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  • SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

    SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

     नई दिल्ली

    चुनाव आयोग के मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच देश के 272 नागरिकों और उच्च न्यायपालिका के 42 पूर्व जजों ने एक ओपन लेटर जारी किया है. इस पत्र में चुनाव आयोग का खुलकर समर्थन किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार बेबुनियाद सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए. पूर्व जजों ने विपक्ष के विरोध को'माहौल बनाने की सियासत' करार दिया है। 

    दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखते हुए कहा. 'ये सारा शोर मतदाताओं का नहीं, बल्कि वो राजनीतिक दल मचा रहे हैं जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं। 

    जस्टिस भुइयां के बयान पर रिटायर्ड जजों की आपत्ति
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी. उन्होंने इसे नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली एक मनमानी प्रक्रिया करार दिया था. जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और दूसरे रिटायर्ड जजों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 

    उनका कहना था कि जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी मौजूदा जज को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। 

    इन पूर्व जजों का तर्क है कि कानून के दायरे में रहकर योग्य और अयोग्य मतदाताओं की छंटनी करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है. इस प्रशासनिक प्रक्रिया को 'नागरिकों को दोयम दर्जे का बनाना' कहना किसी भी तरह से संतुलित नजरिया नहीं है। 

    एक तरफ पूर्व जजों का एक बड़ा समूह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसके कानूनी अधिकारों का बचाव कर रहा है. दूसरी तरफ वकीलों के संगठनों (LAFC) ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन कर दिया है। 

    बिना ठोस सबूत के EC पर आरोपों को बताया गलत
    इस बीच, पूर्व जजों के खुले पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. पत्र में बिना किसी ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने पर सवाल उठाए गए हैं। 

    पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार 'तस्कर' या 'समझौतावादी' कहकर बदनाम करने से लोकतंत्र में आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है. 'संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका हनन करना या उन्हें नीचा दिखाना सही नहीं है। 

    SIR का बचाव करते हुए पूर्व जजों ने कहा कि ये पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है. 'भरोसा ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है' और चुनावों को अमान्य ठहराने की ऐसी कोशिशें देश में अशांति और अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं। पत्र के आखिर में राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वो अपनी शिकायतों को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर रखें, न कि सड़कों पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाएं। 

  • SIR पर तेज हुई कार्रवाई, दिल्ली में नोटिस पाने वाले 33 लाख में 13.62 लाख वोटर्स का वेरिफिकेशन पूरा

    SIR पर तेज हुई कार्रवाई, दिल्ली में नोटिस पाने वाले 33 लाख में 13.62 लाख वोटर्स का वेरिफिकेशन पूरा

    नई दिल्ली
     दिल्ली में SIR के दौरान करीब 33 लाख वोटर्स को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें नो-मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़े मामलों का डॉक्यूमेंट के आधार पर वेरिफिकेशन किया जा रहा है। बुधवार तक 13,62,162 मामलों का वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। सीईओ ऑफिस के मुताबिक, बीएलओ नोटिस वाले वोटर्स के घर जाकर जरूरी डॉक्यूमेंट्स ले रहे हैं। उन्हें वेरिफिकेशन के लिए अलग से ऑफिस में सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं।

    सीईओ दिल्ली ने बुधवार को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, ईआरओ और एईआरओ के साथ नोटिस और क्लेम-ऑब्जेक्शन के निपटारे की प्रोग्रेस की समीक्षा की। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी एलिजिबल वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने से छूट न जाए। एसआईआर के तहत सभी नोटिस, क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा 30 नवंबर तक किया जाना है। नई दिल्ली जैसी विधानसभा में नोटिस के निस्तारण का काम लगभग पूरा हो चुका है। मटियाला, विकासपुरी, बुराड़ी, करावल नगर, किराड़ी, बदरपुर जैसी विधानसभाओं में अधिक वोटर्स हैं और यहां थोड़ा अधिक समय लग रहा है।

    9 और 11 अक्टूबर को पोलिंग स्टेशन पर स्पेशल कैंप, भर सकेंगे फॉर्म-6
    वहीं, वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने से छूट गए एलिजिबल लोगों के लिए 9 और 11 अक्टूबर को दिल्ली के सभी पोलिंग स्टेशन पर स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। इनमें लोग फॉर्म-6 भरकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकेंगे। इससे पहले 7 और 8 अक्टूबर को अलग-अलग कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में भी स्पेशल कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंप में बीएलओ स्टूडेंट्स को फॉर्म भरने में मदद करने के साथ एसआईआर से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं। हाल ही में जिन कॉलोनियों के डिमोलिशन के बाद लोग दूसरी जगह शिफ्ट हुए हैं, उनके लिए भी स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। ऐसे लोग अपने नए पते वाले इलाके में कैंप में जाकर नाम जुड़वा सकेंगे।

    • 33 लाख वोटर्स (करीब) को दिल्ली में जारी किए गए हैं SIR के नोटिस
    • बीएलओ नोटिस पाने वाले के घर जाकर जरूरी डॉक्यूमेंट्स ले रहे हैं

    SIR के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का मार्च, CEO को सौंपा ज्ञापन
    SIR को लेकर इंडिया ब्लॉक के दिल्ली के घटक दलों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया। गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कश्मीरी गेट से विरोध मार्च निकाला और दिल्ली के CEO अशोक कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसप्रदर्शन में कांग्रेस, RJD, CPI, CPM, CPI (ML), RSP, AIFB और TMC समेत INDIA ब्लॉक के घटक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से अनिल भारद्वाज और हारून युसूफ, CPM के अनुराग सक्सेना और सुबीर बनर्जी, समेत कई नेता मौजूद रहे।

     

  • हरियाणा में SIR को लेकर विशेष अभियान तेज, पहले दिन 28 हजार मामलों का समाधान

    हरियाणा में SIR को लेकर विशेष अभियान तेज, पहले दिन 28 हजार मामलों का समाधान

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से संबंधित नोटिस और सुनवाई मामलों के समयबद्ध निपटारे को लेकर निर्वाचन आयोग ने विशेष शिविर शुरू किए हैं। पहले दिन बुधवार को 28 हजार मामले निपटाए गए।

    वीरवार और शुक्रवार को भी विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधि घर-घर जाकर भी दस्तावेज जुटाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं से निर्धारित तिथि पर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने की अपील की है। निर्वाचन आयोग की ओर से कुल 44 लाख 91 हजार 923 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें तीन लाख 15 हजार 173 के सुनवाई मामले लंबित हैं।

    आयोग द्वारा लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को लंबित सुनवाई मामलों के शीघ्र निस्तारण, प्रभावी मानिटरिंग व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस की सुनवाई समय पर समाप्त करने के लिए आयोग के प्रतिनिधि ऐसे मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर व घर-घर सर्वे के दौरान दस्तावेज प्राप्त करेंगे, जहां पर नोटिस प्राप्त होने पर अभी तक संबंधित मतदाताओं द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कराए गए हैं। सभी योग्य मतदाताओं के नाम छह नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल होंगे।

  • SIR अभियान में नए वोटरों की तलाश तेज, BLO को मिला घर-घर सत्यापन और नाम जोड़ने का टारगेट

    SIR अभियान में नए वोटरों की तलाश तेज, BLO को मिला घर-घर सत्यापन और नाम जोड़ने का टारगेट

    लखनऊ
    एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। छूटे हुए मतदाताओं, महिलाओं और पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाएंगे। बीएलओ घर-घर जाकर लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का काम करेंगे। यही नहीं बूथ पर भी मतदाताओं को फॉर्म-6 उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से सभी जिलों की निगरानी होगी। बीएलओ के लिए टारगेट भी तय किया गया है।

    एक महीने तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। यूपी में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से पूर्व की और उसके बाद जारी मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम का मिलान भी किया जाएगा। बीएलओ को एक सप्ताह में कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है।

    बूथ पर भी लगेंगे विशेष शिविर
    घर-घर संपर्क के दौरान छूटे हुए मतदाताओं व पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं के भी फॉर्म-6 भरवाए जाएंगे। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी के बाद ससुराल वाले क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ा है, उनका नाम भी जुड़वाया जाएगा। नए भरवाए जा रहे फॉर्मों को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों से साझा किया जाएगा। वहीं बूथ पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। आश्रय स्थलों, श्रमिक कालोनियों में रहने वाले, बेघर व वंचित वर्ग के पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने को विशेष कैंप लगाए जाएंगे। एक महीने में सभी बीएलओ अपने-अपने क्षेत्र में यह कार्य पूरा करेंगे।

    डिजिटल ऐप से होगी रियल टाइम ट्रैकिंग
    अभियान को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा भी लेने का फैसला किया है। बीएलओ अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर सत्यापन के दौरान भरे गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की ऑनलाइन एंट्री करेंगे। इसकी सीधे राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग होती रहेगी। इसके साथ ही जो नागरिक बीएलओ के पहुंचने से पहले ही आवेदन करना चाहते हैं, वे वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप से भी डिजिटल फॉर्म जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन भी बीएलओ द्वारा घर जाकर ही किया जाएगा।

    लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पुनरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी क्षेत्र में पात्र मतदाताओं या नवविवाहिताओं के नाम बड़े पैमाने पर छूटने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित बीएलओ और सुपरवाइजर के खिलाफ जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले प्रदेश का कोई भी नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

  • वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, झारखंड SIR की डेडलाइन 30 सितंबर

    वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, झारखंड SIR की डेडलाइन 30 सितंबर

    रांची
    झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम से संबंधित आपत्ति दर्ज कराने, नाम विलोपित कराने, प्रविष्टियों में सुधार अथवा स्थानांतरण के लिए अब सिर्फ सात दिन शेष है. दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने पात्र भारतीय नागरिकों से अंतिम तिथि का इंतजार नहीं करने और निर्धारित समय के भीतर संबंधित प्रपत्र जमा करने की अपील की है.

    ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 भरें
    रविकुमार ने कहा कि जिन पात्र नागरिकों का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे फॉर्म-6 एवं आवश्यक घोषणा पत्र 30 सितंबर तक इसीआइनेट के माध्यम से अथवा संबंधित बीएलओ के सहयोग से जमा करें, उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ऐसे युवाओं को समय रहते मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिये आवेदन करना चाहिए, जो पात्र होने के बावजूद ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है.

    फॉर्म-7 पर जांच और सुनवाई के बाद ही होगा फैसला
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 के माध्यम से दर्ज आपत्तियों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच एवं सुनवाई के बाद ही निर्णय लिया जायेगा. केवल फॉर्म 7 जमा कर देने मात्र से किसी मतदाता का नाम स्वतः विलीपित नहीं होगा. वहीं, मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधारअथवा निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम स्थानांतरित कराने के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है.

    राजनीतिक दलों और बीएलए से सहयोग की अपील
    रवि कुमार ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, बीएलए, बीएलओ तथा निर्वाचन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कर्मियों से भी अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के पात्र नागरिकों को समय-सीमा के भीतर आवेदन करने के लिए जागरूक करें. नागरिक अपने नाम और अन्य विवरण की जांच कर लें तथा आवश्यकता होने पर संबंधित प्रपत्र 30 सितंबर से पहले जमा कर दें. इसके बाद दावा-आपत्ति के लिए अतिरिक्त समय नहीं बढ़ाया जा सकेगा.

  • चंडीगढ़ की वोटर लिस्ट में बड़ी कमी, 1,99,596 मतदाता घटने पर उठे सवाल

    चंडीगढ़ की वोटर लिस्ट में बड़ी कमी, 1,99,596 मतदाता घटने पर उठे सवाल

    चंडीगढ़.

    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 1,99,596 मतदाताओं की संख्या कम होना अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) प्रेरणा पुरी को पत्र लिखकर एसआईआर पर सवाल उठाए हैं।

    साथ हीवार्डवार और मतदातावार पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि एक जून 2024 से 22 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ की मतदाता सूची में 1,99,596 मतदाताओं की कमी आई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होने के बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन मतदाताओं के नाम किस कारण से हटाए गए हैं।

    तीन स्तर पर मांगी जानकारी
    सांसद ने सीईओ से एक जून 2024 से अब तक हटाए गए अथवा अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए सभी मतदाताओं की वार्डवार पूरी जानकारी मांगी है। इसमें मतदाता का नाम, वार्ड और बूथ नंबर, ईपीआइसी नंबर, नाम हटाए जाने की तारीख और दर्ज कारण शामिल करने को कहा गया है।

    एसआईआर के बाद 1.99 लाख मतदाता घटे
    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर मतदाता संख्या में आई कमी पर सवाल उठाए हैं। तिवारी के अनुसार, 1 जून 2024 से 22 सितंबर 2026 के बीच चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या 1,99,596 घट गई, जो कुल मतदाताओं का 30.26 प्रतिशत है। उन्होंने इतनी बड़ी कमी के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है।

    डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं का ब्योरा मांगा
    तिवारी ने कहा कि हटाए गए नामों में कितने डुप्लीकेट, कितने स्थानांतरित और कितने अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से श्रेणीवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि हटाए गए मतदाता डुप्लीकेट थे तो अब किस स्थान पर पंजीकृत हैं। वहीं, यदि कोई फर्जी या घोस्ट वोटर था तो उसके नाम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    दस्तावेज नहीं होने पर नाम हटने का सवाल
    तिवारी ने यह भी पूछा कि कहीं निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब या अन्य मतदाताओं के नाम तो नहीं हटे। उन्होंने कहा कि हटाए गए मतदाताओं के नाम, पते और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट होगी। एसआईआर का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। 

  • SIR नोटिस से घबराने की जरूरत नहीं! नाम में छोटी गलती 10 दिन में सुधरेगी, बाकी मामलों में दस्तावेज से होगा समाधान

    SIR नोटिस से घबराने की जरूरत नहीं! नाम में छोटी गलती 10 दिन में सुधरेगी, बाकी मामलों में दस्तावेज से होगा समाधान

    नई दिल्ली
    दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत 33 लाख वोटरों को थमाए गए नोटिस के मामले में अब मतदाताओं को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। अगर वह भारत का नागरिक है, 18 साल का है और जिंदा है, तो निश्चिंत रहिए। हर सूरत में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने 20 दिन का एक मास्टर प्लान बनाया है। जिसमें इस दौरान वोटरों को दिए गए सभी तरह के नोटिसों का समाधान कर दिया जाएगा।

    • चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस समस्या को जल्द से जल्द समाधान करने के लिए दो अलग-अलग सिस्टम बनाए गए हैं।
    • पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है।
    • उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह इसमें बहुत अधिक गहराई में ना जाते हुए बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें।
    • उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब इस नाम के पीछे सरनेम में अग्रवाल, शर्मा, कुमार, झा, चटर्जी या बनर्जी या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो ऐसे मामलों को बहुत अधिक गंभीर ना माना जाए।
    • अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए।
    • ऐसा नहीं कि छोटी-छोटी क्लेरिकल मिस्टेक या फिर कमियों के रहते हुए वोटर को परेशान किया जाए।
    • इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा। जिसमें बीएलओ और चुनाव आयोग को बहुत कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।

    पुराने SIR से मैपिंग न होने पर भी दस्तावेज के आधार पर जुड़ सकेगा नाम
    बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी जो हियरिंग चल रही हैं। उनमें भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है।

    जुड़वा बच्चों और कम उम्र के माता-पिता वाले मामलों में बीएलओ खुद करें पुष्टि
    ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम डेट आ रही है। ऐसे में अगर वोटर कहता है कि यह उनके जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था।

    समस्या दूर होते ही वोटरों को मैसेज, ऑनलाइन भी अपडेट होगी जानकारी
    इसके अलावा इस अभियान में एक और काम करने की कोशिश की जा रही है। वह यह कि जिस-जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मैसेज भेजने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि उस वोटर को पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की कोई जरूरत नहीं है और उसको मिले नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।

  • चुनाव आयोग में SIR को लेकर घमासान? 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर EC ने बताया सच

    चुनाव आयोग में SIR को लेकर घमासान? 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर EC ने बताया सच

     नई दिल्ली
    मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग के सूत्रों ने सफाई दी है. ECI सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं. लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता। 

    सूत्रों ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने टिप्पणियां की थीं. इन पर फैसले से पहले विचार भी किया गया. लेकिन किसी भी चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक डिसेंट दर्ज नहीं कराया. आयोग के मुताबिक, जिन आदेशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। 

    क्या है ऑब्जर्वेशन और डिसेंट में फर्क?
    चुनाव आयोग के मुताबिक, किसी मामले पर चर्चा के दौरान आयुक्त का सवाल उठाना या अपनी राय रखना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. तीन सदस्यीय आयोग में सभी चुनाव आयुक्तों की बराबर भूमिका होती है. अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हो तो बहुमत की राय के आधार पर फैसला होता है। 

    हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने कुछ कदमों को बिना उनकी जानकारी के उठाए जाने पर सवाल भी उठाए थे। 

    पहले भी चुनाव आयोग में दर्ज हो चुका है डिसेंट
    चुनाव आयोग के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी आयुक्त ने बहुमत की राय से अलग रुख अपनाया हो. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों समेत आचार संहिता से जुड़ी कुछ शिकायतों पर अपने सहयोगियों से अलग राय रखी थी। 

    2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने सोनिया गांधी की कथित अयोग्यता से जुड़े मामले में चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और नवीन चावला से अलग राय रखी थी. इन मामलों में आयोग के भीतर अलग राय दर्ज करने की व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ था। 

    पहले सिर्फ एक ही चुनाव आयुक्त होता था
    आज तीन सदस्यीय चुनाव आयोग है, लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था. 1950 में चुनाव आयोग के गठन के समय यह सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त वाला एक सदस्यीय निकाय था. 1950 से 1989 तक आयोग इसी व्यवस्था के तहत काम करता रहा। 

    1989 में पहली बार दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए, लेकिन उनकी नियुक्ति थोड़े समय के लिए रही. 1990 में आयोग फिर एक सदस्यीय हो गया. इसके बाद 1993 में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के साथ तीन सदस्यीय व्यवस्था स्थायी हो गई। 

    इसलिए मौजूदा विवाद में अहम सवाल यही है कि चुनाव आयुक्तों की आंतरिक टिप्पणियों को किस तरह समझा जाए. ECI सूत्र इन्हें सामान्य डेलिबरेशन का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि प्रकाशित रिपोर्ट में इन्हें रिकॉर्ड पर दर्ज आपत्तियों के रूप में पेश किया गया है। 

    आयोग के सूत्रों ने सिस्टम में किसी तरह के केंद्रीय हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि पूरे देश के लिए एक ही सिस्टम है और सभी ईआरओ उसी सिस्टम में डेटा फीड करते हैं. अब तक किसी ने इसको लेकर शिकायत नहीं की है. आयोग के सूत्रों का यह भी कहना है कि अधिकारी भी अलग-अलग विचारधाराओं से प्रभावित हो सकते हैं। 

    आयोग के सूत्रों के मुताबिक, मतभेद लोकतंत्र का आधार हैं और यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. उनका कहना है कि पिछले 14 महीनों में ऐसे सैकड़ों मौके आए, जब शुरुआत में मतभेद होने के बावजूद आखिर में सर्वसम्मति से राय बनी. इस दौरान सुधार के लिए सैकड़ों कदम भी उठाए गए। 

    चुनाव आयुक्तों पर दावों को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया
    चुनाव आयुक्तों को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि अगर दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई है तो राज्यसभा में पहले से लंबित प्रस्ताव को अब सामने लाना चाहिए. उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। 
    वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए हैं. सिब्बल ने आरोप लगाया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। 

    उन्होंने एसआईआर को रोकने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग की. विपक्ष के अन्य नेताओं, जिनमें कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और जयराम रमेश, आप नेता सौरभ भारद्वाज और शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत शामिल हैं, ने भी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 

    पूर्व चुनाव आयुक्त दावों पर क्या बोले?
    पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा, "मतभेद कहीं भी हो सकते हैं, लेकिन इलेक्शन कमिशन की मीटिंग के दौरान इन मतभेदों को एक-दूसरे को समझकर और समझाकर दूर किया जाता है. इसी तरह सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते रहे हैं. लेकिन यह पहली बार हुआ है कि पिछले दस महीनों में 14 बार दो इलेक्शन कमिशनरों ने विरोध किया, फिर भी फैसले होते गए. कानूनन देखा जाए तो किसी भी एक इलेक्शन कमिशनर के पास अपने स्तर पर कोई पावर नहीं है. इलेक्शन कमिशन में तीनों लोग बैठते हैं, मीटिंग करते हैं और मिलकर फैसले लेते हैं. यही व्यवस्था शक्तिशाली है. किसी एक व्यक्ति को एडमिनिस्ट्रेटिव पावर के नाम पर कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं दिया गया है। 

  • चंडीगढ़ में SIR के बाद बदलेगी वोटर लिस्ट, 56 हजार से अधिक नामों पर सवाल

    चंडीगढ़ में SIR के बाद बदलेगी वोटर लिस्ट, 56 हजार से अधिक नामों पर सवाल

    चंडीगढ़
     विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रेरणा पुरी मंगलवार को प्रेस वार्ता करेंगी।दोपहर 1:15 बजे सेक्टर-18 स्थित निर्वाचन विभाग के नगर योजना भवन के सी-विंग के भूतल पर होने वाली प्रेस वार्ता में SIR की पूरी प्रक्रिया, अब तक हुए सत्यापन और मतदाता सूची में हुए बदलाव की जानकारी दी जाएगी।

    चंडीगढ़ में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई है। पुनरीक्षण से पहले शहर में 5,16,427 मतदाता दर्ज थे, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या करीब 4,60,109 रह गई है। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

    किस वार्ड में कितने नाम घटे, आज मिल सकती है जानकारी
    प्रेस वार्ता में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि SIR के दौरान किस वार्ड में कितने नाम हटे, कितने नाम बरकरार रहे और कितने नए मतदाता जोड़े गए। डुप्लीकेट, मृत और दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नामों के सत्यापन के साथ दावे और आपत्तियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सामने आ सकती है।

    निगम चुनाव से पहले अहम सूची
    दिसंबर में प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पहले अंतिम मतदाता सूची महत्वपूर्ण होगी। चंडीगढ़ में 35 वार्डों में चुनाव होना है। ऐसे में वार्डवार मतदाता संख्या में हुए बदलाव से चुनावी समीकरण पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

    2024 के लोकसभा चुनाव में शहर में 6,59,696 मतदाता थे। इसके मुकाबले मौजूदा आंकड़ा करीब दो लाख कम है। मंगलवार को जारी होने वाली अंतिम सूची से ही यह साफ होगा कि वास्तविक कटौती कितनी हुई है।

    3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु : विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान ये भी सामने आया कि 3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 43,878 मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं. इसके अलावा 12,886 मतदाता ऐसे मिले, जो सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए और उनके एन्यूमरेशन फॉर्म निर्वाचन विभाग को प्राप्त नहीं हुए। 

    मतदाता सूची को सटीक बनाना लक्ष्य : निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में केवल पात्र और सत्यापित मतदाताओं के नाम ही सूची में शामिल हों। 

  • SIR के दौरान छूटे वोटरों के लिए बड़ा अपडेट, दिल्ली में विशेष कैंप; 30 सितंबर तक नाम जोड़ने का मौका

    SIR के दौरान छूटे वोटरों के लिए बड़ा अपडेट, दिल्ली में विशेष कैंप; 30 सितंबर तक नाम जोड़ने का मौका

     नई दिल्ली
     दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। दिल्ली के 13 जिलों में ये शिविर 23 और 24 सितंबर को शाम पांच से रात नौ बजे तक डयूसिब के रैन बसेरों और दूसरे चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे।

    ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों तक पहुंचने के लिए उनके साथ काम करने वाले एनजीओ की मदद ली जाएगी। शिखिर में बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहचान, पते और जरूरी दस्तावेज देने में कई बार परेशानी होती है। बेघर लोगों के पास स्थायी पता, पारिवारिक रिकॉर्ड या दूसरे जरूरी दस्तावेज नहीं होने से उनकी जानकारी सत्यापित करने में भी दिक्कत आती है।

    अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि जो व्यक्ति किसी इलाके का सामान्य निवासी है, उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों को चुनाव आयोग के मैनुअल ऑफ इलेक्ट्रोरल रोल्स-2023 के मुताबिक इन आवेदनों पर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन फार्म जमा करने को प्रोत्साहित करने के साथ आवेदकों से फिजिकल फार्म भी लेने को कहा गया है।

    गौरतलब है कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिल्ली में 97,53,577 मतदाता हैं। इनमें 49,88,993 पुरुष और 47,64,137 महिला वोटर हैं। वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची में 1,55,24,858 वोटर थे। ड्राफ्ट सूची में थर्ड जेंडर वोटरों की संख्या भी 1,261 से घटकर 447 रह गई है। ड्राफ्ट सूची से छूटे पात्र मतदाता 30 सितंबर तक फार्म छह के जरिए अपना नाम जोड़ने के लिए दावा कर सकते हैं।

    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक
    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को जारी होगी। इसके अलावा 20 और 27 सितंबर को दिल्ली के सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 10 से शाम पांच बजे तक सामान्य विशेष शिविर लगाए जाएंगे। यहां मतदाता ड्राफ्ट सूची चेक करने, फार्म जमा करने और आवेदन भरने में मदद ले सकेंगे।