Author: NewseDay

  • 10वीं-12वीं की परीक्षाओं के 15 मई तक आएंगे रिजल्ट, उत्तर पुस्तिकाओं का Offline होगा मूल्यांकन

    10वीं-12वीं की परीक्षाओं के 15 मई तक आएंगे रिजल्ट, उत्तर पुस्तिकाओं का Offline होगा मूल्यांकन

    भिवानी.

    हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12 वीं की परीक्षाएं शुरु होने वाली हैं जो कि एक अप्रैल तक चलगी। परीक्षाएं खत्म होने के बाद उत्तरपुस्तिकाओं का ऑफलाइन मूल्यांकन कराया जाएगा। 15 मई तक परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा।  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 25 और 26 फरवरी से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं।

    केवल एक ही सत्र में 12: 30 से 3: 30 बजे तक परीक्षाएं होंगी। बोर्ड परीक्षाओं में करीब 1420 परीक्षा केंद्रों पर कुल 5,71,767 परीक्षार्थी शामिल होंगे। हरियाणा विद्यालय बोर्ड मुख्यालय पर शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में डॉ. पवन कुमार ने बताया कि 325 उड़नदस्तों का गठन बोर्ड ने किया है। परीक्षा केंद्र ज्यादा दूर नहीं होंगे। कुछ जगहों पर परीक्षा केंद्र दूर बनाए गए हैं, उनके परीक्षार्थियों को भी नजदीकी परीक्षा केंद्रों पर समाहित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

  • पंजाब में चुनाव से पहले रिझाने की तैयारी, शिरोमणि अकाली दल ने किया बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने का एलान

    पंजाब में चुनाव से पहले रिझाने की तैयारी, शिरोमणि अकाली दल ने किया बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने का एलान

    चंडीगढ.

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने तमिलनाडु के एक केस में मुफ्त की योजनाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि अगर लोगों को राज्य मुफ्त में ही सब कुछ देने लगे तो वे काम क्यों करेंगे। पीठ ने यह भी कहा है कि यह हालात केवल किसी एक राज्य के नहीं है, बल्कि सभी राज्यों में इसी तरह हो रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से पंजाब भी अछूता नहीं है। पंजाब में समय-समय की सरकारों की ओर से वोट बैंक को साधने के लिए शुरू की गई सब्सिडी की प्रथा को किसी भी सरकार ने रोकने की हिम्मत नहीं की, बल्कि हर सरकार ने इसमें बढ़ोतरी ही की है। पंजाब में चुनाव से पहले एक बार फिर मतदाताओं को रिझाने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां देने की घोषणाएं होने लगी हैं।

    शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने दो दिन पहले सत्ता में आने पर बुढ़ापा पेंशन 1,500 से बढ़ाकर 3,100 रुपये करने और शगुन योजना के तहत एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसी तरह आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में महिलाओं को 1000-1000 रुपये देने की तैयारी की हुई है, जिसका मार्च महीने में पेश होने वाले बजट में प्रावधान किया जा सकता है।

    कहां-कहां कितनी खर्च हो रही है सब्सिडी

    1. 22,000 करोड़ रुपये इस समय किसानों, घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर को निशुल्क व सस्ती बिजली देने पर खर्च हो रहे।
    2. 4,800 करोड़ रुपये बुढ़ापा पेंशन आदि के लिए दी जा रही है।
    3. 750 करोड़ रुपये महिलाओं को बसों में निशुल्क सफर के तहत दिया जा रहा है।
    4. इसी तरह जो लोग मुफ्ट राशन जिसके तहत गेहूं और चावल दिए जा रहे हैं में नहीं आते उन्हें सरकार अपनी ओर से राशन मुहैया करवा रही है। इस पर सब्सिडी दी जा रही है।

    पंजाब में 1997 से शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर
    पंजाब में 1997 में शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर आज तक चलता जा रहा है। हर साल इसमें कोई कमी होने के बजाय बढ़ोतरी ही हो रही है और आज हालात यह है कि पंजाब की आमदनी के प्रमुख स्रोत जीएसटी से सरकार को केवल 24 से 25 हजार करोड़ ही मिल पा रहे हैं, जबकि सब्सिडी पर खर्च की बात करें तो यह लगभग 28 हजार करोड़ रुपये है। यह भी उस समय है जब मौजूदा सरकार ने अभी महिलाओं को एक-एक हजार रुपये देना शुरू नहीं किया है। अगर यह योजना शुरू होती है तो राज्य के खजाने पर 12 हजार करोड़ रुपये का और बोझ पड़ेगा। (राज्य में एक करोड़ वोटर महिलाएं हैं)। सब्सिडी के इस बोझ के कारण जहां पंजाब में कैपिटल एक्सपेंडिचर नहीं हो रहा है, वहीं विभागों में कर्मचारियों को भर्ती करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि उन पर खर्च होने वाले वेतन का बोझ पहले से ही काफी ज्यादा है।

  • भोपाल और जबलपुर में हल्की बारिश के साथ मध्य प्रदेश में 4 दिन का मौसम अलर्ट, 5 अन्य जिलों पर भी असर

    भोपाल और जबलपुर में हल्की बारिश के साथ मध्य प्रदेश में 4 दिन का मौसम अलर्ट, 5 अन्य जिलों पर भी असर

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश में मौसम इस समय 'दोहरी रंगत' दिखा रहा है। एक तरफ जहां गुलाबी ठंड की विदाई का समय है, वहीं दूसरी ओर आसमान से बरसती आफत ने प्रदेशवासियों को चिंता में डाल दिया है। नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से शनिवार, 21 फरवरी 2026 को प्रदेश के 28 जिलों में बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उज्जैन और भोपाल संभाग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे रबी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है।

    प्रदेश के आधे हिस्से में पानी-पानी

    मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और उज्जैन समेत प्रदेश के 17 जिलों में बारिश दर्ज की गई। उज्जैन में सर्वाधिक 1 इंच के आसपास बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। ठंड के आखिरी दौर में हर हफ्ते बदलता यह मौसम का मिजाज विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है। शुक्रवार को बारिश का दौर जारी रहा और शनिवार को भी इसके थमने के आसार नहीं हैं।

    17 जिलों में जमकर बारिश

    बता दें कि उज्जैन सहित शाजापुर, देवास, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर, भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हुई है। प्रदेश में कहीं से ओले की सूचना सामने नहीं आई है। वहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, कई जिलों में ठंड बढ़ गई है।

    बारिश-आंधी और बिजली का अलर्ट

    मप्र मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं के साथ बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है। जिन शहरों में सावधानी बरतने को कहा गया है, उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिले शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में 'गाज' (आकाशीय बिजली) गिरने की भी संभावना है, इसलिए लोग पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें।

    फसलों को नुकसान की आशंका

    तेज हवाओं का असर खासतौर पर रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में ज्यादा देखा गया। यहां गेहूं की खड़ी फसलें झुक गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलें लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहीं तो दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन दिनों में करीब 25 जिलों में आंधी के कारण फसल नुकसान की संभावना जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं।
    अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम

    22 फरवरी को बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं।
    23 फरवरी को दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना जताई गई है।
    24 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है।
    इंदौर में तापमान में खासी गिरावट

    इंदौर में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। दिन का अधिकतम तापमान चार डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के तापमान में भी एक डिग्री की कमी आई और पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। देर रात शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह हल्की ठंड महसूस की गई, हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना रहा।

    फरवरी में लगातार बदल रहा मौसम

    इस महीने की शुरुआत से ही मौसम अस्थिर बना हुआ है। फरवरी के पहले पखवाड़े में दो बार आंधी, बारिश और ओले गिर चुके हैं, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर 19 और 20 फरवरी को भी रहा। अब 23 और 24 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह फरवरी में चौथी बार मौसम परिवर्तन होगा।
    कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर

    22 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होगा। इसका प्रभाव अगले दिन से मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। 23 फरवरी को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में वर्षा की संभावना है। 24 फरवरी को सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है।

    तापमान का हाल

    बारिश के बावजूद रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। कल्याणपुर 10.4°C के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा, वहीं शहडोल और उमरिया में पारा 10 से 12°C के बीच बना हुआ है।

    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

    इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि खेतों में खड़ी गेंहू और चने की फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में गिरावट आने की पूरी आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़े स्तर पर ओलावृष्टि की सूचना कहीं से नहीं मिली है।

  • लश्कर ए तैयबा का नया प्लान, चांदनी चौक के मंदिर पर बम धमाके का अलर्ट जारी

    लश्कर ए तैयबा का नया प्लान, चांदनी चौक के मंदिर पर बम धमाके का अलर्ट जारी

    नई दिल्ली
    देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर आतंकवादियों के निशाने पर है. खुफिया विभाग के सूत्रों ने एक हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आंतकी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के सामने IED हमले की साजिश रच रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित इस आतंकी संगठन ने चांदनी चौक इलाके में स्थित प्रमुख मंदिरों को भी टारगेट करने की योजना बनाई है. यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अभी चल रही है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी.

    खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है. सूत्रों का कहना है कि लश्कर ने कश्मीर में बिलाल मस्जिद हमले का बदला लेने के लिए दिल्ली को चुना है, जहां नवंबर 2025 के ब्लास्ट के बाद एक वायरल पोस्ट में LeT ने जिम्मेदारी ली थी. उस पोस्ट में कहा गया था, ‘नई दिल्ली पर हमला लश्कर-ए-तैयबा के बहादुर शेरों ने किया है. यह कश्मीर में शहीदों का बदला है. हम हर मस्जिद के ईंट का बदला लेंगे और हर मंदिर तक पहुंचेंगे.’
    लाल किले के सामने IED हमले की साजिश

    अलर्ट के अनुसार, लश्कर के स्लीपर सेल दिल्ली के लाल किले के मुख्य द्वार के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में IED प्लांट करने की योजना बना रहे हैं. लाल किला पहले भी आतंकी हमलों का शिकार रहा है. दिसंबर 2000 में LeT ने लाल किले पर हमला किया था, जिसमें तीन लोग मारे गए थे. नवंबर 2025 के कार ब्लास्ट में भी लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के बाहर विस्फोट हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे. जांच एजेंसियों ने इसे ‘आतंकी घटना’ करार दिया था और UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत केस दर्ज किया था.

    खुफिया सूत्रों ने बताया कि लश्कर के हैंडलर्स ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) की मदद से पंजाब स्थित गैंगस्टरों के साथ मिलकर IED सप्लाई कर रहे हैं. ये IED हाई-इंटेंसिटी वाले हैं, जो वाहनों या बैग्स में छिपाकर लगाए जा सकते हैं. दिल्ली पुलिस ने अलर्ट के बाद लाल किले के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडोज, डॉग स्क्वाड और AI आधारित फेशियल रिकग्निशन कैमरे तैनात किए गए हैं. दिल्ली मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर भी हाई अलर्ट है.
    चांदनी चौक के मंदिर निशाने पर

    अलर्ट में विशेष रूप से चांदनी चौक इलाके के मंदिरों को खतरा बताया गया है. लाल किले से सटे चांदनी चौक में कई प्राचीन मंदिर जैसे दिगंबर जैन मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और सीस गंज गुरुद्वारा हैं. ये जगहें रोजाना हजारों श्रद्धालुओं से भरी रहती हैं, जिससे हमले की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है.

    सूत्रों के मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED या सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल कर इन मंदिरों को निशाना बना सकते हैं. यह साजिश धार्मिक स्थलों को टारगेट कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश है.

    यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर ISI की मदद से भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है. जनता से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें. जांच एजेंसियां साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी हैं, और जल्द ही बड़े खुलासे की उम्मीद है.

  • मेरठ‑दिल्ली रैपिड रेल का धमाका, सिर्फ 40 मिनट में सफर, कल पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

    मेरठ‑दिल्ली रैपिड रेल का धमाका, सिर्फ 40 मिनट में सफर, कल पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

    मेरठ 
    मेरठ और एनसीआर के लिए 22 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को जनता को समर्पित करेंगे। इससे दिल्ली से मेरठ के बीच सफर का समय घटकर लगभग 40 मिनट रह जाएगा। शुक्रवार को एनसीआरटीसी ने मीडिया के लिए विशेष ट्रायल रन आयोजित किया। सराय काले खां से दोपहर 12 बजे रवाना हुई नमो भारत ट्रेन ने 160 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से दौड़ते हुए मात्र 39 मिनट में बेगमपुल स्टेशन तक का सफर तय किया। यह सफर नॉन-स्टॉप रहा।
    स्टॉपेज के साथ 55 मिनट में दिल्ली टू मेरठ

    सामान्य संचालन के दौरान ट्रेन प्रत्येक स्टेशन पर लगभग एक मिनट के ठहराव के साथ करीब 55 मिनट में दिल्ली से मेरठ पहुंचेगी। ट्रायल के दौरान नमो भारत ने सराय काले खां से गाजियाबाद की दूरी लगभग 15 मिनट में पार की और फिर अगले 15 मिनट में मेरठ साउथ पहुंच गई। वहां से कुछ ही मिनटों में शताब्दीनगर को पार करते हुए बेगमपुल स्टेशन पहुंच गई। इस तेज रफ्तार और समयबद्ध संचालन से रोजाना दिल्ली-गाजियाबाद आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
    ट्रायल के दौरान 120 की स्पीड से दौड़ी मेरठ मेट्रो

    बेगमपुल स्टेशन का दृश्य बेहद आकर्षक रहा। जमीन से लगभग 70 मीटर नीचे बने इस अंडरग्राउंड स्टेशन पर एक ओर नमो भारत खड़ी थी तो सामने मेरठ मेट्रो इंटरचेंज के लिए तैयार दिखाई दी। फ्लोरोसेंट ग्रीन, ब्लू और ऑरेंज थीम वाली तीन कोच की मेरठ मेट्रो 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंचने में सक्षम है। बेगमपुल से मेरठ साउथ तक का सफर मेट्रो से करीब 10 मिनट में पूरा होगा।
    बिजली बचाने का रोल मॉडल बनेगी रैपिड रेल

    मेरठ साउथ से नमो भारत के जरिए सात स्टेशनों को पार कर सीधे आनंद विहार तक पहुंचा जा सकेगा। आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन, आईएसबीटी और मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्टेशन और डिपो की छतों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे 15 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। वर्तमान में 5.5 मेगावॉट ऊर्जा तैयार की जा रही है। भविष्य में 110 मेगावॉट का कैप्टिव सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जो कुल बिजली जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा करेगा। इससे हर वर्ष करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।
    पर्यावरण संतुलन की मिसाल बनेंगे स्टेशन

    साहिबाबाद और गुलधर स्टेशन देश के पहले ऐसे स्टेशन हैं जिन्हें आईजीबीएस नेट जीरो एनर्जी (ऑपरेशन) रेटिंग प्राप्त हुई है। इन स्टेशनों पर जितनी बिजली खपत होती है, उतनी ही सौर ऊर्जा से उत्पादन कर ग्रिड को वापस भेज दी जाती है। साथ ही, पूरे कॉरिडोर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। नमो भारत और मेरठ मेट्रो के संचालन से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि यह परियोजना आधुनिक, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल भी बनेगी।

  • मंत्री सारंग‑गौर की विधानसभा में मतदाताओं की तस्वीर साफ, 3.80 लाख नाम SIR से हटाए गए

    मंत्री सारंग‑गौर की विधानसभा में मतदाताओं की तस्वीर साफ, 3.80 लाख नाम SIR से हटाए गए

    भोपाल 

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी।

    एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए।

    सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे।

    नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे।

    भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए।

    भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए।

    एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी।

    पहले इतनी थी मतदाता संख्या

    एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे।

    उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे

    जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं।

    सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम

    छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए।

    इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए

    चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए।

    पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे।

    मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे

    एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए।

    एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।

    इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है।

    मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे

    एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं।

    कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस के हेमंत कटारे का निर्वाचन क्षेत्र है जहां से 17505 मतदाताओं के नाम कटे हैं।

    पूर्व मंत्रियों के क्षेत्र में एनालिसिस करने के बाद यह सामने आया कि महेंद्र हार्डिया के यहां सबसे अधिक 87591 नाम कटे हैं। जबलपुर पूर्व से विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के क्षेत्र में 49215 वोटर्स के नाम एसआईआर में काटे गए। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र से 21981 मतदाताओं के नाम काटे जाने की कार्यवाही एसआईआर में हुई है।

  • 106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

    106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

     जोधपुर

    राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है.

    एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया. 

    28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया.

    पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई. 

    वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला.

    आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है.

    जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी.

    साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है.

    लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था.

    एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में कोई ज़हरीली चीज ही पाई गई. यानी उनकी मौत की वजह कुदरती थी. ये और बात है कि कुदरती वजह उन्हें इंजेक्शन में दी गई दवाओं की वजह से बनी या नहीं, इसकी अलग से जांच चल रही है. चूंकि ये मामला एक जानी-मानी युवा साध्वी की रहस्यमयी मौत से जुड़ा था, इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे. ऐसे में जोधपुर पुलिस की ओर से बनाई गई एसआईटी ने हर उस पहलू को खंगालने की कोशिश की, जिसका कनेक्शन उनकी मौत के मामले से जुड़ता था.

    मसलन पुलिस ने 28 जनवरी की पूरी टाइमलाइन को रीविजिट करने की कोशिश की, जब उनकी तबीयत बिगड़ने से लेकर, उन्हें इंजेक्शन लगाया गया और फिर बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें जोधपुर के ही प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया. इसके अलावा पुलिस ने प्रेम बाईसा की मेडिकल हिस्ट्री की भी अलग से एनालिसिस की. पुलिस ने ये पता लगाया कि वो कब से बीमार थी? तबीयत बिगड़ने पर वो कौन-कौन सी दवाएं लेती थीं? उनको लगाए गए इंजेक्शन के मद्देनजर पुलिस ने ड्रग कंट्रोलर से लेकर सीएमएचओ, राजस्थान नर्सिंग काउंसिल समेत कई इकाइयों से बात की. यहां तक कि पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक की अलग से जांच की. यानी हर उस एंगल को एक्सप्लोर करने की कोशिश की, जहां से उनकी मौत में साजिश का कोई भी एंगल जुड़ सकता था. इसके अलावा उनके गांव से लेकर जोधपुर के आश्रम तक उनकी किन-किन से दोस्ती और दुश्मनी थी, पुलिस ने सब चेक किया.

    वैसे तो इस मामले के उलझने की कई वजहें थीं, लेकिन इन वजहों में एक वजह इनकनक्लूसिव पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी थी. यानी एक ऐसी रिपोर्ट जिसने मौत की वजह से पर्दा हटाने की जगह उसे लेकर और ज्यादा संशय पैदा कर दिया था, यही वजह है कि पुलिस को इस केस का आखिरी सच जाने के लिए एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट की जरूरत पड़ी. 

    सूत्रों की मानें तो साध्वी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि मौत से पहले उनकी आंतें और पेट के कई अंदरुनी अंग सिकुड़ गए थे. अब सवाल था कि ऐसा किस सूरत में हो सकता है? तो फॉरेंसिक मेडिसीन के एक्सपर्ट्स से इसका जवाब पूछा गया. एक्सपर्ट की माने तो कि ऐसा आम तौर पर किसी बीमारी की सूरत में ही मुमकिन है. जाहिर है साध्वी भी बीमार थीं, लेकिन क्या वो बीमारी इतनी खतरनाक स्टेज पर थी कि उससे उनके अंदरुनी अंग सिकुड़ गए? या फिर रही-सही कसर इंजेक्शन के हेवी डोज ने पूरी कर दी? पुलिस ने मौत की वजह का तो पता लगा लिया है, लेकिन उसे इंजेक्शन के एफेक्ट का सच अब भी जानना बाकी है.

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही शरीर के कुछ अंदरुनी अंगों के लाल पाए जाने की बात भी सामने आई थी. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा इनफेक्शन के साथ-साथ प्वाइजनिंग के मामलों में भी हो सकता है. कई जहरीले पदार्थ ऐसे होते हैं, जो पेट में ऐसा असर दिखाते हैं. ऐसे में पुलिस को उनके शरीर में जहर होने या ना होने का सच जानना था, जो विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद साफ हो गया. जहर की बात नहीं मिली. पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने पाया था कि साध्वी के हाथ और पांव के नाखुन उनकी मौत के दौरान बिल्कुल नीले पड़ गए थे. कई लोग इसे प्वाइजनिंग की निशानी बता रहे थे. लेकिन फॉरेंसिक मेडिसीन और टॉक्सिकोलॉजी के एक्सपर्ट की माने तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी से कई बार ऐसा होता है. इसीलिए अक्सर ये देखा गया है कि हैंगिंग या ड्राउनिंग के केसेज़ में जब किसी की जान जाती है, तो उसके शरीर में भी नाखून नीले पड़ जाते हैं. अब हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन यानी विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि बीमारी की हालत में उनकी सांस रुक गई, जिसके चलते उनके नाखुनों का रंग बदला था.

    ये तो रही साध्वी को जहर दिए जाने या फिर उनके खिलाफ किसी साजिश की आशंका के मद्देनजर की गई पुलिस की जांच का सच, लेकिन जिस एक मामले ने साध्वी की मौत के केस को सबसे ज्यादा उलझा दिया था, वो था उनकी मौत के बाद उनके इंस्टा हैंडल से पोस्ट किया गया उनका कथित सुसाइड नोट। तो पुलिस ने इस मामले की भी पड़ताल की और इसका सच ढूंढ निकाला.

    छानबीन में सामने आया था कि 28 जनवरी को साध्वी की मौत के बाद खुद उनके पिता वीरमनाथ ने उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उनके इंस्टा हैंडल से साध्वी के नाम से एक सुसाइड नोट पोस्ट किया था और इस पोस्ट उन्होंने अपने ड्राइवर भोमाराम से लिखवाया था. इस पोस्ट में साध्वी के हवाले से लिखा गया था, 'मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.' 

    जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिखती हुई दिख रही थी और साथ ही अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही थी, ये पेशकश. जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके पिता और गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. ऐसे में पुलिस को सुसाइड नोट और वीडियो वाले मामले की भी जांच करनी थी. पुलिस ने इस मामले की जांच की और ये साफ हुआ कि साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बेटी की मौत के बाद जज्बात में आकर उनकी इंस्टा आईडी से वो नोट पोस्ट करवाया था, इसके पीछे कोई साजिश जैसी बात नहीं थी.

    अब ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वायरल वीडियो का वो मामला क्या था? 13 जुलाई 2025 यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं. वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने,सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.

    बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे, ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा 

  • कांग्रेस का बड़ा कदम! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी बने भिवंडी के नए मेयर

    कांग्रेस का बड़ा कदम! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी बने भिवंडी के नए मेयर

    भिवंडी

    महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे.

    विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं.

    नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया. भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से)  को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

    बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सेक्युलर फ्रंट

    एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.' राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.'
     
    नारायण चौधरी ने बीजेपी से बगावत की और कुछ बीजेपी पार्षदों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र समूह बनाया. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया. उन्होंने मेयर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'स्थानीय राजनीति आप जानते हैं, मैं सिर्फ विकास पर काम करूंगा.' यह राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के उस अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद हुआ, जिसमें पार्टी ने नारायण चौधरी को मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में हटाकर उनकी जगह स्नेहा पाटिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले नारायण चौधरी कांग्रेस में थे.

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, हेमंत कटारे ने इस्तीफा दिया — जानें वजह

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, हेमंत कटारे ने इस्तीफा दिया — जानें वजह

    भोपाल:
     Madhya Pradesh की राजनीति में हेमंत कटारे के इस्तीफे के बाद अब एक और बयान चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि  विधानसभा से निकलते समय अटेर से कांग्रेस विधायक Hemant Katare ने भाजपा विधायक Bhagwandas Sabnani से मजाकिया अंदाज में कहा था ‘भाईसाहब, मुझे भी साथ ले चलिए।’  इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि क्या कटारे भाजपा में शामिल होने वाले हैं।

    हालांकि भगवानदास सबनानी ने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह बात केवल मजाक में कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस समय रुके भी थे और पूछा था कि कटारे को कहां जाना है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कटारे बाद में कहां गए।

    मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कि क्या कटारे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, सबनानी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी संभावना की जानकारी नहीं है। 

    क्यों दिया इस्तीफा?

    इस संबंध में संगठन महासचिव डॉ संजय कामले ने जानकारी देते हुए कहा कि हेमंत कटारे ने अपने इस्तीफे में पारिवारिक दायित्वों एवं समय की कमी का उल्लेख किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने विधानसभा क्षेत्र को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे थे, इसी कारण उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से त्यागपत्र दिया है.
    वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और रहेंगे- कामले

    कामले ने यह भी स्पष्ट किया कि हेमंत कटारे का यह इस्तीफा केवल पद से संबंधित है, न कि पार्टी की सदस्यता से. वे कांग्रेस पार्टी के साथ थे, हैं और आगे भी पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के साथ रहेंगे.
    अंतिम फैसला नेतृत्व पर निर्भर- कामले

    इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे के उपनेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका अंतिम निर्णय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तू पटवारी एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के विवेकाधिकार पर निर्भर है.
    आज कटारे की शादी की सालगिरह

    हेमंत कटारे की आज शादी की सालगिरह भी है. उन्होंने आज ही इस्तीफा दे दिया. उनके समर्थक सालगिरह की बधाई दे रहे हैं. 2018 में हेमंत कटारे पर रेप के आरोप लग चुके हैं. बाद में पीड़िता ने अपना बयान बदल लिया. 2019 में छात्रा ने सुसाइड कर लिया. दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने हेमंत कटारे का राहत दी. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. 
    कांग्रेस विधायक बोले- सब ठीक हो जाएगा

    वहीं जौरा से कांग्रेस विधायक Pankaj Upadhyay ने कहा कि कटारे के इस्तीफे की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे की मैरिज एनिवर्सरी थी और परिवार में कार्यक्रम भी था। वे दिन में उनके साथ थे और काफी खुश नजर आ रहे थे।

    उपाध्याय ने कहा कि कोई गंभीर बात नहीं है। जो भी मामला है, वह पारिवारिक है और जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

  • गृह ग्राम बगिया में करेंगे अनुष्ठान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्मदिन आज

    गृह ग्राम बगिया में करेंगे अनुष्ठान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्मदिन आज

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज 62वां जन्मदिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे और अपना जन्मदिन अपने गृह ग्राम बगिया में धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री साय सुबह मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन रायपुर से रवाना होकर पुलिस ग्राउंड हेलीपैड से हेलीकॉप्टर द्वारा बगिया के लिए प्रस्थान करेंगे।

    बगिया हेलीपैड पर आगमन के बाद वे अपने निज निवास पहुंचेंगे, जहां जन्मदिन के अवसर पर सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री साय अपराह्न 3.40 बजे बगिया से प्रस्थान कर हेलीकॉप्टर से रायपुर लौटेंगे और शाम करीब 5.20 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे।

    निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन
    नहर पारा विकास समिति द्वारा गुरुनानक चौक स्थित लाइंस क्लब परिसर में एक निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया है। यह शिविर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित रहेगा।

    नाट्य मंचन ‘जाणता राजा’ तीसरा
    नाट्य मंचन ‘जाणता राजा’ का तीसरा प्रदर्शन नाट्य मंडली पुणे एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाएगा। यह भव्य मंचन साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होगा। कार्यक्रम शाम 6.30 बजे से प्रारंभ होगा।