Author: NewseDay

  • फिल्म में है बाघों की दुनिया के लिये वनकर्मियों के समर्पण की कहानी

    फिल्म में है बाघों की दुनिया के लिये वनकर्मियों के समर्पण की कहानी

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्य प्राणी सप्ताह के समापन अवसर पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, मोहली में वन और वन्य प्राणी संरक्षण के लिये वन कर्मियों के समर्पण को प्रदर्शित करती लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ को रिलीज किया। बांधवगढ़ के घने वन, बाघों की स्वच्छंद गतिविधियां और अनूठा प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन प्रकृति की इस संपदा को सुरक्षित रखने के लिए जो वनकर्मी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करते हैं, उनकी कहानियां अक्सर अनकही रह जाती हैं। इन्हीं पहलुओं को लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ में दर्शाया गया है। समारोह में फिल्म का एक अंश भी प्रदर्शित किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास वन्य जीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वन और वन्य जीव केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी और जागरूकता आवश्यक है।

    नियमित गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा, वन्य जीवों के स्वास्थ्य की देखभाल और मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंकाओं पर नजर रखना भी इसकी अहम जिम्मेदारियां हैं। फिल्म वनों के इसी पक्ष से दर्शकों को परिचित कराएगी, जिसे सामान्य पर्यटक अक्सर नहीं देख पाते। लगभग 13 मिनट 13 सेकंड की यह फिल्म बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक सौंदर्य, गौरवशाली इतिहास, समृद्ध जैव विविधता और बाघों के जीवन के साथ वन्य जीव संरक्षण में जुटे वन अमले की भूमिका को दर्शाती है। बांधवगढ़ जैसे बाघ बहुल क्षेत्र में संरक्षण केवल वन्य जीवों की निगरानी तक सीमित नहीं है।

    संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास

    ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ का निर्माण ‘उड़न गिलहरी’ कंपनी ने किया है। फिल्म निर्माण में  ओजैर और  अमन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। फिल्म से बांधवगढ़ की खूबसूरती के साथ उन वनकर्मियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के समर्पण को भी पहचान मिलेगी, जो कठिन परिस्थितियों में इस प्राकृतिक धरोहर की रक्षा कर रहे हैं।

    228 अधिकारी-कर्मचारी संभाल रहे वन सुरक्षा की जिम्मेदारी

    उमरिया जिला स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए 228 अधिकारी-कर्मचारी दिन-रात तैनात हैं। इनमें क्षेत्र संचालक, उप संचालक, 5 सहायक वन संरक्षक, एक वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, 10 वन क्षेत्रपाल, 11 उप वन क्षेत्रपाल, 31 वनपाल और 155 वनरक्षक सहित हाथी, महावत दल एवं वाहन चालक शामिल हैं।

    इनके साथ 101 स्थाईकर्मी, 37 टीपीएफ जवान और 583 ईडीसी श्रमिक भी वन सुरक्षा एवं संरक्षण कार्यों में योगदान दे रहे हैं। दुर्गम वन क्षेत्रों में गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई कर यह अमला बांधवगढ़ की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में जुटा है। संरक्षण व्यवस्था के सुचारु संचालन में क्षेत्र संचालक कार्यालय की टीम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां 32 कर्मचारी प्रशासनिक, वित्तीय, अभिलेखीय और तकनीकी कार्यों के माध्यम से मैदानी अमले को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हैं।

     

  • बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर तक 20-20 बसें शुरू करने का लक्ष्य

    बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर तक 20-20 बसें शुरू करने का लक्ष्य

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 11 अक्टूबर को कंसेशन एग्रीमेंट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की मौजूदगी में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और कोरबा नगर निगम का चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट होगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत होने वाले इस समझौते से चारों शहरों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा। 

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में प्रदेश के आठ नगरीय निकायों के महापौर और आयुक्त शामिल होंगे। इनमें रायपुर की महापौर मती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर मती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर मती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर मती अलका बाघमार, रिसाली की महापौर मती शशि सिन्हा, भिलाई के महापौर  नीरज पाल, बीरगांव के महापौर  नंदलाल देवांगन तथा भिलाई-चरोदा के महापौर  निर्मल कोसरे शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, संचालक  नीलेश क्षीरसागर और सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इनमें सबसे अधिक 100 बसें रायपुर में चलेंगी। दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलेंगी। बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर 2026 तक प्रतीकात्मक रूप से 20-20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रमुख सचिव  बोरा ने बताया कि ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसें आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस होंगी। यात्रियों को मोबाइल स्कैनर के माध्यम से किराए का भुगतान करने और ऑनलाइन टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाए जाएंगे। यात्री मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

     बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

     

  • मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण हुआ प्रारंभ

    मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण हुआ प्रारंभ

    भोपाल 

    शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

    कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों और वन अमले की संयुक्त भागीदारी

    अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ संस्था ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। मालवा अंचल के साथ प्रदेश के अन्य जिलों से आए वन्यप्राणी चिकित्सक, वन अधिकारी और प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारी भी इसमें भागीदारी कर रहे हैं।

    कृष्ण-मृगों को पकड़ने, उनकी देखभाल करने और सुरक्षित परिवहन के दौरान निर्धारित स्थानांतरण प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है, ताकि वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण

    कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है।

    किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील

    अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है

  • मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026: डेलिगेट्स ने अनुभव की प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और रोमांचक पर्यटन गतिविधियां

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026: डेलिगेट्स ने अनुभव की प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और रोमांचक पर्यटन गतिविधियां

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में देश-विदेश से आए डेलिगेट्स को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, जैव विविधता और रोमांचक पर्यटन संभावनाओं से रूबरू कराने के लिए विभिन्न विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिनिधियों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को करीब से जानने, स्थानीय परिवेश का अनुभव करने और मध्यप्रदेश को एक विविधतापूर्ण पर्यटन गंतव्य के रूप में समझने का अवसर मिला। हेरिटेज वॉक, शिकारा बोट राइड, बर्ड वॉक, योग और हेलीकॉप्टर जॉय राइड जैसी गतिविधियों ने प्रतिनिधियों के अनुभव को यादगार बनाया।

    ट्रैवल मार्ट के अंतर्गत कुल 149 विशिष्ट प्रतिनिधियों ने विभिन्न गतिविधियों के लिए सहभागिता दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिनिधियों द्वारा कुल 338 गतिविधि चयन किए गए। इनमें शिकारा बोट राइड सर्वाधिक लोकप्रिय रही, जिसके लिए 120 चयन दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त हेरिटेज वॉक के लिए 95, बर्ड वॉक के लिए 70, योग के लिए 38 और हेलीकॉप्टर जॉय राइड के लिए 15 चयन दर्ज किए गए।

    ऐतिहासिक विरासत से प्रकृति के करीब पहुंचने तक का अनुभव

    भोपाल के कमला पार्क में आयोजित हेरिटेज वॉक के माध्यम से प्रतिनिधियों को शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला। वहीं, एमपीटी बोट क्लब में आयोजित शिकारा बोट राइड ने जल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षक अनुभव प्रदान किया। वन विहार क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान प्रतिनिधियों को पक्षियों और प्राकृतिक परिवेश के बीच समय बिताने का अवसर मिला।

    प्रतिनिधियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न होटलों में योग गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके साथ ही भेल ग्राउंड से आयोजित हेलीकॉप्टर जॉय राइड ने प्रतिभागियों के लिए रोमांच और उत्साह से भरपूर अनुभव प्रस्तुत किया। इन गतिविधियों ने मध्यप्रदेश में विरासत पर्यटन, जल पर्यटन, प्रकृति पर्यटन, वेलनेस टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की विविध संभावनाओं को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

    प्रतिनिधियों ने साझा किए अपने अनुभव

    क्रिस्टीना ग्रुपे (Christina Grupe) ने हेरिटेज वॉक के अनुभव को सराहते हुए कहा, “मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। हेरिटेज वॉक के माध्यम से किसी स्थान के इतिहास और उसकी जीवंत परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। इस तरह की गतिविधियां पर्यटकों को किसी गंतव्य से भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”

    निशिथ नोटानी (Nishith Notani) ने शिकारा बोट राइड के अनुभव पर कहा, “मध्यप्रदेश में जल पर्यटन की संभावनाएं बेहद आकर्षक हैं। शिकारा बोट राइड के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद लेना शानदार अनुभव रहा। ऐसी गतिविधियां पर्यटकों को यात्रा के दौरान सुकून के पल देने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन अनुभव को और अधिक यादगार बनाती हैं।”

    डॉ. बितान कुमार दत्ता (Dr. Bitan Kumar Dutta) ने बर्ड वॉक के संबंध में कहा, “प्रकृति और जैव विविधता को करीब से देखने का अवसर किसी भी पर्यटन अनुभव को विशेष बना देता है। बर्ड वॉक के दौरान प्राकृतिक परिवेश के साथ जुड़ने का अनुभव मिला। मध्यप्रदेश में प्रकृति पर्यटन और वन्यजीव आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।”

    बलराज कपूर (Balraj Kapoor) ने हेलीकॉप्टर जॉय राइड के अनुभव को रोमांचक बताते हुए कहा, “हेलीकॉप्टर जॉय राइड ने मध्यप्रदेश के पर्यटन अनुभव में रोमांच का एक नया आयाम जोड़ा। किसी गंतव्य को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इस तरह की गतिविधियां प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान देने में सहायक होंगी।”

     आर्थर हेकर (Arthur Hecker) ने योग गतिविधि पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “यात्रा के दौरान योग जैसी गतिविधियां शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने का अवसर देती हैं। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में पर्यटन के साथ वेलनेस को महत्व देना एक सकारात्मक पहल है। इससे यह संदेश मिलता है कि मध्यप्रदेश पर्यटकों को केवल दर्शनीय स्थल ही नहीं, बल्कि सुकून और आत्मिक शांति के अनुभव भी प्रदान कर सकता है।”

    सु चिरा फेट्रोम (Ms. Chira Phetrom) ने विभिन्न गतिविधियों के समग्र अनुभव पर कहा, “मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को शामिल करना बेहद सराहनीय है। यहां इतिहास, प्रकृति, रोमांच और वेलनेस को एक साथ अनुभव करने का अवसर मिलता है। इस तरह के आयोजन प्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को समझने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

    पर्यटन के विविध आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत करने की पहल

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में आयोजित गतिविधियों ने यह प्रदर्शित किया कि प्रदेश में पर्यटन केवल ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्रकृति के सान्निध्य, जल पर्यटन, पक्षी अवलोकन, योग और रोमांचक अनुभवों की भी व्यापक संभावनाएं हैं। प्रतिनिधियों की सहभागिता और गतिविधियों के प्रति उनकी रुचि ने अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती अहमियत को रेखांकित किया।

    इन गतिविधियों के माध्यम से मध्यप्रदेश की विविध पर्यटन विशेषताओं को प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला। ट्रैवल मार्ट ने प्रदेश को एक ऐसे पर्यटन गंतव्य के रूप में अनुभव करने का मंच प्रदान किया, जहां इतिहास, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और वेलनेस का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

     

  • लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली अंशिता की जिंदगी, संघर्षों को मात देकर कॉलेज तक पहुंची बेटी

    लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली अंशिता की जिंदगी, संघर्षों को मात देकर कॉलेज तक पहुंची बेटी

    भोपाल

    मध्यप्रदेश सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की शिक्षा, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की राह मजबूत कर रही है। सागर जिले के सेक्टर पटोवा, परियोजना बंडा के आंगनवाड़ी केंद्र धबोली की बालिका अंशिता लोधी की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। बचपन में मां को खोने और पिता का साथ छूटने के बाद अंशिता का जीवन अनेक कठिनाइयों से घिर गया था। आर्थिक तंगी के बीच उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार भी चिंतित था, लाड़ली लक्ष्मी योजना से मिले आर्थिक संबल ने अंशिता के सपनों को नई उड़ान दी। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययन कर रही है और अपने बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन, शिक्षा के सामने थीं चुनौतियां

    वर्ष 2006 में एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी अंशिता ने बचपन से ही विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अभी वह छोटी ही थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया। कुछ समय बाद पिता ने भी उसका साथ छोड़ दिया। ऐसी स्थिति में अंशिता के नाना-नानी और मामा ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार के सामने उसकी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती थी। परिवार चाहता था कि अंशिता पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने, लेकिन आर्थिक कठिनाइयां उसके सपनों के रास्ते में बाधा बन रही थीं।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की पहल से मिली नई राह

    इसी दौरान क्षेत्र में लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत सर्वे का कार्य चल रहा था। सर्वे के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा को अंशिता और उसके परिवार की परिस्थितियों की जानकारी मिली। उन्होंने परिवार को बालिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा के महत्व और शासन की योजनाओं के बारे में समझाया। गीता विश्वकर्मा ने आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाने में सहयोग किया और अंशिता का आवेदन लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत करवाया।

    हर शैक्षणिक पड़ाव पर मिला आर्थिक संबल

    लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अंशिता को स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता मिली। कक्षा छठवीं में 6 हजार रुपये, कक्षा नौवीं में 4 हजार रुपये तथा कक्षा 11वीं और 12वीं में 6-6 हजार रुपये की छात्रवृत्ति ने उसकी पढ़ाई में सहयोग दिया। इस सहायता से परिवार को आर्थिक संबल मिला और अंशिता की शिक्षा निरंतर जारी रखने में मदद मिली।

    योजना से मिली सहायता ने परिवार के मन में यह विश्वास मजबूत किया कि बेटी की शिक्षा आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि उसके भविष्य में किया जाने वाला महत्वपूर्ण निवेश है। अंशिता ने भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई के प्रति अपना संकल्प बनाए रखा और एक-एक पड़ाव पार करते हुए आगे बढ़ती रही।

    किशोरावस्था में फिर आई चुनौती, लेकिन नहीं टूटा हौसला

    बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद अंशिता की आगे की पढ़ाई को लेकर परिवार के सामने एक बार फिर चिंता खड़ी हुई। सीमित संसाधनों के कारण मामा उसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे समय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें समझाया कि बेटी की शिक्षा रोकना उसके भविष्य के अवसरों को सीमित करना होगा। उन्होंने परिवार को आगे की पढ़ाई के महत्व से अवगत कराया और अंशिता को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

    इस समझाइश का सकारात्मक असर हुआ। परिवार ने अंशिता की पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया और उसे कॉलेज में प्रवेश दिलाया। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययनरत है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही है।

     

  • ​लोकतंत्र के महापर्व में युवाओं की भागीदारी: शासकीय महाविद्यालय मरवाही में स्वीप व एनएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान

    ​लोकतंत्र के महापर्व में युवाओं की भागीदारी: शासकीय महाविद्यालय मरवाही में स्वीप व एनएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान

    रायपुर

    वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय मरवाही में आज मतदाता जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष एवं प्रभावी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) एवं स्वीप (SVEEP) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को लोकतंत्र में मतदान के महत्त्व से अवगत कराना और युवाओं को मतदाता सूची में पंजीकृत करना था।

    ​स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन की दी गई जानकारी

    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं को भारतीय निर्वाचन प्रणाली, मतदान के अधिकार तथा "स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन" की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एक सशक्त और समृद्ध लोकतंत्र की नींव युवाओं के जागरूक हाथों में होती है। इसलिए प्रत्येक योग्य नागरिक को बिना किसी प्रलोभन या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

    ​18 वर्ष पूर्ण कर चुके 25 छात्र-छात्राओं का कराया गया ऑन-द-स्पॉट ऑनलाइन पंजीयन

     ​कार्यक्रम की सबसे मुख्य विशेषता नवीन मतदाताओं का त्वरित पंजीयन रहा। ऐसे छात्र-छात्राएं जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है, उन्हें 'वोटर हेल्पलाइन ऐप' तथा 'एनवीएसपी' पोर्टल के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की संपूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया प्रयोगात्मक रूप से समझाई गई।

    जागरूकता के इस अभियान का तात्कालिक असर देखने को मिला, जहाँ कार्यक्रम के दौरान ही 25 पात्र छात्र-छात्राओं के मतदाता सूची में नाम जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन सफलता पूर्वक दर्ज कराए गए।

    नोडल अधिकारी (स्वीप) एवं जिला संगठक, राष्ट्रीय सेवा योजना ने कहा कि युवा वर्ग लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक विद्यार्थी को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।

        ​युवाओं में दिखा भारी उत्साह

     ​कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एनएसएस स्वयंसेवकों एवं भारी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं ने न केवल स्वयं पंजीयन कराने का संकल्प लिया, बल्कि अपने-अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने का जिम्मा उठाने की बात कही।

  • गांवों से पर्यटन की नई उड़ान, छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रहे जमीनी नायक

    गांवों से पर्यटन की नई उड़ान, छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रहे जमीनी नायक

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है।

    छत्तीसगढ़ का बस्तर, पर्यटन के नक्शे पर अपनी पहचान, संस्कृति और प्रकृति की अनुपम छटा वाले पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जा रहा है। वास्तव में बस्तर का वन क्षेत्र बेहद निराला है। प्रकृति की हरियाली और स्वच्छता पर्यटकों को आकर्षित करता है। धीरे-धीरे बस्तर न केवल विकास की धारा से जुड़ रहा है बल्कि पयर्टन के हिसाब से भी तेजी से बदल रहा है। यहां का खूबसूरत इलाका अपनी अनोखी आदिवासी संस्कृति, घने जंगलों की छटा सबका ध्यान खींच रहा है। साथ ही, यहां के लोगों का भावपूर्ण और अतिथि सत्कार भी दुनिया भर के पर्यटकों को लुभा रहा है।

    जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार 

    छत्तीसगढ़ अब अपनी माटी की खुशबू, समृद्ध जनजातीय परंपराओं और गांवों के नैसर्गिक सौंदर्य के दम पर देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर छाने को तैयार है। राज्य सरकार ने पर्यटन के विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए नई औद्योगिक नीति (2024-2030) में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार की है। इसी कड़ी में अब ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है। इन तीनों निर्णयों से गांवों में रोजगार, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण का नया अध्याय शुरू होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का यह त्रिआयामी मॉडल पर्यटन को स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करेगा।

    विश्व प्रसिद्ध बस्तर का दशहरा 

    बारिश का मौसम बीतने के बाद से ही यहां हरे-भरे जंगल, पहाड़ और उनके उफनते पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। इसलिए आज की तारीख में बस्तर भी देश के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में एक साबित हो रहा है। हालांकि बस्तर का दशहरा बहुत पहले से प्रसिद्ध है, 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर के दशहरा में कुछ खास होने वाला है, लेकिन हाल के दिनों में इस अवसर पर जुटने वाले सैलानियों की संख्या में खासा इजाफा दर्ज किया गया है। इस वर्ष भी यहां का दशहरा देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। नवरात्रि और दशहरा के अलावा यहां दीपावली पर भी दुनिया भर से भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।

    बस्तर के सहज जीवन से वैश्विक पहचान तक

    बस्तर के बालक ‘चेन्दरू मंडावी’ की बाघ ‘टेंबू’ के साथ दोस्ती ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के सहज ग्रामीण जीवन का डंका बजाया था।उसी नाम से राज्य सरकार ने ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम 2025’ लागू किया गया हैजो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होगा। इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में लगे जमीनी नायकों या संस्थाओं को 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय ज्यूरी इसका चयन करेगी और विजेता को राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित कर उन पर एक सचित्र स्मारिका जारी की जाएगी।

    बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत

     छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'चेन्दरू' राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत की गई है। यह पुरस्कार बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्होंने स्वीडिश फिल्म 'जंगल सागा' से अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की थी। गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। 

    होमस्टे से पर्यटक गांव की जीवनशैली जानेंगे

     पुरस्कार और प्रोत्साहन के साथ-साथ राज्य सरकार की होमस्टे नीति इस पूरे ढांचे को व्यावहारिक धरातल प्रदान कर रही है। अब पर्यटक महंगे होटलों की बजाय गांवों में पारंपरिक घरों का अनुभव कर सकेंगे। पर्यटक गांव के ही घरों में रुकेंगे। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। पर्यटकों को ग्रामीणों के घरों में ठहरने, उनका पारंपरिक भोजन करने, चारपाई का उपयोग करने, खेत-खलिहान घूमने और कुएं का पानी आदि देखने-अनुभव करने का अवसर मिलता है।

    होमस्टे के जरिए पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

     होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से ग्रामीण, जनजातीय और पर्यटन क्षेत्रों के परिवारों को अपने  घरों को पर्यटन सुविधा में बदलकर अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय खान-पान, कला, परंपरा, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा नए होमस्टे की स्थापना तथा मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता के साथ संचालकों को आतिथ्य, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी इस नीति में किया गया है। इससे मिलने वाला पैसा सीधे ग्रामीण परिवार, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों की जेब में जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा। इस नीति से बस्तर और सरगुजा के अंचलों से लेकर मैदानी गांवों तक, होमस्टे के जरिए पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर समृद्धि के नए द्वार खोले गए

    छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन, मनोरंजन और अन्य सामाजिक सेवा सेक्टर को विशेष रूप से शामिल किया गया है। पर्यटन परियोजनाओं को सामान्य उद्योगों की तरह ही न्यूनतम पूंजी निवेश पर विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएं दी जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। सुशासन सरकार इन्हीं संभावनाओं को साकार कर रही है। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर समृद्धि के नए द्वार खोले गए हैं। सरगुजा से लेकर बस्तर तक, गांव से लेकर शहरों तक हर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। पर्यटन क्षेत्र से नए रोजगारों का सृजन हो रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

    स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर होंगे निर्मित 

     साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है। श्री विष्णु देव साय ने कहा राज्य में लगातार इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

    गांव का युवा अपने ही क्षेत्र में पर्यटन उद्यमी बन सकेंगे

     राज्य सरकार की नई उद्योग नीति में पर्यटन को सेवा उद्योग का दर्जा देने का कदम भी पर्यटन को गति देगा। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर, इको-टूरिज्म और होमस्टे विकसित करने वाले युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को विशेष कैपिटल सब्सिडी, ब्याज अनुदान और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस का लाभ मिलेगा। इसके अलवा ग्रामीण युवाओं को आतिथ्य, टूर गाइडिंग और डिजिटल मार्केटिंग की ट्रेनिंग देने का प्रावधान किया गया है, ताकि गांव का युवा अपने ही क्षेत्र में ‘पर्यटन उद्यमी’ बन सकें। 
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  • 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण करेंगे। इससे प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित होगी, जिससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधायुक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे।

    मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी

    शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को की जाती है। योजना अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

    प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नरसिंहपुर के सांदीपनि विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

     

  • परगट सिंह कल संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान, 10 हजार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होगी ताजपोशी

    परगट सिंह कल संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान, 10 हजार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होगी ताजपोशी

    चंडीगढ़ 
    पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान परगट सिंह ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस में इतने चेहरे हैं कि हर कोई मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

    परगट सिंह कल यानी रविवार (11 अक्टूबर) को पंजाब कांग्रेस प्रधान के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। चंडीगढ़ में स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में उनके पदभार ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस कार्यक्रम में पार्टी के करीब 10 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है।

    पदभार ग्रहण समारोह को लेकर प्रदेश संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार, 11 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में होने वाले इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के जुटने की उम्मीद है।

    पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी अहम रहेगी। इस समारोह पर पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच सबकी नजरें पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी तथा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मौजूदगी पर टिकी हैं।

    दोनों नेताओं की उपस्थिति को नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठनात्मक एकजुटता के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, समारोह में उनकी भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति पर नजर रहेगी।

    दिल्ली में डटे हैं दोनों सीनियर नेता
    चन्नी और वड़िंग इन दिनों दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मतदाता सूची तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी कांग्रेस के भीतर आपसी तालमेल और नए नेतृत्व को समर्थन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रविवार को होने वाले कार्यक्रम में 8 से 10000 कांग्रेस समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है।

    हरमंदिर साहिब में माथा टेककर शुरू की नई पारी
    परगट सिंह ने गुरुवार को अमृतसर स्थित श्री गुरु हरमंदिर साहिब में सचिन पायलट और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ माथा टेककर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद अब चंडीगढ़ में औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने की तैयारी है। पार्टी के सामने इस आयोजन के जरिए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने की चुनौती भी है।

    समितियों की बैठकों का दौर होगा तेज
    प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियां पहले ही तेज हो चुकी हैं। चुनावी तैयारियों के तहत घोषणापत्र समिति की दो-तीन बैठकें हो चुकी हैं। अब अगले सप्ताह से पार्टी की अन्य समितियों की बैठकें आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। नए अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद इन गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। अब देखना होगा कि परगट सिंह वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित कर पार्टी को चुनावी तैयारी के लिए किस तरह एकजुट करते हैं।

    परगट सिंह की तीन बड़ी बातें…
        परगट सिंह ने कहा कि चन्नी, राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखपाल सिंह खैरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के पास काफी अनुभव है। वह उनके अनुभव का लाभ उठाकर पार्टी को मजबूत करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।

        पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी मनमुटाव की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। हर नेता की भूमिका तय की जाएगी और सभी को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।

        उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह ने कहा कि वह राजनीति में स्ट्राइकर की भूमिका निभाएंगे, लेकिन फुल बैक के तौर पर भी खेलने के लिए तैयार हैं।

    सीएम पद पर परगट सिंह की दावेदारी के 4 कारण
        प्रदेश प्रधान का पद:
    2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रधान नियुक्त किया है। राजनीतिक परंपराओं के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले प्रदेश प्रधान बनने वाला नेता स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो जाता है।

        गुटबाजी खत्म करने के लिए 'स्वीकार्य चेहरा': पंजाब कांग्रेस लंबे समय से चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के गुटों के बीच खींचतान से जूझ रही थी। परगट सिंह की छवि एक साफ-सुथरे और विवादों से दूर रहने वाले नेता की है, जिन्हें सभी धड़े स्वीकार करते हैं। वह चन्नी और नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट दोनों के करीबी माने जाते हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।

        संतुलित सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण: परगट सिंह जट्ट सिख समुदाय से आते हैं और दोआबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें कमान सौंपकर कांग्रेस ने बिना किसी बड़े सामाजिक बदलाव के समीकरणों को संतुलित किया है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।

        तीन बार के विधायक रह चुके: वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह पंजाब के खेल और शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं और तीन बार के विधायक हैं। उनकी बेदाग और मुखर राजनीतिक शैली के कारण उन्हें एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है।

    2 अक्टूबर को बने प्रदेश अध्यक्ष
    जालंधर कैंट से विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को 2 अक्टूबर 2026 को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली।

    पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाओं के बीच कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह पर भरोसा जताया। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में विजय इंदर सिंगला का नाम भी चर्चा में था, लेकिन हाईकमान ने परगट सिंह को संगठन की कमान सौंपी।

    2027 से पहले गुटबाजी खत्म करना चुनौती
    पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और सभी गुटों को एकजुट करने की चुनौती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं।

    ऐसे में परगट सिंह के सामने सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। हॉकी के मैदान में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह के लिए राजनीतिक मैदान में भी टीम के सभी खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना अहम होगा। विरोधियों का कहना है कि उनके लिए यह राह आसान नहीं होगी।

     

  • ‘मुझे 8 नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे’, नवी पिल्ले को सम्मान मिलने पर ट्रंप का बयान चर्चा में

    ‘मुझे 8 नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे’, नवी पिल्ले को सम्मान मिलने पर ट्रंप का बयान चर्चा में

     वाशिंगटन (डीसी)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुंह फूला हुआ है. उन्होंने भारतीय मूल की दक्षिण अफ़्रीकी न्यायविद नवी पिल्ले को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने पर नाराजगी जताई है. अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन्हें 8 नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे, सिर्फ एक नहीं. मैंने आठ युद्धों के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाया है. उन्होंने यह भी कहा कि ये महिला कौन हैं? न इनके बारे में जानता हूं, न ही जनता को उनके बारे में किसी को कोई जानकारी है. फिर भी उनको नोबेल दे  दिया गया। 

    पिल्ले के बारे में ये बोले ट्रंप
    ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा है कि पि
    ल्ले के बारे में किसी ने कुछ नहीं सुना है. जहां तक मेरी जानकारी है, वह स्पष्ट रूप से इजराइल की विरोधी हैं. यह भी नहीं पता कि उन्होंने वास्तव में क्या कार्य किए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मैंने तो 8 युद्धों को सुलझाया है. मैंने जिन देशों की मदद की है उन सभी मुल्कों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों ने नॉर्वेजियन नोबेल समिति को पत्र भेजे थे. मैं ईरान और रूस/यूक्रेन के साथ दो और युद्धों को सुलझाने या जीतने वाला हूं. हालांकि असली मुद्दे वे आठ युद्ध हैं जिन्हें मैंने सुलझाया है. इनमें भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध बेहद खास है. यह युद्ध रुकवाना वास्तव में नोबेल पुरस्कार देने के लिए पर्याप्त है। 

    इन आठ युद्धों को भी साझा किया
    उन्होंने पोस्ट में सभी आठ युद्धों की चर्चा भी की. इनमें कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवा और सर्बिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, इजराइल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया , आर्मेनिया और अजरबैजान के अलावा इजराइल और हमास।  

    मैंने इतिहास में सबसे ज्यादा जानें बचाई हैं
    टंप ने कहा कि मैंने ही ईरान को न्यूक्लियरर वेपन बनाने से रोका, पूरे मिडिल ईस्ट को ही उजड़ने से रोका है. यह भी कहा कि इतिहास में  उन्होंने सबसे अधिक जानें बचाई हैं. पिछले साल मुझे नोबेल प्राइज देते हुए मारिया कोरिना मचाडो  ने मीडिया से कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप ने कई लड़ाइयां सुलझाईं, वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार है. नोबेल पाने वालों के लिए आज तक कभी किसी ने ऐसा नहीं किया। 

    इजराइल में सभी बंधकों को वापस लाया था…
    ट्रंप ने कह, 'मैंने इजराइल में सभी बंधकों को छुड़वाया जिसमें आखिरी 28 जिंदा लोगों के साथ कुछ मृतक भी थे। हमास के साथ मिलकर ये कठिन कार्य पूरा किया. मेरे ही प्रयास से दुनिया के तानाशाह निकोलस मादुरो को वेनेजुएला से हटाया जा सका. मैं वेनेजुएला को एक अमीर डेमोक्रेसी में तब्दील करने के प्रयास में हूं. ईरान के अलावा मैंने इज़राइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप को बर्बाद करने से रोका है. मेरे निरंतर प्रयास से ही साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया, जापान व नॉर्थ कोरिया के बीच जंग थमी हुई है। 

    मैंने बंधकों को उनके घर तक पहुंचाया
    मैं NATO देशों के GDP के 2% से 5% तक ख
    र्च बढ़ाने, मज़बूत अलायंस और डिफेंस बनाने में भी सफल रहा हूं.यह भी कहा कि मैंने पूर्वी यूरोप के कई देशों के 900 से अधिक राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए बातचीत कर उनकी वापसी पक्की कराई. दुनिया भर से 196 बंधकों को दूसरे देशों की कैद से छुड़ा कर उनको घर तक पहुंचाने वाला मैं ही हूं। 

    जिसे कोई नहीं जानता उसे नोबेल दे दिया
    मैंने इतने महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने के साथ अहम जिम्मेदारियां निभाईं इसके बाद भी नोबेल प्राइज़ एक ऐसे लिबरल इंसान को दिया गया जो यूनाइटेड नेशंस में काम करता है और जिसके बारे में कोई भी नहीं जानता. मैंने जितने भी युद्ध सुलझाए हैं उसके लिए कभी यूनाइटेड नेशंस से बात नहीं की, न वहां से कोई मदद मिली। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका जिसे मैं आपके प्रेसिडेंट के तौर पर रिप्रेजेंट करता हूं, को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।  यह नॉर्वे पर लगा ऐसा दाग है जिसे कभी नहीं मिटाया जा सकेगा।