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  • यूक्रेन संकट के बीच पुतिन ने विजय का दावा दोहराया, परेड रही शांत और संयमित

    यूक्रेन संकट के बीच पुतिन ने विजय का दावा दोहराया, परेड रही शांत और संयमित

    मॉस्को 

    यूक्रेन युद्ध के लगातार जारी रहने और सुरक्षा खतरों के बीच रूस ने शनिवार को अपना विजय दिवस परेड बेहद सीमित रूप में आयोजित किया. हर साल 9 मई को मॉस्को के रेड स्कॉयर पर होने वाली यह परेड रूस के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में मानी जाती है. यह दिन सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है. लेकिन इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दिया। 

    आमतौर पर रूस इस परेड में अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करता रहा है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें रेड स्कॉयर पर दिखाई जाती थीं। हालांकि इस साल सुरक्षा कारणों और यूक्रेन हमले के खतरे की वजह से टैंक या भारी सैन्य वाहन सड़क पर नहीं उतारे गए। 

    इसके बजाय रूस ने अपनी सैन्य ताकत को बड़े डिजिटल स्क्रीन और सरकारी टीवी प्रसारण के जरिए दिखाया. इसमें Yars इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, आर्कान्जेस्क परमाणु पनडुब्बी, पेरेसवेत लेजर हथियार, सुखोई Su-57 फाइटर जेट, एस-500 मिसाइल सिस्टम और कई ड्रोन व आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे। 

    परेड में रूसी सैनिकों और नौसेना के जवानों ने मार्च किया. इनमें कुछ ऐसे सैनिक भी शामिल थे जो यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं। 

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वायर में व्लादिमीर लेनिन समाधि के पास बैठे दिखाई दिए. उनके साथ रूसी युद्ध वेटरन्स भी मौजूद थे. इस बार परेड में नॉर्थ कोरिया के सैनिक भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मुताबिक ये सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं। 

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगभग आठ मिनट का भाषण दिया. उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' चला रहे रूसी सैनिक NATO समर्थित ताकतों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाली पीढ़ी आज के सैनिकों को प्रेरणा दे रही है। 

    इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि वे इस युद्धविराम को और लंबे समय तक बढ़ते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया है. उनके मुताबिक हर महीने हजारों युवा सैनिक मारे जा रहे हैं। 

    रूस और यूक्रेन दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए थे, लेकिन शनिवार से शुरू हुए नए सीजफायर के उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई। 

    रूस ने यूक्रेन को चेतावनी दी थी कि अगर उसने विजय दिवस परेड को निशाना बनाया तो कीव पर बड़ा मिसाइल हमला किया जाएगा. मॉस्को ने विदेशी दूतावासों को भी सतर्क रहने को कहा था। 

    वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की 9 मई की परेड 'होने दी जाएगी' और यूक्रेनी हथियार रेड स्कॉयर को निशाना नहीं बनाएंगे. परेड के दौरान मॉस्को में सुरक्षा बेहद कड़ी रही। शहर के कई रास्ते बंद किए गए और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहे. रॉयटर्स की तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक पिकअप ट्रकों पर तैनात दिखाई दिए। 

     सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों की अदला-बदली होगी

    रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन का सीजफायर होगा. यह युद्धविराम 9 मई, 10 मई और 11 मई तक लागू रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों ने तीन दिन के सीजफायर पर सहमति जताई है.

    ट्रंप ने बताया कि रूस में यह समय विक्ट्री डे के जश्न का है. वहीं यूक्रेन भी दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा रहा है, इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सीजफायर के दौरान सभी तरह की सैन्य गतिविधियों को रोका जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। 

    ट्रंप ने पुतिन को कहा थैंक्यू
    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह अनुरोध उन्होंने खुद किया था और इसके लिए उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम लंबे समय से चल रहे इस खतरनाक युद्ध को खत्म करने की शुरुआत साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए बातचीत लगातार जारी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि शांति की दिशा में कोशिशें हर दिन आगे बढ़ रही हैं और दुनिया इस युद्ध के अंत के और करीब पहुंच रही है। 

  • क्रूज शिप में नोरोवायरस फैलने से 115 बीमार, यात्रियों की संख्या 3116

    क्रूज शिप में नोरोवायरस फैलने से 115 बीमार, यात्रियों की संख्या 3116

    बैंकॉक

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरोवायरस का बड़ा संक्रमण फैल गया है. इस जहाज पर कुल 3116 यात्री सवार थे, जिनमें से 102 यात्रियों और 13 क्रू सदस्यों को बीमारी हो गई. कुल मिलाकर 115 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए हैं. यह यात्रा 28 अप्रैल से 11 मई तक की थी, जो फोर्ट लॉडरडेल से शुरू होकर पोर्ट कैनावेरल पर खत्म होने वाली है। 

    यात्रा के दौरान जहाज अरूबा, बोनेर, प्यूर्टो रिको और बहामास जैसे सुंदर स्थानों पर रुका था. सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, बीमारी के मुख्य लक्षण उल्टी और दस्त था. प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने इसे पेट संबंधी बीमारी बताया है। 

    नोरोवायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?
    नोरोवायरस एक संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है. यह तेजी से उल्टी और दस्त पैदा करता है. यह वायरस बंद जगहों और लोगों के संपर्क वाली जगहों पर तेजी से फैलता है. क्रूज शिप जैसी जगहें खासतौर पर जोखिम भरी होती हैं क्योंकि यहां हजारों यात्री और कर्मचारी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, एक ही भोजन का सेवन करते हैं. सामान्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं। 

    संक्रमित व्यक्ति के हाथों, खाने-पीने की चीजों, पानी या छुई हुई सतहों के जरिए यह वायरस दूसरों तक आसानी से पहुंच जाता है. क्रूज शिप पर होने वाली पेट की बीमारियों का सबसे आम कारण नोरोवायरस ही है। 

    इस यात्रा में क्या हुआ?
    यह प्रकोप पूरी यात्रा के दौ
    रान धीरे-धीरे फैला. सभी यात्री एक साथ बीमार नहीं हुए, बल्कि केस पूरे सफर में लगातार बढ़ते रहे. जब बीमार लोगों की संख्या कुल यात्रियों के 3 प्रतिशत से अधिक हो गई, तब CDC को सार्वजनिक सूचना जारी करनी पड़ी. स्वास्थ्य अधिकारी अब जहाज का पूरा निरीक्षण कर रहे हैं. वेसल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत गहन जांच चल रही है। 

    कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे जहाज पर सख्त सफाई और डिसइंफेक्शन बढ़ा दिया है. बीमार यात्रियों और क्रू सदस्यों को अलग-अलग रखा गया है. उनके स्टूल सैंपल लेकर जांच की जा रही है. CDC के साथ मिलकर हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 

    बीमारी के लक्षण क्या हैं?
    नोरोवायरस संक्रमण के प्रमुख लक्षण अचानक शुरू होने वाली उल्टी और पानी जैसे दस्त हैं. इसके साथ पेट में दर्द, जी मिचलाना, हल्का बुखार, सिरदर्द और शरीर में कमजोरी भी हो सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण 1 से 3 दिन तक रहते हैं. ज्यादातर लोग बिना किसी गंभीर समस्या के ठीक हो जाते हैं। 

    हालांकि, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकोप में प्रभावित लोगों को हल्की बीमारी बताई गई है। 

    क्रूज शिप पर नोरोवायरस क्यों फैलता हैं?
    क्रूज शिप बंद और भीड़-भाड़ वाली जगह होती है, जहां एक संक्रमित व्यक्ति पूरे समूह को आसानी से संक्रमित कर सकता है. अक्सर कोई यात्री बिना लक्षण दिखे जहाज पर चढ़ जाता है. फिर बुफे खाना, स्विमिंग पूल, लिफ्ट, हैंड्रेल जैसी साझी चीजों के जरिए वायरस फैलने लगता है। 

    अमेरिका में हर साल लाखों लोग नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन क्रूज शिप वाले मामले कुल आंकड़ों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं. फिर भी इनकी चर्चा ज्यादा होती है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ प्रभावित होते हैं। 

    प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने कहा कि उन्होंने पूरे जहाज को अच्छी तरह साफ किया. पूरे सफर के दौरान अतिरिक्त सैनिटाइजेशन जारी रखा. हाथ धोने, सैनिटाइजर इस्तेमाल करने और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है. कंपनी CDC के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है। 

    नोरोवायरस कितना खतरनाक है?
    नोरोवायरस आमतौर पर जानलेवा नहीं होता. ज्यादातर लोग कुछ दिनों में आराम से ठीक हो जाते हैं. गंभीर जटिलताएं बहुत कम होती हैं. वे भी मुख्य रूप से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में देखी जाती हैं. इस प्रकोप में भी ज्यादातर मामलों में स्थिति हल्की बताई गई है. यात्रा के दौरान यात्रियों में तनाव और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। 

  • थलापति विजय के साथ आधी रात का खेल, शपथ पर ग्रहण और 116-118 की उलझन

    थलापति विजय के साथ आधी रात का खेल, शपथ पर ग्रहण और 116-118 की उलझन

    चेन्नई

     तमिनलाडु की सियासत में सस्पेंस ही सस्पेंस है. ऐसा लग रहा जैसे सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा हो. कभी थलापति विजय की टीवीके की सरकार बनती दिखती है तो कभी डीएमके-एआईडीएमके के बीच गठबंधन की हवा चलती है. कभी सरकार बनने की बात आती हो तो कभी फिर इंतजार बढ़ जाता है. थलापति विजय कभी सरकार बनाने के लिए बहुमत होने की बात करते हैं तो कभी उनके नंबर कम पड़ जाते हैं. पहले खबर आई कि थलापति विजय आज सरकार बनाएंगे और शपथग्रहण होगा. मगर अब तमिलनाडु में फिर ट्विस्ट आ गया है. ऐसा लग रहा है कि थलापति विजय के शपथग्रहण पर फिर से ग्रहण लग गया है. कारण कि आधिकारिक तौर पर अब तक गवर्नर ने सरकार बनाने के लिए थलापति विजय को न्योता नहीं दिया है। 

    जी हां, टीवीके के संस्थापक एक्टर विजय के 118 विधायकों के बहुमत के आंकड़े को पार करने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ घंटे बाद ही शुक्रवार देर रात उनकी बहुमत की स्थिति को लेकर नया संशय पैदा हो गया. आईयूएमएल ने थलापति विजय को समर्थन देने से इनकार कर दिया. वहीं वीसीके ने अपना फैसला लंबित रखा है और समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रखीं. इससे तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति अस्थिर हो गई और बहुमत के आंकड़े फिर से अनिश्चित हो गए। 

    116, 117, 118: विजय अब भी बहुमत से दूर
    इन सबके बीच सरकार बनाने को लेकर थलापति विजय की टीवीके के लिए असमंजस और अनिश्चितता और बढ़ गई है. कारम कि थलापति विजय अब भी बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं. राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात के बाद भी टीवीके विधानसभा में बहुमत से कुछ कदम दूर है. यही कारण है कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए न्योता नहीं दिया है. थलापति विजय की टीवीके के पास 108 सीटें हैं. असल में देखें तो 107 क्योंकि विजय ने दो सीटों से जीत दर्ज की है. ऐसे में एक सीट उन्हें छोड़नी होगी. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। 

    कैसे थलापति विजय को लगा झटका
    थलापति विजय के दो सीटों से जीतने के बाद प्रभावी बहुमत घटकर 117 रह गया. डीएमके गठबंधन से अलग हुई कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ विजय को समर्थन दिया है. सीपीआई और सीपीआई(एम) के दो-दो विधायकों ने भी बिना शर्त बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है. लेकिन आईयूएमएल ने डीएमके गठबंधन के साथ रहने का फैसला किया, जिससे विजय की पक्की संख्या घट गई और बहुमत के आंकड़े कड़े हो गए. ऐसे में विजय के बहुमत का आंकड़ा कभी 116 पर अटक जाता है तो कभी 118 पूरा हो जाता है. मगर आईयूएमएल के पीछे हटने से टीवीके अभी 116 पर है और उसे अब भी दो सीटों की जरूरत है। 

    आईयूएमएल ने बिगाड़ा विजय का खेल
    इधर डीएमके की पुरानी सहयोगी आईयूएमएल के पास दो विधायक हैं. उसने कहा कि वह राज्यपाल आरएन रवि की ओर से आमंत्रित किसी भी पार्टी को ‘स्थिर और धर्मनिरपेक्ष सरकार’ बनाने के लिए समर्थन देगी और भाजपा को ‘पीछे के रास्ते’ से राज्य में घुसने से रोकेगी. चूंकि न तो डीएमके और न ही एआईएडीएमके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है. इसलिए माना जा रहा था कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का न्योता देंगे. टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 

    हालांकि, बाद में खबर आई कि डीएमके की एक और सहयोगी वीसीके ने अपने विधायकों के साथ थलापति विजय को समर्थन देने का फैसला किया है. एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पार्टी सूत्रों ने बताया कि वीसीके ने समर्थन देने पर सहमति जताई है और शनिवार सुबह टीवीके को समर्थन पत्र सौंपेगी. पार्टी प्रवक्ता ने भी यूएनआई से इस कदम की पुष्टि की। 

    शपथग्रहण पर ग्रहण
    वहीं, वाम दलों के समर्थन और वीसीके के संभावित समर्थन के साथ थलापति विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की. इससेक पहले वो दो बार राज्यपाल से मिल चुके थे और दोनों बार निराशा हाथ लगी थी. अबकी बार थलापति विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन पत्र सौंपे. इससे राज्यभर में टीवीके कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल बन गया. खबरें यह भी थीं कि विजय का शपथ ग्रहण शनिवार को हो सकता है। 

    रात में अचानक हुआ खेल
    हालांकि, रात में हालात अचानक बदल गए. थलापति विजय ने सीपीआई और सीपीआई(एम) नेताओं से मिलकर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आईयूएमएल और वीसीके नेताओं से मिलने की योजना बनाई, लेकिन दोनों दलों ने अपने रुख पर पुनर्विचार के संकेत दिए. इससे थलापति विजय को तगड़ा झटका लगा. अब सबसे बड़ा यूटर्न है कि आईयूएमएल ने स्पष्ट रूप से टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. उसने कहा कि वह डीएमके गठबंधन के साथ ही रहेगी. आईयूएमएल ने कहा कि हम पहले भी डीएमके के साथ थे, अब भी हैं और आगे भी रहेंगे। 

    थलापति विजय को एक बार फिर झटका लगा है.

    वीसीके ने भी लिया यूटर्न
    वहीं, वीसीके ने कहा कि बातचीत जारी है और विजय को समर्थन देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. खबरें यह भी थीं कि पार्टी समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रख रही है. यह बात तब और मजबूत हो गई जब वीसीके के उप महासचिव और नवनिर्वाचित विधायक वन्नियारासु ने सोशल मीडिया पर सत्ता और शासन में हिस्सेदारी की मांग की. इस अनिश्चितता के बीच TVK के सदस्य जो विजय के शपथ ग्रहण की उम्मीद में बड़ी संख्या में जुटे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया. अब आगे जब तक बहुमत वाला नंबर नहीं दिखा देते एक्टर विजय, तब तक टीवीके सरकार का सपना… सपना ही रहेगा। 

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना, रोजाना 1000Cr का घाटा झेल रही सरकार

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना, रोजाना 1000Cr का घाटा झेल रही सरकार

     नई दिल्‍ली

    ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं। 

    क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। 

    सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। 

    स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन 
    स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। 

    हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं। 

    कई देशों में इमरजेंसी लागू 
    कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं। 

    भारत ने उठाए सख्‍त कदम 
    सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की। 

    सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार 
    उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं। 

    उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। 

    100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम 
    भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

  • ED ने संजीव अरोड़ा के घर की छानबीन, 20 गाड़ियों में टीम पहुंची

    ED ने संजीव अरोड़ा के घर की छानबीन, 20 गाड़ियों में टीम पहुंची

    चंडीगढ़
     पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी। 

    इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है। 

    एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड
    पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है। 

    बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां
    सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है। 

    सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका
    ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। 

    क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है?
    फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

  • भोपाल में आज होगा ऐतिहासिक उद्घाटन: भारत का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क

    भोपाल में आज होगा ऐतिहासिक उद्घाटन: भारत का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क

    भोपाल

    मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे।

    परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

    पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी।

    इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है।

    इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी।

    इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग।

    इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

    इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

    यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी।

    अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

    अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है।

    इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे।

    भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण?

    भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए।

    'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा
    विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा।
    3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:

        प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।
        प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।
        मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

  • तमिलनाडु राजनीति का नया मोड़: 8 दलों और नंबर गेम में उलझा थलपति

    तमिलनाडु राजनीति का नया मोड़: 8 दलों और नंबर गेम में उलझा थलपति

    चेन्नई

    तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से 'करिश्माई व्यक्तित्वों' और 'द्रविड़ अस्मिता' के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजे ने राज्य को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां सियासी गणित ने अभिनेता से नेता बने विजय को उलझा दिया है. विधानसभा चुनाव में भले ही विजय की पार्टी नंबर वन बन गई हो, लेकिन बहुमत का नंबर जुटाने के लिए जूझ रहे हैं। 

    विजय को सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होने के लिए बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. टीवीके के पास 108 विधायक हैं और कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के बाद 113 का ही आंकड़ा पहुंच रहे हैं. इसके बाद भी 5 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. डीएमके व AIADMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले दलों को बिना साथ लिए सरकार बनाना संभव नहीं है? 

    तमिलनाडु की सियासत में करीब छह दशक के बाद दो ध्रुवीय के बजाय त्रिकोणीय मुकाबला रहा. इस बार तमिलनाडु की राजनीतिक बिसात पर केवल विजय नहीं हैं, बल्कि छोटे दल बड़े धमाल करने की स्थिति में है. राज्य में 8 छोटे दल और बहुमत का जटिल नंबरगेम है, जो थलपति के राजनीतिक भविष्य को बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है? 

    सरकार बनाने के नंबर गेम में उलझे विजय
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने अपनी पार्टी TVK के जरिए सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर हमला बोला है. इस तरह उनका लक्ष्य युवाओं का वह वोट बैंक रहा, जो DMK और AIADMK के दशकों पुराने चक्रव्यूह से ऊब चुका था. थलपति के लिए चुनौती यह है कि क्या उनका 'सिनेमाई करिश्मा' बूथ स्तर के 'वोट मैनेजमेंट' में बदल पाएगा? 

    विधानसभा चुनाव में बिना किसी गठबंधन के राज्य की सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ना और 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया. पहली ही सियासी पारी में भले ही विजय शतक लगाने में कामयाब रहे, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रह गए. विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन भी दे दिया. उसके बाद भी बहुमत का 118 का आंकड़ा नहीं पहुंच पा रहा। 

    तमिलनाडु के राज्यपाल आरवी अर्लेकर तमिलनाडु में विजय को सरकार का न्योता देने से इनकार कर दिया. राज्यपाल का कहना है कि विजय पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं. ऐसे में विजय के सामने बहुमत का नंबर गेम जुटाना काफी मुश्किल लग रहा है, क्योंकि राज्य में जो भी छोटे दल हैं, वो डीएमके और AIADMK गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। 

    तमिलनाड में 8 दलों के पास सरकार बनाने की चाबी
    थलापति विजय को सरकार बनाने और बहुमत का आंकड़े जुटाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है. विजय ने पहले कई छोटी पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. तमिलनाडु चुनाव में टीवीके को 108 सीटें मिली तो डीएमके को 59 और AIADMK ने 47 सीटें जीती हैं। 

    तमिलनाडु में इन तीनों प्रमुख दलों के अलावा कांग्रेस 5 सीटें जीती है, जिसने पहले ही विजय को अपना समर्थन दे दिया है. पीएमके के 2, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के 2, सीपीआई के 2, सीपीएम  के 2, वीसीके के 2, बीजेपी के एक, डीएमडीके के एक और एक विधायक AMMKMNKZ के हैं। 

    विजय अगर वामपंथी दलों के चार विधायकों के साथ वीसीके का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो आसानी से सरकार बना लेंगे. हालांकि, कांग्रेस के सिवा कोई भी दल अपनी तक अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं. मुस्लिम लीग ने साफ कर दिया है कि डीएमके साथ खड़ी है. वीसीके भी लेफ्ट के साथ सुर में सुर मिलाती नजर आ रही है। 

    छोटे दलों किसका गेम बनाएगा-बिगाड़ेंगे?
    तमिलनाडु की सियासत इस जगह पर खड़ी है कि बिना किसी छोटे दल के किसी की भी सरकार नहीं बनने वाली. पीएमके ने बीजेपी से साथ में चुनाव लड़ा था, जिसके चलते उसके साथ खड़ी है. कांग्रेस के बाद अगर लेफ्ट और वीसीके विजय को समर्थन दे देते हैं तो आसानी से राज्य में सरकार बन जाएगी। 

    कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय को सिर्फ 5 विधायकों के अतरिक्त समर्थन की जरूरत है. विजय जरूर वामपंथी दलों का समर्थन चाहते हैं, पर वो भी डीएमके साथ छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. मुस्लिम लीग भी डीएमके साथ खड़ी है. इसी तरह डीएमडीके भी स्टालिन के साथ मजबूती से खड़ी हुई है. केरल के चुनाव नतीजे के बाद लेफ्ट अब कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार नहीं है. इसीलिए विजय का सियासी गेम उलझा हुआ है। 

    तमिलनाडु में पलटेगा गेम! 

    तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर पेच फंसता ही जा रहा है. सूबे में किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत का नंबर नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है. ऐसे में दक्षिण भारत के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी। 

    अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का नंबर पूरा नहीं हो रहा. कांग्रेस ने जरूर विजय की टीवीके को समर्थन दे रखा हो, लेकिन उसके बाद भी सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं पूरा हो रहा। 

    तमिलनाडु में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले AIADMK अब एनडीए से बाहर निकालने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद AIADMK तमिलनाडु में टीवीके और डीएमके में किसके साथ हाथ मिलाएगी?

    बीजेपी से अलग होने जा रही AIADMK 
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी से आगे नहीं नहीं निकल सकी. राज्य में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। 

    कांग्रेस ने जरूर विजय की पार्टी को अपना समर्थन दिया है, जिसे मिलकर 113 का नंबर ही हो रहा है. विजय ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन राज्यपाल ने अभी तक उन्हें मंजूरी नहीं दी. राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के समर्थन की लिस्ट मांगी है। 

    वहीं, जयललिता के निधन के बाद लगातार चार चुनाव हार चुकी AIADMK अपनी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए इस गठबंधन पर विचार कर रही है. ऐसे में बीजेपी के साथ होने के चलते AIADMK के साथ विजय भी हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में सूत्रों की माने तो AIADMK ने एनडीए से अलग होने का फैसला कर सकती है, जिसके लिए मंथन भी शुरू हो गया है। 

    AIADMK किसके साथ मिलाएगी हाथ
    तमिलनाडु में विजय और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के दांव से डीएमके नाराज है तो बीजेपी भी खुश नहीं है.  सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की रणनीति कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की है तो ़AIADMK अलग रणनीति पर काम कर रही है. AIADMK अगर एनडीए से अलग होती है तो फिर तमिलनाडु में किसके साथ जाएगी। 

    बीजेपी के साथ AIADMK का गठबंधन होने के चलते विजय की पार्टी टीवीके समर्थन लेने से बच रहे हैं. इसके पीछे वजह यह है कि चुनाव के दौरान विजय ने साफ कहा था कि डीएमके उनकी राजनीतिक विरोधी है तो बीजेपी उनकी वैचारिक विरोधी है. ऐसे में बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद विजय को AIADMK के साथ मिलकर सरकार बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 

    अब सवाल यही है कि AIADMK क्या विजय की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी या फिर उसे सत्ता में आने से रोकने का दांव चलेगी?  हालांकि, विजय के बढ़ते सियासी प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके हाथ मिला सकते हैं। 

    बीजेपी क्या पर्दे के पीछे से चल रही दांव
    तमिलनाडु की सियासत में कांग्रेस और विजय की दोस्ती बीजेपी को रास नहीं आ रही है. कहा जा रहा है कि बीजेपी नहीं चाहती है कि कांग्रेस के साथ मिलकर विजय सरकार बनाएं. ऐसे में पर्दे के पीछे से डीएमके और AIADMK गठबंधन का तानाबाना बुन रही है। 

     हालांकि, डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन और पुराने नेता इस अजीब प्रयोग से डरे हुए हैं. उन्हें डर है कि इस बेमेल गठबंधन से समर्थकों के बीच भारी आक्रोश पैदा हो सकता है. इसीलिए डीएमके की तरफ से कहा गया है कि विजय को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल को इजाजत देनी चाहिए, विजय के अगुवाई वाली सरकार को छह महीने तक का टाइम देना चाहते हैं। 

    विजय अलग ही चल रहे सियासी चाल
    तमिलनाडु में जैसे ही डीएमके और AIADMK के बीच संभावित गठबंधन की खबरें फैलीं, विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा दांव चल दिया है. टीवीके ने घोषणा की है कि यदि DMK-AIADMK गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।.यह कदम जनता और प्रशंसकों को सड़कों पर उतारने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। 

    तमिलनाडु विधानसभा में नंबर क्या है?
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास सबसे अधिक 108 सीटें हैं। 

    वहीं, डीएमकी गठबंधन के पास 74 विधायक हैं, इनमें डीएमके 59, कांग्रेस पांच और अन्य पार्टी के 10 विधायक हैं. कांग्रेस के पास विधायक हैं, जिन्होंने टीवीके को समर्थन दे रखा है, लेकिन डीएमके के साथ लेफ्ट और मुस्लिम लीग का समर्थन बना हुआ है। 

    तमिलनाडु में एआईएडीएमके गठबंधन के पास यहां 53 सीटें हैं तो अन्य के पास 6 विधायक हैं. विजय को बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए. कांग्रेस के समर्थन के बाद भी टीवीके को 5 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए. इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है. विजय ने पहले ही इन पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। 

  • CM पद पर शुभेंदु अधिकारी की लगभग पुष्टि, दो डिप्टी CM भी लेंगे शपथ; कौन होंगे उम्मीदवार

    CM पद पर शुभेंदु अधिकारी की लगभग पुष्टि, दो डिप्टी CM भी लेंगे शपथ; कौन होंगे उम्मीदवार

    कलकत्ता

     पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की लेकर कवायद तेज हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं। यहां वह भाजपा के तमाम 206 विधायकों को संबोधित भी कर सकते हैं। इस बीच सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है वह यह है कि शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। आज शाम तक इसका ऐलान हो सकता है।

    भाजपा ने हालांकि मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दो जीत हासिल करने के बाद इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। उन्होंने नंदीग्राम सीट बरकरार रखी, जहां उन्होंने 2021 में बनर्जी को हराया था और अब उन्होंने वह भवानीपुर सीट भी तृणमूल सुप्रीमो के हाथ से छीन ली है, जिसे लंबे समय से उनका गढ़ माना जाता था।

    शुभेंदु अधिकारी कभी बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल थे और ग्रामीण पश्चिम बंगाल में तृणमूल के संगठनात्मक विस्तार के प्रमुख सूत्रधार माने जाते थे। वह दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल हुए और राज्य में पार्टी के सबसे आक्रामक प्रचारकों में से एक बन गए।

    इन्हें मिल सकता है मौका
    शुभेंदु अधिकारी के अलावा पश्चिम बंगाल सरकार में बतौर मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, रूपा गांगुली, स्वपन दासगुप्ता, शंकर घोष, तापस रॉय, अशोक डिंडा और डॉ. राजेश कुमार को भी मौका मिल सकता है।

    कोलकाता पहुंचे अमित शाह
    अमित शाह का आज शुभेंदु अधिकारी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया। हवाई अड्डे से वह न्यू टाउन स्थित एक होटल गए। दोपहर में अमित शाह विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे। शनिवार को वह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

    हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया। राज्यपाल आर एन रवि ने बृहस्पतिवार को विधानसभा भंग कर दी, जिससे नयी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

  • एमपी में ऑरेंज अलर्ट जारी, भिंड-दतिया में ओला और 30 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    एमपी में ऑरेंज अलर्ट जारी, भिंड-दतिया में ओला और 30 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से भिंड और दतिया समेत 6 जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ सकती है।

    मौसम केंद्र के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश के भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना है।

    ओलावृष्टि के अलावा, मुरैना जिले में बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है, वहीं ग्वालियर और विंध्य क्षेत्र के कई जिलों में दोपहर के समय मौसम बदल सकता है। छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज और सीधी में हलकी से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    40-50 किमी घंटे की रफ्तार से चल सकती है आंधी
    मौसम विभाग ने उत्तर और पूर्वी मध्य प्रदेश के 30 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।

    भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर सहित 34 ज़िलों में दिन का तापमान बढ़कर 42-43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है। विशेष रूप से निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, रतलाम, नीमच और मंदसौर ज़िलों में तापमान में तेज़ी से बढ़ोतरी का पूर्वानुमान लगाया गया है।

    10 मई से बदलेगा मौसम
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जहां उत्तरी और पूर्वी ज़िलों में अगले दो दिनों तक गरज-चमक और हल्की बारिश जारी रह सकती है, वहीं 9 और 10 मई से गर्मी की तीव्रता में काफ़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। 10 मई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने की संभावना है, जिसका प्रभाव अगले दो दिनों में और भी ज़्यादा दिखाई देगा।

    अब सताएगा पारा
    इधर राजधानी भोपाल में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के लिए पहचाने जाने वाले मई महीने का पहला सप्ताह इस बार राहत भरा रहा। मौसम के मिजाज ने इस तरह करवट ली कि मई के शुरुआती सात दिनों में लोगों को वह चुभन महसूस नहीं हुई, जो आमतौर पर इस समय होती है। तीन साल बाद मई में इस तरह की स्थिति बनी है। इसके पहले 2023 में भी पहले सप्ताह में तापमान सामान्य से काफी कम थे। हालांकि मौसम शुष्क होने के साथ ही अब आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ सकती है।

    आमतौर पर मई की शुरुआत तीखी गर्मी से होती है । पिछले दस सालों में भी अधिकांशत: यहीं ट्रेंड रहा है। पहले सप्ताह में ही अधिकमत तापमान 41 से 43 डिग्री के बीच रहते हैं, लेकिन इस बार मई की शुरुआत में लगातार बादल, तेज हवा,बारिश, बौछारों के कारण दो तीन तापमान 40 डिग्री तक पहुंचा है।

    39.3 डिग्री पर पहुंचा अधिकतम तापमान
    गुरुवार को मौसम शुष्क रहा, सुबह से ही धूप खिली। हालांकि दोपहर में हल्के बादल भी दिखे। अधिकतम तापमान में बुधवार के मुकाबले 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी हुई। अब भी तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री कम है। मौसम विज्ञानी वीएस यादव कहना है, अभी प्रदेश को प्रभावित करने वाला कोई बड़ा सिस्टम दिखाई नहीं दे रहा है, ऐसे में आगामी दिनों में तापमान 3 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। गुरुवार को दिन में तीखी धूप रही, वहीं उमस के कारण भी लोग बेहाल नजर आए। दोपहर बाद हल्के बादलों की भी आवाजाही रही, वहीं रात्रि शहर में तेज हवा चली। रात 8 बजे के आसपास हवा की अधिकतम स्पीड 45 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच गई थी। तेज हवा के कारण लोगों को उमस और गर्मी से थोड़ी राहत मिली। रूक-रूककर तेज हवा का दौर देर रात्रि तक जारी रहा।

    सावधानी बरतने की सलाह
    मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खुले मैदान में होने पर तुरंत किसी पक्के मकान की शरण लें। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है।

    दो दिन इसलिए बारिश के आसार
    फिलहाल, एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) मध्य प्रदेश के बीचो-बीच एक्टिव है तो दूसरा ऊपरी हिस्से में है। एक ट्रफ भी पूर्वी हिस्से से गुजर रही है। 10 मई से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। मौसम विभाग की मानें तो 2 दिन तक कुछ जिलों में बारिश और आंधी चलने के आसार हैं। वहीं, 10 और 11 मई को पूरे प्रदेश में गर्मी पड़ेगी।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से दिल्ली में बैठक, समसामयिक मुद्दों पर हुई चर्चा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से दिल्ली में बैठक, समसामयिक मुद्दों पर हुई चर्चा

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है।

    मध्यप्रदेश में इन दिनों निगम मंडलों, प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर चल रहा है और प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार की भी संभावना जताई जा रही है। इधर राज्य सरकार का ढाई वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो रहा है। ऐसे में मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा का कार्यक्रम निर्धारित किया जा रहा है। ऐसी राजनैतिक गहमागहमी के बीच सीएम मोहन यादव के दिल्ली दौरे से भोपाल में खासतौर पर सत्ताधारी पार्टी में हलचलें तेज हो गई हैं।

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में सीएम मोहन यादव का ट्वीट

    आज नई दिल्ली में @BJP4Indi के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin जी से सौजन्य भेंट की।

    इससे पहले सीएम मोहन यादव गुरुवार को मध्य प्रदेश के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल सिंह पटेल की शादी में सम्मिलित होने आंध्रप्रदेश के प्रसिद्ध देवस्थान तिरुपति पहुंचे थे। उन्होंने वर-वधु को आशीर्वाद दिया।

    प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित

    बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है।

    मंत्रियों को अपने विभाग और अपने प्रभार के जिले की उपलब्धियां, नवाचार, आगे की कार्य योजना तथा चुनौतियों के बारे में जानकारी देनी होगी

    सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी। इसमें मंत्रियों को अपने विभाग और अपने प्रभार के जिले की उपलब्धियां, नवाचार, आगे की कार्य योजना तथा चुनौतियों के बारे में जानकारी देनी होगी। विभागों के एसीएस, पीएस और सचिवों की भी इस दौरान कड़ी परीक्षा होगी।