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  • भोपाल में 3 अक्टूबर को अमित शाह का दौरा, MP को मिलेंगी कई बड़ी सौगातें; जानें कार्यक्रम

    भोपाल में 3 अक्टूबर को अमित शाह का दौरा, MP को मिलेंगी कई बड़ी सौगातें; जानें कार्यक्रम

    भोपाल 
    केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह तीन अक्टूबर को भोपाल दौरे पर होंगे. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह प्रदेश को कई सौगातें देने भोपाल आ रहे हैं. मध्यप्रदेश में अक्टूबर महीने की शुरुआत से दिग्गज नेताओं का मध्यप्रदेश में डेरा रहेगा. एक अक्टूबर को राहुल गांधी का बालाघाट दौरा है और उसके ठीक बाद तीन अक्टूबर को केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह भोपाल के दौरे पर होंगे। 

    ये है भोपाल में अमित शाह का पूरा कार्यक्रम
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  मंत्रालय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन के संबंध में मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक कर इस बारे में चर्चा की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कांफ्रेंस द्वारा कलेक्टर, कमिश्नर भोपाल और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियों ने निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शनिवार, 3 अक्टूबर को भेापाल के भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. गोपालक सम्मेलन स्थल पर केंद्रीय मंत्री शाह न्याय संहिता पर केंद्रित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन व अवलोकन करेंगे। 

    केंद्रीय मंत्री शाह इसके बाद राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे. अमित शाह भोपाल बायपास भौरी के पास आईआईएसईआर परिसर का शिलान्यास और परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। 

    मध्यप्रदेश को ये सौगातें देंगे अमित शाह
    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री शाह प्रदेश में दुग्ध संयंत्र, डेयरी प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच लैब की विभिन्न सौगात भी देंगे. इन परियोजनाओं में उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत का डेयरी प्लांट और भोपाल में फर्मेंटेड प्रोडक्ट दूध प्लांट भी शामिल है. इस अवसर पर भोपाल पश्चिमी बायपास का भूमि पूजन भी किया जाएगा. केंद्रीय गृहमंत्री शाह भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ पशुपालकों को बोनस वितरण, गौशालाओं की सहायता के लिए राशि प्रदान करेंगे. साथ ही गोपालक दीदीयों के सम्मान और उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र वितरित किए जाएंगे। 

    करीब ₹3774 करोड़ का यह सड़क प्रोजेक्ट 35.61 किलोमीटर लंबा एक प्रमुख फोर-लेन प्रोजेक्ट है। यह बायपास मंडीदीप के समीप इटायाकलां में भोपाल-जबलपुर मार्ग से शुरू होकर कोलार और रातीबड से होते हुए भोपाल-देवास इंदौर मार्ग पर ग्राम फंदा कलां तक जाएगा। पहले इसकी लंबाई 40.90 किमी रखी गई थी। संशोधित अलाइनमेंट के बाद घटाकर 35.61 किमी कर दी गई।

    भोपाल पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में सर्विस रोड, फ्लाईओवर, बड़े ग्रेड सेपरेटर और एक बड़ा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) शामिल होगा। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रातापानी क्षेत्र के पास विशेष एलिवेटेड रास्ते (वाइल्डलाइफ वायडक्ट) भी बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को इस परियोजना का भूमि पूजन करेंगे।

    35 हजार से ज्यादा गोपालक पहुंचेंगे
    कार्यक्रम में गृह विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग के कार्यों के प्रेजेंटेशन भी होंगे. कार्यक्रम में भोपाल, सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन नर्मदापुरम जिलों के साथ प्रदेश के 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों की भागीदारी रहेगी। 

  • 1 October Rules Change: LPG-बैंकिंग समेत 9 बदलाव लागू, जानें क्या होगा महंगा-क्या बदलेगा

    1 October Rules Change: LPG-बैंकिंग समेत 9 बदलाव लागू, जानें क्या होगा महंगा-क्या बदलेगा

    नई दिल्ली

    हर नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश में बैंकिंग, टैक्स, बचत और रोजमर्रा के खर्चों से जुड़े कई नियमों में बदलाव होता है। 1 अक्टूबर 2026 से आम नागरिकों, निवेशकों, टैक्सपेयर्स और बैंक ग्राहकों को प्रभावित करने वाले कई बड़े बदलाव प्रभावी हो रहे हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा से लेकर एसबीआई के एटीएम नियम, यूपीआई एमडीआर (UPI MDR), एलपीजी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की तारीखों तक जानिए अक्टूबर महीने में लागू होने वाले सभी बड़े वित्तीय बदलावों की पूरी डिटेल।

    1. आरबीआई की एमपीसी बैठक: 7 अक्टूबर को आएगा रेपो रेट पर फैसला
    भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। अगस्त 2026 की समीक्षा के बाद से आरबीआई की रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई है। 7 अक्टूबर को आने वाले ब्याज दरों के फैसले का सीधा असर लोन की EMI (होम लोन, कार लोन) और बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों पर पड़ेगा।

    2. SBI के ATM नियम में बदलाव: फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा घटी
    भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम (ATM) और ADWMs (डिपॉजिट-कम-विड्रॉल मशीन) के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव कर रहा है:

    नए नियम के तहत 1 अक्टूबर 2026 से सैलरी अकाउंट वाले ग्राहक अन्य बैंकों के एटीएम से महीने में केवल 5 बार ही मुफ्त ट्रांजैक्शन (फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल मिलाकर) कर सकेंगे। पहले यह सीमा 10 ट्रांजैक्शन की थी।

    बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खातों(BSBD) के लिए महीने में 4 बार कैश विड्रॉल मुफ्त रहेगा। इसके बाद प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर ₹15 + GST का शुल्क लागू होगा।

    3. इनकम टैक्सपेयर्स को राहत: टैक्स ऑडिट और ITR फाइलिंग की तारीख बढ़ी
    केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को बड़ी राहत दी है:

    टैक्स ऑडिट रिपोर्ट: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है।

    ITR फाइलिंग डेट: टैक्स ऑडिट वाले कारोबारियों और प्रोफेशन्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।

    4. UPI Payments & MDR Rules: ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट पर नया ढांचा
    15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट (व्यापारी) ट्रांजैक्शन के लिए नया UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट(MDR) फ्रेमवर्क लागू किया जा रहा है। यह चार्ज मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम और बैंकों के बीच का मामला है। सामान्य ग्राहकों को यूपीआई पेमेंट करते समय कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले सभी ट्रांसफर और ₹2,000 तक की खरीदारी पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगी।

    5. LPG आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक जरूरी
    सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने वाले घरेलू LPG ग्राहकों के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से जुड़ा नया नियम लागू हो रहा है। रेगुलेटेड रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) और सरकारी सब्सिडी पर सिलेंडर बुक करने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करना अनिवार्य होगा। जिन ग्राहकों की बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, उन्हें गैस सिलिंडर तो मिलेगा, लेकिन उन्हें बिना सब्सिडी वाला मार्केट प्राइस चुकाना होगा।

    6. बल्क डिपॉजिट की दरों के लिए 10 AM का नया नियम
    रिजर्व बैंक का बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों के डिस्क्लोजर (प्रकटीकरण) से जुड़ा नया नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी हो गया है। सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) सहित अन्य बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से शेड्यूल के मुताबिक शेयर करनी होंगी। बैंकों को हर वर्किंग डे सुबह 10:00 बजे (अधिकतम 10:10 AM का ग्रेस टाइम) अपनी बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें सार्वजनिक करनी होंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    7. NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान: TAN की बाध्यता खत्म
    1 अक्टूबर 2026 से किसी नॉन-रेजिडेंट (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय निवासियों और HUF के लिए टैक्स कम्प्लायंस की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है। एनआरआई से अचल संपत्ति खरीदते समय टीडीएस (TDS) काटने के लिए अब अलग से टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर(TAN) लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    खरीदार अब केवल अपने PAN के जरिए ही निर्धारित TDS कटौती, डिपॉजिट और रिपोर्टिंग का काम पूरा कर सकेंगे। (नोट: टीडीएस काटने का नियम जारी रहेगा, सिर्फ प्रोसेस आसान हुआ है)।

    8. NPS में नया फीस स्ट्रक्चर: PoP चार्जेस में बदलाव
    पेंशन फंड नियामक (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और NPS Lite के तहत पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoP) के शुल्क ढांचे में संशोधन किया है। PoP के जरिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले नए सब्सक्राइबर को प्रति परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर(PRAN) ₹200 का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग चार्ज देना होगा। यह फीस सब्सक्राइबर के पेंशन खाते से एक बार में नहीं काटी जाएगी, बल्कि तय दिशानिर्देशों के तहत ली जाएगी।

    9. स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की दरों की समीक्षा
    सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (PPF, NSC, SCSS, सुकन्या समृद्धि योजना, किसान विकास पत्र और पोस्ट ऑफिस एफडी) की ब्याज दरों की समीक्षा कर नई दरों का ऐलान करेगी। जुलाई-सितंबर तिमाही में दरों को यथावत रखा गया था, इसलिए इस बार ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर देश के निवेशकों की निगाहें टिकी हैं।

  • El Nino की चिंता के बीच बड़ा बदलाव, खरीफ-रबी के लिए 373.93 MT अनाज उत्पादन का लक्ष्य-मंत्री चौहान

    El Nino की चिंता के बीच बड़ा बदलाव, खरीफ-रबी के लिए 373.93 MT अनाज उत्पादन का लक्ष्य-मंत्री चौहान

    नई दिल्ली
    सरकार ने अल नीनो की चिंताओं के बीच 2026-27 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन तय किया है। अनाज उत्पादन का कुल लक्ष्य 2025-26 फसल वर्ष में हासिल हुए 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है. लेकिन इस साल तय किया गया लक्ष्य, 2025-26 फसल वर्ष के लिए तय 362 मिलियन टन के लक्ष्य से अभी भी ज्यादा है.
    2026-27 के लिए तय कुल लक्ष्य में से, 2026 खरीफ सीजन के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 196.21 मिलियन टन और रबी फसल सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन है। 

    भारत खरीफ (गर्मी) और रबी (सर्दी) सीजन में अलग-अलग फसलें उगाता है. धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई अभी-अभी खत्म हुई है, जबकि गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। 

    अनाज उत्पादन पर अल नीनो का असर
    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "अल नीनो के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर, 2026-27 के लिए 373.93 मिलियन टन का कुल राष्ट्रीय अनाज उत्पादन लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य शामिल है। 

    उन्होंने यह भी कहा कि अनाज उत्पादन के लक्ष्य पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर और खराब स्थितियों में फसल के पैटर्न को बदलने के लिए राज्यों के साथ बातचीत करके तय किए गए हैं। 

    जहां तक ​​रबी की बुवाई की बात है, मंत्री ने कहा कि योजना बनाते समय अल नीनो की स्थितियों और हाल ही में खत्म हुए खरीफ सीज़न के दौरान कुछ हिस्सों में आई सूखे और बाढ़ जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा जा रहा है। 

    उन्होंने कहा, "हमारा मकसद उन इलाकों में अधिक पानी वाली फसलें न उगाना है जहां बारिश कम हुई है और जहां जलाशय का स्तर और मिट्टी में नमी कम है. इसके बजाय, हम उन इलाकों में दाल और तिलहन जैसी फ़सलें उगाना चाहते हैं. ये लक्ष्य इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं। 

    सूखे के इमरजेंसी हालात पर सरकार में चिंता
    जब उनसे 2026 के आखिर तक अल नीनो के "बहुत मजबूत" होने के ग्लोबल अनुमान के बारे में पूछा गया, तो चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा हालात में उगाई जाने वाली फसलों और उनकी किस्मों पर राज्यों के साथ विस्तार से बातचीत कर रही है। 

    उन्होंने कहा कि बारिश, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी में क्षेत्रीय अंतर के हिसाब से फसल की योजना में बदलाव किया जा रहा है, और जहां भी सूखे जैसे हालात बनेंगे, वहां आपातकालीन उपाय अपनाए जाएंगे। 

    उन्होंने कहा, "हालांकि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है." उन्होंने आगे कहा कि मुश्किलें कुछ खास इलाकों तक ही सीमित हैं। 

    खाद के बारे में चौहान ने कहा कि कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद – कुछ मामलों में तो कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं – खाद की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। 

    उन्होंने कहा, "देश में खाद की कोई कमी नहीं है और रबी सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध रहेगी। 

    राज्यों द्वारा 2026-27 के लिए बताई गई जरूरतों के आधार पर, खाद की कुल जरूरत का अनुमान 380 लाख टन लगाया गया है। 
    मौजूदा शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी ज़्यादा है। 

    अभी-अभी खत्म हुए खरीफ बुवाई सीजन पर मंत्री ने कहा कि अल नीनो की चिंताओं और देश के कुछ हिस्सों में सूखे और बाढ़ के बावजूद खरीफ अनाज के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी। 

    उन्होंने कहा कि सरकार ने अप्रैल में ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी।

    खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी
    कुछ खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, लेकिन कुल बुवाई क्षेत्र मोटे तौर पर पिछले साल के बराबर ही है. उन्होंने कहा कि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, जबकि सूखे की स्थिति आम तौर पर तब मानी जाती है जब संबंधित अवधि में बारिश की कमी 20 प्रतिशत से ज़्यादा हो. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस कमी से उत्पादन पर कोई खास असर पड़ेगा." उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादन के अंतिम आंकड़े जल्द ही जारी किए जाएंगे। 

    खेती के रकबे में सबसे ज्यादा कमी धान की खेती में आई है, जहां खेती का रकबा लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर कम हो गया है. मक्का, सोयाबीन और कपास की खेती के रकबे में भी कमी आई है. वहीं, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर की खेती का रकबा बढ़ा है। 

    मंत्री ने कहा, "इससे पता चलता है कि किसान अब दालों और मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। 

    महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती के रकबे में कमी की सूचना मिली है. इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हुई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है.

    मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर चिंता है.

    उन्होंने कहा, "अब तक मिली जानकारी से कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों (जिसमें रायलसीमा और आसपास के इलाके शामिल हैं), तेलंगाना के कुछ हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों को लेकर चिंता है. राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। 

    राज्य के अनुरोध पर एक केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करेगी। 

  • सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितना बढ़ेगा पैसा? 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर से समझें गणित

    सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितना बढ़ेगा पैसा? 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर से समझें गणित

    नई दिल्ली
     केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा तेज है। अभी आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया में है और अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है। आयोग की ओर से अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। वहीं, बेंगलुरु का दौरा 7-8 अक्टूबर और मुंबई का 22-23 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इन बैठकों में सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की हो रही है। आइए यह समझने की कोशिश करते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी अगर 7वें वेतन आयोग का समान फिटमेंट फैक्टर लगता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कितनी वृद्धि होगी?

    दरअसल, 7th पे कमीशन (7th Pay Commission) में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे को नए पे मैट्रिक्स में तय करने के लिए किया गया था। उदाहरण के तौर पर 7th CPC में ₹7,000 के पुराने बेसिक पे को 2.57 से गुणा करने पर ₹17,990 आता है, जिसे नए पे स्ट्रक्चर में ₹18,000 किया गया। सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 7th CPC के लिए 2.57 फिटमेंट फैक्टर का उल्लेख है।

    अब अगर केवल एक समान कैलकुलेशन उदाहरण के तौर पर 8th CPC में भी 2.57 फिटमेंट फैक्टर मान लिया जाए, तो नए बेसिक पे की कैलकुलेशन इसी फॉर्मूले से होगी

        मौजूदा बेसिक पे × 2.57 = संशोधित बेसिक पे। इस कैलकुलेशन के हिसाब से 18,000 बेसिक पे पर यह कैलकुलेशन 46,260 होगी। 25,500 पर 65,535 और 35,400 पर 90,978। हालांकि, ये सिर्फ उदाहरण हैं। वास्तविक 8th CPC में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और पे मैट्रिक्स किस तरह बदलेगा, यह आयोग की अंतिम सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर को सीधे सैलरी में उतने प्रतिशत की बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जा सकता। बेसिक पे के अलावा DA, HRA और अन्य अलाउंस भी कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। 8th CPC को वेतन के साथ-साथ भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों की समीक्षा भी करनी है। आयोग की टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आर्थिक स्थिति, सरकारी वित्त और कर्मचारियों के मौजूदा वेतन-भत्तों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

     

    पे मैट्रिक्स लेवल 6th CPC बेसिक पे 2.57 फिटमेंट फैक्टर के बाद 7वें CPC के तहत बेसिक सैलरी 8वें CPC का अनुमान: 2.57 फिटमेंट फैक्टर
    Level 1 ₹7,000 ₹18,000 ₹46,260
    Level 2 ₹7,743 ₹19,900 ₹51,143
    Level 3 ₹8,444 ₹21,700 ₹55,769
    Level 4 ₹9,922 ₹25,500 ₹65,535
    Level 5 ₹11,362 ₹29,200 ₹75,044
    Level 6 ₹13,774 ₹35,400 ₹90,978
    Level 7 ₹17,471 ₹44,900 ₹1,15,393
    Level 10 ₹21,829 ₹56,100 ₹1,44,177
    Level 13 ₹47,899 ₹1,23,100 ₹3,16,367
    Level 18 ₹97,276 ₹2,50,000 ₹6,42,500

    फिलहाल, कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स की ओर से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन 8th CPC ने अभी कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर घोषित नहीं किया है। इसलिए 1.83, 2.57 या 3.83 जैसे आंकड़ों को अंतिम फैसला मानना सही नहीं होगा। आयोग की मौजूदा संरचना में न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई अध्यक्ष हैं, जबकि पंकज जैन सदस्य-सचिव और प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य हैं।

    समयसीमा की बात करें तो 8th सेंट्रल पे कमीशन (8th Central Pay Commission) का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और सरकार के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के अनुसार आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। इसका मतलब रिपोर्ट की निर्धारित समयसीमा मई 2027 के आसपास बनती है। इसके बाद सिफारिशों पर सरकार का फैसला और लागू करने की प्रक्रिया होगी। इसलिए अभी कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर होने वाली कैलकुलेशन को संभावित उदाहरण के रूप में देखें, न कि 8th CPC की तय सैलरी वृद्धि के रूप में।

    Level 8 कर्मचारी की बेसिक सैलरी
    मान लीजिए किसी Level 8 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 47,600 रुपये है और उसकी मौजूदा ग्रॉस सैलरी करीब 90,440 रुपये प्रति माह है। ऐसे में अगर फिटमेंट फॉर्मूला 2 लागू होता है तो बेसिक सैलरी 95 हजार रुपये से ज्यादा हो जाएगी। इस बेसिक सैलरी का मतलब हुआ कि इस लेवल की कैटेगरी के केंद्रीय कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1 लाख रुपये से ज्यादा होगी। जैसे-जैसे फिटमेंट फॉर्मूला बढ़ेगा वैसे केंद्रीय कर्मचारी की सैलरी में भी बढ़ोतरी होगी।

    ग्रॉस सैलरी में रहती हैं ये चीजें
    वेतन आयोग में किसी कर्मचारी के लिए एक निश्चित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय होती है। इस नई बेसिक पर उस समय लागू HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे भत्ते जोड़कर कुल ग्रॉस सैलरी तय होगी। कहने का मतलब है कि बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी और हाथ में आने वाली सैलरी में उतनी ही प्रतिशत बढ़ोतरी, दो अलग बातें हैं। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश आने और सरकार की ओर से उसे मंजूरी मिलने के बाद ही वास्तविक फिटमेंट फैक्टर, नई पे मैट्रिक्स और भत्तों की व्यवस्था स्पष्ट होगी।

    बता दें कि आठवें वेतन आयोग की बेंगलुरु में 7-8 अक्टूबर और मुंबई में 22-23 अक्टूबर 2026 को बैठकें प्रस्तावित हैं। इससे पहले चंडीगढ़, चेन्नई, पुडुचेरी और जयपुर में भी कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा हो चुकी है। इन बैठकों में सैलरी रिविजन और फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।

     

  • PM श्री स्कूलों में नया मॉडल, 1,565 स्कूलों में विद्यालय-अभिभावक-ग्राम समुदाय मिलकर करेंगे बदलाव

    PM श्री स्कूलों में नया मॉडल, 1,565 स्कूलों में विद्यालय-अभिभावक-ग्राम समुदाय मिलकर करेंगे बदलाव

    योगी सरकार में 1,565 पीएम श्री स्कूलों में विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय मिलकर गढ़ेंगे शिक्षा का नया परिवेश

    – नवंबर में होगा विशेष आयोजन, विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय की सहभागिता से बच्चों को मिलेगा समृद्ध शैक्षिक परिवेश

    – रैली, प्रभातफेरी, नाटक, कहानी-वाचन, खेल एवं पोस्टर प्रदर्शनी जैसी गतिविधियों से सजेगा ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’

    – बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ उत्कृष्ट विद्यार्थियों का होगा सम्मान

    – कक्षा 5, 8 और 10 के विद्यार्थियों को क्रमशः अगली कक्षाओं में नामांकन के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित

    – 1,565 पीएम श्री विद्यालयों के लिए कुल ₹46.95 लाख का वित्तीय प्रावधान

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों को शिक्षा के साथ जनभागीदारी और सामुदायिक सहभागिता के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रदेश के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में नवंबर में ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ आयोजन के लिए 1,565 पीएम श्री स्कूलों के लिए कुल ₹46.95 लाख की वित्तीय सीमा निर्धारित की गई है। 

    ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से पीएम श्री स्कूलों को स्थानीय समुदाय से जोड़ने, अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यालय, परिवार और ग्राम समुदाय की साझेदारी से तैयार यह पहल बच्चों की शिक्षा को सामाजिक सहयोग से जोड़ते हुए पीएम श्री स्कूलों को स्थानीय स्तर पर सीखने, सहभागिता और विकास के केंद्र के रूप में और भी सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

    विद्यालय और समुदाय की साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
    ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय को उसके सामाजिक परिवेश से जोड़ते हुए अभिभावकों, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों, शिक्षकों और अन्य स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इन्हें एक साझा मंच पर लाकर बच्चों की शिक्षा, नामांकन, ठहराव और सीखने की प्रक्रिया को और अधिक समृद्ध बनाया जाएगा। इस दौरान समुदाय को विद्यालय की गतिविधियों तथा समग्र शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। 

    रैली से खेल तक, बच्चों की प्रतिभा को मिलेगा मंच
    इस दौरान रैली/ प्रभातफेरी, नाटक एवं कहानी-वाचन, पोस्टर एवं कलाकृतियों की प्रदर्शनी तथा खेल प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियां होंगी। इसके साथ हस्ताक्षर अभियान और सेल्फी प्वाइंट जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किए जाने का भी प्रावधान है, जिससे बच्चों में उपलब्धि के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास को प्रोत्साहन मिलेगा। 

    बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश
    आयोजन में बाल अधिकारों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। इसके माध्यम से अभिभावकों और ग्राम समुदाय को बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उनकी शिक्षा और संरक्षण के प्रति सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाया जाएगा। 

    कोट:
    “पीएम श्री स्कूलों को समुदाय से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेंगे।”
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    “विद्यालय और समुदाय की सहभागिता से बच्चों की शिक्षा को नई ऊर्जा मिलेगी। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम में गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा, सीखने और आगे बढ़ने के अवसरों को प्रोत्साहित किया जाएगा।”
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • कम बारिश ने बढ़ाई उज्जैन की टेंशन, फरवरी-मार्च में सूख सकते हैं कुएं-बोरिंग; डैम में 90 दिन का पानी

    कम बारिश ने बढ़ाई उज्जैन की टेंशन, फरवरी-मार्च में सूख सकते हैं कुएं-बोरिंग; डैम में 90 दिन का पानी

    उज्जैन
     मानसून की अधिकारिक विदाई बुधवार को हो जाएगी। 30 सितंबर के बाद होने वाली किसी भी वर्षा को मौसम विभाग मानसूनोत्तर वर्षा (आफ्टर रैनी सीजन) की श्रेणी में दर्ज करेगा। लेकिन इस बार मानसून की विदाई शहर के लिए राहत नहीं, बल्कि एक भीषण जल संकट का अलार्म बजाकर जा रही है। सात लाख की आबादी की प्यास बुझाने वाले गंभीर बांध में इस समय जल संकट का सन्नाटा पसरा है।

    2250 एमसीएफटी की क्षमता वाले इस बांध में फिलहाल महज 715 एमसीएफटी पानी ही बचा है- यानी बांध 68 प्रतिशत खाली है। ऊपर से वाष्पीकरण और रोजमर्रा की सप्लाई के चलते बांध से हर दिन 7 से 8 एमसीएफटी पानी तेजी से घट रहा है।

    इस हिसाब से गंभीर बांध में अगले 90 दिन नियमित जल प्रदाय करने जितना पानी ही उपलब्ध है। जीवाजी वेधशाला के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस सीजन में औसत 906 मिमी के मुकाबले महज 682 मिमी (75 प्रतिशत) बारिश हुई- यानी सीधी 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट। उज्जैन में करीब एक दशक (10 साल) बाद ऐसे सूखे जैसे हालात बने हैं।

    गंभीर बांध : शहर की निर्भरता और बड़ा संकेतक
    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष अगस्त में पेश की गई संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन शहर की मौजूदा जलापूर्ति का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अकेले गंभीर बांध से पूरा होता है। अल्प वर्षा के कारण बांध में क्षमता का एक-तिहाई पानी ही बच पाना आने वाले शीतकाल और ग्रीष्मकाल के लिए बड़े संकट की दस्तक है।

    अल्प बारिश की वजह से भूजल रिचार्ज भी नगण्य रहा है। आशंका जताई जा रही है कि जो कुएं, हैंडपंप और बोरिंग अमूमन मई-जून की भीषण गर्मी में सूखते थे, वे इस बार शीतकाल समाप्त होते-होते (फरवरी-मार्च में) ही दम तोड़ देंगे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रबी फसलों (गेहूं और चना) के लिए मिट्टी में आवश्यक शुरुआती नमी नहीं मिलेगी। फसलों के उत्पादन में गिरावट का सीधा असर किसान की जेब और अंततः शहर के व्यापार पर पड़ेगा।

    नर्मदा का सहारा : राहत बड़ी, लेकिन वित्तीय लागत भी भारी
    गंभीर बांध में जलस्तर घटने पर नर्मदा-आधारित जल प्रदाय योजना उज्जैन के लिए लाइफलाइन बनती है। लेकिन नर्मदा का पानी शहर तक लाना वित्तीय रूप से अत्यधिक खर्चीला है। पंपिंग, बिजली और रखरखाव का लगातार भारी खर्च उठाना पड़ता है। वर्तमान में नर्मदा जल की लागत 22.60 प्रति घन मीटर है। यह दर वर्ष 2014 से लागू है, जिसे अब तक बढ़ाया नहीं गया है।

    बीते 12 वर्षों में नर्मदा का पानी उज्जैन लाने और गंभीर में खाली स्थान भरने के मद में अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। कम वर्षा का सीधा अर्थ है कि नगर निगम और प्रशासन को आगामी दिनों में वैकल्पिक नर्मदा जल पर निर्भरता बढ़ानी होगी, जिससे सरकारी खजाने पर वित्तीय दबाव कई गुना बढ़ जाएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले जल रणनीति की परीक्षा
    एनजीटी की रिपोर्ट में सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन की अनुमानित जल मांग 410 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) बताई गई है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मेला अवधि में आने वाली करोड़ों की तैरती आबादी की प्यास बुझाना सामान्य दिनों से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।

    इस वर्ष का मानसून केवल एक मौसमी आंकड़ा नहीं, बल्कि उज्जैन की अगले दो वर्षों की जल प्रबंधन नीति का शुरुआती अलर्ट है। यदि आने वाले दिनों में मानसूनोत्तर वर्षा से राहत नहीं मिलती, तो प्रशासन को समय रहते जल वितरण, सीवरेज रिसाइकलिंग और भूजल संरक्षण की आपातकालीन योजना पर काम शुरू करना होगा।

  • वनडे में गिल का तूफानी दोहरा शतक, बनाया नया रिकॉर्ड,  सहवाग-रोहित क्लब में एंट्री

    वनडे में गिल का तूफानी दोहरा शतक, बनाया नया रिकॉर्ड, सहवाग-रोहित क्लब में एंट्री

    गुवाहाटी
    शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 117 गेंदों में दोहरा शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने और रोहित शर्मा के बाद इस प्रारूप में दो दोहरे शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज भी बन गए। भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ गुवाहाटी में खेले जा रहे दूसरे वनडे में इतिहास रच दिया। गिल ने महज 117 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया, जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज 200 रन हैं। उन्होंने ईशान किशन के 126 गेंदों में दोहरा शतक लगाने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।  गिल ने अपनी इस तूफानी पारी के दौरान चौकों और छक्कों की बरसात की। दोहरा शतक पूरा करते ही वह वनडे में एक से ज्यादा दोहरे शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले यह कारनामा केवल रोहित शर्मा ने किया था। गिल ने इससे पहले 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 208 रन की पारी खेली थी।

    सबसे तेज दोहरा शतक का रिकॉर्ड
    गिल का 117 गेंदों में दोहरा शतक वनडे क्रिकेट में नया रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड ईशान किशन के नाम था, जिन्होंने 10 दिसंबर 2022 को बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में 126 गेंदों में 200 रन पूरे किए थे। गिल ने इस रिकॉर्ड को नौ गेंदों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल ने 2023 में अफगानिस्तान के खिलाफ 128 गेंदों में दोहरा शतक लगाया था।  यानी गिल ने अब वनडे में सबसे तेज दोहरे शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उनके बाद ईशान किशन 126 गेंद और ग्लेन मैक्सवेल 128 गेंद के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

    सहवाग और रोहित की खास सूची में भी नाम
    गिल की इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा बल्लेबाजों की सूची में पहुंचा दिया है, जिन्होंने वनडे में 200 या उससे ज्यादा रन की पारी खेली है। वीरेंद्र सहवाग ने 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 219 रन बनाए थे, जबकि रोहित शर्मा ने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 208 रन की पारी खेली थी। गिल अब इस सूची में एक से ज्यादा दोहरे शतक लगाने वाले रोहित के साथ खड़े हैं।

    गिल का 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया गया 208 रन का स्कोर पहले ही उनके नाम था, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ 200 रन पूरा करते ही उन्होंने अपने वनडे करियर में दूसरी बार यह उपलब्धि हासिल कर ली। इस तरह वह रोहित शर्मा के बाद वनडे में दो दोहरे शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं।

    गिल की तूफानी पारी ने बदला रिकॉर्ड बुक का पन्ना
    वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405/7 का विशाल स्कोर बनाया था। जवाब में भारत की ओर से गिल ने पारी को आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ाया और दोहरा शतक जड़कर न सिर्फ भारत के लक्ष्य को आसान बनाया, बल्कि वनडे क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करा दिया। गिल की 117 गेंदों में 200 रन की पारी अब वनडे इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक है। यह उनके वनडे करियर का दूसरा दोहरा शतक और कप्तान के रूप में एक बेहद खास उपलब्धि है।

     

  • पंजाब बॉर्डर पर रावी का बदला रुख चिंता का कारण? अमित शाह को मिले 7 अहम सुझाव

    पंजाब बॉर्डर पर रावी का बदला रुख चिंता का कारण? अमित शाह को मिले 7 अहम सुझाव

    चंडीगढ़
     केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से शुरू की गई प्रहार (पीआरएएचएएआर) राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति और रणनीति को पंजाब की सीमा पर जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रावी दरिया से लगती सीमा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को दूर करने के लिए सात सुझाव दिए हैं।

    उन्होंने पत्र की प्रति पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी भेजी है। सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, लेकिन इसका असर सीमा के अंतिम छोर तक पहुंचना जरूरी है।

    उन्होंने अपने सुझावों को प्रहार के सात स्तंभों से जोड़ते हुए पंजाब की सीमा की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर उपाय करने की बात कही है। सिद्धू पंजाब में बतौर बटाला के जिला मजिस्ट्रेट, अमृतसर के उपायुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

    रावी नदी के बदलते बहाव से सुरक्षा चुनौती
    सिद्धू ने रावी दरिया के नदी क्षेत्र को विशेष चुनौती बताते हुए कहा कि नदी लगभग हर मानसून में अपना रास्ता बदलती है। ऐसे में नदी के बीच बाड़ लगाना संभव नहीं है। उन्होंने ब्रह्मपुत्र में इस्तेमाल हो रहे व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन सिस्टम को रवि और सतलुज के नदी वाले हिस्सों तक विस्तार देने का सुझाव दिया।

    उनके अनुसार बाढ़ से निपटने के लिए बाड़ की डिजाइन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब के सिंचाई विभाग को मिलकर तैयार करनी चाहिए। वर्ष 2025 की बाढ़ में गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा चौकियों और बाड़ को नुकसान पहुंचने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    ड्रोन से नशे की तस्करी पर तकनीकी निगरानी
    सिद्धू ने सीमा पर ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए कई स्तर वाली काउंटर-ड्रोन व्यवस्था बनाने की मांग की है। ड्रोन से बरामद सामान के आंकड़ों के आधार पर एआई की मदद से संभावित ड्रॉप जोन की पहचान करने और जिला पुलिस व प्रशासन से मिलने वाली सूचनाओं को राष्ट्रीय खुफिया सूचना तंत्र से जोड़ने का सुझाव दिया है।

    उन्होंने सीमा जिलों में नशे और आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें और नजदीक फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की बात कही। साथ ही नशामुक्ति, पुनर्वास और सीमा क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार को भी राष्ट्रीय नशा विरोधी अभियान में पर्याप्त महत्व देने का सुझाव दिया।

    मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल की मांग
    सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को उठाते हुए सिद्धू ने गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है। फिलहाल रवि पार बसे गांवों के लोग मौसमी पोंटून पुल पर निर्भर हैं। उन्होंने बाड़ के पार खेती करने वाले किसानों के लिए उचित गेट टाइमिंग और मुआवजे की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

    सीमा ब्लाकों में शिक्षकों, डाक्टरों और राजस्व कर्मचारियों के लिए कठिन क्षेत्र प्रोत्साहन तथा सीमा गांवों से अधिक संख्या में बॉर्डर विंग होम गार्ड भर्ती करने की भी मांग की गई है। उन्होंने उपायुक्त और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को भी प्रहार रणनीति का प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया।

    सिद्धू ने कहा कि हर गिराए गए ड्रोन का पूरा दस्तावेज तैयार किया जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष में इसका इस्तेमाल हो सके। उन्होंने करतारपुर गलियारे को मानवीय संपर्क का माध्यम बनाए रखने की बात भी कही।

  • Sahara Refund: रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में 18.67 लाख की कमी, आखिर कहां गए जमाकर्ता?

    Sahara Refund: रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में 18.67 लाख की कमी, आखिर कहां गए जमाकर्ता?

    नई दिल्ली

    सहारा इंडिया के अभी भी लाखों निवेशक अपने मूलधन को पाने के लिए परेशान हैं। इसबीच एक बड़ी खबर यह आ रही है कि सहारा इंडिया पोर्टल पर रजिस्टर्ड 18 लाख से अधिक जमाकर्ता 'गायब' हैं। दरअसल, यह खुलासा एक RTI कार्यकर्ता ने की है। बड़ौत बागपत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट नौशाद अली ने सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से दो बार सूचनाएं मांगी थी। पहली सूचना 24 अक्टूबर 2025 को और दूसरी 28 जुलाई 2026 को। केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने दोनों का उत्तर भी दिया, लेकिन आंकड़ों में काफी बदलाव दिखा।

    नौशाद के मुताबिक पहली सूचना के जवाब में उन्हें बताया गया कि 10 नवंबर 2025 तक कुल 1,67,96,469 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 1,40,45,099 ने डॉक्यूमेंट्स सफलतापूर्वक जमा किए।

    इनमें से केवल 34,35,874 वैध जमाकर्ताओं को 17 नवम्बर 2025 तक 6,621.85 करोड़ रुपये उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे लौटाए गए। कुल क्लेम की गई रकम 95,732.50 करोड़ रुपये बताई गई।

    दूसरी सूचना में क्या मिला जवाब
    वहीं, दूसरी सूचना के तहत दिनांक 28 जुलाई 2026 के उत्तर में 3 सितंबर 2026 को कहा गया कि अब तक 1,49,48,879 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 41,56,693 आवेदनों का सत्यापन हुआ और इन्हें 9,267.89 करोड़ रुपये दिए गए। 4 सितम्बर 2026 तक यही राशि बांटी गई। परन्तु कुल 3,95,02,796 आवेदनों में कमियां पाई गईं।

    दूसरी सूचना में 1867590 जमाकर्ता ‘गायब’
    इन दोनों उत्तरों का मिलान करने पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पहले उत्तर में रजिस्ट्रेशन की संख्या 1,67,96,469 थी, जबकि बाद वाले उत्तर में यह घटकर 1,49,48,879 रह गई। यानी करीब 1867590 जमाकर्ता ही गायब हाो गए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए या आंकड़े गलत हैं?

    आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली ने लाइव हिन्दुस्तान को बताया कि केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस अंतर का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। इतने बड़े अन्तर को छिपाना या अनदेखा करना सिस्टम की कार्यशैली पर प्रश्न उठाता है।

    बता दें 8 सितंबर 2026 में सरकार ने लेटेस्ट जानकारी देते हुए बताया था कि सहारा के 41.56 लाख जमाकर्ताओं को ₹9,267 करोड़ वापस किए जा चुके हैं और लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी है।

    दावे में कमी है तो दोबारा आवेदन का मौका
    मंत्रालय ने बताया है कि जिन जमाकर्ताओं के दावों को कमियों के कारण सत्यापित नहीं किया जा सका है, उनके लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर दोबारा आवेदन (Re-submission) की सुविधा शुरू की गई है। जमाकर्ता पोर्टल पर अपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करने के बाद फिर से दावा जमा कर सकते हैं।

    मंत्रालय के अनुसार रिफंड की पूरी प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चल रही है। RTI जवाब में कहा गया है कि प्रक्रिया की निगरानी सहकारिता मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की देखरेख में की जा रही है। अगर किसी जमाकर्ता का दावा पहले खारिज या सत्यापित नहीं हुआ है, तो उसे पोर्टल पर कमियों की जानकारी देखकर उन्हें दूर कर दोबारा दावा जमा करने की सुविधा दी गई है।

  • बिहार में विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी तेज, NDA ने बनाई साझा रणनीति; 8 सीटों पर जीत का दावा

    बिहार में विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी तेज, NDA ने बनाई साझा रणनीति; 8 सीटों पर जीत का दावा

     पटना
    बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए ने अब अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में गठबंधन के घटक दलों के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता एक मंच पर जुटे। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ-साथ सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा हुई।

    एनडीए नेताओं ने साफ किया कि चुनाव में गठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरेगा। बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी आठ सीटों पर एनडीए की जीत का दावा किया। अब नजर इस बात पर है कि गठबंधन अपनी साझा रणनीति को चुनावी मैदान में किस तरह उतारता है।

    8 सीटें और NDA का एक ही लक्ष्य, जीत के लिए क्या बनी रणनीति?
    बैठक में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), आरएलएम और हम के नेताओं ने हिस्सा लिया। सहयोगी दलों के बीच चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।

    संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं के स्तर तक समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। गठबंधन की कोशिश है कि चुनाव में अलग-अलग दलों की ताकत को एक साझा रणनीति के तहत इस्तेमाल किया जाए।

    सरावगी ने कहा कि सभी घटक दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत से काम करने की बात कही।

    BJP दफ्तर में जुटे सहयोगी, ‘एकजुट NDA’ का दिया संदेश
    बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा भी मौजूद रहे। लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार और आरएलएम के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने भी हिस्सा लिया।

    हम की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. डीएन सिन्हा बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया और संजय गांधी समेत कई नेता मौजूद रहे।

    बैठक से गठबंधन के घटक दलों के बीच चुनावी तालमेल का संदेश देने की कोशिश हुई। नेताओं ने साझा रणनीति के साथ चुनाव लड़ने पर जोर दिया।

    सरावगी का बड़ा दावा—‘सभी आठ सीटों पर जीत तय’
    बैठक के बाद संजय सरावगी ने कहा कि एनडीए पूरी मजबूती के साथ विधान परिषद चुनाव में उतरेगा। उन्होंने गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय और साझा रणनीति की बात कही।

    सरावगी के मुताबिक सभी घटक दल एक साथ चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का दावा किया।

    एनडीए नेताओं ने भी बैठक में सभी आठ सीटों पर जीत का भरोसा जताया। अब चुनावी मैदान में इस दावे को संगठन और वोट में बदलना गठबंधन के सामने अहम चुनौती होगी।

    ‘किसी को समस्या है तो CM तक बात पहुंचाएं’, सरावगी का संदेश
    बैठक में गठबंधन के भीतर संवाद और समन्वय के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सरावगी ने कहा कि एनडीए की कार्यशैली सामूहिक निर्णय और आपसी संवाद पर आधारित है।

    उन्होंने कहा कि किसी घटक दल के नेता या कार्यकर्ता को कोई समस्या या सुझाव हो तो वह वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रख सकता है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर भी अपनी बात रखने की बात कही। सरावगी के मुताबिक संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करना गठबंधन की प्राथमिकता है। इस बयान के जरिए सहयोगी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।

    विकास के मुद्दों को भी चुनावी अभियान में ले जाएगा NDA
    बैठक में सरकार के विकास और जनकल्याणकारी कामों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। एनडीए नेताओं ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में किए गए कार्यों को चुनावी संवाद का हिस्सा बनाने की बात कही।

    गठबंधन का जोर सरकार की उपलब्धियों को कार्यकर्ताओं के जरिए लोगों तक पहुंचाने पर रहेगा। इसके लिए घटक दलों के संगठन के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    यानी विधान परिषद चुनाव की तैयारी सिर्फ उम्मीदवारों और सीटों तक सीमित नहीं रखी जा रही है। गठबंधन संगठन और सरकार के कामकाज, दोनों को चुनावी रणनीति में जोड़ने की तैयारी में है।

    अब सीटों के बाद नजर उम्मीदवारों और जमीन की रणनीति पर
    एनडीए ने आठों सीटों पर जीत का दावा तो कर दिया है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर रणनीति अहम होगी। घटक दलों के बीच समन्वय, उम्मीदवारों का चयन और संगठन की सक्रियता चुनाव की दिशा तय करने वाले पहलू होंगे।

    बैठक में इन सभी मोर्चों पर साझा तैयारी का संदेश दिया गया। गठबंधन के नेताओं ने कार्यकर्ताओं को भी एकजुट होकर काम करने की बात कही।

    अब देखना होगा कि बैठक में बनी रणनीति जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है। फिलहाल विधान परिषद की आठ सीटों ने बिहार की सियासत में एनडीए के भीतर चुनावी हलचल तेज कर दी है।