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  • SIR के दौरान छूटे वोटरों के लिए बड़ा अपडेट, दिल्ली में विशेष कैंप; 30 सितंबर तक नाम जोड़ने का मौका

    SIR के दौरान छूटे वोटरों के लिए बड़ा अपडेट, दिल्ली में विशेष कैंप; 30 सितंबर तक नाम जोड़ने का मौका

     नई दिल्ली
     दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। दिल्ली के 13 जिलों में ये शिविर 23 और 24 सितंबर को शाम पांच से रात नौ बजे तक डयूसिब के रैन बसेरों और दूसरे चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे।

    ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों तक पहुंचने के लिए उनके साथ काम करने वाले एनजीओ की मदद ली जाएगी। शिखिर में बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहचान, पते और जरूरी दस्तावेज देने में कई बार परेशानी होती है। बेघर लोगों के पास स्थायी पता, पारिवारिक रिकॉर्ड या दूसरे जरूरी दस्तावेज नहीं होने से उनकी जानकारी सत्यापित करने में भी दिक्कत आती है।

    अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि जो व्यक्ति किसी इलाके का सामान्य निवासी है, उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों को चुनाव आयोग के मैनुअल ऑफ इलेक्ट्रोरल रोल्स-2023 के मुताबिक इन आवेदनों पर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन फार्म जमा करने को प्रोत्साहित करने के साथ आवेदकों से फिजिकल फार्म भी लेने को कहा गया है।

    गौरतलब है कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिल्ली में 97,53,577 मतदाता हैं। इनमें 49,88,993 पुरुष और 47,64,137 महिला वोटर हैं। वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची में 1,55,24,858 वोटर थे। ड्राफ्ट सूची में थर्ड जेंडर वोटरों की संख्या भी 1,261 से घटकर 447 रह गई है। ड्राफ्ट सूची से छूटे पात्र मतदाता 30 सितंबर तक फार्म छह के जरिए अपना नाम जोड़ने के लिए दावा कर सकते हैं।

    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक
    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को जारी होगी। इसके अलावा 20 और 27 सितंबर को दिल्ली के सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 10 से शाम पांच बजे तक सामान्य विशेष शिविर लगाए जाएंगे। यहां मतदाता ड्राफ्ट सूची चेक करने, फार्म जमा करने और आवेदन भरने में मदद ले सकेंगे।

     

  • SIR की अंतिम तारीख 15 सितंबर, पात्र युवा जल्द भरें Form-6; 4.54 लाख आवेदन मिले

    SIR की अंतिम तारीख 15 सितंबर, पात्र युवा जल्द भरें Form-6; 4.54 लाख आवेदन मिले

    रांची
     राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 15 सितंबर को दावा-आपत्ति चरण पूरा हो जाएगा।

    इसके बाद मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 नहीं लिया जाएगा। पूरे राज्य में शनिवार तक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए कुल 4,54,189 आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं।

    वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से कुल 5,302 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मतदाता सूची में नाम, पता आदि में संशोधन के लिए कुल 2,88,090 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। 15 सितंबर के बाद इन आवेदनों का निष्पादन शुरू होगा

    राज्य के कुल 31,892 मतदान केंद्रों में से अभी भी 75 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पर एक भी फॉर्म-6 मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है।

    वहीं, 5,591 मतदान केंद्रों पर महज एक से पांच की संख्या में ही ऐसे आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुल 8,618 मतदान केंद्रों पर छह से 10, 11,329 पर 11 से 20 की संख्या में ही फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। इसी तरह, 4,076 मतदान केंद्रों पर 21 से 30 तथा 2,203 मतदान केंद्रों पर 30 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

    रांची में सर्वाधिक 62 मतदान केंद्र, जहां एक भी फॉर्म-6 नहीं मिला
    पूरे राज्य में जिन 75 मतदान केंद्रों पर एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है, उनमें 62 केंद्र सिर्फ रांची के हैं। इसके अलावा देवघर, गोड्डा, हजारीबाग, धनबाद तथा गुमला में ऐसे महज एक-एक केंद्र ही है।

    साहिबगंज में ऐसे तीन तथा दुमका में चार केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। अन्य जिलों में ऐसा कोई मतदान केंद्र नहीं है, जहां एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है।

    विधानसभावार स्थिति की बात करें तो कांके विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 52 मतदान केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की युवाओं से अपील
    राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों विशेषकर युवाओं से अनुरोध किया है कि जो अभी भी मतदाता सूची के ड्राफ्ट सूची में सम्मिलित नहीं हैं, वे ईसीनेट अथवा बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र अवश्य भरें।

    वैसे सभी पात्र भारतीय नागरिक जो अर्हता तिथि एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे कर चुके हैं वे 15 सितंबर तक अवश्य फॉर्म 6 भरकर अपना नाम एसआईआर की मतदाता सूची में जुड़वाना सुनिश्चित करें।

    क्यों महत्वपूर्ण है एसआईआर से मतदाता सूची में पंजीकरण
    एसआईआर द्वारा बने मतदाता सूची को स्थायी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रहता है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, वर्तमान में अर्हता तिथि को 18 वर्ष पूरे किए हुए मतदाताओं द्वारा यदि फॉर्म 6 भरकर नहीं दिया जाएगा तो वर्तमान एसआईआर की मतदाता सूची में उनका नाम सम्मिलित नहीं किया जा सकेगा।

    उन्होंने कहा जिस प्रकार वर्तमान एसआईआर में वर्ष 2003 के एसआईआर के दस्तावेज से मैपिंग कर मतदाताओं और उनके बेटा या बेटी को अन्य दस्तावेज में छूट प्राप्त हो रही है। उसी प्रकार आने वाले भविष्य में बच्चों को इसका लाभ प्राप्त होगा।

  • न पढ़ाने और न SIR करने वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज, निर्वाचन अधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

    न पढ़ाने और न SIR करने वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज, निर्वाचन अधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

    रांची
     मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को इसमें लापरवाही महंगी पड़ेगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्त सभी शिक्षकों की उपस्थिति तथा एसआइआर के कार्यों में उनकी पूरी सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा है।

    साथ ही इसमें रुचि नहीं लेने तथा जानबूझकर लापरवाही बरतनेवाले शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश सभी निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों को दिए है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों एवं सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि बच्चों के पठन-पाठन में अनावश्यक व्यवधान नहीं होना चाहिए।

    साथ ही एसआइआर की प्रक्रिया भी निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाना आवश्यक है। दोनों महत्वपूर्ण दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उपलब्ध मानव संसाधन का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग किया जाना आवश्यक है।

    इसलिए शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार ही एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्ति की जाए। साथ ही प्रतिनियुक्त शिक्षकों के समय एवं सेवाओं का पूर्ण एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अतिरिक्त शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के भी निर्देश दिए हैं।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त शिक्षकों के लिए प्रत्येक दिन रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने के भी निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षक प्रतिनियुक्ति अवधि में निर्धारित निर्वाचन कार्य का वास्तविक रूप से निर्वहन कर रहे हैं अथवा नहीं।

    उन्होंने यह भी कहा है कि यदि कोई शिक्षक एसआईआर के लिए विधिवत प्रतिनियुक्त किए जाने के बावजूद निर्धारित कार्य का निष्पादन नहीं करता है, कार्य के प्रति अपेक्षित रुचि नहीं लेता है अथवा जानबूझकर कार्य में लापरवाही करता है, तो तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए उसके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए।

    उन्होंने सभी जिलों में प्रतिनियुक्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की सूची विधानसभा क्षेत्रवार तैयार कर दिनांक 16 सितंबर शाम पांच बजे तक उपलब्ध कराने को भी कहा है।

    कई शिक्षक न तो पढ़ा रहे और न ही SIR का कार्य कर रहे
    दरअसल, एसआईआर में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी तथा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह के बीच विमर्श हुआ था।

    इसमें शिक्षा सचिव ने उन्हें अवगत कराया कि विभिन्न विद्यालयों में कुछ शिक्षक मतदाता सूची का एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्ति के नाम पर विद्यालय में नियमित शिक्षण कार्य नहीं कर रहे हैं और अनधिकृत रुप से अनुपस्थित हैं। इस कारण विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा है।

     

  • मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में राहत, जन्म और पारिवारिक संबंध के लिए दूसरे राज्य के दस्तावेज मान्य

    मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में राहत, जन्म और पारिवारिक संबंध के लिए दूसरे राज्य के दस्तावेज मान्य

     रांची
     यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है।

    उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें।

    उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

     

  • 1-5 फार्म-6 वाले बूथों पर विशेष निगरानी, युवा मतदाताओं के पंजीकरण में तेजी के निर्देश

    1-5 फार्म-6 वाले बूथों पर विशेष निगरानी, युवा मतदाताओं के पंजीकरण में तेजी के निर्देश

    रांची
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बुधवार को सभी उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर एसआइआर के तहत दावा-आपत्ति एवं सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण तथा मतदाता सेवाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा की।

    उन्होंने सभी कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान अनावश्यक भीड़ न लगने दें। एक साथ अधिक लोगों को बुलाने की जगह टोकन सिस्टम के माध्यम से क्रमवार सुनवाई कराई जाए।

    प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर दिया जाए तथा उपलब्ध दस्तावेज एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को लंबित मामलों एवं प्रतिदिन हो रहे निष्पादन की नियमित समीक्षा करें।

    एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने शून्य तथा एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा, ऐसे मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा करते हुए बीएलओ के माध्यम से उन नए एवं युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए, जिनकी आयु एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूर्ण हो रही है, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।

    ऐसे सभी पात्र नागरिकों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 एवं आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। साथ ही साहिबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति किसी अन्य जिले में न हो, इसके लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन एवं निर्वाचन डेटा पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा किसी भी अनियमितता पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारी
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 19 एवं 20 नवंबर को राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारियां अभी से प्रारंभ करने का निर्देश दिया। इसके लिए ईएलसी को-आर्डिनेटर नियुक्त कर स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

    स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर विद्यार्थियों एवं युवा मतदाताओं के बीच ईसीनेट का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा उन्हें उपलब्ध डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने एनवीएसपी पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन तथा ईसीनेट की ‘बुक ए काल’ सुविधा के माध्यम से प्राप्त मतदाताओं की शिकायतों एवं समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर उठे सवाल, 47.7 लाख नाम हटने से मतदाताओं में बढ़ी चिंता

    दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर उठे सवाल, 47.7 लाख नाम हटने से मतदाताओं में बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली
     आपको कब पता चला कि आप मर चुके हैं? 'जन सरोकार' के एक प्रतिनिधि ने 51 साल के कामता प्रसाद से यह सवाल तब पूछा, जब शहर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम के आगे "मृत" लिखा हुआ मिला। यह एक अजीब नजारा था कि एक मरा हुआ आदमी उन लोगों के बीच घूम रहा था जिन्हें शिफ्टेड या एब्सेंट मार्क किया गया था।

    मंगोलपुरी के लोग 'जन सुनवाई' में यह जानने के लिए जमा हुए थे कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ड्राइव के तहत ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद उनके नामों का क्या हुआ। कई लोगों ने, जिन्होंने बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए थे, बताया कि वे यह देखकर हैरान रह गए कि उनके नाम लिस्ट से गायब थे या उनका स्टेटस बदल दिया गया था।

    47.7 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए
    मौजूदा वोटर लिस्ट में शामिल लगभग 1.45 करोड़ वोटरों में से करीब 47.7 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए थे। इसके पांच दिन बाद, 4 सितंबर तक दिल्ली में 'फॉर्म 6' के तहत 2,28,764 आवेदन मिले हैं। इनमें से सबसे ज्यादा, यानी 23,268 आवेदन नॉर्थ-वेस्ट जिले से आए हैं, क्योंकि लोगों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ा। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम चेक करें। अगर नाम नहीं है, तो फाइनल लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए तय घोषणा-पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ 'फॉर्म 6' जमा करें।

    प्रसाद के लिए, नाम हटाए जाने की बात समझना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि मैं 35 साल से इसी इलाके में रह रहा हूं और दर्जी का काम करता हूं। फिर भी, मेरे चार लोगों के परिवार में सिर्फ़ मेरा ही नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है। ये चिंताएं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस और यूनाइटेड नेशंस इंटरनल जस्टिस काउंसिल के चेयरमैन मदन बी. लोकुर की बात से मेल खाती हैं। उन्होंने कहा था कि असली वोटरों के नाम हटाने से पहले BLOs आसानी से ऐसे मामलों की जांच कर सकते हैं।

    उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर कौन सा दस्तावेज किसी व्यक्ति की चुनावी पहचान तय करता है। "ये सभी दस्तावेज-चाहे आधार हो, PAN हो या EPIC कार्ड – सरकार और भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाते हैं, और इनके होने के बावजूद नाम हटाए जा रहे हैं।

    अपने आधार और EC-जारी EPIC कार्ड लिए खड़े थे
    कई परेशान निवासी अपने आधार और EC-जारी EPIC कार्ड लिए खड़े थे और सोच रहे थे कि इन दस्तावेजों का क्या फायदा, जब उन्हें यह साबित करने में ही मुश्किल हो रही थी कि वे दशकों से उसी इलाके में रह रहे हैं। "अनुपस्थित" (absent) मार्क की गईं 49 साल की लक्ष्मी देवी ने बताया कि BLO उनके घर सिर्फ एक बार आई थीं, जब न तो वह और न ही उनके फायरफाइटर पति घर पर थे। जब हमने BLO को फ़ोन किया, तो उन्होंने कहा कि कोई और रास्ता नहीं है और हमें नए वोटर के तौर पर रजिस्टर करना होगा। लेकिन मैं ऐसा क्यों करूं? मैंने पिछले 27 सालों से वोट दिया है।

    AV बालिगा मेमोरियल ट्रस्ट की वॉलंटियर राम जानकी, जो मंगलवार से घर-घर जा रही हैं, ने बताया कि नाम हटाने के कारणों में "शिफ़्टेड" (दूसरी जगह चले जाना) सबसे आम वजह थी। उन्होंने कहा कि प्रवासी मज़दूर और शादी के बाद दूसरी जगह चली गईं महिलाएँ ज़्यादा मुश्किल में थीं; कुछ को "डुप्लिकेट" बता दिया गया क्योंकि एक दूसरी एंट्री में उनके पिता का नाम और उनके मायके का पता दर्ज था।

    विधवा गुड्डी देवी के लिए फॉर्म भरना ही मुश्किल
    अकेले रहने वाली 71 साल की विधवा गुड्डी देवी के लिए, फॉर्म भरना ही एक मुश्किल काम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि फॉर्म की भाषा समझना मुश्किल था, जबकि अधिकारी लोगों से इसे जल्दी भरने के लिए कह रहे थे। अब उन्हें उस घर से "हमेशा के लिए दूसरी जगह शिफ्ट" हुआ दिखाया गया है, जिसे उन्होंने पिछले 35 सालों से नहीं छोड़ा है।

    बीएलओ को ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी
    'वोटर अधिकार मंच' की प्रतिनिधि कैरिना ने कहा कि कन्फ्यूजन इसलिए और बढ़ गया क्योंकि BLOs को ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी और उन्हें बहुत कम समय में काम पूरा करना था। "जब भी कोई वोटर तय शर्तों पर खरा नहीं उतरता — जैसे उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मेल नहीं खाता, वे घर पर नहीं मिलते, या फ़ॉर्म में कोई गलती होती है — तो समय की कमी के कारण BLOs उनके नाम लिस्ट से काट देते हैं।"

    जब मंगोलपुरी नागरिकों के लिए अपना नाम लिस्ट से हटाए जाने पर सवाल उठाने का पहला सामूहिक मंच बना, तो 'मज़दूर' संगठन के निखिल डे ने चुनाव आयोग से बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की। "यह पूरी प्रक्रिया इतनी ज़्यादा नागरिक-केंद्रित हो गई है कि इस बात का ध्यान ही नहीं रखा गया कि हर कोई इस प्रक्रिया को नहीं समझ सकता; इसलिए लोगों की मदद की जानी चाहिए ताकि कोई भी नागरिक अपने अधिकारों से वंचित न रहे।

  • SIR के बाद झारखंड में वोटर लिस्ट पर बड़ा एक्शन, 27 हजार नाम हटाए गए

    SIR के बाद झारखंड में वोटर लिस्ट पर बड़ा एक्शन, 27 हजार नाम हटाए गए

    रांची 
    झारखंड में एसआईआर को लेकर मैपिंग का काम खत्म होने के बाद प्रारूप वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया गया। प्रारूप मतदाता सूची में शामिल 16,52,203 वोटरों में से 4,45,901 वोटरों के नाम, उम्र, पिता के नाम समेत अन्य तरह की विसंगतियां पाई गई हैं। अब इन वोटरों को जिला निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है। जिन वोटरों को नोटिस भेजा जा रहा है, वह इन गलतियों को सुधारने के लिए दस्तावेज लेकर सुनवाई में शामिल होंगे। आइए जानते हैं चुनाव आयोग ने क्या कहा है।

    जिला निर्वाचन विभाग ने जिले के 50 अधिकारियों को सुनवाई के काम में लगाया है। नगर निगम, जिला प्रशासन से लेकर लगभग सभी सरकारी विभाग के अधिकारी और कर्मी एसआईआर की सुनवाई में लगे हुए हैं। चार-पांच बूथों को मिलाकर एक जगह केंद्र बनाया गया है, वहीं अधिकारी बैठकर सुनवाई कर रहे हैं। लोग वोटर लिस्ट में हुई गलतियों को सुधारने के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक गलती नाम की स्पेलिंग को लेकर है। इससे संबंधित मैट्रिक का प्रमाणपत्र देकर नाम सुधारा जा रहा है। जिनके पास नोटिस पहुंच रहा है, सिर्फ उन्हें अपने दस्तावेज लेकर सुनवाई में शामिल होना है।
    नो मैपिंग की श्रेणी में आनेवाले वोटरों को नोटिस

    भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वैसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, जो मतदाता सूची की मैपिंग प्रक्रिया में नो-मैपिंग की श्रेणी में पाए गए हैं अथवा जिनकी मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों में किसी प्रकार की विसंगति पाई गई है। सुनवाई का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के दावों का नियमानुसार सत्यापन करते हुए मतदाता सूची की शुद्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाताओं को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित 12 मान्य दस्तावेजों में से किसी एक दस्तावेज के माध्यम से अपनी पात्रता प्रमाणित करने का अवसर दिया जा रहा है। दस्तावेजों के परीक्षण एवं आवश्यक सत्यापन के उपरांत पात्र मतदाताओं के नाम एवं विवरण को नियमानुसार मतदाता सूची में सुरक्षित एवं अद्यतन रखने की कार्रवाई की जा रही है।
    गोविंदपुर में 27 हजार वाटरों के नाम हटाए

    गोविंदपुर। गोविंदपुर प्रखंड में 27,301 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे कुल वोटरों की संख्या 2,32,993 से घटकर 2,05,693 रह गई है। 38,954 मतदाताओं के नाम विसंगति सूची में डाले गए हैं। बीडीओ जहीर आलम और सीओ यशवंत कुमार सिन्हा ने बताया कि मृत, स्थायी रूप से शिफ्ट, दोहरी प्रविष्टि वाले या नोटिस पर हस्ताक्षर न करने वाले मतदाताओं के नाम जांच के बाद हटाए गए हैं।

  • Delhi SIR Update: तुगलकाबाद में 48% और ओखला में 45% फॉर्म नहीं हुए जमा, सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका

    Delhi SIR Update: तुगलकाबाद में 48% और ओखला में 45% फॉर्म नहीं हुए जमा, सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका

    नई दिल्ली

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रोसेस पूरा हो चुका है. प्रदेश में करीब 47 लाख मतदाता गैर-हाजिर या मृत कैटेगरी में शामिल किए गए हैं. इसका मतलब ये हुआ कि वे दिल्ली के मतदाता नहीं है. दिल्ली में अब तक 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 299 मतदाता थे. अब तक SIR के तहत 97 लाख 47 हजार 879 का फॉर्म जमा हुआ है. यानी दिल्ली में 67.18 फीसदी मतदाताओं ने अपने फॉर्म जमा कराए हैं। 

    अब अगर SIR के तीसरे चरण यानी 30 जून से 17 अगस्त की प्रक्रिया पर नजर डाली जाए, तो पता चलता है कि दिल्ली में सबसे कम तुगलकाबाद विधानसभा में मतदाताओं ने फॉर्म जमा कराए. यानी इस विधानसभा में महज 52 फीसदी मतदाताओं ने ही फॉर्म जमा किया. बाकी करीब 48 फीसदी गायब पाए गए। 

    वहीं, दूसरे नंबर पर मुस्लिम बहुल विधानसभा ओखला है, जहां 54.66 फीसदी मतदाता ही अपना फॉर्म जमा करा पाए. तीसरे नंबर पर कस्तूरबा नगर और कालकाजी विधानसभा सीटें हैं, जहां 56 फीसदी और 57 फीसदी लोगों ने फॉर्म जमा कराए. यानी दक्षिणी-पूर्व जिले में 15 लाख 57 हजार 289 मतदाता थे जबकि सिर्फ 8 लाख 77 हजार 64 मतदाता ही फॉर्म जमा करा पाए. इसका मतलब, विधानसभा क्षेत्र के सिर्फ 56.32 फीसदी मतदाता ही फॉर्म जमा करा पाए। 

    इन इलाकों में सबसे ज्यादा नाम कटने का खतरा! 
    दिल्ली के ओखला और तुगलकाबाद जैसे इलाकों में बड़ी तादाद में छात्र, कामकाजी लोग और प्रवासी मजदूर रहते हैं. ओखला में बड़ी तादात में जामिया के छात्र किराए पर रहते हैं जबकि तुगलकाबाद में फरीदाबाद बॉर्डर पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर है। 

    जानकारों का कहना है कि इसी के चलते सबसे ज्यादा तुगलकाबाद और ओखला विधानसभा में वोटर्स अपने फॉर्म नहीं जमा पाए. ओखला विधानसभा से अमानतउल्लाह खान विधायक हैं और तुगलकाबाद विधानसभा से सहीराम पहलवान विधायक हैं. गौर करने वाली बात है कि दोनों नेता आम आदमी पार्टी के हैं। 

    दिल्ली में सबसे ज्यादा फॉर्म कहां भरे गए?
    एसआईआर की प्रक्रिया के तहत सबसे ज्यादा मतदाता फॉर्म आउटर नॉर्थ यानी बाहरी उत्तरी क्षेत्र में भरे गए. इस इलाके में 75.68 फीसदी मतदाताओं के फॉर्म जमा हुए. इलाके में कुल 8 लाख 32 हजार 510 रजिस्टर्ड वोटर्स में से 6 लाख 30 हजार 30 मतदाताओं के फॉर्म जमा हुए. बाहरी उत्तरी जिले में नरेला, बवाना और बादली जैसे विधानसभा क्षेत्र हैं. लेकिन दिल्ली में रोहिणी और शरीर बस्ती ऐसी विधानसभाएं हैं, जहां सबसे ज्यादा मतदाओं ने अपने फॉर्म जमा कराए. रोहिणी विधानसभा में 1 लाख 50 हजार 398 मतदाताओं में से 1 लाख 25 हजार 470 लोगों ने फॉर्म जमा कराए. वहीं, दूसरे नंबर पर शरीर बस्ती विधानसभा रही, जहां पर 80 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने फॉर्म जमा कराया। 

  • मतदाता सूची से 99,743 नाम हटे, 30 अगस्त तक आपत्ति दर्ज कराएं

    मतदाता सूची से 99,743 नाम हटे, 30 अगस्त तक आपत्ति दर्ज कराएं

    पंचकूला
    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के आंकड़ों में बड़ा खुलासा हुआ है। पंचकूला विधानसभा क्षेत्र से 65,967 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि कालका विधानसभा से 33,776 नाम विलोपित किए गए हैं। इस प्रकार पूरे जिले में कुल 99,743 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

    इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने के बाद जिले में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा ने जिला में 40 हजार फर्जी मतदाता होने का दावा किया था। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने वर्ष 2024 में चुनाव हारने के बाद न्यायालय में याचिका दाखिल करके भी इसी संख्या का उल्लेख किया था।

    एसआईआर में फर्जी मतदाता होने के दावों से आंकड़ा 25 हजार अधिक है। वहीं 65967 मतदाता कम होने पर पंचकूला नगर निगम के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि मतदाताओं की संख्या औसतन 3 लाख से कम हो गई है। कांग्रेस और इनेलो इस मुद्दे पर अंतिम सूची आने आने पर निर्णय लेगी।

    पंचकूला एवं कालका में नाम हटे
    उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में बताया गया कि यह कार्रवाई भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा किए गए घर-घर सत्यापन के आधार पर की गई है।

    आंकड़ों के अनुसार पंचकूला विधानसभा में 7,907 मृत मतदाता, 34,731 स्थायी रूप से स्थानांतरित, 1,697 डुप्लीकेट प्रविष्टियां, 13,266 लंबे समय से अनुपस्थित तथा 8,366 अन्य कारणों से नाम हटाए गए।

    दूसरी ओर कालका विधानसभा में 7,091 मृत, 11,986 स्थानांतरित, 1,708 डुप्लीकेट, 9,707 अनुपस्थित और 3,284 अन्य श्रेणी के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

    30 अगस्त तक कर सकते हैं दावा
    जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक मतदाता सूची है और 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक कोई भी पात्र नागरिक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है।

    जिनका नाम सूची में नहीं है, वे फार्म-6 भरकर नया वोट बनवा सकते हैं, जबकि नाम, पता या अन्य त्रुटियों के सुधार के लिए फार्म-8 का उपयोग किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होगी।

    जिला उपायुक्त सतपाल शर्मा का कहना है कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की हार्ड कापी और साफ्ट कापी निशुल्क उपलब्ध कराई, ताकि वे सूची का परीक्षण कर समय रहते आवश्यक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकें। नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम मतदाता सूची में अवश्य जांच लें।

  • पलवल मतदाता सूची पुनरीक्षण: 6.08 लाख लोगों ने जमा कराए फार्म

    पलवल मतदाता सूची पुनरीक्षण: 6.08 लाख लोगों ने जमा कराए फार्म

    पलवल
     भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं से फार्म भर कर जमा कराने का काम पूरा हो चुका है। जिले में 85.97 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने फार्म भर कर बीएलओ के पास जमा किए हैं।

    14.03 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने फार्म अभी तक जमा नहीं किए। इसके बाद जिले की राजनीति के समीकरण में काफी बदलाव होने की संभावना है। पलवल जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें पलवल, होडल विधानसभा क्षेत्रों पर सत्तारूढ़ भाजपा का कब्जा है और हथीन विधानसभा क्षेत्र से एक मात्र कांग्रेस विधायक मोहम्मद इजराइल हैं। यह कांग्रेस विधायक भी भाजपा के नजदीक जा चुके हैं।

    छह लाख आठ हजार 427 मतदाताओं ने जमा किए फॉर्म
    14.03 प्रतिशत मतदाताओं में ज्यादातर मतदाता ऐसे हैं जो किसी अन्य स्थान पर चले गए हैं या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है। इन मतदाताओं के बारे में अभी बीएलओ जांच पूरी करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट निर्वाचन एवं पंजीयन अधिकारियों को देंगे। एसआईआर से पहले जिले में कुल मतदाता 07 लाख 07 हजार 729 थी।

    एसआईआर के तहत चलाए गए अभियान के बाद जिले में 99 हजार 302 मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने फार्म जमा नहीं किए। जिले में कुल छह लाख आठ हजार 427 मतदाताओं ने अपने फार्म भर कर बीएलओ के पास जमा कराए हैं।

    31 जुलाई से 30 अगस्त तक दावे व आपत्तियां दर्ज कराने का मिलेगा अवसर
    जिला निर्वाचन अधिकारी डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 31 जुलाई 2026 को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 31 जुलाई से 30 अगस्त तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन संबंधी दावे एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इस दौरान फार्म-6, फार्म-7 और फॉर्म-8 पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने चाहिए।

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची संबंधित मतदान केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित की जाए। जिन मतदाताओं के नाम, जन्म तिथि अथवा अन्य विवरणों में कोई विसंगति पाई जाएगी या जिनका सत्यापन लंबित रहेगा, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस प्राप्त होने पर संबंधित मतदाताओं को भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आगामी 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

    जिला निर्वाचन अधिकारी डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना गणना प्रपत्र जमा कराएं तथा 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या कमी दिखाई दे तो उसे दावे एवं आपत्तियों की अवधि के दौरान समय रहते ठीक करा लें, ताकि अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम सही रूप में दर्ज हो सके।