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  • स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    योगी सरकार में स्वच्छ-हरित विद्यालयों का बढ़ा कारवां, एसएचवीआर में 1.62 लाख स्कूलों ने दर्ज कराई भागीदारी

    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में प्रदेश के 2.66 लाख स्कूलों में 1.86 लाख में शुरू हुई प्रक्रिया, 1.79 लाख का पंजीकरण

    1,62,054 विद्यालयों ने दर्ज कराई सहभागिता, प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत

     कानपुर देहात 83.17% के साथ प्रदेश में शीर्ष पर, मुजफ्फरनगर 82.24% और भदोही 77.62% के साथ टॉप-3 में

    कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ टॉप-5 में शामिल 

    – स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक सहभागिता सामने आई है। ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ यानी एसएचवीआर (SHVR—स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग) 2026-27 में 5 अक्टूबर तक प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 में प्रक्रिया शुरू, 1,79,793 विद्यालयों का पंजीकरण और 1,62,054 विद्यालयों द्वारा सहभागिता पूर्ण की गई है। प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत दर्ज हुआ है।

    एसएचवीआर 2026-27 की यह स्थिति उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना के प्रति व्यापक सहभागिता को रेखांकित करती है। प्रदेश के अनेक जनपदों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

    स्वच्छता से हरित चेतना तक विद्यालयों की भागीदारी
    एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित गतिविधियों और मानकों में विद्यालयों की सहभागिता को दर्ज किया जाता है। जनपदवार रिपोर्ट प्रदेश के सभी 75 जनपदों के विद्यालयों की स्थिति को दर्शाती है।

    कानपुर देहात प्रदेश में शीर्ष पर
    जनपदवार आंकड़ों में कानपुर देहात 83.17% अंतिम पूर्णता प्रतिशत के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जनपद के कुल 2,876 विद्यालयों में से 2,392 विद्यालयों ने पूर्णता दर्ज की है। मुजफ्फरनगर 82.24% के साथ दूसरे और भदोही 77.62% के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ शीर्ष पांच में शामिल हैं।

    टॉप-10 में शामिल जनपद
    अंतिम पूर्णता प्रतिशत के आधार पर टॉप-10 में कानपुर देहात (83.17%), मुजफ्फरनगर (82.24%), भदोही (77.62%), कौशांबी (75.22%), ललितपुर (73.78%), बाराबंकी (73.52%), रामपुर (71.90%), मऊ (71.50%), बुलंदशहर (70.25%) और सहारनपुर (68.90%) शामिल हैं।

    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सहभागिता
    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विद्यालयों की व्यापक सहभागिता दर्ज हुई है। वाराणसी में 67.58%, मिर्जापुर में 68.29%, सोनभद्र में 68.51%, गोरखपुर में 60.83%, बुलंदशहर में 70.25% और सहारनपुर में 68.90% अंतिम पूर्णता प्रतिशत दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सामने आती है।

    1.86 लाख विद्यालयों में शुरू हुई भागीदारी
    प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 विद्यालयों में एसएचवीआर की प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि 1,79,793 विद्यालयों ने पंजीकरण कराया और 1,62,054 विद्यालयों ने इसे पूर्ण किया। यह आंकड़ा प्रदेशभर में एसएचवीआर 2026-27 के प्रति विद्यालयों की व्यापक और सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करता है।

    कोट:
    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय स्वस्थ और जागरूक पीढ़ी की आधारशिला हैं। एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को और मजबूत किया जा रहा है।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    एसएचवीआर विद्यालयों को स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के प्रति सक्रिय बनाने का प्रभावी माध्यम है। व्यापक सहभागिता से स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में सकारात्मक बदलाव को गति मिलेगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • कब्जामुक्त कराएं जमीन, पीड़ित को न्याय और दोषियों को दिलाएं सजा: मुख्यमंत्री

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, पीड़ित को न्याय और दोषियों को दिलाएं सजा: मुख्यमंत्री

    जनता दर्शन

    उचित समस्या को लेकर दूसरी बार फरियादी आए तो जवाबदेही तय: मुख्यमंत्री

    पीड़ित की संतुष्टि सरकार का ध्येय, प्रशासन हर उचित समस्या का कराए समयबद्ध निस्तारण: सीएम योगी

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, पीड़ित को न्याय और दोषियों को दिलाएं सजा: मुख्यमंत्री

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में दूरदराज से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों को समाधान का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन हर उचित समस्या का समयबद्ध निस्तारण कराए, यदि पीड़ित एक ही समस्या को लेकर दूसरी बार आया और वह समस्या वास्तविक रही तो जवाबदेही तय होगी। पीड़ित की संतुष्टि सरकार का ध्येय है। यदि पीड़ित की समस्या वास्तविक है और समय से उसका निस्तारण नहीं हो पाया, तो यह अक्षम्य है। 

    हर व्यक्ति से मिले मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठाए गए लो
    गों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और समयबद्ध/पारदर्शी निस्तारण कराएं। 

    पीड़ित को न्याय और दोषियों को सजा दिलाएं
    इस दौरान कुछ लोगों ने जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। पीड़ित को न्याय और दोषियों को सजा दिलाएं।

  • सुल्तानपुर हादसा: मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता, CM ने किया मुआवजे का ऐलान

    सुल्तानपुर हादसा: मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता, CM ने किया मुआवजे का ऐलान

    सुल्तानपुर हादसा: मुख्यमंत्री ने मुआवजे का किया ऐलान

    मृतकों के परिजनों को दी जाएगी 2-2 लाख रुपये की आर्थिक मदद

    मुख्यमंत्री ने सुल्तानपुर/देवरिया के अधिकारियों को दिया निर्देश- मृतकों के परिवारों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद उपलब्ध कराएं 

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस पर हुए एम्बुलेंस हादसे में शोक जताया। इस दुःखद घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन/पुलिस के आलाधिकारियों से समुचित जानकारी भी हासिल की। उन्होंने ईश्वर से चारों मृतकों के परिजनों के संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। 

    सड़क हादसे के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। सीएम ने सुल्तानपुर/देवरिया के अधिकारियों से मृतकों के परिवारों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद देने के भी निर्देश दिए हैं। 

    बता दें कि एम्बुलेंस चंडीगढ़ से शहीद सूबेदार का शव लेकर देवरिया जा रहा था। इसमें शहीद के परिजन भी मौजूद थे। पूर्वांचल एक्सप्रेस पर एम्बुलेंस की एक वाहन से टक्कर हो गई, जिसमें ड्राइवर समेत चार लोगों के मौत की सूचना प्राप्त हुई है।

  • सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता-मुख्यमंत्री योगी

    सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता-मुख्यमंत्री योगी

    मुख्यमंत्री योगी ने पूरी की तीन दशक पुरानी मांग, गंगा पर सेतु से सीधे जुड़ेंगे भदोही-प्रयागराज
     
    सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 1.32 किमी लंबे सेतु का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास
     
    ₹300 करोड़ से अधिक की परियोजना से पांच जिलों की राह होगी आसान, मध्य प्रदेश की ओर भी सफर होगा सुगम
     
    पीपा पुल और नाव पर निर्भरता होगी खत्म, कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को मिलेगी राहत
     
    सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता-मुख्यमंत्री योगी
     
    संत रविदास नगर भदोही

     गंगा पर पक्के पुल के लिए तीन दशक से अधिक समय से इंतजार कर रहे कोनिया क्षेत्र के लोगों की बड़ी मांग रविवार को पूरी हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर ₹300 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले 1.32 किमी लंबे सेतु का शिलान्यास किया। इसके साथ पहुंच मार्ग और सुरक्षात्मक कार्य भी कराए जाएंगे। पुल तैयार होने पर भदोही के धनतुलसी से प्रयागराज के मांडा क्षेत्र स्थित डेंगुरपुर तक सीधा सड़क संपर्क हो जाएगा।
     
    इस पुल से भदोही और प्रयागराज के साथ मिर्जापुर, वाराणसी और जौनपुर की राह भी आसान होगी। इस तरह उत्तर प्रदेश के पांच जिलों को इसका लाभ मिलेगा। मिर्जापुर के रास्ते मध्य प्रदेश की ओर जाने वालों को भी सहूलियत होगी।
     
    बरसात में खत्म होगी बड़ी परेशानी
    धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर अभी गंगा पार करने के लिए पीपा पुल और नाव का सहारा लेना पड़ता है। बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पीपा पुल हटा दिया जाता है। ऐसे में लोगों की मुश्किल बढ़ जाती है। पक्का पुल बनने के बाद कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को पूरे साल गंगा पार करने का रास्ता मिलेगा। पढ़ाई, इलाज, बाजार और रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए भी लोगों को राहत मिलेगी।
     
    सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को भी राहत
    गंगा किनारे स्थित सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी पुल अहम होगा। प्रयागराज की ओर से आने वालों को सीधा रास्ता मिलेगा। इसका फायदा आसपास के बाजार और छोटे कारोबारियों को भी होगा।
     
    कालीन कारोबार की राह भी होगी आसान
    भदोही के कालीन कारोबार के लिए भी यह पुल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज की ओर सीधा सड़क संपर्क होने से माल लाने-ले जाने में आसानी होगी। कारोबारियों का कहना है कि पुल से व्यापार के लिए नए क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।
     
    अंजनी कारपेट, खमरिया के पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा, “इस पुल का बहुत लंबे समय से इंतजार था। अब काम शुरू होने जा रहा है तो क्षेत्र के लोगों में खुशी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बहुत-बहुत धन्यवाद।”
     
    त्रिवेणी रग इंडस्ट्रीज, छतमी गोपीगंज के शाश्वत पांडेय ने कहा, “पुल हमारे कालीन कारोबार के लिए काफी काम आएगा। प्रयागराज की तरफ संपर्क बेहतर होने से व्यापार को भी फायदा होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार।”
     
    कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की प्रशासनिक समिति के पूर्व सदस्य राजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा, “भदोही का कालीन दुनिया भर में जाता है। यह पुल कारोबार के लिए नए रास्ते खोलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की बड़ी जरूरत पूरी की है।”
     
    पुल बनने से परिवारों की परेशानी होगी कम
    गृहिणी एवं समाजसेवी सरिता गुप्ता ने कहा, “बरसात के दिनों में गंगा पार करना बड़ी परेशानी बन जाता है। पक्का पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज और रोजमर्रा के काम तक आसान होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद।”

  • 29 जुलाई को वाराणसी में पहली बार किया था नाम बदलने का ऐलान, अब भदोही की धरती से फिर बोले मुख्यमंत्री योगी

    29 जुलाई को वाराणसी में पहली बार किया था नाम बदलने का ऐलान, अब भदोही की धरती से फिर बोले मुख्यमंत्री योगी

    ‘संत रविदास नगर भदोही’ से दलित-राजभर दोनों को संदेश, योगी ने एक नाम में जोड़ी दो विरासत
     
    संत रविदास के नाम से दलित समाज को सम्मान, ‘भदोही’ बरकरार रख भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान को भी दिया स्थान
     
    29 जुलाई को वाराणसी में पहली बार किया था नाम बदलने का ऐलान, अब भदोही की धरती से फिर बोले मुख्यमंत्री योगी
     
    मुलायम ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर बनाया भदोही जिला, मुख्यमंत्री मायावती ने 4 दिसंबर 1997 को किया संत रविदास नगर
     
    अखिलेश ने 6 दिसंबर 2014 को कैबिनेट के जरिए फिर किया भदोही, योगी ने अब दोनों नामों को एक साथ जोड़ा
     
    भदोही को अपनी राजधानी बनाने वाले भार राज्य से निकला जिले का नाम, सरकारी इतिहास में भी दर्ज है उल्लेख
     
    2027 से पहले पूर्वांचल के अहम दलित और राजभर समाज तक जाएगा नामकरण का राजनीतिक संदेश

    भदोही
     संत रविदास नगर भदोही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की बात दोहराकर इतिहास के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया है। संत रविदास का नाम जिले की पहचान में वापस लाने से दलित समाज की आस्था और सम्मान जुड़ा है, वहीं ‘भदोही’ को बरकरार रखने से भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान भी कायम रहेगी। पूर्वांचल के सामाजिक समीकरण में अहम दलित और राजभर समाज के लिहाज से भी इस फैसले के मायने हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने पहली बार 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की थी। रविवार को भदोही की धरती से उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनपद ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
     
    मुलायम ने बनाया जिला, मायावती ने बदला नाम
    तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जनपद बनाया। इसके तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ करने का नोटिफिकेशन जारी किया।
     
    करीब 17 साल बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक के माध्यम से ‘संत रविदास नगर’ का नाम बदलकर फिर ‘भदोही’ कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को जिले के नाम में स्थान दिया है।
     
    भार राज्य की राजधानी से जुड़ा भदोही
    भदोही का इतिहास जिला बनने से सदियों पुराना है। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका नाम यहां के ‘भार राज्य’ से पड़ा, जिसने भदोही को अपनी राजधानी बनाया था। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाब भी बताए गए हैं।
     
    अकबर के शासनकाल में भदोही को दस्तुर बनाकर इलाहाबाद (प्रयागराज) सरकार में शामिल किया गया। बाद में यह अलग-अलग शासकों के अधीन रहा। वर्ष 1911 में बनारस रियासत का हिस्सा बना और आजादी के बाद वाराणसी जिले में शामिल रहा।
     
    नामकरण में सामाजिक समीकरण का भी संदेश
    संत रविदास दलित समाज के बड़े आराध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका नाम जिले से दोबारा जुड़ना दलित समाज के लिए सम्मान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भार राज से जुड़े ‘भदोही’ नाम को कायम रखना राजभर समाज की ऐतिहासिक विरासत को भी स्थान देता है।
     
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी को अन्न मिलने और छोटे-बड़े के बिना भेदभाव साथ रहने की कल्पना की गई है। इसे उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की बिना भेदभाव योजनाओं से जोड़ा।
     
    इस तरह करीब तीन दशक में जिले के नाम की यह चौथी महत्वपूर्ण कड़ी है। मुलायम सिंह यादव ने भदोही को अलग जिला बनाया, मायावती ने इसे संत रविदास नगर किया और अखिलेश यादव ने फिर भदोही कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों नामों को जोड़कर ‘संत रविदास नगर भदोही’ की पहचान सामने रखी है।

  • खराब सड़कों की मरम्मत कर आवागमन सुचारु कराने पर सीएम ने दिया जोर

    खराब सड़कों की मरम्मत कर आवागमन सुचारु कराने पर सीएम ने दिया जोर

    बारिश से बिगड़ी बिजली-सड़क व्यवस्था जल्द होगी दुरुस्त, सीएम योगी ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    भारी बारिश से क्षतिग्रस्त बिजली के खंभे और तारों की तत्काल हो मरम्मत: मुख्यमंत्री

    प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर लोगों को राहत देने पर जोर

    खराब सड़कों की मरम्मत कर आवागमन सुचारु कराने पर सीएम ने दिया जोर

    लखनऊ
     भारी बारिश के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में प्रभावित हुई बिजली और सड़क व्यवस्था को जल्द सामान्य करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सीएम ने बारिश से क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों और तारों को जल्द दुरुस्त कराने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल करने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश के कारण लोगों को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना न करना पड़े और मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए।

    आपूर्ति व्यवस्था को जल्द किया जाए सामान्य

    मुख्यमंत्री ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त विद्युत ढांचे की स्थिति का आकलन करने और आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य तत्काल कराने के निर्देश दिए। साथ ही बिजली के खंभों, तारों और अन्य उपकरणों को दुरुस्त कर आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य करने को कहा गया है। सीएम ने स्थानीय स्तर पर टीमों को सक्रिय रखते हुए शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।

    बारिश से खराब हुई सड़कों की तत्काल हो मरम्मत

    मुख्यमंत्री ने भारी बारिश से खराब हुई सड़कों की भी तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। जलभराव और बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को चिह्नित कर आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द पूरा कराने को कहा गया है, ताकि लोगों के आवागमन में किसी तरह की बाधा न हो। सीएम ने अधिकारियों को बिजली और सड़क जैसी जरूरी जनसुविधाओं को जल्द सामान्य स्थिति में लाने के लिए समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और व्यवस्थाओं की बहाली के कार्यों में किसी तरह की देरी न होने पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संबंधित अधिकारी प्राथमिकता तय करें और प्रभावित लोगों को जल्द राहत पहुंचाए।

  • लखनऊ के स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक की पहल, एम्बुलेंस से अस्पताल तक बेहतर समन्वय पर जोर

    लखनऊ के स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक की पहल, एम्बुलेंस से अस्पताल तक बेहतर समन्वय पर जोर

    सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

     योगी सरकार इमरजेंसी हेल्थकेयर को बना रही हाईटेक, गोल्डन ऑवर में मरीजों को मिलेगी शीघ्र मदद

     लखनऊ के स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक की पहल, एम्बुलेंस से अस्पताल तक बेहतर समन्वय पर जोर

    स्मार्ट तकनीक से दुर्घटना की जानकारी समय पर देने और मरीज को उचित अस्पताल तक पहुंचाने का प्रयास

    लखनऊ,
    गंभीर बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती पहला घंटा मरीज की जिंदगी के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे समय में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि घटना की जानकारी, एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पताल तक सूचना पहुंचने और मरीज के लिए जरूरी मेडिकल तैयारियां समय पर होना भी महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए लखनऊ का हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक इमरजेंसी हेल्थकेयर को तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। स्टार्टअप की कोशिश ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जिससे इमरजेंसी की स्थिति में मरीज, रिस्पॉन्स टीम, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

    गोल्डन ऑवर पर केंद्रित है हिंदकेयर मेडटेक स्टार्टअप
    यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के तहत प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में यू-हब जैसे डीप-टेक इनक्यूबेशन सेंटर, 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला स्तर पर इनक्यूबेशन के विस्तार और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इनक्यूबेट किया गया है। स्टार्टअप की पूरी सोच इमरजेंसी के उस 'गोल्डन ऑवर' पर केंद्रित है, जिसमें समय पर पहचान, मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना और तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्टार्टअप का मूल विचार है कि सही मरीज को सही समय पर सही जानकारी के साथ सही अस्पताल तक पहुंचाया जाए।

    दुर्घटना की सूचना से अस्पताल तक बनेगा तकनीकी कनेक्शन
    मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि स्टार्टअप की प्रमुख पहल लाइफडैश स्मार्ट क्रैश-डिटेक्शन और इमरजेंसी अलर्ट प्लेटफॉर्म है। यह तकनीक संभावित सड़क दुर्घटना की पहचान करने और रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ इमरजेंसी नोटिफिकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके जरिए घटना स्थल से इमरजेंसी रिस्पॉन्डर, एंबुलेंस सेवा और अस्पताल तक सूचना के प्रवाह को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।स्टार्टअप का उद्देश्य केवल दुर्घटना की पहचान तक सीमित नहीं है। इसकी परिकल्पना एक ऐसे कनेक्टेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की है, जिसमें घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक जरूरी जानकारी तेजी से पहुंच सके। इससे सूचना और समन्वय में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है और गोल्डन ऑवर के दौरान मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

    सीएम योगी के सामने भी प्रस्तुत की तकनीक
    स्टार्टअप के संस्थापक ने हाल ही में गोरखपुर में आयोजित एक स्टार्टअप/ टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में अपनी तकनीक और विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी प्रस्तुत किया। स्टार्टअप की टीम ने इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक के इस्तेमाल और मरीज, एंबुलेंस तथा अस्पताल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी की अपनी परिकल्पना साझा की। स्टार्टअप की टीम में डॉ. आयुष सिंह फाउंडर एवं डायरेक्टर के रूप में क्लीनिकल विजन और हेल्थकेयर रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं।

  • मंत्रियों का उदाहरण देकर बोले सीएम- ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा

    मंत्रियों का उदाहरण देकर बोले सीएम- ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा

    छात्रवृत्ति का पैसा तक खा गई थी सपा सरकार: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में हस्तांतरित की 148 करोड़ रुपये से अधिक छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति

    मुख्यमंत्री ने 11 विद्यार्थियों को मंच पर अपने हाथों से दिया छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र, 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को मिली छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति

    अगले महीने 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी सरकार: सीएम योगी

    मंत्रियों का उदाहरण देकर बोले सीएम- ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 2016-17 में अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्रवृत्ति भेजी ही नहीं गई। तत्कालीन सरकार यह छात्रवृत्ति खा गई। 2017 में हमारी सरकार बनी तो हमने 2016-17 व 2017-18 की छात्रवृत्ति एक साथ भेजी। पहले केवल 2900 करोड़ रुपये ही छात्रवृत्ति दी जाती थी। आज हमारी सरकार 6200 करोड़ रुपये (दोगुने से अधिक) छात्रवृत्ति देती है। 

    मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोकभवन में चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति हस्तांतरित की और 11 विद्यार्थियों को अपने हाथ से छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र भी सौंपे। सीएम ने आश्वस्त किया कि छात्रों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। हर पात्र बच्चे को छात्रवृत्ति मिलेगी, छूटे हुए बच्चे भी जल्द आवेदन करें। उन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति की राशि को खान-पान के बजाय शिक्षा पर ही खर्च कीजिए। इससे अच्छी पाठ्य पुस्तकें, रेफरेंस बुक खरीदिए। पाठ्यक्रम के साथ ही महापुरुषों की आत्मकथा, ज्ञानवर्धक व धार्मिक पुस्तकों को पढ़िए, अपना बुक बैंक बढ़ाइए। सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट दे रही है, 60 लाख को मिल चुका है। शेष को भी जल्द दिया जाएगा।

    अब सीधे अकाउंट में जाती है छात्रवृत्ति
    सीएम ने कहा कि पहले 100 में से 60-70 बच्चों को ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलता था। बाबू और अन्य लोग इस पर डाका डालते थे, छात्र ठगा रहता था। छात्रवृत्ति के लिए चक्कर लगाने में उससे ज्यादा तो युवाओं का किराया लग जाता था। लेकिन, आज खाता खोलकर छात्रों का पैसा सीधे उसमें भेजा जाता है। हमारे समय यह व्यवस्था नहीं थी, लेकिन मोदी जी ने जीरो अकाउंट पर बैंक खाते खुलवा दिए।

    9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति
    सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष 69 लाख बच्चों को 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई। 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति मिली है, जबकि 2017 के पहले यह राशि और छात्रों की संख्या भी कम थी। पहले की सरकारें युवाओं को प्रोत्साहन नहीं देती थी और न समय से छात्रवृत्ति मिलती थी।

    छात्रवृत्ति देने के लिए सरकार ने तय की समयसीमा 
    सीएम ने बताया कि गत वर्ष अनुसूचित जाति-जनजाति के 26.26 लाख विद्यार्थियों को 2750 करोड़, अल्पसंख्यक वर्ग के 5.89 लाख बच्चों को 360 करोड़, पिछ़ड़ा वर्ग के 37 लाख विद्यार्थियों को 3072 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई। इसी क्रम में अल्प आय वर्ग वर्ग के 9.40 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति दी गई। सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण की समयसीमा तय की है। प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होने के बाद छात्रवृत्ति की राशि खाते में भेजनी शुरू की गई। तय किया गया कि 2 अक्टूबर (अवकाश के कारण 3 अक्टूबर) तथा 26 जनवरी तक हर हाल में छात्रों तक धनराशि पहुंच जाए।

    अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को देंगे स्कूटी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जेईई, नीट की तैयारी के लिए युवा दूसरे राज्यों में जाते थे। अब युवा मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के जरिए इसका लाभ उठा रहे हैं। सीएम ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना व मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को स्कूटी देंगे। 2017 के पहले सैफई सिंडिकेट को लूट-खसोट से ही फुर्सत नहीं थी। अपने परिवार की सोचने वाले इन लोगों के लिए प्रदेश के अन्य लोग बेगाने थे, पर अब यूपी खुशहाली की राह पर चला है। 

    कोई भी पात्र छूटने न पाए, हर महीने बच्चे के खाते में जाए पैसा 
    सीएम ने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से कहा कि हर महीने बच्चे के खाते में पैसा जाए, कोई भी पात्र बच्चा छूटने न पाए। पिछली बार कई कारणों से एससी-एसटी वर्ग के 4 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। तब पोर्टल को ठीक कराया गया, अब उन वंचित बच्चों को भी छात्रवृत्ति मिलने जा रही है। धनराशि के अभाव में कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहने पाए। छात्रवृत्ति अल्प आय परिवार के छात्रों के लिए संबल बनेगी। 

    हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे
    सीएम ने कहा कि हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे। आज 4.60 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इसे 70 लाख बच्चों तक पहुंचाना है। मोदी जी के टेक्नोलॉजी अभियान से सेंधमारी रुकी, अब बच्चों की छात्रवृत्ति में कोई सेंधमारी नहीं कर सकता। सरकार ने अब तक लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। छह माह में एक लाख और युवाओं को नौकरी मिलेंगी। आप भी मेहनत से तैयारी कीजिए, नौकरी जरूर मिलेगी। 

    ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल
    मुख्यमंत्री ने मंच पर बैठे मंत्रियों का उदाहरण देकर युवाओं से कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। प्रयास ईमानदारी से होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि परिश्रम का परिणाम आता है। राज्यमंत्री संजीव गोंड जंगलों में भटकते थे, उन्हें लगा कि नौकरी के पीछे नहीं भागना है, बल्कि जनता व जनजातीय समुदाय की आवाज उठाना है। मंत्री असीम अरुण आईपीएस के रूप में एडीजी व कानपुर के पुलिस आयुक्त रह चुके हैं। दानिश आजाद अंसारी और नरेंद्र कश्यप भी संघर्ष के साथ सामाजिक कार्य करते रहे। एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत पूर्व विधायक/सांसद रहे हैं। अब ये सभी लोग मंत्री के रूप में जनता की समस्याओं के समाधान का रास्ता निकालते हैं।

    बच्चों से बोले सीएम-आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली
    सीएम ने बच्चों से कहा कि आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि यूपी में ऐसे समय में पढ़ रहे हैं, जब पहचान का संकट नहीं है। 2017 से पहले विद्यालयों में शिक्षक नहीं थे, भवन जर्जर थे। बेसिक शिक्षा परिषद (पहली से आठवीं तक) में ड्राप आउट रेट 19-20 फीसदी था। सरकार इसे ठीक करने में रूचि नहीं लेती थी। सरकार बनने पर जब हमने अध्ययन कराया तो पता चला कि अधिसंख्य बालिकाएं इसलिए स्कूल छोड़ती थीं, क्योंकि वहां टॉयलेट व पेयजल आदि की व्यवस्था नहीं थी। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए इसमें सुधार किया। अब बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट, पेयजल, फर्नीचर, फर्श आदि के साथ ही दो यूनिफॉर्म, बैग, किताब, स्वेटर, जूता-मोजा आदि उपलब्ध करा रहे हैं। 

    अब सीना तानकर चलता है ‘यूपीवाला’
    सीएम ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ बच्चों को यह सुविधा मिल रही है। 2017 के पहले स्कूल वीरान थे, उन्हें सुविधाएं नहीं मिलती थीं। अब निर्माण श्रमिकों, अनाथ, निराश्रित बच्चों के लिए 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय बनाए गए हैं। इनमें 18,000 बच्चों का प्रवेश हुआ है। सरकार इन बच्चों को पालन-पोषण, अच्छा वातावरण व अच्छी शिक्षा उपलब्ध करा रही है। गरीब परिवार की बालिकाओं के लिए अब 746 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं। इन्हें आठवीं से बढ़ाकर 12वीं तक किया गया। कमजोर, पिछ़ड़े व एससी-एसटी वर्ग के बच्चों के लिए जयप्रकाश नारायण आश्रम पद्धति के आवासीय विद्यालय, पीएमविद्यालय हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2300 से अधिक विद्यालयों के नए भवन बनाए गए हैं। यहां नए लैब, लाइब्रेरी, अटल टिकरिंग लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास आदि की सुविधाएं हैं। अब 15 दिन में हाईस्कूल-इंटर की परीक्षा होती है और 15 दिन में परिणाम भी आता है। पहले पढ़ाई न होने से प्रदेश बीमारू कहलाता था। अब रेवेन्यू सरप्लस यूपी भारत के विकास में योगदान दे रहा है। अब ‘यूपी वाला’ सीना तानकर चलता है।

    सही दिशा में आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश 
    सीएम ने कहा कि यूपी अब सही दिशा में आगे बढ़ा है। युवा, नौनिहाल यूपी के सारथी हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप जब 36-37 साल के होंगे, तब 2047 तक आपको खुशहाल व समृद्ध भारत मिलेगा। इसके लिए आपको भी योगदान देना होगा, क्योंकि देश से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। देश खुशहाल, समृद्ध व सुरक्षित रहेगा तो हम भी रहेंगे।  

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    सीएम के हाथों इन विद्यार्थियों को मिला छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र

    सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों छात्र रणवीर वर्मा, मिली, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अनन्या अवस्थी, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, अभिषेक यादव, बुशरा, साइमा, अल कैफ को मंच पर छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र मिला।

  • छात्रों की पढ़ाई को मिला आर्थिक संबल, CM योगी ने एक क्लिक में 4.60 लाख विद्यार्थियों के खातों में भेजी राशि

    छात्रों की पढ़ाई को मिला आर्थिक संबल, CM योगी ने एक क्लिक में 4.60 लाख विद्यार्थियों के खातों में भेजी राशि

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल
     
    एक क्लिक पर छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि
     
    मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र
     
    अन्य पिछड़ा वर्ग के 2.23 लाख और अनुसूचित जाति के 1.59 लाख विद्यार्थियों को मिला लाभ
     
    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के 4,60,559 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को शनिवार को आर्थिक संबल मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में एक क्लिक कर डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी। उन्होंने मंच पर 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रमाणपत्र पाने वालों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।
     
    सरकार की इस पहल का सबसे अधिक लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में ₹60.01 करोड़ भेजे गए। अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को ₹64.54 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। इसी तरह सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों के खातों में ₹11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों के खातों में ₹12.06 करोड़ पहुंचाए गए।
     
    आर्थिक अभाव के कारण नहीं छूटेगी पढ़ाई
    योजना में अल्प आय वर्ग के पूर्वदशम यानी कक्षा नौ और दस के साथ दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य आर्थिक अभाव को किसी विद्यार्थी की शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने देना है।
     
    आधार आधारित भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता
    छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली से धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित पैकेट सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे छात्रवृत्ति वितरण में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और विद्यार्थियों को बिना किसी दौड़भाग के योजना का लाभ मिल रहा है।
     
    प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को ₹4,793 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी है। सरकार की कोशिश प्रक्रिया को और सरल बनाकर प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाने की है।

  • युवाओं और छात्र-छात्राओं के लिए अहम पहल, लखनऊ में आयोजित हुआ छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम

    युवाओं और छात्र-छात्राओं के लिए अहम पहल, लखनऊ में आयोजित हुआ छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री  दानिश आजाद अंसारी जी ने आज लखनऊ में मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम को प्रदेश के युवाओं एवं छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    इस अवसर पर अल्प-आय वर्ग के पूर्वदशम एवं दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    श्री दानिश आजाद अंसारी जी ने कहा कि आज का दिन उत्तर प्रदेश के युवाओं, नौजवानों और विशेष रूप से जेन-जी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने हमेशा युवाओं के सपनों को उड़ान देने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक कारणों से किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित न हो।

    कार्यक्रम में मा. कैबिनेट मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी, मा. पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप जी, मा. समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण जी, मा. मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड जी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री बैजनाथ रावत जी, मा. विधायक श्रीमती जय देवी जी, मा. श्री अमरेश कुमार जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।