Tag: featured

  • MP में बस सफर होगा आसान, घर बैठे चुन सकेंगे रूट और बोर्डिंग पॉइंट; जल्द शुरू होगी ऐप से टिकट बुकिंग सुविधा

    MP में बस सफर होगा आसान, घर बैठे चुन सकेंगे रूट और बोर्डिंग पॉइंट; जल्द शुरू होगी ऐप से टिकट बुकिंग सुविधा

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही एक बड़ी सुविधा शुरू होने वाली है। रेलवे के आईआरसीटीसी की तर्ज पर अब मोबाइल एप के जरिए घर बैठे बस टिकट बुक करने की तैयारी की जा रही है।मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपी-वायपीआईएल) द्वारा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत यह आधुनिक मोबाइल एप तैयार कराया जा रहा है। इस सेवा की शुरुआत सबसे पहले भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से किए जाने की योजना है।

    इसके जरिए यात्री घर बैठे बस का रूट, चढ़ने का स्थान और गंतव्य चुनकर टिकट बुक कर सकेंगे। शुरुआत भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से करने की तैयारी है। हालांकि, एप का नाम, डाउनलोड लिंक और बुकिंग शुरू होने की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।योजना में टिकट बुकिंग के साथ बसों की निगरानी, जीपीएस और कैमरे चालू रखने और टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर पर कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल है।

    यात्रियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि टिकट किस एप पर मिलेगा, बुकिंग के समय कितना पैसा देना होगा, बस कहां से मिलेगी और किसी कारण से बस छूट जाने पर उसी टिकट से अगली बस में सफर कर सकेंगे या नहीं। उपलब्ध जानकारी में इन सभी सवालों के अंतिम नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं। सरकार जल्द ही एप लॉन्च करने वाली है।

    किस एप पर मिलेगा टिकट?
    मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपी-वायपीआईएल) आईआरसीटीसी की तर्ज पर मोबाइल एप तैयार करा रही है। अभी एप का आधिकारिक नाम, गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर का लिंक और वेबसाइट की जानकारी जारी नहीं हुई है।

    इसलिए फिलहाल किसी अनधिकृत एप या लिंक से टिकट बुक करने से बचें। आधिकारिक जानकारी परिवहन विभाग या सेवा संचालित करने वाली एजेंसी की घोषणा के बाद ही मिलेगी।

    क्या टिकट बुक करते समय ही पूरा किराया देना होगा?
    ऑनलाइन टिकट बुकिंग में भुगतान की व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना के मुताबिक, टिकट की राशि सीधे संबंधित बस ऑपरेटर के खाते में जमा होगी। एप के संचालन के लिए टिकट राशि पर 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक कन्विनियंस फीस लेने की व्यवस्था पर भी काम हो रहा है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हर टिकट के लिए पूरा किराया बुकिंग के समय ही देना होगा या कोई दूसरा विकल्प भी मिलेगा।

    यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या वॉलेट में से कौन-कौन से भुगतान विकल्प होंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी भी सामने नहीं आई है। कन्विनियंस फीस किस पर और किस तरह लागू होगी, यह भी अंतिम नियमों से स्पष्ट होगा।

    बस छूट गई तो क्या दूसरी बस में टिकट मान्य होगा?
    यह यात्रियों के लिए सबसे जरूरी सवालों में से एक है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टिकट किसी खास बस और समय के लिए होगा या उसी रूट पर अगली बस में भी मान्य रहेगा। टिकट बदलने, यात्रा की तारीख या समय में बदलाव, कैंसिलेशन और रिफंड के नियम भी घोषित नहीं हुए हैं।

    इसलिए यात्रियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि एक बस छूटने पर उसी टिकट से दूसरी बस में सफर किया जा सकेगा। बुकिंग शुरू होने से पहले इन नियमों की स्पष्ट जानकारी लेना जरूरी होगा।

    मोबाइल एप और टिकट बुकिंग से जुड़ी मुख्य बातें
    सुगम परिवहन सेवा:
    इस नई व्यवस्था के तहत यात्री घर बैठे ही बस का रूट, चढ़ने का स्थान (बोर्डिंग पॉइंट) और अपने गंतव्य का चयन कर ऑनलाइन टिकट बुक कर सकेंगे। हालांकि, अभी एप का आधिकारिक नाम, डाउनलोड लिंक और लॉन्चिंग की तारीख घोषित नहीं की गई है।

    सुरक्षा और निगरानी: इस योजना के तहत बसों में जीपीएस और कैमरे हर समय चालू रखना अनिवार्य किया गया है, जिससे बसों की लाइव लोकेशन और सुरक्षा पर नजर रखी जा सके।

    कंडक्टर और यात्रियों पर सख्त कार्रवाई: सुगम परिवहन सेवा के नियमों के तहत यदि कोई कंडक्टर किराया लेने के बावजूद यात्री को टिकट नहीं देता है, तो उस पर केस दर्ज करने और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर संबंधित यात्री पर भी कार्रवाई की जाएगी।

    ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की सौगात: सड़क हादसों पर अंक लगाने और चालकों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश में 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, छतरपुर और बैतूल में पांच रीजनल ड्राइविंग सेंटर शामिल हैं।

    यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
    परिवहन विभाग या आधिकारिक एजेंसी द्वारा एप का नाम और लिंक जारी होने तक किसी भी अनधिकृत या फर्जी एप से टिकट बुक करने से बचने की सलाह दी जाती है। बुकिंग, भुगतान के तरीकों, रिफंड और बस छूटने पर टिकट की वैधता से जुड़े स्पष्ट नियम आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएंगे।

    बस कहां से मिलेगी, स्टॉपेज कैसे पता चलेगा?
    प्रस्तावित एप में निर्धारित बस स्टैंड, अधिकृत स्टॉपेज और गंतव्य के अनुसार टिकट बुक करने की सुविधा होगी। यानी यात्री को अपनी यात्रा के लिए तय चढ़ने और उतरने का स्थान चुनना होगा। पहले चरण में भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से सेवा शुरू करने की तैयारी है।

    अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यात्री किसी भी अधिकृत स्टॉपेज से बस पकड़ सकेंगे या कुछ रूटों पर केवल आईएसबीटी से ही बोर्डिंग होगी।

    बस का सटीक प्लेटफॉर्म, स्टॉपेज की लोकेशन और बस की लाइव लोकेशन टिकट बुकिंग एप पर दिखाई जाएगी या नहीं, यह भी अंतिम सुविधाओं की घोषणा के बाद पता चलेगा।

    टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर पर केस, बिना टिकट यात्री पर भी कार्रवाई
    सुगम परिवहन सेवा में किराया लेने के बाद टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर के खिलाफ केस और जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्री पर भी जुर्माना और कार्रवाई हो सकती है। जुर्माने की राशि, जांच की प्रक्रिया और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के अधिकार अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    यात्रियों के लिए जरूरी है कि किराया देने के बाद टिकट जरूर लें और यात्रा पूरी होने तक उसे संभालकर रखें। डिजिटल टिकटिंग से टिकट बिक्री और भुगतान का रिकॉर्ड रखने में मदद मिल सकती है।

    बसों में जीपीएस और कैमरे चालू रखना अनिवार्य
    योजना में शामिल निजी बसों में जीपीएस और कैमरा सिस्टम चालू रखना अनिवार्य होगा। इससे बसों की निगरानी और लोकेशन की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।

    हालांकि, लाइव लोकेशन यात्रियों को एप पर उपलब्ध होगी या नहीं, कैमरों की रिकॉर्डिंग कितने समय तक सुरक्षित रखी जाएगी और शिकायतों पर किस तरह कार्रवाई होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    यात्रियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात
    मोबाइल एप का नाम और आधिकारिक लिंक जारी होने तक टिकट बुकिंग शुरू होने का इंतजार करें। बुकिंग, भुगतान, रिफंड और बस छूटने पर टिकट की वैधता के नियम घोषित होने के बाद ही पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

    हादसे रोकने 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर
    सरकार निजी और व्यावसायिक वाहन चालकों तथा परिचालकों को प्रशिक्षित करने के लिए 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

    भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, छतरपुर और बैतूल में पांच रीजनल ड्राइविंग सेंटर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा 33 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने हैं।

    इनमें से 11 केंद्रों के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं, जबकि 22 केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश में पहले से इंदौर और छिंदवाड़ा में ड्राइविंग एंड ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट संचालित हैं।

     

  • बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा बरकरार, फूल रथ की परिक्रमा ने बढ़ाई उत्सव की रौनक

    बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा बरकरार, फूल रथ की परिक्रमा ने बढ़ाई उत्सव की रौनक

    जगदलपुर.

    बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ रही है. जोगी बिठाई की रस्म के बाद 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है.

    मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया. पूजा-अर्चना और अभिवादन की रस्म के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ और ग्रामीणों ने उसे खींचकर गोलबाजार तथा मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई. रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी. इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार यह विशाल फूल रथ बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है. परंपरा के मुताबिक, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी.

    इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी. दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं. मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी. आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था के सहारे निभाई जा रही यह रस्म बस्तर दशहरा को देश के अनूठे सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान देती है.

  • PM मोदी से मिले Hyundai चेयरमैन ईइसुन चुंग, भारत में भारी निवेश से ऑटो सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    PM मोदी से मिले Hyundai चेयरमैन ईइसुन चुंग, भारत में भारी निवेश से ऑटो सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्‍ली
     दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई मोटर ग्रुप 2026 और 2032 के बीच भारत में 15.5 अरब डॉलर (करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इससे हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड और किआ इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लोकल सोर्सिंग और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े बिजनेस भी मजबूत होंगे।

    नई दिल्ली में हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक के बाद मंगलवार को इस सात साल के निवेश प्लान की घोषणा की गई। यह प्लान कोरियाई ऑटोमोटिव ग्रुप की ग्लोबल ग्रोथ स्ट्रैटेजी में भारत के बढ़ते महत्व को दिखाता है।

    भारत में बनेगी खास निवेश इकाई
    यह पहल भारत को हुंडई मोटर ग्रुप की भविष्य की ग्रोथ, उभरते बाजारों में विस्तार और अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इनोवेशन के लिए एक अहम रणनीतिक बाजार के तौर पर स्थापित करती है।

    इतने बड़े पैमाने पर निवेश की इस पहल को सही ढंग से लागू करने के लिए हुंडई मोटर ग्रुप भारत में एक खास निवेश इकाई बनाएगा। यह इकाई R&D इंफ्रास्ट्रक्चर, भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के बड़े इकोसिस्टम में निवेश का तालमेल बिठाएगी। साथ ही उसे लागू करेगी।

    भारत में निवेश और रणनीतिक विस्तार
    हुंदै मोटर समूह के कार्यकारी चेयरमैन ईसुन चुंग ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान भारत के वाहन उद्योग के भविष्य और समूह की दीर्घकालिक वृद्धि रणनीति पर चर्चा हुई। समूह ने कहा कि निवेश का बड़ा हिस्सा हुंदै मोटर इंडिया और किआ इंडिया की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना और भारत को समूह के प्रमुख वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है। भारत में समूह की मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता 14 लाख से अधिक वाहनों की है।

    कलपुर्जों का स्थानीयकरण बढ़ेगा
    हुंदै स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी बढ़ाकर कलपुर्जों का स्थानीयकरण करेगा। इससे भारत में वाहन कलपुर्जों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिलेगी। समूह नई प्रौद्योगिकियों और नए मोबिलिटी कारोबार में भी निवेश करेगा। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, वाहन वित्त और पुराने वाहनों के पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    रोजगार के मौके बढ़ेंगे
    कंपनी चेयरमैन चुंग ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर हुंदै मोटर के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में से एक है। भारत में समूह की मौजूदगी के 30 साल पूरे होने के बाद यह निवेश अगले 30 साल और उससे आगे तक देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत के औद्योगिक विकास में योगदान मिलेगा।

    भारत ग्रुप के सबसे अहम बाजारों में एक
    हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग ने कहा, 'भारत दुनियाभर में हुंडई मोटर ग्रुप के सबसे अहम और रणनीतिक बाजारों में से एक बना हुआ है। पिछले 30 साल भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाते हैं। यह निवेश अगले 30 साल और उसके बाद भी भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करता है।'

    चुंग ने आगे कहा, 'इस निवेश के जरिए हम रोजगार के और मौके पैदा करेंगे। भारत के लगातार औद्योगिक विकास में मदद करने के लिए अपने पार्टनर्स और स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।'

    कंपनी का बड़ा है प्‍लान
    ग्रुप की योजना बढ़ती मांग को पूरा करने और भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के तौर पर मजबूत करने के लिए अपनी हुंडई और किआ फैसिलिटीज में प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने की है। हुंडई मोटर ग्रुप की भारत में अभी सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 14 लाख से ज्‍यादा गाड़ियों की है। इसमें हुंडई की चेन्‍नई और पुणे फैसिलिटीज और किआ का अनंतपुर प्लांट शामिल हैं।

    दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर अपनी भारतीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में भी लगभग 70 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। इसमें गाड़ी टेस्टिंग ट्रैक भी शामिल है ताकि अगली पीढ़ी की ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के विकास में तेजी लाई जा सके। इसका प्‍लान लोकल इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने का है। साथ ही भारत को एक अहम इनोवेशन हब के तौर पर विकसित करने की भी योजना है।

    ग्रुप की योजना रीजनल पार्टनर्स में निवेश करके और एक ज्यादा मजबूत लोकल सप्लाई चेन विकसित कर घरेलू सोर्सिंग को मजबूत करने की है। यह EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, खास ऑटोमोटिव फाइनेंसिंग और गाड़ियों की रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में भी मौके तलाशेगा। साथ ही, यह ज्‍याादा संभावना वाले स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर मोबिलिटी सर्विसेज का विस्तार करेगा।

    भारत में 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी
    हुंडई मोटर ग्रुप के भारत में अभी 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं। उसने कहा कि इस निवेश से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, R&D और सप्लाई चेन में रोजगार के मौके पैदा होने की उम्मीद है।

    इस घोषणा में हुंडई और किआ के बीच निवेश के बंटवारे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

    हुंडई मोटर ग्रुप ने अपनी सहयोगी कंपनियों के जरिए भारत में कंपोनेंट और सर्विस से जुड़े कामकाज भी शुरू किए हैं। इन कंपनियों में हुंडई मोबिस, हुंडई ट्रांसिस, हुंडई कैपिटल, हुंडई विया और हुंडई ग्लोविस शामिल हैं।

  • MP में IAS अफसरों की नई पोस्टिंग जारी, सुखबीर सिंह को मिली मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी

    MP में IAS अफसरों की नई पोस्टिंग जारी, सुखबीर सिंह को मिली मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी

    भोपाल 
     मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंगलवार देर रात फिर एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है. मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 23 आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर के साथ प्रभार बदले गए हैं. सबसे बड़े बदलाव में पीडब्ल्यूडी, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा, भोपाल गैस त्रासदी व खाद्य सुरक्षा के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह(1997) को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया है. इसके साथ ही उन्हें पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रशासनिक व राजनीतिक दृष्टि से इस प्रशासनिक सर्जरी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। 

    मध्य प्रदेश के इन IAS के हुए ट्रांसफर, प्रभार बदले

        रश्मि अरुण शमी (1994) – अपर मुख्य सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण, नवीन पदस्थापना: अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी राहत और आयुक्त खाद्य सुरक्षा.
        सुखवीर सिंह (1997) – प्रमुख सचिव, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी व खाद्य सुरक्षा, नवीन पदस्थाना: प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री और PWD का अतिरिक्त प्रभार.
        जॉन किंग्सली ए. आर. (2004) – सचिव औद्योगिक नीति व निवेश प्रोत्साहन, व सूक्ष्म, लघु मध्यम उद्यम विभाग, नवीन पदस्थाना: सचिव सूक्ष्म, लघु मध्यम उद्यम विभाग.
        ऊषा परमार (2011), कलेक्टर पन्ना, नवीन पदस्थापना: अपर सचिव, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण.
        राजेश कुमार ओगरे (2012), अपर सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग, नवीन पदस्थापना : कलेक्टर, मऊगंज.
        सोमेश मिश्रा (2013), कलेक्टर नर्मदापुरम, नवीन पदस्थापना: संचालक, एड्स नियंत्रण सोसाइटी.
        राघवेन्द्र सिंह (2013), कलेक्टर जबलपुर, नवीन पदस्थापना: प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड, सह आयुक्त मंडी.
        पवन कुमार जैन (2013), उपसचिव सहकारिता विभाग, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर, भिण्ड.
        अरुण कुमार विश्वकर्मा (2014), कलेक्टर रायसेन, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर जबलपुर.
        आशीष वशिष्ठ (2014), प्रबंध संचालक राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम, समग्र सामाजिक सुरक्षा, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर नर्मदापुरम.
        अंकित अस्थाना (2014), उप सचिव, सामान्य प्रशासन, संचालक कर्मचारी चयन मंडल, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर सिंगरौली.
        आदित्य सिंह (2014), संचालक भोपाल गैस त्रासदी, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर बालाघाट.
        ऋजु बाफना (2014), कलेक्टर शाजापुर, नवीन पदस्थापना: अपर आयुक्त (राजस्व), उज्जैन संभाग.
        हर्ष सिंह (2015), कलेक्टर बुरहानपुर, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर पन्ना.
        संजय कुमार जैन (2015), कलेक्टर मऊगंज,नवीन पदस्थापना: उप सचिव, किसान कल्याण.
        सिद्धार्थ जैन (2016), कलेक्टर हरदा, नवीन पदस्थापना: उप सचिव, वाणिज्यिक कर.
        किरोड़ी लाल मीना (2016), कलेक्टर भिण्ड, नवीन पदस्थापना: उप सचिव, वित्त विभाग.
        गौरव बैनल (2016), कलेक्टर सिंगरौली,नवीन पदस्थापना: उप सचिव, सामान्य प्रशासन व संचालक, कर्मचारी चयन मण्डल.
        रोहित सिसोनिया (2017), उप सचिव किसान कल्याण, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर रायसेन.
        विवेक कुमार (2017), उप सचिव नवीन नवकरणीय उर्जा, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर बुरहानपुर.
        डॉ. परिक्षित संजय राव झाड़े (2017), मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंदौर, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर शाजापुर.
        कुमार सत्यम (2017), कलेक्टर बालाघाट, नवीन पदस्थापना: कलेक्टर हरदा.
        संदीप केरकेट्टा (2018), उप सचिव सीएम, व प्रबंध संचालक बीज निगम, नवीन पदस्थापना: मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास प्राधिकरण

    इन आईएएस को मिले अतिरिक्त प्रभार

        के.सी. गुप्ता (1992) को खाद्य, नागरिक आपूर्ति का अतिरिक्त प्रभार
        शोभित जैन (2000) को कुटीर एवं ग्रामोद्योग का अतिरिक्त प्रभार
        संकेत भोंडवे (2007) को आवासीय आयुक्त, MP भवन दिल्ली का प्रभार
        स्वतंत्र कुमार सिंह (2007) को औद्योगिक नीति का प्रभार
        भरत यादव (2008) को जनसंपर्क विभाग का प्रभार
        अभय बेडेकर (2014) को पुरातत्व एवं संग्रहालय का प्रभार
        अंशुमन राज (2020) को इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम का प्रभार

  • जौहर ट्रस्ट की वित्तीय अनियमितताओं पर ED की कार्रवाई, आजम खान के खिलाफ रामपुर में FIR दर्ज

    जौहर ट्रस्ट की वित्तीय अनियमितताओं पर ED की कार्रवाई, आजम खान के खिलाफ रामपुर में FIR दर्ज

    रामपुर

      उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है. यह एफआईआर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुई है. मामले में बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं। 

    मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ कार्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस. थ्रोट ने पुलिस को शिकायत दी. इसके आधार पर अजीमनगर थाने में FIR दर्ज की गई है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत की गई शिकायत से जुड़ी है। 

    जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया है. हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं. मामले की जांच के बाद ही आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी। 

    भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल
    इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के तहत भी FIR दर्ज की गई है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) और 13(2) भी लगाई गई हैं. इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में एफआईआर में लगाए गए आरोपों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है। 

    जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले में अब जांच के दौरान अहम दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल की जा रही है. ईडी की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच पर निर्भर करेगी. आजम खान की ओर से इस एफआईआर पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 

    क्या है पूरा मामला?
    दरअसल, जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला पैसों के लेन-देन में कथित गड़बड़ी का है. ईडी को शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले पैसों के सोर्स और उनके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई है. जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि ट्रस्ट को पैसा कहां से मिला और उसे किन कामों में खर्च किया गया. इस मामले में सरकारी ठेकेदारों से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है. ईडी इससे पहले ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है। 

    13 अक्टूबर को ईडी ने रामपुर जेल में आजम खान से भी करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. अब एजेंसी की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. हालांकि, अभी ये आरोप हैं और जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। 

  • बस्तर में नक्सलियों का सरेंडर, 6 माओवादियों ने छोड़ा रास्ता; कुल 35 लाख रुपये का था इनाम

    बस्तर में नक्सलियों का सरेंडर, 6 माओवादियों ने छोड़ा रास्ता; कुल 35 लाख रुपये का था इनाम

    बीजापुर
     छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबल के जवानों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। छह माओवादी कैडरों ने सुरक्षाबल के जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। इनमें से चार ओडिशा में सक्रिय थे और दो वेस्ट बस्तर डिवीजन संगठन से भागकर आए थे। इस समूह में चार पार्टी पॉलिटिकल कैडर सदस्य (पीपीसीएम) और दो पार्टी सदस्य (पीएम) शामिल थे।

    35 लाख रुपये के थे इनामी
    मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये कैडर छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल सरेंडर और पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार नक्सल-विरोधी अभियानों और बीजापुर जिले में चल रहे पुनर्वास व कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित थे।

    मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया
    सुरक्षा बलों के लगातार संपर्क और तालमेल के कारण उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। सुरक्षा बलों में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बीजापुर और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) शामिल थे। उन्होंने अपने सरेंडर के मुख्य कारणों के तौर पर सुरक्षा बलों के बढ़ते असर, संगठन के बिखरने, माओवादियों की हिंसक और जन-विरोधी विचारधारा से मोहभंग होने, पुराने कैडरों के सफल पुनर्वास और आदिवासी इलाकों में तेजी से हो रहे विकास का जिक्र किया।

    तीन माओवादियों पर था 8-8 लाख रुपये का इनाम
    सरेंडर करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (30), उनके पति संतोष कुड़ियम उर्फ सुक्कू (27) और पांडो पोडियाम उर्फ सस्मिता (28) शामिल हैं। ये तीनों ओडिशा राज्य इकाई की कंपनी नंबर 8 में प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) के रूप में सक्रिय थे। इनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    इसके अलावा, छत्तीसगढ़ इकाई की कंपनी नंबर 2 में पीपीसीएम के रूप में सक्रिय कोसा मड़वी (30) पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। ओडिशा राज्य इकाई के पार्टी सदस्य देवें मड़कम उर्फ जन्नी (22) पर दो लाख रुपये, जबकि बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र में सक्रिय लल्लू ताती (25) पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    पुलिस के अनुसार, सभी सरेंडर करने वाले माओवादी बस्तर क्षेत्र के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। उन पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षा बलों पर हुए विभिन्न हमलों में शामिल होने का आरोप है। बीत दिनों सुकमा में बेकार और बचे हुए विस्फोटकों को नष्ट करने के दौरान अचानक धमाका हो गया। हादसे में CRPF के चार जवान घायल हो गए।

    पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
    एसपी उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोजगार के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में फिर से शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

    सुकमा के जंगल में हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा मिला
    एक अन्य कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने  सुकमा जिले के जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों, कारतूसों और विस्फोटकों का जखीरा बरामद किया। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान चलाया गया।

    जिला पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने किस्टाराम थाना क्षेत्र के पलाचलमा गांव के पहाड़ी और वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान छिपाकर रखी गई हथियारों की खेप का पता चला। बरामद सामग्री में दो .303 राइफल, एक सिंगल शॉट हथियार, चार बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल), तीन 12 बोर राइफल, दो मजल-लोडिंग बंदूकें और एक देशी पिस्तौल शामिल हैं।

    इसके अलावा, इंसास राइफल की तीन मैगजीन, 26 जिंदा कारतूस, 12 बोर के 20 जिंदा कारतूस, एक एरो बम, बीजीएल के दो गोले, एक वायरलेस सेट और 208 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर भी बरामद किए गए।

    किसने किया सरेंडर
    अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सली कैडरों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या शामिल हैं, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 में पीपीसीएम के पद पर सक्रिय थी। उसके सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता ने आत्मसमर्पण किया, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 की पीपीसीएम थीं और 8 लाख रुपये की इनामी थी। सुक्कु कुडियम उर्फ संतोष ओडिशा स्टेट सीसीएम के पूर्व सुरक्षा गार्ड थे। वहीं, गणेश उइका ने हथियार छोड़ दिए, उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    आत्मसमर्पण करने वालों में कोसा माडवी कंपनी नंबर-2 के ए-सेक्शन कमांडर और पीपीसीएम थे। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा देवे माडकम उर्फ जन्नी पार्टी सदस्य होने के साथ ओडिशा स्टेट एसजेडसीएम जगदीश इरपा के सुरक्षा गार्ड था। इस पर 2 लाख रुपये का इनाम था। लालू ताती ने भी आत्मसमर्पण किया। उसपर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    पुनर्वास नीति से थे प्रभावित
    इन सभी छह लोगों को राज्य सरका
    र की 'नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति' के तहत आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार में सहायता मिलेगी, ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस आत्मसमर्पण की सफलता में डीआरजी बीजापुर, सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतरीन तालमेल, आपसी भरोसा और संवेदनशील रवैये ने अहम भूमिका निभाई।

  • सीएम डॉ. यादव ने किशोर कुमार को किया याद, गायन और अभिनय की विरासत को बताया अमूल्य

    सीएम डॉ. यादव ने किशोर कुमार को किया याद, गायन और अभिनय की विरासत को बताया अमूल्य

    किशोर कुमार, गायन और अभिनय से हमारी स्मृतियों में रहेंगे मौजूद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अभिनेता रघुवीर यादव को मिला इस वर्ष का किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान
    गायक अभिनेता किशोर कुमार की नगरी खंडवा में शीघ्र प्रारंभ होगा एयरपोर्ट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान अलंकरण समारोह 2026 से वर्चुअली जुड़े

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खंडवा की माटी के सपूत बहुमुखी प्रतिभा के धनी गायक और अभिनेता किशोर कुमार महान कलाकार थे। उन्हें संसार से विदा हुए 39 वर्ष हो गये, लेकिन वे अपने अभिनय और गीतों से प्रशंसकों के लिए अमर हैं और आगे भी स्मृतियों में बने रहेंगे। मध्यप्रदेश सरकार, हरफनमौला किशोर कुमार की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार "किशोर कुमार अलंकरण" प्रतिवर्ष प्रतिभा संपन्न कलाकार को प्रदान करती है। वर्ष 2026 के पुरस्कार के लिये अभिनेता रघुवीर यादव का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खंडवा के विकास के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य हो रहा हैं। खंडवा में शीघ्र ही एयरपोर्ट भी बनेगा और जिले के प्रसिद्ध धार्मिक महत्व के स्थल ओंकारेश्वर तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन आसान हो जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस वर्ष राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से अलंकृत किए गए अभिनेता रघुवीर यादव को अलंकरण के लिये बधाई दी। समारोह में रघुवीर यादव को 5 लाख रुपए की सम्मान निधि, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वर्चुअली खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार अलंकरण समारोह और संगीत संध्या को संबोधित कर रहे थे।

    किशोर कुमार का अंदाज याद रहेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गायक और अभिनेता किशोर कुमार का अपनी जन्मभूमि खंडवा से विशेष लगाव था। वे सदैव कहते थे – "दूध जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जाएंगे।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनेक ऐसे गीत हैं जिन्हें किशोर कुमार ने न सिर्फ गाया बल्कि उन गीतों से जीवन दर्शन भी दिया। "रोते-रोते हंसना सीखो, हंसते-हंसते रोना…" और "जिन्‍दगी एक सफर है सुहाना…" ऐसा ही गीत हैं। फिल्म "पड़ोसन" में किशोर कुमार का अलग अंदाज दिखाई दिया, जो दर्शकों को सदैव याद रहेगा। फिल्म "चलती का नाम गाड़ी" उनके फिल्मी कैरियर की एक विशेष फिल्म रही, जिसमें उनके भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार ने भी अभिनय किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किशोर कुमार को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

    विलक्षण है रघुवीर यादव की प्रतिभा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश निवासी रघुवीर यादव विलक्षण प्रतिभा रखते हैं। वे वेब सीरिज 'पंचायत' में प्रधान की भूमिका से चर्चित हुए लेकिन इसके पहले पीपली लाइव के 'बुधिया', फिल्म लगान के 'भूरा' और उसके पहले "मुंगेरीलाल के हसीन सपने" में 'मुंगेरीलाल' का किरदार निभाकर उन्होंने नाम कमाया है। उनका ठेठ ग्रामीण अंदाज माटी की सौन्धी खुशबू का अहसास करवाता है। अभिनेता रघुवीर यादव ने मध्यप्रदेश पर्यटन के लिए लोकप्रिय जिंगल "एमपी अजब है सबसे गजब है" के लिए भी आवाज दी हैं। उन्हें किशोर कुमार राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत कर मध्यप्रदेश सरकार स्वयं गौरवान्वित हो रही है।

    किशोर कुमार राष्ट्रीय अलंकरण समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, संस्कृति राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, विधायक नारायण सिंह पटेल, विधायक श्रीमती छाया मोरे, महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, पूर्व विधायक देवेन्द्र वर्मा और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।h

  • कच्चे तेल में फिर उछाल की आशंका, भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? SBI रिसर्च की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

    कच्चे तेल में फिर उछाल की आशंका, भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? SBI रिसर्च की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

     नई दिल्ली

    भारत के लिए बड़ी चेतावनी (Big Warning For India) आई है और ये वेस्ट एशिया से कनेक्टेड है. इस बड़े संकट को लेकर एसबीआई रिसर्च की ओर से अलर्ट किया गया है. SBI की नई रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि कच्चा तेल फिर से भारत का खेल बिगाड़ सकता है और महज आने वाले 10 दिन में इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में (Crude Oil Price) 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये भारत के लिए परेशानी का सबब होगा, क्योंकि इससे देश की आयतित वस्तुओं की कीमत 130 डॉलर तक जा सकती है। 

    कच्चा तेल… बिगाड़ेगा खेल
    एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम और ग्लोबल सप्लाई की बहाली के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों के लिए तीन संभावित चरणों का फ्रेमवर्क पेश किया गया है. SBI Research के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में निकट भविष्य में तेज गिरावट आने की संभावना बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम (Brent Crude Price) अगले 10 कारोबारी दिनों में संभावित रूप से 110 डॉलर प्रति बैरल तक उछल सकता है. अगर ऐसा होता है कि फिर भारत की कच्चे तेल की बास्केट 130 डॉलर तक पहुंच सकती है। 

    रुपया को स्थिर करने में परेशानी
    सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि कि भू-राजनीतिक टेंशन और आपूर्ति-पक्ष के बढ़ते जोखिमों के कारण, ब्रेंट की कीमत पूर्वानुमान से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल होती है, तो भारतीय बास्केट की कीमत 10 व्यापारिक दिनों की पूर्वानुमान अवधि में लगभग 127 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल होगी। 

    एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये बड़े जोखिम लगातार तेल की कीमतों पर लगातार दबाव डालने का काम रहे हैं, जिससे भारतीय रुपया को स्थिर करने के प्रयासों में जटिलता पेश आ रही है. उन्होंने कहा है कि, 'डेटेड ब्रेंट और इंडियन बास्केट दोनों के लिए रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क का पूर्वानुमान बढ़ती प्रवृत्ति दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की कीमतों में तेज गिरावट की संभावना नहीं है और है भी तो सिर्फ लंबी अवधि में ही संभव है। 

    तेल की कीमतों का Rupee कनेक्शन
    कच्चे तेल की कीमतों का यह दृष्टिकोण ऐसे समय में आया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने इंडियन करेंसी रुपया को संभालने के लिए तमाम उपाय लागू किए हैं. इनका असर भी दिखा है और Indian Rupee अमेरिकी डॉलर की तुलना में 1% तक ऊपर नजर आया है। 

    उपायों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर-आपूर्ति विंडो शामिल है, जिसे खुले विदेशी मुद्रा बाजार से लगभग 10-12 अरब डॉलर की मंथली Dollar डिमांड को स्थानांतरित करने के लिए डिजाइन किया गया है. करेंसी चेंज से जुड़े पिछले हस्तक्षेपों के विपरीत, नई व्यवस्था में भारत के फॉरेक्स रिजर्व से सीधे डॉलर की बिक्री शामिल है। 

    हालांकि, रिसर्च रिपोर्ट ने तरलता की कठिन परिस्थितियों पर भी फोकस किया है और इसमें बैंकों के न्यूनतम डेली कैश रिजर्व रेशियो को बनाए रखने की आवश्यकता को 90% से बढ़ाकर 99% किया गया है, जबकि सरकारी प्रतिभूतियों की 25,000 करोड़ रुपये की नियोजित बिक्री को शामिल है. अनुमान लगाया गया है कि RBI आरबीआई के इन उपायों से समय के साथ बैंकिंग सिस्टम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली जा सकती है. ऐसे में सिर्फ आरबीआई का हस्तक्षेप रुपये को सीमित समर्थन ही दे सकता है। 

    दबाव बहुत, लेकिन भारत में है दम 
    एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि 3 नवंबर से पहले ब्रेंट क्रूड प्राइस काफी हद तक सीमित दायरे में रहेगा, जिनमें मामूली गिरावट की संभावना है. यानी राजनयिक प्रयासों और इमरजेंसी ऑयल रिजर्व जारी करने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसमें समय लगेगा। 

    एक्सपर्ट्स ने इन तमाम दबावों के बावजूद कहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आकस्मिकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, हालांकि FY2027 में भुगतान संतुलन अधिशेष घटकर 55-60 अरब डॉलर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि,  'संक्षेप में कहें तो, भारत का फॉरेक्स रिजर्व सबसे कठिन परिस्थितियों में भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त से अधिक है। 

  • खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    खेती को लाभकारी बनाने पर योगी सरकार का जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

    योगी सरकार का खेती को लाभकारी बनाने पर जोर, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी

    12 से 18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान

    उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों के लिए 15 अक्टूबर से विशेष अभियान

    चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से होगा निस्तारण

    लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी, अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश

    लखनऊ

    योगी सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे कृषकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, जबकि वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी के मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। इसी क्रम में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना, सादाबाद व बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी।

    इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने, गुटबंदी और दलगत विवाद होने जैसे कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आ रही थीं। विशेष प्रयासों के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन्हें चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया।

    आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
    लंबे समय से लंबित मामलों को निस्तारित करते हुए आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई। इसके अलावा बस्ती के औराडीहा व प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई।

    उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के लिए विशेष अभियान
    चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

    अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है। अभियान की अवधि के बाद भी तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

    तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता पर निस्तारण
    चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

    इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

  • MP की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को आज मिलेगा पैसा, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे किस्त जारी

    MP की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को आज मिलेगा पैसा, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे किस्त जारी

    उमरिया 
    मध्य प्रदेश की करीब सवा करोड़ महिलाओं के लिए वो गुड न्यूज आ गई है, जिसका उन्हें इंतजार था। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त की  तारीख सामने आई है। सीएम मोहन यादव इस बार उमरिया जिले के मानपुर जनपद पंचायत अंतर्गत गुरुवाही ग्राम से आज 14 अक्टूबर को लाडली बहना योजना की अक्टूबर महीने की किस्त जारी करेंगे। उमरिया जिले से अन्य विकास कार्यों की सौगात देने के अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव लाडली बहनों के खाते मं 1500-1500 रुपये ट्रांसफर कर सकते हैं।

    हालांकि अभी तक इसे लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन अधिकारियों से जानकारी मिली है कि उमरिया जिले से कल यानी आज 14 अक्टूबर को लाडली बहना योजना की किस्त जारी करंगे । पिछले महीने लाडली बहना योजना की किस्त 13 तारीख को जारी हो गई थी। मगर इस बार मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के चलते इस कार्यक्रम में देरी हुई है। उमरिया में होने वाले भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाडली बहनों के साथ संवाद भी कर सकते हैं।

    ऐसे चेक करें स्टेटस
    लाडली बहना योजना की अगली किस्त जारी होने से पहले अगर आप स्टेटस चेक करना चाहते हैं ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि आपके खाते में पैसा आएगा या नहीं, तो ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर ऐसा कर सकते हैं। स्टेटस चेक करने के लिए लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं। यहां आपको 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करना है। अब अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी और ओटीपी से लॉगिन करें। आपके खाते की जानकारी खुल जाएगी।

    महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को मजबूत कर रही योजना
    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में निरंतर सुधार करना तथा परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका को सशक्त करना है। योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी अधिक प्रभावी भागीदारी निभा सकें।

    योजना के अंतर्गत पात्र सामान्य लाभार्थी महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करने वाली पंजीकृत पात्र महिलाओं को योजना के प्रावधानों के अनुसार प्रतिमाह 900 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। सहायता राशि आधार से जुड़े डीबीटी सक्रिय बैंक खातों में सीधे अंतरित की जाती है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक बनी रहती है।

    जून 2023 से अब तक 40 किस्तों का नियमित अंतरण
    योजना के अंतर्गत जून 2023 में लगभग 1.25 करोड़ लाभार्थी महिलाओं को पहली मासिक आर्थिक सहायता राशि अंतरित की गई थी। सितंबर 2026 तक नियमित रूप से 40 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। अब 14 अक्टूबर को 41वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, अगस्त 2024, अगस्त 2025 और अगस्त 2026 में लाभार्थी महिलाओं को चार बार 250-250 रुपये की विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।

    योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

    136 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन
    उमरिया जिले के गुरुवाही में आयोजित लाड़ली बहना योजना सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुल 14,415.93 लाख रुपये की लागत के 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 8,731.55 लाख रुपये की लागत के 68 कार्यों का लोकार्पण और 5,684.41 लाख रुपये की लागत के 68 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। इन विकास कार्यों में बांधवगढ़ और मानपुर विधानसभा क्षेत्रों के कार्य भी शामिल हैं। बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 5,906.99 लाख रुपये की लागत के 18 कार्यों का लोकार्पण तथा 3,225.22 लाख रुपये की लागत के 46 कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा। वहीं, मानपुर विधानसभा क्षेत्र में 2,824.56 लाख रुपये की लागत के 50 कार्यों का लोकार्पण तथा 2,459.16 लाख रुपये की लागत के 22 कार्यों का भूमि-पूजन होगा।
    अम‍ित कुमार