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  • थाईलैंड में खोजा गया कोरोना का नया प्रकार, इंसानों को बीमार कर सकता है

    थाईलैंड में खोजा गया कोरोना का नया प्रकार, इंसानों को बीमार कर सकता है

    बैंकाक 

    थाईलैंड में चमगादड़ों के अंदर एक नया कोरोना वायरस मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है. टोक्यो यूनिवर्सिटी के वायरस एक्सपर्ट्स की टीम ने यह खोज की है. यह वायरस SARS-CoV-2 (कोविड-19 पैदा करने वाले वायरस) से मिलता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह तुरंत कोई बड़ी महामारी नहीं फैलाएगा, लेकिन भविष्य में खतरा हो सकता है. इस खोज से वैज्ञानिकों को वायरस की निगरानी बढ़ाने की चेतावनी मिली है। 

    टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो की अगुवाई वाली टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में घोड़ों की नाल जैसे कान वाले चमगादड़ों (Horseshoe bats) में यह नया वायरस पाया. यह वायरस Clade B नामक ग्रुप का है. यह SARS-CoV-2 संबंधित कोरोनावायरस का नया समूह है. शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों के नमूने लेकर लैब में टेस्ट किए. अध्ययन 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'Cell' में प्रकाशित हुआ। 

    इस वायरस की जेनेटिक्स कोविड-19 वायरस से काफी करीब है. प्रयोगों में पता चला कि यह मानव कोशिकाओं के ACE2 रिसेप्टर से जुड़ सकता है, यानी यह इंसानों में घुसने की क्षमता रखता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह वायरस धीरे बढ़ता है और जानवरों में संक्रमण नहीं फैला पाया। 

    वायरस कितना खतरनाक है?
    प्रोफेसर केई सातो और उनकी टीम के अनुसार, यह वायरस अभी इंसानों के लिए तत्काल खतरा नहीं है. मौजूदा कोविड-19 के टीके और दवाएं इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई हैं. प्रयोगशाला परीक्षणों में यह वायरस कमजोर साबित हुआ। 

    फिर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि चमगादड़ों में वायरस लगातार बदलते रहते हैं. अगर इसमें छोटा-सा बदलाव आया तो यह ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बन सकता है. थाईलैंड और आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए यह वायरस युन्नान (चीन) और उत्तरी लाओस से आया हो सकता है। 

    प्रकृति में हजारों तरह के वायरस मौजूद हैं. चमगादड़ वायरसों के बड़े भंडार हैं. एशिया में चमगादड़ों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए. अभी कोई इंसान इस नए वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है. फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों या उनके मल-मूत्र वाले इलाकों के पास जाता है तो सावधानी बरतनी चाहिए। 

    सीख क्या है इस खोज से?
    कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया जान गई है कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं. इस नए वायरस की खोज समय पर हुई है. इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक और SARS-CoV-2 संबंधित वायरस मिल चुका है। 

    वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी खोजों से हम भविष्य की महामारियों को रोक सकते हैं. नियमित निगरानी, शोध और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जंगलों, गुफाओं या चमगादड़ों वाले इलाकों में सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। 

  • ISI के लक्ष्य पर दिल्ली का ऐतिहासिक मंदिर और सोनीपत का ढाबा, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

    ISI के लक्ष्य पर दिल्ली का ऐतिहासिक मंदिर और सोनीपत का ढाबा, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली

     दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित शहजाद भट्टी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई सनसनीखेज जानकारियां दी हैं, जिनसे पता चला है कि दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर भी आतंकवादियों के निशाने पर था. सूत्रों के मुताबिक इस मॉड्यूल से जुड़े एक आरोपी ने मंदिर की बाकायदा रेकी की थी. उसने मंदिर परिसर, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो तैयार किए थे. जांच एजेंसियों को शक है कि ये फोटो और वीडियो पाकिस्तान में बैठे सोशल मीडिया हैंडलर्स और कथित आईएसआई संपर्कों को भेजे गए थे। 

    जांच में सामने आया है कि साजिश सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं थी. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मंदिर परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर गोलीबारी करने की योजना थी. इसके जरिए बड़े स्तर पर दहशत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही थी। 

    दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार इस मॉड्यूल का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबा भी आतंकियों के निशाने पर था. इस ढाबे पर हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है. आरोपियों ने खुलासा किया कि वहां हैंड ग्रेनेड हमला कर भारी तबाही मचाने की योजना बनाई गई थी. एजेंसियों को आशंका है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों को टारगेट कर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी थी। 

    हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी
    इसके अलावा हरियाणा के हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने का खुलासा हुआ है. पूछताछ में सामने आया कि कैंप के वीडियो और आसपास की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजी गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी और कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गई थीं। 

    सूत्रों के मुताबिक मॉड्यूल का टारगेट सिर्फ दिल्ली और हरियाणा तक सीमित नहीं था. उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस स्टेशनों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाने की योजना थी. माना जा रहा है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले कर आतंकवादियों का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना और भय का माहौल बनाना था। 

    बता दें कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने बीते दिन दिल्ली समेत कई राज्यों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए थे. गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई राज्यों की पुलिस भी इस मामले में इनपुट साझा कर रही है। 

    जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मॉड्यूल को फंडिंग कहां से मिल रही थी, सोशल मीडिया के जरिए किस तरह संपर्क बनाए जा रहे थे और भारत में इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। 

    मंदिर और मुरथल को लेकर क्या थी साजिश
    मॉडयूल की प्लानिंग थी कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और पैरामिलिट्री के जवानों को निशाना बनाया जाएगा। सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी करके पैनिक फैलाने और व्यवधान पैदा करने की कोशिश थी। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों को दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर मौजूद एक मशहूर ढाबे पर हमले का काम भी दिया गया था। यहां हर दिन हजारों लोग आते हैं। दहशतगर्दों की साजिश थी कि भीड़भाड़ के बीच अचानक गोलीबारी की जाए, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हों।

    मिलिट्री कैंप पर भी करने वाले थे हमला
    दहशतगर्त हरियाणा के हिसार में मौजूद एक मिलिट्री कैंप पर भी हमले की योजना तैयार कर रहे थे। उन्होंने कैंप की रेकी की थी और वीडियो बनाए थे। इन्हें सीमा पार भेजा गया था। उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस थानों पर भी आतंकी हमले की साजिश की बात सामने आई है।

  • तीसरे दिन शुकराना यात्रा: सीएम ने BJP पर बोला हमला, बंगाल में सत्ता पर आने के बाद हालात पर जताई चिंता

    तीसरे दिन शुकराना यात्रा: सीएम ने BJP पर बोला हमला, बंगाल में सत्ता पर आने के बाद हालात पर जताई चिंता

    चंडीगढ़

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की शुकराना यात्रा का आज तीसरा दिन है। जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट अमेंडमेंट 2026 के लागू होने के बाद सीएम पूरे पंजाब में यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दाैरान बठिंडा में मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। शहर के अमरीक सिंह रोड पर लोगों को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां पर बुरा हाल हो चुका है। मान ने कहा कि पंजाब में कुछ पार्टियां आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब के लोग बहुत समझदार हैं। फिर भी राज्य के लोग ऐसी पार्टियों से सचेत रहें। मान ने कहा कि परमात्मा ने उन्हें हिम्मत दी, जिस कारण वे बेअदबी का इंसाफ देने के लिए कानून बनाने में कामयाब हुए।  

    अपनी चार दिवसीय शुक्राना यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले, मान ने जालंधर के ओल्ड बारादरी स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से कहा: “पंजाब की कठिन परिश्रम से अर्जित शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को कोई भंग नहीं कर सकता। पंजाब एक उपजाऊ भूमि है जहाँ कोई भी फसल उगाई जा सकती है, लेकिन नफरत के बीज यहाँ नहीं बोए जा सकते। हालिया विस्फोट पंजाब में भाजपा के प्रवेश के संकेत हैं।”

    मान ने इन घटनाओं को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनावोत्तर भाषणों से जोड़ा और उनके नारे "बंगाल सरकार हमारी है, अब पंजाब की बारी है" का हवाला दिया। उन्होंने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों को सांप्रदायिक संगठन बताया और कहा कि पंजाब, जिसने AK-47 के दौर को पार कर लिया है, अपनी "मजबूत भाईचारे" के बल पर आज भी दृढ़ है।

    जांच बनाम आरोप
    मुख्यमंत्री के दावे पुलिस के मौजूदा रुख के विपरीत हैं। जहां मान ने बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर और खासा सेना छावनी के पास हुए विस्फोटों के लिए भाजपा की "कार्यशैली" को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये विस्फोट पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित आईईडी विस्फोट थे।

    इन टिप्पणियों पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया हुई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मान को कानूनी नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। भाजपा ने इन आरोपों को राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलताओं से ध्यान भटकाने का "दुर्भावनापूर्ण प्रयास" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जब एक संवेदनशील आतंकी जांच चल रही हो, तब किसी राजनीतिक दल पर आरोप लगाना "खतरनाक" है।

    चुघ ने कहा कि मान ने बिना किसी सबूत के भाजपा पर संलिप्तता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए चुघ ने कहा, "इसीलिए उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि, झूठी सूचना फैलाने और जन अशांति भड़काने के प्रयास के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।"

    “सवाल सीधा सा है: क्या मुख्यमंत्री पंजाब की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, या वे राष्ट्रविरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं? जिस दिन पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य का जश्न मना रहा है, उस दिन भाजपा जैसी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी को विस्फोटों से जोड़ने का मान का प्रयास न केवल एक राजनीतिक झूठ है, बल्कि लाखों भारतीयों के जनादेश और विश्वास का अपमान है,” चुघ ने कहा।

    उन्होंने कहा कि अगर मान सात दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लेते और सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।

    जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के उपलक्ष्य में शुरू की गई मान की शुक्राना यात्रा 9 मई को फतेहगढ़ साहिब में समाप्त होने वाली है।

  • राज्यपाल की कार्रवाई: ममता मंत्रिमंडल हटाया, विधानसभा को किया खारिज

    राज्यपाल की कार्रवाई: ममता मंत्रिमंडल हटाया, विधानसभा को किया खारिज

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं। 

    अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट
    यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है। 

    पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स
    · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है। 

    · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। 

    · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। 

    · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है। 

    · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। 

    सवाल-जवाब
    राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है। 

    पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है। 

    क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं। 

    मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

  • इक्रा रिपोर्ट: 2026-27 में बिजली की मांग में तेजी, 5-5.5% तक बढ़ोतरी संभव

    इक्रा रिपोर्ट: 2026-27 में बिजली की मांग में तेजी, 5-5.5% तक बढ़ोतरी संभव

    नई दिल्ली 
     औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही। 

    इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी। 

    देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी। 

    इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है। 

    उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था। 

    समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था। 

    वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है। 

    अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं। 

    बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है। 

    इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है। 

    इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

  • चांदी महंगी हुई ₹13,000 में तीन दिन, हाई से ₹2 लाख टूटी; सोने का भाव भी सामने

    चांदी महंगी हुई ₹13,000 में तीन दिन, हाई से ₹2 लाख टूटी; सोने का भाव भी सामने

     नई दिल्ली
    सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rate) हाई से क्रैश होने के बाद अब एक बार फिर से रफ्तार पकड़े हुए नजर आ रही हैं. इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जोरदार गिरावट के बाद अचानक दोनों कीमती धातुओं के भाव लगातार बढ़ रहे हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से 2 लाख रुपये से अधिक सस्ती हो चुकी चांदी की कीमत सिर्फ 3 दिन में 13000 रुपये से ज्यादा बढ़ चुकी है. सोना भी कुछ कम नहीं है और इसकी चमक में भी तेज इजाफा हो रहा है। 

    चांदी फिर मारने लगी उछाल 
    MCX Silver Price पर नजर डालें, तो गुरुवार को खुलने के साथ ही इसकी कीमत में फिर से उछाल आया है. बीते कारोबारी दिन 2,53,265 रुपये पर क्लोज हुआ वायदा चांदी ओपनिंग के साथ ही उछलकर 2,57,055 रुपये पर पहुंच गई. इस सप्ताह पहले दिन सोमवार को जरूर सिल्वर प्राइस टूटा था और 2,43,895 रुपये पर आ गई थी, लेकिन अब सिर्फ 3 दिन में ही इसका भाव 13,160 रुपये उछल चुका है। 

    इससे पहले एमसीएक्स पर चांदी अपने हाई लेवल से लगातार टूटती हुई नजर आ रही थी. अमेरिका-ईरान में तेज जंग के बावजूद इसका भाव बढ़ने के बजाय कम हो रहा था. बता दें कि जनवरी महीने में 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 Kg Silver Price वायदा कारोबार में अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर पार कर गई थी और 4,57,328 रुपये पर जा पहुंची थी. लेकिन इस स्तर पर पहुंचने के बाद से ये लगातार सस्ती हुई और ताजा बढ़ोतरी के बावजूद 2,00,273 रुपये सस्ती मिल रही है। 

    सोना भी लगातार भाग रहा
    न सिर्फ चांदी की कीमत में उछाल देखने को मिल रहा है, बल्कि कीमती पीली धातु सोने का भाव भी बढ़ रहा है और ये महंगा होता जा रहा है. बुधवार को 5 जून की एक्सपायरी वाले गोल्ड का रेट एमसीएक्स पर 1,52,132 रुपये पर क्लोज हुआ था और गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही 1,52,887 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. चांदी की तरह ही वायदा सोना भी मंगलवार को 1,49,339 रुपये के भाव से सिर्फ तीन दिनों में अब तक 3548 रुपये महंगा हो गया है। 

    अपने हाई से अब इतना सस्ता Gold
    भले ही इस सप्ताह MCX Gold Rate तेज रफ्तार से भागता हुआ नजर आ रहा है और रोज इसका भाव बढ़ रहा है, लेकिन अगर सोने के लाइफ टाइम हाई लेवल से तुलना करें, तो अभी भी ये कीमती धातु काफी सस्ती मिल रही है. जनवरी महीने में ही चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए गोल्ड रेट भी 2,02,984 रुपये के हाई पर पहुंचा था और इस लेवल से अब भी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 50,097 रुपये सस्ता बना हुआ है। 

  • नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सम्मान को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव के बाद अब वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना या उसका अपमान करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। अब राष्ट्रीय गीत को भी वही कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा जो राष्ट्रगान जन गण मन को मिला हुआ है।

    तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान
    मौजूदा कानून के तहत अभी तक केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर ही सजा का प्रावधान था। झंडे को जलाने, विकृत करने या राष्ट्रगान में जानबूझकर बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है। अब नए संशोधन के बाद, वंदे मातरम के साथ भी ऐसी ही हरकत करने पर समान सजा का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, संसद की मुहर लगते ही यह नया कानून प्रभावी हो जाएगा।

    सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की ओर कदम
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए इसे करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। ठाकुर ने कहा कि वह लंबे समय से वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाया था। उनका मानना है कि इस कदम से हमारी सांस्कृतिक विरासत पर होने वाले जानबूझकर हमलों को रोका जा सकेगा।

    गायन के लिए नया प्रोटोकॉल तय
    इसी साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के लिए एक विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। इसके अनुसार, आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम की छह पंक्तियां गाई जाएंगी, जिनकी अवधि तीन मिनट 10 सेकंड होगी। महत्वपूर्ण यह है कि किसी भी समारोह में जहां राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होने हों, वहां वंदे मातरम पहले गाया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन और ध्वजारोहण जैसे मौकों पर वंदे मातरम के समय सभी को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। 

    कानून में बदलाव और सजा का प्रावधान
    सरकार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या उसे रोकता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

    दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे।

    सरकार ने जारी की गाइड लाइन
    केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल के लिए गाइडलाइन जारी की। गाइड लाइन के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए।

    इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं।

    पहले ‘राष्ट्रगीत’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’
    अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’।दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें।

    वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह
    गृह मंत्रालय ने स्कूल-कॉलेज और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है।इस कदम का उद्देश्य स्टूडेट्स और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। यह भी बताया गया है कि जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए।

    सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए छूट
    साथ ही, मंत्रालय ने सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है। निर्देश के अनुसार, फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से दर्शकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।

    चुनाव में ‘वंदे मातरम्' बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
    बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया गया। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश किया था। पार्टी ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया।साथ ही, बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया गया।

    बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
    भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

    1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

    ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

    ये अधिनियम क्या कहता है?
    1971 के राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम में राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के साथ राष्ट्रगान के लिए नियम हैं. इनमें राष्ट्रगान के लिए कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति जानबूझकर भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में व्यवधान पैदा करता है उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा। 

    अगर कोई दूसरी बार ये अपराध करता है तो उसके लिए जेल का प्रावधान है. अधिनियम के अनुसार, जो कोई व्यक्ति, जिसे धारा 2 या धारा 3 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध ठहराया गया हो, ऐसे किसी अपराध के लिए फिर से दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो उसे दूसरी बार के या उसके बाद के हर बार के अपराध के लिए कम से कम एक वर्ष के कारावास से दंडित किया जा सकेगा। 

    वंदे मातरम् की स्थिति में क्या होगा?
    अब जब वंदे मातरम् भी इस अधिनियम में शामिल हो जाएगा तो राष्ट्रगान वाले नियम इस पर लागू होंगे. यानी इसके अपमान पर सजा का भी प्रावधान है.  अब जानते हैं कि इसे लेकर नियम क्या है…

    – दिशा-निर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है. इसे प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए. इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। 

    – एक जरूरी बात यह है कि अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’. दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें। 

    – जब वंदे मातरम् का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए। 

    – सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है. फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम् बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी। 

  • तमिलनाडु राजनीति में ट्विस्ट: Vijay की लोकप्रियता, BJP की चाल और स्टालिन की प्रतिक्रिया

    तमिलनाडु राजनीति में ट्विस्ट: Vijay की लोकप्रियता, BJP की चाल और स्टालिन की प्रतिक्रिया

    चेन्नई

    तमिलनाडु की सियासत में गजब ट्विस्ट आया है. थालापति विजय की टीवीके सरकार बनाने की कवायद में जुटी है. उसके पास बहुमत वाला नंबर नहीं है. इसलिए एक्टर विजय की पार्टी टीवीके को अन्य साथियों की जरूरत है. थलापति विजय को सरकार बनाने के लिए कुल 118 विधायकों की जरूरत है. टीवीके के पास हैं 108. अब ऐसे में कैसे 118 के आंकड़े तक पहुंचा जाए, अभी इस पर मंथन जारी है. इस बीच तमिलनाडु के सियासी गेम में अचानक भाजपा की एंट्री हो गई है. सरकार वाली फ्रेम में अब तक भाजपा नहीं थी. मगर अब भाजपा ने एआईएडीएमके को धर्मसंकट में डाल दिया है. मगर एक्टर विजय के लिए तब भी खुशखबरी ही है। 

    जी हां, भाजपा के नए दांव से टीवीके चीफ थलापति विजय की चांद ही चांदी है. भाजपा अब चाहती है कि टीवीके की ही तमिलनाडु में सरकार बने. इसके लिए भाजपा तमिलनाडु में अपनी सहोयगी एआईएडीएमके को थलापति विजय की TVK के साथ गठबंधन के लिए जोर दे रही है. भाजपा के इस दांव से एआईएडीएमके धर्मसंकट में है. एआईएडीएमके पर टूट यानी विभाजन का खतरा मंडरा रहा है. उसे भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसा खतरा महसूस हो रहा है। 

    भाजपा का चाणक्य वाला दांव
    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तमिलनाडु रिजल्ट के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपने सबसे गंभीर अंदरूनी संकट की ओर बढ़ती दिख रही है. एआईएडीएमके विजय की टीवीके के साथ गठबंधन को लेकर धर्मसंकट में है. पार्टी के भीतर इस बात पर गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) को गठबंधन सरकार बनाने में समर्थन दिया जाए या नहीं. सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा बहै. भाजपा नहीं चाहती कि टीवीके और कांग्रेस का गठबंधन हो. इसके लिए भाजपा चाहती है कि एआईएडीएमके और टीवीके साथ मिलकर सरकार बनाए. इसकी वजह है भाजपा की जिद, सके तहत वह कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में आने से रोकना चाहती है। 

    क्यों भाजपा चाहती है टीवीके और AIADMK का गठबंधन
    खुद एआईएडीएमके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि भाजपा टॉप लीडरशिप इस बात से असहज है कि तमिलनाडु में कांग्रेस के सममर्थन से टीवीके की सरकार बन सकती है. वह भी ऐसी स्थिति में जब पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस ने एक बार फिर से जोरदार वापसी की है. यही कारण है कि भाजपा नहीं चाहती कि तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की किसी भी तरह वापसी हो। 

    तमिलनाडु में सरकार का नंबर गेम समझिए
    थलापति विजय की TVK के पास 108 सीटें हैं. बहुमत के लिए चाहिए 118 सीटें. मतलब बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम हैं. इसलिए तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए गठबंधन बनाना अब जरूरी हो गया है. ऐसे में भाजपा उन कोशिशों का समर्थन करती दिख रही है, जिनका मकसद AIADMK को विजय का साथ देने के लिए राजी करना है, ताकि कांग्रेस और वामपंथी दल को नई सरकार में आने से रोका जा सके। 

    भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट
    हालांकि, भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट है. यह संकट तब और गहरा गया, जब मंगलवार रात एआईएडीएमके की वरिष्ठ नेता लीमा रोज मार्टिन ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि टीवीके और AIADMK के बीच बातचीत चल रही है. लीमा रोज मार्टिन लॉटरी किंग की पत्नी हैं. उनके बेटे पुडुचेरी से विधायक हैं और एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं. इसलिए एआईएडीएमके का एक खेमा चाहता है कि विजय की पार्टी संग गठबंधन हो. मगर एक खेमा चाहता है कि गठबंधन न हो. ऐसे में एआईएडीएमके में टूट का खतरा मंडरा रहा है। 

    इसके बाद भी 5 सीटें उसके पास कम हैं। वजह यह कि वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, सीपीआई और सीपीएम जैसे दलों ने समर्थन देने से इनकार कर दिया है। एआईएडीएमके ने भी विजय के साथ जाने की बात खारिज की है। यही नहीं कई दलों के नेताओं ने बुधवार को एमके स्टालिन से मुलाकात की है। ऐसे में यह भी कयास लग रहे हैं कि क्या डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं। दोनों ही दल तमिलनाडु की राजनीति में कट्टर विरोधी रहे हैं। ऐसे में दोनों साथ आए तो यह उसी तरह होगा, जैसे सपा और बसपा यूपी में मिले थे। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी ने भी सरकार साथ में बनाई तो ऐसा ही सवाल उठा था।

    इसके अलावा महाराष्ट्र में जब उद्धव की शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी साथ आए तो वह भी राजनीति की उलटबासी थी। अब तमिलनाडु में ऐसा देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस फंसा हुआ अनुभव करेगी, जिसने जल्दबाजी में ही विजय की टीवीके को समर्थन दे दिया। डीएमके की ओर से इसकी आलोचना भी की जा रही है। वहीं कांग्रेस ने इसे विचारधारा से समझौता मानने से इनकार किया है और कहा कि विजय की विचारधारा भी सेकुलर है। यही नहीं कांग्रेस की सांसद जोथीमणि सेन्निमलाई ने डीएमके को भी जवाब दिया है।

    कांग्रेस बोली- हमें तो चुनाव से एक सप्ताह पहले कर दिया था बाहर
    उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना और टूटना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि 2014 में डीएमके ने कांग्रेस को गठबंधन से बाहर कर दिया था। वह अकेले ही लड़ी थी। तब हमने यह माना था कि डीएमके का यह कदम राजनीतिक है और इसकी हमने आलोचना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना या फिर अलग होना नेचुरल है। यहां तक कि 2014 के संसदीय चुनाव से एक सप्ताह पहले ही डीएमके ने कांग्रेस को अलायंस से बाहर कर दिया था। हमें अचानक से अकेले उतरना पड़ा था, लेकिन हमने उसकी मजबूरी को समझा था।

    विजय ने बुलाई अहम बैठक
    इस बीच टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कड़गम के संस्थापक विजय ने सरकार गठन पर चर्चा के लिए आज यानी गुरुवार को यहां चुनाव जीतने वाले पार्टी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. यह बैठक सरकार बनाने के लिए टीवीके के बहुमत से कुछ सीट पीछे रहने की पृष्ठभूमि में हो रही है. कांग्रेस के पांच विजयी उम्मीदवारों ने टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन विजय की पार्टी को 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत नहीं मिल पा रहा है.

    सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का होना जरूरी है और टीवीके ने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में 108 सीट पर जीत हासिल की, जिनमें से विजय को अपनी जीती हुई दो सीट में से एक से इस्तीफा देना होगा. सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान टीवीके अपने विधायक दल के नेता का चुनाव भी कर सकती है। 

  • जालंधर में स्कूलों पर धमकी का सिलसिला, APJ स्कूल खाली, बम स्क्वायड कर रही जांच

    जालंधर में स्कूलों पर धमकी का सिलसिला, APJ स्कूल खाली, बम स्क्वायड कर रही जांच

    जालंधर 

    जालंधर में बीएसएफ चौक के पास एक्टिवा ब्लास्ट के बाद अब निजी स्कूलों को मिली धमकियों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, बीएमसी चौक स्थित एपीजे स्कूल को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत एहतियातन सभी छात्रों की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया।

      धमकी की सूचना मिलते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस व प्रशासनिक टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्कूल परिसर की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

    एडीसीपी आकर्षि जैन ने बताया कि शहर के 5-6 स्कूलों को इसी तरह की धमकियां मिली हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं, जबकि साइबर क्राइम टीम धमकी भरे ई-मेल की जांच में जुटी हुई है।

    स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल में मैसेज दिखाकर कहा गया कि स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिसके बाद तुरंत छुट्टी कर दी गई। इस घटना के बाद अभिभावकों में भी डर और चिंता का माहौल है। 

    बच्चों को घर लेजाने का आया संदेश
    अभिभावकों ने बताया कि उन्हें केवल इतना कहा गया कि सुरक्षा कारणों की वजह से बच्चों को तुरंत घर ले जाएं। किसी को धमकी के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि बीएसएफ चौक पर दो दिन पहले हुए धमाके के बाद लोग पहले से ही डरे हुए हैं। ऐसे माहौल में स्कूल को मिली धमकी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्कूल को एहतियातन खाली करवाया गया है और पूरे परिसर की गहन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की टीमें स्कूल के भीतर और आसपास जांच में जुटी हुई हैं। किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

    पुलिस ने जांच की शुरू
    जानकारी के अनुसार धमकी भरा संदेश मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। स्कूल के आसपास आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। वहीं अभिभावकों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग को मुख्यमंत्री भगवंत मान की जालंधर यात्रा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री गुरुवार को अपनी शुक्राना यात्रा के तहत जालंधर पहुंचे हुए हैं। उनके कार्यक्रम को लेकर पहले ही शहर में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। इसी बीच स्कूल को धमकी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।

    बीएसएफ मुख्यालय और सेना कैंप के पास हाल ही में हुए धमाके के बाद शहर में पहले से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। अब स्कूल को मिली धमकी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और धमकी भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

     

    इस मौके स्कूल पहुंचे पेरेंट्स ने कहा कि उन्हें सिर्फ इतना मैसेज आया कि सिक्योरिटी रीजन है, इसलिए वह तुरंत अपने बच्चों को घर ले जाएं। कोई ड्यूटी पर था तो कोई अपने किसी पर्सनल काम पर, सब छोड़कर वह तुरंत बच्चों को लेने के लिए पहुंचे हैं। BSF हेडक्वार्टर और आर्मी कैंप में ब्लास्ट के बाद लोगों में ज्यादा डर है।

    इसी बीच जालंधर की ADCP आकर्षि जैन ने कहा कि जालंधर के 5 से 6 स्कूलों को धमकी भरी मेल मिली है, पुलिस सभी स्कूलों में जांच कर रही है। अभी तक कहीं से कुछ संदिग्ध नहीं मिला।

    इस धमकी की टाइमिंग भी सीएम भगवंत मान से जोड़कर देखी जा रही है। CM आज अपनी शुक्राना यात्रा के चलते जालंधर में हैं, जिसको लेकर पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इसके बीच धमकी आने से पुलिस हाईअलर्ट पर है।

    वहीं, जालंधर और अमृतसर में हुए ब्लास्टों में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को टीमें दोनों जगह पहुंचीं और जांच की। इसी बीच पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने विस्फोटक सप्लायर को पकड़ लिया है। पुलिस का दावा है कि इसे जमशेर इलाके से गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान नवांशहर में बंगा के रहने वाले दविंदर के रूप में हुई है।

    पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि हाल ही में चंडीगढ़ में भाजपा हेडक्वार्टर के बाहर हुए ग्रेनेड अटैक में भी इसी ने ग्रेनेड सप्लाई किया था। उसे पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए विस्फोटकों की सप्लाई मिलती है, जिसे वह आगे सप्लाई करता था। पुलिस ने CM भगवंत मान के गुरुवार के जालंधर दौरे से ठीक पहले यह दावा किया है।

    जालंधर में हुए धमाके का एक और वीडियो सामने आया है। इसमें बाइक पर एक पगड़ीधारी व्यक्ति आता है और धमाके वाली जगह रुकता है। कुछ ही देर में वह निकल जाता है, उसके जाने के 15 सेकेंड के बाद ब्लास्ट हो जाता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव: यह वही मौका है जब सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव: यह वही मौका है जब सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है

    सपने कभी रुकते नहीं, बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है सपनों को सच करने का : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं द्वितीय परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं
    प्रदेश में 7 मई से शुरू हो रही है कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की द्वितीय परीक्षा

    भोपाल

    प्रदेश सरकार द्वारा एमपी बोर्ड के परी क्षा परिणाम में असफल हुए विधार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए द्वितीय परीक्षा का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुनः परीक्षा देने वाले विधार्थियों को शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि प्रिय विद्यार्थियों, आप जानते हैं कि इस साल एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 16 वर्षों में सबसे बेहतर रहा, इसी प्रकार 10वीं के परिणाम भी अच्छे रहे, लेकिन कुछ परीक्षार्थी सफल नहीं हो सके थे। ऐसे बच्चों के लिए मध्यप्रदेश में द्वितीय परीक्षा अवसर की शुरुआत 7 मई से की जा रही है। आप सभी को मेरी ओर से अग्रिम शुभकामनाएं।

    आप केवल छात्र नहीं, प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आप सभी मेरे लिए केवल छात्र नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं। जब आप अपने सपनों के लिए मेहनत करते हैं, तो उसमें केवल आपका नहीं, आपके परिवार का, आपके शिक्षकों का और पूरे प्रदेश का विश्वास जुड़ा होता है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी परिस्थितियां हमारे अनुकूल नहीं होतीं, परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आते, इससे मन थोड़ी देर के लिए ठहर जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि सपने कभी रुकते नहीं, वह बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है।

    महज योजना नहीं, विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देन का संकल्प

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं हर विद्यार्थी को ये कह रहा हूं कि एक परिणाम आपके पूरे भविष्य की कहानी तय नहीं कर सकता। प्रदेश सरकार की ओर से यह अवसर इसी दिशा में एक विशेष पहल है। ये महज योजना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को फिर से उड़ान देन का संकल्प है। यह उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है। जो 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में किसी कारणवश अनुत्तीर्ण हो गए या परीक्षा नहीं दे पाए। द्वितीय परीक्षा विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत है। एक ऐसा मौका, जहां आप अपनी मेहनत को फिर से साबित कर सकते हैं। अपने आत्मविश्वास को पुनः खड़ा कर सकते हैं और अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच सकते हैं। वहीं अब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षाएं 7 मई से प्रारंभ हो रही हैं।

    बच्चों के साथ खड़े रहें अभिभावक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों से भी मेरा विनम्र निवेदन है कि इस समय बच्चों के साथ खड़े रहें। उनके मन को समझें, उन्हें सपोर्ट करें क्योंकि कई बार एक विश्वास भरा शब्द ही उन्हें नई ऊर्जा दे देता है, हर विद्यार्थी में अपार क्षमता है। अगर जरूरत है तो केवल उसे पहचानने की, उसे संवारने की और सही दिशा देने की। याद रखिए यह परीक्षा सिर्फ अंक सुधारने का नहीं, बल्कि अपने आत्मविश्वास को फिर से मजबूत करने का अवसर भी है। अंत में मैं आप सभी को परीक्षा के लिए अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। आप प्रदेश का भविष्य हैं। आप सफल होकर अपने सपनों को साकार करें और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करें। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं। आगे बढ़ें, सफल हों और अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को छुएं।