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  • X फिर डाउन! सेवा ठप होने से यूजर्स को लोड नहीं हो रहा कुछ भी

    X फिर डाउन! सेवा ठप होने से यूजर्स को लोड नहीं हो रहा कुछ भी

    नई दिल्ली

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों की वजह से चर्चा में है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में यूजर्स ने शिकायत की कि यह प्लेटफॉर्म ठीक से काम नहीं कर रहा। लोगों को फीड लोड करने में परेशानी हुई, नई पोस्ट दिखाई नहीं दीं और कई मामलों में वे ऐप और वेबसाइट दोनों ही ठीक से एक्सेस नहीं कर पा रहे थे। अचानक आई इस दिक्कत ने लाखों यूजर्स के डिजिटल एक्सपीरियंस को प्रभावित किया।

    आउटेज की पुष्टि आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector की ओर से भी की गई है। वहां पर कुछ ही समय में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हजारों यूजर्स ने एक साथ दिक्कत दर्ज की, और शिकायतों का ग्राफ अचानक ऊपर चला गया। आमतौर पर इस तरह का स्पाइक इस बात का संकेत होता है कि समस्या डिवाइस या नेटवर्क की नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के सर्वर या सिस्टम स्तर पर है।

    यूजर्स के सामने आईं ये दिक्कतें
    यूजर्स को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उनमें सबसे ज्यादा के लिए दिक्कत फीड का रिफ्रेश ना होना थी। कई लोगों ने बताया कि पोस्ट और कमेंट्स लोड नहीं हो रहे थे, जबकि कुछ को ‘Something went wrong’ जैसे एरर मेसेज दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ यूजर्स को पुरानी पोस्ट तो दिख रही थीं लेकिन नई अपडेट नहीं आ रही थीं, जिससे लग जा रहा है कि बैकएंड सिंकिंग या सर्वर रिस्पॉन्स में गड़बड़ी हुई।

    दुनियाभर में सामने आए मामले
    रिपोर्ट्स की मानें तो आउटेज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों से भी इसी तरह की रिपोर्ट्स सामने आईं, जिससे यह मामला ग्लोबल आउटेज का हो गया है। जब एक ही समय पर अलग-अलग देशों के यूजर्स एक जैसी समस्या रिपोर्ट करते हैं, तो यह संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ी दिक्कत आई है। अच्छी बात यह है कि सीमित संख्या में ही यूजर्स इससे प्रभावित हुए हैं।

    फिलहाल, X की ओर से इस बारे में तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह के आउटेज के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें सर्वर ओवरलोड, अचानक बढ़ा ट्रैफिक, बैकएंड अपडेट या फिर किसी तकनीकी फेलियर की संभावना ज्यादा होती है। पहले भी X को ऐसे आउटेज का सामना करना पड़ा है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो गए। अगर आप भी इससे प्रभावित हुए हैं तो परेशान ना हों और कुछ वक्त इंतजार करें।

  • ईरान वॉर को जल्दी खत्म करो, ट्रंप ने अपने सहयोगियों को दिया फाइनल ऑर्डर

    ईरान वॉर को जल्दी खत्म करो, ट्रंप ने अपने सहयोगियों को दिया फाइनल ऑर्डर

    वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने की कोशिश में हैं. ट्रंप आने वाले कुछ हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाना चाहते हैं ताकि वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। 

    Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से बताए गए 4-6 हफ्तों के टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मई के मध्य में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में एक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के शुरू होने से पहले ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा। 

    समस्या यह है कि ट्रंप के पास युद्ध समाप्त करने के आसान विकल्प नहीं हैं और शांति वार्ता अभी शुरुआती चरण में है. बाहरी राजनीतिक सहयोगियों के साथ बातचीत के दौरान उनका ध्यान कई बार अन्य मुद्दों पर भी गया, जिनमें आने वाले मध्यावधि चुनाव, हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन एजेंट भेजने का उनका फैसला और मतदाता पात्रता नियमों को कड़ा करने वाले कानून को कांग्रेस से पारित कराने की रणनीतियां शामिल हैं। 

    एक ओर तो ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दबाव भी बढ़ाया है. मध्यस्थ देशों के जरिए शुरुआती बातचीत शुरू हुई है, लेकिन अभी शांति वार्ता शुरुआती दौर में ही है और कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।  

    तेल और रणनीति
    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के सामने ये बात रखी कि युद्ध खत्म करने के किसी समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल तक पहुंच मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई ठोस योजना नहीं बनी है। 

    ट्रंप जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिसे वह टालना चाहते हैं. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है, जो उनकी चिंता का एक बड़ा कारण है.ट्रंप के करीबी सहयोगियों में इस बात को लेकर मतभेद है कि आगे क्या रणनीति होनी चाहिए. कुछ लोग कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ सख्त सैन्य कार्रवाई और यहां तक कि ईरान में शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं। 

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने का आदेश देने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा करने से हिचक रहे हैं क्योंकि इससे युद्ध जल्दी खत्म करने का उनका लक्ष्य प्रभावित हो सकता है. उन्हें चिंता है कि यदि युद्ध जारी रहा तो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने की संख्या बढ़ सकती है. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है। 

    वैश्विक असर और जोखिम
    यदि जल्द समझौता नहीं होता, तो होर्मुज में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा. वहीं इजरायल और खाड़ी देशों की भूमिका भी इस संघर्ष को और जटिल बना सकती है। 

    इस युद्ध का असर अमेरिकी राजनीति पर भी दिख रहा है. आगामी चुनावों और बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप पर दबाव है. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. हाल ही में फ्लोरिडा की एक महत्वपूर्ण सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जाने से हड़कंप मचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई और जीवनयापन की लागत आगामी चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। 

    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप खुद भी मानते हैं कि युद्ध उनके अन्य एजेंडे से ध्यान भटका रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा कड़ा हमला कर सकता है। 

  • ईरान से चीन जा रहा LPG जहाज भारत ने बीच में ही खरीद लिया, पेमेंट हुई रुपये में

    ईरान से चीन जा रहा LPG जहाज भारत ने बीच में ही खरीद लिया, पेमेंट हुई रुपये में

    मुंबई 

    अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण साल 2019 से थमा भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार एक बार फिर शुरू होता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए दी गई 30 दिनों की विशेष छूट के बाद ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर चला एक टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला है।

    शिपिंग डेटा (LSEG) के अनुसार, 'ऑरोरा' नामक प्रतिबंधित पोत ईरानी एलपीजी ले जा रहा है। आज इसके मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्गो मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बदलती परिस्थितियों के बीच इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, यह खेप एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदी गई है और इसका भुगतान भारतीय रुपयों में किया जाएगा।
    3 कंपनियों के बीच वितरण

    भारत वर्तमान में दशकों के सबसे गंभीर गैस आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत अपनी 60% मांग आयात से पूरी करता है। इस खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच वितरित किया जाएगा। घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को होने वाली गैस आपूर्ति में पहले ही कटौती कर दी है।

    एक ओर जहां सूत्रों ने खरीद की पुष्टि की है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्तर पर अभी भी सावधानी बरती जा रही है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ईरान से किसी भी लोडेड कार्गो की हमें जानकारी नहीं मिली है।"
    होर्मुज में फंसे जहाजों की निकासी

    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार वहां फंसे अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकरों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। फारस की खाड़ी में फंसे खाली जहाजों पर भी एलपीजी लोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि देश में आपूर्ति सुचारू बनी रहे।

  • खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ

    खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

    खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र

    देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ की धरती  एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुसाइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
    उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं।
    जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन
    मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया।

    केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं। 

    उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा।

    इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण,  बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • ट्रंप की 15 शर्तें: ईरान से जंग खत्म करने के लिए एक महीने का सीजफायर, नो न्यूक्लियर और होर्मुज

    ट्रंप की 15 शर्तें: ईरान से जंग खत्म करने के लिए एक महीने का सीजफायर, नो न्यूक्लियर और होर्मुज

    वाशिंगटन

    इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने के करीब 25 दिन बाद अमेरिका अब सीजफायर की उम्मीद कर रहा है। बीते दिनों ईरान युद्ध में जीत का दावा करने वाले ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ उनकी बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार ने समझौते के लिए ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश की है, जिसमें युद्ध में एक महीने का सीजफायर का जिक्र है। इस घटनाक्रम से अवगत एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

    अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि युद्धविराम योजना पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को सौंपी गई। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की थी। इसके बाद ट्रंप ने भी इसे हरी झंडी दे दी है और कहा है कि ईरानी नेतृत्व के ‘अच्छे लोगों’ के साथ उनकी बातचीत जारी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 15-सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है।

    ट्रंप की योजना में क्या?
    हालांकि पूरा दस्तावेज अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि इस 15-सूत्रीय योजना का ढांचा तीन बड़ी मांगों पर आधारित है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है। ट्रंप कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि ईरान को अपनी परमाणु क्षमताओं को खत्म करना होगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोकना, नतान्ज, फ़ोर्डो और इस्फहान जैसी अहम सुविधाओं को बंद करना और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देना शामिल है।

    प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ने की बात भी
    इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता और संख्या को सीमित करे। यह मांग ईरान की प्रतिरोधक क्षमता को निशाना बनाती है, ना कि सिर्फ उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को। एक और बड़ी मांग यह है कि ईरान हिजबुल्लाह और हूती जैसे क्षेत्रीय गुटों को पैसे देना और हथियार मुहैया कराना बंद करे और पूरे मिडिल ईस्ट में अपने प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ दे। इसके अलावा प्लान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने, और सीजफायर की समय-सीमा तय करने की बात भी है। वहीं इन सब के बदले अमेरिका ईरान को प्रतिबंधों में पूरी तरह राहत दे सकता है।

    USA के कदम से इजरायल हैरान
    उधर, अमेरिका के इस अचानक सीजफायर प्रस्ताव ने इजरायली अधिकारियों को हैरान कर दिया है जो युद्ध जारी रखने के पक्ष में थे. दूसरी ओर, कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद पेंटागन क्षेत्र में 3,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है. वर्तमान में मिडिल ईस्ट में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि सैन्य गतिविधियां बढ़ीं, तो वह खाड़ी में समुद्री बारूद (नेवल माइंस) बिछा सकता है। 
    नया नहीं है पीस प्लान
    विशेषज्ञों का कहना है कि ये 15-सूत्रीय ढांचा पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि मई 2025 के उस प्रस्ताव पर आधारित है जो इजरायली हमलों के बाद विफल हो गया था. पहले की योजना में कथित तौर पर व्यापक शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर सख्त सीमाएं लगाना, यूरेनियम भंडार को बाहर भेजना, संवर्धन सुविधाओं को निष्क्रिय करना और प्रतिबंध राहत निधि के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करना शामिल था, जबकि केवल आंशिक प्रतिबंधों में ढील और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक नागरिक परमाणु कार्यक्रम की पेशकश की गई थी। 

    इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या ये प्रस्ताव औपचारिक रूप से ईरान को प्रस्तुत किया गया है. कुछ राजनयिकों को शक है कि कोई ठोस नया प्रस्ताव मौजूद भी है या नहीं और यदि है भी, तो संभवत इसे अभी तक तेहरान के साथ साझा नहीं किया गया है। 

    वहीं, ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में हुई बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत से ईरान के साथ प्रगति हुई है. हालांकि, तेहरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत को फिर से शुरू करने के बारे में सीमित अप्रत्यक्ष संपर्कों के अलावा कोई गुप्त वार्ता नहीं हुई है। 

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता (ऑफ-रैंप) तलाश रहे हैं. हालांकि, दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास और ईरान के अंदर वार्ता के अधिकार को लेकर अनिश्चितता इस शांति प्रक्रिया में बड़ी बाधा है। 

    मानेगा ईरान?
    ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना को खारिज ही किया है। ऐसे में इसकी बेहद कम संभावना है कि ईरान ट्रंप की इन मांगों को समर्थन देगा। इसकी वजह यह है कि यह प्रस्ताव किसी नई शांति पहल से ज्यादा, पहले नाकाम हो चुकी परमाणु वार्ताओं का ही एक नया रूप लगता है। ईरान का तर्क है कि पिछली बार बातचीत के बीच ही अमेरिका ने हमला कर दिया, जिससे नई गारंटियों पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है।

  • गुजरात में समान नागरिक संहिता: लिव-इन वालों को चेतावनी, शादी में धोखाधड़ी पर होगी 7 साल की सजा

    गुजरात में समान नागरिक संहिता: लिव-इन वालों को चेतावनी, शादी में धोखाधड़ी पर होगी 7 साल की सजा

    अहमदाबाद 

    गुजरात विधानसभा ने  'गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' पारित कर दिया। इसमें शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के बारे में एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है। इसी के साथ गुजरात यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।

    गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 161 सीटों पर भारी बहुमत होने के कारण बीजेपी के कई सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कानून पर अपने विचार रखने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित कर दिया गया। उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा ऐसा भारतीय राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए विधेयक पारित किया है। हालांकि, इस विधेयक के कोई भी प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर लागू नहीं होंगे।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों और न्याय के विचार पर आधारित है. उनके अनुसार इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों और दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है।

    विधानसभा में तकरीबन 8 घंटे से अधिक समय तक चली बहस के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया. गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध करते हुए इसे विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की. विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में पेश किया है और यह कुछ समुदायों के अधिकारों पर असर डाल सकता है. ‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026’ नामक यह कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा जो राज्य के बाहर रहते हैं. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और संविधान द्वारा संरक्षित कुछ पारंपरिक समूहों (Traditional Groups) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

    फर्जी तरीके से विवाह करने पर जेल

    विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशंस का रजिस्‍ट्रेशन, तलाक के लिए समान नियम और बेटियों व बेटों को उत्तराधिकार में समान अधिकार शामिल हैं. कानून के अनुसार, विवाह का रजिस्‍ट्रेशन 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, जबरन, धोखाधड़ी या दबाव में कराए गए विवाह के मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है. बहुविवाह या एक से अधिक विवाह करने पर भी समान सजा का प्रावधान किया गया है. तलाक के मामलों में भी नया प्रावधान किया गया है. इसके अनुसार अदालत की मंजूरी के बाद ही तलाक को वैध माना जाएगा और बिना ज्‍यूडिशियल प्रोसेस के किया गया तलाक अमान्य होगा. ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. इसके साथ ही महिलाओं को बिना शर्त दोबारा विवाह करने का अधिकार भी सुनिश्चित किया गया है।

    गुजरात UCC: 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ

        गुजरात विधानसभा में पारित: गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को बहुमत से पारित कर दिया, जिससे राज्य इसे लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया (पहला उत्तराखंड).

        समान कानून का उद्देश्य: बिल का मकसद सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों पर एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है।

        सीएम भूपेंद्र पटेल का बयान: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे समानता और न्याय पर आधारित कानून बताया, जो सभी नागरिकों पर बिना भेदभाव लागू होगा।

        शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा, नहीं करने पर 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

        जबरन या धोखाधड़ी से शादी पर सजा: जबरन, धोखे या दबाव में की गई शादी पर अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही बहुविवाह/पॉलिगैमी पर भी प्रतिबंध लगाया है।

        तलाक के नियम सख्त: तलाक केवल अदालत की मंजूरी और रजिस्ट्रेशन के बाद ही मान्य होगा, अन्यथा 3 साल तक की सजा हो सकती है. महिलाओं को दोबारा शादी का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

        लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा; उल्लंघन पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है।

        महिलाओं और बच्चों के अधिकार: बिल में महिलाओं के भरण-पोषण, बच्चों की पहचान, विरासत और सुरक्षा को कानूनी रूप से मजबूत करने का प्रावधान है।

        राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और AAP ने इसका विरोध करते हुए इसे चयन समिति को भेजने की मांग की और इसे संविधान विरोधी बताया।

        संवैधानिक आधार: बिल को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत लाया गया है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है।

    लिव-इन में रहने वालों हो जाएं सावधान

    विधेयक में लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाया गया है. यदि कोई जोड़ा इसका पंजीकरण नहीं कराता है तो तीन महीने तक की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यदि लिव-इन में रहने वाले व्यक्तियों की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो उनके माता-पिता को इसकी सूचना दी जाएगी. नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून लागू होगा, जबकि विवाहित व्यक्ति द्वारा लिव-इन संबंध बनाने पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है. मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है. उनके अनुसार विवाह और संबंधों का पंजीकरण कानूनी मान्यता सुनिश्चित करेगा, महिलाओं को परित्याग से बचाएगा और बच्चों को पहचान, भरण-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकारों की बेहतर सुरक्षा देगा. विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने X पर इसे गुजरात और देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया. उन्होंने कहा कि इस कानून से सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए समान कानूनी ढांचा लागू होगा और महिलाओं के अधिकारों को और मजबूती मिलेगी. बता दें कि इस विधेयक को तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था।
    विपक्ष क्‍यों हमलावर?

    उधर, विपक्ष ने इस कानून पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह विधेयक कुछ समुदायों की धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप कर सकता है और इसे जल्दबाजी में लाया गया है. कुछ नेताओं ने इसे अदालत में चुनौती देने की भी बात कही है. गौरतलब है कि भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है. इसी संदर्भ में गुजरात सरकार ने इस कानून को लागू करने की दिशा में कदम उठाया है. सरकार का दावा है कि इससे सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा मिलेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि इस पर व्यापक चर्चा और सहमति की जरूरत थी. कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया है।

  • अलविदा हरीश राणा: पिता के निधन के तुरंत बाद का वो आखिरी संदेश, जिसने सबका दिल तोड़ दिया

    अलविदा हरीश राणा: पिता के निधन के तुरंत बाद का वो आखिरी संदेश, जिसने सबका दिल तोड़ दिया

      गाजियाबाद

    कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा की सांसें मंगलवार को गहरे सन्नाटे में बदल गई. 13 साल तक कोमा में रहने के बाद हरीश ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. आज सुबह उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. उनके जाने की खबर पिता अशोक राणा ने जैसे सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में जैसे ही दी लोगों की आंखें भर आईं. उन्होंने लिखा- सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…

     उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्शटेंशन निवासी हरीश राणा का 13 सालों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे 32 वर्षीय युवक ने मंगलवार शाम दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया था। वहां पर दर्दरहित मृत्यु की प्रक्रिया को पूरा कराया गया। जीवनरक्षक उपकरणों को हटाए जाने के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। बुधवार सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में हरीश राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा। हिंदू रीति रिवाज और ब्रह्माकुमारी के रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है।

    राज एम्पायर सोसायटी में रहते थे हरीश
    हरीश राणा गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने थे। हरीश राणा की मंगलवार को एम्स में इच्छामृत्यु के बाद सोसायटी में गमगीन माहौल रहा। सोसायटी में रहने वाले लोगों को जैसे ही हरीश की मृत्यु की सूचना मिली, सभी भावुक हो गए। सोसायटी के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। सोसायटी के वॉट्सऐप ग्रुप में सुबह 9 बजे अंतिम संस्कार की सूचना में बाद मंगलवार की शाम ही लोगों ने तैयारियां कीं। हरीश के अंतिम संस्कार में सोसायटी से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं।

    हिमाचल के रहने वाले थे हरीश
    हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव के रहने वाले हैं। अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए। वह मुंबई के एक नामी होटल में शेफ का काम किया। 2013 में बेटे हरीश के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्घटना के बाद उन्होंने दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। चंडीगढ़ में हादसे के बाद से हरीश कोमा में चले गए।

    वेजिटेटिव स्टेट में गए हरीश के इलाज की काफी कोशिश की गई, लेकिन वे ठीक नहीं हुए। हरीश के इलाज में अशोक राणा ने दिल्ली वाला घर बेच दिया। राज एम्पायर सोसायटी में आकर रहने लगे। घर चलाने के लिए अशोक राणा ने आसपास के इलाकों में सैंडविच बनाकर बेचना शुरू किया।

    11 को आया फैसला
    13 सालों के अथक इंतजार के बाद भी हरीश के ठीक नहीं होने पर अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी। 14 मार्च को एम्स में इच्छा मृत्यु की आगे की प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया हुई। मंगलवार दोपहर को कोमा में चल रहे हरीश राणा ने अंतिम सांस ली।

  • हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी

    योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं

    यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी 

    इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी

    पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण

    लखनऊ
     प्रदेश में स्वा
    स्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके।

    ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी
    पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी।

    सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी
    ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा।

    गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा
    पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी।

    जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम
    जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

  • एमपी में सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण, 71210 किलोमीटर की सड़कों को किया गया माप

    एमपी में सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण, 71210 किलोमीटर की सड़कों को किया गया माप

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है। विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका। इसके अंतर्गत अब तक राज्य की 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया जा चुका है।

    ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया।

    2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया
    व्यापक सर्वेक्षण में अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे।

    प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

    लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

  • पापाराव और उसके 17 साथियों का सरेंडर, बस्तर में नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम

    पापाराव और उसके 17 साथियों का सरेंडर, बस्तर में नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम

    जगदलपुर

    इंद्रावती के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय के अंत का संकेत देती नजर आ रही है। लंबे समय से सक्रिय शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित समर्पण के लिए जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर रवाना हो चुकी है। यदि यह आत्मसमर्पण सफल होता है, तो इसे बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जा रहा है।

    पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है।

    इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा है जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है।

    पापा राव का समर्पण
        करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का अहम सदस्य रहा है। लंबे समय तक बस्तर में माओवादी गतिविधियों की कमान उसके हाथों में रही।

        ऐसे में उसका आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे के कमजोर पड़ने का प्रतीक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे शेष कैडर का मनोबल भी टूटेगा और वे भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे।

    साल भर में ऐसे बिखरा संगठन
    पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।

    जबकि मिशिर बेसरा और गणपति ये 2 बड़े टॉप के नक्सली बचे हैं, जो वर्तमान में संगठन चला रहे हैं। बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा है जो लड़ाकू है। अगर इसका एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तारी और सरेंडर होता है तो निश्चित ही नक्सल संगठन खत्म है।

    लगातार ऑपरेशन से टूटा नेटवर्क
    पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क पर लगातार सर्जिकल और रणनीतिक हमले किए हैं। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन की रीढ़ पहले ही टूट चुकी थी। इसके अलावा भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता समेत करीब 2700 माओवादियों के आत्मसमर्पण ने संगठन को बिखेर दिया है। अब बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा नेतृत्वकर्ता नहीं बचा है।

    विकास ने बदली तस्वीर
    माओवाद के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का घटता समर्थन भी रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी ‘जनताना सरकार’ का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है।

    झारखंड में बची अंतिम चुनौती
    हालांकि बस्तर, ओडिशा और तेलंगाना में माओवादी प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है, लेकिन उसने अपने ठिकानों के आसपास बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है, जिससे ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    लक्ष्य के करीब सुरक्षा एजेंसियां
    केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म करने के लक्ष्य के बीच तेजी से बदले हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित आत्मसमर्पण इस लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। यदि झारखंड में भी अंतिम अभियान सफल रहता है, तो देश माओवादी हिंसा के लंबे दौर से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।

    जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन

    1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम

    2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम

    1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम

    गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए।

    गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है।

    2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था।

    ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा।

    2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम

    बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनडीह गांव का रहने वाला है। वो पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इसके अलावा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो मिलिट्री का इंचार्ज और प्रवक्ता है। मिशिर बेसरा ने कई बड़े हमलों के आइडिया से लेकर प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में मुख्य भूमिका निभाई।

    एंबुश लगाने में माहिर:

    पहले एंटी नक्सल टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया, 'बेसरा का सबसे बड़ा काम लेवी वसूलना है। इसके पकड़े गए साथियों ने बताया कि संगठन के लिए बेसरा सबसे ज्यादा पैसा इकट्ठा करता है। टीम को बढ़ाने के लिए वो अपने इलाके के सबसे अच्छे लड़ाकों को रिक्रूट करता है। एक लीडर की तरह हमले की रणनीति बनाता है और खुद भी लड़ता है।

    अधिकारी आगे बताते हैं, 'वो लड़ाकों को ट्रेंड करने के लिए पूरे देश में जाता है। बेसरा के जैसा एंबुश संगठन में कुछ ही लोग लगा पाते हैं। यही वजह है कि उसे पकड़ने के लिए मेरे वक्त तक (2023 तक) करीब 8 टीमें तैनात की गई थीं। अब तो और भी टीमें बन गई हैं।'

    ‘बेसरा लड़ाकों का घेरा बनाने, एंबुश लगाने और बंकर बनाने में माहिर है। उसका काम हमले की रणनीति बनाना और एग्जीक्यूट होने तक उसकी निगरानी करना है। वो अपने इलाके में नई भर्तियां भी करता है। 1990 से नक्सली गतिविधियों में एक्टिव है। उसे कोल्हान-सारंडा जंगलों में किए गए कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।’