Tag: featured

  • MP Ladli Behna: 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! ₹1,500 पाने से पहले पूरा करें जरूरी काम

    MP Ladli Behna: 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! ₹1,500 पाने से पहले पूरा करें जरूरी काम

    भोपाल 

    त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है। 

    'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है। 

    कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त?
    सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी। 

    किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम
    कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें। 

    पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है। 

    बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है। 

    समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है। 

    कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस?
    अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी। 

    बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत?
    अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं। 

    किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें
    किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी। 

    ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस

        सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.
        वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.
        अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें
        इसके बाद कैप्चा भरें.
        रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.
        वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.
        लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट

    पैसा नहीं आए तो क्या करें?
    अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है। 

    इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें। 

  • West Bengal Name Change: 27 साल से जारी कवायद, अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम पर फिर गरमाई सियासत

    West Bengal Name Change: 27 साल से जारी कवायद, अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम पर फिर गरमाई सियासत

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि सीएम सुवेंदू अधिकारी की सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने का विधेयक ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा सत्र में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. बीजेपी नेता के मुताबिक यह फैसला राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ने के मकसद से लिया गया है. पिछले 27 सान में तीन बार पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें राज्‍य सरकारों की तरफ से की गई. हालांकि केंद्र और राज्‍य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण पहले ऐसा नहीं हो सका. इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्‍ट बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा रख दिया जाए। 

    अब वेस्‍ट बंगाल नहीं, पश्चिम बंगा?
    समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा
    कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्‍ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी. हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी. नाम बदलने का मुद्दा पश्चिम बंगाल में नया नहीं है. इसके पीछे बंगाली पहचान और औपनिवेशिक दौर से जुड़े नाम को बदलने की दलील पहले भी दी जाती रही है. लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। 

    1999 से चल रही नाम बदलने की कहानी
    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशों का इति
    हास करीब ढाई दशक पुराना है. 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगा नाम रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था. उस समय बांग्ला नाम पर भी चर्चा हुई थी. प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली. 2011 में ममता बनर्जी सरकार आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा. उस समय पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा गया. सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में वेस्‍ट बंगाल नीचे आता है. इससे राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. हालांकि केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी। 

    2016 में फिर बदला प्रस्ताव
    2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई. सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया. 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका. केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई. साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी. यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया। 

    वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन
    समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंगा भवन’ की जानकारी भी दी. उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है. यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा. इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है. वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी। 

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव से वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट कर दी तैयारियों की जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट कर दी तैयारियों की जानकारी

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में ले. जनरल अरविंद चौहान और मेजर जनरल विकास लाल सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस 15 जनवरी 2027 का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर "आर्मी डे परेड- 2027 आपकी सेना आपके पास" की अवधारणा की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया गया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह के इस आयोजन में आने की संभावना है। इसके अलावा अन्य विशिष्ट अतिथि भी भोपाल में हो रहे सेना दिवस कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस के अवसर पर होने वाले प्रस्तावित कार्यक्रमों और विविध गतिविधियों और इस संबंध में की जा रही तैयारियों के बारे में भी अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेना दिवस के अवसर पर आयोजनों को गरिमामय बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा आवश्यक सहयोग किया जाएगा। विभिन्न आयोजनों में राज्य शासन के विभाग सहभागी होंगे। वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष होगा। इसमें युवाओं की भागीदारी के समुचित प्रयास किए जाएंगे।

    कार्यक्रमों की रूपरेखा

    वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने जानकारी दी कि सेना दिवस के अंतर्गत 1 नवम्बर 2026 को संकल्प वृक्ष आयोजन में शौर्य स्मारक परिसर में पौध-रोपण किया जाएगा। माह जनवरी 2027 में सैन्य प्रदर्शनी और एकीकृत युद्ध प्रदर्शन प्रस्तावित है। भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर आर्मी डे मुख्य परेड का आयोजन 15 जनवरी को होगा। साथ ही तात्या टोपे नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से और ओतप्रोत शौर्य संध्या, रण हुंकार का आयोजन किया जाएगा। भेल के जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के प्रदर्शन और भोजताल स्थित वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में सेना के शौर्य, सामरिक क्षमता और रणनीतिक कौशल पर आधारित इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले भी किया जाएगा। मुख्य परेड एवं उससे जुड़े कार्यक्रमों में लगभग 50 हजार प्रतिनिधियों के मौजूद रहने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। युवा शक्ति और नागरिक सहभागिता के प्रयास किए जा रहे हैं।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा में आयोजित सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा में आयोजित सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव में हुए शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षमा मनुष्य का आभूषण है। बड़े मन का व्यक्ति ही क्षमा कर सकता है। क्षमा जहां अहंकार का निर्मूलन करती है, वहीं इससे जीने का आनंद और उत्साह भी बढ़ जाता है। आज क्षमावाणी का अवसर है। सरकार के मुखिया होने के नाते कई बार दायित्वों के निर्वहन के लिए कई लोगों के मन के विरुद्ध भी निर्णय करना पड़ता है। कभी कोई भूल-चूक होती है तो अंतरात्मा अहसास करवाती है और सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा परिसर में सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। परम पूज्य आचार्य 108 समयसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर, लघु, सूक्ष्म, मध्यम एवं उद्यम मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप विशेष रूप से उपस्थित थे।

    प्रधानमंत्री  मोदी ने जियो और जीने दो के उदात्त भाव से दुनिया को दिखाया शांति का मार्ग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र के पावन मंदिर विधानसभा भवन में आचार्य  समयसागर जी महाराज पधारे हैं। यह संयोग है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने "जियो और जीने दो" के उदात्त भाव से दुनिया को शांति का मार्ग दिखाया है। अब रूस और यूक्रेन जैसे दोनों देश कहते हैं कि प्रधानमंत्री  मोदी ने हमें युद्ध के संकट से बाहर निकलने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मछार ने अपने साहस से नागरिकों की जिंदगी बचाई और पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति से जुड़ा मानवता का संदेश दिया।

    गौसेवा के संकल्प को पूरा कर रही है राज्य सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती पर सभी जीव निर्भय होकर, समान भाव और सहअस्तित्व के साथ जीवन जियें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने भोपाल के पास रातापानी अभयारण्य का नामकरण डॉ. विष्णु धर वाकणकर के नाम पर करते हुए टाइगर रिजर्व की स्थापना की। उन्होंने कहा कि ग्वालियर के पास माधव नेशनल पार्क भी स्थापित किया गया है। बुधवार 7 अक्टूबर को सागर जिले में 2 चीतों को विमुक्त किया जा रहा है। एक समय एशिया से लुप्त हो चुके चीतों के रहवास का प्रदेश में यह तीसरा स्थल होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गौपालन को प्रोत्साहित करने, दूध उत्पादन बढ़ाने और गौसेवा के संकल्प को पूरा करने के लिए गत अक्टूबर को राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश में तीसरे से पहले स्थान पर ले जाने के लिये हम संकल्पबद्ध हैं।

    अहिंसा ही सुख-शांति का आधार

    परम पूज्य आचार्य  108 समयसागर जी महाराज ने कहा कि अहिंसा किसी व्यक्ति विशेष का धर्म नहीं, अपितु सुख-शांति का आधार है। धर्म की उपासना किए बिना कोई भी व्यक्ति शांतिपूर्वक जीवन निर्वहन नहीं कर सकता। सम्पूर्ण जीव जगत के संरक्षण, करूणा, दया और अनुकम्पा के भाव के बिना विश्व में शांति नहीं रह सकती। समाज में अहिंसा का भाव बढ़े, इस दिशा में सभी स्तर पर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि क्रोधरूपी अग्नि को क्षमा से ही शांत किया जा सकता है। भारत में क्षमा मांगने की परम्परा लंबे समय से रही है, इसी संदर्भ में क्षमा को वीरस्य भूषणम माना गया है। आत्मानुशासन के बिना हम सक्षम नहीं हो सकते। विवेकपूर्ण जीवन यापन से ही उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में विशेष प्रयास आवश्यक हैं।

    आचार्य  समय सागर जी महाराज के पदार्पण से विधानसभा परिसर हुआ है गौरवान्वित

    विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि पूज्य आचार्य  समयसागर जी महाराज के पदार्पण से विधानसभा परिसर गौरवान्वित हुआ है। आचार्य  गौसेवा को विशेष महत्व देते हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश में जिस तरह गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है, वह प्रशंसनीय है। विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार आचार्य  के संकल्पों को क्रियान्वित कर रही है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हम अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलते हुए भारत को फिर विश्वगुरू बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। संतों की महिमा है कि दुनिया का कोई भी देश हमारे आध्यात्म की अनदेखी नहीं कर पाता, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। भारत युद्ध नहीं, सदैव शांति के पक्ष में रहा है। आचार्य  समयसागर जी महाराज से प्रदेशवासियों को सकारात्मकता, देश भक्ति के संस्कार और देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता का आशीर्वाद प्रदान करने की विनती की। उन्होंने कहा कि आचार्य  के आशीर्वाद से हम लोकतंत्र को सशक्त करते हुए अपने वर्तमान लोक को बेहतर बनाएंगे और विश्व को भी इससे लाभान्वित करेंगे।

    क्षमा मांगने का भाव जैन पंथ में रखता है विशेष महत्व

    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि क्षमा मांगने का भाव जैन पंथ में विशेष महत्व रखता है। पंथ के हजारों आचार्य और विद्वानगण भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में जैन सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्रीगण  जयंत मलैया और  अजय विश्नोई, मप्र गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन,  राहुल कोठारी तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

     

  • कम बारिश और घटते जल भंडार से बढ़ी चिंता, महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से पानी पर 10% कटौती

    कम बारिश और घटते जल भंडार से बढ़ी चिंता, महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से पानी पर 10% कटौती

    मुंबई 
    महाराष्ट्र में पानी की कमी को लेकर सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. कम बारिश और अल-नीनो के असर की चिंता के बीच राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर से कम से कम 10% पानी की कटौती करने का फैसला लिया है. यह कटौती महानगरपालिका, नगरपालिका और ग्राम पंचायतों समेत स्थानीय निकायों में लागू होगी. सरकार का कहना है कि इसका मकसद आने वाले महीनों के लिए पानी बचाना और लोगों के लिए पीने का पानी सुरक्षित रखना है। 

    जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, इस साल मॉनसून के बाद महाराष्ट्र के बांधों में औसतन 75.25% पानी बचा है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 88.82% था. यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार बांधों में कम पानी है. राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है. ऐसे में सरकार ने अभी से पानी बचाने और उसके इस्तेमाल को कम करने का फैसला लिया है। 

    सरकार ने बांधों और जलाशयों में मौजूद पानी के इस्तेमाल की योजना 31 अगस्त 2027 तक के लिए बनाई है. इसमें सबसे पहले लोगों के पीने के पानी की जरूरत पूरी की जाएगी. पानी का हिसाब लगाते समय गर्मी में पानी के उड़ने, बांधों में जमा गाद और बिना अनुमति पानी निकालने जैसी चीजों को भी ध्यान में रखा जाएगा. हर बांध में 10% अतिरिक्त पानी आपात स्थिति के लिए बचाकर रखा जाएगा. अगर पानी की कमी बहुत ज्यादा होती है तो तकनीकी जांच के बाद बांध के सबसे नीचे जमा पानी यानी डेड स्टोरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

    पानी की लीकेज रोकने पर जोर
    16 अक्टूबर से पानी की कटौती लागू होने के साथ स्थानीय निकायों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी काम करना होगा. पाइपलाइन से पानी लीक होने की समस्या को दूर करने के लिए अभियान चलाया जाएगा. सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी को पूरी क्षमता से चलाने को भी कहा है. यहां गंदे पानी को साफ किया जाता है. इस पानी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण और सफाई जैसे कामों में किया जा सकता है. इससे इन कामों के लिए साफ पानी कम इस्तेमाल होगा। 

    उद्योगों को भी पानी बचाना होगा
    सरकार ने उद्योगों से भी पानी बचाने को कहा है. उद्योगों को अपने इस्तेमाल किए गए पानी का कम से कम 30% पानी दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल करना होगा. इसके अलावा बांधों, नदियों और नहरों से बिना अनुमति पानी निकालने पर भी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने संबंधित विभागों को ऐसे मामलों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. बिना अनुमति पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप और दूसरे सामान को जब्त भी किया जा सकता है। 

    खेती के लिए पानी का इस्तेमाल भी तय होगा
    पानी की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है. सरकार की योजना के मुताबिक, सिंचाई के लिए पानी देने से पहले पीने के पानी, जानवरों और चारे की जरूरत पूरी की जाएगी. रबी की अनाज वाली फसलों और चारे वाली फसलों को पहले पानी दिया जाएगा. इसके बाद दूसरी रबी फसलों की जरूरत पूरी की जाएगी. बारहमासी फसलों को पानी तभी मिलेगा, जब जरूरी जरूरतों को पूरा करने के बाद पानी बचा होगा। 

    महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी का असर कई इलाकों में दिखा है. राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है. इन इलाकों में बारिश कम होने के साथ लंबे समय तक सूखा रहने जैसी स्थिति भी सामने आई है. सरकार को चिंता है कि अल-नीनो का असर आगे भी रह सकता है।  

    इसी वजह से अगले मॉनसून तक पानी का हिसाब पहले से रखने की तैयारी की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि आने वाले महीनों में लोगों को पीने के पानी की परेशानी न हो. 16 अक्टूबर से लागू होने वाली 10% पानी की कटौती इसी तैयारी का हिस्सा है। 

  • बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वर्चुअल संबोधन, किसानों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा

    बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वर्चुअल संबोधन, किसानों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती किसानी तथा औषधीय फसलों में समृद्ध मंदसौर जिला अब तरक्की के नए आयामों को स्पर्श कर रहा है। 8-लेन एक्सप्रेस वे, गांधी सागर चीता प्रोजेक्ट, पशुपतिनाथ लोक जैसी कई सौगातें जिले को मिली हैं। आगामी दिनों में मंदसौर नीमच जिले को एयरपोर्ट सुविधा, परिवहन सेवा की बसों के माध्यम से भोपाल की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से मंदसौर जिले से जुड़कर बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में नवीन तकनीक के माध्यम से मंदसौर जिला श्रेष्ठ खेती किसानी कर रहा है। जिले में औषधीय फसलें भी उल्लेखनीय हैं। एक जिला एक उत्पाद के तहत मंदसौर जिले के लहसुन की ब्रांडिंग राज्य शासन द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली दी जाएगी, जिससे किसानों को रात में सिंचाई का झंझट नहीं रहेगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गांव-गांव में दुग्ध समितियां बनाई जा रही हैं। ऑर्गेनिक घी और दूध की योजना साकार हो रही है, दुग्ध उत्पादन 12 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत वृद्धि करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारों की बधाई देते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा पर कार्यक्रम आयोजित करके उन्नत पशुपालकों को पुरस्कार भी दिया जाएगा।

    सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश शासन किसान कल्याण के लिए कृत संकल्पित है। शासन ने सिंचाई योजनाओं के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कार्यक्रम में जिले के उन्नत कृषकों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

    अपेक्स बैंक चेयरमैन श्री महेंद्र सिंह यादव, श्री राजेश दीक्षित, श्री कप्तान सिंह और पूर्व विधायक श्री यशपाल सिंह सिसोदिया ने भी संबोधित किया।

    कृषि उपज मंडी परिसर मंदसौर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में जिला पंचायत अध्यक्ष  दुर्गा विजय पाटीदार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष डॉ मनुप्रिया यादव, नगर पालिका अध्यक्ष  रमादेवी बंशीलाल गुर्जर तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

     

  • बिहार MLC चुनाव: 4 शिक्षक, 4 स्नातक सीटों पर कौन डालेगा वोट, जानें जीत का फॉर्मूला

    बिहार MLC चुनाव: 4 शिक्षक, 4 स्नातक सीटों पर कौन डालेगा वोट, जानें जीत का फॉर्मूला

    पटना
     बिहार विधान परिषद की 8 सीटों (4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।

    इन सीटों पर भाजपा-कांग्रेस और राजद-जदयू के अलावा जनसुराज और आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

    Bihar MLC Election 2026 की इन 8 सीटों का दायरा 30 जिलों और करीब 150 विधानसभा क्षेत्रों तक फैला हुआ है, लेकिन इस चुनाव में आम मतदाता वोट नहीं करते हैं। इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि इन सीटों पर MLC का चुनाव कौन करेगा और जीत का गणित क्या है?

    स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (4 सीटें)
    स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में केवल वही नागरिक वोट डालते हैं, जो कम से कम 3 वर्ष पूर्व स्नातक (Graduate) पास कर चुके हों और जिन्होंने फॉर्म-19 भरा हुआ हो।

    1. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
    इस निर्वाचन क्षेत्र में पटना के अलावा नालंदा और नवादा जिले आते हैं, जिसमें कुल 25 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। यहां 88,000 ग्रेजुएट वोट करेंगे।

    यहां जदयू नेता नीरज सिंह पिछले 3 बार से MLC हैं। इस बार उनका मुख्य मुकाबला जनसुराज प्रत्याशी अनुज सिंह से है, क्योंकि उन्हें जदयू विधायक अनंत सिंह का सपोर्ट हासिल है।

    इसके अलावा राजद से दिलीप कुमार और कांग्रेस से डॉ. असदुल्लाह खान मैदान में हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने हिमांशु पटेल को उतारा है।

    2. दरभंगा स्नातक सीट
    इस क्षेत्र में दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले आते हैं, जिसमें कुल 37 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। यहां 1.15 लाख मतदाता पंजीकृत हैं।

    दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में NDA उम्मीदवार सर्वेश कुमार वर्तमान विधान पार्षद हैं। इस बार उनका मुकाबला राजद के अनिल कुमार झा और कांग्रेस के रजनीकांत पाठक से है। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी हैं।

    3. तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
    मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिले के 28 विधानसभा क्षेत्र इसके अंदर आते हैं। 1.50 लाख ग्रेजुएट इस सीट से MLC चुनेंगे।

    मुख्य पार्टियों में जदयू के अभिषेक झा, राजद की डॉ. रश्मि विनायक गौतम और आम आदमी पार्टी से ऋषि अग्रवाल इस सीट से मैदान में हैं।

    4. कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
    इस क्षेत्र का दायरा सबसे बड़ा है। इसमें सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और बांका समेत 14 जिले शामिल हैं। यहां कुल 64 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस सीट पर 1.20 लाख मतदाता वोट करेंगे।

    प्रमुख प्रत्याशी
        डॉ. एन. के. यादव – भाजपा (NDA / निवर्तमान MLC)
        नितेश कुमार यादव – राजद
        मनोज कुमार जायसवाल – कांग्रेस
        डॉ. रजनीश रंजन – जन सुराज

    शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
    शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में माध्यमिक या उससे उच्च शिक्षण संस्थानों में न्यूनतम 3 वर्षों से काम करने वाले शिक्षक ही मतदाता बन सकते हैं। इसके लिए उन्हें फॉर्म-20 भरना होता है।

    5. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
    स्नातक की तरह इसमें भी 25 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, लेकिन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए पंजीकृत वोटर मात्र 16,600 हैं।

    प्रमुख प्रत्याशी
        प्रो. नवल किशोर यादव – भाजपा (NDA / निवर्तमान MLC)
        डॉ. संजीव कुमार सिंह – राजद
        संजय कुमार यादव – कांग्रेस
        डॉ. दिव्या ज्योति -जनसुराज

    6. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
    यहां लगभग 8,900 मतदाता पंजीकृत हैं।

    प्रमुख प्रत्याशी
        घनश्याम राय – जदयू (NDA)
        डॉ. मदन मोहन झा – कांग्रेस (निवर्तमान MLC)
        अब कुमर राय – राजद
        शंभूनाथ ठाकुर – आम आदमी पार्टी (AAP)

    7. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
    इस सीट में सारण के अलावा सीवान और गोपालगंज जिले आते हैं। पंजीकृत वोटर्स की संख्या लगभग 10,800 है।

    प्रमुख प्रत्याशी:
        आनंद पुष्कर, जदयू (NDA)
        प्रो. जयराम यादव, राजद
        आफाक अहमद, जन सुराज (निवर्तमान MLC)

    8. तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
    यहां लगभग 9,000 शिक्षक वोट डालेंगे। इस सीट से CPI के वर्तमान MLC संजय कुमार का मुख्य मुकाबला NDA प्रत्याशी और जनसुराज के भूषण झा से है।
    जीत का गणित

    विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव साधारण बहुमत से नहीं, बल्कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote – STV) के आधार पर होता है।

    मतदाता अपने मतपत्र पर अपनी पसंद के अनुसार प्रत्याशियों के नाम पर 1, 2, 3 जैसी वरीयता (Preference) दर्ज करते हैं। सबसे पहले पहली वरीयता (1st Preference) के वोटों की गिनती की जाती है।

    यदि कोई प्रत्याशी पहली ही गिनती में कुल पड़े वैध वोटों का 50% + 1 वोट प्राप्त कर लेता है, तो उसे तुरंत विजेता घोषित कर दिया जाता है।

    यदि पहली वरीयता में कोई उम्मीदवार कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को दौड़ से बाहर (Eliminate) कर दिया जाता है और उसके मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता (2nd Preference) के वोटों को बाकी बचे उम्मीदवारों में बांट दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कोई उम्मीदवार आवश्यक कोटा (50% + 1) हासिल न कर ले।

     

  • शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक कलश स्थापना का शुभ समय

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक कलश स्थापना का शुभ समय

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। इस दिन से नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना होगी। इसके साथ ही माता की आराधना शुरू हो जाएगी। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। इसलिए इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। वहीं नवरात्रि का समापन मंगलवार को होगा, इसलिए माता का प्रस्थान घोड़े पर माना जाएगा।

    कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
    11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक का समय शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

    कलश स्थापना कैसे करें?
    नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में साफ पानी भरें और इसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखें। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा शुरू करें।

    मां दुर्गा की पूजा विधि
    सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद कलश और मां दुर्गा की पूजा करें। माता को लाल फूल, चुनरी, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या माता के मंत्रों का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

    माता को क्या भोग लगाएं?
    नवरात्रि में मां दुर्गा को फल, मिठाई, नारियल और सात्विक भोजन का भोग लगाया जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को भोग अर्पित कर सकते हैं। नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

    मां दुर्गा की सवारी का क्या है महत्व?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन का खास महत्व होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और अच्छी वर्षा से जोड़कर देखा जाता है। वहीं माता का प्रस्थान घोड़े पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में देवी के घोड़े पर प्रस्थान को बदलाव और हलचल से जोड़कर देखा जाता है।

    नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान
    नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करें। सात्विक भोजन करें और पूजा-पाठ में मन लगाएं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा दी जाती है।

  • भारत मंडपम में दिखेगा यूपी का स्वाद और हुनर, IITF 2026 में पहली बार ODOP की दस्तक

    भारत मंडपम में दिखेगा यूपी का स्वाद और हुनर, IITF 2026 में पहली बार ODOP की दस्तक

    इंटरनेशनल ट्रेड शो के बाद एक जनपद एक व्यंजन की राष्ट्रीय मंच पर दस्तक

    आईआईटीएफ 2026 में पहली बार लगेगा ओडीओसी का स्टॉल, भारत मंडपम में यूपी के स्थानीय व्यंजन और उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

    14 से 27 नवंबर तक नई दिल्ली में होगा 45वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, ओडीओपी के साथ ओडीओसी के जरिए योगी सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ पहल को मिलेगी नई पहचान

    प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा

    प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर उपलब्ध करा रही योगी सरकार

    लखनऊ,
    ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में आकर्षण का केंद्र बनने के बाद योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल ‘एक जनपद एक व्यंजन' (ओडीओसी) अब राष्ट्रीय मंच पर दस्तक देने जा रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 45वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आईआईटीएफ) 2026 में पहली बार ओडीओसी का स्टॉल लगाया जाएगा। यहां ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के साथ ओडीओसी के जरिए उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में ओडीओसी को मिले मंच के बाद आईआईटीएफ जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व्यापार मेले में इसकी पहली प्रस्तुति इस पहल के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे उत्तर प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

    उत्पाद के बाद अब स्थानीय स्वाद की ब्रांडिंग

    उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की अपनी अपनी विशिष्ट पहचान और पारंपरिक व्यंजन हैं। ओडीओसी की अवधारणा इन्हीं स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक  पहचान, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने की सोच पर आधारित है। अब तक जहां ओडीओपी के माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है, वहीं ओडीओसी स्थानीय स्वाद और पाक परंपराओं को भी इसी व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओसी के स्टॉल के जरिए प्रदेश की इस पाक विविधता को एक व्यवस्थित मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले आगंतुकों, व्यापारियों, निवेशकों और संभावित खरीदारों को उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    ओडीओपी के साथ ओडीओसी, ‘लोकल से ग्लोबल’ का अगला कदम

    प्रधानमंत्री मोदी के विजन ‘लोकल से ग्लोबल’ को योगी सरकार साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों को बाजार, ब्रांड और व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। ओडीओपी इस दिशा में प्रदेश की प्रमुख पहलों में शामिल है। अब ओडीओसी के माध्यम से इसी सोच को प्रदेश की पाक विरासत तक विस्तार दिया जा रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओपी और ओडीओसी की संयुक्त मौजूदगी से उत्तर प्रदेश के उत्पाद और स्वाद, दोनों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों, खाद्य कारोबारियों और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए नए बाजार और व्यापारिक संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।

    ग्रेटर नोएडा के बाद दिल्ली में बढ़ेगा ओडीओसी का दायरा

    ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों को बड़े व्यापारिक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया। अब उसी क्रम में ओडीओसी को नई दिल्ली के भारत मंडपम तक ले जाया जा रहा है। यह बदलाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि ओडीओसी अब केवल प्रदेश की स्थानीय पहल के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के व्यंजनों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने वाले ब्रांडिंग मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

    देश-विदेश के खरीदारों तक पहुंचेगी यूपी की पाक पहचान

    इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर देश के प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में शामिल है। ऐसे मंच पर ओडीओसी की पहली भागीदारी उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करेगी। इसके जरिए प्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखने के बजाय उसे ब्रांड, बाजार और आर्थिक अवसर से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। स्थानीय स्वाद के साथ जुड़े छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।

  • Maharashtra Bike Taxi: अब सिर्फ इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी चलेगी, एग्रीगेटर्स को 6 महीने में बदलनी होगी फ्लीट

    Maharashtra Bike Taxi: अब सिर्फ इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी चलेगी, एग्रीगेटर्स को 6 महीने में बदलनी होगी फ्लीट

     मुंबई

    महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए आने वाले कुछ महीने काफी अहम होने वाले हैं. अगर आप ओला, उबर, रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म के साथ पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे हैं, तो अब ज्यादा समय नहीं बचा है. राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को अपनी फ्लीट पेट्रोल से इलेक्ट्रिक करने के लिए समयसीमा तय कर दी है. पेट्रोल से इलेक्ट्रिक पर जाने के लिए ज्यादातर ऑपरेटरों को 6 महीने का समय दिया गया है, जबकि कुछ लाइसेंस होल्डर्स को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी। 

    महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अक्टूबर में बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स और रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) को इस संबंध में पत्र भेजा है. यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद उठाया गया. सरकार के फैसले के मुताबिक, महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी सेवाओं को तय समयसीमा के भीतर 100% इलेक्ट्रिक फ्लीट की ओर जाना होगा. यानी पेट्रोल बाइक से चल रही सेवाओं को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा। 

    पेट्रोल बाइक वालों को कितने महीने मिलेंगे?

    अभी पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे ऑपरेटरों के लिए पहला चरण 6 महीने का है. इसी अवधि में उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन की अनिवार्यता पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. हालांकि, महाराष्ट्र बाइक टैक्सी रूल्स, 2025 के तहत प्रोविजनल या टेंपररी लाइसेंस वाले ऑपरेटरों को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. यानी इन ऑपरेटरों के लिए कुल समय 9 महीने तक हो सकता है। 

    एग्रीगेटर्स ने मांगी थी 2030 तक की मोहलत
    ओला, उबर, रैपिडो जैसे बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स ने इस बदलाव के लिए ज्यादा समय चाहती थीं. एग्रीगेटर्स ने सरकार से 2030 तक की मोहलत देने की मांग की थी. उनका कहना था कि पूरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने में समय लगेगा. कंपनियों ने अपनी मांग के पीछे महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी और बड़े स्तर पर वाहनों को बदलने में आने वाली चुनौतियों का हवाला दिया था. लेकिन सकार ने 203र0 तक की मोहलत देने के बजाय मौजूदा समयसीमा तय की है। 

    बाइक टैक्सी राइडर्स के सामने चुनौती
    सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बाइक टैक्सी चलाने वाले राइडर भी इस बदलाव को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं. सितंबर में महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दूसरे अधिकारियों को पत्र लिखकर बदलाव के लिए 1.5 साल का समय मांगा था. एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गावडे के मुताबिक, ज्यादातर बाइक टैक्सी राइडर मिडिल या लोअर-मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं. ऐसे में अचानक इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने के लिए बड़ा निवेश करना उनके लिए आसान नहीं है. राइडरों ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी लाइफ को लेकर भी चिंता जताई थी. यानी उनके लिए मामला सिर्फ बाइक बदलने का नहीं, बल्कि उसे चलाने की लागत और चार्जिंग की सुविधा से भी जुड़ा है। 

    पहले 50:50 मॉडल पर हुई थी चर्चा
    महाराष्ट्र सरकार ने शुरुआत में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक बाइक को साथ चलाने वाले 50:50 मॉडल पर भी विचार किया था. इसमें कंपनियों को अपने बेड़े में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह की मोटरसाइकिल रखने की अनुमति देने की बात थी. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, कैबिनेट ने इस मॉडल को मंजूरी नहीं दी. सरकार को आशंका थी कि ज्यादा लागत के कारण कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को टाल सकती हैं।