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  • चीन दौरे के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- होर्मुज को लेकर जिनपिंग ने दे दी सहमति

    चीन दौरे के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- होर्मुज को लेकर जिनपिंग ने दे दी सहमति

    बीजिंग 

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे से लौटने के बाद बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मानते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी है। 

    तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ ईरान, ताइवान और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लंबी चर्चा की. ट्रंप के मुताबिक, "शी ने बहुत मजबूती से कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं होना चाहिए. वह यह भी चाहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे। 

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल कर रहा है और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान को पिछले ढाई हफ्तों में हर दिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, "अगर ईरान स्ट्रेट बंद करता है तो उसका नुकसान उसी को होगा. वहां पूरी तरह अमेरिका का नियंत्रण है। 

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस क्षेत्र में लगातार खतरा बना हुआ है। 

    ताइवान पर 
    ट्रंप ने ताइवान मुद्दे पर भी बातचीत का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ताइवान की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश के खिलाफ हैं और इसे बड़ा टकराव मानते हैं. ट्रंप ने कहा, "शी नहीं चाहते कि ताइवान को लेकर कोई लड़ाई हो. उनका मानना है कि इससे बहुत बड़ा संघर्ष पैदा हो सकता है। "

    हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन शी जिनपिंग ने 1982 के अमेरिका-चीन समझौते और ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा उठाया. ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच ताइवान पर "बहुत विस्तार से" चर्चा हुई। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका किसी नए युद्ध में नहीं उलझना चाहता. ट्रंप ने कहा, "आखिरी चीज जिसकी हमें जरूरत है, वह 9500 मील दूर एक और युद्ध है। 

    ट्रंप ने चीन यात्रा को "बेहद शानदार" बताया और शी जिनपिंग को "अविश्वसनीय नेता" कहा. उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर अच्छी समझ बनी है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। 

  • तेल की कीमतों पर खतरे की घंटी! पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हो सकती है भारी बढ़ोतरी

    तेल की कीमतों पर खतरे की घंटी! पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हो सकती है भारी बढ़ोतरी

     नई दिल्‍ली

    शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, लेकिन ये सिलसिला अब आगे भी जारी रह सकता है. पेट्रोल और डीजल के दाम को लेकर एक्‍सपर्ट्स बड़ी चेतावनी दे दी है. अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहत हैं तो अगले 3 से 4 महीनों में ईंधन की कीमतें बढ़ती रह सकती हैं। 

    यह वॉर्निंग ऐसे समय में आई है, जब वेस्‍ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में रुकावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 110 डॉलर प्रति बैर के करीब पहुंच गईं। 

    भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 4 साल में पहली बार 15 मई को बढ़ोतरी की गई, क्‍योंकि कच्‍चे तेल की बढ़ती लागत के कारण सरकार तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों (OMC) पर दबाव बढ़ा जा रहा था. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो हालिया बढ़़ोतरी से तेल और अन्‍य कारोबारी कंपनियों को हो रहे नुकसान की आंशिक तौर से भरपाई हो पाएगी। 

    क्‍यों 3 से 4 महीने तक बढ़ोतरी रह सकती है जारी? 
    मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर गुरमीत सिंह चावला ने इंडिया टुडे डॉट इन को बताया कि ईंधन की कीमतों में संशोधन कुछ हद तक अपेक्षित था क्योंकि तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियां हाई एनर्जी प्राइस को वहन करते हुए अपनी सीमाओं को बढ़ा रही हैं। 

    उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है, ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90-100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर बनी रहती है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। 

    फ्यूल प्राइस में कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? 
    चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट ने भी कहा कि मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को केवल आंशिक राहत ही मिलती है. इंडिया टुडे को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीर तक की मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी स्‍वामित्‍व वाली तेल और डीजल कंपनियों पर पड़ रहे मुनाफे के दबाव से कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन मौजूदा घाटे की भरपाई की मात्रा काफी ज्‍यादा बनी हुई है। 

    पोपट के अनुसार, ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों के कुल सालाना EBITDA में लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि हालिया बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को सालाना करीब 45,000-48,000 करोड़ रुपये की कमाई का लाभ मिल सकता है. हालांकि, पोपट ने चेतावनी दी कि अगर ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो और ज्‍यादा प्राइस बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। 

    नुकसान की भरपाई के लिए कितने रुपये की बढ़ोतरी संभव 
    उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, अगर ग्‍लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की गतिविधियों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। 

    तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव 
    पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है, जबतक की रिटेल फ्यूल की कीमतों में और बदलाव नहीं किया जाता है। 

    इकोनॉमिस्‍ट ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी धीरे-धीरे महंगाई और घरेलू बजट पर असर डाल सकती है, क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों में परिवहन और रसद की लागत बढ़ जाएगी. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

  • होशियारपुर में सफल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन, बोरवेल में गिरा मासूम 9 घंटे बाद सुरक्षित बचाया गया

    होशियारपुर में सफल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन, बोरवेल में गिरा मासूम 9 घंटे बाद सुरक्षित बचाया गया

    होशियारपुर

    पंजाब के होशियारपुर-दसूहा सड़क पर स्थित स्थानीय गांव चक समाना में एक चार साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया था. जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया था. सूचना लगते ही NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए. जिसके बाद स्थानीय निवासियों की संयुक्त से चलाए गए अभियान के 9 घंटे बाद बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया. बच्चे के पिता की पहचान हरिंदर और मां आशा के रूप में हुई है। 

    ऐसे किया गया बच्चे का रेस्क्यू
    जानकारी के अनुसार बच्चे को रात करीब 12:40 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और मेडिकल जांच के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया. डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और SSP संदीप कुमार मलिक ने इस अभियान का नेतृत्व किया और टीमों की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की, जिसके कारण यह अभियान पूरी तरह सफल रहा. अभियान की सफलता के बाद डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने बताया कि बचाए जाने के बाद बच्चे को एक मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस में आगे की जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने बताया कि यह घटना शाम करीब 4:00 बजे हुई थी और सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। 

    बच्चा अपने घर के पास स्थित एक खुले बोरवेल में फिसल गया था, जिसे एक दिन पहले खोदा गया था. 25 से 30 फीट की गहराई तक एक समानांतर गड्ढा खोदने के बाद बचाव दल ने एक संकरी सुरंग के रास्ते बोरवेल के शाफ्ट तक पहुंच बनाई. जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. लड़का करीब 30 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए मौके पर आवश्यक मशीनरी मंगवाई गई थी. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने शाफ्ट में एक कैमरा और ऑक्सीजन पाइप भी नीचे उतारा था और फुटेज में बच्चे की हलचल दिखाई दे रही थी. जिससे टीम को बोरवेल के अंदर की हर गतिविधि की जानकारी मिलती रही थी। 

    रेस्क्यू अभियान के दौरान मौजूद थे बड़ी संख्या में अधिकारी
    डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि 40 से अधिक अधिकारियों वाली NDRF की टीम ने इस कठिन समय के दौरान अपनी विशेषज्ञता से इस अभियान में अमूल्य सहयोग दिया. इस बीच, पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और होशियारपुर के सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, जो पूरे ऑपरेशन के दौरान मौके पर मौजूद रहे, ने गुरकरन को बचाने के लिए सभी टीमों द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की सराहना की. डॉ. रवजोत ने बताया कि ज़िला प्रशासन ने NDRF, अन्य टीमों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए थे। 

    सांसद डॉ. चब्बेवाल ने कहा कि यह एक बहुत ही संवेदनशील बचाव अभियान था. लेकिन टीमों के लगातार प्रयासों से लगभग सात घंटे की मशक्कत के बाद यह सफल हो पाया. SSP संदीप कुमार मलिक ने भी बच्चे की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए बचाव टीमों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि टीमों का जज़्बा बेहद सराहनीय था, जिसकी बदौलत गुरकरन की जान बचाई जा सकी। 

  • किसान कल्याण वर्ष में सरकार का बड़ा फोकस, उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने की योजना

    किसान कल्याण वर्ष में सरकार का बड़ा फोकस, उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने की योजना

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में कृषि एवं उससे जुड़ी संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक कार्य योजना पर अमल जारी हे। कृषि वर्ष में विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में एक लाख 32 हजार 147 हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हमारा उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती के साथ अधिक लाभकारी उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करना है।

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार फल फसलों के क्षेत्र में 18 हजार हैक्टेयर, सब्जी उत्पादन में 54 हजार हैक्टेयर, मसाला फसलों में 56 हजार हैक्टेयर, पुष्प उत्पादन में 3 हजार 500 हैक्टेयर, औषधीय फसलों में 600 हैक्टेयर तथा संरक्षित खेती में 47 हैक्टेयर क्षेत्र वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बदलते कृषि परिदृश्य में उद्यानिकी फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष की अवधारणा को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन तथा उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया है। शासन की मंशा है कि खेती को बहुआयामी बनाकर किसानों को वर्षभर आय सृजन के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी दिशा में उद्यानिकी विभाग किसानों को उन्नत पौध सामग्री, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, पॉली हाउस, शेडनेट तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहा है।

    प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र की लगातार बढ़ती सफलता इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है। वर्ष 2022-23 में मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का कुल क्षेत्रफल 25 लाख 96 हजार 793 हैक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28 लाख 60 हजार 952 हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसी प्रकार उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में लगभग 37 लाख 68 हजार 200 मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की बढ़ती जागरूकता, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश की भौगोलिक विविधता और अनुकूल जलवायु उद्यानिकी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और चंबल क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के फल, सब्जी और मसाला फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में आम, संतरा, अमरूद, पपीता, टमाटर, प्याज, लहसुन, धनिया और मिर्च जैसी फसलों की खेती किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

    केंद्र और राज्य की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से प्रदेश में उद्यानिकी आधारित कृषि मॉडल को मजबूत आधार मिल रहा है। किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने के प्रयास भी तेज किए गए हैं, ताकि उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

    कृषि वर्ष 2026 के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार का यह अभियान केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह प्रयास मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी उद्यानिकी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • अब सफर होगा आसान! हाइवे पर हर 25 किमी में चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य, बाजारों-कॉलोनियों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं

    अब सफर होगा आसान! हाइवे पर हर 25 किमी में चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य, बाजारों-कॉलोनियों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहन मालिकों को चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984’ में संशोधन कर शहरों और कस्बों के भीतर भी ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने का रास्ता साफ कर दिया है।

    नए नियम के तहत अब कॉलोनियों, बाजारों, जिला केंद्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों पर मोबाइल टावरों की तर्ज पर चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क विकसित किया जा सकेगा। इसके साथ ही पहली बार बैटरी स्वैपिंग और इन-बिल्डिंग मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नियमों में शामिल किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होने से ईवी खरीदने वालों का भरोसा बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता कम होगी।

    पार्किंग का 20% हिस्सा ईवी के लिए आरक्षित
    सरकार ने स्टैंडअलोन चार्जिंग स्टेशन के लिए अलग मानक तय किए हैं। नियमों के ! मुताबिक कुल पार्किंग क्षमता के कम से कम 20% हिस्से को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आरक्षित मानते हुए चार्जिंग पॉइंट विकसित करने होंगे। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के पास भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्थान आरक्षित किया जाएगा। चार्जिंग सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और बिजली की मीटरिंग का जिम्मा सर्विस प्रोवाइडर पर होगा।

    इन इलाकों में खुल सकेंगे चार्जिंग स्टेशन
    संशोधित नियमों के तहत शहरी सीमा के भीतर कई नई श्रेणियों में चार्जिंग स्टेशन खोलने की अनुमति दी गई है। इनमें रिहायशी कॉलोनियां, औद्योगिक क्षेत्र, बाजार एवं कमर्शियल जोन, जिला एवं सामुदायिक केंद्र, मुख्य और प्रस्तावित सड़कें, माल परिवहन कॉम्प्लेक्स के साथ ही होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट परिसर जैसी जगहें शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि चार्जिंग सुविधा लोगों के घर और कार्यस्थल के करीब होगी तो ईवी का उपयोग तेजी से बढ़ेगा।

    हर 100 किमी पर लगेंगे फास्ट चार्जिंग स्टेशन
    नई नीति में दूरी के स्पष्ट मानक भी तय किए गए हैं। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दोनों ओर हर 25 किलोमीटर में एक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किया जाएगा। भारी वाहनों और लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक कारों के लिए हर 100 किलोमीटर में फास्ट चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य होंगे। स्टेशनों पर बैटरी स्वैपिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वाहन चालक मिनटों में बैटरी बदलकर आगे बढ़ सकें।

  • ट्रंप बनाम बाइडन,चीन यात्रा के बाद अमेरिका की नीतियों और वैश्विक संबंधों पर नया विवाद

    ट्रंप बनाम बाइडन,चीन यात्रा के बाद अमेरिका की नीतियों और वैश्विक संबंधों पर नया विवाद

     नई दिल्ली

     अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपनी बीजिंग यात्रा के आखिरी दिन यह दावा किया कि चीनी नेता शी चिनफिंग ने उन्हें कई शानदार सफलताओं पर बधाई दी है। ट्रंप ने कहा कि जब चिनफिंग ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को शायद एक पतनशील राष्ट्र बताया, तो उनका यह इशारा ट्रंप से पहले की जो बाइडन सरकार की तरफ था।

    यह स्पष्ट नहीं था कि ट्रंप चिनफिंग की किसी बंद कमरे में हुई बातचीत का हवाला दे रहे थे या उनके थ्यूसीडाइड्स ट्रैप वाले बयान का। यात्रा के पहले दिन शी चिनफिंग ने कहा था कि अमेरिका-चीन संबंधों को स्थिर करना सिर्फ दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है।

    थ्यूसीडाइड्स ट्रैप का जिक्र
    हालांकि, शी चिनफिंग ने सार्वजनिक तौर पर पतनशील राष्ट्र शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया था कि क्या दोनों महाशक्तियां थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकती हैं। यह एक ऐसा राजनीतिक सिद्धांत है जो बताता है कि एक उभरती हुई शक्ति और पहले से स्थापित महाशक्ति के बीच युद्ध होना तय होता है।

    सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पतन के बारे में शी चिनफिंग का आकलन 100% सही था। ट्रंप के अनुसार, बाइडन प्रशासन की इमिग्रेशन, जेंडर इक्वेलिटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण देश को अपार नुकसान उठाना पड़ा है।

    ट्रंप ने लिखा, "जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को एक पतनशील राष्ट्र कहा, तो वह स्लीपी जो बाइडन और बाइडन प्रशासन के उन चार सालों के दौरान हुए भयानक नुकसान का जिक्र कर रहे थे। इस मामले में वह पूरी तरह सही थे।"

    उन्होंने आगे कहा कि खुली सीमाओं, भारी टैक्स, हर किसी के लिए ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी, विविधता, समानता और समावेश, खराब व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध के कारण हमारे देश को बहुत नुकसान हुआ।

    ट्रंप ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
    ईरान और ताइवान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारी मतभेदों के बावजूद अमेरिकी नेता ने दावा किया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच संबंध अच्छे हैं और लगातार बेहतर हो रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल के 16 शानदार महीनों के दौरान अमेरिका ने अविश्वसनीय प्रगति की है।

    उन्होंने शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर, अपनी कथित सैन्य जीत, मजबूत जॉब मार्केट और निवेश के नए वादों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका के पुनरुत्थान का संकेत बताया। ट्रंप ने लिखा कि राष्ट्रपति शी का इशारा अमेरिका की उस अविश्वसनीय प्रगति की ओर नहीं था जो ट्रंप प्रशासन के 16 शानदार महीनों में दुनिया ने देखी है। उन्होंने वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंधों, ईरान के सैन्य पतन और अमेरिका में बाहरी लोगों द्वारा 18 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड निवेश का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने यह भी दावा किया कि शी चिनफिंग ने इतने कम समय में मिली इन शानदार सफलताओं के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि दो साल पहले अमेरिका वास्तव में पतन की ओर था, लेकिन अब यह दुनिया का सबसे हॉट देश है।

    क्या है जमीनी हकीकत?
    हालांकि, अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर ट्रंप का यह सकारात्मक रवैया दोनों देशों के बीच मौजूद कई कड़वी सच्चाइयों से मेल नहीं खाता है। ईरान में चल रहे संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका ने चीन से अधिक भागीदारी की अपील की है, लेकिन बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर इसमें बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। भले ही ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के सीन हैनिटी को दिए इंटरव्यू में दावा किया हो कि शी चिनफिंग ने मदद की पेशकश की थी।

    इसके अलावा, वाइट हाउस का मानना है कि मेक्सिको में जाने वाले चीनी रसायनों को रोकने के लिए चीन को अभी और कदम उठाने चाहिए, जिनका इस्तेमाल अवैध फेंटानिल ड्रग बनाने में होता है। इस ड्रग्स की वजह से अमेरिका के कई समुदाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

  • NEET UG 2026 अपडेट: कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा पर सरकार का फैसला, पारदर्शिता पर जोर

    NEET UG 2026 अपडेट: कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा पर सरकार का फैसला, पारदर्शिता पर जोर

    नई दिल्ली

    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अब पुनर्परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है. एजेंसी के अनुसार, परीक्षा अब 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए NTA ने कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है. साथ ही अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की गई है कि वे किसी भी जानकारी के लिए केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें.

    OMR शीट की जगह ऑनलाइन होगी परीक्षा
    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया के आगे कई बातें साफ कीं. सबसे पहले उन्होंने बताया कि पेपर लीक के इस प्रकरण को देखते हुए अगले साल से NEET  की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड और ऑनलाइन होगी. ओएमआर शीट की जगह छात्रों को कंप्यूटर के सामने बैठाया जाएगा जिससे पारदर्शिता रहे.

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा-  एनटीए ने NEET UG की नई तारीख की घोषणा कर दी है. 21 जून को पुनर्परीक्षा होगी. हमारी प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है. उन्होंने कहा- इससे पहले 3 मई को परीक्षा हुई थी और 7 मई तक एनटीए के  कंपलेंट सिस्टम में कुछ चिंताएं उठाई गईं और आंतरिक जांच भी हुई.  फिर मामला संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया, जिसमें कई राज्य शामिल थे. इस केस में 12 मई तक स्थिति स्पष्ट हो गई थी.  हमें 12 मई तक पता चला कि शिक्षा माफियाओं के माध्यम से गेस पेपर जारी हुए थे जो परीक्षा में आए पेपर से मेल खा रहे थे.

    21 जून को रि-एग्जाम, 14 जून को एडमिट कार्ड
    उन्होंने आगे कहा- हम छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं करना चाहते. इसलिए हमने परीक्षा के लिए नई तारीख 21 जून तय की है . इसके लिए 14 जून को एडमिट कार्ड जारी हो जाएंगे. अनियमितताओं के प्रति हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति है. सीबीआई की कार्रवाई और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ लड़ाई शुरू हो चुकी है

    'किसी माफिया को नहीं छीनने देंगे सीट'
    उन्होंने कहा- राधाकृष्ण समिति की सिफारिशों का पालन करने के बावजूद यह उल्लंघन कैसे हुआ? ऐसे में सरकारी मशीनरी यह सुनिश्चित करेगी कि इस बार कोई अनियमितता न हो. हम किसी भी माफिया को पैसों के बल पर आपकी सीट छीनने नहीं देंगे. मंत्री के रूप में, अभिभावक के रूप में, अधिकारी के रूप में – हमें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा. हमें सुधारों के लिए कई सुझाव मिले हैं.

    'री-एग्जाम के लिए कोई फीस नहीं, सेंटर भी पसंद का'
    प्रधान ने कहा-  एनटीए का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हुआ था और वह बहुत ही सक्षम नेतृत्व में है. प्रत्येक वर्ष 1 करोड़ उम्मीदवार एनटीए परीक्षाओं में शामिल होते हैं. एनईईटी परीक्षा रद्द होने के दिन एनटीए ने दो निर्णय लिए- सबसे पहले तो एनईटी स्नातक परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा, दूसरा पुनर्परीक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसको लेकर एनटीए शाम तक एक और सूचना जारी करेगा.

    उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों को री- एग्जाम में शामिल होने के लिए अपनी पसंद का शहर चुनने का अवसर मिलेगा. इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा. ओएमआर शीट में छात्रों का विवरण भरने के लिए 15 मिनट एक्सट्रा दिए जाएंगे.

    'अफवाहों पर विश्वास न करें छात्र'
    प्रधान ने कहा कि इसके अलावा मैं उम्मीदवारों के परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से बात करूंगा. चुंकी जून की परीक्षा में मानसून रहेगा, हम खराब मौसम के प्रभाव पर विचार कर रहे हैं. छात्रों से अपील है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें. आखिर में प्रधान ने कहा- पूरे केस में सीबीआई गहन जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
     

  • ग्लोबल सिनेमा में दिखेगा मध्यप्रदेश का दम, CM मोहन यादव की नई पहल से बढ़ी उम्मीदें

    ग्लोबल सिनेमा में दिखेगा मध्यप्रदेश का दम, CM मोहन यादव की नई पहल से बढ़ी उम्मीदें

    भोपाल 
     मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन और समृद्ध सांस्कृतिक वैभव को अब वैश्विक मंच पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी विजन और नेतृत्व में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश तेजी से एक 'ग्लोबल फिल्मिंग हब' के रूप में स्थापित हो रहा है। इसी कड़ी में स्पेन के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘कलर्स कम्युनिकेशन ग्रुप’ द्वारा निर्मित अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन सीरीज़ "रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड" की शूटिंग प्रदेश के विभिन्न पर्यटन अंचलों में हुई। इस गौरवशाली पहल से मध्यप्रदेश की अनूठी जीवन शैली और पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन दुनिया के 80 से अधिक देशों में किया जाएगा, जिससे राज्य की पर्यटन संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी।

    सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया की जनजातीय परंपरा का हुआ फिल्मांकन
    अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत छिंदवाड़ा जिले की नैसर्गिक सुंदरता और यहां की जीवंत जनजातीय संस्कृति ने स्पेनिश फिल्म क्रू को गहराई से प्रभावित किया है। टीम ने जिले के सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया क्षेत्र में प्रवास कर ग्रामीण जीवन, स्थानीय परंपराओं और पातालकोट की विशिष्ट जीवन शैली को कैमरे में कैद किया। विशेष रूप से पातालकोट में संपन्न जनजातीय विवाह की पारंपरिक रस्मों और प्राकृतिक सौंदर्य का फिल्मांकन किया गया है। स्पेनिश डायरेक्टर जुआन फ्रूटोस ने धूसावानी होमस्टे में मिले आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यदि कोई वास्तविक भारत की जड़ों को जानना चाहता है, तो उसे मध्यप्रदेश के इन गांवों का अनुभव अवश्य लेना चाहिए।

    स्पेन में हुए एमओयू के मिल रहे सुखद परिणाम

    यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इसी वर्ष जनवरी-2026 में स्पेन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मेले 'FITUR मैड्रिड 2026' के दौरान हुए रणनीतिक समझौतों और एमओयू (MoU) का सुखद परिणाम है। पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. और अपर प्रबंध संचालक अभय अरविंद बेडेकर के मार्गदर्शन में प्रदेश को एक 'फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन' के रूप में वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस सीरीज़ में न केवल ग्रामीण संस्कृति, बल्कि सांची स्तूप, भीमबेटका की गुफाएं, सतपुड़ा नेशनल पार्क और उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों को भी शामिल किया गया है, जो प्रदेश के बहुआयामी पर्यटन वैभव को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगी।

    मध्यप्रदेश बनेगा ग्लोबल फिल्मिंग हब
    इस वैश्विक पहल से न केवल मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, होमस्टे और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी भारी प्रोत्साहन मिलेगा। कलेक्टर छिंदवाड़ा श्री हरेंद्र नारायन एवं जिला प्रशासन के समन्वय से संपन्न हुई यह शूटिंग राज्य को विश्व सिनेमा के मानचित्र पर एक जीवंत और सांस्कृतिक कैनवास के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

    मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति, लॉजिस्टिक सहयोग, सुरक्षा व्यवस्था और ऑन-ग्राउंड समन्वय उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल राज्य को “फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज़ और अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स के लिए प्रदेश लगातार पसंदीदा लोकेशन बन रहा है। इससे न केवल राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश आज केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि विश्व सिनेमा के लिए प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और अनुभवों से भरा एक जीवंत कैनवास बन चुका है।

  • बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: मुख्यमंत्री समाधान योजना से आसान किस्तों में होगा भुगतान

    बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: मुख्यमंत्री समाधान योजना से आसान किस्तों में होगा भुगतान

    विशेष लेख 

    मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026

    आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, आसान हुआ पुराने बिजली बिलों का भुगतान

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक राहत पहल है। इसके तहत पुराने बकाये पर सरचार्ज में  छूट मिल रही है। बकाया बिजली बिल पर लगने वाला पूरा सरचार्ज (ब्याज) माफ या मूल बकाया राशि एकमुश्त या किस्तों में जमा करने की सुविधा। यह योजना बीपीएल, सामान्य घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को लंबे समय से लंबित बिजली बिलों के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए लाई गई है।

              मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान देने के लिए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। इसी कड़ी में शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो पुराने बकाया बिजली बिल और बढ़ते सरचार्ज के कारण आर्थिक दबाव में थे।

    क्या है मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026

    मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के पुराने और लंबित बिजली बिलों का सरल समाधान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बकाया बिजली बिलों पर लगने वाले सरचार्ज को पूरी तरह माफ किया जा रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को शेष राशि का भुगतान एकमुश्त या आसान किस्तों में करने की सुविधा भी दी गई है। पात्र श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि पर भी विशेष छूट का लाभ मिल रहा है।

    28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को मिल चुकी है राहत

    राज्य शासन के अनुसार इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपए से अधिक के सरचार्ज माफ होंगे।  यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना न केवल व्यापक स्तर पर लागू की गई है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए वास्तविक आर्थिक सहायता का माध्यम भी बनी है।

    किन उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ

    इस योजना का लाभ मुख्य रूप से बीपीएल परिवारों, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल लंबे समय से बकाया हैं और जो एकमुश्त भुगतान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वे इस योजना के माध्यम से अपने बकाया का समाधान कर सकते हैं।

    योजना से होने वाले प्रमुख फायदे

    सरचार्ज की पूरी माफी, पुराने बकाया बिलों पर लगने वाला सरचार्ज अक्सर मूल राशि से भी अधिक हो जाता है। इस योजना के तहत सरचार्ज की पूर्ण माफी से उपभोक्ताओं को तत्काल बड़ी राहत मिलती है।

    आसान किस्तों में भुगतान

            बड़ी राशि एक साथ जमा करने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। उपभोक्ता अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। घरेलू बजट पर कम दबाव और सरचार्ज माफी और किस्त सुविधा से परिवारों को अपने मासिक खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलती है।

    बिजली विच्छेदन का खतरा कम

             बकाया राशि के कारण बिजली कटने की आशंका रहती है। योजना का लाभ लेने से उपभोक्ता नियमित भुगतान व्यवस्था में लौट सकते हैं। इससे किसानों को सीधा लाभ हो रहा है। कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के बोझ से राहत मिलती है, जिससे सिंचाई और खेती का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सकता है।

    मानसिक तनाव से राहत

            लंबित बिलों की चिंता से मुक्ति मिलने पर परिवार आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। जो उपभोक्ता लंबे समय से भुगतान नहीं कर पा रहे थे, उन्हें फिर से नियमित भुगतान प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है।

    योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें

           योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1912 पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देशों के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है।

    योजना की अवधि

            मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं से समय रहते योजना का लाभ लेने की अपील की है।

    जनहित और सुशासन का प्रभावी उदाहरण

            मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच का उदाहरण है। यह योजना केवल बकाया बिलों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को आर्थिक राहत, मानसिक संतोष और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का अवसर भी प्रदान करती है।

            मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जो पुराने बिजली बिलों के बोझ से परेशान हैं। सरचार्ज माफी, मूल राशि पर छूट और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं इसे एक प्रभावी और जनहितकारी योजना बनाती हैं। यह योजना आम नागरिकों को राहत देने के साथ-साथ उन्हें नियमित भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेशवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिलों का समाधान करें और आर्थिक राहत प्राप्त करें।

    * धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

    * सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक

  • लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश

    लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश

    लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिला ‘एग्जेम्प्लर’ अवार्ड

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बना अनुकरणीय राज्य

    लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश

    नई दिल्ली/लखनऊ
    लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने देश में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स – लीड्स (LEADS) 2025* रैंकिंग में लैंडलॉक्ड राज्यों में सर्वोच्च “एग्जेम्प्लर (Exemplar)” पुरस्कार प्राप्त किया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का सर्वश्रेष्ठ एवं अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाला लैंडलॉक्ड (चारों ओर भूमि से घिरा) राज्य बनकर उभरा है। पिछले तीन साल (2022 से 2024) तक लगातार “अचीवर” रहने के बाद, इस साल शीर्ष पायदान पर राज्य की यह छलांग यहां के बेहतरीन कनेक्टिविटी नेटवर्क और प्रभावी नीतिगत सुधारों का सीधा परिणाम है।

    यह सम्मान बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित लीड्स 2025 रिपोर्ट एवं LEAPS (Logistics Excellence, Advancements & Performance Shield) 2025 पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया गया। उत्तर प्रदेश की ओर से यह पुरस्कार इन्वेस्ट यूपी के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शशांक चौधरी ने प्राप्त किया।

    वर्ष 2018 में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईटी) द्वारा शुरू की गई ‘लीड्स' पहल राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रीय बेंचमार्किंग फ्रेमवर्क है। इस रैंकिंग में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाएं, नियामकीय व्यवस्था तथा परिचालन दक्षता जैसे महत्वपूर्ण मानकों का मूल्यांकन किया जाता है।

    इन्वेस्ट यूपी के एसीईओ ने इस सफलता पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राज्य की 'वन ट्रिलियन डॉलर' अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाया गया है। 'उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022' के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुआ है।

    राज्य सरकार ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप सिटी लॉजिस्टिक्स मास्टर प्लान विकसित किए हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत एवं कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार करना है। इन पहलों से परिवहन लागत में कमी, अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन दक्षता में सुधार सुनिश्चित हो रहा है।

    उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग सुविधाओं, ग्रामीण गोदामों और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश एवं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को बढ़ावा देकर लॉजिस्टिक्स विकास को गति दे रहा है। एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर और आगामी हवाई अड्डों के आसपास रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स पावरहाउस के रूप में उभर रहा है।