर्यावरण-अनुकूल पहलों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने मध्यप्रदेश की विविधता और समृद्ध विरासत को सशक्त रूप से सामने रखा।

  • राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं से सीखेंगे पूर्वोत्तर के राज्य, जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का भी करेंगे दौरा

    राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं से सीखेंगे पूर्वोत्तर के राज्य, जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का भी करेंगे दौरा

    जयपुर
     राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर पहुंचा। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के विस्तार, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया।

    दो दिवसीय अध्ययन दौरे में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में प्रतिनिधिमंडल को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान) और राजनेट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

    कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में पहले से संचालित सफल डिजिटल परियोजनाओं के अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।

     नंद कुमारम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों की सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वहां प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आमजन की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी।

    राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  नंद कुमारम ने परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने और लाभ वितरण में त्रुटियां कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सके।

     नंद कुमारम ने डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने पर भी जोर दिया।

    कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक  अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे
    दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इसके बाद अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करेंगे।

     

  • अम्बिकापुर में आयोजित हुई समान नागरिक संहिता पर विशाल बैठक

    अम्बिकापुर में आयोजित हुई समान नागरिक संहिता पर विशाल बैठक

    रायपुर

    समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों के विचार एवं सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से सरगुजा संभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समूह चर्चा और बैठक का आयोजन गुरुवार को अम्बिकापुर स्थित शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया गया। इस बैठक में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों से एक हजार से अधिक गणमान्य नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों तथा निगम, मंडल एवं आयोग के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्री एम.के. राउत (यूसीसी समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता), डॉ. ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्या), श्री श्याम लाल धावड़े (उच्च स्तरीय समिति के सचिव एवं आयुक्त रायपुर संभाग), श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा (सरगुजा संभागायुक्त) उपस्थित रहे।

    इन प्रमुख मुद्दों पर खुलकर रखी गई राय

      बैठक के दौरान समिति के समक्ष विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न पक्षों ने खुलकर अपने सुझाव और विचार रखे। सत्र के दौरान उपस्थित समाज प्रतिनिधियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की मूल अवधारणा, इसके विभिन्न पहलुओं और समिति द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

    व्यापक सामाजिक भागीदारी

    इस बैठक में सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले पांचों जिलों-सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर एवं कोरिया के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पंडो समाज, उरांव समाज, सर्व आदिवासी समाज, गोंड समाज, केवट समाज, नगेशिया समाज, बिंझिया समाज, पनिका समाज, यादव समाज, ब्राह्मण समाज, स्वर्णकार समाज, रोमन कैथोलिक समाज, मझवार समाज, रजवार समाज, साहू समाज, चेरवा समाज, मुण्डा समाज, चिक समाज, मुस्लिम सुन्नी समाज, अंजुमन इस्लामिया कमिटी, सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, रौनियार समाज और राजपूत समाज सहित विभिन्न संगठनों के लोगों ने लिखित एवं मौखिक रूप से अपने अभिमत प्रस्तुत किए।

    सुझावों के आधार पर तैयार होगा ड्राफ्ट

     समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वर्गों और संगठनों से प्राप्त सभी सुझावों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन सुझावों के संकलन और विश्लेषण के बाद ही समान नागरिक संहिता का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    ऑनलाइन माध्यम से भी दे सकते हैं सुझाव

    समिति ने नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि जो लोग इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। अपने विचार भेजने के लिए आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in या ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।