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  • LPG बुकिंग पर सरकार का सुझाव: पैनिक में न आएं, 7 दिन में PNG कनेक्शन मिलेगा

    LPG बुकिंग पर सरकार का सुझाव: पैनिक में न आएं, 7 दिन में PNG कनेक्शन मिलेगा

     नई दिल्ली

    आजकल चारों तरफ बस एक ही चर्चा है गैस और ईंधन की किल्लत. लेकिन इस संकट के बीच कुछ शातिर लोग आपकी मजबूरी का फायदा उठाने की फिराक में हैं. सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सी. सेंथिल राजन ने एक बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने बताया कि आजकल लोगों के मोबाइल पर गैस बिल APK फाइल के नाम से मैसेज आ रहे हैं. इसमें आपसे बैंक की जानकारी मांगी जाती है और जैसे ही आप डिटेल भरते हैं, आपका बैंक खाता साफ हो जाता है. अगर आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आए, तो सावधान रहें और तुरंत पुलिस में शिकायत करें।

    ईंधन की सप्लाई को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म नहीं होने दिया जाएगा. सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि कहीं भी खत्म की स्थिति न बने. वहीं, मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग के विशेष सचिव राजेश के. सिन्हा और विदेश मंत्रालय के रणधीर जायसवाल भी पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि विदेशों से आने वाली सप्लाई में कोई दिक्कत न आए।

    सरकार अब एलपीजी यानी रसोई गैस के इस्तेमाल को कम करने और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. विदेश मंत्रालय के असीम महाजन ने बताया कि व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपील की जा रही है कि वे जल्द से जल्द पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएं. अच्छी खबर यह है कि पिछले एक हफ्ते में ही  1.25 लाख नए पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं. सरकार ने आदेश दिया है कि पीएनजी के लिए आने वाले किसी भी आवेदन को एक हफ्ते के भीतर मंजूरी दी जाए।

    कुवैत में फंसे भारतीयों की वापसी और उड़ानों का ताजा अपडेट
    अब बात करते हैं उन भारतीयों की जो विदेशों में फंसे हैं. विदेश मंत्रालय के असीम आर. महाजन ने बताया कि 28 फरवरी से अब तक करीब 28 लाख लोग सुरक्षित भारत लौट चुके हैं. कुवैत का हवाई रास्ता 28 फरवरी से बंद है, जिससे वहां फंसे लोगों की चिंता बढ़ गई थी. लेकिन अब राहत की बात यह है कि जजीरा एयरवेज सऊदी अरब के रास्ते स्पेशल उड़ानें चला रही है.कल कोच्चि के लिए पहली स्पेशल फ्लाइट रवाना होगी, जिससे केरल के उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

    सरकार का पूरा जोर इस वक्त दो चीजों पर है. पहला, देश के भीतर ईंधन की कमी न होने देना और दूसरा, साइबर ठगों से जनता को बचाना. पेट्रोलियम मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं ताकि गैस की किल्लत को पीएनजी के जरिए दूर किया जा सके. अगर आप भी कमर्शियल गैस इस्तेमाल करते हैं, तो पीएनजी अपनाना आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है क्योंकि सरकार इसमें पूरी मदद कर रही है।

    चलते-चलते बस इतना ही कहेंगे कि संकट के इस समय में घबराएं नहीं, बल्कि समझदारी से काम लें. न तो किसी अनजान लिंक पर क्लिक करें और न ही गैस की किल्लत को लेकर अफवाहों पर ध्यान दें. सरकार के अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि आपकी रसोई और आपकी गाड़ी का पहिया थमे नहीं।

    रूस से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा है एक्वा टाइटन
    मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग के विशेष सचिव राजेश के. सिन्हा ने जानकारी दी है कि रूसी कच्चे तेल से लदा टैंकर एक्वा टाइटन 21 मार्च को भारत पहुंचेगा. इस विशाल जहाज को एमआरपीएल (MRPL) ने किराए पर लिया है, जो सीधे मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा. ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच रूस से आ रही कच्चे तेल की यह बड़ी खेप भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी अहम मानी जा रही है।

  • खुले में नमाज पर रोक, मुस्लिम देश ने जनता को दी मस्जिद के अंदर इबादत करने की सलाह

    खुले में नमाज पर रोक, मुस्लिम देश ने जनता को दी मस्जिद के अंदर इबादत करने की सलाह

    अबू धाबी

    खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच यूएई ने ईद-उल-फितर को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने ऐलान किया है कि इस बार खुले मैदानों और सड़क पर ईद की नमाज नहीं होगी और सभी नमाज मस्जिदों के अंदर ही अदा की जाएगी. यूएई में जनरल अथॉरिटी ऑफ इस्लामिक अफेयर्स की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी दी. आमतौर पर ईद उल फितर की नमाज बड़े खुले मैदानों में एक साथ अदा की जाती है, लेकिन इस बार ऐस नहीं होगा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ें।

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और अमेरिका भी इसमें शामिल है. यूएई ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में लगी हुई है. कई खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, हालांकि कुछ मलबा गिरने से मामूली नुकसान हुआ है. ऐसे में परिस्थितियों को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि वे ईद की नमाज मस्जिदों के अंदर ही अदा करें, ताकि सुरक्षित रह सकें।

    ईरान यूएई पर कर रहा ताबड़तोड़ हमले
    हाल ही में ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात केंद्र माना जाता है. इस हमले में भारी नुकसान होने की खबर है. इसके अलावा, क्षेत्र में तेल और गैस ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा भी ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिका के मिलिट्री बेसेज पर जमकर मिसाइलें बरसाई हैं. दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक माने जाने वाले दुबई में भी ईरान ने गोले-बम बरसाए, जिसके बाद नागरिकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त अरब अमीरात बेहद चिंतित है।

    इस बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरब और इस्लामिक देशों की बैठक हुई, जिसमें कई देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की.फैसल बिन फरहान अल साउद ने कहा कि सऊदी अरब अपने देश और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है. कुल मिलाकर, पूरे खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. यही वजह है कि ईद को लेकर लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे सुरक्षित रहते हुए इबादत करें।

  • ईरान-इजरायल युद्ध पर थरूर ने उठाए सवाल, सोनिया गांधी को दिखाया आईना और कहा- चुप्पी मोरल सरेंडर नहीं

    ईरान-इजरायल युद्ध पर थरूर ने उठाए सवाल, सोनिया गांधी को दिखाया आईना और कहा- चुप्पी मोरल सरेंडर नहीं

    नई दिल्ली

     अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत की राजनीति में भी उबाल आ गया है. तमाम विपक्षी दल इस मामले में भारत की चुप्‍पी पर सवाल उठाते हुए सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं. सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी. उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. अब सोनिया गांधी को उनकी ही पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आईना दिखाया है. थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है. कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है.

    वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर देश में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे नैतिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट करार दिया है. उन्होंने ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ अखबार में लिखे लेख में कहा कि भारत का यह रुख भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय व्यावहारिक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है. थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है. यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है. इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती. बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी.
    ‘सिद्धांत और व्‍यवहारिकता के बीच संतुलन’

    अब शशि थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन पर आधारित रही है. जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था. आज के बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है. थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है. 1956 में हंगरी, 1968 में चेकोस्लोवाकिया और 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान भारत ने खुलकर विरोध नहीं किया था, क्योंकि उस समय सोवियत संघ भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार था.
    शशि थरूर की दलील

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तर्क दिया कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद अहम है, जहां से हर साल करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है. देश की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम करते हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष के खिलाफ कड़ा सार्वजनिक रुख इन संबंधों को प्रभावित कर सकता है. थरूर ने अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व (खासकर डोनाल्‍ड ट्रंप) अक्सर अपने हितों के खिलाफ जाने वालों पर सख्त रुख अपनाते हैं. ऐसे में भारत के लिए रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति ‘नैतिक भाषणबाजी’ का मंच नहीं, बल्कि वह क्षेत्र है जहां सिद्धांत और शक्ति के बीच संतुलन साधना पड़ता है. बिना पर्याप्त प्रभाव (leverage) के किसी बड़ी शक्ति की खुलकर आलोचना करना व्यावहारिक नहीं होता.
    चुप्‍पी का मतलब युद्ध का समर्थन नहीं

    थरूर के मुताबिक, भारत की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि वह युद्ध का समर्थन करता है, बल्कि यह एक रणनीतिक विकल्प है, जो देश को अपने हितों की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद करता है. उन्‍होंने कहा कि चुप्पी भी एक रणनीति हो सकती है, जो अनावश्यक टकराव से बचाते हुए शांति की दिशा में काम करने का अवसर देती है. उन्होंने आलोचकों को सलाह दी कि वे नैतिक आदर्शवाद और वास्तविक कूटनीतिक जरूरतों के बीच फर्क समझें. महात्मा गांधी और नेहरू के मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विरासत कठोर सिद्धांतों पर अड़े रहने की नहीं, बल्कि समय के अनुसार समझदारी से उन्हें लागू करने की रही है. अंत में थरूर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत का संयम ही उसकी ताकत है. उन्‍होंने कहा कि संयम कमजोरी नहीं, बल्कि वह क्षमता है, जो हमें अपने मूल्यों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है.
    सोनिया गांधी ने क्‍या कहा था?

    सोनिया गांधी ने लिखे लेख में कहा था कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता (अयातुल्लाह सैयद अली हुसैनी खामेनेई) की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए टार्गेटेड हमलों में हत्या कर दी गई थी. वार्ता के बीच किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार को दर्शाती है. उन्‍होंने आगे कहा था कि इस घटना से परे जो बात उतनी ही स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है, वह है नई दिल्ली की चुप्‍पी. बकौल सोनिया गांधी भारत सरकार ने इस हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया है. जब किसी विदेशी नेता की हत्या पर हमारे देश की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिखता और निष्पक्षता छोड़ दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

  • सीएम ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर की दिन की शुरुआत, पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाए गए आयोजन

    सीएम ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर की दिन की शुरुआत, पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाए गए आयोजन

    भोपाल 

    हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

    मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल 
    राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास 
    उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

  • Stock Market Crash: तेल युद्ध में सेंसेक्स 1900 अंक गिरा, जापान से कोरिया तक शेयर बाजार में कोहराम

    Stock Market Crash: तेल युद्ध में सेंसेक्स 1900 अंक गिरा, जापान से कोरिया तक शेयर बाजार में कोहराम

    मुंबई 

    शेयर बाजार में बीते तीन दिन से जारी तेजी पर ब्रेक (Stock Market Crash) लग गया है. मिडिल-ईस्ट में जारी जंग अब एक बड़े तेल युद्ध (Oil War) का रूप लेती जा रही है. खाड़ी देशों में मौजूद तेल-गैस फील्ड्स पर दनादन मिसाइल अटैक होने से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में आग लग गई है और अचानक Brent Crude Price 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इसके चलते एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा नजर आया, तो भारतीय शेयर बाजार खुलने के साथ ही क्रैश हो गया।

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही 1900 अंक का गोता लगा गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 550 अंक से ज्यादा टूटकर ओपन हुआ।

    खुलते ही क्रैश हुए सेंसेक्स-निफ्टी 
    सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,704 की तुलना में फिसलकर 74,750 पर ओपन हुआ और फिर शुरुआती कुछ मिनटों में ही ये गिरकर 74,685 तक टूट गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते एनएसई निफ्टी का भी ऐसा ही बुरा हाल नजर आया और ये अपने पिछले बंद 23,777 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 23,197 पर खुला।

    विदेशी बाजारों में भी मचा कोहराम
    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशों से मिल रहे थे. दरअसल, ईरान के कतर में स्थित सबसे बड़े एलएनजी प्लांट पर हमले और खाड़ी देशों के काउंटर अटैक के चलते अचानक क्रूड की कीमत तेज रफ्तार से भागते हुए 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. इससे बाजारों की चिंता बढ़ी और एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया।

    जापान का निक्केई इंडेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा था, तो हांगकांग का हैंगसेंग 500 अंक से ज्यादा की गिरावट लिए नजर आया. साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 1.50 फीसदी से ज्यादा फिसला. इसके अलावा अन्य विदेशी बाजार भी लाल रंग में रंगे हुए नजर आए।

    सबसे ज्यादा बिखरे ये 10 शेयर
    लंबी गिरावट के बाद शेयर बाजार में बीते तीन दिनों से रौनक देखने को मिल रही थी, लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध में वो भी साफ हो गई और फिर से निवेशकों में भगदड़ नजर आई. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों को देखें, तो बीएसई लार्जकैप में शामिल HDFC Bank Share (4.50%), LT Share (3.50%), Eternal Share (3%), Bajaj Finance Share (2.80%), Axis Bank Share (2.75%), Asian Paints Share (2.60%), Kotak Bank Share (2.56%), M&M Share (2.40%), Adani Ports Share (2.35%) और IndiGo Share (2.30%) टूटकर कारोबार कर रहे थे।

    उछल पड़ा बाजार के डर का पैमाना
    शेयर बाजार में गुरुवार को आई इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बैंकिंग और ऑटो शेयर बिखरे हुए नजर आए हैं. Nifty Bank अपनी ओपनिंग के साथ ही करीब 3 फीसदी के आसपास टूट गया, तो वहीं निफ्टी ऑटो में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली है।

    खात बात ये है कि मिडिल-ईस्ट में Oil War तेज होने के चलते शेयर बाजार के डर के पैमाने यानी India VIX में अचानक उछाल आया है, जो बीते तीन दिनों से लगातार गिर रहा था. इसमें एकदम से 15% के आसपास का उछाल आ गया, जो बाजार में आने वाले दिनों में तगड़े उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

  • धुरंधर 2 का प्रीव्यू हिट, पहली फिल्म की ओपनिंग को पछाड़ते हुए बना नया रिकॉर्ड!

    धुरंधर 2 का प्रीव्यू हिट, पहली फिल्म की ओपनिंग को पछाड़ते हुए बना नया रिकॉर्ड!

    मुंबई

    साढ़े तीन महीने के इंतजार के बाद 'धुरंधर 2' फाइनली थिएटर्स में पहुंच चुकी है. दिसंबर 2025 में 'धुरंधर' देखने के बाद से ही पब्लिक इसके सीक्वल के लिए तैयार बैठी थी, जिसका असर एडवांस बुकिंग पर नजर आया. 'धुरंधर 2' ने गुरुवार की रिलीज से पहले, बुधवार शाम को हुए प्रीव्यू शोज से ही बॉक्स ऑफिस पर तूफानी शुरुआत कर दी है. इसने आते ही 'स्त्री 2' का प्रीव्यूज का रिकॉर्ड मीलों पीछे छोड़ दिया है। 

    'धुरंधर 2' का प्रीव्यू कलेक्शन
    19 मार्च 'धुरंधर 2' की ऑफिशियल रिलीज डेट है, लेकिन इससे एक शाम पहले 18 मार्च की शाम को फिल्म के खास पेड प्रीव्यू शोज रखे गए थे. इन शोज को दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स मिला और एडवांस बुकिंग में ही प्रीव्यू शोज के लिए 42 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन हो चुका था. मगर 'धुरंधर 2' के प्रीव्यू शोज में कई जगह काफी पंगे हुए. हमारी अपनी जानकारी में कई थिएटर्स ने मेकर्स की तरफ से कंटेंट लेट डिलीवर होने की बात कही। 

    इस देरी की वजह से कई स्क्रीन पर फिल्म के शोज पूरी तरह कैंसिल रहे. कई स्क्रीन पर शोज इंटरवल से आगे नहीं बढ़ पाए, तो कई जगह स्क्रीन पर चलने वाले दो शोज में से एक चला और एक कैंसिल करना पड़ा. हालांकि, जहां भी फिल्म के शोज कैंसिल हुए वहां थिएटर्स ने दर्शकों को रिफंड देने में कोई कोताही नहीं बरती. इन रिफंड्स की वजह से फाइनल रिपोर्ट्स में कलेक्शन उससे कम नजर आएगा जितना अनुमान लगाया जा रहा था. फिर भी ये माना जा सकता है कि प्रीव्यू शोज से 'धुरंधर 2' ने कम से कम 35 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन हर हाल में किया है।

    प्रीव्यू कलेक्शन से 'धुरंधर 2' ने बनाया रिकॉर्ड
    बॉलीवुड फिल्मों में प्रीव्यू शोज से सबसे ज्यादा कलेक्शन का रिकॉर्ड 'स्त्री 2' (2024) ने बनाया था. इसके प्रीव्यू शोज ने करीब 11 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. यानी 'धुरंधर 2' ने प्रीव्यू शोज में इससे तीन गुना कलेक्शन किया है. अगर कैंसिल शोज के लिए बहुत ज्यादा रिफंड्स भी हुए हैं, तब भी फाइनल रिपोर्ट्स में 'धुरंधर 2' के प्रीव्यूज का कलेक्शन 'स्त्री 2' से कम से कम दोगुना तो जरूर नजर आएगा।

    प्रीव्यू शोज से 'धुरंधर 2' ने कितना तगड़ा कलेक्शन किया है, ये एक और बात से समझ आता है. दिसंबर 2025 में आई 'धुरंधर' के लिए भी क्रेज कम नहीं था और इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर करीब 33 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. 'धुरंधर 2' के सिर्फ प्रीव्यू शोज का कलेक्शन ही 'धुरंधर' के ओपनिंग डे से ज्यादा हुआ है।

    प्रीव्यू शोज से हुआ ये तगड़ा कलेक्शन बताता है कि 'धुरंधर 2' का क्रेज किस लेवल पर है. गुरुवार को फिल्म के रिलीज डे के लिए तगड़ी बुकिंग है और फर्स्ट डे कलेक्शन के कई रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. ये क्रेज आदित्य धर की शानदार फिल्ममेकिंग के लिए है, जिन्होंने पहली फिल्म में ही दर्शकों को साढ़े तीन घंटे बांधकर रखा था. 'धुरंधर 2' पहली फिल्म से भी थोड़ी लंबी है, लेकिन जनता में इसका क्रेज ऐसा है कि लोग कमर कसकर थिएटर्स पहुंचने लगे हैं।

     

     

  • अमेरिकी आर्मी बेस में रुबियो और रक्षा मंत्री हेगसेथ के पास मंडराया संदिग्ध ड्रोन

    अमेरिकी आर्मी बेस में रुबियो और रक्षा मंत्री हेगसेथ के पास मंडराया संदिग्ध ड्रोन

    वाशिंगटन

    पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है।

    दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे।

    सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद

    पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की "सहनशक्ति" खत्म हो रही है।

    रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

    प्रिंस फैसल ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है।

    ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में 'तेल युद्ध', क़तर और UAE का काउंटर अटैक

    ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है.

    मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है.

    ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

  • Gold-Silver ETFs में भारी क्रैश, 2 महीने में 40% रिटर्न घटा; निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

    Gold-Silver ETFs में भारी क्रैश, 2 महीने में 40% रिटर्न घटा; निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

    मुंबई 

    कुछ महीने पहले गोल्‍ड-सिल्‍वर की खूब चर्चा हो रही थी. हर छोटा, बड़ा निवेशक सोना-चांदी खरीदने की बातें कर रहा था. उसमें भी ज्‍यादातर लोग सोना और चांदी को डिजिटल खरीदने की सलाह दे रहे थे, चाहे वह कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स हो या ना… जिसका नतीजा ये रहा कि बहुत से निवेशकों ने अपने शेयरों में लगाया पैसा या फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में लगाया पैसा निकालकर Gold-Silver ईटीएफ खरीदे।

    अगर जनवरी में खरीदे गए अभी भी इनके पास गोल्‍ड और सिल्‍वर के ईटीएफ हैं, तो अब ये फंस चुके हैं. क्‍योंकि जनवरी से लेकर अभी तक इन ETFs में भारी गिरावट देखने को मिली है. ये ईटीएफ अभी तक 40 फीसदी तक टूट चुके हैं. जबकि निवेशकों को उम्‍मीद थी कि ईरान-अमेरिका के बीच जंग शुरू होने के बाद इनमें तेजी आएगी, लेकिन ठीक इसके उल्‍टा हुआ है और इन मेटल्‍स के ईटीएफ में तेज गिरावट आई है।

    गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में इतनी गिरावट क्‍यों आई? 
    ऐसा माना जाता है कि कोई भी जंग निवेशकों को सेफ असेट की ओर आकर्षित करती है, लेकिन ईरान-अमेरिका के बीच जंग ने सेफ असेट यानी सोना-चांदी के भाव को गिराया है. इसी कारण गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि सोना और चांदी में गिरावट डॉलर में मजबूती के कारण हुआ है

        होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड ऑयल अभी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. इस कारण ग्‍लोबल महंगाई का खतरा पैदा हुआ है. ऐसे में निवेशक सुरक्षित मुद्रा 'डॉलर' को मान रहे हैं, जिस कारण डॉलर में तेजी है. 

        मजबूत डॉलर और महंगाई, जंग के बीच भी सोने-चांदी में तेजी को रोक रहे हैं. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से भी रेट कटौती की उम्‍मीद नहीं दिखाई दे रही है, जो सोने-चांदी की कीमतों पर विपरीत असर डालते हैं. ऐसे में सोने-चांदी की चमक फीकी दिख रही है. 

        तीसरा बड़ा कारण, सोने-चांदी के ईटीएफ में तेजी रुक जाने से और बिकवाली के कारण निवेशक इन असेट को बेचकर बाहर निकल रहे हैं. ऐसे में Gold-Silver ETFs में डिस्‍काउंट्स है. 

    अब आगे क्‍या अनुमान है? 
    एक्‍सपर्ट्स की बातों को समराइज करें तो ये पता चलता है कि अगर अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी का खतरा पैदा होता है तो सोने-चांदी के दाम में अच्‍छी तेजी आज सकती है, जिससे Gold-Silver ETFs के दाम में भी तेजी आ सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी इकोनॉमी मजबूत होती है तो सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आने से ये ईटीएफ के भाव भी गिरेंगे. 

    कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ईरान-इजरायल जंग रुकने के बाद सोने और चांदी के भाव नीचे आ सकते हैं, जो एक बड़ा करेक्‍शन हो सकता है. वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि इस साल सोना-चांदी 15 से 20 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं. 

    रिकॉर्ड हाई से कितना टूटे गोल्‍ड-सिल्‍वर ईटीएफ? 
    Nippon India Silver ETF 29 जनवरी को 360 रुपये पर था, जहां से यह करीब 40 फीसदी गिरकर 235 रुपये पर कारोबार कर रहा है. Nippon India Gold ETF 29 जनवरी को अपने रिकॉर्ड हाई 148 रुपये से 15 फीसदी नीचे है और 127 रुपये पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह, Tata Silver ETF 32%, ICICI सिल्‍वर ईटीएफ करीब 35 फीसदी, टाटा गोल्‍ड ईटीएफ और ICICI गोल्‍ड ईटीएफ 15% तक गिरे हैं. 

    रिकॉर्ड हाई से कितने सस्‍ते हुए सोना-चांदी? 
    MCX पर चांदी का रिकॉर्ड हाई लेवल 4.20 लाख रुपये प्रति किलो है और सोने का भाव 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. 18 मार्च को चांदी की कीमत 2.52 लाख रुपये है और सोना 1.55 लाख रुपये है. ऐसे में चांदी 1.68 लाख रुपये और सोना 38 हजार रुपये सस्‍ता है. 

  • ‘धुरंधर 2’ पर सेंसर बोर्ड का फैसला, हिंसक दृश्यों पर आपत्ति

    ‘धुरंधर 2’ पर सेंसर बोर्ड का फैसला, हिंसक दृश्यों पर आपत्ति

    मुंबई

    बस 1 दिन का इंतजार और… फिर आदित्य धर की मचेअवेटेड फिल्म धुरंधर 2 पर्दे पर होगी. रणवीर सिंह की मूवी को सेंसर बोर्ड ने A सर्टिफिकेट दिया है. मूवी पहले पार्ट से लंबी होगी. इसका रनटाइम 229.6 मिनट यानी 3 घंटे और 50 मिनट के करीब है. CBFC ने कई सारे कट्स मेकर्स को सुझाए थे. इनमें गालियां म्यूट करना और ड्रग्स के सीन्स को लेकर चेतावनी देना, हिंसा को कम करना शामिल हैं। 

    धुरंधर 2 में सेंसर बोर्ड ने लगाए कट
    सीबीएफसी ने खूनखराबे वाले सीन्स को कुछ सेकंड कम करने को कहा. इसके अलावा गालियां म्यूट करना, सबटाइटल्स में डिमोनेटाइजेशन की डेट में बदलाव, फिल्म में पीएम मोदी का रेफरेंस यूज करने के लिए ऑफिशियल सर्टिफिकेट सबमिट करने जैसे आदेश थे। 

    फिल्म में किए गए अहम बदलाव:

    • -कंटेंट को लेकर चेतावनी और ड्रग डिस्क्लेमर स्लाइड्स को जोड़ना.
    • -गालियों और कुछ खास शब्दों/नामों को म्यूट करना या बदलना.
    • -वॉइलेंस के सीन्स को कम करना (जिसमें सिर की चोट, सिर काटना और आंख फोड़ने वाले सीन भी शामिल हैं)
    • -सबटाइटल्स में एडिटिंग, जैसे गलत टेक्स्ट हटाना और उसमें सुधार करना (जैसे लाहौर को दिल्ली करना)
    • -न्यूज रेफरेंस और पीएम के जिक्र को लेकर परमिशन मांगना.
    • -सॉन्ग सबटाइटल्स को जोड़ना. साथ ही हिंदी चैप्टर टेक्स्ट और ऑफिशियल टाइटल फॉर्मेटिंग शामिल करना.
    • -एनिमल वेलफेयर क्लियरेंस या दूसरे जरूरी सर्टिफिकेट को जमा करना.

    CBFC ने 'धुरंधर 2' में 1 मिनट 34 सेकंड की फुटेज पर कैंची चलाई है. इसका फाइनल रनटाइम 229 मिनट है. सेंसर बोर्ड ने कुल 21 कट लगाए हैं. कुछ दिनों पहले मूवी का ट्रेलर रिलीज हुआ था. इसे देखने से साफ मालूम पड़ा कि सेकंड पार्ट में पहले से ज्यादा वॉयलेंस दिखने वाला है. रणवीर सिंह फुलऑन एग्रेशन में नजर आए. मूवी में उनके किरदार हमजा अली मजारी के जसकीरत सिंह रंगी बनने की जर्नी को दिखाया जाएगा. 

    धुरंधर 2 पैन इंडिया मूवी है. इसकी एडवांस बुकिंग के तगड़े आंकड़े सामने आ रहे हैं. फिल्म पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला सकती है. मूवी पहले दिन 200 करोड़ से ज्यादा के आंकड़े के साथ वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर सकती है. फिल्म को ईद रिलीज का तगड़ा फायदा मिलता दिख रहा है.

     

  • दिल्ली के पालम में भयंकर आग, 8 लोग जिंदा जल गए; बिल्डिंग में कैसे फैली थी आग?

    दिल्ली के पालम में भयंकर आग, 8 लोग जिंदा जल गए; बिल्डिंग में कैसे फैली थी आग?

    नई दिल्ली

     इंदौर के बाद आज दिल्ली में आग ने कोहराम मचाया है. दिल्ली में आज सुबह अग्निकांड ने कई जिंदगियां लील लीं. दिल्ली के पालम इलाके में एक इमारत में भीषण आग लगने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई. इसमें तीन बच्चे शामिल हैं. इस घटना में कई लोग घायल हो गए. आग लगने की यह घटना सुबह करीब 6-7 बजे की है. करीब 30 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर आग बुझाने व राहत कार्य में जुटीं. जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह इलाके में पालम कॉलोनी की गली नंबर 2 में है।

    दमकल सेवा के मुताबिक, पालम मेट्रो स्टेशन के पास की गली नंबर 2 में मौजूद बिल्डिंग के एक घर में आग लगने की कॉल मिली थी. इसमें कुछ लोग फसने की आशंका भी थी. दमकल की 30 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया. इसमें राजेंद्र कश्यप का पूरा परिवार रहता है. परिवार के तकरीबन 15 लोग हैं. राजेंद्र कश्यप मार्केट के प्रधान भी है और यह पूरी बिल्डिंग उनकी ही है।

    इसके बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर ब्यूटी पार्लर, चूड़ी की दुकान और दूसरे व्यवसाय चलते हैं. ऊपर के फ्लोर में उनके परिवार के लोग रहते हैं. रविवार सुबह 6:30 बजे के आसपास आग लगी. जब बिल्डिंग में आग लगी तब राजेंद्र कश्यप घर पर नहीं थे. इस बिल्डिंग के ऊपर वाले फ्लोर में ही उनका परिवार रहता है।

    दिल्ली आग पर अधिकारी ने क्या कहा?
    अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के पालम इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं, और दो अन्य घायल हो गए.  अधिकारियों ने यह भी बताया कि अभी भी कई लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।

    पालम में आग कैसे लगी?
    बताया गया कि आज यानी बुधवार की सुबह 6:30 बजे के आसपास आग लगी थी. आग लगते ही हड़कंप मच गया. आग देखते ही घबरा कर परिवार के कई लोग ऊपर से कूद गए. लेकिन बाकी परिवार के लोग अंदर फस गए. इनमें महिलाएं भी शामिल थीं. फायर ब्रिगेड की टीम जब तक पहुंची, तब तक आज बहुत ज्यादा लग गई थी. आसपास के लोग भी कोशिश कर रहे थे. फिलहाल, इस घटना में आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो चुकी है. मरने वालों में 3 बच्चे हैं।

    अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. आग की लपटों से बचने की हताश कोशिश में दो लोगों ने इमारत से छलांग लगा दी, जिससे उन्हें चोटें आईं. उन्हें इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    कहां आग लगी?
    शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस इमारत में एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और चार मंजिलें हैं, साथ ही छत पर एक अस्थायी टिन का शेड भी बना हुआ है. बताया जा रहा है कि बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल का इस्तेमाल कपड़े और कॉस्मेटिक्स के भंडारण के लिए किया जा रहा था, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल का इस्तेमाल रहने के लिए किया जाता था।

    दिल्ली पुलिस की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई है और बचाव और सुरक्षा कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए इलाके को घेर लिया है. इसके अलावा, घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता और अस्पताल पहुंचाने की सुविधा के लिए सेंट्रलइज्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज (CATS) की एक एम्बुलेंस और एक मेडिकल टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. फिलहाल, उनकी प्राथमिकता आग को पूरी तरह से बुझाना और इमारत के अंदर फंसे किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. राहत और बचाव कार्य जारी हैं और अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।

    यह घटना उसी दिन हुई, जब इससे पहले मध्य प्रदेश में भी एक और भीषण आग लगने की खबर आई थी. इंदौर में भी आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई थी. यह आग तब लगी, जब इलेक्ट्रिक कार को रात में चार्जिंग से लगाया गया था. सुबह करीब 4 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लगी और घर में धमाका हुआ।