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  • सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान

    सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान

    परंपरा से प्रगति तक: मूंज शिल्प ने बदली रजनी बाला की दुनिया

    ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा

    सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान
        
    कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान

    सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन और नई संभावनाओं का दौर जारी है। महिलाएं अपने संकल्प और परिश्रम से आत्मनिर्भर विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लाक के गांव हरखपुर की रहने वाली रजनी बाला इसका सशक्त उदाहरण हैं, जिन्होंने मूंज उत्पादों में सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसी कलाकृतियों को बढ़ावा देकर अपनी अलग पहचान बनाई है।

    ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा
    रजनी बाला ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। वह बताती हैं कि मूंज शिल्प का हुनर उन्हें अपनी मां से विरासत में मिला। उनकी मां भी मूंज के उत्पाद तैयार करती थीं, जिससे बचपन से ही रजनी को इस कार्य का पारिवारिक वातावरण और व्यावहारिक अनुभव मिलता रहा। उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं। उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है। 

    सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान
    मूंज के प्रत्येक उत्पाद की कीमत अलग-अलग होती है, लेकिन लाभ की दृष्टि से यह व्यवसाय काफी मजबूत है। रजनी बाला बताती हैं कि औसतन हर उत्पाद पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुद्ध लाभ हो जाता है। यदि किसी उत्पाद को तैयार करने में ₹100 की लागत आती है, तो उसका बाजार मूल्य लगभग ₹150 होता है। उनके व्यवसाय को अब अन्य राज्यों से भी पहचान मिल रही है। अब तक का उनका सबसे बड़ा और लाभदायक ऑर्डर राजस्थान से मिला, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 100 महिलाओं को रोजगार का अवसर दिया। इस तरह रजनी बाला न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आजीविका से जोड़कर सामूहिक आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। 

    कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान
    रजनी बाला ने बताया कि उनके मूंज उत्पादों के निर्माण और विपणन में जिला उद्योग कार्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। विशेष रूप से जिला उपायुक्त सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से उन्हें अपने उत्पादों को बड़े मंच तक ले जाने का अवसर मिला। इसी सहयोग के चलते उन्होंने नोएडा, सुल्तानपुर के साथ-साथ लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की सफलतापूर्वक बिक्री की है। सरकारी समर्थन और अपने परिश्रम के बल पर रजनी बाला आज स्थानीय शिल्प को व्यापक बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनी हैं।

    सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव
    उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं प्रदेशभर में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं। राज्य स्तर पर अब तक लाखों महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इन योजनाओं के प्रभाव से सुल्तानपुर सहित कई जिलों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जो युवा कभी बेरोजगारी से जूझ रहे थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।

    योगी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं और युवा इन योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भागीदारी निभाएं। विभिन्न विभाग अपने स्तर पर आवेदकों को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया सरल और सुलभ बनी रहे। साथ ही, समय-समय पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन सफल युवाओं और महिलाओं की प्रेरक कहानियां न केवल अन्य लोगों के लिए उत्साह का स्रोत बन रही हैं, बल्कि सुल्तानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी फैला रही हैं।

  • मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास

    मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास

    फरवरी तक उत्तर प्रदेश में हुआ ₹.1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह

    पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व

    मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास

    जीएसटी, वैट आबकारी, परिवहन सहित हर सेक्टर में बढ़ा राजस्व संग्रह, मुख्यमंत्री ने जताया संतोष

    होली पर अलर्ट रहे प्रशासन, न बने-न बिके अवैध और जहरीली शराब: मुख्यमंत्री

    लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन व रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण को तेज करें: मुख्यमंत्री

    परिवहन निगम की बसों की फिटनेस सुनिश्चित करें, नए रुट चिन्हित कर निजी क्षेत्र के सहयोग से बस सेवा शुरू करें: मुख्यमंत्री

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी मासांत तक के कर एवं करेत्तर राजस्व की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीकरण, परिवहन, ऊर्जा, भू-राजस्व तथा खनन विभागों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राजस्व वृद्धि प्रदेश में विकास कार्यों की गति को निर्धारित करती है। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार-आधारित कार्यप्रणाली के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए।

    बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर-राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ निर्धारित है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹1,96,177 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की गई है। राज्य कर (जीएसटी + वैट) का लक्ष्य ₹1,75,725 करोड़ है, जिनके मुकाबले अभी तक ₹1,03,770 करोड़ का संग्रह प्राप्त हुआ है। इसमें जीएसटी के तहत ₹75,195 करोड़ तथा वैट के अंतर्गत ₹28,575 करोड़ की प्राप्ति शामिल है। राज्य कर विभाग ने बताया कि जीएसटी 2.0, एआई आधारित जोखिम विश्लेषण, बड़े पैमाने पर स्क्रूटनी, ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल की प्रभावी निगरानी जैसे प्रयासों से कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एआई आधारित 1.59 लाख करदाताओं की जांच, 75 जनपदों में संवाद कार्यक्रम, फर्जी आईटीसी पर नियंत्रण तथा ₹3,117 करोड़ की वसूली विभाग के प्रमुख परिणाम रहे।

    आबकारी विभाग की ओर से बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹63,000 करोड़ है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹48,501 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13.2 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीनीकरण की दर 93.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभाग ने उपभोग आधारित रणनीति, दुकानों के नवीनीकरण, लाइसेंस शुल्क, असग्रम मांग पत्र तथा थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्च में लगभग ₹9,050 करोड़ की अतिरिक्त प्राप्ति का रोडमैप प्रस्तुत किया। वर्षांत तक राजस्व लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।

    स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने वर्ष 2025-26 के अपने वार्षिक लक्ष्य ₹38,150 करोड़ के सापेक्ष फरवरी तक ₹29,487 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की। विभाग ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर और वाराणसी सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों की आगामी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं से संभावित राजस्व का भी विवरण प्रस्तुत किया। खनन पट्टों के नवीनीकरण, अवशेष संपत्तियों के पंजीकरण अभियान, टोल प्लाज़ा मामलों के निस्तारण तथा सर्किल दरों के वैज्ञानिक पुनरीक्षण को राजस्व संवर्धन के प्रभावी उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹14,000 करोड़ है, जिसके मुकाबले फरवरी तक ₹11,005 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। वाहन पंजीकरण में सुधार, कर अदायगी की बेहतर व्यवस्था, तकनीक आधारित निगरानी तथा प्रवर्तन कार्यवाहियों की मजबूती से विभाग ने राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कर वसूली शिविर, निगरानी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को आगामी अवधि में और तीव्र करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।

    बैठक में भू-राजस्व एवं ऊर्जा विभाग ने संयुक्त रूप से फरवरी तक ₹3,414 करोड़ की उपलब्धि की जानकारी दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है। खनन एवं भू-तत्व विभाग ने बताया कि विभाग वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष फरवरी तक ₹3,597 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति कर चुका है। विभाग ने बताया कि खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग, ओवरलोडिंग की ज़ीरो पॉइंट रोकथाम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, विभिन्न राज्यों के पोर्टलों से एपीआई इंटीग्रेशन तथा अंतरराज्यीय समन्वय के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह और अधिक सुदृढ़ हुआ है। विभाग ने मार्च में लगभग ₹600 करोड़ की संभावित प्राप्ति की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि बढ़ता हुआ राजस्व प्रदेश में बुनियादी ढाँचे, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान विशेष सतर्कता बरतने तथा अवैध और जहरीली शराब के किसी भी प्रकार के उत्पादन एवं बिक्री को पूर्णतः रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की प्रगति की जानकारी लेते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने को कहा। परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की बसों की फिटनेस, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की ठोस कार्ययोजना और नए रूट चिन्हित कर निजी बस संचालकों के सहयोग से बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

  • सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री

    सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री

    हर आंगनबाड़ी केंद्र का होगा स्वयं का भवन-मुख्यमंत्री 

    मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण 

    प्रदेश में 1.89 लाख केंद्र, 76 हजार को नए भवनों की आवश्यकता

    सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री 

    प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल की उपयोगिता पर करें विचार: मुख्यमंत्री  

    नए आंगनबाड़ी भवनों में होगा आधुनिक व समावेशी सुविधाओं का समावेश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चे आते हैं और ये केंद्र प्री-प्राइमरी के रूप में भी उपयोगी हैं। ऐसे में बच्चों की सुविधा, पठन-पाठन की उत्कृष्ट व्यवस्था तथा भवनों का आकर्षक स्वरूप सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने स्वयं के भवनों में नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों के निर्माण में कॉरपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का सहयोग लिया जा सकता है और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार भी वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने एक मानक मॉडल तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जहाँ भी संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बाल-मित्र आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाए, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित एकीकृत सेवाएँ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध हो सकें।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं और समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ तथा आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों की बुनियाद हैं। राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढाँचे को पूरी तरह रूपांतरित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह मिशन ‘स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश’ को नई गति देगा।

    बैठक में अवगत कराया गया कि प्रस्तावित नए आंगनबाड़ी भवनों का मॉडल समावेशी एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें पेयजल सुविधा, विद्युत व्यवस्था, शौचालय, खेल-आधारित गतिविधियों हेतु पर्याप्त ‘प्ले एरिया’, किचन शेड, हॉट-कुक्ड मील की व्यवस्था, लो-हाइट वॉश यूनिट, बाल-मित्र शौचालय, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पृथक कक्ष तथा रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सहित पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

  • संस्थागत क्षमता, नीतिगत ढांचे और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर साथ मिलकर करेंगे काम

    संस्थागत क्षमता, नीतिगत ढांचे और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर साथ मिलकर करेंगे काम

    सिंगापुर के साथ यूपी की बड़ी रणनीतिक साझेदारी, इन्वेस्ट यूपी व एससीई के बीच एमओयू

    सीएम योगी के नेतृत्व में सिंगापुर में मिली बड़ी सफलता, सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के साथ हुआ करार

    संस्थागत क्षमता, नीतिगत ढांचे और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर साथ मिलकर करेंगे काम

    सिंगापुर/लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और सिंगापुर सरकार के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता उत्तर प्रदेश में संस्थागत क्षमता व नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ बनाने और इकोसिस्टम के विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

    सतत विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर फोकस
    एमओयू के तहत दोनों पक्ष विषयगत ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और परामर्श सेवाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश में सतत आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आधुनिक अवसंरचना के विकास को गति देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।

    इन क्षेत्रों में होगा सहयोग
    समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष न सिर्फ स्टडी विजिट्स व लीडरशिप डेलिगेशन का आयोजन करेंगे, बल्कि ट्रेनिंग व कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रमों का खाका तैयार कर उसे लागू भी कराएंगे। इससे लोगों की कार्यक्षमता व कौशल, दोनों को बेहतर किया जा सकेगा। इसके अलावा सलाह व मार्गदर्शन उपलब्ध कराना, साथ मिलकर तकनीकी सहयोग की परियोजनाएं तैयार करना और उन्हें लागू करना, सरकारी व निजी क्षेत्र से जुड़े संबंधित लोगों व संस्थाओं का सहयोग हासिल करना भी एमओयू के प्रावधानों में शामिल है। आवश्यकता पड़ने पर विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अलग से लिखित समझौते किए जाएंगे, जिनमें कार्यक्षेत्र, समयसीमा और वित्तीय प्रावधान स्पष्ट किए जाएंगे। दो माह के भीतर विस्तृत परियोजना समझौतों पर बातचीत शुरू की जाएगी और छह माह के भीतर उन्हें अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा। 

    वैश्विक अनुभव का मिलेगा लाभ
    इस साझेदारी से उत्तर प्रदेश को सिंगापुर के प्रशासनिक अनुभव, शहरी नियोजन, औद्योगिक क्लस्टर विकास, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुभव का लाभ मिलेगा। इस समझौते को उत्तर प्रदेश की वैश्विक सहभागिता और लॉन्ग टर्म विजन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

  • एविएशन सर्विस सेक्टर की दिग्गज कंपनी एआई सैट्स ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

    एविएशन सर्विस सेक्टर की दिग्गज कंपनी एआई सैट्स ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

    सीएम के सिंगापुर दौरे का दूसरा दिन 

    जेवर एयरपोर्ट पर दो प्रोजेक्ट्स में 4458 करोड़ रुपये निवेश करेगी एआई सैट्स

    सीएम योगी के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन भी सफलताओं का सिलसिला जारी

    एविएशन सर्विस सेक्टर की दिग्गज कंपनी एआई सैट्स ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

    जेवर एयरपोर्ट पर आधुनिक कार्गो कैंपस बनेगा और एयर कैटरिंग किचेन की स्थापना होगी, जिससे नॉर्थ इंडिया के सभी एयरपोर्ट्स पर की जाएगी फूड सप्लाई

    सिंगापुर/लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का एक और तोहफा मिला है। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एविएशन सर्विस सेक्टर की अग्रणी कंपनी एआई सैट्स (AISATS) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत कंपनी गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करेगी। एक अत्याधुनिक कार्गो कैंपस और दूसरा विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन। इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर एआई सैट्स 4458 करोड़ रुपये निवेश करेगी। 

    जेवर एयरपोर्ट बनेगा नॉर्थ इंडिया का कार्गो हब
    एमओयू के अनुसार, एआई सैट्स जेवर एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक कार्गो कैंपस का निर्माण करेगी। यह कार्गो कैंपस न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस परियोजना से निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलेगी, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा। जेवर एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे यह कार्गो कैंपस अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक रणनीतिक हब के रूप में उभरेगा।

    स्थापित की जाएगी अत्याधुनिक एयर कैटरिंग किचेन
    एमओयू के दूसरे प्रमुख निवेश के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही एक अत्याधुनिक विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन की स्थापना की जाएगी। यह किचेन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराएगा। विशेष बात यह है कि यहां तैयार किया गया भोजन केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी सप्लाई पूरे उत्तर भारत के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर भी की जाएगी। इससे क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी तथा हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    सिंगापुर दौरे का रणनीतिक महत्व
    मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना है। दूसरे दिन हुए इस एमओयू को राज्य के एविएशन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के साथ ही यह कार्गो कैंपस और एयर कैटरिंग सुविधा उत्तर भारत के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे और प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में स्थापित करेंगे।

  • सीएम को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से ‘भैया’ कहकर संबोधित किया एक महिला ने, कहा अब यूपी में रात में बिना सारे निकल सकती हैं महिलाएं

    सीएम को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से ‘भैया’ कहकर संबोधित किया एक महिला ने, कहा अब यूपी में रात में बिना सारे निकल सकती हैं महिलाएं

    सिंगापुर में गूंजा नारा “योगी हैं तो यूपी है”

    सिंगापुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देख उत्साह से भर गया भारतीय समुदाय

    सीएम को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से 'भैया' कहकर संबोधित किया एक महिला ने, कहा अब यूपी में रात में बिना सारे निकल सकती हैं महिलाएं

    सिंगापुर के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों ने गणपति वंदना पर प्रस्तुत किया मनोहारी नृत्य, सीएम ने की मुक्त कंठ से सराहना

    सिंगापुर/लखनऊ
     उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सिंगापुर में अपने बीच देखकर प्रवासी भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह छा गया। मुख्यमंत्री के संबोधन के बीच कार्यक्रम स्थल पर लगातार तालियां बजती रहीं। “योगी हैं तो यूपी है” की गूंज पूरे वातावरण में ऊर्जा भर रही थी। कार्यक्रम में जब एक महिला ने सीएम योगी को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से 'भैया' कहकर बुलाया तो पूरा माहौल भावनात्मक हो गया। आयोजन में एक बच्ची मुख्यमंत्री का स्केच बनाकर लाई थी, जिस पर सीएम योगी ने अपना ऑटोग्राफ देकर उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी। 

    कार्यक्रम के दौरान सिंगापुर में रह रही भारतीय मूल की स्वाति ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए खुद को उत्तर प्रदेश और सीएम योगी आदित्यनाथ की बहन बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत में मुख्यमंत्री का संबोधन सुनकर वह प्रेरित हुईं। स्वाति ने कहा, “जब संत सियासत में आता है तो सियासत इबादत बन जाती है, बन चुकी है। मैं उत्तर प्रदेश की साढ़े 11 करोड़ महिलाओं की ओर से मुख्यमंत्री को 'भैया' कहती हूं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिला है। अब महिलाएं रात में भी निडर होकर बाहर निकल सकती हैं। अपराधियों में कानून का भय है।"

    स्वाति ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना करते हुए नारा दिया कि योगी हैं तो यूपी है और संस्कृत में कहा, “योगी नेतृत्वे प्रदेशः भवति सुरक्षितम शुभम”। सिंगापुर में आयोजित यह संवाद प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच बढ़ते संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव का सशक्त संदेश देता नजर आया।

    जब मुख्यमंत्री मंच पर थे उस समय एक बच्ची उनका स्केच लेकर वहां पहुंची, सीएम योगी ने उस स्केच पर अपना ऑटोग्राफ दिया, जिसके बाद बच्ची बेहद प्रसन्न नजर आई। एक महिला ने मुख्यमंत्री की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) भी बांधा। इस अवसर पर सिंगापुर के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष भारतीय परंपरा को जीवंत करते हुए गणपति वंदना पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुति दी, जिसकी मुख्यमंत्री ने मुक्तकंठ से सराहना की। स्कूल के संस्थापक ने कहा "आपमें हमें हमारे श्रद्धेय पहले प्रधानमंत्री और सिंगापुर के संस्थापक श्री ली क्वान यू की प्रतिछाया प्रतीत हो रही है।"   

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शास्त्रीय विधा को यहां पर इन बच्चों ने गणपति वंदना के माध्यम से बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। आज जब पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने की होड़ लग रही है, उन स्थितियों में भारत से हजारों किलोमीटर दूर सिंगापुर में रहकर भारतीय समुदाय अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत बनाए हुए उन्हें मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहा है।

  • सिंगापुर दौरे में CM योगी ने उद्योगपति से मिलकर निवेश पर की अहम चर्चा

    सिंगापुर दौरे में CM योगी ने उद्योगपति से मिलकर निवेश पर की अहम चर्चा

    लखनऊ /सिंगापुर 
       उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर पहुंचते ही वहां के दिग्गज उद्योगपति टेमासेक के चेयरमैन टीओ ची हियान और उनकी टीम से मुलाकात की. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के औद्योगिक बुनियादी ढांचे में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना था.

    टेमासेक के चेयरमैन से चर्चा के दौरान सीएम ने यूपी में संप्रभु निवेश भागीदारी पर बात की, जिसमें डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, रिन्यूएबल एनर्जी और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

    उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को राज्य के मजबूत नीतिगत ढांचे और फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस सिस्टम के बारे में भी जानकारी दी. ये बैठक वैश्विक निवेशकों को यूपी की ओर आकर्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

    योगी आदित्यनाथ ने अपनी इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज सिंगापुर में टेमासेक के चेयरमैन तेओ ची हीन और उनकी टीम के साथ उत्पादक बैठक हुई. उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में संप्रभु निवेश भागीदारी के अवसरों पर चर्चा हुई. वैश्विक निवेशकों के लिए राज्य की नीति ढांचे और फास्ट ट्रैक क्लीयरेंस पर प्रकाश डाला.'

    इसके अलावा योगी ने सिंगापुर में जीआईसी के सीईओ लिम चो किआट और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर,  लॉजिस्टिक्स, इंडस्ट्रियल पार्क और शहरी विकास परियोजनाओं जैसी दीर्घकालिक संस्थागत निवेश के मौकों का पता लगाया गया है. 

    साथ ही सीएम ने यूपी में जीआईसी की मौजूदा साझेदारियों का भी जमकर सराहना की, जिसमें गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना में आईआरबी के साथ साझेदारी और राज्य में ग्रीनको के साथ सहयोग शामिल है.

    सिंगापुर की तीन दिवसीय यात्रा

    आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सिंगापुर की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं जो 22 से 24 फरवरी तक चलेगी. इस यात्रा का उद्देश्य आर्थिक सहयोग को गहरा करना हैं. योगी सिंगापुर में दिग्गज उद्योगपतियों के अलावा सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे.

  • लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी

    अन्नदाता किसानों के साथ खड़ी रहेगी डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2.51 लाख किसानों को 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का किया वितरण

    मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के 3500 लाभार्थी परिवारों को भी 175 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी सीएम ने

    सीएम ने बागपत, शामली, कासगंज, भदोही के उप कृषि निदेशक कार्यालय व मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, मऊरानीपुर झांसी में 50 शैय्या के छात्रावास तथा लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो का किया शिलान्यास

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ-2025) के अंतर्गत 2.51 लाख किसानों को 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का वितरण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के 3500 लाभार्थी परिवारों को भी 175 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने बागपत, शामली, कासगंज, भदोही में उप कृषि निदेशक कार्यालय व मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, राजकीय भूमि संरक्षण केंद्र मऊरानीपुर झांसी में 50 शैय्या के छात्रावास भवन तथा लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो इकाई का शिलान्यास भी किया। सीएम योगी ने होली की शुभकामनाएं देते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अन्नदाता किसान उन्नत खेती के माध्यम से प्रदेश की समृद्धि में योगदान देते रहेंगे। 

    460 करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंचे, बिचौलियों की भूमिका समाप्त 
    सीएम योगी ने कहा कि कल ही उत्तर प्रदेश सरकार का 2026-27 का बजट पारित हुआ है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से बजट के माध्यम से प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों के लिए ढेर सारी योजनाएं पास कराई गई हैं। जब बजट होता है तो लाभार्थियों के अकाउंट में सीधे पैसा जाता है और उन्हें लाभ प्राप्त होता है। आज एक बटन दबाते ही 460 करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंच रहे हैं, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई। लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जनपदों में लाभार्थी परिवारों को इन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। 

    डीएम को निर्देश- कल तक हर हाल में खाते में पहुंच जाए पैसा 
    सीएम योगी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से 2.51 लाख किसान परिवारों को मिली 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति को संबल बताया। कहा कि फसल को सूखे-अतिवृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। जब हम फसल का बीमा कराते हैं तो जरूरत पर रिटर्न भी मिलता है। आपदा के कारण नुकसान हुआ तो भरपाई होती है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि योजना के तहत पहले केवल किसान कवर होता था, उसके परिवार के सदस्य, बटाईदार, सह किसान कवर नहीं होते थे। हमारी सरकार में 1000 करोड़ से अधिक की धनराशि के जरिए किसान या उसके परिवार के सदस्यों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। किसी मनुष्य की कमी की भरपाई कोई नहीं कर सकता, लेकिन सरकार संबल देने के लिए खड़ी हो सकती है। आपदा प्रभावित 3500 पीड़ित किसानों, सह किसानों, पारिवारिक सदस्यों, बटाईदारों आदि को आज लाभान्वित किया गया है। इससे पहले 16 जून 2025 को 11,690 किसानों व आश्रितों को 561.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि कल तक यह पैसा सभी किसानों या आश्रित परिवारों के खाते में पहुंच जाए। 

    आपदा मित्रों को मिला तीन साल तक पांच लाख का बीमा कवर
    सीएम योगी ने कहा कि आपदा प्रबंधन में फर्स्ट रिस्पॉन्डर आपदा मित्र हो सकता है। पीएम मोदी ने इस संबंध में बड़ा अभियान चलाया है। उत्तर प्रदेश ने पीएम की इस पहल को बढ़ाने का कार्य किया। 25 जनपदों में 29,772 युवा स्वयंसेवकों (एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस, भारत स्काउट एंड गाइड) को प्रशिक्षित कर आपदा मित्र प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया है। इन स्वयंसेवकों को सात दिवसीय प्रशिक्षण के साथ भी जोड़ा गया है। इन्हें इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट,  आपदा मित्र ट्रेनिंग, मॉड्यूल आईडी, आईडी कार्ड व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट में लाइफ जैकेट, सर्च टॉर्च, फर्स्ट-एड बॉक्स, सेफ्टी हेलमेट, चश्मा समेत 15 आइटम हैं। प्रदेश सरकार ने प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों का तीन वर्ष का जीवन व चिकित्सा बीमा करने का निर्णय लिया है। 10 फरवरी को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के साथ एमओयू किया गया है, जिसमें आपदा मित्र को तीन वर्ष के लिए 5 लाख का बीमा कवर प्रदान किया गया है। प्रदेश में अभी तक 2959 युवा स्वयंसेवक प्रशिक्षित किए जा चुके हैं, शेष का प्रशिक्षण भी आगे बढ़ाया जाएगा। 

    हमारा प्रयास- आपदा के 24 घंटे के भीतर पीड़ितों के खाते में पहुंच जाए पैसा 
    सीएम ने कहा कि पहले आपदा आने पर वर्षों तक पीड़ितों को कोई पूछता तक नहीं था। उन्हें क्षतिपूर्ति तक नहीं मिल पाती थी। 2015-16 में एक बार किसी किसान के खाते में दो रुपये, किसी के खाते में चार रुपये आए थे। हमारा प्रयास है कि बाढ़, आकाशीय बिजली, आगजनी जैसी आपदा आते ही 24 घंटे के भीतर पीड़ित के खाते में पैसा पहुंच जाए। 2025-26 में राज्य आपदा मोचक निधि में 876 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें से फसल क्षति से प्रभावित 5,14,322 किसानों को 260 करोड़ रुपये का कृषि निवेश अनुदान, जनहानि के 5398 पीड़ितों को 216 करोड़, मकान क्षति के 27448 प्रभावितों को 24 करोड़ रुपये सरकार वितरित कर चुकी है। 

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापना 
    सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर राडार की स्थापना होने जा रही है। इससे मौसम का पूर्वानुमान लगाने के साथ ही यह भी बता सकेंगे कि कहां पर आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ब्लॉक स्तर पर 2000 ऑटोमेटिक रेन गेज स्थापित करने की कार्रवाई लगभग पूर्ण हो चुकी है। 

    इस अवसर पर में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उप्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, प्रमुख सचिव (कृषि) रवींद्र कुमार, प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू आदि की मौजूदगी रही।

    होमगार्ड की भर्ती में आपदा मित्र को देंगे प्राथमिकताः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 45 हजार होमगार्ड्स की भर्ती में आपदा मित्रों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अभी आपदा मित्र की सेवा स्वैच्छिक है, लेकिन जब वे होमगार्ड के रूप में कार्य करेंगे तो उन्हें सरकार द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा। प्रदेश में 19 हजार आपदा मित्रों को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षित किया जा चुका है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा स्नातक-परास्नातक विद्यार्थियों के लिए दो वर्षीय आपदा प्रबंधन इंटर्नशिप कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

  • जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी

    जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी

    नेचुरल फॉर्मिंग हब बन रहा यूपी

    प्रदेश के सभी 75 जिलों में अब तक 94,300 हेक्टेयर तक पहुंची नेचुरल फॉर्मिंग, योगी सरकार 298 करोड़ रुपये से करेगी विस्तार

    बुंदेलखंड पर विशेष फोकस, सातों जिलों में जलधारण क्षमता बढ़ने से खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और लागत घटेगी

    जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी

    अन्नदाता को 'आरोग्यदाता' बनाएगी योगी सरकार

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। सक्रिय रणनीति बनाकर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कुल 94,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल तक प्राकृतिक खेती का विस्तार किया गया है। यह जल्द ही एक लाख हेक्टेयर तक पहुंचने वाला है।
    इस व्यापक अभियान में बुंदेलखंड पर फोकस रखा गया है, जहां विशेष कार्यक्रम के जरिए इसे सफल मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार रासायनिक निर्भरता कम कर टिकाऊ कृषि व्यवस्था स्थापित करने के लिए नेचुरल फार्मिंग पर विशेष जोर दे रही है।

    बुंदेलखंड में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गो-आधारित प्राकृतिक खेती
    योगी सरकार ने बुंदेलखंड के सभी जनपदों झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र पर गो-आधारित प्राकृतिक खेती का विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर योगी सरकार कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

    योगी सरकार के फोकस में कम लागत, ज्यादा लाभ वाले कृषि मॉडल
    जीवामृत और घनजीवामृत के प्रयोग से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा। योगी सरकार का फोकस 'कम लागत, ज्यादा लाभ' वाले कृषि मॉडल पर है।

    कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए वरदान
    गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की संरचना सुधरती है और जलधारण क्षमता बढ़ती है। बुंदेलखंड के साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह पहल खेती को अधिक टिकाऊ बनाएगी। यह कदम क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

    प्रशिक्षण से किसानों का सशक्तिकरण
    योगी सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। इससे प्राकृतिक कृषि प्रणाली को मुख्यधारा में लाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है।

    स्वास्थ्य, पर्यावरण और आय पर सकारात्मक असर
    प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली के प्रसार से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की दूरदर्शी नीति के चलते उत्तर प्रदेश प्राकृतिक खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें बुंदेलखंड परिवर्तन का अग्रदूत बनकर उभर रहा है।

  • नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र

    उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार

    एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

    नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है। 

    डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। 

    ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम

    वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है।

    तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त

    एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है।

    उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा

    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है।

    नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन
    वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्य
    म से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है।

    बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव

    प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।