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  • विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में 13 लाख वोट कम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी जानकारी

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में 13 लाख वोट कम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी जानकारी

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करीब 13 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने यह जानकारी दी। एसआईआर की प्रक्रिया से पहले राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जबकि पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर लगभग 2.01 करोड़ रह गई है।

    मतदाता सूची में हुए इस बदलाव के बाद पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कर उनमें दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जाती है, ताकि सूची को अद्यतन किया जा सके।

     मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची में करीब 13 लाख मतदाताओं की कमी आई है। हालांकि, हटाए गए नामों के कारणों और अलग-अलग श्रेणियों में नाम कटने का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम मृत मतदाताओं, स्थान परिवर्तन या अन्य कारणों से हटाए गए हैं।  

    मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार के लिए जरूरी है। ऐसे में मतदाताओं के लिए अपनी प्रविष्टियों की जांच करना महत्वपूर्ण है, ताकि आगामी चुनावों के दौरान उन्हें मतदान करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। 

    घर-घर जाकर किया गया सत्यापन
    अनिंदिता मित्रा ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारियों ने 25 जून से 3 अगस्त तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया. इस दौरान पंजीकृत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म दिए गए और उनसे वापस लिए गए. 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1,93,94,435 मतदाता थे. उस समय कुल मतदाताओं में से 20,66,608 यानी 9.63 फीसदी मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के तौर पर बंटवारा किया गया था। 

    दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान राज्यभर में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची की प्रतियां दी गई थीं. 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच लोगों से अपनी जानकारी की जांच करने और जरूरत होने पर दावे या आपत्तियां दाखिल करने को कहा गया था. आवेदन ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन, बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से ऑफलाइन या चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के कार्यालय में जमा किए जा सकते थे. इस दौरान पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 19 रोल ऑब्जर्वर और जिला निर्वाचन अधिकारियों ने दावों और आपत्तियों की जांच के लिए फील्ड विजिट और सुपर-चेकिंग की। 

    86,038 मतदाताओं को किया गया अपात्र
    13 अगस्त से 8 अक्टूबर तक दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण में ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनका मैपिंग नहीं हुआ था या जिनकी जानकारी में गड़बड़ी थी. अनिंदिता मित्रा ने बताया कि नोटिस पाने वाले 35,49,036 मतदाताओं में से 86,038 को विस्तृत सत्यापन और स्पीकिंग ऑर्डर के जरिए अपात्र पाया गया। 

     बढ़ाए गए मतदान केंद्र
    मतदाताओं की सुविधा बढ़ाने के लिए सभी जिलों में मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया गया. इसके तहत मतदान केंद्रों की संख्या 24,453 से बढ़ाकर 25,332 कर दी गई. मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए एक महीने की SVEEP योजना के तहत कई माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया गया. मतदाताओं को अपनी जानकारी जांचने और जमा करने में मदद के लिए 7 जून, 11-12 जुलाई, 19 जुलाई और 16 अगस्त को मतदान केंद्रों पर स्पेशल शिविर लगाए गए. युवा मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कॉलेजों और स्कूलों में भी विशेष शिविर आयोजित किए गए. राज्य और जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी की गईं। 

  • बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कानूनी रास्ते अपनाएगी पंजाब सरकार: भगवंत मान

    बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कानूनी रास्ते अपनाएगी पंजाब सरकार: भगवंत मान

    चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि प्रदेश सरकार बंदी सिंहों की रिहाई के लिए हर कानूनी व संवैधानिक रास्ता अपनाएगी। लंबे समय से लंबित इस मामले को अनिश्चितकाल तक अनसुलझा नहीं छोड़ा जा सकता।

    आप सरकार ने केंद्र और राज्यपाल को आश्वासन दिया था कि यदि जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बनाए रखी जाएगी।

    इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी। सोमवार को कौमी इंसाफ मोर्चा, किसान यूनियनों और अन्य समूहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में हरसंभव सहायता के लिए तैयार है। बंदी सिंहों के मामले में आप सरकार की मंशा व प्रतिबद्धता बिल्कुल स्पष्ट है। हम न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं।

    हवारा को लेकर क्या बोले सीएम मान
    उन्होंने रामपुर खेड़ा के संत सेवा सिंह, बठिंडा के गुरदीप सिंह, भाई मोहकम सिंह, गुरसेवक सिंह काहनेके, बाबा भूपिंदर सिंह और किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल सहित अन्य नेताओं के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हवारा को पैरोल मिलने की स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    पंजाब सरकार ने पहले ही केंद्र सरकार और राज्यपाल से कहा है कि यदि हवारा को बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखेंगे। हमने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आश्वासन दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने पैरोल नहीं दी।

    हवारा को कुछ दिन की पैरोल दी जाती है तो यह मिसाल बननी चाहिए कि राज्य में शांति और भाईचारा किस तरह कायम रखा जा सकता है। इससे अन्य बंदी सिंहों की रिहाई का रास्ता भी आसान हो सकता है।

    हर मामले की कानूनी पहलुओं से जांच
    उन्होंने सिख संगठनों से अपना संघर्ष शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि कुछ समूह जानबूझकर ऐसे आंदोलनों को पटरी से उतारने और सिखों की छवि खराब करने का प्रयास करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बुड़ैल जेल में बंद परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा की पैरोल के मामले पर स्पष्ट किया कि मामला चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है। वह इसे राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे, जोकि चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी से कहा कि वे हर मामले की कानूनी पहलुओं से जांच करें, ताकि उचित समाधान निकाला जा सके।

    बैठक में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, गृह मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, विशेष डीजीपी (कानून व्यवस्था) पीके सिन्हा, जेल विभाग की प्रमुख सचिव भावना गर्ग, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव कुमार अमित तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • नारी सशक्तीकरण के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री

    नारी सशक्तीकरण के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री

    नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है सरकार: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने किया पोस्ट- नारी की सुरक्षा, सम्मान व स्वाभिमान ही सशक्त-समृद्ध समाज का आधार

    नारी सशक्तीकरण के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री

    2017 से पहले अराजकता के तांडव ने महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान पर लगा रखा था ग्रहण

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की तृतीया पर मां चंद्रघंटा के स्वरूप की आराधना की। इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा कि डबल इंजन सरकार की हर पहल नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है।

    मां चंद्रघंटा के दिव्य स्वरूप का संदेश
    मुख्यमंत्री ने लिखा कि नारी शक्ति के तेज, गरिमा और अदम्य साहस के प्रतीक के रूप में मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि नारी की सुरक्षा, सम्मान व स्वाभिमान ही सशक्त और समृद्ध समाज का आधार है। इसी भावना को आत्मसात कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार सुशासन के माध्यम से नारी सशक्तीकरण के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।

    2017 से पहले सत्ताधीशों के परिवारों का होता था सशक्तीकरण 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में फैले अराजकता के तांडव ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर ग्रहण लगा रखा था। उस समय माताओं-बहनों के सशक्तीकरण के बजाय सत्ताधीशों के परिवारों का सशक्तीकरण ही मुख्य उद्देश्य हुआ करता था।

    मातृत्व को सहारा, इज्जत घर से गरिमा की रक्षा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' से बेटियों के अस्तित्व की रक्षा, शिक्षा के प्रति जागरूकता, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से उनके उज्ज्वल भविष्य को संबल, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से विवाह को गरिमापूर्ण आधार, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मातृत्व को सहारा, उज्ज्वला से धुएं से मुक्ति, इज्जत घर से गरिमा की रक्षा, घरौनी से संपत्ति का अधिकार, 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए आजीवन निःशुल्क बस यात्रा और वृद्धावस्था पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा तक, डबल इंजन सरकार की हर पहल नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है।

  • MP में शिक्षकों की पदोन्नति पर पेंच, 32 हजार शिक्षक प्रभावित

    MP में शिक्षकों की पदोन्नति पर पेंच, 32 हजार शिक्षक प्रभावित

    भोपाल
    स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति लटकी हुई है, जबकि जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधान पाठकों को व्याख्याता बना दिया है। इस दोहरे रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग पदोन्नति आदेश जारी नहीं कर रहा है।

    शासकीय शिक्षक संगठन का विरोध: दो साल से लंबित हैं पदोन्नतियां
    संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता, अर्हता और सेवा शर्तें समान हैं। जनजातीय विभाग में सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता तक पदोन्नतियां हो चुकी हैं।

    जल्द लाभ देने की मांग
    वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक, सहायक, माध्यमिक और उच्च श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति दो साल से लंबित है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले उच्च पद का प्रभार लेने वाले शिक्षकों को भी अभी तक नियमित पदोन्नति नहीं मिली है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि शासन समय-सीमा तय कर पात्र शिक्षकों को जल्द पदोन्नति का लाभ दे।

  • ग्वालियर में नरोत्तम मिश्रा के लिफ्ट में फंसने का वीडियो आया सामने

    ग्वालियर में नरोत्तम मिश्रा के लिफ्ट में फंसने का वीडियो आया सामने

    ग्वालियर 

    ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा सोमवार शाम एक ऐसी स्थिति में फंस गए, जिसने मौके पर मौजूद लोगों की चिंता बढ़ा दी। वे जयेंद्रगंज में एक स्पोकन इंग्लिश कोचिंग सेंटर की नई ब्रांच का उद्घाटन करने पहुंचे थे। पहले फ्लोर से तीसरे फ्लोर पर जाते समय लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण अचानक रुक गई। इसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट के अंदर फंस गए। कर्मचारियों ने करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद दरवाजा खोला और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।

    दूसरे फ्लोर पर अचानक रुक गई लिफ्ट
    यह घटना ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र में स्थित जयेंद्रगंज की है। यहां संजय कॉम्प्लेक्स के सामने वाली बिल्डिंग में 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, कोचिंग सेंटर तीसरे फ्लोर पर स्थित था। वहां पहुंचने के लिए डॉ. मिश्रा लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट पहले फ्लोर से ऊपर की ओर बढ़ी, लेकिन दूसरे फ्लोर पर पहुंचते ही तकनीकी खराबी आ गई और वह झटके के साथ रुक गई। लिफ्ट के अचानक रुकने से उसके अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके। घटना की जानकारी मिलते ही बिल्डिंग के कर्मचारी और कार्यक्रम के आयोजक सक्रिय हो गए। मौके पर मौजूद लोगों को चिंता थी कि लिफ्ट का दरवाजा कैसे खोला जाए और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए।

    10 से 15 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे नरोत्तम मिश्रा
    लिफ्ट के रुकने के बाद कर्मचारियों ने तुरंत दरवाजा खोलने की कोशिश शुरू की। तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट का दरवाजा सामान्य तरीके से नहीं खुल पा रहा था। ऐसे में कर्मचारियों को इसे खोलने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।करीब 10 से 15 मिनट बाद दरवाजा खोला जा सका। इसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी, आयोजक और पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे।

    लिफ्ट में फंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
    इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया। बाद में इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह चर्चा में आ गया। वीडियो में लिफ्ट से जुड़ी घटना और डॉ. मिश्रा को बाहर निकालने की स्थिति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। हालांकि, घटना से जुड़े वीडियो को साझा करते समय उसके वास्तविक संदर्भ और उपलब्ध जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

    लिफ्ट से बाहर आते ही नरोत्तम मिश्रा ने किया उद्घाटन
    लिफ्ट से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपना निर्धारित कार्यक्रम जारी रखा। उन्होंने 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का रिबन काटकर उद्घाटन किया। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। लिफ्ट में फंसने के कारण उद्घाटन कार्यक्रम पर कुछ समय के लिए असर जरूर पड़ा, लेकिन डॉ. मिश्रा बाहर आने के बाद कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम पूरा होने के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए। उन्होंने कोचिंग संस्थान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बेहतर विकल्प बताया।

    युवाओं के लिए शुरू हुई स्पोकन इंग्लिश कोचिंग की नई ब्रांच
    जयेंद्रगंज में शुरू हुई 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का उद्देश्य युवाओं को अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का प्रशिक्षण देने से जुड़ा है। आज के समय में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान शिक्षा, नौकरी, इंटरव्यू और पेशेवर जीवन में उपयोगी माना जाता है। ऐसे में स्पोकन इंग्लिश क्लासेस उन विद्यार्थियों और युवाओं के लिए एक विकल्प बन सकती हैं, जो अपनी बातचीत की क्षमता बेहतर करना चाहते हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी इसी अवसर का हिस्सा थी।

  • सौरव दास-अशुतोष रांका फिर लिए गए हिरासत में, दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई

    सौरव दास-अशुतोष रांका फिर लिए गए हिरासत में, दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई

    नई दिल्ली

    दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका आज फिर से जंतर-मंतर से हिरासत में ले लिया है। सौरव और रांका रोक के बावजूद यहां पहुंचे थे।

    बता दें कि 10 अक्टूबर को भी CJP नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था, लेकिन रविवार को उन्हें एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया था। उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक ‘शांति भंग’ करने वाला कोई काम नहीं करेंगे और अपना व्यवहार अच्छा बनाए रखेंगे।

    दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। वहीं, रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी (सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट) मैदान विरोध-प्रदर्शन के लिए नये स्थान होंगे।

    उन्होंने कहा, ”आप विरोध की आवाज को खत्म नहीं कर सकते।”

    दीपके ने एक फोटो भी पोस्ट किया जिसमें आशुतोष रांका तिरंगा पकड़े नजर आ रहे हैं और उनके पास पुलिसकर्मी हैं। दीपके ने पोस्ट कर लिखा, ”जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराते आशुतोष रांका।”

    जंतर-मंतर पहुंचे सीजेपी कार्यकर्ता
    सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर में घुसने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर पोस्ट किया, ”जा नहीं रहे थे, अंदर घुस गए।”

    ‘जंतर-मंतर पर फिर से हमारा कब्जा’
    कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा, ”जंतर-मंतर पर फिर से हमारा कब्जा हो गया है! हम जंतर-मंतर में दाखिल हो गए हैं और अब हमें हिरासत में लिया जा रहा है। लेकिन यह हम सभी युवाओं के लिए एक संदेश है कि हम ऐसा कर सकते हैं! ज्ञानू, अब तुम्हारा खेल खत्म है, भाई!”

    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को ऐलान किया कि वह अगले कुछ दिनों में राजस्थान में प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में उसके कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ को घरों में नजरबंद किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों में शामिल कार्यकर्ताओं, महिलाओं, छात्रों और पत्रकारों को हिरासत में लेने और उनके साथ पुलिस की कथित ज्यादती के विरोध में यह प्रदर्शन किया जाएगा।

  • छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास पर सियासत तेज, साय सरकार की योजना में आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई शामिल

    छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास पर सियासत तेज, साय सरकार की योजना में आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई शामिल

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को विकसित करने की योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने शोध के आधार पर राम वनगमन पथ के विकास के लिए स्थलों का चयन किया है। योजना के तहत वर्ष 2026 से 2029 तक तीन चरणों में विकास कार्य प्रस्तावित हैं। चयनित स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं को ठहरने सहित अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें।

    तीन चरणों में पूरा होगा विकास कार्य
    राज्य सरकार की योजना के अनुसार, राम वनगमन पथ से जुड़े स्थलों का विकास तीन वित्तीय वर्षों में किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2026-27, दूसरे चरण में 2027-28 और तीसरे चरण में 2028-29 के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है।

    कांग्रेस सरकार ने 2019-20 में की थी शुरुआत

    छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पर्यटन परिपथ की घोषणा कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019-20 में की थी। उस समय इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु के शोध के आधार पर 75 स्थलों की सूची सामने आई थी। इनमें से नौ स्थलों को विकास के लिए चुना गया था।

    कांग्रेस शासन के दौरान चंदखुरी के कौशल्या मंदिर और शिवरीनारायण सहित कुछ प्रमुख स्थलों पर विकास कार्य हुए। हालांकि, बाकी स्थलों पर योजना का अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका। अब साय सरकार ने 31 स्थलों को शामिल करते हुए इस योजना को नए सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारी की है।

    पहले चरण में इन स्थलों का होगा विकास
    वर्ष 2026-27 के पहले चरण में रुद्रेश्वर महादेव मंदिर (रुद्री, धमतरी), शृंगी ऋषि-सप्तर्षि आश्रम (नगरी-सिहावा), खरौद, रामाराम, चिंतामीटर मंदिर (सुकमा), रामगढ़, सीता बेंगरा, रामझरना (रायगढ़), विष्णु मंदिर (रामपुर-जुनवानी, कांकेर), चित्रकोट शिव मंदिर और सीतामढ़ी-हरचौका सहित कई स्थलों के विकास की योजना है।

    दूसरे चरण में इन धार्मिक स्थलों पर काम
    वर्ष 2027-28 के दूसरे चरण में राम-लक्ष्मण पायन, सीतामढ़ी-छतोड़ा, सीतामढ़ी-रापा, सीतामढ़ी-कनवाई, सीता लेखनी, सीताकुंड, राम-जानकी मंदिर (सारासोर), पैसर घाट, गड़िया मंदिर, छोटे डोंगर शिव मंदिर तोडमा, राम मंदिर (सूरजपुर) और कोटमसर-कोटि महेश्वर जैसे स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव है।

    तीसरे चरण में शिवरीनारायण और सिरपुर समेत अन्य स्थल
    वर्ष 2028-29 के तीसरे चरण में इंजराम शिव मंदिर, सिंगेश्वर, लोमश ऋषि
    आश्रम, विष्णु मंदिर, कुलेश्वर मंदिर, तीरथगढ़, सीताकुंड, मांडव्य आश्रम, शिवरीनारायण, वाल्मीकि आश्रम, वागेश्वर शिव मंदिर, रक्सा डोंगरी और सिरपुर स्थित राम दिवाला सहित अन्य स्थलों का विकास प्रस्तावित है।

    कांग्रेस ने चंद्रखुरी मंदिर को लेकर उठाए सवाल
    राम वनगमन पथ के लिए स्थलों के चयन को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग से जुड़े 75 स्थलों को विकसित करने की पहल की थी। इनमें चंद्रखुरी, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी-हरचौका, रामगढ़, राजिम, नगरी-सिहावा, रामाराम, तुरतुरिया और चंपारण सहित नौ स्थलों पर निर्माण कार्य शुरू किया गया था।

    वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा घोषित स्थलों की सूची में माता कौशल्या मंदिर, चंद्रखुरी का उल्लेख नहीं होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राम वनगमन पथ से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और पहले से शुरू किए गए अधूरे विकास कार्य भी पूरे किए जाने चाहिए।

    शोध के आधार पर स्थलों के चयन का दावा
    राज्य सरकार ने स्थलों के चयन के पीछे शोध का हवाला दिया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु की वर्ष 2018 में प्रकाशित पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ’ और पंडित राम अवतार शर्मा के अध्ययन को आधार बताया गया है। पंडित शर्मा ने अयोध्या से श्रीलंका तक भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग का अध्ययन करते हुए देशभर के 240 से अधिक स्थलों का उल्लेख किया था।

    पर्यटन मंत्री और कांग्रेस ने रखे अपने-अपने तर्क
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थलों को राम वनगमन पथ से जोड़ने का उल्लेख किसी ग्रंथ में नहीं मिलता। सरकार के अनुसार, चयन शोध के आधार पर किया गया है और अधूरे विकास कार्यों को भी पूरा किया जाएगा।

    वहीं, कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चंद्रखुरी में माता कौशल्या मंदिर के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने भाजपा पर भगवान श्रीराम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाया।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर नजर
    राम वनगमन पथ के विकास से छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। हालांकि, स्थलों के चयन और चंद्रखुरी मंदिर को सूची में शामिल नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। अब योजना के निर्धारित चरणों में कार्य पूरा करना और चयनित स्थलों पर सुविधाएं विकसित करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

  • इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी तेज, वैकल्पिक जलस्रोतों को जोड़ने के लिए 15 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना

    इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी तेज, वैकल्पिक जलस्रोतों को जोड़ने के लिए 15 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना

    इंदौर 

     इंदौर शहर में इस बार औसत से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश होने से न सिर्फ भूजल स्तर में गिरावट आई है, बल्कि कई जलस्रोतों में बहुत कम पानी स्टोर हुआ है। अब वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नर्मदा जल पर निर्भरता कम हो और भूजल के दोहन में भी कमी आए। जिला प्रशासन ने चोरल, तिंछा, और शीतला माता फॉल को जलस्रोत के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। अभी प्रोजेक्ट का परीक्षण कराया जा रहा है।

    इंदौर को मिलने लगेगा पानी
    प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपर्ट का दावा है कि तिछा फाल में 120 से 150 मिलियन घन मीटर पानी स्टोरेज की क्षमता विकसित हो सकती है। महू के आसपास अन्य जलस्रोत तैयार करने की भी प्लानिंग है। ऐसा हुआ तो नर्मदा का महू में जाने वाला 50 एमएलडी पानी इंदौर को मिलने लगेगा। इस प्रोजेक्ट के साथ आसपास के कई तालाबों और जलस्रोतों को विकसित कर वहां आने वाला पानी असरावद या लिम्बोदी लाने की योजना है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो प्रोजेक्ट की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर निर्णय होगा।

    भूजल स्तर में होगा सुधार
    मालूम हो, नर्मदा का पानी शहर में पीने के अलावा रास्ते में सिंचाई के लिए भी दिया जाता है। फसल के बाद भी इस पानी की सप्लाई जारी रहती है। कई जगह मोटर लगाकर पानी खींचा जाता है। यह पानी असरावद या लिम्बोदी के आसपास के तालाबों से लिफ्ट कर लाया जा सकता है। ओवरफ्लो होने वाला पानी कनाड़ नदी में 12 महीने बहता है और यह तिछा में आता है। इस पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोका जा सकता है। यह पानी शहर के लिम्बोदी तालाब तक लाया जाए तो बायपास से लगी कई कॉलोनियों के भूजल स्तर में सुधार होगा।

    जल संचयन और संरक्षण जरूरी
    शहर के आसपास 40 से 50 किमी में कई वैकल्पिक स्रोत हैं, जिन पर काम करने से जल संचयन और संरक्षण होने से पानी की क्षमता बढ़ सकती है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने चोरल नदी में बारिश के दौरान आने वाले पानी को शहर में लाने की योजना बनाई थी। एक दशक में जलस्रोत बढ़ाने पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। अब जरूरत है कि नर्मदा और यशवंत सागर के अलावा पानी के अन्य स्रोतों की भी नगर निगम तलाश करे। अलग-अलग स्रोतों से आने वाले पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोकें और उसे शहर में नए तालाबों में लाया जाए। इससे एक्वेफर के जरिए वाटर रिचार्जिंग भी हो सकेगी।

    यह किया जा सकता है काम
    -तिंछा फाल में कानड़ नदी (दतोदा कैचमेंट) से बारिश के समय खूब पानी आता है, लेकिन यह बह जाता है। इस पानी को बांध बनाकर रोकना होगा। और आगे बड़े तालाब विकसित करने होंगे, ताकि वर्ष भर उपयोग किया जा सके। यह जलूद से पहले है, इसलिए इस पानी को इंदौर तक लाने की लागत भी कम रहेगी।

    -महू में ग्राम भाटखेड़ी के पास बड़े तालाब में जानापाव कैचमेंट एरिया से खूब पानी आता है। तालाब में कई महीनों तक पानी स्टोर रहता है। इस पानी के उपयोग की योजना बनाई जा सकती है।

    -तिंछाफाल में बड़ा जलाशय बनाया जाए तो उसका संभावित स्टोरेज 120 से 150 मिलियन क्यूबिक मीटर हो सकता है। इंदौर की पानी की मांग 700 से 900 एमएलडी है। तिंछाफाल से शहर की 35 से 50% पेयजल जरूरत पूरी हो सकती है।

    नर्मदा नदी के अलावा अन्य जलस्रोत विकसित करने की योजना पर काम किए जा रहे हैं। वैकल्पिक जलात में नया जलस्रोत बनाना नहीं है, बल्कि नेटवर्क स्थापित करना है। इसके लिए सभी बिंदुओं पर परीक्षण किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक स्थिति के आंकलन से स्पष्ट हुआ है कि शहर में पानी का समानांतर नया नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। इस नेटवर्क से पानी तो मिलेगा, भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। – सुरेश एमजी, जल प्रबंधन विशेषज्ञ

    समझें पानी का सिस्टम
    -कनाड़ नदी में पाताल पानी से पानी आता है। यह और आसपास से आया पानी तिंछा में जाता है। तिंछा के आगे इंटेक संरचना विकसित कर पम्पिंग स्टेशन से पानी असरावद
    -पाइप लाइन से यह पानी लिम्बोदी तालाब तक लाया जा सकता है। इस पूरे नेटवर्क में लगभग 15 किमी का पाइप लाइन का क्षेत्रफल विकसित करना होगा।

    ये हैं परियोजना के मुख्य बिंद

    प्रस्तावित क्षमता : 50 MLD (5 करोड़ लीटर प्रति दिन)
    कुल लंबाई:- 14-15 km
    टिया कनाड़ असत: 9.8 km असरावद लिम्बोदी: 4.4 km)
    संभावित पाइप व्यास: 800-900 mm
    पंपिंग हेड : स्थल सर्वे के बाद निधीरित
    (अनुमानित 20-80 मीटर)
    मध्यवर्ती जलाशय : 1-2 MCM

  • मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    श्योपुर 
     कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे।

    परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी।
    कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या

    उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है।

    सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर
    केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

     

    439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित क्षेत्र
    चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विशेष बाड़े यानी बोमा के साथ निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है। चीतों को नए वातावरण में ढलने तक वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। क्षेत्र में पहले से बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में चीतों की मौजूदगी के साथ पूरे क्षेत्र के वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। 

    प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा तीसरा चीता ठिकाना
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया जाता है। नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। अब इसी क्षेत्र में चीते आने से बुंदेलखंड का यह वन क्षेत्र देश के चीता संरक्षण अभियान के नक्शे पर भी प्रमुखता से आएगा। यानी कूनो तक सीमित रहा चीता संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश के दूसरे बड़े वन क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। 

    देश में 60 हुए चीते, 41 भारत में जन्मे
    चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 5 अक्टूबर को कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के प्रभास, पावक और धीरा के अलावा बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा मौजूद है।

    बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है चीता
    बुंदेलखंड लंबे समय से पानी, पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। चीतों के आने के बाद केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि उनके आसपास सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काम के नए अवसर बन सकते हैं। सरकार की योजना वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। आने वाले समय में गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

    कूनो से शुरू हुआ सफर अब तीन इलाकों तक
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। मध्यप्रदेश में अब कूनो के साथ गांधीसागर और वीरांगना दुर्गावती तीन प्रमुख चीता आवास बन रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर को होने वाली विमुक्ति सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की घटना नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के भौगोलिक विस्तार का अगला चरण भी होगी। 

    नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े
        कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही।

    बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट।

    फैक्ट फाइल

        कुल चीतों की संख्या 60 है।
        41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।
        28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।
        7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।
        54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।
        04 गांधीसागर में।
        2 नौरादेही में रह रहे।

    विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या
    भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

  • PM Kisan Yojana: किसानों को मिल सकते हैं ₹4,000 तक, जानें 24वीं किस्त की तारीख और बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करने का तरीका

    PM Kisan Yojana: किसानों को मिल सकते हैं ₹4,000 तक, जानें 24वीं किस्त की तारीख और बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करने का तरीका

    नई दिल्ली

    देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं. इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह रकम 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. अब किसानों की नजर 24वीं किस्त पर है. पिछली किस्त जून में जारी होने के बाद से ही अगली किस्त को लेकर चर्चाएं तेज हैं. कई रिपोर्ट्स में अक्टूबर में पैसा आने की संभावना जताई गई है, लेकिन अभी तक सरकार ने भुगतान की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। 

    ऐसे में किसानों के लिए सिर्फ किस्त आने का इंतजार करना काफी नहीं है. अगर बैंक खाते की जानकारी में गलती है या ई-केवाईसी अधूरी है, तो भुगतान रुक सकता है. इसलिए अगली किस्त का फायदा लेने के लिए किसानों को अभी से कुछ जरूरी काम पूरे कर लेने चाहिए. साथ ही, जिन किसानों की पिछली किस्त किसी वजह से नहीं मिली थी, वे भी अपना स्टेटस चेक करें. इससे पता चल सकेगा कि भुगतान क्यों रुका था और बकाया रकम मिलने की संभावना है या नहीं। 

    कब जारी हो सकती है पीएम किसान की 24वीं किस्त?
    पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त की तारीख को लेकर किसानों में उत्सुकता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अक्टूबर में किस्त जारी होने की संभावना जताई गई है. हालांकि, जब तक केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक किसी फिक्स्ड तारीख को पक्का नहीं माना जा सकता। 

    किसानों को सलाह है कि वे किस्त से जुड़ी जानकारी के लिए पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर नजर रखें. सोशल मीडिया पर चल रही तारीखों के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचने से बचें। 

    24वीं किस्त पाने के लिए पूरे कर लें ये जरूरी काम
    अगली किस्त का पैसा बिना परेशानी पाने के लिए किसानों को तीन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। 

    ई-केवाईसी पूरी करें- अगर ई-केवाईसी अधूरी है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

    बैंक खाते की जानकारी चेक करें- खाते की जानकारी और योजना में दर्ज विवरण सही होने चाहिए. गलत जानकारी होने पर भुगतान में देरी हो सकती है। 
    लाभार्थी स्टेटस देखें- पोर्टल पर अपना बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करें. इससे भुगतान की स्थिति और किसी संभावित समस्या का पता लगाने में मदद मिलेगी। 

    पीएम किसान में मोबाइल नंबर कैसे अपडेट करें?

    अगर योजना में आपका पुराना मोबाइल नंबर दर्ज है, तो जरूरी सूचनाएं मिलने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में सबसे पहले pmkisan.gov.in पर जाएं और उपलब्ध विकल्पों में मोबाइल नंबर अपडेट करने की सुविधा तलाशें. इसके बाद मांगी गई जानकारी भरें और स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करें। 

    अगर पोर्टल पर नंबर बदलने का विकल्प नहीं मिलता है, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या संबंधित कृषि कार्यालय से मदद लें. ध्यान रखें कि पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाएं और सत्यापन की प्रक्रिया बदल सकती हैं। 

    क्या अगली किस्त के साथ मिल सकते हैं 4,000 रुपये?
    कुछ किसानों के मन में सवाल है कि क्या इस बार 2,000 के बजाय 4,000 रुपये मिल सकते हैं. ऐसा उन मामलों में संभव है, जहां पिछली किस्त की राशि बकाया है और किसान की पात्रता की पुष्टि होने के बाद उस भुगतान को मंजूरी मिल जाती है. ऐसी स्थिति में पिछली किस्त के 2,000 रुपये और नई किस्त के 2,000 रुपये एक साथ मिल सकते हैं। 

    हालांकि, यह रकम सभी किसानों को नहीं मिलेगी. भुगतान पिछली किस्त की स्थिति, पात्रता और बकाया राशि की मंजूरी पर निर्भर करेगा. इसलिए किसान अपना स्टेटस जरूर चेक और किसी समस्या के समाधान के लिए आधिकारिक माध्यमों की मदद लें।