Author: NewseDay

  • EPFO का बड़ा अपडेट: UPI से PF निकासी की तैयारी, जानें कब शुरू हो सकती है नई सुविधा

    EPFO का बड़ा अपडेट: UPI से PF निकासी की तैयारी, जानें कब शुरू हो सकती है नई सुविधा

    नई दिल्ली
    कभी बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए, कभी घर में किसी की तबीयत खराब हो जाती है, तो कभी शादी या मकान बनाने के लिए अचानक रकम की जरूरत पड़ जाती है. ऐसी स्थिति में नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य निधि (PF) का पैसा बड़ी मदद बनता है. लेकिन जरूरत के वक्त PF खाते से पैसा निकालने और रकम बैंक खाते में आने तक इंतजार करना पड़ता है. अब इस परेशानी को कम करने की तैयारी है। 

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने अंशधारकों को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए PF की रकम निकालने की सुविधा देने पर काम कर रहा है. EPFO इसके लिए UAN पोर्टल को अंशधारकों के UPI खातों से जोड़ने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक नया मोबाइल ऐप भी लाए जाने की बात कही जा रही है. प्रस्तावित व्यवस्था में बैंक खातों के साथ BHIM, फोनपे और गूगल पे जैसे UPI ऐप का इस्तेमाल किया जा सकेगा। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुविधा के तहत पात्र अंशधारक अपने खाते में जमा रकम का 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे. इसके औपचारिक लॉन्च की उम्मीद दिसंबर 2026 के अंत तक जताई जा रही है। 

    अब UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा?
    अभी PF से पैसा निकालने के लिए अंशधारकों को UAN पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन क्लेम करना पड़ता है. इसके बाद ईपीएफओ की ओर से क्लेम वेरिफाई की जाती है और रकम बैंक खाते में भेजी जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है. नई व्यवस्था का मकसद इसी इंतजार को कम करना है. इसके लिए EPFO बैंकों के साथ मिलकर UPI के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा देने का प्रयास कर रहा है. फिलहाल यह ट्रायल फेज में है। 

    खाते में जमा पूरे पैसे नहीं निकाल सकेंगे
    नई व्यवस्था में PF खाते से निकासी की एक सीमा रखी जाएगी. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, तय शर्तें पूरी करने वाले अंशधारक अपने EPF बैलेंस का 75% तक हिस्सा UPI के जरिए निकाल सकेंगे. इसका मतलब है कि खाते में जमा पूरी रकम एक साथ निकालने की सुविधा नहीं होगी. मौजूदा नियमों के मुताबिक, खाते में कम से कम 25% रकम बनाए रखने की व्यवस्था रहेगी. यानी जरूरत पड़ने पर भी PF की पूरी बचत निकाल पाना संभव नहीं होगा। 

    पढ़ाई, शादी और बीमारी में मिलेगी मदद
    PF की रकम अक्सर लोगों के लिए मुश्किल समय में सहारा बनती है. बच्चों की शिक्षा, शादी, बीमारी या घर बनाने जैसी जरूरतों में यह पैसा काम आ सकता है. नई व्यवस्था का मकसद पात्र अंशधारकों के लिए ऐसी जरूरतों के समय रकम तक पहुंच आसान बनाना है. अगर UPI से निकासी की सुविधा शुरू होती है, तो पात्र रकम पाने के लिए लंबी दावा प्रक्रिया का इंतजार कम हो सकता है. हालांकि, निकासी किन शर्तों और पात्रता के आधार पर होगी, इसकी पूरी जानकारी सुविधा लॉन्च होने पर ही स्पष्ट होगी। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, EPFO का कुल कोष करीब 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. संगठन के पास 30 करोड़ से ज्यादा अंशधारक हैं, जिनमें करीब 7.5 करोड़ सक्रिय योगदानकर्ता बताए जाते हैं. UPI के जरिए PF निकासी की सुविधा शुरू होने पर इन सक्रिय अंशधारकों को खास तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सुविधा किन लोगों के लिए उपलब्ध होती है और इसके तहत निकासी के नियम क्या तय किए जाते हैं। 

  • महिलाओं को बड़ी राहत! उज्ज्वला लाभार्थियों को 6 महीने में मिलेंगे 2 मुफ्त सिलेंडर रिफिल

    महिलाओं को बड़ी राहत! उज्ज्वला लाभार्थियों को 6 महीने में मिलेंगे 2 मुफ्त सिलेंडर रिफिल

    उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलेंगे दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल

    पहले चरण में अक्टूबर-दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी-मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में दो चरणों में (होली व दीपावली पर) उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को निःशुल्क सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। इस कदम से लाभार्थियों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ी है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर धुएं से पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को कम करने में भी मदद मिली है।

    विगत वर्ष की तरह चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल दिए जाएंगे। पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर राज्य सरकार के ऊपर कुल 2,142.78 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय भार आएगा।

    योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ऐसे एसीटीसी लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक होंगे और आधार प्रमाणित होगा। ऐसे लाभार्थी ही निःशुल्क एलपीजी रिफिल के लिए पात्र होंगे। सरकार के इस निर्णय से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से आच्छादित लाभार्थियों का जीवन-यापन सुविधाजनक होगा।

  • बांधवगढ़ की वादियों ने जीता सैलानियों का दिल, पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों में पहुंचे 4598 पर्यटक

    बांधवगढ़ की वादियों ने जीता सैलानियों का दिल, पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों में पहुंचे 4598 पर्यटक

    उमरिया
     बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन सीजन 2026-27 की शुरुआत पर्यटकों के लिए खास उत्साह लेकर आई है. कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वार खुलने के बाद जंगल सफारी के लिए देश-विदेश से पर्यटक बड़ी संख्या में बांधवगढ़ पहुंच रहे हैं. पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों से ही 4598 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया है। 

    गेट खुलते ही बांधवगढ़ पहुंच रहे पर्यटक
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वारा 1 अक्टूबर 2026 से नए पर्यटन सीजन के लिए खोल दिए गए थे. इसके पहले करीब तीन माह तक केवल बफर क्षेत्र के पर्यटन द्वारों से ही पर्यटकों को जंगल सफारी की अनुमति थी. कोर और बफर क्षेत्र एक साथ शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या उत्साह जनक रुझान देखने को मिली है। 

    4598 पर्यटकों ने की जंगल सफारी
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक कुल 926 वाहनों से 4598 पर्यटकों ने बांधवगढ़ के जंगलों का भ्रमण किया. इसमें 4461 भारतीय पर्यटक शामिल रहे, जबकि 137 विदेशी पर्यटकों ने भी बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव लिया। 

    पर्यटकों को हो रहे बाघों के दीदार
    बांधवगढ़ की पहचान बाघों की शानदार दीदार के लिए देश-विदेश में है. पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ कोर क्षेत्र के विभिन्न जोन के साथ बफर क्षेत्र में भी पर्यटकों को बाघों के दीदार हो रहे हैं. जंगल सफारी के दौरान बाघ नजर आने से पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कई पर्यटक बांधवगढ़ के प्राकृतिक वातावरण वन्य जीवों और जंगल की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं। 

       पर्यटकों की सुविधा का ख्याल रख रहा वन विभाग
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''पर्यटन गतिविधियों का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है. कोर और बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 

    शुरुआती 8 दिनों में 4598 पर्यटकों का बांधवगढ़ पहुंचना आगामी पर्यटन सीजन को लेकर पर्यटकों की रुचि को दर्शाता है. आने वाले दिनों में छुट्टियों और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है. बांधवगढ़ का जंगल बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण एक बार फिर देशी विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। 

  • टेक सेक्टर में नौकरियों की बंपर वापसी, 1.23 लाख वैकेंसी; फ्रेशर्स के लिए बढ़ी चिंता

    टेक सेक्टर में नौकरियों की बंपर वापसी, 1.23 लाख वैकेंसी; फ्रेशर्स के लिए बढ़ी चिंता

     नई द‍िल्ली
    भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है। 

    स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है। 

    1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका?
    आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है। 

    दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है। 

    हायरिंग लेवल का पूरा गणित
    मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%)
    एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%)
    मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%)
    सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा)
    अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000

    कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है?
    इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं। 

    कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है। 

    कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है। 

    वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर
    ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है. 

    वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं.
    रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है.

    बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया
    टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। 

  • MP में नई रेल लाइन से यात्री और माल परिवहन होगा तेज, ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आने की उम्मीद

    MP में नई रेल लाइन से यात्री और माल परिवहन होगा तेज, ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आने की उम्मीद

    भोपाल 
    पश्चिम मध्य रेलवे में लगातार बढ़ते रेल यातायात के दबाव से निपटने के लिए तीसरी रेल लाइन के विस्तार पर काम किया जा रहा है। रेलवे 500 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। बताया जाता है कि परियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरु किया जाएगा। करीब तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए नया रेल पाथ उपलब्ध होगा। इससे ट्रेनों को रोकने और लाइन क्लियर होने के इंतजार की समस्या कम होगी। ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ परिचालन को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा।

    कार्य अंतिम स्तर पर
    थर्ड लाइन को लेकर सर्वे का कार्य अंतिम स्तर पर है। इसके तैयार होने से न केवल ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि पंक्चुअलिटी भी बेहतर होगी। इससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। – डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे

    रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का दबाव
    पश्चिम मध्य रेलवे का इटारसी जंक्शन प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस नेटवर्क से गुजरती हैं। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों को लाइन क्लियरेंस के लिए रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।
    7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान

    सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। रेलवे के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 12 से 15 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। यह खर्च भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा। इसमें ट्रैक निर्माण के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी रेल अधोसंरचना के काम भी शामिल होंगे।

    जबलपुर को भी मिलेगा फायदा
    इस रेलखंड से जबलपुर होकर कई लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं। यह रेलखंड माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार का लाभ बड़ी संख्या में यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों के कारण मालगाड़ियों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होगी। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।

    यह है स्थिति
    500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन।
    07 हजार करोड़ रुपए अनुमानित लागत।
    450 से अधिक ट्रेनों का होता है आवागमन।
    300 यात्री ट्रेनें, और 150 मालगाड़ियों की आवाजाही

    यह होगा फायदा
    ट्रैक मेंटेनेंस के लिए समय मिलेगा।
    ट्रैक का रखरखाव आसान होगा।
    ट्रेनों की गति बढ़ेगी।
    परिचालन व्यवस्था बेहतर होगी।
    कोचिंग ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी।

  • Navratri 2026:  11 अक्टूबर शुरू होंगे शारदीय नवरात्र, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा

    Navratri 2026: 11 अक्टूबर शुरू होंगे शारदीय नवरात्र, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा

    Sharadiya Navratr2026 : शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है.  इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है.  अगर आप भी नवरात्र में घटस्थापना की तैयारी कर रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और स्थापना की विधि जान लेना जरूरी है.  साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी.

    कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
    पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र के पहले दिन यानी 11 अक्टूबर को कलश स्थापना की जाएगी.  नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के मुताबिक, घटस्थापना का सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है.  वहीं, वैकल्पिक अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा.  

    ध्यान रखें कि घटस्थापना का मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है.  इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि कर लें.

    कब शुरू होगी प्रतिपदा तिथि?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी.  उदया तिथि के आधार पर नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को माना जाएगा.  इसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना की परंपरा है.

    कलश स्थापना के लिए किन चीजों की जरूरत होगी?
    घटस्थापना से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है.  इसके लिए मिट्टी का पात्र, जौ, साफ मिट्टी, जल से भरा कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप और फल जैसी सामग्री रख सकते हैं.  परंपरा के अनुसार सामग्री में क्षेत्र और परिवार की पूजा-पद्धति के आधार पर अंतर हो सकता है.

    कैसे करें कलश स्थापना?
    सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें . मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा को साफ स्थान पर स्थापित करें.  इसके बाद पूजा की चौकी तैयार करें. परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में मिट्टी और जौ बोएं.

    अब कलश में जल भरें.  उसमें सुपारी, अक्षत या सिक्का डालें.  कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें.  इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा के बाद आरती करें.

    नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
    नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.  धार्मिक मान्यताओं में उन्हें शक्ति, स्थिरता और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है.  भक्त इस दिन पूजा-अर्चना और व्रत का संकल्प लेते हैं.  इसके बाद नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है.

    नवरात्र से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को साफ रखें, जरूरी सामग्री पहले से जुटा लें.  पूजा के दौरान स्वच्छता और अपनी परंपरा के अनुसार नियमों का पालन करें.  अगर अखंड ज्योति जलाने की योजना है, तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था भी पहले कर लें.

     

  • नवरात्र 2026 से पहले कर लें ये तैयारियां, पूजा सामग्री से लेकर घटस्थापना तक जानें जरूरी बातें

    नवरात्र 2026 से पहले कर लें ये तैयारियां, पूजा सामग्री से लेकर घटस्थापना तक जानें जरूरी बातें

    Sharadiya Navratri
    शारदीय नवरात्र शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं.  इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और घरों में कलश स्थापना से लेकर अखंड ज्योति तक कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.  मान्यता है कि नवरात्र से पहले घर की साफ-सफाई और पूजा स्थल की तैयारी कर लेना शुभ माना जाता है.  इस बार शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होकर 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी.

    नवरात्र से पहले घर की सफाई करें
    नवरात्र शुरू होने से पहले घर के पूजा स्थल और आसपास की अच्छी तरह सफाई कर लें.  धार्मिक मान्यताओं में साफ-सुथरे स्थान को पूजा के लिए विशेष महत्व दिया गया है.  इसलिए मंदिर की सफाई के साथ वहां रखी पुरानी या खराब हो चुकी पूजा सामग्री को भी व्यवस्थित कर लें.

    घर के मुख्य द्वार, पूजा घर और रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है. नवरात्र के दौरान कई लोग सात्विक भोजन और व्रत का पालन करते हैं, इसलिए रसोई को भी पहले से व्यवस्थित करना सुविधाजनक रहेगा.

    पूजा की सामग्री पहले से जुटा लें
    नवरात्र में कलश स्थापना की जाती है, इसलिए पूजा सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर है.  कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, फल और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री की व्यवस्था पहले ही कर लें.

    अगर आप नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो दीपक, तेल या घी और पर्याप्त मात्रा में बाती भी पहले से रख लें.  इससे पूजा के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी.

    घर के पूजा स्थल को सजाएं
    नवरात्रि से पहले पूजा घर को फूलों, साफ कपड़े और दीपक से सजाया जा सकता है.  मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ करके उचित स्थान पर स्थापित करें.  पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान न रखें.

    धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल को शांत और स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है.

    नवरात्रि में घटस्थापना का महत्व
    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है.  2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगी.  नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है.  हालांकि पूजा का मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना बेहतर है.

    महालया कब है?
    दुर्गा पूजा और नवरात्र से पहले महालया का भी विशेष महत्व माना जाता है.  साल 2026 में महालया 10 अक्टूबर को है.  बंगाली परंपरा में महालया के साथ देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है . इसके बाद मां दुर्गा के आगमन की तैयारियां तेज हो जाती हैं.

    दुर्गा पूजा कब से शुरू होगी?
    2026 में कोलकाता समेत बंगाल में दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव 17 अक्टूबर से शुरू होगा.  षष्ठी से लेकर विजयादशमी तक पूजा और उत्सव का सिलसिला चलेगा.  पश्चिम बंगाल के आधिकारिक पूजा कैलेंडर के अनुसार 17 अक्टूबर को महाषष्ठी, 18 अक्टूबर को महासप्तमी, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी होगी.

    वहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में शारदीय नवरात्र 11 से 19 अक्टूबर तक रहेगी, 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी.  क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार तारीखों में अंतर हो सकता है.

    नवरात्रि से पहले मन और घर दोनों तैयार करें
    नवरात्रि को केवल पूजा-पाठ का समय ही नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक शुरुआत का अवसर भी माना जाता है.  इसलिए इन नौ दिनों की शुरुआत से पहले घर को व्यवस्थित करने के साथ अपने दैनिक जीवन में भी अनुशासन लाने की कोशिश करें.  पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक नियमों का पालन अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है.

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    Shardiya Navratri 2026: घटस्थापना के साथ जरूर करें ये 5 कार्य, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा

    Navratr 2026
    नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। देवी आराधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से की गई साधना मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है।

    1. कलश स्थापना करें
    नवरात्रि के प्रथम दिन घर में विधि-विधान से कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और मां दुर्गा के आह्वान से की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कलश की स्थापना भक्त को नियमित पूजा, जप और साधना से जोड़े रखती है।

    2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
    नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष महत्व रखता है। संभव हो तो प्रतिदिन इसका पाठ करें। यदि समय कम हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का नियमित पाठ किया जा सकता है। सुविधा के अनुसार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को नौ दिनों में बांटकर भी पढ़ा जा सकता है। मान्यता है कि देवी की महिमा का पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और मां की कृपा प्राप्त होती है।

    3. नवार्ण मंत्र का जाप करें
    नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्र है- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली की आराधना का फल प्राप्त होता है। इसे रुद्राक्ष की माला से जप सकते हैं। समय कम हो तो रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करें।

    4. कन्याओं को भोजन कराएं
    नवरात्रि में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। सामर्थ्य हो तो प्रतिपदा से महानवमी तक कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है। किसी अनाथालय में बच्चियों को भोजन कराना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है।

    5. जरूरतमंदों की सहायता करें
    नवरात्रि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा और दान-पुण्य का भी अवसर है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, दवाएं, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुएं दान करें। सामर्थ्य रखने वाले लोग बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई सेवा को देवी आराधना का ही एक रूप माना जाता है।

  • शनिवार का राशिफल: 10 अक्टूबर को इन राशियों पर बरसेगी कृपा, धन लाभ और करियर में तरक्की के योग

    शनिवार का राशिफल: 10 अक्टूबर को इन राशियों पर बरसेगी कृपा, धन लाभ और करियर में तरक्की के योग

    मेष राशि- आज आपका दिन ठीक रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कामकाज में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। व्यापार में कोई नया काम शुरू करने का विचार आ सकता है। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। किसी काम में मन थोड़ा कम लगेगा। छोटी-मोटी परेशानी हो सकती है, लेकिन किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं हैं। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा।

    वृषभ राशि- आज मन थोड़ा परेशान रह सकता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। प्रेम संबंधों में छोटी बात पर तू-तू, मैं-मैं हो सकती है। विद्यार्थियों के मन में असमंजस रहेगा कि क्या करें और क्या न करें। आज कोई महत्वपूर्ण फैसला लेने से बचें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा।

    मिथुन राशि- आज घर में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। कोई बड़ा विवाद नहीं होगा, लेकिन एक-दूसरे की बात गलत समझने की स्थिति बन सकती है। भूमि, भवन या वाहन की खरीदारी में अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। काम में देरी होगी, लेकिन काम पूरा होगा। व्यापार अच्छा चलेगा। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा।

    कर्क राशि- आज स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार की स्थिति अभी सामान्य रहेगी। न ज्यादा फायदा दिख रहा है और न कोई बड़ा नुकसान। कुल मिलाकर स्थिति न्यूट्रल रहेगी। बाकी मामलों में पहले से बेहतर स्थिति बन सकती है। लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा।

    सिंह राशि- आज धन हानि से बचकर रहें। निवेश करने से अभी बचना बेहतर होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। पैसों से जुड़े किसी फैसले में जल्दबाजी न करें। सूर्य को जल देना शुभ होगा।

    कन्या राशि- आज घबराहट और बेचैनी बनी रह सकती है। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन ऊर्जा का स्तर थोड़ा कम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में दिन अच्छा रहेगा। व्यापार भी अच्छा चलेगा। काम को लेकर ज्यादा दबाव न लें। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा।

    तुला राशि- आज सिर दर्द और आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। खर्च बढ़ने से मन थोड़ा परेशान रहेगा। किसी अज्ञात डर या चिंता की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान के मामले मध्यम रहेंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा।

    वृश्चिक राशि- आज आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। पुराने स्रोतों से भी धन लाभ होगा। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। यात्रा में ज्यादा मजा नहीं आएगा, लेकिन यात्रा लाभ देने वाली रहेगी। सूर्य को जल देना शुभ होगा।

    धनु राशि- आज व्यापार में थोड़ी शिथिलता रहेगी। हालांकि नुकसान के संकेत नहीं हैं। पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपने स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें। प्रेम और संतान से जुड़े मामले मध्यम रहेंगे। कामकाज में धैर्य से आगे बढ़ें। बजरंगबली को प्रणाम करना शुभ होगा।

    मकर राशि- आज भाग्य के भरोसे कोई काम बनता हुआ नहीं दिख रहा है। हालांकि स्थिति नकारात्मक नहीं है। यात्रा बहुत अच्छी नहीं रहेगी। अपमानित होने का थोड़ा भय रह सकता है, इसलिए संभलकर रहें। प्रेम, संतान और व्यापार से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। काली जी को प्रणाम करना शुभ होगा।

    कुंभ राशि- आज चोट-चपेट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ने से बचें। परिस्थितियां थोड़ी प्रतिकूल रहेंगी, इसलिए संभलकर आगे बढ़ें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामले बहुत अच्छे रहेंगे। व्यापार भी अच्छा चलेगा। गणेश जी को प्रणाम करना शुभ होगा।

    मीन राशि- आज निजी जीवन में मन नहीं लगेगा। स्वास्थ्य भी थोड़ा मध्यम रहेगा। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में उत्साह कम रहेगा। मन थोड़ा बुझा-बुझा रह सकता है। व्यापार लगभग ठीक चलेगा। ज्यादा चिंता करने से बचें। शिवजी का जलाभिषेक करना शुभ होगा।

  • रजिस्ट्री हुई और तुरंत हो गया नामांतरण, अजीत राम साहू को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रजिस्ट्री हुई और तुरंत हो गया नामांतरण, अजीत राम साहू को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रायपुर

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने और लंबे इंतजार की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के श्री अजीत राम साहू ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पहले जिस नामांतरण के लिए उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था और काम पूरा होने का इंतजार करना पड़ता था, इस बार वह रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही पूरा हो गया। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से उन्हें न केवल कार्यालयों की अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली, बल्कि समय की भी बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के साथ आधार आधारित ई-केवाईसी जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए पंजीयन विभाग ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

    पहले नामांतरण के लिए करना पड़ता था इंतजार, अब रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ काम

    श्री अजीत राम साहू ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। इससे खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय निकालने में भी परेशानी होती थी।

    इस बार ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण पूरा हो गया। इससे उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाने और नामांतरण के लिए इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। श्री साहू ने बताया कि इस सुविधा से उनका समय बचा और संपत्ति से जुड़े आगे के कार्यों को पूरा करने में भी आसानी हुई।

    ऑटोम्यूटेशन से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया हुई आसान

    पंजीयन विभाग द्वारा लागू ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की संबंधित प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और बार-बार संबंधित कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है।

    इस व्यवस्था का विशेष लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है, जिन्हें पहले जमीन के नामांतरण के लिए तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया जुड़ने से समय की बचत और अनावश्यक दौड़भाग में कमी आ रही है।

    आधार आधारित ई-केवाईसी से पंजीयन में बढ़ रही पारदर्शिता

    पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पहचान संबंधी प्रक्रिया अधिक सुगम होने के साथ गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका कम करने में मदद मिल रही है।

    तकनीक आधारित इन सुधारों से पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर समय और अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    अजीत राम की कहानी—तकनीक से आसान हुआ जमीन का काम

    श्री अजीत राम साहू ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने और कार्यालयों के अतिरिक्त चक्कर से राहत मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    श्री साहू का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। उनके लिए ऑटोम्यूटेशन केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि लंबे इंतजार से मुक्ति, समय की बचत और संपत्ति संबंधी कार्यों को आसानी से पूरा करने का माध्यम बना है।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई अजीत राम साहू की यह कहानी पंजीयन सेवाओं में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। जहां पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, वहीं अब तकनीक के माध्यम से दोनों प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों को सुविधा मिल रही है।