Author: NewseDay

  • भोपाल में फेस्टिव शॉपिंग सीजन शुरू, गरबा से दिवाली तक बाजारों में बढ़ेगी ग्राहकों की भीड़

    भोपाल में फेस्टिव शॉपिंग सीजन शुरू, गरबा से दिवाली तक बाजारों में बढ़ेगी ग्राहकों की भीड़

    भोपाल
    शारदीय नवरात्रि के साथ भोपाल के बाजारों में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू हो गया है। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, बिट्टन मार्केट, चौक बाजार, करोंद और बैरागढ़ सहित शहर के प्रमुख बाजारों में कारोबारियों ने त्योहारों की मांग को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पूजा सामग्री, फूल-फल और चुनरी से शुरू होने वाली खरीदारी गरबा के पारंपरिक परिधानों, दशहरा, करवा चौथ और दीपावली के सामान तक पहुंचेगी। इसके बाद छठ तक कई श्रेणियों में मांग बनी रहने की उम्मीद है।

    ऐसे में व्यापारियों के लिए अगले डेढ़ महीने बिक्री बढ़ाने के साथ छोटे कारोबारियों और स्थानीय कारीगरों को काम देने का अवसर भी होंगे।नवरात्रि के दौरान कलश, नारियल, चुनरी, मौली, रोली, कपूर, धूप-अगरबत्ती और पूजा पात्रों की मांग बढ़ती है। नौ दिनों तक घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना होने से इन वस्तुओं की बिक्री बनी रहती है। प्रमुख बाजारों के अलावा कालोनियों और चौराहों पर अस्थायी दुकानें लगाने वाले छोटे दुकानदारों को भी इस दौरान अतिरिक्त कमाई की उम्मीद रहती है।

    गरबा-डांडिया से कपड़ा और एक्सेसरीज बाजार को मिलेगा सहारा
    नवरात्रि में गरबा और डांडिया आयोजनों के कारण पारंपरिक परिधानों की मांग बढ़ती है। चनिया-चोली, लहंगा, कुर्ते, पगड़ी और पारंपरिक आभूषणों के साथ मैचिंग ज्वेलरी, चूड़ियां, जूती और अन्य एक्सेसरीज की खरीदारी होती है। इसका फायदा कपड़ा कारोबारियों के साथ दर्जियों, कढ़ाई करने वालों और छोटे विक्रेताओं को भी मिलता है।

    दशहरा-दीपावली में बढ़ेगा खरीदारी का दायरा
    नवरात्रि के बाद दशहरा और फिर करवा चौथ के लिए खरीदारी होगी। दीपावली के दौरान कपड़ों, जूते-चप्पल, मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, घरेलू उपकरण, फर्नीचर, सजावटी सामान, मिठाई, उपहार और ज्वेलरी की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। कई परिवार त्योहारों के लिए पहले से खरीदारी करते हैं, जबकि कुछ लोग बजट और आफर देखकर खरीदारी का समय तय करते हैं। इससे अलग-अलग बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी रह सकती है।

    फूल, मिठाई और सजावट से जुड़े कारोबार को भी मिलेगा काम
    मंगलम इलेक्ट्रोनिक के डायरेक्टर श्याम बंसल ने बताया कि त्योहारों के दौरान फूल-मालाओं, फलों, मिठाइयों और पूजा सामग्री की मांग बढ़ती है। दुर्गा पूजा पंडालों और धार्मिक आयोजनों के लिए बांस, कपड़े, रंग, लाइट, बिजली की झालर और साउंड सिस्टम की जरूरत होती है। इससे सजावट कारोबारियों, कारीगरों, मजदूरों और इलेक्ट्रिशियन को भी काम मिलता है। चौक बाजार में पारंपरिक खरीदारी और ज्वेलरी, जबकि न्यू मार्केट, 10 नंबर और बैरागढ़ में कपड़े, फुटवियर और घरेलू जरूरत के सामान का कारोबार महत्वपूर्ण रहता है।

    छोटे दुकानदारों को भी सीजन से उम्मीद
    किराना व्यापारी महासंघ महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि त्योहारी कारोबार का लाभ बड़े शोरूम तक सीमित नहीं रहता। फूल और फल विक्रेता, मिठाई दुकानदार, दर्जी, कारीगर और अस्थायी स्टाल लगाने वाले भी इस सीजन पर निर्भर रहते हैं। नवरात्रि से शुरू होने वाली खरीदारी यदि दशहरा और दीपावली तक गति बनाए रखती है, तो बाजार में बिक्री के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। कारोबारियों की नजर अब इसी बात पर है कि शुरुआती रौनक दीपावली तक कितनी मजबूत बनी रहती है। छठ तक जारी रहने वाली मांग इस कारोबारी सीजन को और विस्तार दे सकती है।

  • ट्रेन में बैग चोरी मामले में रेलवे को राहत नहीं, दिल्ली आयोग ने बरकरार रखा ₹1.45 लाख मुआवजे का आदेश

    ट्रेन में बैग चोरी मामले में रेलवे को राहत नहीं, दिल्ली आयोग ने बरकरार रखा ₹1.45 लाख मुआवजे का आदेश

     नई दिल्‍ली

    दिल्‍ली राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग ने भारतीय रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. जिसका बैग रिजर्व डिब्‍बे से चोरी हो गया था. आयोग का मानना है कि रेलवे यह कहकर बच नहीं सकता है कि सामान यात्री के निजी हिरासत में था। 

    आयोग ने कहा कि असली मुद्दा रेलवे कर्मचारियों की अनरिजर्व एंट्री को रोकने में विफलता थी. पैसेंजर का बैग दो अनरिजर्व व्‍यक्तिओं के रिजर्व बोगी में घुसने के बाद ही गायब हुआ था. इस बैग में 1.20 लाख रुपये का कीमती सामान था। 

     रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले की सुनवाई दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने की. दिल्‍ली आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। 

    दिल्‍ली आयोग के सामने उत्तर रेलवे ने 16 अप्रैल, 2024 को जिला आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 7 सितंबर, 2017 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1.20 लाख रुपये और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। 

    कैसे गायब हुआ था बैग? 
    7 जून 2014 को अजय कुमार महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे. ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो अज्ञात घुसपैठिए उनके अनरिजर्व डिब्बे में घुस गए और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए. कुमार ने बताया कि बैग में साड़ियां, गहने और कपड़े थे, जिनकी कीमत 12 लाख रुपये थी। 

    चोरी के बाद शिकायत
    अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने तुरंत कोच के टीटीई से FIR दर्ज कराने के लिए संपर्क किया. रेलवे पुलिस बल (RPF) ने 7 सितंबर, 2014 को चोरी की पुष्टि की, लेकिन FIR के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. 22 जनवरी, 2015 के एक पत्र में कहा गया कि कुमार को मोबाइल फोन के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उल्लिखित नंबर उनका नहीं था। 

    अंततः 23 अप्रैल, 2015 को एफआईआर दर्ज की गई. 15 मई, 2017 को मामले को 'अनसुलझा' घोषित कर दिया गया. उत्तर रेलवे ने तर्क दिया कि सामान कुमार की निजी हिरासत में था और न तो रेलवे के पास दर्ज कराया गया था और न ही इसकी जानकारी दी गई थी। 

    राज्य आयोग ने रेलवे के इस तर्क को खारिज कर दिया कि सामान की व्यक्तिगत अभिरक्षा से उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है. आयोग ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या रेलवे ने अनरिजर्व डिब्बे में अनरिजर्व व्यक्तियों के प्रवेश को रोककर यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती थी. आयोग ने आगे कहा कि अपीलकर्ता की जवाबदेही केवल चोरी होने से नहीं बनती, बल्कि यह बिना परमिशन घुसपैठ को रोकने में विफलता से पैदा होती है, जिस कारण चोरी हो पाई। 

  • PM धन-धान्य योजना: मध्यप्रदेश के 4 जिलों ने मारी बाजी, सम्मान समारोह 12 अक्टूबर को

    PM धन-धान्य योजना: मध्यप्रदेश के 4 जिलों ने मारी बाजी, सम्मान समारोह 12 अक्टूबर को

    डिंडौरी
     प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश के डिंडौरी, सीधी, उमरिया और टीकमगढ़ जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए डिजिटल निगरानी मंच पर तय किए गए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर मासिक प्रगति के आधार पर बेस्ट परफार्मिंग जिलों का चयन किया गया है।

    योजना के एक वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कांप्लेक्स में सुबह 11:30 बजे से राष्ट्रीय सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को सम्मानित किया जाना है। कार्यक्रम में टाप जिलों की रैंकिंग जारी की जाएगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को देश के 100 पिछड़े और आकांक्षी जिलों में की गई थी।

    योजना का उद्देश्य 11 मंत्रालयों की 36 मौजूद योजनाओं को एक साथ जोड़कर किसानों को लाभ पहुंचाना था। साथ ही कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, फसल सघनता में वृद्धि करना और कृषि ऋण वितरण को सरल बनाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य था। चारों जिलों ने तीनों प्रमुख मानकों पर बेहतर कार्य किया है। दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सहयोगी मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे।

    आठ जिलों के दल को किया आमंत्रित
    सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश के आठ जिलों अनूपपुर, डिंडौरी, आलीराजपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, निवाड़ी और टीकमगढ़ से चार-चार सदस्यों के दल को आमंत्रित किया गया है। यह दल दिल्ली में अपने जिले में किए गए नवाचारों और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का प्रस्तुतीकरण भी देगा। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इस सम्मान से मोटे अनाज के उत्पादन, जैविक खेती, नई तकनीक अपनाने और उन्नत खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

     

  • छेड़छाड़ के मामले में केरल हाईकोर्ट का फैसला चर्चा में, महिला की छाती पर कोहनी मारने के केस में बदला निचली अदालत का आदेश

    छेड़छाड़ के मामले में केरल हाईकोर्ट का फैसला चर्चा में, महिला की छाती पर कोहनी मारने के केस में बदला निचली अदालत का आदेश

    त्रिशूर
    केरल हाईकोर्ट ने महिला की छाती पर कोहनी मारने के मामले में एक व्यक्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे महिला की गरिमा भंग करने का इरादा साबित नहीं होता।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने क्रिमिनल रिव्यू पिटीशन मंजूर की। उन्होंने चालक्कुडी की ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट-I की सजा रद्द कर दी।

    इस सजा को त्रिशूर की एडिशनल सेशंस कोर्ट-III ने भी बरकरार रखा था। मामला IPC की धारा 354 के तहत दर्ज था।मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपी को एक महीने की कैद और ₹1000 जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अपीलीय अदालत ने भी दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी थी।

    पीड़ित का पक्ष

        महिला पंचायत रोड से पैदल जा रही थी। तभी आरोपी ने उसकी छाती पर दायीं तरफ कोहनी से वार किया। इससे महिला की गरिमा भंग हुई।
        इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354 के तहत कार्रवाई की गई। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में रीव्यू पिटीशन दायर की थी।

    आरोपी का पक्ष
        निचली अदालतों ने सबूतों का सही आकलन नहीं किया। पुराने विवाद के कारण झूठा फंसाया जा रहा है।

        घटना को लेकर कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है। FIR दर्ज कराने में एक दिन की देरी की गई।

    सरकार का पक्ष
        सरकारी वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत ने सबूतों का सही आकलन किया था।

        फैसलों में ऐसा कोई गैरकानूनीपन, अनियमितता या गंभीर गलती नहीं है, जिसके आधार पर पुनरीक्षण में दखल दिया जाए।

    हाईकोर्ट ने कहा- इरादा व्यक्ति के मन की स्थिति
    हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 354 लगाने के लिए महिला की गरिमा भंग करने का इरादा साबित होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि घटना की प्रकृति और परिस्थितियों की बारीकी से जांच करनी होगी। इससे आरोपी के इरादे का पता लगाया जा सकता है।

    अदालत ने कहा, “मामले में आरोपी पर लगाया गया आरोप यह है कि उसने शिकायतकर्ता की छाती पर कोहनी से वार किया। मुझे समझ नहीं आता कि इसे महिला की गरिमा भंग करने का आपराधिक इरादा कैसे माना जा सकता है।”

    कोर्ट ने आगे कहा, “इसलिए मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं है कि IPC की धारा 354 का अपराध बनाने के लिए जरूरी आपराधिक इरादा इस मामले में मौजूद नहीं है।”

    कोर्ट ने सबूतों की भी जांच की
    हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि के आधार की भी जांच की। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मुख्य रूप से महिला और उसकी मां की गवाही पर भरोसा किया था। अपीलीय अदालत ने भी इन्हीं दोनों के बयानों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी थी।

    ऐसी स्थिति में महिला की गवाही की ज्यादा सावधानी से जांच जरूरी थी। अदालत ने कहा कि उस पर भरोसा करने से पहले स्वतंत्र पुष्टि जरूरी थी।

    हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यौन हमले के मामले में पीड़ित की गवाही को, घायल गवाह की गवाही के समान माना जाता है।

    कोर्ट ने कहा कि गवाह का शिकायतकर्ता से संबंध होना, अपने आप में उसकी गवाही खारिज करने का आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने इसके बाद दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी। आरोपी को बरी कर दिया गया।

  • मोबाइल की लत से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, कम नंबर आने पर ले रहे टेंशन; अभिभावक समय रहते संभलें

    मोबाइल की लत से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, कम नंबर आने पर ले रहे टेंशन; अभिभावक समय रहते संभलें

    चंडीगढ़

    बच्चा स्कूल से आता है तो अभिभावक उसे होमवर्क करने के लिए मोबाइल थमा देते हैं। शुरुआत में बच्चा मोबाइल फोन पर पढ़ाई से जुड़ा काम देखता है, लेकिन कुछ ही देर में रील और गेम में उलझ जाता है। धीरे-धीरे मोबाइल फोन पर समय बिताने की आदत पढ़ाई से ध्यान हटाने लगती है।

    इसका असर बच्चों के टेस्ट और परीक्षा के अंकों पर भी पड़ सकता है। कम अंक आने पर बच्चे तनाव में आ जाते हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर विशेषज्ञों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।

    उनका कहना है कि पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है, लेकिन अभिभावकों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है और कितना समय बिता रहा है।

    पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ फिजिकल एंड रिहैबिलिटेशन मेडिसिन के डाॅ. भविंदर सिंह के अनुसार, सामान्य बच्चों में भी ध्यान भटकने की समस्या के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, व्यवहार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों पर तेज रोशनी और आवाज वाले डिजिटल कंटेंट का असर पड़ सकता है।

    इससे कुछ बच्चों में चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। डाॅ. सिंह के अनुसार, पढ़ाई में परेशानी, परीक्षा का दबाव और अभिभावकों की अपेक्षाएं भी बच्चों में तनाव बढ़ा सकती हैं।

    व्यवहार में देखे बदलाव तो बातचीत कर समझाएं
    बच्चों के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखे तो उन्हें डांटने के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। यदि बच्चा लगातार उदास रहे, खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करे या आत्महत्या जैसे विचार व्यक्त करे तो इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

    बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए उनकी दिनचर्या नियमित रखना जरूरी है। अभिभावक बच्चों को पर्याप्त नींद लेने दें। रोजाना शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद के लिए समय निकालें। मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल सीमित रखें। बच्चों से खुलकर बातचीत करें, ताकि वे अपनी परेशानी बिना डर के बता सकें।

    मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मददगार ऑक्यूपेशनल थेरेपी
    मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास में ऑक्यूपेशनल थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में 10.6 से 15 प्रतिशत वयस्क मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, जबकि 70 से 92 प्रतिशत लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। जागरूकता और विशेषज्ञों की कमी इसकी प्रमुख वजह हैं।

     

  • बिकिनी पहनकर सौंदस मौफकीर ने बिखेरा ग्लैमर, बीच पर उनके स्टाइलिश पोज चर्चा में

    बिकिनी पहनकर सौंदस मौफकीर ने बिखेरा ग्लैमर, बीच पर उनके स्टाइलिश पोज चर्चा में

    मुंबई 
    मोरक्को-फ्रेंच मॉडल और एक्ट्रेस सौंदस मौफकीर की नई तस्वीरों ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है. एक्ट्रेस का बोल्ड अवतार देखकर किसी की भी धड़कनें तेज हो सकती हैं।  सौदस ने व्हाइट एंड ब्लू बिकिनी में बीच पर चिल करते हुए अपनी किलर तस्वीरें शेयर की हैं. एक तस्वीर में एक्ट्रेस बिकिनी पहने पानी में लेटकर नहाती नहाती नजर आईं। किसी तस्वीर में सौंदस मौफकीर बीच किनारे भीगते हुए अपना टोंड फिगर फ्लॉन्ट करती हुई देखी जा सकती हैं।

     इस तस्वीर में एक्ट्रेस पेड़ पर लेटकर किलर अंदाज में पोज देती हुई दिखाई दे रही हैं. सौंदस की हर एक तस्वीर कातिलाना है। एक्ट्रेस के बोल्ड लुक पर फैंस दिल हार रहे हैं. कमेंट सेक्शन उनकी तारीफों से भर गया है. सौंदस को लोग किलर, फायर और वाटर बेबी बता रहे हैं।   सौंदस की बात करें तो सबसे पहले उन्हें को रियलिटी शो MTV Roadies (2022) में देखा गया था. इसके बाद वो MTV Splitsvilla X4 की विनर भी रहीं. सौंदस 'खतरों के खिलाड़ी' 13 में भी नजर आ चुकी हैं। 

     

  • सनातन हिंदू एकता यात्रा 3.0 का आगाज 11 अक्टूबर से, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निकालेंगे रथयात्रा

    सनातन हिंदू एकता यात्रा 3.0 का आगाज 11 अक्टूबर से, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निकालेंगे रथयात्रा

     छतरपुर

     छतरपुर जिले के गढ़ा में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0 का मार्ग तय हो गया है। करीब 500 किलोमीटर लंबी यह यात्रा आज 11 अक्टूबर से बागेश्वर धाम से शुरू होगी और पांच दिन बाद 15 अक्टूबर को वापस छतरपुर पहुंचेगी।

    यात्रा का रूट गढ़ा से शुरू होकर अजयगढ़, पन्ना, अमानगंज, पवई, सागर, दमोह, हटा और टीकमगढ़ होते हुए छतरपुर तक रहेगा। यात्रा के दौरान करीब हर 20 किलोमीटर पर पड़ाव निर्धारित किए जाएंगे। रात्रि विश्राम वाले स्थानों पर धार्मिक आयोजन होंगे। इनमें हनुमान चालीसा, हवन और लोगों को हिंदू राष्ट्र की शपथ दिलाने का कार्यक्रम शामिल रहेगा।

    यात्रा की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्रगान के साथ होगी। यात्रा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के लिए विशेष रूप से तैयार वैनिटी वैन और बालाजी महाराज का रथ शामिल रहेगा। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में करीब 5 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय, चित्रलेखा और गुरु मीमा जी ने वीडियो जारी कर यात्रा में शामिल होने की बात कही है।

    यात्रा से पहले दैनिक भास्कर ने बागेश्वर धाम पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से तैयारियों, रथयात्रा के उद्देश्य और बुंदेलखंड के पांच जिलों को चुनने के कारणों पर बातचीत की।

    संत-महंत और सुंदरकांड मंडल भी होंगे शामिल
    पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यात्रा के रूट और तैयारियों की जानकारी साझा करते हुए देशभर के सनातनियों से इसमें शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजरेगी, वहां आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर आयोजनों में सहभागिता करें।

    यात्रा में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बसों की व्यवस्था भी रहेगी। संत-महंत, बागेश्वर शिष्य और विभिन्न सुंदरकांड मंडलों के सदस्य भी यात्रा में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान आयोजित सभाओं में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा और सात वचनों की शपथ दिलाई जाएगी।
    पीले चावल देकर घर-घर पहुंचाया जाएगा न्योता

    यात्रा को लेकर बागेश्वर धाम के शिष्य, भक्त और सुंदरकांड मंडल के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से संपर्क करेंगे। इसके लिए पीले चावल देकर सनातनियों को यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।

    पं. धीरेंद्र शास्त्री ने बुंदेली भाषा में हाथ जोड़कर लोगों से यात्रा में शामिल होने और इसे सफल बनाने में सहभागिता की अपील की है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य धर्म, संस्कृति और हिंदू एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।

    दो यात्राएं निकाल चुके हैं धीरेंद्र शास्त्री
    यह पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तीसरी बड़ी यात्रा होगी। इससे पहले नवंबर 2024 में बागेश्वर धाम से ओरछा तक करीब 160 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली गई थी। यात्रा के दौरान 'जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई' का संदेश दिया गया था।

    इसके बाद नवंबर 2025 में दिल्ली से मथुरा-वृंदावन तक करीब 170 किलोमीटर की यात्रा 2.0 निकाली गई। इसमें यमुना शुद्धि, ब्रजधाम की रक्षा, सामाजिक समरसता, हिंदू राष्ट्र, लव जिहाद और गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

    अब तीसरे चरण में 500 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा के जरिए बुंदेलखंड के कई जिलों में हिंदू एकता और सनातन संस्कृति का संदेश पहुंचाने की तैयारी है।

    पंडित धीरेन्द्र शास्त्री: यात्रा के दौरान हर 20 किलोमीटर पर छोटा आयोजन होगा। इसमें लोगों को 7 संकल्प दिलाए जाएंगे। इनमें सनातन एकता के लिए जोर दिया जाएगा।

    ये सात संकल्प दिलाएंगे

        भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना
        जातिवाद और छुआछूत का खात्मा करना
        गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना
        अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक लगाना
        हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों की मुक्ति और संरक्षण
        आने वाली पीढ़ी को सनातन धर्म के संस्कारों से जोड़ना
        प्रत्येक हिंदू को एकजुट करना (हिंदू एकता)

    एक महीने से चल रही तैयारियां
    सनातन हिन्दू एकता रथ यात्रा को लेकर बागेश्वर धाम में एक महीने से तैयारियां चल रही हैं। बागेश्वर धाम समिति के सदस्य, मंडल यात्रा के रूट, किस पड़ाव पर कहां रुकेगी, क्या व्यवस्था होगी, सभी की निगरानी में लगे हैं। खुद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री 5 जिलों के प्रत्येक मंडलों और प्रभारियों से मुलाकात करके मीटिंग कर रहे हैं।

    इसके अलावा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पांचों जिलों समेत विभिन्न क्षेत्रों में बागेश्वर सरकार और सनातन से जुड़े प्रचार-प्रसार करने वाले सोशल मीडिया वॉरियर्स से संवाद भी कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ने सभी से रथ यात्रा का आमंत्रण जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि सभी लोग स्वयं यात्रा में शामिल हों, यात्रा से संबंधित ब्लॉक न्यूज, वीडियो व सोशल मीडिया कंटेंट तैयार कर लोगों तक जानकारी पहुंचाएं। यात्रा के पहले धाम परिसर और नेशनल हाईवे पर बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं।

    हाइड्रोलिक लिफ्ट वाली वैनिटी वैन बनेगी रथ
    पंडित धीरेंद्र शास्त्री वैनिटी वैन पर सवार होंगे, जिसमें समर्थकों की भीड़ को देखते हुए रथ को विशेष सुरक्षा मानकों पर तैयार किया गया है। इसमें हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी है, जिससे धीरेंद्र शास्त्री रथ के ऊपर आकर संबोधित कर सकेंगे।

    वैन पर भगवान हनुमान जी, गदा और सनातन धर्म के प्रतीकों की नक्काशी की जा रही है। साथ ही वैन के दोनों तरफ सीसीटीवी भी लगाए जा गए हैं।

    ड्राेन से निगरानी होगी, बम डिस्पोजल दस्ता भी चलेगा
    छतरपुर एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि यात्रा में भीड़ को देखते हुए सागर जोन से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस मुख्यालय से भी बल लिया जाएगा। ड्रोन, सीसीटीवी व्हीकल, रेडियो कम्युनिकेशन, सादा कपड़ों में सिविल पुलिस और बम डिस्पोजल दस्ता भी तैनात रहेगा।

    पंडित धीरेंद्र शास्त्री की श्रेणी के अनुसार मल्टी-लेयर सुरक्षा, कारकेड और ट्रैफिक डायवर्जन का प्लान आयोजकों के साथ फाइनल किया जा रहा है। इसमें शामिल होने वाले अन्य साधु-संतों को भी उनकी श्रेणी के हिसाब से सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।

    हर पड़ाव पर हनुमान चालीसा और राष्ट्रगान
    यात्रा प्रभारी धीरज गौर ने बताया कि यात्रा में पहले दिन कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति में धर्म ध्वजा लेकर यात्रा की शुरुआत होगी।

    साथ ही प्रत्येक पड़ाव पर यात्रा शुरू होने के पहले हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रध्वज भी फहराया जाएगा। यात्रा में करीब पांच हजार लोग साथ चलेंगे। 20 मिनट के आशीर्वचन कार्यक्रम होंगे। हर 20 किमी पर यात्रा रुकेगी।

    ये संत महात्मा होंगे शामिल
    इंद्रेश महाराज, जगद्गुरु चिन्ना जियर स्वामी- हैदराबाद, अनिरुद्धाचार्य महाराज, गंगादास महाराज- मलूकपीठ, किशोरदास देव महाराज- गोरीलाल कुंज वृन्दावन, विपिन बिहारी दास महाराज, मौनी महाराज- हरिद्वार, अनुरुद्ध दास – ओरछा, शृंगारी महाराज, रामदास महाराज- केरवना, राधेश्याम महाराज- चित्रकूट, देवेन्द्र गिरि महाराज- दिल्ली, राजूदास महाराज- हनुमानगढ़ी, बाल योगेश्वर दास महाराज- बद्रीनाथ।

     

  • छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची सुधारने की कवायद तेज, नए वोटरों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू

    छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची सुधारने की कवायद तेज, नए वोटरों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वा
    चन पदाधिकारी (CEO) यशवंत कुमार ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से छूटे हुए और पात्र नए नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक महीने के विशेष अभियान की घोषणा की है. इस पहल के तहत, जो लोग इस वर्ष फरवरी में संपन्न हुए SIR अभ्यास के दौरान घर पर अनुपस्थित रहने या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होने के कारण नामांकित होने से वंचित रह गए थे, उन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ने का अवसर दिया जाएगा। 

    निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें केवल वर्तमान में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके युवा ही नहीं, बल्कि 17 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके वे किशोर भी अग्रिम पंजीकरण करा सकेंगे, जो अगले एक वर्ष के भीतर 18 वर्ष के होने वाले हैं। 

    अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। 

    युवा और संभावित मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर शुक्रवार और शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे. CEO यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और कोई भी पात्र नागरिक किसी भी समय इसके लिए आवेदन कर सकता है। 

    दूसरी ओर, इस घोषणा का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि वे इस विशेष अभियान की लगातार मांग और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि SIR के बाद मतदाता सूची से बाहर रहे सभी 24 लाख लोगों तक पहुँच बनाकर उन्हें अपने दावों के सत्यापन का पूरा अवसर प्रदान किया जाए. उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले 2.12 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद केवल 1.87 करोड़ लोगों के नाम ही सूची में रह गए हैं। 

     

  • पति-पत्नी विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मानसिक क्रूरता पर तलाक; भरण-पोषण के लिए अलग दावा संभव

    पति-पत्नी विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मानसिक क्रूरता पर तलाक; भरण-पोषण के लिए अलग दावा संभव

    बिलासपुर 
    छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पति के प्रति पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए एक पारिवारिक अदालत द्वारा मंजूर किए गए तलाक के फैसले को सही ठहराया है. अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि शादीशुदा जिंदगी में बार-बार के विवाद और बिना मजबूत सबूतों के लगाए गए गंभीर आरोप मानसिक क्रूरता के दायरे में आते हैं। 

    इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि पत्नी ने निचली अदालत में स्थायी गुजारा भत्ते (अल्मोनी) की मांग नहीं की थी, तो वह इसके लिए कानून के मुताबिक अलग से आवेदन दायर कर सकती है। 

    यह पूरा मामला 17 फरवरी 2016 को हुई एक शादी से जुड़ा है, जहां दंपत्ति विवाह के बाद महज छह से सात दिन ही साथ रहे. इसके बाद सरकारी कर्मचारी पति अपनी नौकरी के सिलसिले में दंतेवाड़ा चला गया, जबकि पत्नी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए हॉस्टल में रहने लगी. इसके बाद दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। 

    पति ने आरोप लगाया कि पत्नी अक्सर उसके और उसके माता-पिता के साथ झगड़ा करती थी, बिना बताए मायके चली जाती थी और किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंधों में थी. पति का यह भी आरोप था कि पत्नी ने उसे परेशान करने के लिए उसके सरकारी विभाग में झूठी शिकायतें दर्ज कराई थीं। 

    दूसरी तरफ, पत्नी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि उसके ससुराल वाले उसे 4 लाख रुपये और पिता की जमीन ट्रांसफर करने के लिए प्रताड़ित करते थे. पत्नी का आरोप यह भी था कि पति के अन्य महिलाओं से संबंध हैं। 

    अंबिकापुर की पारिवारिक अदालत ने 11 नवंबर 2024 को पति के पक्ष में तलाक की मंजूरी दी थी, लेकिन गुजारा भत्ता तय नहीं किया था. इसी फैसले को चुनौती देने और तलाक रद्द कराने के साथ-साथ गुजारा भत्ता पाने के लिए पत्नी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 

    जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों का गहन अध्ययन किया. हालांकि पति पत्नी के कथित अफेयर से जुड़े टेलीफोन रिकॉर्डिंग या चश्मदीद गवाह जैसे सीधे सबूत पेश नहीं कर सका, लेकिन जिरह के दौरान पत्नी के वकील द्वारा पूछे गए सवालों ने मामले का रुख बदल दिया. जिरह में पत्नी की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि उसने विवादित घटना को लेकर माफी मांगी थी।  

    पीठ ने टिप्पणी की कि यदि कोई घटना घटी ही नहीं थी, तो माफी मांगने जैसा सुझाव देने का कोई औचित्य नहीं बनता. इसके अलावा, पत्नी की मां ने उसके समर्थन में हलफनामा तो दिया, लेकिन वे जिरह के लिए कटघरे में उपस्थित नहीं हुईं. अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए पति के पक्ष को अधिक विश्वसनीय माना और तलाक को बरकरार रखा। 

    जहां तक गुजारा भत्ते की बात है, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत वित्तीय सहायता तय करने के लिए दोनों पक्षों की आय और संपत्ति की जांच जरूरी है. चूंकि पत्नी ने पारिवारिक अदालत में इस मांग को नहीं रखा था और न ही कोई साक्ष्य पेश किए थे, इसलिए अपीलीय स्तर पर पहली बार इस पर निर्णय नहीं लिया जा सकता. अदालत ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए उसे सक्षम न्यायालय में गुजारा भत्ते के लिए अलग से नया आवेदन करने की स्वतंत्रता दी है। 

  • पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: सुखबीर बादल ने खोले गठबंधन के पत्ते, AAP-कांग्रेस पर कही बड़ी बात

    पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: सुखबीर बादल ने खोले गठबंधन के पत्ते, AAP-कांग्रेस पर कही बड़ी बात

    चंडीगढ़
     शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर किसान आंदोलन के बाद पहली बार खुलकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को छोड़कर सभी विकल्प खुले हैं। शिअद के लिए पंजाब व पंजाब के लोग प्राथमिकता हैं और उसी को केंद्र में रखकर गठबंधन का फैसला लिया जाएगा। सुखबीर बादल ने बीते दिन एक मीडिया प्लेटफार्म पर चर्चा के दौरान यह बात कही है।

    सुखबीर ने कहा कि जिस भी पार्टी के विचार शिअद से मिलेंगे और जो पंजाब के हितों के लिए काम करने का अपना एजेंडा साझा करेगी, उसके साथ गठबंधन पर विचार किया जा सकता है। गठबंधन के लिए उनके दरवाजे खुले हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिअद किसी भी हालत में सिखों के खिलाफ दंगों में लिप्त रही कांग्रेस और मौजूदा समय में पंजाब में सत्तासीन आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

    सुखबीर बादल ने की थी पीएम मोदी से मुलाकात
    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में भाजपा और शिअद के रिश्तों में जमीं बर्फ पिघलने और दोनों में फिर से गठबंधन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। इन चर्चाओं को बल उस समय मिला था जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक हुई। उसके बाद संत लोंगोवाल की बरसी पर सांसद हरसिमरत कौर बादल ने अपने भाषण में गठबंधन के संकेत दिए।

    हालांकि, भाजपा के कई नेता लगातार आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं। लेकिन हाल ही में भाजपा की प्रदेश में निकाली गईं नशा मुक्त पंजाब यात्राओं के समापन के दौरान भाजपा के दिग्गज नेता व देश के गृहमंत्री अमित शाह की जालंधर में भी शिअद से गठबंधन के संकेत मिले थे।

    शाह ने अपने भाषण के दौरान जहां अन्य विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया लेकिन अपने पूरे भाषण में उन्होंने शिअद पर चुप्पी बनाए रखी। इसके बाद भाजपा-शिअद में फिर से गठबंधन के लिए अंदरूनी तौर पर तैयारियों की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

    बसपा और भाजपा से ही गठबंधन संभव 
    अब, भले ही सुखबीर बादल ने किसी पार्टी का नाम लेकर गठबंधन की घोषणा नहीं की, लेकिन यह सर्वविदित है कि शिअद के पास गठबंधन के लिए भाजपा और बसपा ही विकल्प मौजूद हैं। शिअद (मान), शिअद (पुनर-सुरजीत) और शिअद (वारिस पंजाब दे) को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह दल भी उसी पंथक पिच पर राजनीति करते हैं, जिस पर शिअद (बादल)।

    बहुजन समाज पार्टी द्वारा पहले ही घोषणा की जा चुका है कि इस बार के पंजाब विधानसभा चुनाव वह शिअद के साथ गठबंधन नहीं करेगी। चर्चा यह भी है कि बसपा और शिअद (वारिस पंजाब दे) के बीच गठबंधन की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है, जोकि अन्य दलों का चुनावी समीकरण बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है।

    बहरहाल, 2027 के शुरुआती महीने में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है और इसमें जल्द ही गठबंधन भी सामने आएंगे।