Author: NewseDay

  • धनबाद में स्ट्रीट फूड की जांच तेज, 83 नमूनों की जांच; गंदगी और मिलावट मिलने पर कार्रवाई की तैयारी

    धनबाद में स्ट्रीट फूड की जांच तेज, 83 नमूनों की जांच; गंदगी और मिलावट मिलने पर कार्रवाई की तैयारी

     धनबाद
     त्योहारों के मद्देनजर धनबाद में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान तेज कर दिया है।

    रांची से आई मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (एमएफटीएल) की मदद से शहर के स्ट्रीट फूड स्टाल, होटल और रेस्टोरेंट में खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. राजा कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के दौरान कई दुकानों के खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंग और मिलावट पाई गई। संबंधित खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कराया गया।

    अभियान के दूसरे दिन हीरापुर बाजार से पुलिस लाइन तक जांच की गई। इस दौरान कई चाट दुकानों के छोले में रासायनिक रंग मिला।

    इनमें सुपर श्रीराम चाट, विजय चाट शॉप, शुभम चाट, जय गुरु चाट सेंटर, मुरारी कुमार चाट ठेला, स्पाइसी चाट एंड मोमोज, चाट शॉप ठेला, हॉट एंड टेस्टी चाट और स्पाइसी अमृत चाट शामिल हैं। इन दुकानों के रंग मिले छोले को मौके पर नष्ट कराया गया।

    लड्डू, चिकन मसाले और हल्दी में भी गड़बड़ी
    जांच के दौरान काली दस किचेन के चिकन मसाले में रासायनिक रंग मिला। राजस्थानी नमकीन दुकान के मोतीचूर, बेसन और घी के लड्डू में भी रासायनिक रंग पाया गया।

    धनंजय मंडल के समोसा ठेले पर आलू के मसाले और चटनी में रंग मिला। वहीं, शंकर होटल के ठेले पर इस्तेमाल की जा रही हल्दी मिलावटी पाई गई। शंकर मिष्ठान भंडार के बेसन लड्डू में भी रासायनिक रंग मिला। संबंधित खाद्य पदार्थों को मौके पर नष्ट कराया गया।

    गंदगी मिलने पर सुधार का निर्देश
    चाट चटोरी दुकान पर खाद्य लाइसेंस नहीं मिला और गंदगी पाई गई। धनबाद समोसा चाट वाले के स्टाल पर भी साफ-सफाई की कमी मिली।

    झारखंड चिकन पकौड़ा ठेले पर गंदी कढ़ाई में पकौड़े बनाए जा रहे थे। संबंधित दुकानदारों को साफ-सफाई और स्वच्छता मानकों में सुधार करने का निर्देश दिया गया।

    विभाग के अनुसार, अभियान के पहले दिन कुल 83 खाद्य नमूनों की रासायनिक जांच की गई। दुकानदारों को व्यवस्था सुधारने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है।

    जांच में विफल पाए गए खाद्य पदार्थों और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • कम खर्च, अच्छी पैदावार और बाजार में मांग, रागी की खेती किसानों के लिए बन रही कमाई का नया जरिया

    कम खर्च, अच्छी पैदावार और बाजार में मांग, रागी की खेती किसानों के लिए बन रही कमाई का नया जरिया

     चंदवारा (कोडरमा)
     बदलते समय के साथ किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में चंदवारा प्रखंड क्षेत्र के हरिनो गांव के किसान मड़ुआ (रागी) की खेती से अच्छी आमदनी कर रहे हैं।

    कम लागत, कम पानी की जरूरत और बाजार में आसानी से बिक्री होने के कारण मड़ुआ किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनता जा रहा है। खास बात यह है कि मड़ुआ केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में ही सहायक नहीं है, बल्कि पौष्टिक अनाज के रूप में सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

    हरिनो निवासी किसान संतोष यादव, अनिल पासवान, सुरेश यादव और सुधीर यादव कई वर्षों से मड़ुआ की खेती कर रहे हैं। किसान संतोष यादव के अनुसार, वे एक एकड़ जमीन में हर साल लगभग आठ से दस क्विंटल मड़ुआ का उत्पादन करते हैं। इस वर्ष भी अच्छी पैदावार की उम्मीद है।

    बाजार में व्यापारी किसानों के घर पहुंचकर लगभग 33 रुपये प्रति किलो की दर से मड़ुआ खरीद लेते हैं। वहीं, आसपास के ग्रामीण भी घरेलू उपयोग के लिए मड़ुआ खरीदकर ले जाते हैं। इससे किसानों को उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता।

    कम पानी में तैयार होती है फसल
    किसानों के अनुसार, धान की तुलना में मड़ुआ की खेती में पानी की कम जरूरत होती है। बुआई के शुरुआती दौर में हल्की बारिश और बाद में आवश्यकता के अनुसार नमी मिलने से फसल अच्छी हो सकती है। कम लागत और बाजार में मांग के कारण यह खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है।

    सेहत के लिए गुणकारी है रागी
    आयुर्वेद के अनुसार मड़ुआ यानी रागी पोषक तत्वों से भरपूर मोटा अनाज है। इसमें कैल्शियम, फाइबर और आयरन सहित कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। शहर के चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र कुमार कहते हैं मड़ुवा कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट लंबे समय तक भरा महसूस कराने में सहायक होता है। संतुलित आहार में शामिल करने पर रागी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

    मड़ुआ की खेती में धान और गेहूं की तुलना में कम लागत आती है। उपज की बिक्री के लिए बाजार भी आसानी से मिल जाता है।- अनिल पासवान, किसान।

        मड़ुआ की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का भी बेहतर माध्यम बन सकती है। इलाके में बड़े पैमाने पर किसान इसका उत्पाद कर रहे हैं। – सुरेश यादव, किसान।

     

  • अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत! सेवा पूरी होने के बाद मिलेंगी ये सुविधाएं, जानें बीमा से लेकर 50% आरक्षण तक के नियम

    अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत! सेवा पूरी होने के बाद मिलेंगी ये सुविधाएं, जानें बीमा से लेकर 50% आरक्षण तक के नियम

    नई दिल्ली
    सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाले युवाओं के मन में अग्निवीर योजना को लेकर तरह-तरह के सवाल रहते हैं. चार साल की सेवा पूरी होने के बाद आगे क्या होगा, क्या दोबारा सेना में नौकरी का मौका मिलेगा और अगर नियमित सेवा में चयन नहीं हुआ तो रोजगार के कौन से विकल्प होंगे? ये ऐसे सवाल हैं जिनकी चिंता अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं और उनके परिवारों को भी रहती है। 

    सरकार ने सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए सेवा निधि, दूसरी सरकारी भर्तियों में आरक्षण और रोजगार के अवसरों से जुड़े प्रावधान किए हैं. लेकिन इन सुविधाओं का लाभ किसे मिलेगा, कितनी आर्थिक मदद मिलती है और इसके लिए क्या नियम हैं? आइए, आधिकारिक नियमों के आधार पर समझते हैं। 

    सेवा पूरी होने के बाद क्या? 

    चार साल की सेवा पूरी करने के बाद जब अग्निवीर बाहर आएंगे तो सरकार उनको कई सुविधाएं देंगी. इसमें सेवा निधि पैकेज, जीवन बीमा कवर और स्किल सर्टिफिकेट शामिल है. लेकिन पहले समझते हैं कि इनमें क्या-क्या सुविधा होगी। 

    सेवा निधि पैकेज 
    रिटायर हो रहे अग्निवीर को एकमुश्त करीब 10.04 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा. खास बात यह है कि यह रकम टैक्स फ्री होगी. इसमें युवाओं का योगदान, सरकार का बराबर का हिस्सा और इसपर मिलने वाले ब्याज शामिल होते हैं। 

    जीवन बीमा कवर 
     सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाता है, जो उनके और उनके परिवार के लिए एक सुरक्षित रकम होती है। 

    स्किल सर्टिफिकेट
    रिटायर होने वाले अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. इससे उन्हें आगे प्राइवेट या सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के समय पर प्राथमिकता मिलेगी। 

    नौकरी के लिए क्या है सरकार का प्लान? 
    सरकार ने चार साल की सेवा पूरी करने वाले उम्मीदवारों के लिए नौकरी के लिए भी सुविधाएं रखी है। 

    गृह मंत्रालय का नया पोर्टल 
    इसके लिए सरकार की ओर से कॉरपोरेट और सरकारी सेक्टर में आसानी से एडजस्ट करने के लिए गृह मंत्रालय विशेष पोर्टल तैयार कर रहा है. इसके  जरिए उन्होंने नौकरी के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना होगा और उन्हें जॉब्स के लिए कई सारे विकल्प मिलेंगे। 

    50 प्रतिशत का आरक्षण 
    बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स जैसी सुरक्षा बलों में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। 

    फिजिकल और लिखित परीक्षा से छूट
    इन सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा में भी छूट दी जाएगी। 

    कोटा और एज में भी मिलेगी छूट 
    उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने पुलिस और अन्य विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक पद रिजर्व किए हैं. साथ ही, आयु सीमा में 3 से 5 साल तक की छूट का ऐलान भी किया गया है जिससे वह आसानी से सरकारी नौकरी पा सकें। 

  • लाडो लक्ष्मी योजना से लेकर पंचायत फंड तक, हरियाणा कैबिनेट के 5 बड़े फैसले; जानें किसे मिलेगा लाभ

    लाडो लक्ष्मी योजना से लेकर पंचायत फंड तक, हरियाणा कैबिनेट के 5 बड़े फैसले; जानें किसे मिलेगा लाभ

    पंचकूला
    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मंत्रिमंडल ने छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार स्थानीय निकायों को धनराशि के हस्तांतरण को जारी रखने की मंजूरी दी।

    ग्रामीण और शहरी स्थायी निकायों को वित्त वर्ष 2026 27 से अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें आने तक धनराशि मिलती रहेगी। राज्य के अपने कर राजस्व का वास्तविक आधार पर 7 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को दिया जाएगा। स्थानीय निकायों को मिलने वाली धनराशि में से 55% हिस्सा पंचायती राज संस्थाओं और 45% हिस्सा शहरी स्थानीय निकायों को मिलेगा।

    ग्राम पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों को धनराशि का आवंटन 80% जनसंख्या और 20% क्षेत्रफल के आधार पर किया जाएगा। जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के बीच धनराशि का वितरण 10%, 15% और 75 प्रतिशत के अनुपात में होगा।

    लाडो लक्ष्मी योजना में बदलाव
    मंत्रिमंडल ने दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के पात्र परिवारों की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपए करने का निर्णय लिया। तीन विशेष श्रेणियां के लिए भी वार्षिक आय सीमा को 1.80 लाख रुपए से बढ़ा कर 3 लाख रुपए किया। इन श्रेणियां में वह माताएं शामिल जिनके बच्चों ने कक्षा 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 80% या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हो।

    जिनके बच्चों ने कक्षा 1 से 4 तक निपुण भारत मिशन के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार कक्षा स्तर की दक्षता हासिल की हो। जिनके बच्चों ने गंभीर तीव्र कुपोषण या मध्यम तीव्र कुपोषण की स्थिति से उभरकर सामान्य स्वास्थ्य स्थिति प्राप्त की हो।

    1 नवंबर से नई व्यवस्था लागू
    अब लाभार्थियों को लाइवनेस सत्यापन हर महीने के बजाय प्रत्येक 3 महीने में एक बार कराना होगा। यह नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होगी। मंत्रिमंडल ने नागरिक संसाधन सूचना विभाग को स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने की मंजूरी दी। हरियाणा राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड को भी CRID के प्रशासनिक नियंत्रण में लाने का निर्णय लिया।

    मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के मीडिया कर्मियों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने हरियाणा मीडिया कर्मी कल्याण कोष प्रशासन योजना के तहत पात्र मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली अधिकतम वित्तीय सहायता राशि को 5 लाख करने की मंजूरी दी।

    मीडियोकर्मियों के हित में बड़ा फैसला
    हमारी सरकार मीडिया कर्मियों के कल्याण और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हरियाणा मंत्रिमंडल ने पूर्व अग्नि वीरों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। राज्य की अग्नि वीर नीति के दायरे में आने वाले ग्रुप सी पदों की सीधी भर्ती में पूर्व अग्नि वीरों को सभी प्रकार की लिखित परीक्षाओं से छूट देने की मंजूरी दी।

    वन्य जीव रक्षक, भारतीय रिजर्व बटालियन में कांस्टेबल, राज्य आपदा मोचन बल में कांस्टेबल तथा फायर ऑपरेटर कम ड्राइवर के पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व अग्नि वीरों को लागू प्रावधानों के अनुसार शारीरिक स्क्रीनिंग टेस्ट और शारीरिक माप परीक्षण से भी छूट देने का निर्णय लिया गया।

  • आयुष्मान भारत योजना में रामपुर अव्वल, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कार्ड बनाने में बनाया रिकॉर्ड

    आयुष्मान भारत योजना में रामपुर अव्वल, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कार्ड बनाने में बनाया रिकॉर्ड

     लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में रामपुर ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

    आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में रामपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पिछले एक वर्ष के दौरान सर्वाधिक 1 लाख 79 हजार आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
    कैंसर पीड़ित को सौंपा आयुष्मान कार्ड
    रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। रामपुर में विभिन्न विभागों के समन्वय और अभियान के प्रभावी संचालन से बड़ी संख्या में पात्र लोगों को योजना से जोड़ने में सफलता मिली है।

    आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के क्रम में जिलाधिकारी ने जनता दर्शन के दौरान गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दिव्यांग लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए। इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल रहे। राजकुमार माहेश्वरी के पैर की सर्जरी होनी है। इसके अलावा स्वार तहसील क्षेत्र के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए।

    रामपुर में अब तक बने 6.91 लाख से अधिक कार्ड
    जिलाधिकारी ने बताया कि रामपुर में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक कुल 6,91,928 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। पिछले एक वर्ष में 1.79 लाख कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। वहीं, जनता दर्शन के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को कार्ड उपलब्ध कराने से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

  • मछली पालन के साथ मोती उत्पादन का मौका, बिहार के 89 किसानों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

    मछली पालन के साथ मोती उत्पादन का मौका, बिहार के 89 किसानों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

     पटना
    राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार मोती पालन को बढ़ावा दे रही है।

    मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत इच्छुक किसानों को मोती पालन का प्रशिक्षण देने के साथ इकाई लागत पर 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।

    इससे राज्य के किसान मछली पालन के साथ मोती उत्पादन कर डबल कमाई कर सकेंगे। इसी कड़ी में शेखपुरा, छपरा, बांका और सहरसा जिलों के कुल 89 प्रशिक्षणार्थियों को मोती पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    छह दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 9 अक्टूबर से शुरू है। मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन के मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र में मोती उत्पादन की तकनीक से लेकर उसकी व्यावहारिक प्रक्रिया तक की जानकारी दी जा रही है।

    सीप में प्रत्यारोपण से लेकर सर्जरी तक का प्रशिक्षण
    प्रशिक्षण के दौरान सीप की विभिन्न प्रजातियों, उनमें न्यूक्लियस प्रत्यारोपण तथा सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

    प्रशिक्षणार्थियों को तकनीक की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए अनुभवी मोती उत्पादकों की भी मदद ली जा रही है। बक्सर के मोती उत्पादक किसान धनजी कुशवाहा ने मोती पालन की तकनीक का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।

    वे कई वर्षों से मोती पालन कर रहे हैं और विभिन्न जिलों में किसानों को मोती पालन का प्रशिक्षण देते रहे हैं। वहीं, संयुक्त मत्स्य निदेशक (प्रशिक्षण एवं प्रसार) दिलीप कुमार सिंह ने सीप की प्रजातियों की जानकारी दी।

    मोती पालन पर मिलेगा 60 प्रतिशत अनुदान
    राज्य सरकार की मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी जिलों में लागू की गई है। इसका उद्देश्य देसी मछलियों की प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्द्धन करना है।

    इसके साथ मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत माइनर कार्प, कैटफिश, वायुश्वासी मछली, झींगा और मोती पालन जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    इस योजना के तहत मोती पालन की आधा एकड़ इकाई के लिए 2.246 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

    निर्धारित इकाई लागत के आधार पर लाभार्थी को अधिकतम 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि का वहन लाभार्थी को स्वयं या बैंक ऋण के माध्यम से करना होगा।

  • कैंसर मरीजों और दिव्यांगों को मिला आयुष्मान कार्ड, रामपुर की उपलब्धि पर ब्रजेश पाठक ने किया सम्मानित

    कैंसर मरीजों और दिव्यांगों को मिला आयुष्मान कार्ड, रामपुर की उपलब्धि पर ब्रजेश पाठक ने किया सम्मानित

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में रामपुर ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

    आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में रामपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पिछले एक वर्ष के दौरान सर्वाधिक 1 लाख 79 हजार आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

    कैंसर पीड़ित को सौंपा आयुष्मान कार्ड
    रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। रामपुर में विभिन्न विभागों के समन्वय और अभियान के प्रभावी संचालन से बड़ी संख्या में पात्र लोगों को योजना से जोड़ने में सफलता मिली है।

    आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के क्रम में जिलाधिकारी ने जनता दर्शन के दौरान गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दिव्यांग लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए। इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल रहे। राजकुमार माहेश्वरी के पैर की सर्जरी होनी है। इसके अलावा स्वार तहसील क्षेत्र के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए।
    खबरें और भी

    रामपुर में अब तक बने 6.91 लाख से अधिक कार्ड
    जिलाधिकारी ने बताया कि रामपुर में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक कुल 6,91,928 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। पिछले एक वर्ष में 1.79 लाख कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। वहीं, जनता दर्शन के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को कार्ड उपलब्ध कराने से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

  • Jio का नया AI Glass मचाएगा धूम, UPI पेमेंट से रियल-टाइम ट्रांसलेशन तक मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं

    Jio का नया AI Glass मचाएगा धूम, UPI पेमेंट से रियल-टाइम ट्रांसलेशन तक मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं

    मुंबई 

    मार्वल्स की सुपरहीरो वाली मूवीज तो आने भी देखी होगी. इसमें एक करेक्टर है आयरन मैन, जिसका चश्मा इतना स्मार्ट है कि एक आदेश पर हर जानकारी उपलब्ध करा देता है. जियो ने भी ऐसा ही प्रोडक्ट पेश किया है, जो आपके एक इशारे पर बिना मोबाइल निकाले और स्कैन किए ही यूपीआई पेमेंट कर देता है. जियो ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में एक कूल और फ्यूचरिस्टिक प्रोडक्ट शोकेस किया है. कंपनी ने अपनी पर्सनल AI वियरेबल रेंज में कैमरा ग्लास, ऑडियो ग्लास और ईयरफोन दिखाए हैं. इनमें स्कैन एंड पे, AI वॉयस असिस्टेंट, मल्टी-इंडियन लैंग्वेज सपोर्ट, लाइव ट्रांसलेशन, AI नोट टेकिंग और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स हैं। 

    एआई के इस प्रोडक्ट का सबसे दिलचस्प फीचर स्कैन एंड पे है. मतलब मोबाइल जेब में ही रहे और सामने QR कोड हो तो बस पेमेंट हो जाए. जियो का यह कैमरा ग्लास UPI QR कोड स्कैन करेगा, यूजर वॉयस कमांड देगा और कन्फर्मेशन के बाद पेमेंट हो जाएगा. UPI Circle के जरिये एक बार में 5,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है. यह सीमा जियो की नहीं, बल्कि UPI Circle के नियमों के तहत तय की गई और हर महीने इस सिस्टम से 15,000 रुपये तक यूपीआई भुगतान किया जा सकता है। 

    कैसे होगा ग्लास से पेमेंट
    इस ग्लास के जिरये दुकान पर पेमेंट करते वक्त मोबाइल निकालने, अनलॉक करने, ऐप खोलने और QR स्कैन करने जैसे कई स्टेप कम हो सकते हैं. यहां AI सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला असिस्टेंट नहीं, बल्कि आपकी कमांड पर काम करने वाली टेक्नोलॉजी बन जाता है. कंपनी की कोशिश AI को मोबाइल स्क्रीन और कीबोर्ड से निकालकर आवाज और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ने की है. जियो AI ग्लास का दूसरा बड़ा इस्तेमाल लाइव ट्रांसलेशन है. अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले दो लोग वियरेबल डिवाइस की मदद से एक-दूसरे की बात समझ सकेंगे. आप अपनी भाषा में बोलिए, सामने वाला अपनी भाषा में, बीच का काम AI संभालेगा। 

    पेमेंट से आगे बढ़ने की तैयारी
    जियो का मानना है कि बात सिर्फ पेमेंट और ट्रांसलेशन तक नहीं रुकती. मीटिंग में कोई जरूरी बात छूट न जाए, इसके लिए AI नोट टेकिंग है. वहीं, चलते-फिरते मैच से जुड़े रहना हो तो लाइव क्रिकेट कमेंट्री भी मिलेगी. यानी ऑफिस की मीटिंग हो या क्रिकेट का रोमांच, बार-बार मोबाइल देखने की जरूरत कम करने की कोशिश साफ दिखती है. जियो का कहना है कि इन वियरेबल्स का मकसद AI के जरिये प्रोडक्टिविटी और नॉलेज बढ़ाने के साथ रोजमर्रा के काम आसान करना है। 

    जियो एआई ग्लास हेडफोन से जुड़ा रहेगा
    भारतीय भाषाओं पर ज्यादा जोर

    जियो का मानना है कि इसका खास जोर वॉयस और भारतीय भाषाओं पर है, ताकि यूजर अपनी भाषा में AI और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर सके. जियो का यह शोकेस वियरेबल टेक के अगले दौर की झलक देता है. स्मार्ट ग्लासेस का आइडिया नया नहीं है, लेकिन UPI पेमेंट, भारतीय भाषाएं, लाइव ट्रांसलेशन, AI नोट टेकिंग और क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स इसे भारतीय यूजर के ज्यादा करीब लाते हैं। 

  • भोपाल में फेस्टिव शॉपिंग सीजन शुरू, गरबा से दिवाली तक बाजारों में बढ़ेगी ग्राहकों की भीड़

    भोपाल में फेस्टिव शॉपिंग सीजन शुरू, गरबा से दिवाली तक बाजारों में बढ़ेगी ग्राहकों की भीड़

    भोपाल
    शारदीय नवरात्रि के साथ भोपाल के बाजारों में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू हो गया है। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, बिट्टन मार्केट, चौक बाजार, करोंद और बैरागढ़ सहित शहर के प्रमुख बाजारों में कारोबारियों ने त्योहारों की मांग को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पूजा सामग्री, फूल-फल और चुनरी से शुरू होने वाली खरीदारी गरबा के पारंपरिक परिधानों, दशहरा, करवा चौथ और दीपावली के सामान तक पहुंचेगी। इसके बाद छठ तक कई श्रेणियों में मांग बनी रहने की उम्मीद है।

    ऐसे में व्यापारियों के लिए अगले डेढ़ महीने बिक्री बढ़ाने के साथ छोटे कारोबारियों और स्थानीय कारीगरों को काम देने का अवसर भी होंगे।नवरात्रि के दौरान कलश, नारियल, चुनरी, मौली, रोली, कपूर, धूप-अगरबत्ती और पूजा पात्रों की मांग बढ़ती है। नौ दिनों तक घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना होने से इन वस्तुओं की बिक्री बनी रहती है। प्रमुख बाजारों के अलावा कालोनियों और चौराहों पर अस्थायी दुकानें लगाने वाले छोटे दुकानदारों को भी इस दौरान अतिरिक्त कमाई की उम्मीद रहती है।

    गरबा-डांडिया से कपड़ा और एक्सेसरीज बाजार को मिलेगा सहारा
    नवरात्रि में गरबा और डांडिया आयोजनों के कारण पारंपरिक परिधानों की मांग बढ़ती है। चनिया-चोली, लहंगा, कुर्ते, पगड़ी और पारंपरिक आभूषणों के साथ मैचिंग ज्वेलरी, चूड़ियां, जूती और अन्य एक्सेसरीज की खरीदारी होती है। इसका फायदा कपड़ा कारोबारियों के साथ दर्जियों, कढ़ाई करने वालों और छोटे विक्रेताओं को भी मिलता है।

    दशहरा-दीपावली में बढ़ेगा खरीदारी का दायरा
    नवरात्रि के बाद दशहरा और फिर करवा चौथ के लिए खरीदारी होगी। दीपावली के दौरान कपड़ों, जूते-चप्पल, मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, घरेलू उपकरण, फर्नीचर, सजावटी सामान, मिठाई, उपहार और ज्वेलरी की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। कई परिवार त्योहारों के लिए पहले से खरीदारी करते हैं, जबकि कुछ लोग बजट और आफर देखकर खरीदारी का समय तय करते हैं। इससे अलग-अलग बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी रह सकती है।

    फूल, मिठाई और सजावट से जुड़े कारोबार को भी मिलेगा काम
    मंगलम इलेक्ट्रोनिक के डायरेक्टर श्याम बंसल ने बताया कि त्योहारों के दौरान फूल-मालाओं, फलों, मिठाइयों और पूजा सामग्री की मांग बढ़ती है। दुर्गा पूजा पंडालों और धार्मिक आयोजनों के लिए बांस, कपड़े, रंग, लाइट, बिजली की झालर और साउंड सिस्टम की जरूरत होती है। इससे सजावट कारोबारियों, कारीगरों, मजदूरों और इलेक्ट्रिशियन को भी काम मिलता है। चौक बाजार में पारंपरिक खरीदारी और ज्वेलरी, जबकि न्यू मार्केट, 10 नंबर और बैरागढ़ में कपड़े, फुटवियर और घरेलू जरूरत के सामान का कारोबार महत्वपूर्ण रहता है।

    छोटे दुकानदारों को भी सीजन से उम्मीद
    किराना व्यापारी महासंघ महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि त्योहारी कारोबार का लाभ बड़े शोरूम तक सीमित नहीं रहता। फूल और फल विक्रेता, मिठाई दुकानदार, दर्जी, कारीगर और अस्थायी स्टाल लगाने वाले भी इस सीजन पर निर्भर रहते हैं। नवरात्रि से शुरू होने वाली खरीदारी यदि दशहरा और दीपावली तक गति बनाए रखती है, तो बाजार में बिक्री के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। कारोबारियों की नजर अब इसी बात पर है कि शुरुआती रौनक दीपावली तक कितनी मजबूत बनी रहती है। छठ तक जारी रहने वाली मांग इस कारोबारी सीजन को और विस्तार दे सकती है।

  • ट्रेन में बैग चोरी मामले में रेलवे को राहत नहीं, दिल्ली आयोग ने बरकरार रखा ₹1.45 लाख मुआवजे का आदेश

    ट्रेन में बैग चोरी मामले में रेलवे को राहत नहीं, दिल्ली आयोग ने बरकरार रखा ₹1.45 लाख मुआवजे का आदेश

     नई दिल्‍ली

    दिल्‍ली राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग ने भारतीय रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. जिसका बैग रिजर्व डिब्‍बे से चोरी हो गया था. आयोग का मानना है कि रेलवे यह कहकर बच नहीं सकता है कि सामान यात्री के निजी हिरासत में था। 

    आयोग ने कहा कि असली मुद्दा रेलवे कर्मचारियों की अनरिजर्व एंट्री को रोकने में विफलता थी. पैसेंजर का बैग दो अनरिजर्व व्‍यक्तिओं के रिजर्व बोगी में घुसने के बाद ही गायब हुआ था. इस बैग में 1.20 लाख रुपये का कीमती सामान था। 

     रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले की सुनवाई दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने की. दिल्‍ली आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। 

    दिल्‍ली आयोग के सामने उत्तर रेलवे ने 16 अप्रैल, 2024 को जिला आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 7 सितंबर, 2017 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1.20 लाख रुपये और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। 

    कैसे गायब हुआ था बैग? 
    7 जून 2014 को अजय कुमार महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे. ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो अज्ञात घुसपैठिए उनके अनरिजर्व डिब्बे में घुस गए और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए. कुमार ने बताया कि बैग में साड़ियां, गहने और कपड़े थे, जिनकी कीमत 12 लाख रुपये थी। 

    चोरी के बाद शिकायत
    अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने तुरंत कोच के टीटीई से FIR दर्ज कराने के लिए संपर्क किया. रेलवे पुलिस बल (RPF) ने 7 सितंबर, 2014 को चोरी की पुष्टि की, लेकिन FIR के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. 22 जनवरी, 2015 के एक पत्र में कहा गया कि कुमार को मोबाइल फोन के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उल्लिखित नंबर उनका नहीं था। 

    अंततः 23 अप्रैल, 2015 को एफआईआर दर्ज की गई. 15 मई, 2017 को मामले को 'अनसुलझा' घोषित कर दिया गया. उत्तर रेलवे ने तर्क दिया कि सामान कुमार की निजी हिरासत में था और न तो रेलवे के पास दर्ज कराया गया था और न ही इसकी जानकारी दी गई थी। 

    राज्य आयोग ने रेलवे के इस तर्क को खारिज कर दिया कि सामान की व्यक्तिगत अभिरक्षा से उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है. आयोग ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या रेलवे ने अनरिजर्व डिब्बे में अनरिजर्व व्यक्तियों के प्रवेश को रोककर यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती थी. आयोग ने आगे कहा कि अपीलकर्ता की जवाबदेही केवल चोरी होने से नहीं बनती, बल्कि यह बिना परमिशन घुसपैठ को रोकने में विफलता से पैदा होती है, जिस कारण चोरी हो पाई।